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फेयरीलैंड_इन_द_होलो.mp4

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Part 4 · VIDEHA MITHILA MAITHILI DISCUSSION CRITICISM SERIES PART 4
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  1. 0:00–0:06सीथा मुद्धे पर आते हैं, आजकी हमारी चर्चा गजेंद्र ताकृर की एक बेहादी कममाल की आदूरिक परी कथा,
  2. 0:06–0:09फैरी लान्द लिंद तो होलो पर होने वाली हैं. और यकीन मानिए,
  3. 0:09–0:13ये कोई आम बच्छों की कहानी बलकुल नहीं है? बलकी,
  4. 0:13–0:19ये प्रक्रती सत्ता और हमारी इस मडन दुन्या के तक्राव का एक बहुत्ती शान्दार रूपक है.
  5. 0:19–0:24जैसे जैसे हम आगे बडखे एक इसके चिपे हुए और गेरे अर्ठ बलकुल साफ होते जाएंगे.
  6. 0:24–0:28तो चल ये इस रहेस चिमए दुन्या के पन्ने पलडते हैं.
  7. 0:28–0:31कहानी की शुर्वात ना बिलकल उसी कलैसिक तरीके से हुती है,
  8. 0:31–0:33जो हमे बच्पन की याध दिलादे.
  9. 0:33–0:37दादी के ये जादूई शब्द एक फ्रेम की तरा काम करतें.
  10. 0:37–0:38जरा कलपना की जे.
  11. 0:38–0:41एक लाल्टें की वो पीली सी रोष्नी
  12. 0:41–0:44अर दादी की दीमी सुकुन भरी यावाज
  13. 0:44–0:47एक ऐसी दून्या का दर्वाजा खूल रहाए
  14. 0:47–0:50जहाँ शब्द और भावनाए सच्छ में आकार लेती हैं
  15. 0:50–0:53ये शुर्वात हमें सीथे उस लोग कताथा वाले
  16. 0:53–0:55जाएदू के भीटर खिंच लेती है, जिसकी गेराई में
  17. 0:55–0:58गोता लगाने वाले हैं. और इसी जादूई दर्वाजे से
  18. 0:58–1:01हम सीदा आस्था की दून्या में कदम रकते हैं.
  19. 1:01–1:05दस साल की आस्था काफी तेस्थर्रार और हमेशा सवालो से बहरी हूँँई.
  20. 1:05–1:08सबा की हलकी बारिष के बाद का समय है,
  21. 1:08–1:11और वो गाँके गनिच चन्ना पेडो के भीच आमिख हटा कर रही है.
  22. 1:11–1:14सब कुछ बहुती शाणत एक दम नाट्रल लग रहा है.
  23. 1:14–1:17लेकिन कहानी में तुस्ट तो आना ही था.
  24. 1:17–1:21अचानक काले कवों का एक बड़ा सजुंद उस पर जपपपट पडद ता है.
  25. 1:21–1:27गब्राहेट में बचने किलिए उसे एक बहुत फुराने विशाल पेड की शरन लेनी पडती है.
  26. 1:27–1:35कवो से बचने की जद्वजहिद में आस था उस प्राचीन पेड के एक गेरे एक दम शान्त खोखले तने में फिसल जाती है.
  27. 1:35–1:41अगर यही पर एक बड़ा ही दिल्च़ सबाल उठता है, आखर एक खोखला पेड किसी को कहा लेजा सकता है.
  28. 1:41–1:48मजदार बात यह है कि जैसे ही वो उस बनदेरे में जाती है, बाहर का सारा शोर मानो गायपसा हो जाता है.
  29. 1:48–1:56इक्दम सन्नाता ये कोई मामुली अंदेरा नहीं ता बलकी किसी नहीं आयाम, किसी नहीं दुन्या का प्रवेश्द्वार ता.
  30. 1:56–2:00अब गिरने के इस अजीबो गरीब अनुपहव को जरा देख्ए,
  31. 2:00–2:05ये जो आमुर्द संकेंद्रित व्रित यानी कुन्सेंट्रिक स्व्ष्ट्ल्ट्ल्च्
  32. 2:05–2:07ये बहुत फीट्ट्टिन के साथ बताते हैं,
  33. 2:07–2:10कि उस अंदेरे में क्या महसुस हो रहा था?
