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द्विस्तरीय_अनुवाद_मे_माटिक_असल_सत्य.m4a

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Part 3 · VIDEHA MITHILA MAITHILI DISCUSSION CRITICISM SERIES PART 3
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  1. 0:00–0:02दर दिबेट्र में आहा सब के स्वागत अचि।
  2. 0:04–0:07कल्पना करू उदिषा कुनो सदूर गामक
  3. 0:07–0:12मैंने अग्टा अदिवासिक जि पीडा अच्छे जे उकर खेट आख्रोष अच्छे
  4. 0:12–0:13बिल्कुल
  5. 0:13–0:15उजे माटिक दर्द हो एच्छे
  6. 0:15–0:21मुता, उही पीडा के पहले आहा एक ता अपनी वेशिक बाशा मने अंग्रेजी में अनुवात करेच्छी
  7. 0:21–0:26आत टकर बाद उही अंग्रेजी सों उक्र मेठली में आने चे
  8. 0:26–0:33तक की उही आदिवासिक गामक माटिक गंद, उकर अस्ली सत्ति हम्रा आहादरी पहुचत?
  9. 0:33–0:37वाज़, फेर भीचक उही आंग्रेजिक वातनु कुलित कक्ष्मे
  10. 0:37–0:40मने उ अक्रोश मात्रेक्ता अकाद्मेक प्रतिद्धूने बनी करो जाएत.
  11. 0:40–0:41एक्दम.
  12. 0:42–0:44और आई हमर सब कविमर्षक केंद्र में
  13. 0:45–0:49आही प्रष्नपर आदारित एक्ता असादारन साइत तिक चाजचे
  14. 0:49–0:54गजेंद्र ताकृर समग्र क्हन्द्दू, गद्यः पद्यबार्तिय अनुवाद,
  15. 0:54–0:59विदेः प्रकाशनक एप फोथी, आहा भूँजु कुनो सामान न अनुवादक कपोथी नहीं तेक,
  16. 0:59–1:02इटेलगु उड्या गुज्राति कननड भोज्पूरी,
  17. 1:02–1:07भूजपूरी आख कशमीरी सहित यक मेठली अनवादा के टा बहुत पैग संग रहे थे.
  18. 1:07–1:11आजेकर समपादन आशिस अनजिनार के ने चाती.
  19. 1:11–1:15तीक. मुदा एही पोठी एक जे सबसे पएख विषिष्टता आची
  20. 1:15–1:19और जेकरा पर हम्रा सब के आए बहुस खिन रित आची
  21. 1:19–1:22उआची एकर दूईस तर्ये अनवाद प्रक्रिया
  22. 1:22–1:25माने 2-Tier Translation Process
  23. 1:25–1:29मुल बाशा सा अंग्रेजी अफिर अंग्रेजी सा मेठली
  24. 1:29–1:31हमर इद्रध माननता आची
  25. 1:31–1:34जे अंग्रेजी जका मद्ध्यबाशाक प्रेोग कै कग
  26. 1:34–1:40बिबिन न भार्त्य बाशाक, विशेष्कर सीमान्तक साहित्यक मेठ्ली अनुवाद करब
  27. 1:40–1:45ये एक ता एतिहासेक आप पुरनतह सफल माद्ध्यम चल
  28. 1:45–1:47बिना एह से तुके य असमबवचल
  29. 1:47–1:48आँ...
  30. 1:48–1:52देबेट के एही मंज पर हमर सयो अभिवादन सुव्कार करूू
  31. 1:52–1:57आहा जो प्रश्नुस श्वर्वात के लो, उख्राहम आरो भीतर दरी लो जाएची.
  32. 1:57–2:03हमरा इस्विकार करवा में कोनो संकोच नहीं, जी इप्रयास बहुत पएग भगीरत प्रयाच चल.
  33. 2:03–2:11एक संक एतेग भासाक सहिते के मेतली में आनबाक जी संकलप समपादक आ अनुवादक लेने चती ओ अतिहासी कची
  34. 2:11–2:13बलको अतिहासी कची
  35. 2:13–2:18मुदा देखो हमर माननाया जी जकन आहा एक ता दूी स्तरी अनुवाद करेची
  36. 2:18–2:22विसेस कर जखन उसहित ते सीमान्तक होए, हाश्या कोए,
  37. 2:22–2:25तो उ अंगरेजीग जे फिल्टर अचीने,
  38. 2:25–2:28उ उही मुल दर्दक तिख्षनता के कम के देटची.
  39. 2:28–2:30तिख्षनता के कम कर देटची.
  40. 2:30–2:31कोना?
  41. 2:31–2:36इओईना आए, मने जना आहा कोनो बहुत उच्छ रीजलूशनक,
  42. 2:36–2:43जना है रेजौलुशन सुन्दर रंगीं चित्र के, e-mail से भेजवाक लेल, okra kompresko ka chot file banadi,
  43. 2:43–2:49अखरा कोनो पैग होडिंग पप्रिंट करी, की होएत? okra piksel fart jaitechi.
  44. 2:49–2:51अखर पिक्सल फाट जाईतची.
  45. 2:51–2:55अगर जमीनी आख्रामक्ता, अगर जे आस्ली विद्रोही व्याक्रन्चे,
  46. 2:55–2:57उ कतुनकतु खंडिद भाजाई तची.
  47. 2:57–3:00देखो, आहा पिक्सल पाट्बाक जे इव्मा देलों,
  48. 3:00–3:02उ सुन्बा में तबहुत निक लगाई तची.
  49. 3:02–3:32अग पिक्सल पाट्बाक जे इ उप्मा देलों उसुन्भा मेत बहुत निक लगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगग�
  50. 3:32–3:37अनुवादक गजेंदर ताकृर कदरशन इते एक एक इगदम सपष्ट अचे
  51. 3:37–3:42माने स्थानियता, कषित्रियता, आ रष्ट्रियता करक्षा करब
  52. 3:42–3:45हमेक्ते सीथा उदाहरन दैच्ची
  53. 3:45–3:50पिदिन्ती अशोग कुमारक एक तेल्गु उपन्यास अचे सदालेल मित्र
  54. 3:50–3:53पीजेलक्ष्मी एक्रा अंग्रेजी में अनुवाद केलनी
  55. 3:53–3:56अटकर बाद गजंद्र ताकुरेक्र मिठ्ली में
  56. 3:56–3:58आँ, कलंदर समुदायक कताज.
  57. 3:58–4:03भलकल, उपन्यासक केंद्र में कलंदर समुदायक एक्ता व्यकती अचे.
  58. 4:03–4:10इमाम, उक्रा आपन भालुसन जे असीम प्रेम अचे, अदूसर देस सरकारी प्रतिबंदख कारने,
  59. 4:10–4:13उकर जे पारमपर एक आजीविका पर प्रहार होगता चे,
  60. 4:13–4:16उकर दर्द एही उपन्यासक मरम थेक.
  61. 4:16–4:20जखनाहा इप रड़ची तक यहा के लगे तचे,
  62. 4:20–4:26जे इमाम अभालुक विस्थापनक दर्द अंग्रेजिक माद्ध्यम सा अलापर कोम्बोगेल?
  63. 4:26–4:27मुदा जे...
