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दबनाक_प्रेम_आ_राजा_सलहेसक_न्याय.m4a

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Part 2 · VIDEHA MITHILA MAITHILI DISCUSSION CRITICISM SERIES PART 2
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  1. 0:00–0:04इस समेख्शा राजा सलहे सक लोक गातापर केंद्रित थची,
  2. 0:04–0:09जाहे में दबनाक, अटूट प्रेम, तन्त्र विद्या,
  3. 0:09–0:14आ तालुक्दारक विरुद रहुंकर न्यक विजै दिखाओल गेल अच्छे.
  4. 0:14–0:19तक खताक न्यक लोक छवी बहुत नीक चका स्तापित अच्छी,
  5. 0:19–0:27मुदा दबनाक प्रती हुनकर भावनात्मक विकासक छित्रन केन औरो गेहर बनेवाक एक तपहेग अवसर अची.
  6. 0:27–0:36राद, एक दम सही कहलो हूँ, मने आरंभ में सलहेस मुनक राजा चती आद दबनाक प्रेम के पुरा तरह से अंदेक्हा कराओल चती.
  7. 0:36–0:41उनकर सम्पूरन द्यान आपन प्रजापर आची जे एक तनीक बाथ चे
  8. 0:41–0:47मुदा आयक में जे गेहर कमी आची से आची सलहे सक हिर्दे परवर्टन
  9. 0:47–0:50जे अद्याय च्हाँ में आचानक सबा जाएत ची
  10. 0:50–0:52उब बहत आप रत्याषित लागे तचे
  11. 0:52–1:22आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� �
  12. 1:22–1:27अनक भेल रिदेप वर्टन रूपी कमी के दूर करभाक लेल की कहल जासके तची?
  13. 1:27–1:32तएकर लेल हमर सुजाओ यए ची जे कारा वास वा समकत काल में
  14. 1:32–1:40सलहेस्क अन्तरिक द्वन्द अद्दबनाक त्याक के प्रती हुनकर बड़ाईत अनुभूती के कताक के गद्दिग में विस्तार दियोक.
  15. 1:40–1:47माने सलहेस्के अपन भूल्वा दबनाक महत्वक के बूज्बाक एक्ता क्रमिक प्रक्रिया क्रुए देख्वल जाईने?
  16. 1:47–1:54आईक्दम आईकर लेल किछू तोस उदारन से हो अची जे गद्द में जोडल जासके तची
  17. 1:54–2:02जैना जेल में रहित काल सलहेस के अपन एका की पनक भोद हे बाक एक तची जोडल जासके तची
  18. 2:02–2:10अहो, जाही में उ दबनाक, बाराबरक, तपस्या, अवकर आचर बनबाक, महत्वक, गेराई समबुजे चती.
  19. 2:10–2:15आई, जैना सोचुना, उ अन्दार कोटरी में चती, जते कोई नहीं अची,
  20. 2:15–2:21जते इसदिक्हन प्रजासंगेरायल रोबाक अब्यस्त राजा आई नितान्त इक्सर चती,
  21. 2:21–2:26तक्हन हुनका अबहास होए चनीजे, जे प्रेम हुनका भेटल चल,
  22. 2:26–2:28उक्रा उ अग्यान्ता वष्थूक्रा दिलनी.
  23. 2:28–2:32इता मोन मे एक ता गहीड करूना जगे बाक सामरत्त रख है तची
  24. 2:32–2:36जकन उ बहुत्तिक रूप सब सब शब भेशी लाचार चती
  25. 2:36–2:39तकन उ उनका प्रेम विषक्तिक भान बहान बहुर अहे लची
  26. 2:39–2:42अकुन उ दूसर थोस उदारन से हो चे की
  27. 2:42–3:12आप यह उद्वाँ ताब बाज़ा दर्बारक सुजा अगा उगा नीचा देखाओजाई ताज़ाई ताज़ाई ताज़ाई ताज़ाई ताज़ाई ताज़ाई ताज़ाई ताज़ाई ताज़ाई ताज़ाई ताज़ाई ताज़ाई ताज़ाई ताज़ाई ताज़ा�
  28. 3:12–3:21बूजलूना तकन जे अद्याय च्हूम मे भीाहुएद से एक दम सवाभाविक, सन्तोज जनक अ बहावनात्मक रूप से पूड लागत.
