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गजेन्द्र_ठाकुर_समग्र_खण्ड-२ (1).mp4

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Part 3 · VIDEHA MITHILA MAITHILI DISCUSSION CRITICISM SERIES PART 3
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hi (0.744091)
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  1. 0:00–0:04स्वागत अछि। आई एक ता अद्बूत आ अद्द्यन्त महत्टुपून साहित्य कचर्चा करव्।
  2. 0:05–0:08इविष्लेषन एक ता आहन्पैक सान्स्क्रतिक सेतु पर आदारित अछि,
  3. 0:08–0:12ज़ाई बाशाई सीमा के पार्काखा रचल गेल आची
  4. 0:12–0:17इदेखव जना पूरा भारत का साहिते एक ठाम बेठलीक आंगन में आबीगेल होए.
  5. 0:17–0:22तीक जी आओ आही में गेराई सप्रवेश करी इगोनो पर परचाएज़े ना वी आपाशाएग.
  6. 0:22–0:52युगक संकल पचे युगक संकल पचे अगर दरूष्टी रहाड़ा चे जे है वर्ष्षक समयक जंजावातक भीच जे मेठिलिक दीप जरेत रहाड़ाचे युगक संकल पचे अगर दरूष्टी अगर दरूष्टी आप प्रचाचाचा पर परचाचाचा परचाचाचाचा
  7. 0:52–0:54तक्रा आर प्रकाश्मान के आलजाई.
  8. 0:54–0:58काल के तूफान में एक ता बाशक दीप छरेत राखभ,
  9. 0:58–1:00औवि में आन बाशक ग्रित दोकर,
  10. 1:00–1:02उक्रा आर प्रज्वलित करव,
  11. 1:02–1:04इएही समपून अनुवाद उद्यमक,
  12. 1:04–1:06मुल भावना थेक.
  13. 1:06–1:09इही विशलेशनक रूप रेखा एक दम सब श्व्टा चे
  14. 1:09–1:12मुख्ये रूप सा चारे ता बिन्दूपर द्यान्देब
  15. 1:12–1:16अटिहासेक अनुवाद उद्यम, शेत्री एक गद्या अनुवाद,
  16. 1:16–1:20अनुदित पद्यक स्वर, आन्त में अनुवादक दर्षन.
  17. 1:20–1:22बस आगु बड़ाई चीए।
  18. 1:22–1:26पहल गण्ड, एक ता ए तिहाँस्सिक अनुवाद उद्ध्यम
  19. 1:26–1:32इजे समपादिके प्रयास बहलते उकर विशालता देखक सच्मुच आश्टर यो वहते चे
  20. 1:32–1:36विदेइ पत्रिकाक अंक एक सथ तीन सो पचास दरिक अनुदित
  21. 1:36–1:39अनुदित गद्यपद्य साहित्या की संग्रह चकित करे ता चे
  22. 1:40–1:43कते एक भोगालिक आब एब वाशिक विद्धात समेटल गेल अची से दिखू
  23. 1:43–1:51तेलगु, उडिया, गुज्राती, कनण़, भूज्पूरी, आक श्मीरी जगका च्योब प्रमुख भारत्य भाशाक साहित्यके मेठ्ली में लाबल गेल अच्छे.
