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गजेन्द्र_ठाकुर_समग्र_आ_सीमान्त_साहित्य.m4a
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- 0:00–0:05इगगजेंद्र थाकुर समगर खंडवे का अनुदित साहित्य पर एक तवरिद समिक्षा आची.
- 0:06–0:10आशीश अजिनहार दवारा समपादित गजेंद्र थाकुर समगर खंडवे,
- 0:11–0:13मात्र कोनो सादारन अनुवाद ग्रन्त नहीं आच्छ,
- 0:13–0:20बलकी इच्छे ता प्रमुक बहरत्य भाशा के मेठली सन जोडे वाला एक ता विशाल संसक्रतिक सेटू अच्छी
- 0:20–0:27जे समएक अबहाव मेठे हो आहां के बहरत्का अद्बुत साहित्तिक विविद्द्धा बुज्वाग ले एक्दम आवश्ष्ष्वे कच्छी
- 0:27–0:31पहिले ता एकर विशाल व्याप्ती पर बात करे ची
- 0:31–0:34गजिन्द्र ताकृर विदे पत्रिकाक माद्यम से
- 0:34–0:38तेल्बु, उडिया, गुज्राती, कन्नर, भोज्पूरी
- 0:38–0:41अककष्मीरी भाशाक काज के में दिली में अनलनी आची
- 0:41–0:51इही में प्दिन्ती आश्वक् कुमारक तेल्गु उपन्यास सल्लक महान रंग कर्मी भिखारि ताकृुर अग्यान पीट विजेता रह्मान रही दरी के एक ठाम राखल गेलगज.
- 0:51–0:58आब आँ जरा सोच्छू एते क अलग-गलक भाशाक साहित्यक के एक ठाम लाबब कते कठिन काज अच्छी.
- 0:58–1:02तो सर एप फोती मात्र अलग-गलक भाशाक अन्वाद नहीं
- 1:02–1:09बलकी ये उही सीमान्त समाजक, माने दलत, अदिवासी, आम महलाक संगर्ष कसे हो अन्वाद अच्छी.
- 1:09–1:15एही में तेल्गु दलत महलाक कविता अदियाक अदिवासी कवी बहारत मानजिक दर्द शामिल अच्छी.
- 1:15–1:23अद्या रोजगबात य आच्छी जे य अनवाद द्विस्तरी आच्छी पहले मूल सा अंग्रेजी अफेर अंग्रेजी सा मेठली.
- 1:23–1:29एता इ मोन्मेक्ता पैक सवाल उठाई तची, जे की अंग्रेजीज़का तीसर भाशाक भीच में,
- 1:29–1:35अईला सर मूल भाशाक आत्मा बनल रही तची, इनिष्चित रूपें एक ता बहुत पैक चुनाती अची.
- 1:35–1:38अन्त में एकर मेठली सहीट्यटे पर प्रभाव भुजू.
- 1:53–1:58अपने वाद्टी बाद्टी बादटी बादटी तो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो
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इगगजेंद्र थाकुर समगर खंडवे का अनुदित साहित्य पर एक तवरिद समिक्षा आची. आशीश अजिनहार दवारा समपादित गजेंद्र थाकुर समगर खंडवे, मात्र कोनो सादारन अनुवाद ग्रन्त नहीं आच्छ, बलकी इच्छे ता प्रमुक बहरत्य भाशा के मेठली सन जोडे वाला एक ता विशाल संसक्रतिक सेटू अच्छी जे समएक अबहाव मेठे हो आहां के बहरत्का अद्बुत साहित्तिक विविद्द्धा बुज्वाग ले एक्दम आवश्ष्ष्वे कच्छी पहिले ता एकर विशाल व्याप्ती पर बात करे ची गजिन्द्र ताकृर विदे पत्रिकाक माद्यम से तेल्बु, उडिया, गुज्राती, कन्नर, भोज्पूरी अककष्मीरी भाशाक काज के में दिली में अनलनी आची इही में प्दिन्ती आश्वक् कुमारक तेल्गु उपन्यास सल्लक महान रंग कर्मी भिखारि ताकृुर अग्यान पीट विजेता रह्मान रही दरी के एक ठाम राखल गेलगज. आब आँ जरा सोच्छू एते क अलग-गलक भाशाक साहित्यक के एक ठाम लाबब कते कठिन काज अच्छी. तो सर एप फोती मात्र अलग-गलक भाशाक अन्वाद नहीं बलकी ये उही सीमान्त समाजक, माने दलत, अदिवासी, आम महलाक संगर्ष कसे हो अन्वाद अच्छी. एही में तेल्गु दलत महलाक कविता अदियाक अदिवासी कवी बहारत मानजिक दर्द शामिल अच्छी. अद्या रोजगबात य आच्छी जे य अनवाद द्विस्तरी आच्छी पहले मूल सा अंग्रेजी अफेर अंग्रेजी सा मेठली. एता इ मोन्मेक्ता पैक सवाल उठाई तची, जे की अंग्रेजीज़का तीसर भाशाक भीच में, अईला सर मूल भाशाक आत्मा बनल रही तची, इनिष्चित रूपें एक ता बहुत पैक चुनाती अची. अन्त में एकर मेठली सहीट्यटे पर प्रभाव भुजू. अपने वाद्टी बाद्टी बादटी बादटी तो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो