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बाल_गुरु_कथा_आ_महानगरीय_जीवनक_सच.m4a

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Part 4 · VIDEHA MITHILA MAITHILI DISCUSSION CRITICISM SERIES PART 4
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  1. 0:00–0:30तजगन हम सब मने कोनो पएक शेहरक उपर से हवाई जहाज से निचा ताकिच्छि, तजब किच एक दम एक रंग लागिच्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्�
  2. 0:30–0:34अई आई क हम्रा सबक यी गहीर चर्चा एक ता एहने अद्दुद दुन्या क्यात्रा चे,
  3. 0:34–0:39हम्रा सबक लोग एक ता बहुत मार्मिक मैंने बहुत रोचक सहेटिक कारजक स्वोट चे.
  4. 0:39–0:42आई गजेंद्र ताकुर जी रचित कता.
  5. 0:42–0:46अगर सबक लोग एक ता बहुत मार्मिक, मैंने बहुत रोचक सहेटिक कारजक स्वोट चे
  6. 0:46–0:49आँ, गजेंद्र ताकुर जी रचित कता
  7. 0:49–0:55बिल्कुल, बाल गुरू जे मैठिलिक प्रतम पाखषिक इपत्रिका विदे हैसे लेल गिल चे
  8. 0:55–0:58आई आई हम सब एह पर विस्तार सगब करव।
  9. 0:58–1:03इग कता मने मुल रूपसा अम आम वन्शा नाम दूईता चोट बच्चाक छे
  10. 1:03–1:08सदहरन तह लोग भाल कता के एक ता हल्का फुल का किस्सा मानी लिट चे
  11. 1:08–1:11आँ लोग सोचे चेज बच्चाक कहनी च्याते की है ते
  12. 1:11–1:19मुदा एमे शेहरक महानगरी जीवन साँच्रतिग विविद्ध्ता, आमानविय समबनदग जे गुड आर्थ चिपल चे,
  13. 1:19–1:24उ हम्रा सब कलेल एक ता पएक समाज सास्त्री अद्द्यन सिक्व नहीं चे.
  14. 1:24–1:31मनी कहानी इते गमवीर बात कहेचे, जे शायएद मोट-मोट पोथी स्यों नहीं कही सकेचे.
  15. 1:31–1:39हमरात अगते इस वोच्टी का आश्चरे होएचे, जे आजा वयस्क लोग सोचे चे, जे बच्चा कहानी से जीवन का की पाएक सीख बेटाद.
  16. 1:39–1:43मुदा एश रोत के पहलादरी हमर इदारना एक दम बडलीगल.
  17. 1:43–1:45तटीक चे आवेक रा विस्तार सबूजी.
  18. 1:45–1:46एक दम.
  19. 1:46–1:49कहनी शुरू होए चे दिल्लिक एक ता हाँसिंग कोलोनी सा.
  20. 1:49–1:52जताई पूरा देशक लोक आबी कबहिसल चे.
  21. 1:52–1:57कोलोनी की जे वास्तू कला या बनावर चे, अकरा बहुत सुख्श्मता से दिखाँन गल चे.
  22. 1:57–2:01आप, माने बाहर से देखला पर सब फलात एक समान चे.
  23. 2:01–2:07एक दम एक रंग. रंग एके जगा, भलकनी का अकार एके जगा, दरवाजा से हो एके जगा.
  24. 2:07–2:13ये के जगा स्रोथ में दे देरी कहल गेल चे, जे उपर से देखला पर सब फलात जूर्वा भाई जगा का लगे चे.
  25. 2:13–2:19आा, बूजु चे ये एक रुप्ता महान नगरय जीवनक एक ता पहीग विडम बना चे.
  26. 2:19–2:20की? ये विडम या नहीं चे?
  27. 2:20–2:21बलकु चे.
  28. 2:21–2:32जे हम सब एक्रा पाएगपरी प्रेक्ष्षे से जोडी, तई बाहियमान की करन आदूनिक शहरी करनक एक ता जानी भुजके कयल गेल दिसाँन चेए.
  29. 2:32–2:39शहर माने, सिस्तम के सुचारूरूप से चलावे लिल सब किचुके एक दाचा मे डाले चे.
  30. 2:39–2:41अ, समके एके रंग मे रंग प्र्यास.
  31. 2:41–2:44अ, इक ता अद्रिष्य दबाब चे.