  64. 4:27–4:33नहीं, करनजे मुल मान्विय संगर्ष अचे उ उबाशक मोताज नहीं हैता चे,
  65. 4:33–4:35अंगरेजी एते बादख नहीं अचे
  66. 4:35–4:37मात्र एक ता पार्दशी से तु खेक
  67. 4:37–4:41एक मिनेट, हम आहांके एते रोकी रहाल जी
  68. 4:41–4:44आहां जे इमाम कता कुदारन दिलाव
  69. 4:44–4:46हम ताही सपूड सहमच जी
  70. 4:46–4:48जे कतानक मने
  71. 4:48–4:50जे मैक्रो लेवल कोजे दर्द अची
  72. 4:50–4:52अप पूँची जाएते ची
  73. 4:52–4:53मुदा आहा भूजु
  74. 4:53–4:55साहिते मात्र कतानक ने दीक
  75. 4:55–4:56तफर की दीक
  76. 4:56–4:58साहिते उही मातिक
  77. 4:58–5:00माएक्रो लेवल के दूनी दीक
  78. 5:00–5:02आहा आदिवासी साहिते गब करू
  79. 5:02–5:04जगन भरत मानजी जका
  80. 5:04–5:05उडिया आदिवासी कवी
  81. 5:05–5:13वा उ बासु देव सुनानेक रष्ना सेलें राउत्रे सम भगगा अंग्रेजी का मख्मली रस्ता सम्यत्ली में आवाई तची तकी होई तची
  82. 5:13–5:16की होई तची बहुत नी कनवाद ची यो
  83. 5:16–5:19हम बुजहावाई ची जे अंग्रेजी का फिल्तर किना काज करे तची
  84. 5:19–5:23जखन उडिशा को कोनो आदिवासी, अपन जंगलक थेटगारी,
  85. 5:23–5:26अपन अख्रोषके मुल बाशा में वेक्त करेत अची,
  86. 5:26–5:28तो उई में एक ता माटिक भास होई तची.
  87. 5:28–5:33मुदा अंग्रेजी बाशाक अपन एक ता मने सब्यध अ अकाद्दमिक व्याक्रन होई तची.
  88. 5:33–5:38अंग्रेजी के आहा एतिक सब्व्या आकाद्मिक जेग मानी रहल ची.
  89. 5:38–5:48कारन उई ही थेट गारी वा आक्क्रोष्के प्रोटेस्ट आंगग वा मरजिनलाइस्ट जहन सुसंस्क्रित शब्द में बदली देप आची.
  90. 5:48–5:54अज्यक्शन अनुवादक उही प्रोटेस्ट के मैठली में विरोद वा प्रतिरोद लिखाइच्छतिन,
  91. 5:54–6:00तो अदिवासी जिवनक उ टेट विद्रोही स्वर एक ता अकाटमिक रिपोट जका लागी लगे तची.
  92. 6:00–6:07तुई अस्तरी अनुवाद यतार्थ के रिपोट में बदली देटची आई यहे हमर सबसे पहां चिंता चे.
  93. 6:07–6:12रिप्टाट बदली तची जे आहां एक वीषी हे द्रिष्टी से दिखी रहाजची.
  94. 6:12–6:15आग्रेजी भाशा केवल सब्व्य आए अकाद्मेक नहीं आचे.
  95. 6:15–6:18एकर अपन अक्रामक्ता से हो अचे
  96. 6:18–6:22हमर नहीं लगेत जे अध्येत अक्रामक्ता अंग्रेजी में आवी सके चे
  97. 6:22–6:23आवी सके चे
  98. 6:23–6:27आजा आजा दर्द आवक्रोष के रिबोट में बदली जे बाग बात कहे
  99. 6:27–6:32चित आईपोत्ठी मे दरज तेलगु दलित महिला कवेत्री सबख्र रच्ना के देखू.
  100. 6:32–6:34इहमर सब से मस्वुद प्रमान अचे.
  101. 6:34–6:45पोथि में जे सुभद्रा चल्लपली स्वरूप्रानी आ दरीषे शषी निर्मला सहित पाज्टा तेल्गु दलित महिला कवेत्रीक स्वरचे.
  102. 6:45–6:46आ, हम उखन्द पणने चे.
  103. 6:46–6:53तही जे जखन जे सुभद्रा लिक्ःचतीन जे साडी कोर हमर चाती पर पहरा दोर हैले,
  104. 6:53–6:57कप्टाने वाजक्ठन दरीशे शशीनिर मला का एच्छतीन
  105. 6:57–7:01जे हम रजोस्वला कप्टा ओडे रहल ची
  106. 7:01–7:06इप पंकती सब के पुरुशोट्तमक अंग्रेजी अनुवादक माद्ध्यम सा मेठिली मे आए लची
  107. 7:06–7:11की हा कबजने एते अंगरेजी क्वातानु कुलन काजका रहला चे
  108. 7:11–7:12दिखो आहा जे एप
  109. 7:12–7:15एक मेनेट हमरा पूरा करे दियों
  110. 7:15–7:19इस्त्री शरीर यों शोशन अ समाजिक उतपीडनक विरुद
  111. 7:19–7:23इजध तीवर नगन आ असहज करे वाला प्रतिरोद ची
  112. 7:23–7:28उता अंगरेजी तता कते तब आवरन के चीरी के बाहर आभी रहला चे
  113. 7:28–7:32दर्द के अपनेक्ता विश्व्यापी व्याक्रन होईता चे
  114. 7:32–7:34जे द्वीस्तर या अनुवादक बादों
  115. 7:34–7:38माने अपन पुश्वाख्रा मक्ताक संग्यो पस्ते तचे
  116. 7:38–7:43आँ आजी पद्देख उदारन दलन उनिष्छत रूप से हिलाक रक्षी दिवावाला ची
  117. 7:43–7:47मुदा एते आजे विष्व्याप्ती व्याक्रन का बात कही रहल ची
  118. 7:47–7:49हम्रा उही से आपती आचे
  119. 7:49–7:50आपती कि ये का ची?
  120. 7:50–7:52इत सर्वा मान ने सत्यतिक
  121. 7:52–8:00करन एप उत्फिक मुल दे वाखे कि आच, समनानतर कात करोट में होईब नहीं आची, वरन यी आची असल सत्तिर.
  122. 8:00–8:06ते परलेल लिस नाद दे मरजनल बद दे क्रुत, जकन दे एटेग प्रकर हो,
  123. 8:06–8:12जे आहां के असल सत्ते सोजा अनबाक अची, तो सत्ते विष्व व्यापी नहीं माने स्थानिये होई तची.
  124. 8:12–8:16मुदा स्तानिये सत्ते के हम वैस्विक बाशा में कई सके ची.
  125. 8:16–8:21आई, आब उज हूँ. आहां तलगु दलित महिलाक शारिदिक पीडा कुदारन देलो.
  126. 8:21–8:28मुता आहा सब पूछे ची, रजोस्वला वाज फातीजका शब्द लेल, तलगू मेजे तेट आंषलिक शब्दक प्रियोग भेल हैत,
  127. 8:28–8:34जक्रा मेक तविषे सामाजिक वंचनाग बोद होई तची, कि उ अंगरेजी क मेंस्ट्रल खलोथ में बची सकल हैत,
  128. 8:34–8:36अगरेजी उक्रा मेटिकलाईस कर देताची
  129. 8:36–8:39आजक्कन अनुवादक अंगरेजी से मैठली करे चती
  130. 8:39–8:41तो ख्रा तलगु कोही तेट शब्दक दूनी नहीं
  131. 8:41–8:45बरु अंगरेजी कोही मेटिकल या अक्टेमिक शब्दक दूनी सूनाई देच्छैं
  132. 8:45–8:48इत्वे नहीं, गुज्राती दलिट सहिटे क्हन्द के देखो.
