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खोखले_में_परी_लोक.mp4

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Part 4 · VIDEHA MITHILA MAITHILI DISCUSSION CRITICISM SERIES PART 4
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  1. 0:00–0:08नमसकार, आजके एस खास विषलेशन में, हम गजेंद्र ताकोर के एक भेहदी दिल्चस्प और कल्पना शील कहनी को दिकोड करने वाले है,
  2. 0:08–0:12जिस कनाम है, फेरी लैंड एं द्फालो, यानी खोखले में परी लोक.
  3. 0:12–0:15सुनकर लक्ता है ना की एक राम बच्चों की कहानी होगी?
  4. 0:15–0:18पर असल में यह यह सा बिलकुल नहीं है.
  5. 0:18–0:22यह एक दाक एको फन्तेसी है, जो एक बहुत खुबसुरत,
  6. 0:22–0:26लेकिन पूरी तरहा से क्तरिम दुन्या की पीचे चिपे काले सच को उजागर करती है.
  7. 0:26–0:34ये कहानी हमे दिखाती है कैसे प्रकरती पर पूरी तरा से निंटरद करने की कोशिषके हमेशा कुछ अप्रत्याशित और भ्यंकर परिनाम होते हैं.
  8. 0:34–0:37तो चले देकते है की आज हम किन-किन चीजो पर बात करेंगे?
  9. 0:37–0:43अपने बाद करेंगे, सब से पहले कुखले में उतरना, फेर आद्र दनुश समाज, जब सबने हकीकत बन जाएं.
  10. 0:44–0:50चबाहुवा रेगिस्तानी कुडा गर, चलता फिरता जंगल, और अखर में उभरता हूँँ संगर्ष.
  11. 0:50–1:20कहानी की शुर्वाती देखे कितनी रहेसे मैं है, पेड के खोखले में परीलोक, एक काला कौवा, एक सपेद, जगमगाता परीलोक, दादी माग के शबद हमें सीधा इस कहानी के रहेसे के भीच उबीच ले जाते है, एक पुराना पेड, एक कौवा, और एक अँसा परीलोक,
  12. 1:20–1:22गुर्त्वा कर्शन
  13. 1:22–1:24कल्पना की जे 10 साल की एक बच्ची है आस था
  14. 1:24–1:26वो कवों के जंद से बच्चने किलिए
  15. 1:26–1:28एक पुराने पेड के बने से खोकले में कुछ जाती है
  16. 1:28–1:32और यही से बहुतिकी के सारे नियम पीछे चूट जाते हैं
  17. 1:32–1:34वहा एक अजीप सा खाली पन है
  18. 1:34–1:38कोई गुर्ट्वा कर्शन नहीं, कोई हवान ही, गिरने का कोई जटका नहीं,
  19. 1:38–1:40उसका शरीर रूई से भी हलका हो जाता है,
  20. 1:40–1:42और समय का बहाँ बिलकुल बड़ल जाता है.
  21. 1:42–1:45ये गिरना असल में उडने जैसा लकता है.
  22. 1:45–1:49मतलब साफ है के हमारी सामानय दून्या आप पूरी तरहे से पीचे चुट चूगी है.
  23. 1:49–1:54इस आजीब और अंदेरे सफर के बाद आस्था एक बिलकुली एक अलक दून्या में पहुचती है.
  24. 1:54–1:58आसी दून्या जगा आस्मान नीला नहीं बलकी एक दम सपेद है.
  25. 1:58–2:02और सबसे चोकाने बात वहां लाल रनकी बारिष होती है?
  26. 2:02–2:05आस्ता वहां तूराकोस नाम के पक्षी से मिलती है.
  27. 2:05–2:07और पता है क्या होता है?
  28. 2:07–2:13बारिष की बूंदे परते ही उस पक्षी का आस्ली लाल रनक दूल कर आस्ता के हाथो पर लग जाता है.
  29. 2:13–2:18ये चोटी चोटी बाते ही बतादेती है, कि हम किसी आम जादूई दून्या में नहीं है.