  29. 3:21–3:25तई ये बहुत नीक बात भेल आब आगु बड़च्छी
  30. 3:25–3:29तदोसर काज इजे चरित्रक बहावना कच्तापित करवाक संगे
  31. 3:29–3:33उभावना के चरमोद कर्ष दरी लोजे बाग जे गती आची
  32. 3:33–3:36ताही पर द्यान देव सो हो उत्बे आवश्षक अची
  33. 3:36–3:39एक दम, मैंने खलनायक के संगे भेल संगर्ष
  34. 3:39–3:42कता के रूमान चक्त बनवे तची
  35. 3:42–4:12तब आप द़ब प्रद़ाद बादाद बादाद बादाद बादाद बादाद बादाद बादाद बादाद बादाद बादाद बादाद बादाद बादाद बादाद बादाद बादाद बादाद बादाद बादाद बादाद बादाद बादाद बादाद बादाद बादा
  36. 4:12–4:16रहास्या और सुस्पैंस का कमी रही जाई तची
  37. 4:16–4:19पात्धक मोन में बहे उत्पन लेबा से पहीने
  38. 4:19–4:22इस्तिती नियंट्रन में आबी जाई तची
  39. 4:22–4:25यी तच, कुनो आहन जासुसी कता जका भेल
  40. 4:25–4:29जासुस दोस्रे पन्नापर अप्रादिक सुईकारुक्ती पडिलेता ची
  41. 4:29–4:32जर रहासे खुजिये जाए, ता आगु पडिवा की अचित ते
  42. 4:32–4:34एक दम सतीख कहला हूं
  43. 4:34–4:37ता एक्रा थीख करबाक लेल आहा की सुजाव अची
  44. 4:37–4:40ता एक्रा लेल हमर सुजाव इए ची
  45. 4:40–4:43जगिसे सलहेस के लेल परिस्तिती आरो विशम भुजाए,
  46. 4:43–4:47और पाट्खा के लागे जे आब सलहेस का कोनु उपाय नहीं।
  47. 4:47–4:50आप, जखन भूतिक जगत तक उपाय समाप्त बूजाए,
  48. 4:50–4:53तकने जादूई शक्तिक प्रवेष नीक लागे तची.
  49. 4:53–4:57अर पाट्खा के लागे जे आब सलहेस का कोनु उपाय नहीं चनी?
  50. 4:57–5:04आँ, जखन भूटिक जगत तक उपाय समाप्त बहुजाए, तकने जादूई शक्तिक प्रवेश नीक लागे तची.
  51. 5:04–5:07तन्त्र विद्याक प्रभाव तकने चमत्कारिक लागे तची
  52. 5:07–5:11जगन मानविय न्याय प्रनाली पुरन रूपेंड भिफल भजाए
  53. 5:11–5:15ता एकर कोनो तोस उदारन दीजाई
  54. 5:15–5:18जाही सा लेक्हक आई गती के मन्तर का सकती
  55. 5:18–5:23देखू, एकर तोस उदारन, कताक लेल एब हूसके तची,
  56. 5:23–5:31जे राजाक दरबार में सलहेस के विरुद जूत्थाप्रमान प्रस्तूत करवाक एक ता विस्त्रत द्रिष्च लिकल जाए.
  57. 5:31–5:36उख़ार्द बाद सूने का दर्बारक ख्रोदख विस्तारस चित्रन हो.
  58. 5:36–5:41आप एक दम सलहेस शान्त भाँसा अन्याय सहिच्छति
  59. 5:41–5:47आजकन हुनका पर म्रित्तु दन्ड वाखकतोर सजाक खत्राम प्राय लगे तची.