  133. 8:48–8:51गुज्राती दलिट सहिटे मिकी समस्स्स्स्स्या आज्फी आब.
  134. 8:51–8:54उत्टेट लिए तो हिमांग देसाई जका उदभद्विद्वान
  135. 8:54–8:57एक रा मुल गुज्राती सा अंगरेजी में लागे अच्छती.
  136. 8:57–9:01उ, समस्स्सा हिमाम बेसाएक विद्वत्तक नी अच्छी
  137. 9:01–9:05समस्स्स्स्स्या उही भाशाई मुद़्ा विनी मैं
  138. 9:05–9:08मैंने लिंविस्टिक करन्सी अच्छेंज के अच्छी
  139. 9:08–9:10इ, उही ना अच्छी
  140. 9:10–9:13जे ना आहा आपन तका के पहले डौलर में बड़िलियो
  141. 9:13–9:15तब आप आप यादालर के दो सद देसक मुद्डरा में
  142. 9:15–9:18तआ आप याप अची जे अनुवाद में
  143. 9:18–9:22रव ऐच्चेंज में आप तिछु कमिषन काटलील जाईत अची
  144. 9:22–9:26उमेश सुलंकी अनिश गरंगे करचना
  145. 9:26–9:28वा नजीर मनसुरी कता
  146. 9:28–9:30समुद्डरी भाज आहंगामा
  147. 9:30–9:32जे मुस्लिम याठार्त के देखावेत अची
  148. 9:33–9:37एही रचना सब में जे सुख्श्म समाजिक भेद भाव अचे
  149. 9:37–9:40जे क्रहाम अंग्रेजी में माएक्रो अग्रेश्चन कहच्छी
  150. 9:41–9:44उ मुल गुज्राती मुहावरा में नुकायल रहेत अची
  151. 9:44–9:48मुदा अनुवादक्त अपनन काज इमान्दारी सा केने चतिन ना?
  152. 9:48–9:52अखेने चतिन मुदा कल कलूरी इनो तक
  153. 9:52–9:57तेलगु कता काखी मने कवा अब विनोदिनिक बलाक इंक
  154. 9:57–10:02जकल लगु कता के लिल जाए एहमे दलिद जीवन के ज़ोट चोट चोट आप मान अचे
  155. 10:02–10:05उक्रा सोजे मात्र भाश़्ा सा मेत्लीम अनलासा
  156. 10:05–10:09जे प्रभाब पडदित, उई दूईस तरीये प्रकरिया
  157. 10:09–10:11कतिपी नहीं दोसा के तची.
  158. 10:11–10:12गजंद्र ताकृर के सोजा,
  159. 10:12–10:14गुज्राती वद तेलगु के बूथ नहीं,
  160. 10:14–10:16अंगरेजी के बूथ थबद्धाडचल.
  161. 10:16–10:19उ एक ता च्याया के अनुदीत कर रहेल चला?
  162. 10:19–10:25देखो, हम आहाक यी कमिष्षन कतबाक वा मुद्द्रा विन्नमाय वाला तर्क भुज्रहल ची.
  163. 10:25–10:28मुदा, हम एक रा दोसा रूपे रखभ.
  164. 10:28–10:33आहा जे मोल व्याक्रन अ सान्सक्रतिक व्याक्रनाक बात कही रहल ची.
  165. 10:33–10:35आजे किछ कमिष्ट्ट्बाग बाद कही रहल ची
  166. 10:35–10:40तकर समादान एहे पोठी मे बहुत वैग्जानिक दंग से देलगे लगषी
  167. 10:40–10:41की समादान आजे
  168. 10:41–10:44ए अनुवादक कोनो यान्त्रिक प्रक्रिया नहीं चल
  169. 10:44–10:48जे अंग्रीजिक शब्द कोश उठाक मैठली मेराखी दिलगेल
  170. 10:48–10:52पीजे लक्ष्मी आपन अनुवादक कन वेदन में सपष्ट केने चतीन
  171. 10:52–10:57जे संसक्रती विष्च्ट शब्ट सबके केना सन्रक्षत कयलगे लची
  172. 10:57–11:00इजे आहा कमिशन कटबा कदर देखा रहा रहा लगी
  173. 11:00–11:04उक्रा रोग बाक लेल पोथिक आंट में एक ता विस्त्रत शब्दावली
  174. 11:04–11:06मने गलोसरी देलगे लची
  175. 11:06–11:11अनुवादक, मुल भाशाक रंग आगगंद बचेबाग प्रती पुन सचेत छती
  176. 11:11–11:15मुदा शब्दावली देब आपन आप मेही इस्विकार करब नही थिक
  177. 11:15–11:18जे दूईस्तर्या प्रक्रिया विषल बहर हल आचे
  178. 11:18–11:22एक दम नहीं यी विषलता नहीं यी इमान्दारी तीक
  179. 11:22–11:27नर्सिंग महताक भक्ति कविता जिगान्दीजी के बहुत प्रियचल
  180. 11:27–11:30वा अशोग हेगरे कनन कता अनार
  181. 11:30–11:34इसब आपना प्रतिकात्मकता ताहीले नहीं गमावाईता चे,
  182. 11:34–11:38करन अनुवादक, औही पारिभाशिक, असानस्क्रितिक शब्त सबके,
  183. 11:38–11:41मेठली में जहिनाक तहीना गरहन केने चती.
  184. 11:41–11:44इस कोनो मेटिकलाइस कराई नहीं भिल?
  185. 11:44–11:46मुता कविताक प्रवाएक की.
  186. 11:46–11:54जे शब्द अंग्रेजी में नहीं अटी सकईच्छल, जे कर अंग्रेजी अपन वातानुकुलित कक्ष में बान्द नहीं सकईच्छल,
  187. 11:54–11:59अखरा अनुवादक भिना कोनो चेडचाडक मुल रूपन मेठिली मे आनिका,
  188. 11:59–12:02शब्दावलिक माद्ध्यम सबज़ेवा प्रयास केने चति,
  189. 12:02–12:06इस समजोता नहीं, बरु सांस्क्रितिक आदान प्रदानक
  190. 12:06–12:09एक ता प्रोड अपपरिपक को विदिठिक,
  191. 12:09–12:13बिना शब्दावलीक आहा कोनो दोसर संसक्रितिके
  192. 12:13–12:16उसत ही रुप सत बुजी सकेच्छी
  193. 12:16–12:18मुदा अकर गराई में नहीं जासकेच्छी
  194. 12:18–12:21आम्रा इमामे में कोनो आपती नहीं
  195. 12:21–12:24जि शब्दावली एक ता नीक अकडामिक टूल थेख
  196. 12:24–12:27मुदा साहित्य विषेस कर कविता
  197. 12:27–12:34अगर उजे इमोशनल इम्पक्त जी उद जाई तची अची वो भी वो बगाग लेल पन्ना उल्टित कप पोथिक अन्त में शबडावली देख़े परिचचे है तो उगर उगर उजे इमोशनल इम्पक्त ची उद जाई थची.
  198. 12:34–12:36साहित्त रस्तिक, प्रवात्तिक
  199. 12:37–12:39मुदा की चु भुज्भालेल आग...