  32. 2:44–2:48मुदा अस्ली प्रती रोद उही दर्वाजा कपाशा शूरू है चे.
  33. 2:48–2:54वित्तर जाए ते, बुजहाए चे जे लोक अपन जर्दी सकते गेरा रुप से जूल चे.
  34. 2:54–3:02आव उ प्रती रोद कते क सुन्दर चे, जक्ञन तीसर तलापर ओम के गर में प्रवेश किया जै चे, तो उते जना मितला बसे चे.
  35. 3:02–3:03एक दम.
  36. 3:03–3:16भानस गर सा अर्वा चावडग कान्द, बरखाक दीन में तरुवा, अद्तिल्कोरग स्वास सा पुरा गर बड़ी जाएचे, आ अम के मैग तोर पर मैठिली लोरी रहेचे जे चोड-चोड-गीच जगा खसाएच जगेचे.
  37. 3:16–3:21मुदा हम्रा एक ता बात कहूँ कि इके वल अतीज सज्डल रहवाक एक ता बावुकता नहीं चे?
  38. 3:21–3:27आम आने आहा के तातपर ये जे लोक नव महाल में धलबास दराए चे
  39. 3:27–3:29आम खिछ लोक ता एहे कहत?
  40. 3:29–3:31मुदा एडर नहीं चे
  41. 3:31–3:35इआपन अस्तिट्व के बच्वाक एक ता स्वबाबिक तरीका चे
  42. 3:35–3:38जखन लोक आपन माटी सदूर जाएच्छे
  43. 3:38–3:42ता आपन संस्क्रिती के एक ता सुरक्षा कवद जगा पहिर लेच्छे
  44. 3:42–3:44ओई बडण नीक बात कहलीए
  45. 3:44–3:45आ, टीक
  46. 3:45–3:51अखरे सामने एक ब्लोक में दिकूं, मन्शाक किर गर चे जताए पंजाब बसच्चे.
  47. 3:51–3:55बोर होई ते तडका किर गंद हवामे पसारी जाए चे.
  48. 3:55–3:59आँ, आँ मन्शाक पिताक पाक का वरनन कते कावि अत्मक चै.
  49. 3:59–4:06जखन अ पाग बाने चती, तलगगए च्यणा भोर का सुर्य रहुंकर माथ पर बाने लेल गाल हो.
  50. 4:06–4:12अम वन्शाक माई जखन रहुंकर सर्दार जी कए कई कब जगच्छे, उतक उनो नाम नहीं,
  51. 4:12–4:15बलकी एक ता प्रेम भरेल गीज सल लागच्छे.
  52. 4:15–4:18इसे कोलनी ता हमरा एक ता एहन पुस्तकाले जका लागल,
  53. 4:18–4:22जते सब पूति कवर एक रंग चे.
  54. 4:22–4:26बलकल, बाँईंटिंग, रंग, अकार, सब समान.
  55. 4:26–4:27मुदा जखन पन्ना पलएटी,
  56. 4:27–4:31ता हर पूतिसा एक दम विन्न भिन कहानी,
  57. 4:31–4:34एक्दम अलक्ष्बू आएहेसास भीताएचे
  58. 4:34–4:37आँ, येगेवल एक ता कोलनिक चित्रन नहीं चे
  59. 4:37–4:40यी आदूनिक भारत का महान नगरी अरुप चे
  60. 4:40–4:43जताई लोग गाँउ चोडिक शहर अबाए चे
  61. 4:43–4:45एक रंक बिल्टिंग में रहे चे
  62. 4:45–4:49मुदा उ आपन सांसक्रतिक जडी के नहीं चोडे चे, एक दम,
  63. 4:50–4:54लोकक भानस, लोकक भाशा, लोकक लोडी,
  64. 4:55–4:59इसब उ अ अद्द्रुश्यक खाजाना चे, जे उ आपन संग लोक जले चे,
  65. 5:00–5:03इदेखा वए चे, जदेक भी आदूनिकता आवे जाए,
  66. 5:03–5:09बाहिय दाचा भित्रका गज़िर सांस्क्रितिक पहचान के मिता नहीं सकल चे
  67. 5:09–5:16बलकोल, मुदा एही सांस्क्रितिक खजाना के सहथ जैईत काल एक ता और कतु यतार्त सामने आबेच चे
  68. 5:16–5:17अकी
  69. 5:17–5:22यहे दूनु पर्वारक दिन्चर या आदूनिक शहर के उही पासा के दिखावे चे,
  70. 5:22–5:26जटै वी माता पीता दूनु गोटे काजपर जाइच छतिन,
  71. 5:26–5:29भोर होगते दूनु अलगलक दिशा में निकल जाइच छतिन.