  34. 2:10–2:13ना तो उपर का कुछ पता है, ना ही नीचे का.
  35. 2:13–2:15ना आगे ना पीचे.
  36. 2:15–2:18ये पूरी तरह से दिमाक को चक्रा देने वाला नुबहव है.
  37. 2:18–2:25असल दून्या से एक जादूई दून्या में जाने का ये अहसास एस दिशाहीं गिरावट से और भी जादा गेफ्राग हो जाता है.
  38. 2:25–2:32और इस गिरावट के दोरान समें और स्थान की जोभी सीमाए होती एना वो सब दूंदली पडजाती है.
  39. 2:32–2:35आस्था को एसा लकते है ज़ेसे उसका वजनी कष्टम हो गया हो
  40. 2:35–2:37मानो वो कपास से भी हल्की हो गयो
  41. 2:37–2:40कोई हवा का शोर नहीं, कोई गवराहत नहीं
  42. 2:40–2:42बलकोल की सी अजीब से सपने जैसा
  43. 2:42–2:44जहां इनसान गिर तो लाए
  44. 2:44–2:46लेकिन उसे लकता है मानो उएक बूरे रंके
  45. 2:46–2:49अगर बद्यागा रवाद नीला नीला नीला बलकी एक दम सफेद है
  46. 2:49–2:52और सबसे अजीब बात बतागा नीला यह आप अप नामो निशान नहीं है
  47. 2:52–2:55पत्ता थक नहीं हिल्रा यह एक अजीबसी सफेद दून्या है
  48. 2:55–2:58दिखने में सुंदर तो है
  49. 2:58–3:00अदर से एक अजीब सी बेच्छेनी होती है,
  50. 3:00–3:02कि कुछ तो गडबड़ है.
  51. 3:02–3:04तो लीजे इस तरहा हम पहुषते है,
  52. 3:04–3:06इस नहीं दुन्या में, जिसका नाम है,
  53. 3:06–3:08फैरी लान्द.
  54. 3:08–3:10पहली नजर में ये जगगे किसी
  55. 3:10–3:12हस्फी बेच्छेनी होती है,
  56. 3:12–3:14ये एक अजीब सी सबईद दून्या है
  57. 3:15–3:16दिखने में सुन्दर तो है
  58. 3:16–3:19लेकिन अंदर से एक अजीब सी बेच्छैनी होती है
  59. 3:19–3:20कि कुछ तो ग़बड़ है
  60. 3:21–3:24तो लीजे इस तरहा हम पहुषते है इस नहीं दून्या में
  61. 3:24–3:26जिसका नाम है, फैरी लैंट
  62. 3:26–3:29पहली नजर में ये जगगे किसी हसीन सबने जैसी लग सकती है,
  63. 3:29–3:34लेकिन इसकी पीचे एक बहुती गेरा और दरावना सच्छिपा है.
  64. 3:34–3:36ये कहानिवाला आम पर्यों का देश नहीं है.
  65. 3:36–3:41इसके बजा ये एक बहुत्ही सक्त अक्तिंद नियंत्रित और सत्तावादी जगे है,
  66. 3:41–3:45जिसे बस एक खुब सूरत एंद्र दनूश कर रूप देदिया गया है.
  67. 3:45–3:48इस दून्या का सिस्तम बहुत इरिजट है.
  68. 3:48–3:50फेरी लैंद का मुख्छाल है,
  69. 3:50–3:53उत्रे एक बड़े से आद्र दनुष जैसा दिकता है,
  70. 3:53–3:55जिसे सात अलग �alag rangin पंड्यो में
  71. 3:55–3:57बड़ी ही सकती से बाँता गया है.
  72. 3:57–4:01वेग्यानिको से लेकर सेना, स्कूल और लबस तक
  73. 4:01–4:03हर दिपार्ट्मिंट का अपना एक फिक्स रंग है.