  200. 12:39–12:41अविता पड़िप काल, जखन पाथख के,
  201. 12:42–12:46अडीशाक वा गुज्रातक कोनो रंग आग गंद भुज्भाक लेल,
  202. 12:46–12:50पन्ना उल्टित कप वो थिक अंत में शब्दावली देखे परिच्चे है,
  203. 12:50–12:52तो उ रस्भंग होई तची
  204. 12:52–12:55उकर उजे ख़ाए उम्पक्त थची उ तूड़ जाए तची
  205. 12:55–12:57हम्रा इब दावावा
  206. 12:57–12:59जे की दर्द महसुस करबाक लेल
  207. 12:59–13:01शब्दावलिक अवस्शकता होग चही
  208. 13:01–13:03नहीं, दर्द लेल ने
  209. 13:03–13:05मुदा संदर्ब लेल
  210. 13:05–13:07आ, आ, एही पोती में
  211. 13:07–13:11अदूता बाशाख दीचक असली साहितिक से तू फिक,
  212. 13:11–13:13जते अनवादा का पाटख के भीच में,
  213. 13:13–13:16कोनो अंग्रेजिक पार्दरषी मुदा अभेदनाग,
  214. 13:16–13:19अग्रेजिक पार्दरषी मुदा अभेदनाग,
  215. 13:19–13:21बिना किसी मद्धबाशाक
  216. 13:21–13:24तकी उही में शब्दावली कोनो बैसाकी काज पडेतची
  217. 13:24–13:25नहीं नहीं
  218. 13:25–13:28पाथक सोजे प्रवासी जीवना नारी वेदनाक
  219. 13:28–13:30उही रस में दूभी जाईतची
  220. 13:30–13:33उदूटा बाशाक दीचक असली साहितिक सेटु फिक
  221. 13:33–13:39जटे अनवादका पाथक के भीच में कोनो अंग्रेजिक पार्दरशी मुदा अबहेद काछ नाया ची,
  222. 13:39–13:44बिखारी ताकृरक कहन्द इसिद करे तची, जे सोजे अनवादक सामर्थ की होई तची,
  223. 13:44–13:47अद्वीस तर ये अनवाद में हम की गमा रहल ची.
  224. 13:47–14:17अग, उद़, अग, उद़, अग, उद़, अग, अग, उद़, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग,
  225. 14:17–14:30बिखारी ताकुरक भोज्पूरी सां सोदे मेत्ली में अनुवाद करब कुनो चमतकार नहीं तेख, उ बहुत स्वाभावे कची, उही मतकोनो अनुवादक के शब्दावली कावषकता नहीं परत.
  226. 14:30–14:32उ तो अची मुदा की?
  227. 14:32–14:45अदा की? आहा एई अपेख्षा करे ची, जे कननण तेलगु वक कश्मीरी जगा सर्था भिन्न भाशाई परिवारक रच्ना के, जकन मेठली में आनल जाएत, तो औहो उत्बे साज्जता साभी जाएत.
  228. 14:45–14:49रेहमान रही जे ग्यान पीट पुरस्क्रित कष्मीरी कवी चती
  229. 14:49–14:52हुनक सूफी परमप्रा आदूनिक वेदनाक अद्बुद संगम
  230. 14:52–14:55कि बिना असल संदुक अंग्रेजी अनुवादक
  231. 14:55–14:57मेठली पाथक दरे पूची सकच्छल?
  232. 14:57–15:00इह कती न छी, उहम आने ची
  233. 15:00–15:06भारत जे का बहुबहाशी देश में जदे सेक्डो बहाशा ची,
  234. 15:06–15:09उते हर भाशा ग्याता के खूजनाई,
  235. 15:09–15:13अटाई सं सोजे अनुवाद करनाई व्यावहारेक ची.
  236. 15:13–15:15आहा की भिखारी ताकृर वला तरक ची,
  237. 15:15–15:18उस से दान्तिक रोपें सुन्दर भाउसके चे,
  238. 15:18–15:22मुदा व्यावाहारेक द्हरातल परी असमभव अची
  239. 15:22–15:29अ, हम आगा की बात माने ची, जे भोजपृरी आ मैठलीक सामिप्ये एक ता विशेश परस्तिती अची
  240. 15:29–15:33अ, कननड वक शमीरी सा, सोजे अनुवाद करव कषिन अची
  241. 15:33–15:36मुदा हमर तरक, केवल सामिप्यक नहीं अची
  242. 15:36–15:40हमर तरक अनुवादक प्रक्रिया सुत्पन्ना प्रबावक अची
  243. 15:40–15:42तक की हम अनुवादक कर भी चोड़ दी?
  244. 15:42–15:43नहीं
  245. 15:43–15:46मुदा कठिनाए क समादान यी नहीं भहसा के ता ची
  246. 15:46–15:49जे हम सत्ट्यक डालूशन के सुएकार कली
  247. 15:49–15:56जगन हम दूई स्तरीय अनुवादक महीमा मन्दन करेच्छी, ता हम कतो नकतो इस्विकार कर रहल ची,
  248. 15:56–16:01जे हम मूल लेखक खटेट सत्यक नहीं बरू अंग्रेजी दवारा प्रस्तूत कयल गेल,
  249. 16:01–16:05उकर एक ता अकाद्द्मिक संसकरन के आपन मुख्यदारा मानी रहल ची.
  250. 16:05–16:07मुदा उ सत्तिक अचीने
  251. 16:07–16:12जे समनान्तर सत्तिक अची उक्रा बिनाकुन विदेशी भाशाक चश्माक देखभ,
  252. 16:12–16:18बेसी प्रभाव्शाली, बेसी आत्मिय, अबेसी यतार्थ परग भूसकत अची.
  253. 16:18–16:21हमी ने कहे ची जे इपोती महत्वपुन नहेची,
  254. 16:21–16:26मुदा हम इई अबश्य कहव, जे अंग्रेजीज़का मद्ध्यबाशाक प्रयोग एक ता मजबूरी भोसकत अची,
  255. 16:27–16:30एक रहाम आदर्ष सहेट्तिक सेटू नहीं माने सकत ची,
  256. 16:30–16:34इसत्ते दरी पहुच्बाक लिलेक्त बैसाखी आची, सत्तिक आपन पाओ नहीं.
  257. 16:34–16:39तब आमेक्रा मजबूरी नहीं बरू एक ता एतिहासिक स्ट्रातेजी मानेच्छी
  258. 16:39–16:45विचार करू जो हम आँ आँ केवल सोजे अनुवादक आदर्ष स्तितिले बैस रहितों
  259. 16:45–16:51तक्ये अथाइस्ता सीमान्त अदलित लेक्ह काक आवाज कही यो मेत्हिलित मुक्हिदारा में आवी पपआइत?
  260. 16:51–16:55अज्समबखत है नहीं उ बहुत समः लोलिलेत.
  261. 16:55–17:00बिल्कुल नहीं हमर मानाव अची जे अनुवाद कोनो गरी तक समिकरन ने थेक
  262. 17:00–17:03जदई दूई जोड दूई हमेशा चार होई ता अची.
  263. 17:03–17:08अनुवाद एक ता असमबव कार्यके समबव बनेबाग कला थी.
  264. 17:08–17:11एक संक तेलगु कन्नड उडिया गुज्राती,
  265. 17:11–17:14अकश्मीरी साहित्ते के आ अहो कोनो मुख्यदाराक
  266. 17:14–17:23उगर उद्याग रोमान्टिक साहित्य नहीं बरू हाँशी एक दलित आ अदिवासी साहित्य के मेतलिक मुख्यदारा में लोईबख एक ता पैग सादना दिक.