  24. 1:51–1:57वर्ष 2022 कपहिल संसकरन् सलोकड, 2026 कदूत्य संसकरन् द्हरी,
  25. 1:57–2:01वही में कुल 14 ता गद्यरचना आ चवबिस्ता पद्यक्हन्ध सम्मलिता चे
  26. 2:02–2:08इआख्डा अपने आप में गजिंद्र ताकूर आ आशीश अचिनारक भगीरत प्रयासक कगवाई देई टचे
  27. 2:08–2:13आप जी सब से रोचक बात चे इजे अनुवादक प्रक्रिया बहेल कोना
  28. 2:13–2:16इप वूच्ठ्पूरी सा दूईस्तरीय प्रक्रीया चे
  29. 2:16–2:20माने पहले मूल भाश्षासा सहेट्यक अनुवाद अंग्रेजी मे भेल
  30. 2:20–2:25आत अकर बाद अंग्रेजी सा अक्रा मैठ्फिली में गजेंद्र ताकृए दूरा अनुदीत केल गेल
  31. 2:25–2:31उदारुकु, आई में एक टा अबुत अपवाद से हो अची, बूज्पूरिक महान कवी भिखारि ताकृ,
  32. 2:31–2:37का कविताक अनुवाद गजेंद्र ताकृ जी सोजे मुल बूज्पूरी समयत्हली में केलनी,
  33. 2:37–2:40क्यों का उ स्वयम उही मुल भाशासा नीजजगा परचिच्छते.
  34. 2:40–2:44इबात एह अनुवाद यात्राक एटा विषिष्ट आकर्षन थेक.
  35. 2:44–2:47तो सर्क्हन्ट चेत्रिया गद्य अनुवाद.
  36. 2:47–2:52आउ, एही विबहिन्न चेत्रिया कताक स्वादक एक ता साहित टिग ब्रहमन करी.
  37. 2:52–2:56अनुवादित कताक यी सन्सार पहुत विस्त्रित आम्मारमिक अच्छे.
  38. 2:56–3:00तेलुगु गद्धिक्हन्द में कताक एक ता अछ्ट्यंत सम्रित द्रूप भेटाई तचे.
  39. 3:00–3:05जैना पिद्दिन्ते आशोक्मारको पन्यासक आन्श, सदा केलिल मित्र,
  40. 3:05–3:11जेक्ता इमाम आवोकर प्रषिक्ष्ट भालु सादूलक भीचकर मार्मिक सम्मन्द के दर्षावैत आचे,
  41. 3:11–3:14मनुश्ष्य अपपशुक आत्मिय बन्दन.
  42. 3:14–3:18एक तीक विप्रीद, कोलकलूरी इनोच अ विनोदिनी कता,
  43. 3:18–3:23दलिद समाजक पीडा, असंगरष के समाजक राजनेटिक यतार्ठ के प्रस्थूत करे तचे.
  44. 3:23–3:26तहीना, वेमपल्ले शरीएफक कता जुम्मा,
  45. 3:26–3:28मुस्लिम अल्प संक्यक समुदायक,
  46. 3:28–3:32जीवन असंट्क्रतिक एक दम सुख्श में अठारत सामने राखगे तचे.
  47. 3:33–3:35आई ये बहुत निकजका सबस्ट करे तचे,
  48. 3:35–3:39जे कोना हम्रा लोकनी बारत का उतर उपश्च्च्म का साहित तेक स्वाद
  49. 3:39–3:41मेठिली में पाभी रहल ची.
  50. 3:41–3:49उड्या लेखिका सरोजनी साहुख कता दुख अप्रमिता एक्ता असीमित समवेदन शिलता का चित्रन करे तची
  51. 3:49–3:55उते ही गुज्राती में दलपत चोहानक कता दलित मनोविग्यानक तच्खोले तची
  52. 3:55–3:59अ नजीर मन्सुरी कता मुसलिम संट्क्रतेक परद्रिष्च्छ के देखावाई तची.
  53. 3:59–4:03दक्षिन देस कनडग लेक्ख, अशोग हेगरे कता अनार,
  54. 4:03–4:08प्रकाश अअ अनारक एट्टा प्रितीकात्मक अमारमेक चित्रन प्रस्थूत करे तची.
  55. 4:08–4:18तेसर खण्ड अनुदित पद्यक्स्वर एत देखब जे मेठली भाशा के तेक सुन्दर तासे बिन भिन भावना असंस्क्रती के समहित करेत अच्ये.
