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विदेह__पात्र_आ_स्वर.mp4

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Part 3 · VIDEHA MITHILA MAITHILI DISCUSSION CRITICISM SERIES PART 3
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  1. 0:00–0:02अई साहित्यक विवेचना में स्वागत अछि।
  2. 0:02–0:06आई हम सब विदे, इपत्रिकाक उई अभ्वुद दून्या कानवेशन करव,
  3. 0:06–0:13जटे से अनुदित भखा, बहुत रास, शषक्त तुस्वर, मैठली भाषा में अपन गुज छोडी रहल अछि।
  4. 0:13–0:15इसे खुनो सादारन पत्रिका नहीं आची
  5. 0:15–0:17बलकी इसे एक ता पैएक माद्ध्यम दिख
  6. 0:17–0:19जि बिन बिन भाशक एक दासब के
  7. 0:19–0:21मेठली में नव जीवन देट आची
  8. 0:21–0:25तच्छलू बिना समय गमाईने सीदे विषे परवेच्छी
  9. 0:25–0:28इचित्र मात्र एक्ता सादारन लोगो नही आची.
  10. 0:28–0:34गजेंद्र ताकोर दवारा संपादित विदेह एे लोटिंग प्लाट्फोम के इद्रिष्ष पहचान
  11. 0:34–0:38वास्तव में मैठ्ली साहित्तिक लेल एक्ता एतिहासक मील पत्धर थिक.
  12. 0:38–0:44इआपन आप में में में बाशक अग़ट पर स्ववाती उपस्तितिक एक जीवन्त साख्शी अची,
  13. 0:44–0:48जे हम्रा सब के औही स्ववाती दिनक याद्द यावेद अची.
  14. 0:48–0:51आई ए विवेचना क्रुप रेखा किछ आई प्रकार अचे.
  15. 0:51–0:57पहल विदेह इपत्रिका कपरिच्य, तो सर जुम्मा आस्ता आबहै,
  16. 0:57–1:02तो इसर चिन्नमस्ता एक्ता स्त्रीक संगर्ष आ अंत में अनुवादक शक्ती.
  17. 1:02–1:04चलो आगु बड़च्छे.
  18. 1:04–1:09पहल भाग विदेह इपत्रिका, मैठली साहित्यक अग्रदूत.
  19. 1:09–1:12आई साहित्तिक रच्ना सबख गज्राई में जे भासबहने
  20. 1:12–1:16हम्रा सबख के उही आपिहासिक मंज के बुजब अद्यंत आवश्षक अच्छे
  21. 1:16–1:20जे इ आन्मोल रच्ना सब हम्रा लोकनी तक लावल अच्छी
  22. 1:20–1:23इस समय रेखा वास्टव में चकित करे वलाची
  23. 1:23–1:31वर्ष् 2 धशार में भ्हल् सरी गाछ नामक एक ता चोटा सन जीो सिटीज साइट साएकर शुर्वाद भेलचल,
  24. 1:31–1:35आप देखी, 2004 में इपहिल मेत्ली ब्रोग बनल,
  25. 1:35–1:42और 2008 दरी अबे तबएद एक रादिकारिक तर पर विदेज नाम्दिलगिल.
  26. 1:42–1:48वर्तमान में इए अईसस आन तूटूटू नाईप्प्ष्विएश्वें अन्तर्गाताची
  27. 1:48–1:52इन्टरनेट की दून्या में जते वेप्साइट सब रातो रात गायब भीजाईताचे
  28. 1:52–1:57अथाई दूदशक सब भेसी की यात्रा कोनो चमत कार से कम नही आची
  29. 1:57–2:02यी एस पश्ट रूप से एक्ता विशाल भाशिक विविद्धाक निरमार का सक्षार ची.
  30. 2:03–2:07एक ताम सबस महोट्रपून बात या चे, जे विदे मात्र एक्ता पत्रिका नाई,
  31. 2:08–2:11बलकी एक्ता विशाल संस्क्रतिक पूलक काज करे तचे.
  32. 2:11–2:19इमज तिल्गु हिंदी सलाक, रूसी दरिक सीमान्त्क्रित अब बाहे रच्ना सब के सीदा मेठली पाथक्धरी लए अबे तचे.
  33. 2:19–2:28गद्या अपद्यक यविशाल संग्रह के कारन भिन्न भिन्न संस्क्रतिक कता सब मेठली साहिते के शितिच के अद्यन्त व्यापक बनाई रहल अची.