  267. 17:23–17:24आव उताशे.
  268. 17:24–17:28इपो थी अपनो देश में पूनता सबहल अचे
  269. 17:28–17:30जे ई मैठली पाटख के
  270. 17:30–17:32उही समानानतर सत्यसा
  271. 17:32–17:34परिचित कर आरा अचे
  272. 17:34–17:37जक्रा साव अन्निता सरवता वन्चित रही जता
  273. 17:37–17:40किछ गमाबक अनुवादक नियती ख्छ
  274. 17:40–17:42मुदा जे व्रहत साहित
  275. 17:42–17:45यही माद्ध्यम्सा हम्रा सबदरी पहुचे लची
  276. 17:45–17:49उकर मोल उही हेरायल शब्दसा कतव देशी आची
  277. 17:49–17:51आग यी बाज सही आची
  278. 17:51–17:54जे वनजित रभासे कुछु पायलिनाय बहतर आची
  279. 17:54–17:58ये एक ता बहुमुल्ले सांसक्रतिक अबिलेक है इंपे कुनु संदेहनाय
  280. 17:58–18:02विमर्श्ख मज्शा हम्रा सब के इप्रष्न उठाभा ही पडद,
  281. 18:02–18:06जे अनुवादक इप्रक्रिया उही सीमान तक आवाजक आस्ली अनर्शेप,
  282. 18:06–18:08माने स्वामित्व कख्रा देदेदेची.
  283. 18:08–18:09लेखख के ही देदेची.
  284. 18:09–18:13जखन आदिवासी वा दलिट साइत तक अनुवाद होगते जे,
  285. 18:13–18:16तो उ मात्र एक तक कताक रूपान्त्रन नहीं होगते जे,
  286. 18:16–18:19उएक तक समाजिक चेतना खस्तान्त्रन होगते जे.
  287. 18:19–18:24जखन उचेतना अंगरेजी गलोबल साचा मे दारी देल जाई तजे,
  288. 18:24–18:30तो उ आपन मुल आख्रामक्ता गमाको एक ता कनजमेवल वा उपभोग वस्तू बनी जाई ताई ताई.
  289. 18:30–18:34जक्रा मैतलिक भद्र लोक आपन द्रोंग रूम बैस के पडी सके ताई ताई ताई.
  290. 18:34–18:40इपो थी इबहस थाडा करी तचे, जे की हम अनुवादक एई सीमा के सुएकार कर ली,
  291. 18:40–18:45वब हविश्य में सोजे अनुवादक औही कथिन मुदा सत्तनिष्ट मारग कोजी करी.
  292. 18:45–19:15अग, ये एक तब बहुत महत्त्पून बिंदू अच्छे, जटे आविक हमार आगक द्रिष्टिकोन एक दूस्रास अलग भोजाई तच्छे, अच्छछछछछछछछछछछछछछछछछछछछछछछछछछछछछछछछछछछछछछछछछछछछछछछछछछ�
  293. 19:15–19:18पावल गेलक भीचक संटूलन लगा बनाल रहेत जे.
  294. 19:18–19:19बलकुल.
  295. 19:19–19:22और अंतत तव इन निरनेता पाथा के ही करवा का ची.
  296. 19:22–19:26श्रोता गन स्वैम इपोती पडी का निरदारत कर दी
  297. 19:26–19:29जे अनवादक इ रंग अग गंद
  298. 19:29–19:31उनक खतिक प्रभवित करे च्यन
  299. 19:31–19:34कि ओई स्तरी एक खाचा कचा खाडकी सा आभी रहेल द्रिष्छ
  300. 19:34–19:37उनका उही उड्या गाम का यदार्त
  301. 19:37–19:40वो तेलगु दलित महीला का दर्द दरी लोग जाएच्छाएं
  302. 19:40–19:43वो फेर अंग्रेजिक उख्मप्रेस्ट फाटल भीच में
  303. 19:43–19:47उनका सत्तिक पुरा विस्तार दिख्वाजर रोग देच्छें
  304. 19:47–19:48तेख कहला वहां
  305. 19:48–19:58बाशा एक ता नदी जकान ची जजते सगुजरही तची उते के माटी किछ आश आपन संगे लेजाई तची आप किछ आपन पिचार चोड़दी तची.
  306. 19:58–20:04इप पोठी उई नदी के एक तो विशाल प्रवाह थे विमरषक इमच से आई एतबे.
  307. 20:04–20:10तद्दीबेट सुन्बाकले लहां सब का बहुत-बहुत दन्नेवाद संवाद जारी रहे बाखचाही.

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दर दिबेट्र में आहा सब के स्वागत अचि। कल्पना करू उदिषा कुनो सदूर गामक मैंने अग्टा अदिवासिक जि पीडा अच्छे जे उकर खेट आख्रोष अच्छे बिल्कुल उजे माटिक दर्द हो एच्छे मुता, उही पीडा के पहले आहा एक ता अपनी वेशिक बाशा मने अंग्रेजी में अनुवात करेच्छी आत टकर बाद उही अंग्रेजी सों उक्र मेठली में आने चे तक की उही आदिवासिक गामक माटिक गंद, उकर अस्ली सत्ति हम्रा आहादरी पहुचत? वाज़, फेर भीचक उही आंग्रेजिक वातनु कुलित कक्ष्मे मने उ अक्रोश मात्रेक्ता अकाद्मेक प्रतिद्धूने बनी करो जाएत. एक्दम. और आई हमर सब कविमर्षक केंद्र में आही प्रष्नपर आदारित एक्ता असादारन साइत तिक चाजचे गजेंद्र ताकृर समग्र क्हन्द्दू, गद्यः पद्यबार्तिय अनुवाद, विदेः प्रकाशनक एप फोथी, आहा भूँजु कुनो सामान न अनुवादक कपोथी नहीं तेक, इटेलगु उड्या गुज्राति कननड भोज्पूरी, भूजपूरी आख कशमीरी सहित यक मेठली अनवादा के टा बहुत पैग संग रहे थे. आजेकर समपादन आशिस अनजिनार के ने चाती. तीक. मुदा एही पोठी एक जे सबसे पएख विषिष्टता आची और जेकरा पर हम्रा सब के आए बहुस खिन रित आची उआची एकर दूईस तर्ये अनवाद प्रक्रिया माने 2-Tier Translation Process मुल बाशा सा अंग्रेजी अफिर अंग्रेजी सा मेठली हमर इद्रध माननता आची जे अंग्रेजी जका मद्ध्यबाशाक प्रेोग कै कग बिबिन न भार्त्य बाशाक, विशेष्कर सीमान्तक साहित्यक मेठ्ली अनुवाद करब ये एक ता एतिहासेक आप पुरनतह सफल माद्ध्यम चल बिना एह से तुके य असमबवचल आँ... देबेट के एही मंज पर हमर सयो अभिवादन सुव्कार करूू आहा जो प्रश्नुस श्वर्वात के लो, उख्राहम आरो भीतर दरी लो जाएची. हमरा इस्विकार करवा में कोनो संकोच नहीं, जी इप्रयास बहुत पएग भगीरत प्रयाच चल. एक संक एतेग भासाक सहिते के मेतली में आनबाक जी संकलप समपादक आ अनुवादक लेने चती ओ अतिहासी कची बलको अतिहासी