  56. 4:18–4:25गद्यसा आब कवीटा दिसावी रहल च्ये, अनुवादक कारज कवीटा मे सबसे कटिन मानल जाई तच्ये,
  57. 4:25–4:30मुदा इखखंद प्रमानित करे दाछी, जे मेठलिक लचीला पन कते भीशी आची.
  58. 4:30–4:34तेलोगु दलित महीला कवीता कवीता इखखंद अद्यन्त शक्तिषाली आची.
  59. 4:34–4:38जे सुभद्राक कवीता साडिक कोल जहन रचनास,
  60. 4:38–4:41स्त्री शरीर पर अदिकार अ सामाजिक शोशनक विरुद
  61. 4:41–4:44एक त्तीव्र प्रतिरोद प्रस्फुटेत होईताची.
  62. 4:44–4:45चल्लपली स्वरुप्रानी कविता
  63. 4:45–4:48श्रमक गरी मा च्तापित करेताची.
  64. 4:48–4:50तदरीषे शोषिनरमला रचना
  65. 4:50–5:20अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अ�
  66. 5:20–5:25विद्दुनु विद्धा आपन आपन रूप में में आठिली में एक दम नव स्वाद्ला बेट अची.
  67. 5:26–5:30गुज्रातियानोवादक इख्हन्टेक्त अदबुत कालक्रम्या से तु बनावे टची.
  68. 5:30–5:33रूप में में अद्हिली में एक दम नव स्वाद्बेत अची.
  69. 5:34–5:38गुज्राती अनुवादक इख्हन्टेक्ता अद्बूत कालक्रम्य से तु बनावे टची.
  70. 5:38–5:43इपन्द्रहम शताब्दीक महान भख्त कवी नर्सिंग महताक भख्ती रच्ना,
  71. 5:43–5:52वेशनव जन्तो सशुरूब है का आदूनिक युख कवी हेमांग देसाई प्यूष ठाकृर अ बाभू सुत्ठरक समकालीन अग्रामी डियतार्त दरी जाई तचे.
  72. 5:52–6:01विशेश रूप्सा अंग्रेजी अनुवादक हेमाँग देसाएक इकाज स्तृत्याची जाई से इएतिहासिक अ आदूनिक स्वरक यात्रा समबव भहसकल.
  73. 6:01–6:11चारिंख्ण्ड, अनुवादक दर्षन, आव आगुबड़ी, और देखी जे इस समपूरन काज कोना असल सत्टिक प्रस्थूती करेत अचे.
  74. 6:11–6:15अखन्दरी, हम्रा लोगनी तत्या और सुची पर बातके लहू,
  75. 6:15–6:22मुदा एही पोथिक पाजग दर्षन की अचे, इख हन्द समपून ग्रन्त्ख आत्मा के उजागर करे दचे.
  76. 6:22–6:29समानतर कात करोट में हैव नहीं आची, वरन यी अचे असल सत्यग जे अपन समये लेलग अची.
  77. 6:29–6:32गजेंद्र द्हाखुर का की द्रिष्टी आची,
  78. 6:32–6:34जग्रा समानतर साहित्या कहल जाई तची,
  79. 6:34–6:37उकोनो किनार पर ताडवस्तू नहीं आची,
  80. 6:37–6:40बलकी यी उ असल सत्या आचे,
  81. 6:40–6:44जे समाजक यतार्थ के बिना कोनो लाग लपे तक प्रस्तूत करए तची.
  82. 6:44–6:49इपंक्ती एही अन्वाद पर्योजनाक वैचारे क्नीव सपष्ट कराई तचे.
  83. 6:49–6:55ता, सब समहत्वपुरन बिन्दू इए ची, जे ईप उत्फीक समर्पन वाग्या बहुत मार्मेग अची.
  84. 6:55–7:04मित्लाक उई लेक्ख्ख, पाट्ख, आश्रोता लोक्नी लेल, जि सहस्र वर्ष्ख जंजावात में सही उ मेठ्लिक दीप प्रज्वलित रखने च्तिन.