  34. 2:28–2:31इस सत्यमे एक ता क्रान्तिकारी काज अची.
  35. 2:31–2:38दोसर बाग, जुम्मा, आस्था, और भहे, आब हम सब अपन विवेचनाक पहल कतादिस चलैची.
  36. 2:38–2:47इश्वेख मुहम्मज शरीफ द्वारा लिकल अ गजेंद्र धाखोर द्वारा अनुदित तेल्गुसे मेत्फिली में एक ता अछ्ट्यन्त मार्मिक लगु कताची.
  37. 2:47–2:56अग खत्ठा कादार एक ता माक द्रुष्टिकून में भेल अचानक अभयानक बडलाउ पर्टिकल अचे
  38. 2:56–3:02जरा सोचु एक ता एहन दिन जगन अटूट तारमेक भक्ती अप्रार्थना
  39. 3:02–3:07अचानक से केवल अपन प्रान बचावाग जद्दू जहद में बडलीजाए
  40. 3:07–3:11इग्ता हिर्दै विदारक असून कर देबवाला स्तिती अची.
  41. 3:11–3:15विस्वोट से पहले अब भादक इव्याचारिक उलत्फेर दिखू,
  42. 3:15–3:16इई अछ्तिन्त प्रभाव्शाली अची.
  43. 3:17–3:20बम्विस्वोट से पहले एक ता मा आपन अनिच्षुक बेटा के
  44. 3:20–3:23जुम्माक नमाजलेल मक्का मस्जिद जाईलेल जिद करे चती
  45. 3:23–3:26इमानत जे आस था उकर सुरक्षा करे थ
  46. 3:26–3:28मुदा विस्वोट से टीक बाद
  47. 3:28–3:30उ पुडता बहभीत बहजाई चती
  48. 3:30–3:33उ बेटा के मस्जिद से दूर रहाग लिल का तरागर गरे चती
  49. 3:33–3:36उगरा इगटू सत्ते भुजना जाए च्छेक,
  50. 3:36–3:39जे केवल आस था इबहयंगक हिंसा के नहीं रोक सकल,
  51. 3:39–3:41जे अस्तान सबह सुब्हाँ सुच्छल,
  52. 3:41–3:43उ अच्छानक आतंक अट्ट बनी गल.
  53. 3:43–3:45इज़ समवाद सूनो,
  54. 3:45–3:48फोंट पर एक ता मांक इबहवीट शब्द,
  55. 3:48–3:54जखन उ इमानी लेज्छत्छें जिहूंकर भेटा ख़सध लास कबीच भोसकेता ची.
  56. 3:54–4:00बाहर नईजाएब, हमर भाउ, उही मस्जिद में नईजाएब, हम दरक अनुबहव करहोल ची.
  57. 4:00–4:03इपंक्ती सीथा आदमा के जगजोरी दैचे.
  58. 4:03–4:09आईछ ने, इश्वद उही मान्सिक संट्रासक के एक दम जीवन्त कदैचे.
  59. 4:09–4:14कताक वास्तविक बहावनात्मक गेराई एच्च्त्रमः विरोदागास पर टिकल अची.
  60. 4:14–4:20एक दिस शान्ती से दाना चुगेत परेवा आठीक विप्रीत विस्वोट से खसेट शरीर.
  61. 4:20–4:24बिता जे मुलतर मात्र बहुत एक लाबखलिल प्रार्ठना करे जाएच्छल,
  62. 4:24–4:26वोकर जीवन दाव पर लागल अची.
  63. 4:26–4:30मागी इई अनुबूती जे मस्जिद आप सुरक्षित नहीं अछी,
  64. 4:30–4:33वास्तव में एक तब भहरी सरवजनिक त्राज्दी के
  65. 4:33–4:37सीथा एक ता शान्त गरेलू जिवनक भीतर प्रवेश करा दे तछी.
  66. 4:37–4:40इप मनु विग्यानिक आगात बहुत कहेर अछी.
  67. 4:40–4:50तेसर भाग, चिन्नमस्ता, एक ता स्त्रीक संगर्ष, आब आम सब दोसर स्वर्दिस बड़ेज्ची, जितर एक ता बिलक्त अलक तरहक भाए के खोजल गेल आची.
  68. 4:50–4:55इजची उपन्यास, चिन्मस्ता में वरनित आन्त्रिक अग्धरिल। संगर्ष.