कची मुदा देखो हमर माननाया जी जकन आहा एक ता दूी स्तरी अनुवाद करेची विसेस कर जखन उसहित ते सीमान्तक होए, हाश्या कोए, तो उ अंगरेजीग जे फिल्टर अचीने, उ उही मुल दर्दक तिख्षनता के कम के देटची. तिख्षनता के कम कर देटची. कोना? इओईना आए, मने जना आहा कोनो बहुत उच्छ रीजलूशनक, जना है रेजौलुशन सुन्दर रंगीं चित्र के, e-mail से भेजवाक लेल, okra kompresko ka chot file banadi, अखरा कोनो पैग होडिंग पप्रिंट करी, की होएत? okra piksel fart jaitechi. अखर पिक्सल फाट जाईतची. अगर जमीनी आख्रामक्ता, अगर जे आस्ली विद्रोही व्याक्रन्चे, उ कतुनकतु खंडिद भाजाई तची. देखो, आहा पिक्सल पाट्बाक जे इव्मा देलों, उ सुन्बा में तबहुत निक लगाई तची. अग पिक्सल पाट्बाक जे इ उप्मा देलों उसुन्भा मेत बहुत निक लगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगग� अनुवादक गजेंदर ताकृर कदरशन इते एक एक इगदम सपष्ट अचे माने स्थानियता, कषित्रियता, आ रष्ट्रियता करक्षा करब हमेक्ते सीथा उदाहरन दैच्ची पिदिन्ती अशोग कुमारक एक तेल्गु उपन्यास अचे सदालेल मित्र पीजेलक्ष्मी एक्रा अंग्रेजी में अनुवाद केलनी अटकर बाद गजंद्र ताकुरेक्र मिठ्ली में आँ, कलंदर समुदायक कताज. भलकल, उपन्यासक केंद्र में कलंदर समुदायक एक्ता व्यकती अचे. इमाम, उक्रा आपन भालुसन जे असीम प्रेम अचे, अदूसर देस सरकारी प्रतिबंदख कारने, उकर जे पारमपर एक आजीविका पर प्रहार होगता चे, उकर दर्द एही उपन्यासक मरम थेक. जखनाहा इप रड़ची तक यहा के लगे तचे, जे इमाम अभालुक विस्थापनक दर्द अंग्रेजिक माद्ध्यम सा अलापर कोम्बोगेल? मुदा जे... नहीं, करनजे मुल मान्विय संगर्ष अचे उ उबाशक मोताज नहीं हैता चे, अंगरेजी एते बादख नहीं अचे मात्र एक ता पार्दशी से तु खेक एक मिनेट, हम आहांके एते रोकी रहाल जी आहां जे इमाम कता कुदारन दिलाव हम ताही सपूड सहमच जी जे कतानक मने जे मैक्रो लेवल कोजे दर्द अची अप पूँची जाएते ची मुदा आहा भूजु साहिते मात्र कतानक ने दीक तफर की दीक साहिते उही मातिक माएक्रो लेवल के दूनी दीक आहा आदिवासी साहिते गब करू जगन भरत मानजी जका उडिया आदिवासी कवी वा उ बासु देव सुनानेक रष्ना सेलें राउत्रे सम भगगा अंग्रेजी का मख्मली रस्ता सम्यत्ली में आवाई तची तकी होई तची की होई तची बहुत नी कनवाद ची यो हम बुजहावाई ची जे अंग्रेजी का फिल्तर किना काज करे तची जखन उडिशा को कोनो आदिवासी, अपन जंगलक थेटगारी, अपन अख्रोषके मुल बाशा में वेक्त करेत अची, तो उई में एक ता माटिक भास होई तची. मुदा अंग्रेजी बाशाक अपन एक ता मने सब्यध अ अकाद्दमिक व्याक्रन होई तची. अंग्रेजी के आहा एतिक सब्व्या आकाद्मिक जेग मानी रहल ची. कारन उई ही थेट गारी वा आक्क्रोष्के प्रोटेस्ट आंगग वा मरजिनलाइस्ट जहन सुसंस्क्रित शब्द में बदली देप आची. अज्यक्शन अनुवादक उही प्रोटेस्ट के मैठली में विरोद वा प्रतिरोद लिखाइच्छतिन, तो अदिवासी जिवनक उ टेट विद्रोही स्वर एक ता अकाटमिक रिपोट जका लागी लगे तची. तुई अस्तरी अनुवाद यतार्थ के रिपोट में बदली देटची आई यहे हमर सबसे पहां चिंता चे. रिप्टाट बदली तची जे आहां एक वीषी हे द्रिष्टी से दिखी रहाजची. आग्रेजी भाशा केवल सब्व्य आए अकाद्मेक नहीं आचे. एकर अपन अक्रामक्ता से हो अचे हमर नहीं लगेत जे अध्येत अक्रामक्ता अंग्रेजी में आवी सके चे आवी सके चे आजा आजा दर्द आवक्रोष के रिबोट में बदली जे बाग बात कहे चित आईपोत्ठी मे दरज तेलगु दलित महिला कवेत्री सबख्र रच्ना के देखू. इहमर सब से मस्वुद प्रमान अचे. पोथि में जे सुभद्रा चल्लपली स्वरूप्रानी आ दरीषे शषी निर्मला सहित पाज्टा तेल्गु दलित महिला कवेत्रीक स्वरचे. आ, हम उखन्द पणने चे. तही जे जखन जे सुभद्रा लिक्ःचतीन जे साडी कोर हमर चाती पर पहरा दोर हैले, कप्टाने वाजक्ठन दरीशे शशीनिर मला का एच्छतीन जे हम रजोस्वला कप्टा ओडे रहल ची इप पंकती सब के पुरुशोट्तमक अंग्रेजी अनुवादक माद्ध्यम सा मेठिली मे आए लची की हा कबजने एते अंगरेजी क्वातानु कुलन काजका रहला चे दिखो आहा जे एप एक मेनेट हमरा पूरा करे दियों इस्त्री शरीर यों शोशन अ समाजिक उतपीडनक विरुद इजध तीवर नगन आ असहज करे वाला प्रतिरोद ची उता अंगरेजी तता कते तब आवरन के चीरी के बाहर आभी रहला चे दर्द के अपनेक्ता विश्व्यापी व्याक्रन होईता चे जे द्वीस्तर या अनुवादक बादों माने अपन पुश्वाख्रा मक्ताक संग्यो पस्ते तचे आँ आजी पद्देख उदारन दलन उनिष्छत रूप से हिलाक रक्षी दिवावाला ची मुदा एते आजे विष्व्याप्ती व्याक्रन का बात कही रहल ची हम्रा उही से आपती आचे आपती कि ये का ची? इत सर्वा मान ने सत्यतिक करन एप उत्फिक मुल दे वाखे कि आच, समनानतर कात करोट में होईब नहीं आची, वरन यी आची असल सत्तिर. ते परलेल लिस नाद दे मरजनल बद दे क्रुत, जकन दे एटेग प्रकर हो, जे आहां के असल सत्ते सोजा अनबाक अची, तो सत्ते विष्व व्यापी नहीं माने स्थानिये होई तची. मुदा स्तानिये सत्ते के हम वैस्विक बाशा में कई सके ची. आई, आब उज हूँ. आहां तलगु दलित महिलाक शारिदिक पीडा