  72. 5:29–5:34अद्तक्हन मन्शाक पूरा दिनक चावी एक तेसर हाथ में चल जाएचे
  73. 5:34–5:36एक दम सही पकर लिये
  74. 5:36–5:39अउ तेसर हाथ चे महुवा केर
  75. 5:39–5:43इपात्र एही कताख सब से शान्त, मुदा सब से आवश्ष्यक
  76. 5:43–5:46अश्क्तिषाली उपस्तितिक रूप में सामने आवेचे
  77. 5:46–5:51अगर उमर बहुत कम चे शुवत कहेचे जे शायद औहो एकहन्दरी आपन गाँ में के क्रो कोरा में खेले तरहीत.
  78. 5:51–5:58अगर उमर बहुत कम चे, स्रोथ कहेचे जे शायद वो एकहन दरी अपन गाँ में केक्रो कोरा में खेले तरहीत.
  79. 5:58–6:02अगर उमर बहुत कम चे, स्रोथ कहेचे जे शायद वो एकहन दरी अपन गाँ में केक्रो कोरा में खेले तरहीत.
  80. 6:02–6:04अगु उखु दिक्ता बच्ची चे
  81. 6:04–6:06मुदा दिल्ली के एही फ्लाट्ट में
  82. 6:06–6:08उम वन्शाक दिनचर्याक दूरी चे
  83. 6:08–6:10मन्शाक के बोर में जगेनाई
  84. 6:10–6:12उकर भालजारी के दोनो का चुटिया बानब
  85. 6:12–6:14दूद गरम करव
  86. 6:14–6:16असाज में पारक लेभे जायब
  87. 6:16–6:20अद्रीवाँजे का लाक्व बच्चा शेहरी प्रवास अब भालश्वमक अ अनाम पहीए चती
  88. 6:20–6:24अग, मैंने एक ता बच्चा दवारा दोसर बच्चाक पालन पोषन भायर रहल चे.
  89. 6:24–6:31की, इक तेक मारमेक मुदा कतेक अजीब विडमना नहीं ता एह सब की आप चाए?
  90. 6:31–6:37एते सबसा अकर्षक बात इचे, जे ये महानगर्य अर्थ्विवस्ताक एक्ता बहुत अद्रिष्श फिस्सा चे.
  91. 6:38–6:44महुवाजे का लाको बच्चा, शेहरी प्रवास अब भाल्ष्रमक अ अनाम पहिया चती,
  92. 6:44–6:47जे करापर पूरा शेहर क्सुख सुविदा टिकल चे.
  93. 6:47–6:50मुदा हुनका कोई देखबाक प्रयास नहीं करे चे?
  94. 6:50–6:51भलकुल नहीं
  95. 6:51–6:54हम सब भालपनक, मासुम्यत ता केटची
  96. 6:54–6:57मुदा दोसर दिस एकता बच्ची अपन बच्पन गवाये का
  97. 6:57–6:59दोसरक बच्पन सवाडी रहल चे
  98. 6:59–7:01बाप्रे, इत बहुत गेहिर बाट चे
  99. 7:01–7:31जखन महुव मन्शाख के जुला जुलावेचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचच�
  100. 7:31–7:33अगर नाम दरी कोई नी जानेच्छे
  101. 7:33–7:35शहर अगर पहचान अगर नाम दरी जानेच्छे
  102. 7:35–7:37शहर अगर पहचान अगर नाम दरी जानेच्छे
  103. 7:37–7:39शहर अगर पहचान अगर नाम दरी च्छे
  104. 7:39–7:41अगर नाम दरी च्छे
  105. 7:41–7:43अगर नाम दरी च्छे
  106. 7:43–7:45अगर नाम दरी च्छे
  107. 7:45–7:47अगर उकर नामदरी कोई ने जानेच्छे
  108. 7:47–7:51शहर उकर पहचान अकर नामदरी चीन लेलक अची
  109. 7:51–7:54अखर एक तक खाज करे वाली मशीन बना दे लेलगे लाची
  110. 7:54–7:56इजे अद्रुष्शी करन चे
  111. 7:56–7:59इखोनो से हो अईन्सान के लिल सबसे पहग पीडा हो इच्छे
  112. 7:59–8:03उकर पहचान, उकर नामदरी चीन लेलक अची
  113. 8:03–8:06उकर एक तक खाज करे वाली मशीन बना दे लेलगे लची
  114. 8:06–8:11इजे अद्रुश्शी करन चे, इगोनो से हो अचान के लिल सबसे पहग पीडा हो इच्छे
  115. 8:11–8:15आम महुवा उही पीडा के मुस्कानक पाचानु का का जी भी रहाल चे.