  69. 4:55–5:00कता के ओगर रच्नाकारक वास्तविक्तासन जोडईद, इच्ठ ती डोक्तर प्रभाख्हितान,
  70. 5:00–5:05जे आई मनो वेग्यानिक कता के अद्यन्त कुश्टापूर्वक गड़ल नी आची.
  71. 5:05–5:09सूऊशीला जा एक रहींदी से मेठ्चली में अनुदित कर का,
  72. 5:09–5:12आइस्त्री विमर्ष्छ के एक ता नव्विस्टार दिलनी आची.
  73. 5:12–5:15इग गठा वर्तमान से शुरू होई तची,
  74. 5:15–5:18जटे मुख्य पात्रा प्रियाक शारिरेक के गिरावद,
  75. 5:18–5:20हम्रा सब के देखावल गेल आचे.
  76. 5:20–5:24दिन एक, शिकागो से प्रस्थान करेत उडानक �thekaan,
  77. 5:24–5:27दिन्दु बेल्ग्रेद ईर्पोट पर ट्रान्जित
  78. 5:27–5:29फेर अवेत अची संकत के गडी
  79. 5:29–5:32जकन वो अट्टिदिक खण कारन खसी पडे च्छती
  80. 5:32–5:35आ अन्तता हदोसर दिनध भोर
  81. 5:35–5:37अस्पतालक विस्तर पर होष आप
  82. 5:37–5:39इई यात्रा मात्र शारिरिक पतन नहीं अची
  83. 5:39–5:45अगर निए अची बलकी इद्तिदिक ठखान इक ता गेहर मनो वेग्यानिक चिंटन लेल उद्प्रेरिक बनी जाई तची.
  84. 5:46–5:49जेना जेना प्रिया बेलग्रेद का असपताल में होष में आवेच चती
  85. 5:49–5:58अब उजब अद्यन्त अवश्षक अची जि कोना निरन्तर मान्सिक प्रतार्डना एक ता व्यक्ती का शाएरिक खाखान का पाचा बहुत पेग भूमिका निभाई तची.
  86. 5:59–6:03अई तालीका के देखू अएक गरेलु विवाद में वैचारिक तक्राव एक दम सपष्ट अची.
  87. 6:19–6:23अद्राँ किसंग बेटा संजुख कस्टडी लेबाग द्वं की देची
  88. 6:23–6:28दो सर दिस प्रिया चतिन जे गर से बाहर एक ता स्वतन्द्र पहचान का अक्षार अख्छा रख है चति
  89. 6:28–6:31अपन अख्स्पोट व्यापार कै, अपन पहचान माने चति
  90. 6:31–6:37अपन अख्स्पोट व्यापारके अपन पहचान माने चती, अग्धरेलू उप्पीडन के विरुद्ध गजजब की सहेंचीलता दिखवैच्चती.
  91. 6:38–6:43इम आत्र पति पतनिक सादारन जग्डा नहीं, बलकी दूता नित्तान्त अलग विचार्दारा का युद्र ची.
  92. 6:43–6:49प्र्याग एे गोशना हुंकर अदम्य सहन शीलता के कत्तिक नीग जगा असपष्ट करेता ची.
  93. 6:49–6:52इव्साय हम तका अरजित करभाले नहां करहल ची.
  94. 6:52–6:54इवमर अइड�entity अची.
  95. 6:54–6:56इप पंक्ती प्रमाडित करेता ची,
  96. 6:56–7:00अप अब हम सब आईविवेचनाक अंतिम पडाव पर पूजगेल ची.
  97. 7:00–7:03चलो देखे चीए, जी इदूनो अलगलक कता सब,
  98. 7:03–7:07कोना इस सहित्तिक समीख्षाग मुख्य विषय के निरमान करताची.
  99. 7:07–7:12अब हम सब आईविवेचनाक अंतिम पडाव पर पूजगेल ची.
  100. 7:12–7:19चलो देखे ची ए, जी इ दुनो अलगलक कता सब कोना इस सहित्तिक समीख्षाग मुख्ये विश्धे के निरमान करताची.
  101. 7:19–7:26अगर अबहावनात्मक मानविय अनबहव सब के बाशाई सीमा से पार लगागाक मेठिली पाट्खदरी पूजावे तची.
  102. 7:26–7:31एक दिस जुम्मा मे बम विस्पोटक बायह सरवजनिक अगाथ अची.