कुदारन देलो. मुता आहा सब पूछे ची, रजोस्वला वाज फातीजका शब्द लेल, तलगू मेजे तेट आंषलिक शब्दक प्रियोग भेल हैत, जक्रा मेक तविषे सामाजिक वंचनाग बोद होई तची, कि उ अंगरेजी क मेंस्ट्रल खलोथ में बची सकल हैत, अगरेजी उक्रा मेटिकलाईस कर देताची आजक्कन अनुवादक अंगरेजी से मैठली करे चती तो ख्रा तलगु कोही तेट शब्दक दूनी नहीं बरु अंगरेजी कोही मेटिकल या अक्टेमिक शब्दक दूनी सूनाई देच्छैं इत्वे नहीं, गुज्राती दलिट सहिटे क्हन्द के देखो. गुज्राती दलिट सहिटे मिकी समस्स्स्स्स्या आज्फी आब. उत्टेट लिए तो हिमांग देसाई जका उदभद्विद्वान एक रा मुल गुज्राती सा अंगरेजी में लागे अच्छती. उ, समस्स्सा हिमाम बेसाएक विद्वत्तक नी अच्छी समस्स्स्स्स्या उही भाशाई मुद़्ा विनी मैं मैंने लिंविस्टिक करन्सी अच्छेंज के अच्छी इ, उही ना अच्छी जे ना आहा आपन तका के पहले डौलर में बड़िलियो तब आप आप यादालर के दो सद देसक मुद्डरा में तआ आप याप अची जे अनुवाद में रव ऐच्चेंज में आप तिछु कमिषन काटलील जाईत अची उमेश सुलंकी अनिश गरंगे करचना वा नजीर मनसुरी कता समुद्डरी भाज आहंगामा जे मुस्लिम याठार्त के देखावेत अची एही रचना सब में जे सुख्श्म समाजिक भेद भाव अचे जे क्रहाम अंग्रेजी में माएक्रो अग्रेश्चन कहच्छी उ मुल गुज्राती मुहावरा में नुकायल रहेत अची मुदा अनुवादक्त अपनन काज इमान्दारी सा केने चतिन ना? अखेने चतिन मुदा कल कलूरी इनो तक तेलगु कता काखी मने कवा अब विनोदिनिक बलाक इंक जकल लगु कता के लिल जाए एहमे दलिद जीवन के ज़ोट चोट चोट आप मान अचे उक्रा सोजे मात्र भाश़्ा सा मेत्लीम अनलासा जे प्रभाब पडदित, उई दूईस तरीये प्रकरिया कतिपी नहीं दोसा के तची. गजंद्र ताकृर के सोजा, गुज्राती वद तेलगु के बूथ नहीं, अंगरेजी के बूथ थबद्धाडचल. उ एक ता च्याया के अनुदीत कर रहेल चला? देखो, हम आहाक यी कमिष्षन कतबाक वा मुद्द्रा विन्नमाय वाला तर्क भुज्रहल ची. मुदा, हम एक रा दोसा रूपे रखभ. आहा जे मोल व्याक्रन अ सान्सक्रतिक व्याक्रनाक बात कही रहल ची. आजे किछ कमिष्ट्ट्बाग बाद कही रहल ची तकर समादान एहे पोठी मे बहुत वैग्जानिक दंग से देलगे लगषी की समादान आजे ए अनुवादक कोनो यान्त्रिक प्रक्रिया नहीं चल जे अंग्रीजिक शब्द कोश उठाक मैठली मेराखी दिलगेल पीजे लक्ष्मी आपन अनुवादक कन वेदन में सपष्ट केने चतीन जे संसक्रती विष्च्ट शब्ट सबके केना सन्रक्षत कयलगे लची इजे आहा कमिशन कटबा कदर देखा रहा रहा लगी उक्रा रोग बाक लेल पोथिक आंट में एक ता विस्त्रत शब्दावली मने गलोसरी देलगे लची अनुवादक, मुल भाशाक रंग आगगंद बचेबाग प्रती पुन सचेत छती मुदा शब्दावली देब आपन आप मेही इस्विकार करब नही थिक जे दूईस्तर्या प्रक्रिया विषल बहर हल आचे एक दम नहीं यी विषलता नहीं यी इमान्दारी तीक नर्सिंग महताक भक्ति कविता जिगान्दीजी के बहुत प्रियचल वा अशोग हेगरे कनन कता अनार इसब आपना प्रतिकात्मकता ताहीले नहीं गमावाईता चे, करन अनुवादक, औही पारिभाशिक, असानस्क्रितिक शब्त सबके, मेठली में जहिनाक तहीना गरहन केने चती. इस कोनो मेटिकलाइस कराई नहीं भिल? मुता कविताक प्रवाएक की. जे शब्द अंग्रेजी में नहीं अटी सकईच्छल, जे कर अंग्रेजी अपन वातानुकुलित कक्ष में बान्द नहीं सकईच्छल, अखरा अनुवादक भिना कोनो चेडचाडक मुल रूपन मेठिली मे आनिका, शब्दावलिक माद्ध्यम सबज़ेवा प्रयास केने चति, इस समजोता नहीं, बरु सांस्क्रितिक आदान प्रदानक एक ता प्रोड अपपरिपक को विदिठिक, बिना शब्दावलीक आहा कोनो दोसर संसक्रितिके उसत ही रुप सत बुजी सकेच्छी मुदा अकर गराई में नहीं जासकेच्छी आम्रा इमामे में कोनो आपती नहीं जि शब्दावली एक ता नीक अकडामिक टूल थेख मुदा साहित्य विषेस कर कविता अगर उजे इमोशनल इम्पक्त जी उद जाई तची अची वो भी वो बगाग लेल पन्ना उल्टित कप पोथिक अन्त में शबडावली देख़े परिचचे है तो उगर उगर उजे इमोशनल इम्पक्त ची उद जाई थची. साहित्त रस्तिक, प्रवात्तिक मुदा की चु भुज्भालेल आग... अविता पड़िप काल, जखन पाथख के, अडीशाक वा गुज्रातक कोनो रंग आग गंद भुज्भाक लेल, पन्ना उल्टित कप वो थिक अंत में शब्दावली देखे परिच्चे है, तो उ रस्भंग होई तची उकर उजे ख़ाए उम्पक्त थची उ तूड़ जाए तची हम्रा इब दावावा जे की दर्द महसुस करबाक लेल शब्दावलिक अवस्शकता होग चही नहीं, दर्द लेल ने मुदा संदर्ब लेल आ, आ, एही पोती में अदूता बाशाख दीचक असली साहितिक से तू फिक, जते अनवादा का पाटख के भीच में, कोनो अंग्रेजिक पार्दरषी मुदा अभेदनाग, अग्रेजिक पार्दरषी मुदा अभेदनाग, बिना किसी मद्धबाशाक तकी उही में शब्दावली कोनो बैसाकी काज पडेतची नहीं नहीं पाथक सोजे प्रवासी जीवना नारी वेदनाक उही रस में दूभी जाईतची उदूटा बाशाक दीचक असली साहितिक सेटु फिक जटे अनवादका पाथक के भीच में कोनो अंग्रेजिक पार्दरशी मुदा अबहेद काछ नाया ची, बिखारी ताकृरक कहन्द इसिद करे तची, जे सोजे अनवादक सामर्थ की होई तची, अद्वीस तर ये अनवाद में हम की गमा रहल ची. अग, उद़, अग, उद़, अग, उद़, अग, अग, उद़, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, बिखारी