  60. 5:47–5:51आप पाथक वन में इच्टपता टबजाए,
  61. 5:51–6:21भूड़़ बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बा
  62. 6:21–6:27कत्हाक वरननात्मक्शेली, जिक्रा द्रिष्य सामगरीक संगे आरो नीजजका जोडल जासकताची.
  63. 6:27–6:32पात्ह में चित्रक संदर भ्देप एक ता विष्ट शेली आच्छ,
  64. 6:32–6:40मुदा इद्रिश्य सामगरी अगद्यक वरननात्मक शैलिक भीच कताल मेल के आरो निकर केल जासके तच्छ
  65. 6:40–6:46तव आई लो गथा मे चित्र एक वड चित्र दू आदीके जे प्रयों केल गेल अच्छी
  66. 6:46–6:51सि कत्ठा के आगुत बडवगग तछ, मुदा आई में कमी की आच्छे
  67. 6:51–6:55आई में कमी इए आच्छी, जे कत्ठा चित्र के इंगित कर अच्छ,
  68. 6:55–7:01मुदा गद्ये में उही चित्रक सांगीतिक वद्द्रिष्खत वरननक सरवता अबहावच,
  69. 7:01–7:04इमात्र गधनाक विवरन जका लागागी तच.
  70. 7:04–7:07माने, इस कोनो चल चित्र देखवाजका अची,
  71. 7:07–7:11जटे दुखखद दिष्यमे करून संगीद बज्वांग बज्लाग में,
  72. 7:11–7:16कोनो पात्र एक्ता बोट पर दूखद द्रिष्य लिख का देखार हो?
  73. 7:16–7:17हा, एक दम.
  74. 7:17–7:22पात वातवरन निरमानक लेल पुरन रुपेन चित्र पर निरभर भुजाईताच.
  75. 7:22–7:26जना चित्र में देखल गेल वस्तूके शब्द में नहीं उतारल गेलच.
  76. 7:26–7:31आज गज कोनो पाथक के लग उचित्रन नहीं हो, वा उके वल सूनईत हो,
  77. 7:31–7:34तो उकर अनबूती तो पूरन रुपन अदूरी रही जाएत नहीं?
  78. 7:34–7:36सतिक गप.
  79. 7:36–7:40ता आई कमिक के दूर करबाकलेल हमर सुज्याओ ए अची,
  80. 7:40–7:43तो बज़ा बद्या अगार अरंग देताची
  81. 7:43–7:46वुदा गद्या उभी रंग का ताप्मान तैखाई ताची
  82. 7:46–7:49वुदा गद्या उभी रंग का ताप्मान तैखाई ताची
  83. 7:49–7:52वुदा गद्या उभी रंग का ताप्मान तैखाई ताची
  84. 7:52–8:02माने, गद्ये इत्तिक सशक्त हो बाख चाही, जे चित्र नहीं रहला पर सहिंवो, पात्ख उही द्रिष्ची के अपन बन्द आखिस से अनुबहव कर सकई.
  85. 8:02–8:10रहा, चित्र रेखा आकार औरंग देताची, मुदा गद्ये उही रंग का ताप्मान तैखगे तची.
  86. 8:10–8:19ता एक तोस उदाहरन पर जा बात करी, तकाली मंदिर मे दबनाक तंत्र सादनाक वरनन मे रंग अदोनिक विवरन जोलल जा सके ता ची.
  87. 8:19–8:25जे ना खली इई नहीं लिखु जे उदंत्र सादनाक लक वच्चित्र मे देखू.
  88. 8:25–8:29लिखु जे सिंदूरक गाड लाल रंग कोना दिखा रहल चल
  89. 8:29–8:32रहा, जिना कोनो जमलाह कोन कर रहा,
  90. 8:32–8:36रहा अत का अंदार में गुन्जेत मंत्र का दूनी कोना सुनी पडी रहल चल,
  91. 8:36–8:39जाहिसा पाथक कर अपन द़कन तीजी बहाजाए.