  74. 4:03–4:06देखने में तो ये वेवस था बहुत रंभिरंगी लकती है,
  75. 4:06–4:09लेकिन अस्लियत में ये एक अजी सन्रच्ना है,
  76. 4:09–4:12जहां हर इक चीज़ को एक सकत दाईरे में जकड़कर रखखा गया है.
  77. 4:12–4:15आजादी जैसी कोई चीज़ नहीं है यहां.
  78. 4:15–4:21और यहां का कन्त्रोल कितना बहयंकर है, इसे समजने के लिए बस इस एक बात पर गवर की जीए.
  79. 4:21–4:25बच्पन की कहानियो में यूनिकोन वो जादूई गोडे होते ते,
  80. 4:25–4:28जो खोई हुए बच्छो को गर लेजाते ते है ना?
  81. 4:28–4:32लेकिम यहा एसा कुछ नहीं है, यहा उनिकोन सर्फ एक नमबर है.
  82. 4:32–4:35उनिकोन 99995745.
  83. 4:36–4:39इसका काम बस इतना है कि खोखले पेड से गिरने वाले
  84. 4:39–4:42हर जीव का लिकोड रक्खे और उसे रानी के मुख्याले तक पूचा दे.
  85. 4:42–4:46ये सीदा सीदा रानी क्यो उस कंट्रोलिंग प्रक्रती को दिखाता है
  86. 4:46–4:49जाहा रह जीव पर चाँबिसो गंटे नजर रख्छी जाती है
  87. 4:49–4:53और उसकी पहचान सरफ एक नमपर बनकर रहे गगे है
  88. 4:53–4:57अब इन दोनो जगहों की तुलना करना बहुत जगुरी हो जाता है
  89. 4:57–5:06एक तरव आस्था का गाँ है, जहाँ पत्ते नाचते है, बारिश रंगीन और नेचूरल है, और एक तरव की सहेज आजादी है.
  90. 5:06–5:13और दूस्री तरव, ये फेरी लेंट, पूरी तरव से हवारहित, यहाँ एक पत्ता तक खुड से नहीं हलता.
  91. 5:13–5:25ये क्रित्रिम सुन्दर्ताः पर एक बहुत थीखा तन्ज है, एक आसी सुन्दर्ताः जिस मेंना तो कोई जान है, नहीं कोई साँस, सब कुछ मशीन की तरह चलता है, और सब कुछ कडी निग्रानी में है.
  92. 5:25–5:30ख़ानी में है. ख़र इस फैरी लैंग का सबसे दिलचस्प और सबसे
  93. 5:30–5:34खटरनाक नियम ये है कि यहां सबने सच्छ्मुच रहीखत में
  94. 5:34–5:38बड़ल जाते हैं. जी हैं बिलकुल सही सूना अगर कोई सोते हुए
  95. 5:38–5:42सबने में कुछ करता है या कुछ दिखता है तो वो चीजें
  96. 5:42–6:12अदिया बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा
  97. 6:12–6:14उसकी तीक सामने मोजुत था
  98. 6:14–6:17अब जर ज़ाए सोची ए इस जाएदूई और भेहद
  99. 6:17–6:20नियान्त्रिद दून्या में आजी अदवान्स टेक्नोलेजी का आजाना
  100. 6:20–6:24ये तो किसी बहुत बड़े संकत की गंटी थी
  101. 6:24–6:27जैसे जैसे हम कहानी में आगे बडदते है
  102. 6:27–6:31नक्ली स्वर्ग का एक बहुत लिए खोफनाग पर्यावरनी यसच सच्च्छ सामने आता है
  103. 6:32–6:36पता चलता है कि उत्तरी दिवार के पार एक बहुत बडार रेगिस्टान है
  104. 6:36–6:39किसी समय में वहां हरे-ब़रे खेथ हूँए करते थे
  105. 6:39–6:40लेकिन रानी ने क्या क्या?