  103. 7:31–7:36अद्वादक कला वास्तव में आई भेन्न भेन दुन्या सब के मेंठिली बाशा में बान्द का एक ता अद्बुत क्यन्वस तेयार करे तची.
  104. 7:37–7:41इविवेचना समाप्त करेत काल एक ता अन्तिम विचार पर द्यान दिया,
  105. 7:41–7:44कोना इणुदित रासद्या,
  106. 7:44–7:48अद्र विवेच्च्ना समाप्त करेत काल एक अन्तिम विचार पर द्यान्दियो,
  107. 7:48–7:50कोना इ अनुदित त्रासध्या,
  108. 7:50–7:52एक ता सर्व जनिक आतंगक,
  109. 7:52–7:54अएक ता गरेलू संगर्षक,
  110. 7:54–7:57अंतता सर्व भहुमेक मानविस्तिति के दर्षावेट अची,
  111. 7:57–7:59इकta अंतिम विचार पर ध्यान दियो,
  112. 7:59–8:01कोना इ अनुदित रासद्या,
  113. 8:01–8:03इकta सरवजनिक अतंकक,
  114. 8:03–8:05अईकta गरेलू संगर्षक,
  115. 8:05–8:08अंतता सरव भहमेक मानविस्तिति के दर्षावे तची,
  116. 8:08–8:10इस उच्बाकले विवष करेत अची,
  117. 8:10–8:12जे मानव मनक भय,
  118. 8:12–8:16उकर संगर्श आर उकर जीजीवी शाक कोनेक्ता बाशा नहीं हो ये तची
  119. 8:16–8:19इता समपुन मानव जातिक साजा अनुबव्धिक
  120. 8:19–8:21आएके विवेचना में बस एतेब वज
  121. 8:22–8:25इस साहित्तेक यात्रा निश्चे ही बहत रोचक अ विचारनी रहाल

Plain text

अई साहित्यक विवेचना में स्वागत अछि। आई हम सब विदे, इपत्रिकाक उई अभ्वुद दून्या कानवेशन करव, जटे से अनुदित भखा, बहुत रास, शषक्त तुस्वर, मैठली भाषा में अपन गुज छोडी रहल अछि। इसे खुनो सादारन पत्रिका नहीं आची बलकी इसे एक ता पैएक माद्ध्यम दिख जि बिन बिन भाशक एक दासब के मेठली में नव जीवन देट आची तच्छलू बिना समय गमाईने सीदे विषे परवेच्छी इचित्र मात्र एक्ता सादारन लोगो नही आची. गजेंद्र ताकोर दवारा संपादित विदेह एे लोटिंग प्लाट्फोम के इद्रिष्ष पहचान वास्तव में मैठ्ली साहित्तिक लेल एक्ता एतिहासक मील पत्धर थिक. इआपन आप में में में बाशक अग़ट पर स्ववाती उपस्तितिक एक जीवन्त साख्शी अची, जे हम्रा सब के औही स्ववाती दिनक याद्द यावेद अची. आई ए विवेचना क्रुप रेखा किछ आई प्रकार अचे. पहल विदेह इपत्रिका कपरिच्य, तो सर जुम्मा आस्ता आबहै, तो इसर चिन्नमस्ता एक्ता स्त्रीक संगर्ष आ अंत में अनुवादक शक्ती. चलो आगु बड़च्छे. पहल भाग विदेह इपत्रिका, मैठली साहित्यक अग्रदूत. आई साहित्तिक रच्ना सबख गज्राई में जे भासबहने हम्रा सबख के उही आपिहासिक मंज के बुजब अद्यंत आवश्षक अच्छे जे इ आन्मोल रच्ना सब हम्रा लोकनी तक लावल अच्छी इस समय रेखा वास्टव में चकित करे वलाची वर्ष् 2 धशार में भ्हल् सरी गाछ नामक एक ता चोटा सन जीो सिटीज साइट साएकर शुर्वाद भेलचल, आप देखी, 2004 में इपहिल मेत्ली ब्रोग बनल, और 2008 दरी अबे तबएद एक रादिकारिक तर पर विदेज नाम्दिलगिल. वर्तमान में इए अईसस आन तूटूटू नाईप्प्ष्विएश्वें अन्तर्गाताची इन्टरनेट की दून्या में जते वेप्साइट सब रातो रात गायब भीजाईताचे अथाई दूदशक सब भेसी की