  92. 8:39–8:42वा एक उस्मी द्वारा अनल गेल खब्रिक कि समें
  93. 8:42–8:46उकर गब्राहत, उकर सास के गती कोना लागाई चल
  94. 8:46–8:49तकर वरनन करो. इसब छोट-छोट बात
  95. 8:49–8:52गद्यके जिवंट कराई तची.
  96. 8:52–8:55जखनो बहु चर्चित द्रिष्य बाई तची
  97. 8:55–8:57जते सलहे सक गिरुवा खोल सं
  98. 8:57–9:03नो लाख का हार कहसेथ तख हन एक ता आरो थोस उदारन भासके थख ही तख है.
  99. 9:03–9:07आा, उई दिश्य मे गेरुा रंगक विशम तक वरनन करू.
  100. 9:07–9:11मने, गेरुा रंग जे त्याग असन्यासक प्रती कची,
  101. 9:11–9:15उई रंगक वस्त्र सं एक ता भोतिक वादी हार कहसब,
  102. 9:15–9:18इक ता बहुत पएग विरोदा वास थी
  103. 9:18–9:20गद्दे में एह विरोदा वासक उबारो
  104. 9:20–9:26आप आराख खसब अजमीन पर तक्राइबाग जंकारक वरनन करू
  105. 9:26–9:29जे समपुन दर्बार में सनाथा पस्रा देता थी
  106. 9:29–9:32एही सब पात्ध अचित्र कबीच कदूरी कम वहजात्
  107. 9:32–9:35अ पात्ख क मन में सुत्ट चित्र बनी जाएत.
  108. 9:35–9:38गेर्वा रंग सहारा खसब अ उकर जनकार,
  109. 9:38–9:42इ वास्तो में एक ता बहुत शक्तिषाली द्रुष्चे निरमान करे तची.
  110. 9:42–9:43एक दम.
  111. 9:43–9:47तकन पात्ख के कोनो बाहरी चित्र का अवष्षकता न नहीं पडते.
  112. 9:47–9:50उकर मन में कुदे चित्र चले लागेत
  113. 9:50–9:52तए तीनू बिन्दु बहुत गंविर चला
  114. 9:52–9:55आप समय आची, जे हम आई समिक्षाके समेटी दी
  115. 9:55–10:00आप समशेप में कही दी, जे आई रचना में की की सुदार अपेक्षी तची
  116. 10:00–10:04जाही सव इरचना और उत्क्रिष्ट बहुसके तची
  117. 10:04–10:11तपहिल इजिस सलहेस कवन में दबनाक प्रती प्रेम करमिक विकास श्पष्ट करू
  118. 10:11–10:15जाही सव हुंकर हीदे परिवर्तन तारकिक लागे
  119. 10:15–10:27आदु सर आई चूहर मलक विश्वास कहात आओकर परदा भाशेबाक भीच कर दिश्वमे सस्पन्स बड़ाउ अन्याई प्रक्रिया के मन्तर करु जाही से तन्तरिक चरमोद कर्ष अदिक प्रभाव्शाली भूसके.
  120. 10:27–10:40अटे सर चित्रात्मक भाशाक प्रेोग करू जाही सच्ट्र अगगद्यक भीच गहीर सामनजस से बने, अपाठक बिना चित्रक से हो उही दूनी अर रंग के अनुबहव कर सके.
  121. 10:40–10:46इक्दम सही. हम रप्पून विश्वास अची जे इप परी मारजन आई रचना के एक ता �alagasthar पर लड़ायत.
  122. 10:46–10:53आ, ता हम लेखक के आमन्त्रित कराएद ची जे आई सुजाओ सब के अपुन रचना में समाहित क,
  123. 10:53–10:57सन्शोदित समग्री के पुना एही कारिक्रम में समिक्षाक लिल पठाओ.
  124. 10:57–11:00नदिक उपरी शान्ती मात्र भ्रम अची.
  125. 11:00–11:07जगन कताग भित्रू कजल्द हरा चतान सतक्राएत तकनेो आसल रूप में जिवंत बहुतत.
  126. 11:07–11:09एही गहराई के खोजित रहो.

