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विदेहक_अनूदित_भारतीय_साहित्यक_बुलेटिन.m4a
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- 0:00–0:05विदेह इ पत्रिकाक अनुदित साहित्य पर इ यहांके लिल एक ता तोरित बौलित नाची.
- 0:05–0:13इ अंक, तिल्गु, हिंदी आ कुंक्री जाका विबिन न भारती यबाषाक बेजोड कता सब के मैठ्ली अनुवाद ची,
- 0:13–0:20जे आहा के दिखावत जे आम जीवनक दर, संगर्ष आएस्त्री आस्मिताक आस्ली दरातल की हुई च्याए.
- 0:20–0:24पहल बात करे ची तिल्गु कता जुम्मा के
- 0:24–0:27जक्रा शेक महम्मद शरीफ लिखने चती
- 0:27–0:30आगगजंदर ताकृर मैठ्टली में अनुदित के ने चती
- 0:30–0:34एहे में मक्का मसजिद बम विस्फोट सबहले
- 0:34–0:38एक ता मा अपन बच्चा के नमाज लेल मस्जिद जाएपक खुब जोर देच्छली हा
- 0:38–0:42मुदा विस्फोट से दराएके उकर मन इत्टिक बडल जाएच चाए
- 0:42–0:45क्यो बच्चा के उत्टे जाएस एक दम मनाखरे लागे च्छती
- 0:45–0:50आब आँ सोचुं कि कोनो दरमक कदोर नियम सबेसी शक्तिषाली
- 0:50–0:54एक ता मा कपन बच्चा के बचावक स्वबहाविक दर अप्रेम नहीं होईच्छै.
- 0:54–0:58तो सर, जैना जुम्मा में मा बाहरी दूनिया कठरा से लड़ाई तचे
- 0:58–1:06तीक तेहना दुक्तर प्रबाख भीताना क हिंदी उपन्यास चिन नमस्ता में प्रिया आपन गरग भीतर गाउस लड़ाई रहल अची.
- 1:06–1:10सुसीला जाद्वारा अनुदित एही कता में प्रिया आपन अहेंकारी पती,
- 1:10–1:14बज्पन्कर्शोशन् अ पर्रिवारक उपेख्षाग बादों
- 1:14–1:16आपनित्त स्वतन्त्र पह्चान बनाबाई दाची
- 1:16–1:20जे समाजक पिंजरा तोडी कख्लल आखाश मे उडवाग जका आची
- 1:20–1:25अंततद, विदेह इपत्रिकाक इ साहित्तिक योग्दान गजब चै
- 1:25–1:30इपाकलोजक कोंकनी उपन्यास जक्रा डुक्तर शम्बू कुमार सिंग अनुदित केने चति
- 1:30–1:34आवूना आन आन कता सब के मैठली में लावे राल आची
- 1:34–1:39सोचु इत अलग अलग भारतिया बाशाक विचार अस्वाद के आहलेल
- 1:39–1:42इक ता मैठली तारी में परुजवाग जाकभेल ने,
- 1:42–1:47संखषेप में कहल जायता, इ अनुदित संकलन मात्र भाशाक परिवरतन नहीं आची.
- 1:47–1:50बलकी मानविय आबहात, पित्र सत्तात्मक संगर्ष,
- 1:50–1:52आवही पर विजगे पाभे वाला,
- 1:52–1:55अदम्य साहस्क एक ता बड़ सचकत आईना आची
Plain text
विदेह इ पत्रिकाक अनुदित साहित्य पर इ यहांके लिल एक ता तोरित बौलित नाची. इ अंक, तिल्गु, हिंदी आ कुंक्री जाका विबिन न भारती यबाषाक बेजोड कता सब के मैठ्ली अनुवाद ची, जे आहा के दिखावत जे आम जीवनक दर, संगर्ष आएस्त्री आस्मिताक आस्ली दरातल की हुई च्याए. पहल बात करे ची तिल्गु कता जुम्मा के जक्रा शेक महम्मद शरीफ लिखने चती आगगजंदर ताकृर मैठ्टली में अनुदित के ने चती एहे में मक्का मसजिद बम विस्फोट सबहले एक ता मा अपन बच्चा के नमाज लेल मस्जिद जाएपक खुब जोर देच्छली हा मुदा विस्फोट से दराएके उकर मन इत्टिक बडल जाएच चाए क्यो बच्चा के उत्टे जाएस एक दम मनाखरे लागे च्छती आब आँ सोचुं कि कोनो दरमक कदोर नियम सबेसी शक्तिषाली एक ता मा कपन बच्चा के बचावक स्वबहाविक दर अप्रेम नहीं होईच्छै. तो सर, जैना जुम्मा में मा बाहरी दूनिया कठरा से लड़ाई तचे तीक तेहना दुक्तर प्रबाख भीताना क हिंदी उपन्यास चिन नमस्ता में प्रिया आपन गरग भीतर गाउस लड़ाई रहल अची. सुसीला जाद्वारा अनुदित एही कता में प्रिया आपन अहेंकारी पती, बज्पन्कर्शोशन् अ पर्रिवारक उपेख्षाग बादों आपनित्त स्वतन्त्र पह्चान बनाबाई दाची जे समाजक पिंजरा तोडी कख्लल आखाश मे उडवाग जका आची अंततद, विदेह इपत्रिकाक इ साहित्तिक योग्दान गजब चै इपाकलोजक कोंकनी उपन्यास जक्रा डुक्तर शम्बू कुमार सिंग अनुदित केने चति आवूना आन आन कता सब के मैठली में लावे राल आची सोचु इत अलग अलग भारतिया बाशाक विचार अस्वाद के आहलेल इक ता मैठली तारी में परुजवाग जाकभेल ने, संखषेप में कहल जायता, इ अनुदित संकलन मात्र भाशाक परिवरतन नहीं आची. बलकी मानविय आबहात, पित्र सत्तात्मक संगर्ष, आवही पर विजगे पाभे वाला, अदम्य साहस्क एक ता बड़ सचकत आईना आची