  30. 2:18–2:24अब आते है कहानी के दूसरे हिस से पर, आद्दर दनुष समाज, एक फुबसुरती से अनुशासिद दून्या.
  31. 2:24–2:29इस परी लोग को बहुत्ती कडाई से सात रंगों की क्यारियों में बाडागया है.
  32. 2:29–2:33जैसा के आप देख सकते हैं, बंगनी रंग वेग्यानिकों किलिए है.
  33. 2:33–2:39जामूनी सेना किलिए, नीला सकूल और विष्वोविद्द्याले किलिए, और अज़े ही बाखी सब.
  34. 2:39–2:44सब से खाजबात यह कि यह समाज बहुत्ती जआदा कंट्रोल्ड और दिस्प्लिंट है.
  35. 2:44–2:49हर किसी की अपनी एक तह्ध जगा है, हर काम का एक अलक धिपार्ट्मिंट है.
  36. 2:49–2:53बहुर से देखने में यह सिस्तम बहुत्धी प्रफ्फ्ट तो खुबसुरत लकता है,
  37. 2:53–3:23तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो �
  38. 3:23–3:28जादु और कल्पना को भी एक मशीन के पुदजे कितरा ज़ूफ एक नम्वर में बडल दिया गया है.
  39. 3:28–3:35हमारा अगला बाग है, जब सपने हकीकत बन जाए, बहुतिकी के नियमो को मोडना.
  40. 3:35–3:38इस दूनिया का एक और हेरान करने वाला नियम है.
  41. 3:38–3:43यहां जोबी काम आप सबने में करते हैं, जागने पर वो सच हो जाता है.
  42. 3:43–3:45आस ता सबने में अपने गर वापस जाती है,
  43. 3:46–3:49और एक आसली हलीकोप्टर में बहुत सारा समान बहरकर ले आती है.
  44. 3:49–3:52जैसे एकसरे मशीन, कुछ अजार,
  45. 3:52–3:56अगर आप पुच शुट सकते हैं तो उसे हकीकत में लासकते हैं।
  46. 3:56–3:58लेकिन इन सब जादूई शकतियों के भीच इक अजीप सा दर हमेशा महसुस होता है।
  47. 3:58–4:00अभी तक रानी से कोई नहीं मिला है।
  48. 4:00–4:02ये एक लाईन इस पूरी कहानी का तोन बडल देती है।
  49. 4:02–4:05कुईकि अगर आप पुछ सोथ सकते हैं, तो उसे हकीकट मे भी लासकते हैं.
  50. 4:05–4:11लेकिन इन सब जादूई शक्तियों के भीच एक अजीप सा ड़दर हमेशा महसुस होता है.
  51. 4:11–4:13अभी दक रानी से कोई नहीं मिला है.
  52. 4:13–4:16ये एक लाईन इस पूरी कहानी का तोन बडल देती है.
  53. 4:16–4:46और तो बवाड़ बवार बवार बवार बवार बवार बवार बवार बवार बवार बवार बवार बवार बवार बवार बवार बवार बवार बवार बवार बवार बवार बवार बवार बवार बवार बवार बवार बवार बवार बवार बवार बवार बवार बवार बव
  54. 4:46–4:50तुराकोज बताता है कि वहां पहले हरे भरे खेथ हूँआ करते थे,
  55. 4:50–4:53लेकिन रानी ने उस पूरे एलाके को एक कुडा गर बना दिया.
  56. 4:53–4:56अपनी दुन्या को एक दम साप और परफेक्त रखने किलिए,
  57. 4:56–4:58उसने प्रक्रती के एक बहुत बड़े हिस्से को,
  58. 4:58–5:01अगर हम तूलना करें तो एक तरफ है ये परीलोक,
  59. 5:01–5:02जो इतना जादा क्रित्रम है,
  60. 5:02–5:05कि वहा पेरो के पत्ते थक नहीं हिलते,
  61. 5:05–5:07और हवाबी तूबस के जर ये सपलाए की जाती है.