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इस समेख्शा राजा सलहे सक लोक गातापर केंद्रित थची, जाहे में दबनाक, अटूट प्रेम, तन्त्र विद्या, आ तालुक्दारक विरुद रहुंकर न्यक विजै दिखाओल गेल अच्छे. तक खताक न्यक लोक छवी बहुत नीक चका स्तापित अच्छी, मुदा दबनाक प्रती हुनकर भावनात्मक विकासक छित्रन केन औरो गेहर बनेवाक एक तपहेग अवसर अची. राद, एक दम सही कहलो हूँ, मने आरंभ में सलहेस मुनक राजा चती आद दबनाक प्रेम के पुरा तरह से अंदेक्हा कराओल चती. उनकर सम्पूरन द्यान आपन प्रजापर आची जे एक तनीक बाथ चे मुदा आयक में जे गेहर कमी आची से आची सलहे सक हिर्दे परवर्टन जे अद्याय च्हाँ में आचानक सबा जाएत ची उब बहत आप रत्याषित लागे तचे आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� � अनक भेल रिदेप वर्टन रूपी कमी के दूर करभाक लेल की कहल जासके तची? तएकर लेल हमर सुजाओ यए ची जे कारा वास वा समकत काल में सलहेस्क अन्तरिक द्वन्द अद्दबनाक त्याक के प्रती हुनकर बड़ाईत अनुभूती के कताक के गद्दिग में विस्तार दियोक. माने सलहेस्के अपन भूल्वा दबनाक महत्वक के बूज्बाक एक्ता क्रमिक प्रक्रिया क्रुए देख्वल जाईने? आईक्दम आईकर लेल किछू तोस उदारन से हो अची जे गद्द में जोडल जासके तची जैना जेल में रहित काल सलहेस के अपन एका की पनक भोद हे बाक एक तची जोडल जासके तची अहो, जाही में उ दबनाक, बाराबरक, तपस्या, अवकर आचर बनबाक, महत्वक, गेराई समबुजे चती. आई, जैना सोचुना, उ अन्दार कोटरी में चती, जते कोई नहीं अची, जते इसदिक्हन प्रजासंगेरायल रोबाक अब्यस्त राजा आई नितान्त इक्सर चती, तक्हन हुनका अबहास होए चनीजे, जे प्रेम हुनका भेटल चल, उक्रा उ अग्यान्ता वष्थूक्रा दिलनी. इता मोन मे एक ता गहीड करूना जगे बाक सामरत्त रख है तची जकन उ बहुत्तिक रूप सब सब शब भेशी लाचार चती तकन उ उनका प्रेम विषक्तिक भान बहान बहुर अहे लची अकुन उ दूसर थोस उदारन से हो चे की आप यह उद्वाँ ताब बाज़ा दर्बारक सुजा अगा उगा नीचा देखाओजाई ताज़ाई ताज़ाई ताज़ाई ताज़ाई ताज़ाई ताज़ाई ताज़ाई ताज़ाई ताज़ाई ताज़ाई ताज़ाई ताज़ाई ताज़ाई ताज़ाई ताज़ा� बूजलूना तकन जे अद्याय च्हूम मे भीाहुएद से एक दम सवाभाविक, सन्तोज जनक अ बहावनात्मक रूप से पूड लागत. तई ये बहुत नीक बात भेल आब आगु बड़च्छी तदोसर काज इजे चरित्रक बहावना कच्तापित करवाक संगे उभावना के चरमोद कर्ष दरी लोजे बाग जे गती आची ताही पर द्यान देव सो हो उत्बे आवश्षक अची एक दम, मैंने खलनायक के संगे भेल संगर्ष कता के रूमान चक्त बनवे तची तब आप द़ब प्रद़ाद बादाद बादाद बादाद बादाद बादाद बादाद बादाद बादाद बादाद बादाद बादाद बादाद बादाद बादाद बादाद बादाद बादाद बादाद बादाद बादाद बादाद बादाद बादाद बादाद बादा रहास्या और