ताकुरक भोज्पूरी सां सोदे मेत्ली में अनुवाद करब कुनो चमतकार नहीं तेख, उ बहुत स्वाभावे कची, उही मतकोनो अनुवादक के शब्दावली कावषकता नहीं परत. उ तो अची मुदा की? अदा की? आहा एई अपेख्षा करे ची, जे कननण तेलगु वक कश्मीरी जगा सर्था भिन्न भाशाई परिवारक रच्ना के, जकन मेठली में आनल जाएत, तो औहो उत्बे साज्जता साभी जाएत. रेहमान रही जे ग्यान पीट पुरस्क्रित कष्मीरी कवी चती हुनक सूफी परमप्रा आदूनिक वेदनाक अद्बुद संगम कि बिना असल संदुक अंग्रेजी अनुवादक मेठली पाथक दरे पूची सकच्छल? इह कती न छी, उहम आने ची भारत जे का बहुबहाशी देश में जदे सेक्डो बहाशा ची, उते हर भाशा ग्याता के खूजनाई, अटाई सं सोजे अनुवाद करनाई व्यावहारेक ची. आहा की भिखारी ताकृर वला तरक ची, उस से दान्तिक रोपें सुन्दर भाउसके चे, मुदा व्यावाहारेक द्हरातल परी असमभव अची अ, हम आगा की बात माने ची, जे भोजपृरी आ मैठलीक सामिप्ये एक ता विशेश परस्तिती अची अ, कननड वक शमीरी सा, सोजे अनुवाद करव कषिन अची मुदा हमर तरक, केवल सामिप्यक नहीं अची हमर तरक अनुवादक प्रक्रिया सुत्पन्ना प्रबावक अची तक की हम अनुवादक कर भी चोड़ दी? नहीं मुदा कठिनाए क समादान यी नहीं भहसा के ता ची जे हम सत्ट्यक डालूशन के सुएकार कली जगन हम दूई स्तरीय अनुवादक महीमा मन्दन करेच्छी, ता हम कतो नकतो इस्विकार कर रहल ची, जे हम मूल लेखक खटेट सत्यक नहीं बरू अंग्रेजी दवारा प्रस्तूत कयल गेल, उकर एक ता अकाद्द्मिक संसकरन के आपन मुख्यदारा मानी रहल ची. मुदा उ सत्तिक अचीने जे समनान्तर सत्तिक अची उक्रा बिनाकुन विदेशी भाशाक चश्माक देखभ, बेसी प्रभाव्शाली, बेसी आत्मिय, अबेसी यतार्थ परग भूसकत अची. हमी ने कहे ची जे इपोती महत्वपुन नहेची, मुदा हम इई अबश्य कहव, जे अंग्रेजीज़का मद्ध्यबाशाक प्रयोग एक ता मजबूरी भोसकत अची, एक रहाम आदर्ष सहेट्तिक सेटू नहीं माने सकत ची, इसत्ते दरी पहुच्बाक लिलेक्त बैसाखी आची, सत्तिक आपन पाओ नहीं. तब आमेक्रा मजबूरी नहीं बरू एक ता एतिहासिक स्ट्रातेजी मानेच्छी विचार करू जो हम आँ आँ केवल सोजे अनुवादक आदर्ष स्तितिले बैस रहितों तक्ये अथाइस्ता सीमान्त अदलित लेक्ह काक आवाज कही यो मेत्हिलित मुक्हिदारा में आवी पपआइत? अज्समबखत है नहीं उ बहुत समः लोलिलेत. बिल्कुल नहीं हमर मानाव अची जे अनुवाद कोनो गरी तक समिकरन ने थेक जदई दूई जोड दूई हमेशा चार होई ता अची. अनुवाद एक ता असमबव कार्यके समबव बनेबाग कला थी. एक संक तेलगु कन्नड उडिया गुज्राती, अकश्मीरी साहित्ते के आ अहो कोनो मुख्यदाराक उगर उद्याग रोमान्टिक साहित्य नहीं बरू हाँशी एक दलित आ अदिवासी साहित्य के मेतलिक मुख्यदारा में लोईबख एक ता पैग सादना दिक. आव उताशे. इपो थी अपनो देश में पूनता सबहल अचे जे ई मैठली पाटख के उही समानानतर सत्यसा परिचित कर आरा अचे जक्रा साव अन्निता सरवता वन्चित रही जता किछ गमाबक अनुवादक नियती ख्छ मुदा जे व्रहत साहित यही माद्ध्यम्सा हम्रा सबदरी पहुचे लची उकर मोल उही हेरायल शब्दसा कतव देशी आची आग यी बाज सही आची जे वनजित रभासे कुछु पायलिनाय बहतर आची ये एक ता बहुमुल्ले सांसक्रतिक अबिलेक है इंपे कुनु संदेहनाय विमर्श्ख मज्शा हम्रा सब के इप्रष्न उठाभा ही पडद, जे अनुवादक इप्रक्रिया उही सीमान तक आवाजक आस्ली अनर्शेप, माने स्वामित्व कख्रा देदेदेची. लेखख के ही देदेची. जखन आदिवासी वा दलिट साइत तक अनुवाद होगते जे, तो उ मात्र एक तक कताक रूपान्त्रन नहीं होगते जे, उएक तक समाजिक चेतना खस्तान्त्रन होगते जे. जखन उचेतना अंगरेजी गलोबल साचा मे दारी देल जाई तजे, तो उ आपन मुल आख्रामक्ता गमाको एक ता कनजमेवल वा उपभोग वस्तू बनी जाई ताई ताई. जक्रा मैतलिक भद्र लोक आपन द्रोंग रूम बैस के पडी सके ताई ताई ताई. इपो थी इबहस थाडा करी तचे, जे की हम अनुवादक एई सीमा के सुएकार कर ली, वब हविश्य में सोजे अनुवादक औही कथिन मुदा सत्तनिष्ट मारग कोजी करी. अग, ये एक तब बहुत महत्त्पून बिंदू अच्छे, जटे आविक हमार आगक द्रिष्टिकोन एक दूस्रास अलग भोजाई तच्छे, अच्छछछछछछछछछछछछछछछछछछछछछछछछछछछछछछछछछछछछछछछछछछछछछछछछछछ� पावल गेलक भीचक संटूलन लगा बनाल रहेत जे. बलकुल. और अंतत तव इन निरनेता पाथा के ही करवा का ची. श्रोता गन स्वैम इपोती पडी का निरदारत कर दी जे अनवादक इ रंग अग गंद उनक खतिक प्रभवित करे च्यन कि ओई स्तरी एक खाचा कचा खाडकी सा आभी रहेल द्रिष्छ उनका उही उड्या गाम का यदार्त वो तेलगु दलित महीला का दर्द दरी लोग जाएच्छाएं वो फेर अंग्रेजिक उख्मप्रेस्ट फाटल भीच में उनका सत्तिक पुरा विस्तार दिख्वाजर रोग देच्छें तेख कहला वहां बाशा एक ता नदी जकान ची जजते सगुजरही तची उते के माटी किछ आश आपन संगे लेजाई तची आप किछ आपन पिचार चोड़दी तची. इप पोठी उई नदी के एक तो विशाल प्रवाह थे विमरषक इमच से आई एतबे. तद्दीबेट सुन्बाकले लहां सब का बहुत-बहुत दन्नेवाद संवाद जारी रहे बाखचाही.

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