  62. 5:07–5:09और तूसरी तरफ है वोरे गिस्तान,
  63. 5:09–5:11पेडो के पत्ते तक नहीं हिलते
  64. 5:11–5:14और हवाबी तूबस के जर ये सपलाए की जाती है
  65. 5:14–5:16और दूसरी तरफ है वोरे गिस्टान
  66. 5:16–5:18जो एक दम भेजान, रंगीन
  67. 5:18–5:19और कच्रे से पटापडा है
  68. 5:20–5:22ये असल में बहुती गेरा एकोलोगिकल मेसेज है
  69. 5:22–5:28अकसर हम भी तो यही करते हैं अग, शहरों को सुदर दिखाने के लिए कच्रे को शहर से दूर कही फैख देते हैं
  70. 5:28–5:35और सुचते हैं कि समस्स्या खतम हो गए जब की असल में वो कच्रा किसीना किसी एको सिस्तम को पुरी तरा से बरभाद कर रहा होता है.
  71. 5:35–5:41अब कहानी एक नया मोड लेती है, चलता फिरता जंगल प्रक्रती का पलट्वार.
  72. 5:41–5:46इस खद्रे से निपटने किलिए रानी ने दुन्या बहर से अलग-गलक प्रानियो को बलवाया है,
  73. 5:46–5:52अफरेका से तुराकोस और मेंबा साप अस्टेल्या से कोकबूरा और यहां तक एक एस्कीमो भी.
  74. 5:53–5:59इन सब को अलगलक जिमदारींग दीगाई है, किसी को तकनीक बचानी है, तो किसी को संक्रमन रोकना है.
  75. 5:59–6:01अगर बद़ा देखाना है.
  76. 6:01–6:04लेकिन सवाल ये है कि आखिर वो कुँन्सा कष्तरा है,
  77. 6:04–6:06जिसे रोकने किलिए इने बुलाया गया है.
  78. 6:06–6:08रानी इतनी जाडा दरीवि कियो है.
  79. 6:08–6:10और रहेस यही खुलता है.
  80. 6:10–6:12पता चलता है कि प्रक्रिती को
  81. 6:12–6:15अप हमेशा किलिए कंट्रोल नहीं कर सकते,
  82. 6:15–6:19उस ग्रीन लेबवारेट्री से कुछ पूड़े मूटेट होकर भाग निकले है,
  83. 6:19–6:23और वो दीवार पार कर के उस मरे हुए रेगिस्टान में पहुज गए है.
  84. 6:23–6:27सब से चोकाने वाली बात यह गे उन पेर्डोने चलना सीख लिया है,
  85. 6:27–6:30वो सोथ सकते हैं, महसुस कर सकते हैं,
  86. 6:30–6:35और यहां तक की वो हेलीकोप्तर जैसी इनसानी तकनी की नकल भी कर सकते हैं,
  87. 6:35–6:41मतलब, रानी के खुद के प्रयोग अप पूरी तरह से उसके कंट्रोल से बाहर हो चुके हैं.
  88. 6:41–6:48और अब हम आते है अपने आखरी हिससे पर उबहरता हूँँ संगर्ष, बंजर भूमी में जीवन की वापसी.
  89. 6:48–6:50अब देखी यहां कितनी बडी विड़म बना है
  90. 6:50–6:53आस्ता जब वहां पूँचती है तो उसे कोई भ्यानक राख्ष्स नी मिलता
  91. 6:53–6:58बलकी वुच्छलते फिरते पेड उस मरेवे रेगिस्तान को फिरसे जिन्दा गर रहे हैं
  92. 6:58–7:00परी लोक में बहारी सुंदरता तो ती
  93. 7:00–7:02लेकिन वहा कुई आस्ली जीवन नहीं ता,
  94. 7:02–7:08लेकिन उस कच्च्रे के देर के बीज यें पेर्डों एक आस्ली जीता जागता जंगल बना दिया है.