सुस्पैंस का कमी रही जाई तची पात्धक मोन में बहे उत्पन लेबा से पहीने इस्तिती नियंट्रन में आबी जाई तची यी तच, कुनो आहन जासुसी कता जका भेल जासुस दोस्रे पन्नापर अप्रादिक सुईकारुक्ती पडिलेता ची जर रहासे खुजिये जाए, ता आगु पडिवा की अचित ते एक दम सतीख कहला हूं ता एक्रा थीख करबाक लेल आहा की सुजाव अची ता एक्रा लेल हमर सुजाव इए ची जगिसे सलहेस के लेल परिस्तिती आरो विशम भुजाए, और पाट्खा के लागे जे आब सलहेस का कोनु उपाय नहीं। आप, जखन भूतिक जगत तक उपाय समाप्त बूजाए, तकने जादूई शक्तिक प्रवेष नीक लागे तची. अर पाट्खा के लागे जे आब सलहेस का कोनु उपाय नहीं चनी? आँ, जखन भूटिक जगत तक उपाय समाप्त बहुजाए, तकने जादूई शक्तिक प्रवेश नीक लागे तची. तन्त्र विद्याक प्रभाव तकने चमत्कारिक लागे तची जगन मानविय न्याय प्रनाली पुरन रूपेंड भिफल भजाए ता एकर कोनो तोस उदारन दीजाई जाही सा लेक्हक आई गती के मन्तर का सकती देखू, एकर तोस उदारन, कताक लेल एब हूसके तची, जे राजाक दरबार में सलहेस के विरुद जूत्थाप्रमान प्रस्तूत करवाक एक ता विस्त्रत द्रिष्च लिकल जाए. उख़ार्द बाद सूने का दर्बारक ख्रोदख विस्तारस चित्रन हो. आप एक दम सलहेस शान्त भाँसा अन्याय सहिच्छति आजकन हुनका पर म्रित्तु दन्ड वाखकतोर सजाक खत्राम प्राय लगे तची. आप पाथक वन में इच्टपता टबजाए, भूड़़ बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बा कत्हाक वरननात्मक्शेली, जिक्रा द्रिष्य सामगरीक संगे आरो नीजजका जोडल जासकताची. पात्ह में चित्रक संदर भ्देप एक ता विष्ट शेली आच्छ, मुदा इद्रिश्य सामगरी अगद्यक वरननात्मक शैलिक भीच कताल मेल के आरो निकर केल जासके तच्छ तव आई लो गथा मे चित्र एक वड चित्र दू आदीके जे प्रयों केल गेल अच्छी सि कत्ठा के आगुत बडवगग तछ, मुदा आई में कमी की आच्छे आई में कमी इए आच्छी, जे कत्ठा चित्र के इंगित कर अच्छ, मुदा गद्ये में उही चित्रक सांगीतिक वद्द्रिष्खत वरननक सरवता अबहावच, इमात्र गधनाक विवरन जका लागागी तच. माने, इस कोनो चल चित्र देखवाजका अची, जटे दुखखद दिष्यमे करून संगीद बज्वांग बज्लाग में, कोनो पात्र एक्ता बोट पर दूखद द्रिष्य लिख का देखार हो? हा, एक दम. पात वातवरन निरमानक लेल पुरन रुपेन चित्र पर निरभर भुजाईताच. जना चित्र में देखल गेल वस्तूके शब्द में नहीं उतारल गेलच. आज गज कोनो पाथक के लग उचित्रन नहीं हो, वा उके वल सूनईत हो, तो उकर अनबूती तो पूरन रुपन अदूरी रही जाएत नहीं? सतिक गप. ता आई कमिक के दूर करबाकलेल हमर सुज्याओ ए अची, तो बज़ा बद्या अगार अरंग देताची वुदा गद्या उभी रंग का ताप्मान तैखाई ताची वुदा गद्या उभी रंग का ताप्मान तैखाई ताची वुदा गद्या उभी रंग का ताप्मान तैखाई ताची माने, गद्ये इत्तिक सशक्त हो बाख चाही, जे