यात्रा कोनो चमत कार से कम नही आची यी एस पश्ट रूप से एक्ता विशाल भाशिक विविद्धाक निरमार का सक्षार ची. एक ताम सबस महोट्रपून बात या चे, जे विदे मात्र एक्ता पत्रिका नाई, बलकी एक्ता विशाल संस्क्रतिक पूलक काज करे तचे. इमज तिल्गु हिंदी सलाक, रूसी दरिक सीमान्त्क्रित अब बाहे रच्ना सब के सीदा मेठली पाथक्धरी लए अबे तचे. गद्या अपद्यक यविशाल संग्रह के कारन भिन्न भिन्न संस्क्रतिक कता सब मेठली साहिते के शितिच के अद्यन्त व्यापक बनाई रहल अची. इस सत्यमे एक ता क्रान्तिकारी काज अची. दोसर बाग, जुम्मा, आस्था, और भहे, आब हम सब अपन विवेचनाक पहल कतादिस चलैची. इश्वेख मुहम्मज शरीफ द्वारा लिकल अ गजेंद्र धाखोर द्वारा अनुदित तेल्गुसे मेत्फिली में एक ता अछ्ट्यन्त मार्मिक लगु कताची. अग खत्ठा कादार एक ता माक द्रुष्टिकून में भेल अचानक अभयानक बडलाउ पर्टिकल अचे जरा सोचु एक ता एहन दिन जगन अटूट तारमेक भक्ती अप्रार्थना अचानक से केवल अपन प्रान बचावाग जद्दू जहद में बडलीजाए इग्ता हिर्दै विदारक असून कर देबवाला स्तिती अची. विस्वोट से पहले अब भादक इव्याचारिक उलत्फेर दिखू, इई अछ्तिन्त प्रभाव्शाली अची. बम्विस्वोट से पहले एक ता मा आपन अनिच्षुक बेटा के जुम्माक नमाजलेल मक्का मस्जिद जाईलेल जिद करे चती इमानत जे आस था उकर सुरक्षा करे थ मुदा विस्वोट से टीक बाद उ पुडता बहभीत बहजाई चती उ बेटा के मस्जिद से दूर रहाग लिल का तरागर गरे चती उगरा इगटू सत्ते भुजना जाए च्छेक, जे केवल आस था इबहयंगक हिंसा के नहीं रोक सकल, जे अस्तान सबह सुब्हाँ सुच्छल, उ अच्छानक आतंक अट्ट बनी गल. इज़ समवाद सूनो, फोंट पर एक ता मांक इबहवीट शब्द, जखन उ इमानी लेज्छत्छें जिहूंकर भेटा ख़सध लास कबीच भोसकेता ची. बाहर नईजाएब, हमर भाउ, उही मस्जिद में नईजाएब, हम दरक अनुबहव करहोल ची. इपंक्ती सीथा आदमा के जगजोरी दैचे. आईछ ने, इश्वद उही मान्सिक संट्रासक के एक दम जीवन्त कदैचे. कताक वास्तविक बहावनात्मक गेराई एच्च्त्रमः विरोदागास पर टिकल अची. एक दिस शान्ती से दाना चुगेत परेवा आठीक विप्रीत विस्वोट से खसेट शरीर. बिता जे मुलतर मात्र बहुत एक लाबखलिल प्रार्ठना करे जाएच्छल, वोकर जीवन दाव पर लागल अची. मागी इई अनुबूती जे मस्जिद आप सुरक्षित नहीं अछी, वास्तव में एक तब भहरी सरवजनिक त्राज्दी के सीथा एक ता शान्त गरेलू जिवनक भीतर प्रवेश करा दे तछी. इप मनु विग्यानिक आगात बहुत कहेर अछी. तेसर भाग, चिन्नमस्ता, एक ता स्त्रीक संगर्ष, आब आम सब दोसर स्वर्दिस बड़ेज्ची, जितर एक ता बिलक्त अलक तरहक भाए के खोजल गेल आची. इजची उपन्यास, चिन्मस्ता में वरनित आन्त्रिक अग्धरिल। संगर्ष. कता के ओगर रच्नाकारक वास्तविक्तासन जोडईद, इच्ठ ती डोक्तर प्रभाख्हितान, जे आई मनो वेग्यानिक कता के अद्यन्त कुश्टापूर्वक गड़ल नी आची. सूऊशीला जा एक रहींदी से मेठ्चली में अनुदित कर का, आइस्त्री विमर्ष्छ के एक ता नव्विस्टार दिलनी