  95. 7:08–7:11जगा साफ हवा है, चवा प्राक्रूतिक विकास हुरहा है,
  96. 7:11–7:13और जगा दिल सि सोचा जाता है.
  97. 7:13–7:16कच्रे के उस देड से सच्मे जीवन वापस आप आजा है.
  98. 7:16–7:20और कहानी हमे इस रोंक्टे कडे कर देने वाल के सावाल के साथ चोड देती है,
  99. 7:20–7:23जब आस था उन पोदो के दो राजावों के सामने कड़ी होती है,
  100. 7:23–7:24तो वो सीथा पुषती है,
  101. 7:24–7:27क्या परी लोग की रानी को नष्ट करने जारे हैं?
  102. 7:27–7:31ये एक अईसा क्लिफांगर है, जो हमें सोचने पर मजबोर कर दिता है,
  103. 7:31–7:33की आखिर अस्ली विलन है कोन?
  104. 7:33–7:36वो पेड जो उस बंजर कुडेदान में फिरसे जीवन लारे हैं,
  105. 7:36–7:39या वो रानी जिस्ने अपनी खुक्ली और क्रित्रिम सुण्दर्ता के लिए
  106. 7:39–7:42पूरी की पूरी प्रक्रती को ही बरबात कर दिया.
  107. 7:42–7:45ये कहनी हमें याद दिलाती है कि जब हम
  108. 7:45–7:48प्रक्रती पर ज़ुरत से ज़ादा निंटरन करने की कोषिष करते है,
  109. 7:48–7:50तो जीवन आखिरकार अपना रास्ता कोजी लेता है.
  110. 7:51–7:52आजके इस गहरे विष्लेशन में
  111. 7:52–7:55हमारे साथ जड़ने किलिए बहुत-बहुत दन्नेवार.

Plain text

नमसकार, आजके एस खास विषलेशन में, हम गजेंद्र ताकोर के एक भेहदी दिल्चस्प और कल्पना शील कहनी को दिकोड करने वाले है, जिस कनाम है, फेरी लैंड एं द्फालो, यानी खोखले में परी लोक. सुनकर लक्ता है ना की एक राम बच्चों की कहानी होगी? पर असल में यह यह सा बिलकुल नहीं है. यह एक दाक एको फन्तेसी है, जो एक बहुत खुबसुरत, लेकिन पूरी तरहा से क्तरिम दुन्या की पीचे चिपे काले सच को उजागर करती है. ये कहानी हमे दिखाती है कैसे प्रकरती पर पूरी तरा से निंटरद करने की कोशिषके हमेशा कुछ अप्रत्याशित और भ्यंकर परिनाम होते हैं. तो चले देकते है की आज हम किन-किन चीजो पर बात करेंगे? अपने बाद करेंगे, सब से पहले कुखले में उतरना, फेर आद्र दनुश समाज, जब सबने हकीकत बन जाएं. चबाहुवा रेगिस्तानी कुडा गर, चलता फिरता जंगल, और अखर में उभरता हूँँ संगर्ष. कहानी की शुर्वाती देखे कितनी रहेसे मैं है, पेड के खोखले में परीलोक, एक काला कौवा, एक सपेद, जगमगाता परीलोक, दादी माग के शबद हमें सीधा इस कहानी के रहेसे के भीच उबीच ले जाते है, एक पुराना पेड, एक कौवा, और एक अँसा परीलोक, गुर्त्वा कर्शन कल्पना की जे 10 साल की एक बच्ची है आस था वो कवों के जंद से बच्चने किलिए एक पुराने पेड के बने से खोकले में कुछ जाती है और यही से बहुतिकी के सारे नियम पीछे चूट जाते हैं वहा एक अजीप सा खाली पन है कोई गुर्ट्वा कर्शन नहीं, कोई हवान ही, गिरने का कोई जटका नहीं, उसका शरीर रूई से भी हलका हो जाता है, और समय का बहाँ बिलकुल बड़ल जाता है. ये गिरना असल में उडने जैसा लकता है. मतलब साफ है के हमारी सामानय दून्या आप पूरी तरहे से