  116. 8:15–8:17यहे बात हमरा सभीक द्यान किचे इच्छे.
  117. 8:17–8:21पारक में केवल एक गोटे शतिन रहा उक्रा उकर नाम सजाने चतिन.
  118. 8:21–8:23उम कर माए.
  119. 8:23–8:24आप एक दम.
  120. 8:24–8:26उम महूवा के आपन लग बैसावए चतिन,
  121. 8:26–8:32उक्रा सने सक्वावे कहेच्छती जि खाले हबवा तु होता एक हन बच्चे चा.
  122. 8:32–8:37आव उजी समय मववाक आखी में औडिशाक नदी चम कै च्छे.
  123. 8:37–8:44इप पंक्तित रदाए के चूलेल के, एक तचोडसन समवाद कुना के करो पूरा दून्या बडली देच्छे.
  124. 8:44–8:48कारन, जि जखन औम के माए उक्रा नाम सब बजे च्ठिन,
  125. 8:48–8:52उकर भूखख, उकर भालपनक छिन्ता करे च्ठिन,
  126. 8:52–8:56तो वास्तव में मवाग छिनाइत मानविय पहचाम के वापस दारहल च्ठिन.
  127. 8:56–9:00राग, उआया सब फिर से एक तबच्ची मानी जाएचे.
  128. 9:00–9:09इच्छोट सन्मान्वियस पर्ष इप्रमानित करे चे जे चारु काद कव्याव्साइक्ता के भीच सो हो समवेदना एकानो कतहुन अकतहु जीविच्छे.
  129. 9:09–9:11एक दम सही.
  130. 9:11–9:14अर इबित्रा गुटन अपहचानक संकत
  131. 9:14–9:17जकन गरक चारी देवाल सब आहर अबज्च्चे
  132. 9:17–9:20तब पारकक मैदान में एक ता अलक दुन्या क्डा होएच्चे
  133. 9:20–9:22आ, उगास का मैदान
  134. 9:22–9:25कोलोनिक भीच में अवस्तित उगास के पारक
  135. 9:25–9:27जे एही कहानिक जना राज्दानी चे
  136. 9:27–9:31साज होते ये दबच्चा लोकनिक ये अपन संसुध बैसट चे
  137. 9:31–9:34इजे रूपक शे संसद के रही बहुत गहीर चे
  138. 9:34–9:38इस संसद बदका लोकनिक संसध से एक दम अलक चे बुजलिये
  139. 9:38–9:42इते कोनो लिक्हित नियम नही चा, कोनो भीदबहो नही चे
  140. 9:42–9:54आप ख़ाग बाद्टाग बाद्टी बजागे दोडी रहल चे तो और बिना कोनो कारनक मात्र दोडबाक अनंद लेबे लेए दोडी रहल चे
  141. 9:54–9:59इबच्चा सबख आपनेक्ता स्वायत दून्या चे जदे बदका लोकनेक नीम ने चलेएज़े
  142. 9:59–10:08यह पारक में मितलाक लगका, पंजाबाक लगकी, औडीशाक महुवा, अदिली गास सब मिलाके जनो पूरा देश एक संखेली रहाल चे.
  143. 10:08–10:11अग किक्रो द्यान नहीं चे ही सब पर.
  144. 10:11–10:19आज़ सब से रोचक बाती चे, जे किक्रो इबातक बान ने चे, जे उसब अलग अलग प्रान तक चें.
  145. 10:19–10:24मुदा हम्रा कहूँ कि इबच्च्या सब सच्मुच में इते एक सहिष्नू होई चे,
  146. 10:24–10:28वा हूंका सब के एकन दरी समाजक भेदबहाँ सिक्हाल ने गेल चे.