  106. 6:40–6:43अपना सारा कच्रा और प्रदूशन छिपाने किलिए
  107. 6:43–6:47उस लाके को एक विशाल कुडेदान में बड़ल दिया
  108. 6:47–6:49अपनी गंद्गी को छिपाने किलिए
  109. 6:49–6:54एक नकली दिवार कडी कर दीगाई ये हमारी आज की दुन्या के प्रदूशन छिपाने वाली मानसिक्ता का
  110. 6:54–6:57कितना सतीक और गमभी रूपक है ना?
  111. 6:57–7:02और इसे भीच एक रोंग्टे खडे कर देने वाला सच्च सामने आता है.
  112. 7:02–7:05लब से कुछ एसे मूटिंट पेड बाग प्च्टे ले है,
  113. 7:05–7:06जो चलना सीख गगे है.
  114. 7:06–7:36अप फेरी लान्द के बाखी जीवो में एक बहयंकर देशछ प्यल गगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगग
  115. 7:36–7:40इस से पहले की वे उस तक्निक का कोई विनाशकारी अद्वाल कर लें
  116. 7:40–7:44ये द्रिष्च उस उजार लेप में किसी महाखावे जैसी आत्रा को दिखाता है
  117. 7:45–7:48एक तरफ वो रंग भिरंगा लेकिन सक्त शासन है
  118. 7:48–7:51और दूस्री तरफ अंतहीं खाली पन
  119. 7:51–7:57उस गने अंदेरे और बंजर जमीन में चलते हुए पेडों को खोजना कोई बच्चो का खेल नहीं ता
  120. 7:57–8:01सब से पहले उने भिजली से पिगले हुए काज के विशाल मैधान मिलते हैं
  121. 8:01–8:05फिर वो एक विशाल रेद की पहाडी की तरव जाते हैं
  122. 8:05–8:07तो उसे किसी वेल की पीट जैसी दिक्रे थी
  123. 8:07–8:10वहां से कुछ अजीब सी संगीत मैं आवाजे आरें ती
  124. 8:10–8:12जिनका वो पीचा करते हैं
  125. 8:12–8:16और आखिर कार उस गोर अंदेरे में उने कुछ अझचा दिखाए देता है
  126. 8:16–8:19जिसकी किसी ने कलपना भी नहीं की ती
  127. 8:19–8:20जीवित हर्याली
  128. 8:35–9:05उस बच्च्ड रेगिस्टान को तीक करने किलिए किलिए किलिए किलिए किलिए किलिए किलिए किलिए किलिए किलिए किलिए किलिए किलिए किलिए किलिए किलिए किलिए किलिए किलिए किलिए किलिए किलिए किलिए किलिए किलिए किलिए किलिए किलिए किलिए किलिए किलिए कि
  129. 9:05–9:07उसी तक्नी का इस्तमाल एक पंक के रूप में किया,
  130. 9:07–9:11उडान बहरने के लिए और पर्यावरन को फिर से जिन्दा करने के लिए,
  131. 9:11–9:13नाकी किसी हत्यार के रूप में.
  132. 9:13–9:18नवाचार और प्रक्रिती दोनो एक साथ मिलकर कितने बहतरीं तरीके से काम कर सकते है,
  133. 9:18–9:20ये इसका सबसे बड़ावदारन है.
  134. 9:20–9:22इस चर्चा के बिलकुल आखिर में
  135. 9:22–9:25आस्था उन चलते हुए पेडों के राजाव से
  136. 9:25–9:29एक आईसा सवाल पुचती है, तो सीथा दिमाग पर चोट करता है.
  137. 9:29–9:31क्या आप फेरी लैंट की रानी को
  138. 9:31–9:33नश्थ करने जारे है?
  139. 9:33–9:35अपाल हवाँ में आज़े ही तेरता रहे जाता है.
  140. 9:35–9:39क्या प्रक्रितिए और तकनीक मिलकर इस सत्तवादी रानी का अंथ कर देंगे?
  141. 9:39–9:43या फिर क्योंप्रोल और प्रक्रितिए के बीच कोई नया बलन्स बनेगा?
  142. 9:43–9:47ये अपन अपनेडिंग हमे इस बात पर गज्राई से सोचने के लिए चोड देती है,
  143. 9:47–9:53के हमारी अपनी असल दून्या में सथा पर्यावरन और तकनीक का भविष्च आफिर क्या होने वाला है.