  85. 7:04–7:07इप्रमानित कराईत अच्छी, जे एकुन व्समान निक आजना है ची,
  86. 7:07–7:12बलकी हजार वर्ष्ख सान्स्क्रूतिक तूफान से लेक ता भाशा के बच्छेवाख
  87. 7:12–7:15आ उक्रा विष्वस्टर पर सम्रत्ध करवाख
  88. 7:15–7:17एक ता भावुग अद़््रिद प्र्यास अच्छी
  89. 7:18–7:21अन्त में इप्रश्न सबख मन में उठब स्वाभे कच्छी
  90. 7:21–7:26कोना भिन्न भिन्नक्षेत्रिया आवाज के एक्ता भाशा मे अन्वाद करबाक,
  91. 7:26–7:32यी महान काज अंततह कोनो संसक्रितिक पहचान के संग्रक्षित कराईतची,
  92. 7:32–7:36उकर रक्षा कराईतची आउकरा विस्तारित कराईतची.
  93. 7:36–7:38यी चर्चा सबस्ट कराईतची,
  94. 7:38–7:47जे जगन आन बाशक सत्ये के अपन बाशा मे जग़ा बहिताई तची, तची अई बाशक अस्तित्व स्वयम विस्त्रित और आमर भईजाई तची.
  95. 7:47–7:54इसहित्तिक से तु मेत्हलीक शक्ती आ ओकर भविष्ष्षक अन्थ समभावना के चिन्हांकित करे तची.
  96. 7:54–7:57आशा आची इविश्लेशन ज्यान वर्दख रहल

Plain text

स्वागत अछि। आई एक ता अद्बूत आ अद्द्यन्त महत्टुपून साहित्य कचर्चा करव्। इविष्लेषन एक ता आहन्पैक सान्स्क्रतिक सेतु पर आदारित अछि, ज़ाई बाशाई सीमा के पार्काखा रचल गेल आची इदेखव जना पूरा भारत का साहिते एक ठाम बेठलीक आंगन में आबीगेल होए. तीक जी आओ आही में गेराई सप्रवेश करी इगोनो पर परचाएज़े ना वी आपाशाएग. युगक संकल पचे युगक संकल पचे अगर दरूष्टी रहाड़ा चे जे है वर्ष्षक समयक जंजावातक भीच जे मेठिलिक दीप जरेत रहाड़ाचे युगक संकल पचे अगर दरूष्टी अगर दरूष्टी आप प्रचाचाचा पर परचाचाचा परचाचाचाचा तक्रा आर प्रकाश्मान के आलजाई. काल के तूफान में एक ता बाशक दीप छरेत राखभ, औवि में आन बाशक ग्रित दोकर, उक्रा आर प्रज्वलित करव, इएही समपून अनुवाद उद्यमक, मुल भावना थेक. इही विशलेशनक रूप रेखा एक दम सब श्व्टा चे मुख्ये रूप सा चारे ता बिन्दूपर द्यान्देब अटिहासेक अनुवाद उद्यम, शेत्री एक गद्या अनुवाद, अनुदित पद्यक स्वर, आन्त में अनुवादक दर्षन. बस आगु बड़ाई चीए। पहल गण्ड, एक ता ए तिहाँस्सिक अनुवाद उद्ध्यम इजे समपादिके प्रयास बहलते उकर विशालता देखक सच्मुच आश्टर यो वहते चे विदेइ पत्रिकाक अंक एक सथ तीन सो पचास दरिक अनुदित अनुदित गद्यपद्य साहित्या की संग्रह चकित करे ता चे कते एक भोगालिक आब एब वाशिक विद्धात समेटल गेल अची से दिखू तेलगु, उडिया, गुज्राती, कनण़, भूज्पूरी, आक श्मीरी जगका च्योब प्रमुख भारत्य भाशाक साहित्यके मेठ्ली में लाबल गेल अच्छे. वर्ष 2022 कपहिल संसकरन् सलोकड, 2026 कदूत्य संसकरन् द्हरी, वही