  147. 10:28–10:39ये ते एक ता महत्वपूरन प्रश्न उटेच थे देखू बच्चा जनम सच्छनू वा अ सजछनू नहीं हो ये ये ता खाली पन्ना जगा हो ये जे
  148. 10:39–10:45रहां बलकु उब भाशा प्रान्त रंग वा जातिक चश्मा सा दून्या के नहीं देखे चे
  149. 10:45–10:50अई खाली पन्ना पर समाज अपना ही साभ सा लकीर किचे चे,
  150. 10:50–10:54मुदा एही अमर में हुनका लेल केबल खेल महत्वोपूरन चे.
  151. 10:54–11:00माने हुनका लेल मानो-मानो के भीचक संबंद बस उत्बे चे जितेक खेलक मैधान में का जावेच छे.
  152. 11:00–11:03अव कर बाद रव जाज जे दूनु कहीआ भेटल
  153. 11:03–11:06बस एक दिन साज मे दूनु जूला पर एक संग देखल गेल
  154. 11:06–11:09अव कर बाद रव साज मे एक संज एक संग
  155. 11:09–11:12अव दोनु एक दम विप्रीज सवबहावक चे
  156. 11:12–11:15अव व दोनु अव विप्रीज स्वबहावक चे
  157. 11:15–11:17अवकर बाद बद्र रोचक बजाए चे
  158. 11:17–11:20के कर याज चे जे दूनू कहिया भेटल
  159. 11:20–11:24बस एक दिन साज में तूनू जूला पर एक संग देखल गेल
  160. 11:24–11:26अवकर बाद रर साज एक संग
  161. 11:26–11:30अव, तूनू एक दम विप्रीट सुभावक चे
  162. 11:30–11:32अव, एक दम शान्त सुभावक चे
  163. 11:32–11:34बाजेत कम च्या सुनेत भेसी च्या
  164. 11:34–11:38आ मन्शा उत शब्द का आतिश बाजी च्या
  165. 11:38–11:39उकर सबाव में आगी च्या
  166. 11:39–11:41हमेशा बजैत रहे च्या
  167. 11:41–11:43मुदा गोर करबाग बात इच्या
  168. 11:43–11:47जे एह विप्रीट्ता हुनका सब का मित्रता के मस्वूद बनवेच्ये
  169. 11:47–11:52अम जखन बालुग किचु बन वेच्छे, तम वन्शा वोकर पहरेदार बनी जाएचे,
  170. 11:52–11:54जे कोनो दोसर बच्चा वोकरा खसान अदियाए.
  171. 11:54–11:59आजगन वन्शा कतवू फैसेच्चा, तो वन्चुप्चा पोकर हात पकरी लेच्चा.
  172. 11:59–12:04एही जोडी के देखी कब पारक के आजी दादी सबसे हो हसाई चतिन
  173. 12:04–12:08सोचुता, ओम शान चे, आम वन्शा चुप नहीं रहे सके चे
  174. 12:08–12:13इदूनु जना कोनो पहलिक, दूईता एक दम अलगलक तुक्रा चा
  175. 12:13–12:18जे ते एक तुक्डा खाली जगा चा, तुसर तुक्डा उही में एक दम सतिक बैसी जाएच चा.
  176. 12:18–12:22आँ औं और मन्शात पूरक्ता इहे दिखावे चा.
  177. 12:22–12:28इहे कारन्च आए जे औंके जनम दिन मन्शा लेल से हो कोनो पावनिक से कम नही हो एच चा.
  178. 12:28–12:32एक्दम, अम कर्माय भोर से जे तएरी करे चती,
  179. 12:32–12:35उई में एक्टा काज अगवेने विस्रे चती,
  180. 12:35–12:38मन्शा लेल से हो विशेश उपहार किनब.
  181. 12:38–12:43आँ, अगवेन चती जे की, बेटी बिना उपहारक गर जाएत,
  182. 12:43–12:47ये एक ता बहुत पैग सान्स्क्रतिक आम्मानविया मुल्ले के दर्शावे च्याए.
  183. 12:47–12:54औम कर माए खीक सुचे च्यादी, ये दिखावे च्याए, जे प्रेम कोना देवाल के पार कजाए च्याए.
  184. 12:54–13:00जगन लोग आपनापन से बहरल होगचें, तब पडोसी बच्चा से हो आपन बच्चा जगा लगेच हैं.
  185. 13:00–13:08औही दिस महुवा मन्शाक के नहवादूवाग क, नोफ रोग पहिराग क, समझे से पहले वोंगे दर्वाजा पर लोवाभी जाएचे.