आची. इग गठा वर्तमान से शुरू होई तची, जटे मुख्य पात्रा प्रियाक शारिरेक के गिरावद, हम्रा सब के देखावल गेल आचे. दिन एक, शिकागो से प्रस्थान करेत उडानक �thekaan, दिन्दु बेल्ग्रेद ईर्पोट पर ट्रान्जित फेर अवेत अची संकत के गडी जकन वो अट्टिदिक खण कारन खसी पडे च्छती आ अन्तता हदोसर दिनध भोर अस्पतालक विस्तर पर होष आप इई यात्रा मात्र शारिरिक पतन नहीं अची अगर निए अची बलकी इद्तिदिक ठखान इक ता गेहर मनो वेग्यानिक चिंटन लेल उद्प्रेरिक बनी जाई तची. जेना जेना प्रिया बेलग्रेद का असपताल में होष में आवेच चती अब उजब अद्यन्त अवश्षक अची जि कोना निरन्तर मान्सिक प्रतार्डना एक ता व्यक्ती का शाएरिक खाखान का पाचा बहुत पेग भूमिका निभाई तची. अई तालीका के देखू अएक गरेलु विवाद में वैचारिक तक्राव एक दम सपष्ट अची. अद्राँ किसंग बेटा संजुख कस्टडी लेबाग द्वं की देची दो सर दिस प्रिया चतिन जे गर से बाहर एक ता स्वतन्द्र पहचान का अक्षार अख्छा रख है चति अपन अख्स्पोट व्यापार कै, अपन पहचान माने चति अपन अख्स्पोट व्यापारके अपन पहचान माने चती, अग्धरेलू उप्पीडन के विरुद्ध गजजब की सहेंचीलता दिखवैच्चती. इम आत्र पति पतनिक सादारन जग्डा नहीं, बलकी दूता नित्तान्त अलग विचार्दारा का युद्र ची. प्र्याग एे गोशना हुंकर अदम्य सहन शीलता के कत्तिक नीग जगा असपष्ट करेता ची. इव्साय हम तका अरजित करभाले नहां करहल ची. इवमर अइड�entity अची. इप पंक्ती प्रमाडित करेता ची, अप अब हम सब आईविवेचनाक अंतिम पडाव पर पूजगेल ची. चलो देखे चीए, जी इदूनो अलगलक कता सब, कोना इस सहित्तिक समीख्षाग मुख्य विषय के निरमान करताची. अब हम सब आईविवेचनाक अंतिम पडाव पर पूजगेल ची. चलो देखे ची ए, जी इ दुनो अलगलक कता सब कोना इस सहित्तिक समीख्षाग मुख्ये विश्धे के निरमान करताची. अगर अबहावनात्मक मानविय अनबहव सब के बाशाई सीमा से पार लगागाक मेठिली पाट्खदरी पूजावे तची. एक दिस जुम्मा मे बम विस्पोटक बायह सरवजनिक अगाथ अची. अद्वादक कला वास्तव में आई भेन्न भेन दुन्या सब के मेंठिली बाशा में बान्द का एक ता अद्बुत क्यन्वस तेयार करे तची. इविवेचना समाप्त करेत काल एक ता अन्तिम विचार पर द्यान दिया, कोना इणुदित रासद्या, अद्र विवेच्च्ना समाप्त करेत काल एक अन्तिम विचार पर द्यान्दियो, कोना इ अनुदित त्रासध्या, एक ता सर्व जनिक आतंगक, अएक ता गरेलू संगर्षक, अंतता सर्व भहुमेक मानविस्तिति के दर्षावेट अची, इकta अंतिम विचार पर ध्यान दियो, कोना इ अनुदित रासद्या, इकta सरवजनिक अतंकक, अईकta गरेलू संगर्षक, अंतता सरव भहमेक मानविस्तिति के दर्षावे तची, इस उच्बाकले विवष करेत अची, जे मानव मनक भय, उकर संगर्श आर उकर जीजीवी शाक कोनेक्ता बाशा नहीं हो ये तची इता समपुन मानव जातिक साजा अनुबव्धिक आएके विवेचना में बस एतेब वज इस साहित्तेक यात्रा निश्चे ही बहत रोचक अ विचारनी रहाल

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