में कुल 14 ता गद्यरचना आ चवबिस्ता पद्यक्हन्ध सम्मलिता चे इआख्डा अपने आप में गजिंद्र ताकूर आ आशीश अचिनारक भगीरत प्रयासक कगवाई देई टचे आप जी सब से रोचक बात चे इजे अनुवादक प्रक्रिया बहेल कोना इप वूच्ठ्पूरी सा दूईस्तरीय प्रक्रीया चे माने पहले मूल भाश्षासा सहेट्यक अनुवाद अंग्रेजी मे भेल आत अकर बाद अंग्रेजी सा अक्रा मैठ्फिली में गजेंद्र ताकृए दूरा अनुदीत केल गेल उदारुकु, आई में एक टा अबुत अपवाद से हो अची, बूज्पूरिक महान कवी भिखारि ताकृ, का कविताक अनुवाद गजेंद्र ताकृ जी सोजे मुल बूज्पूरी समयत्हली में केलनी, क्यों का उ स्वयम उही मुल भाशासा नीजजगा परचिच्छते. इबात एह अनुवाद यात्राक एटा विषिष्ट आकर्षन थेक. तो सर्क्हन्ट चेत्रिया गद्य अनुवाद. आउ, एही विबहिन्न चेत्रिया कताक स्वादक एक ता साहित टिग ब्रहमन करी. अनुवादित कताक यी सन्सार पहुत विस्त्रित आम्मारमिक अच्छे. तेलुगु गद्धिक्हन्द में कताक एक ता अछ्ट्यंत सम्रित द्रूप भेटाई तचे. जैना पिद्दिन्ते आशोक्मारको पन्यासक आन्श, सदा केलिल मित्र, जेक्ता इमाम आवोकर प्रषिक्ष्ट भालु सादूलक भीचकर मार्मिक सम्मन्द के दर्षावैत आचे, मनुश्ष्य अपपशुक आत्मिय बन्दन. एक तीक विप्रीद, कोलकलूरी इनोच अ विनोदिनी कता, दलिद समाजक पीडा, असंगरष के समाजक राजनेटिक यतार्ठ के प्रस्थूत करे तचे. तहीना, वेमपल्ले शरीएफक कता जुम्मा, मुस्लिम अल्प संक्यक समुदायक, जीवन असंट्क्रतिक एक दम सुख्श में अठारत सामने राखगे तचे. आई ये बहुत निकजका सबस्ट करे तचे, जे कोना हम्रा लोकनी बारत का उतर उपश्च्च्म का साहित तेक स्वाद मेठिली में पाभी रहल ची. उड्या लेखिका सरोजनी साहुख कता दुख अप्रमिता एक्ता असीमित समवेदन शिलता का चित्रन करे तची उते ही गुज्राती में दलपत चोहानक कता दलित मनोविग्यानक तच्खोले तची अ नजीर मन्सुरी कता मुसलिम संट्क्रतेक परद्रिष्च्छ के देखावाई तची. दक्षिन देस कनडग लेक्ख, अशोग हेगरे कता अनार, प्रकाश अअ अनारक एट्टा प्रितीकात्मक अमारमेक चित्रन प्रस्थूत करे तची. तेसर खण्ड अनुदित पद्यक्स्वर एत देखब जे मेठली भाशा के तेक सुन्दर तासे बिन भिन भावना असंस्क्रती के समहित करेत अच्ये. गद्यसा आब कवीटा दिसावी रहल च्ये, अनुवादक कारज कवीटा मे सबसे कटिन मानल जाई तच्ये, मुदा इखखंद प्रमानित करे दाछी, जे मेठलिक लचीला पन कते भीशी आची. तेलोगु दलित महीला कवीता कवीता इखखंद अद्यन्त शक्तिषाली आची. जे सुभद्राक कवीता साडिक कोल जहन रचनास, स्त्री शरीर पर अदिकार अ सामाजिक शोशनक विरुद एक त्तीव्र प्रतिरोद प्रस्फुटेत