  186. 13:08–13:13गन्ती बजे चे, दरवाजा खूले चे, आम वन्शा आपी ब्रत्दे वूम,
  187. 13:13–13:17कहत भितर दोडी जाए चे, जेना उ कोनो पाहुन नहीं,
  188. 13:17–13:19बलकी उही गर कब भीटी होई.
  189. 13:19–13:22के कटलादरी उ गर का हिस्सा बनी जाए चे,
  190. 13:22–13:25अदूनु बच्चा एक दूस्राके केक हो वावे च्ये
  191. 13:25–13:28इपूरा द्रिष्छ इप्रमानित करे च्ये
  192. 13:28–13:31जे की मित्रता कोनो पोठी से सिखावला जासके च्ये
  193. 13:31–13:33इस पष्च च्ये नहीं
  194. 13:33–13:35आप इई स्वता जनम लाई च्ये
  195. 13:35–13:38एही निर्दोष मित्रता में भाशा
  196. 13:38–13:41प्रान्त आस्वबहाँ के कोनो बादा नहीं चे
  197. 13:41–13:44इस समाजले ले लेगता बहुत पैग सीक चे
  198. 13:44–13:46जे निष्छल प्रेम कोना
  199. 13:46–13:49बिला कोनो प्रे आसक अपना पन प्यदा करेद चे
  200. 13:49–13:54रुव, कोना अ अडोस-पडोस के एक ता परिवार में बडली देच चे
  201. 13:54–13:59इजे चार सालक निरबाद मित्रता चलेई इग कुनो जीवन्सा कम नचली
  202. 13:59–14:02उसब जना एक ता सुरक्षिद बुल्बुला मे रही रही रहे लचल,
  203. 14:02–14:05मुदद जना की हर कहानी में होईट चे,
  204. 14:05–14:08इशान्ती असम्रस्ता हमेशा नहीं रहे चे.
  205. 14:08–14:10नहीं रहे चे, एक दम सही.
  206. 14:10–14:14जगन उसब आपन मित्रताक पाचम साल में प्रवेश करेच चे,
  207. 14:14–14:17तो कहानी में क्ता पैग मोड़ बईच्छे
  208. 14:17–14:22आ उ मोड़ बईच्छे एक ता नव परिवार आ एक ता नव बच्चाक अगमन्सा
  209. 14:22–14:27कोलनी में जे नव बच्चा आवेच्छे उकर नाम चे सुसेन
  210. 14:27–14:28आ, सुसेन
  211. 14:28–14:31सुसेन कहानी में एक ता बाहे व्वदान
  212. 14:31–14:34या बाहरी दखल बनी कप्रवेश करेट चे
  213. 14:34–14:37सुसेन अम आमन्चा सा उमर में पैग चे
  214. 14:37–14:38शरीर सा मजबूद चे
  215. 14:38–14:40अब भोली सा टीक चे
  216. 14:40–14:44आप उपहल दिन से जना पारक कन्नियम बदल्वाग प्रयाज करेट चे
  217. 14:44–14:46उखेल आईद कम चे
  218. 14:46–14:47अखेल बिगाडईद बेसी चे
  219. 14:47–14:50के क्रो साएकिले गंती बजाके बागीजाब
  220. 14:50–14:53के क्रो बालू महल के लात्मारी के खसादेब
  221. 14:53–14:56अब बच्च्च्या सब के नाम के बिगाडी के फोड बनादेब
  222. 14:56–14:57इसबोकर प्रब्रती चे
  223. 14:57–14:58एक दम
  224. 14:58–15:00मुदायते हमरा मन में एक ता बाश्द चे
  225. 15:00–15:03की सुसेन जानी भूजी के खराब चे,
  226. 15:03–15:05वा यी एक ता बच्चाक मनोविग्यान चे.
  227. 15:05–15:09मैंने जखन कोना बच्चा एक ता एक दम नवप परीवेश में अबई चे,
  228. 15:09–15:13जते पहले से सबखक आपन आपना समुग बनल चे,
  229. 15:13–15:17तकि यो आपना दिस द्यान आक्रिष्ट करवाक लेल आकारन विद्रों ने कराल चे.
  230. 15:17–15:21ये एक तब बहुत गहेर आ सत्तिक लगिक भिसलेशन चे.
  231. 15:21–15:24अकसर जे बच्चा आक्रामक दिखाएद चे,
  232. 15:24–15:27उबही तर सा असुरक्षित महसुस कर्रहल होगे चे.