चित्र नहीं रहला पर सहिंवो, पात्ख उही द्रिष्ची के अपन बन्द आखिस से अनुबहव कर सकई. रहा, चित्र रेखा आकार औरंग देताची, मुदा गद्ये उही रंग का ताप्मान तैखगे तची. ता एक तोस उदाहरन पर जा बात करी, तकाली मंदिर मे दबनाक तंत्र सादनाक वरनन मे रंग अदोनिक विवरन जोलल जा सके ता ची. जे ना खली इई नहीं लिखु जे उदंत्र सादनाक लक वच्चित्र मे देखू. लिखु जे सिंदूरक गाड लाल रंग कोना दिखा रहल चल रहा, जिना कोनो जमलाह कोन कर रहा, रहा अत का अंदार में गुन्जेत मंत्र का दूनी कोना सुनी पडी रहल चल, जाहिसा पाथक कर अपन द़कन तीजी बहाजाए. वा एक उस्मी द्वारा अनल गेल खब्रिक कि समें उकर गब्राहत, उकर सास के गती कोना लागाई चल तकर वरनन करो. इसब छोट-छोट बात गद्यके जिवंट कराई तची. जखनो बहु चर्चित द्रिष्य बाई तची जते सलहे सक गिरुवा खोल सं नो लाख का हार कहसेथ तख हन एक ता आरो थोस उदारन भासके थख ही तख है. आा, उई दिश्य मे गेरुा रंगक विशम तक वरनन करू. मने, गेरुा रंग जे त्याग असन्यासक प्रती कची, उई रंगक वस्त्र सं एक ता भोतिक वादी हार कहसब, इक ता बहुत पएग विरोदा वास थी गद्दे में एह विरोदा वासक उबारो आप आराख खसब अजमीन पर तक्राइबाग जंकारक वरनन करू जे समपुन दर्बार में सनाथा पस्रा देता थी एही सब पात्ध अचित्र कबीच कदूरी कम वहजात् अ पात्ख क मन में सुत्ट चित्र बनी जाएत. गेर्वा रंग सहारा खसब अ उकर जनकार, इ वास्तो में एक ता बहुत शक्तिषाली द्रुष्चे निरमान करे तची. एक दम. तकन पात्ख के कोनो बाहरी चित्र का अवष्षकता न नहीं पडते. उकर मन में कुदे चित्र चले लागेत तए तीनू बिन्दु बहुत गंविर चला आप समय आची, जे हम आई समिक्षाके समेटी दी आप समशेप में कही दी, जे आई रचना में की की सुदार अपेक्षी तची जाही सव इरचना और उत्क्रिष्ट बहुसके तची तपहिल इजिस सलहेस कवन में दबनाक प्रती प्रेम करमिक विकास श्पष्ट करू जाही सव हुंकर हीदे परिवर्तन तारकिक लागे आदु सर आई चूहर मलक विश्वास कहात आओकर परदा भाशेबाक भीच कर दिश्वमे सस्पन्स बड़ाउ अन्याई प्रक्रिया के मन्तर करु जाही से तन्तरिक चरमोद कर्ष अदिक प्रभाव्शाली भूसके. अटे सर चित्रात्मक भाशाक प्रेोग करू जाही सच्ट्र अगगद्यक भीच गहीर सामनजस से बने, अपाठक बिना चित्रक से हो उही दूनी अर रंग के अनुबहव कर सके. इक्दम सही. हम रप्पून विश्वास अची जे इप परी मारजन आई रचना के एक ता �alagasthar पर लड़ायत. आ, ता हम लेखक के आमन्त्रित कराएद ची जे आई सुजाओ सब के अपुन रचना में समाहित क, सन्शोदित समग्री के पुना एही कारिक्रम में समिक्षाक लिल पठाओ. नदिक उपरी शान्ती मात्र भ्रम अची. जगन कताग भित्रू कजल्द हरा चतान सतक्राएत तकनेो आसल रूप में जिवंत बहुतत. एही गहराई के खोजित रहो.

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