  144. 9:53–9:55सोचने पे मजबूर करता है आच?

Plain text

सीथा मुद्धे पर आते हैं, आजकी हमारी चर्चा गजेंद्र ताकृर की एक बेहादी कममाल की आदूरिक परी कथा, फैरी लान्द लिंद तो होलो पर होने वाली हैं. और यकीन मानिए, ये कोई आम बच्छों की कहानी बलकुल नहीं है? बलकी, ये प्रक्रती सत्ता और हमारी इस मडन दुन्या के तक्राव का एक बहुत्ती शान्दार रूपक है. जैसे जैसे हम आगे बडखे एक इसके चिपे हुए और गेरे अर्ठ बलकुल साफ होते जाएंगे. तो चल ये इस रहेस चिमए दुन्या के पन्ने पलडते हैं. कहानी की शुर्वात ना बिलकल उसी कलैसिक तरीके से हुती है, जो हमे बच्पन की याध दिलादे. दादी के ये जादूई शब्द एक फ्रेम की तरा काम करतें. जरा कलपना की जे. एक लाल्टें की वो पीली सी रोष्नी अर दादी की दीमी सुकुन भरी यावाज एक ऐसी दून्या का दर्वाजा खूल रहाए जहाँ शब्द और भावनाए सच्छ में आकार लेती हैं ये शुर्वात हमें सीथे उस लोग कताथा वाले जाएदू के भीटर खिंच लेती है, जिसकी गेराई में गोता लगाने वाले हैं. और इसी जादूई दर्वाजे से हम सीदा आस्था की दून्या में कदम रकते हैं. दस साल की आस्था काफी तेस्थर्रार और हमेशा सवालो से बहरी हूँँई. सबा की हलकी बारिष के बाद का समय है, और वो गाँके गनिच चन्ना पेडो के भीच आमिख हटा कर रही है. सब कुछ बहुती शाणत एक दम नाट्रल लग रहा है. लेकिन कहानी में तुस्ट तो आना ही था. अचानक काले कवों का एक बड़ा सजुंद उस पर जपपपट पडद ता है. गब्राहेट में बचने किलिए उसे एक बहुत फुराने विशाल पेड की शरन लेनी पडती है. कवो से बचने की जद्वजहिद में आस था उस प्राचीन पेड के एक गेरे एक दम शान्त खोखले तने में फिसल जाती है. अगर यही पर एक बड़ा ही दिल्च़ सबाल उठता है, आखर एक खोखला पेड किसी को कहा लेजा सकता है. मजदार बात यह है कि जैसे ही वो उस बनदेरे में जाती है, बाहर का सारा शोर मानो गायपसा हो जाता है. इक्दम सन्नाता ये कोई मामुली अंदेरा नहीं ता बलकी किसी नहीं आयाम, किसी नहीं दुन्या का प्रवेश्द्वार ता. अब गिरने के इस अजीबो गरीब अनुपहव को जरा देख्ए, ये जो आमुर्द संकेंद्रित व्रित यानी कुन्सेंट्रिक स्व्ष्ट्ल्ट्ल्च् ये बहुत फीट्ट्टिन के साथ बताते हैं, कि उस अंदेरे में क्या महसुस हो रहा था? ना तो उपर का कुछ पता है, ना ही नीचे का. ना आगे ना पीचे. ये पूरी तरह से दिमाक को चक्रा देने वाला नुबहव है. असल दून्या से एक जादूई दून्या में जाने का ये अहसास एस दिशाहीं गिरावट से और भी जादा गेफ्राग हो जाता है. और इस गिरावट के दोरान समें और स्थान की जोभी सीमाए होती एना वो सब दूंदली पडजाती है. आस्था को एसा लकते है ज़ेसे उसका वजनी कष्टम हो गया हो मानो वो कपास से भी हल्की हो गयो कोई हवा का शोर नहीं, कोई गवराहत नहीं बलकोल की सी अजीब से सपने जैसा जहां इनसान गिर तो लाए लेकिन उसे लकता है मानो उएक बूरे रंके अगर बद्यागा रवाद नीला नीला नीला बलकी एक दम सफेद है और