होईताची. चल्लपली स्वरुप्रानी कविता श्रमक गरी मा च्तापित करेताची. तदरीषे शोषिनरमला रचना अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अ� विद्दुनु विद्धा आपन आपन रूप में में आठिली में एक दम नव स्वाद्ला बेट अची. गुज्रातियानोवादक इख्हन्टेक्त अदबुत कालक्रम्या से तु बनावे टची. रूप में में अद्हिली में एक दम नव स्वाद्बेत अची. गुज्राती अनुवादक इख्हन्टेक्ता अद्बूत कालक्रम्य से तु बनावे टची. इपन्द्रहम शताब्दीक महान भख्त कवी नर्सिंग महताक भख्ती रच्ना, वेशनव जन्तो सशुरूब है का आदूनिक युख कवी हेमांग देसाई प्यूष ठाकृर अ बाभू सुत्ठरक समकालीन अग्रामी डियतार्त दरी जाई तचे. विशेश रूप्सा अंग्रेजी अनुवादक हेमाँग देसाएक इकाज स्तृत्याची जाई से इएतिहासिक अ आदूनिक स्वरक यात्रा समबव भहसकल. चारिंख्ण्ड, अनुवादक दर्षन, आव आगुबड़ी, और देखी जे इस समपूरन काज कोना असल सत्टिक प्रस्थूती करेत अचे. अखन्दरी, हम्रा लोगनी तत्या और सुची पर बातके लहू, मुदा एही पोथिक पाजग दर्षन की अचे, इख हन्द समपून ग्रन्त्ख आत्मा के उजागर करे दचे. समानतर कात करोट में हैव नहीं आची, वरन यी अचे असल सत्यग जे अपन समये लेलग अची. गजेंद्र द्हाखुर का की द्रिष्टी आची, जग्रा समानतर साहित्या कहल जाई तची, उकोनो किनार पर ताडवस्तू नहीं आची, बलकी यी उ असल सत्या आचे, जे समाजक यतार्थ के बिना कोनो लाग लपे तक प्रस्तूत करए तची. इपंक्ती एही अन्वाद पर्योजनाक वैचारे क्नीव सपष्ट कराई तचे. ता, सब समहत्वपुरन बिन्दू इए ची, जे ईप उत्फीक समर्पन वाग्या बहुत मार्मेग अची. मित्लाक उई लेक्ख्ख, पाट्ख, आश्रोता लोक्नी लेल, जि सहस्र वर्ष्ख जंजावात में सही उ मेठ्लिक दीप प्रज्वलित रखने च्तिन. इप्रमानित कराईत अच्छी, जे एकुन व्समान निक आजना है ची, बलकी हजार वर्ष्ख सान्स्क्रूतिक तूफान से लेक ता भाशा के बच्छेवाख आ उक्रा विष्वस्टर पर सम्रत्ध करवाख एक ता भावुग अद़््रिद प्र्यास अच्छी अन्त में इप्रश्न सबख मन में उठब स्वाभे कच्छी कोना भिन्न भिन्नक्षेत्रिया आवाज के एक्ता भाशा मे अन्वाद करबाक, यी महान काज अंततह कोनो संसक्रितिक पहचान के संग्रक्षित कराईतची, उकर रक्षा कराईतची आउकरा विस्तारित कराईतची. यी चर्चा सबस्ट कराईतची, जे जगन आन बाशक सत्ये के अपन बाशा मे जग़ा बहिताई तची, तची अई बाशक अस्तित्व स्वयम विस्त्रित और आमर भईजाई तची. इसहित्तिक से तु मेत्हलीक शक्ती आ ओकर भविष्ष्षक अन्थ समभावना के चिन्हांकित करे तची. आशा आची इविश्लेशन ज्यान वर्दख रहल

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