पीचे चुट चूगी है. इस आजीब और अंदेरे सफर के बाद आस्था एक बिलकुली एक अलक दून्या में पहुचती है. आसी दून्या जगा आस्मान नीला नहीं बलकी एक दम सपेद है. और सबसे चोकाने बात वहां लाल रनकी बारिष होती है? आस्ता वहां तूराकोस नाम के पक्षी से मिलती है. और पता है क्या होता है? बारिष की बूंदे परते ही उस पक्षी का आस्ली लाल रनक दूल कर आस्ता के हाथो पर लग जाता है. ये चोटी चोटी बाते ही बतादेती है, कि हम किसी आम जादूई दून्या में नहीं है. अब आते है कहानी के दूसरे हिस से पर, आद्दर दनुष समाज, एक फुबसुरती से अनुशासिद दून्या. इस परी लोग को बहुत्ती कडाई से सात रंगों की क्यारियों में बाडागया है. जैसा के आप देख सकते हैं, बंगनी रंग वेग्यानिकों किलिए है. जामूनी सेना किलिए, नीला सकूल और विष्वोविद्द्याले किलिए, और अज़े ही बाखी सब. सब से खाजबात यह कि यह समाज बहुत्ती जआदा कंट्रोल्ड और दिस्प्लिंट है. हर किसी की अपनी एक तह्ध जगा है, हर काम का एक अलक धिपार्ट्मिंट है. बहुर से देखने में यह सिस्तम बहुत्धी प्रफ्फ्ट तो खुबसुरत लकता है, तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो � जादु और कल्पना को भी एक मशीन के पुदजे कितरा ज़ूफ एक नम्वर में बडल दिया गया है. हमारा अगला बाग है, जब सपने हकीकत बन जाए, बहुतिकी के नियमो को मोडना. इस दूनिया का एक और हेरान करने वाला नियम है. यहां जोबी काम आप सबने में करते हैं, जागने पर वो सच हो जाता है. आस ता सबने में अपने गर वापस जाती है, और एक आसली हलीकोप्टर में बहुत सारा समान बहरकर ले आती है. जैसे एकसरे मशीन, कुछ अजार, अगर आप पुच शुट सकते हैं तो उसे हकीकत में लासकते हैं। लेकिन इन सब जादूई शकतियों के भीच इक अजीप सा दर हमेशा महसुस होता है। अभी तक रानी से कोई नहीं मिला है। ये एक लाईन इस पूरी कहानी का तोन बडल देती है। कुईकि अगर आप पुछ सोथ सकते हैं, तो उसे हकीकट मे भी लासकते हैं. लेकिन इन सब जादूई शक्तियों के भीच एक अजीप सा ड़दर हमेशा महसुस होता है. अभी दक रानी से कोई नहीं मिला है. ये एक लाईन इस पूरी कहानी का तोन बडल देती है. और तो बवाड़ बवार बवार बवार बवार बवार बवार बवार बवार बवार बवार बवार बवार बवार बवार बवार बवार बवार बवार बवार बवार बवार बवार बवार बवार बवार बवार बवार बवार बवार बवार बवार बवार बवार बवार बव तुराकोज बताता है कि वहां पहले हरे भरे खेथ हूँआ करते थे, लेकिन रानी ने उस पूरे एलाके को एक कुडा गर बना दिया. अपनी दुन्या को एक दम साप और परफेक्त रखने किलिए, उसने प्रक्रती के एक बहुत बड़े हिस्से को, अगर हम तूलना करें तो एक तरफ है ये परीलोक, जो इतना जादा क्रित्रम है, कि वहा पेरो के पत्ते थक नहीं हिलते, और हवाबी तूबस के जर ये सपलाए की जाती है. और तूसरी तरफ है वोरे गिस्तान, पेडो के पत्ते तक नहीं हिलते और हवाबी तूबस के जर ये सपलाए की जाती है और दूसरी तरफ है वोरे