सबसे अजीब बात बतागा नीला यह आप अप नामो निशान नहीं है पत्ता थक नहीं हिल्रा यह एक अजीबसी सफेद दून्या है दिखने में सुंदर तो है अदर से एक अजीब सी बेच्छेनी होती है, कि कुछ तो गडबड़ है. तो लीजे इस तरहा हम पहुषते है, इस नहीं दुन्या में, जिसका नाम है, फैरी लान्द. पहली नजर में ये जगगे किसी हस्फी बेच्छेनी होती है, ये एक अजीब सी सबईद दून्या है दिखने में सुन्दर तो है लेकिन अंदर से एक अजीब सी बेच्छैनी होती है कि कुछ तो ग़बड़ है तो लीजे इस तरहा हम पहुषते है इस नहीं दून्या में जिसका नाम है, फैरी लैंट पहली नजर में ये जगगे किसी हसीन सबने जैसी लग सकती है, लेकिन इसकी पीचे एक बहुती गेरा और दरावना सच्छिपा है. ये कहानिवाला आम पर्यों का देश नहीं है. इसके बजा ये एक बहुत्ही सक्त अक्तिंद नियंत्रित और सत्तावादी जगे है, जिसे बस एक खुब सूरत एंद्र दनूश कर रूप देदिया गया है. इस दून्या का सिस्तम बहुत इरिजट है. फेरी लैंद का मुख्छाल है, उत्रे एक बड़े से आद्र दनुष जैसा दिकता है, जिसे सात अलग �alag rangin पंड्यो में बड़ी ही सकती से बाँता गया है. वेग्यानिको से लेकर सेना, स्कूल और लबस तक हर दिपार्ट्मिंट का अपना एक फिक्स रंग है. देखने में तो ये वेवस था बहुत रंभिरंगी लकती है, लेकिन अस्लियत में ये एक अजी सन्रच्ना है, जहां हर इक चीज़ को एक सकत दाईरे में जकड़कर रखखा गया है. आजादी जैसी कोई चीज़ नहीं है यहां. और यहां का कन्त्रोल कितना बहयंकर है, इसे समजने के लिए बस इस एक बात पर गवर की जीए. बच्पन की कहानियो में यूनिकोन वो जादूई गोडे होते ते, जो खोई हुए बच्छो को गर लेजाते ते है ना? लेकिम यहा एसा कुछ नहीं है, यहा उनिकोन सर्फ एक नमबर है. उनिकोन 99995745. इसका काम बस इतना है कि खोखले पेड से गिरने वाले हर जीव का लिकोड रक्खे और उसे रानी के मुख्याले तक पूचा दे. ये सीदा सीदा रानी क्यो उस कंट्रोलिंग प्रक्रती को दिखाता है जाहा रह जीव पर चाँबिसो गंटे नजर रख्छी जाती है और उसकी पहचान सरफ एक नमपर बनकर रहे गगे है अब इन दोनो जगहों की तुलना करना बहुत जगुरी हो जाता है एक तरव आस्था का गाँ है, जहाँ पत्ते नाचते है, बारिश रंगीन और नेचूरल है, और एक तरव की सहेज आजादी है. और दूस्री तरव, ये फेरी लेंट, पूरी तरव से हवारहित, यहाँ एक पत्ता तक खुड से नहीं हलता. ये क्रित्रिम सुन्दर्ताः पर एक बहुत थीखा तन्ज है, एक आसी सुन्दर्ताः जिस मेंना तो कोई जान है, नहीं कोई साँस, सब कुछ मशीन की तरह चलता है, और सब कुछ कडी निग्रानी में है. ख़ानी में है. ख़र इस फैरी लैंग का सबसे दिलचस्प और सबसे खटरनाक नियम ये है कि यहां सबने सच्छ्मुच रहीखत में बड़ल जाते हैं. जी हैं बिलकुल सही सूना अगर कोई सोते हुए सबने में कुछ करता है या कुछ दिखता है तो वो चीजें अदिया बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा उसकी तीक सामने मोजुत था अब जर ज़ाए सोची ए इस जाएदूई और भेहद नियान्त्रिद दून्या में आजी अदवान्स टेक्नोलेजी का आजाना ये तो किसी बहुत बड़े संकत की गंटी थी जैसे जैसे हम कहानी में आगे बडदते है नक्ली स्वर्ग का एक बहुत लिए खोफनाग पर्यावरनी यसच सच्च्छ सामने आता है पता चलता है कि उत्तरी दिवार के पार एक बहुत बडार रेगिस्टान है किसी समय में वहां हरे-ब़रे खेथ हूँए करते थे लेकिन रानी ने क्या क्या? अपना सारा कच्रा और प्रदूशन छिपाने किलिए उस लाके को एक विशाल कुडेदान में बड़ल दिया अपनी गंद्गी को छिपाने किलिए एक नकली दिवार कडी कर दीगाई ये हमारी आज की दुन्या के प्रदूशन छिपाने वाली मानसिक्ता का कितना सतीक और गमभी रूपक है ना? और इसे भीच एक रोंग्टे खडे कर देने वाला सच्च सामने आता है. लब से कुछ एसे मूटिंट पेड बाग प्च्टे ले है, जो चलना सीख गगे है. अप फेरी लान्द के बाखी जीवो में एक बहयंकर देशछ प्यल गगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगग इस से पहले की वे उस तक्निक का कोई विनाशकारी अद्वाल कर लें ये द्रिष्च उस उजार लेप में किसी महाखावे जैसी आत्रा को दिखाता है एक तरफ वो रंग भिरंगा लेकिन सक्त शासन है और दूस्री तरफ अंतहीं खाली पन उस गने अंदेरे और बंजर जमीन में चलते हुए पेडों को खोजना कोई बच्चो का खेल नहीं ता सब से पहले उने भिजली से पिगले हुए काज के विशाल मैधान मिलते हैं फिर वो एक विशाल रेद की पहाडी की तरव जाते हैं तो उसे किसी वेल की पीट जैसी दिक्रे थी वहां से कुछ अजीब सी संगीत मैं आवाजे आरें ती जिनका वो पीचा करते हैं और आखिर कार उस गोर अंदेरे में उने कुछ अझचा दिखाए देता है जिसकी किसी ने कलपना भी नहीं की ती जीवित हर्याली उस बच्च्ड रेगिस्टान को तीक करने किलिए किलिए किलिए किलिए किलिए किलिए किलिए किलिए किलिए किलिए किलिए किलिए किलिए किलिए किलिए किलिए किलिए किलिए किलिए किलिए किलिए किलिए किलिए किलिए किलिए किलिए किलिए किलिए किलिए किलिए किलिए कि उसी तक्नी का इस्तमाल एक पंक के रूप में किया, उडान बहरने के लिए और पर्यावरन को फिर से जिन्दा करने के लिए, नाकी किसी हत्यार के रूप में. नवाचार और प्रक्रिती दोनो एक साथ मिलकर कितने बहतरीं तरीके से काम कर सकते है, ये इसका सबसे बड़ावदारन है. इस चर्चा के बिलकुल आखिर में आस्था उन चलते हुए पेडों के राजाव से एक आईसा सवाल पुचती है, तो सीथा दिमाग पर चोट करता है. क्या आप फेरी लैंट की रानी को नश्थ करने जारे है? अपाल हवाँ में आज़े ही तेरता रहे जाता है. क्या प्रक्रितिए और तकनीक मिलकर इस सत्तवादी रानी का अंथ कर देंगे? या फिर क्योंप्रोल और प्रक्रितिए के बीच कोई नया बलन्स बनेगा? ये अपन अपनेडिंग हमे इस बात पर गज्राई से सोचने के लिए चोड देती है, के हमारी अपनी असल दून्या में सथा पर्यावरन और तकनीक का भविष्च आफिर क्या होने वाला है. सोचने पे मजबूर करता है आच?

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