गिस्टान जो एक दम भेजान, रंगीन और कच्रे से पटापडा है ये असल में बहुती गेरा एकोलोगिकल मेसेज है अकसर हम भी तो यही करते हैं अग, शहरों को सुदर दिखाने के लिए कच्रे को शहर से दूर कही फैख देते हैं और सुचते हैं कि समस्स्या खतम हो गए जब की असल में वो कच्रा किसीना किसी एको सिस्तम को पुरी तरा से बरभाद कर रहा होता है. अब कहानी एक नया मोड लेती है, चलता फिरता जंगल प्रक्रती का पलट्वार. इस खद्रे से निपटने किलिए रानी ने दुन्या बहर से अलग-गलक प्रानियो को बलवाया है, अफरेका से तुराकोस और मेंबा साप अस्टेल्या से कोकबूरा और यहां तक एक एस्कीमो भी. इन सब को अलगलक जिमदारींग दीगाई है, किसी को तकनीक बचानी है, तो किसी को संक्रमन रोकना है. अगर बद़ा देखाना है. लेकिन सवाल ये है कि आखिर वो कुँन्सा कष्तरा है, जिसे रोकने किलिए इने बुलाया गया है. रानी इतनी जाडा दरीवि कियो है. और रहेस यही खुलता है. पता चलता है कि प्रक्रिती को अप हमेशा किलिए कंट्रोल नहीं कर सकते, उस ग्रीन लेबवारेट्री से कुछ पूड़े मूटेट होकर भाग निकले है, और वो दीवार पार कर के उस मरे हुए रेगिस्टान में पहुज गए है. सब से चोकाने वाली बात यह गे उन पेर्डोने चलना सीख लिया है, वो सोथ सकते हैं, महसुस कर सकते हैं, और यहां तक की वो हेलीकोप्तर जैसी इनसानी तकनी की नकल भी कर सकते हैं, मतलब, रानी के खुद के प्रयोग अप पूरी तरह से उसके कंट्रोल से बाहर हो चुके हैं. और अब हम आते है अपने आखरी हिससे पर उबहरता हूँँ संगर्ष, बंजर भूमी में जीवन की वापसी. अब देखी यहां कितनी बडी विड़म बना है आस्ता जब वहां पूँचती है तो उसे कोई भ्यानक राख्ष्स नी मिलता बलकी वुच्छलते फिरते पेड उस मरेवे रेगिस्तान को फिरसे जिन्दा गर रहे हैं परी लोक में बहारी सुंदरता तो ती लेकिन वहा कुई आस्ली जीवन नहीं ता, लेकिन उस कच्च्रे के देर के बीज यें पेर्डों एक आस्ली जीता जागता जंगल बना दिया है. जगा साफ हवा है, चवा प्राक्रूतिक विकास हुरहा है, और जगा दिल सि सोचा जाता है. कच्रे के उस देड से सच्मे जीवन वापस आप आजा है. और कहानी हमे इस रोंक्टे कडे कर देने वाल के सावाल के साथ चोड देती है, जब आस था उन पोदो के दो राजावों के सामने कड़ी होती है, तो वो सीथा पुषती है, क्या परी लोग की रानी को नष्ट करने जारे हैं? ये एक अईसा क्लिफांगर है, जो हमें सोचने पर मजबोर कर दिता है, की आखिर अस्ली विलन है कोन? वो पेड जो उस बंजर कुडेदान में फिरसे जीवन लारे हैं, या वो रानी जिस्ने अपनी खुक्ली और क्रित्रिम सुण्दर्ता के लिए पूरी की पूरी प्रक्रती को ही बरबात कर दिया. ये कहनी हमें याद दिलाती है कि जब हम प्रक्रती पर ज़ुरत से ज़ादा निंटरन करने की कोषिष करते है, तो जीवन आखिरकार अपना रास्ता कोजी लेता है. आजके इस गहरे विष्लेशन में हमारे साथ जड़ने किलिए बहुत-बहुत दन्नेवार.

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