  233. 15:27–15:29आप बूजु जे उडरायल जे
  234. 15:29–15:34सुसेन के उही इस्तापित सन्सद में आपन जगा न बेटी रहल जे
  235. 15:34–15:37सब बच्चा पहले सा एक दुसरा से जुडल चे
  236. 15:37–15:39आव उई ते एक दम नव चे
  237. 15:39–15:42ते आव उही सन्सद के नियम के तोडी के
  238. 15:42–15:44अपन उपस्तिती दर्ज करावे चाहे चे
  239. 15:44–15:47ओ, मने ओ नकारात्मक तरीका से
  240. 15:47–15:51हे, सही, मुदा उई समुक हिस्सा बन्वा खोषिष करावल चे
  241. 15:51–15:52भिल्कुल
  242. 15:52–15:58एक अन्दरी जे एक ता सम्रस अशान्ती पूरन सुख्श्म संसार पार्क मेचल
  243. 15:58–16:01सुसेन उई शान्ती चे भंग करे चे,
  244. 16:01–16:07आई देखाई रहल चे, जे जीवन में हमेशा केवल अनुकुल परिस्थिती नहीं रही चे.
  245. 16:07–16:11इन आजरया सुसेन के विवहार के एक तनव आप देई चे,
  246. 16:11–16:14मुदा उकर एही विवहारक चे प्रभाव,
  247. 16:14–16:20उम आम्मन्शांक दुन्यापर पड़ई चे उ कहानी के एक नव गंभीरता दिस लेज़े चे
  248. 16:20–16:28आँ उजे सुरक्षित बुल्बुला चल उक्रा आब एक टाप्टु याद्ध सद सामना करे परी रहल चे
  249. 16:28–16:35वी मात्र बच्च्का खेलनी चे, इजीवनक उसंगर्स चे, जे ते शान्ती के बहरी तत्तु दोडार चुनोती दिल जाएचे,
  250. 16:35–16:40आव उही चुनोतिक सामना कुना कल जाए, इजी सिकनाई आवश्षक बहे जाएचे.
  251. 16:40–16:47आई है उ विन्दुच है, जे ते बाल गुरू शीर्षकक अस्ली आप दीरे दीरे स्पष्ट हो में लगे चे.
  252. 16:47–16:53बच्चा कोना एही वेवदान के समहले चे, कोना उ बिना बडगक रस्टक्शेप का,
  253. 16:53–16:55अपन दुन्या के रक्षा करे चे
  254. 16:55–16:57इख्टा पाग सीक चे
  255. 16:57–16:58की वाच चे?
  256. 16:58–17:00जना जना कहानी आगो बड़े चे
  257. 17:00–17:02हम सब दिख़े ची
  258. 17:02–17:04जे इच्छो चोट बच्चा जीवनक
  259. 17:04–17:06अपाट पड़ा रहल चे
  260. 17:06–17:09जे अखसर पैक पैक गुरूसे हो नहीं पड़ा पावे च्छती.
  261. 17:09–17:11ये सच्मुच अदबुच है.
  262. 17:11–17:14तजगन हम सब आईप पूरी चर्चा के समेटेई ची,
  263. 17:14–17:18तई ये सपष्ट हुई चे गजेंदर ताकृगी कर एकाज
  264. 17:18–17:20मात्र कुछ बच्चा कानी नहीं चे.
  265. 17:20–17:27इस शेहरी करनक, सांस्क्रितिक पह्चानक, आमानविय सदबावा के क्कट गेर दस्तावेष च्याए.
  266. 17:27–17:31इक्दम, इस हम्रा सवा कपन महान नगरी या जीवन का आईना चे.
  267. 17:31–17:38इचर्चा श्रोता लोकनी लेल बहुत प्रसंगिक चे जे शहर कर विस्त आएका की जीवन जीवी रोल चातीन.
  268. 17:38–17:45इखाहनी इए याद दिवाए चे जे शहर कर कोंक्रीट जंगल में सहो मातिक ज़द भीतर द़री जीवित रहे चे.
  269. 17:45–17:52अज़़ सब से पैक बात इज़ निर्दोषता चे जे बिना कुनो भेद्भाँ प्रेम करवप चे उकोनो पोठिक मोठाज नी चे.
  270. 17:52–17:57आप, लोग चाहे तई बच्चा सब से बहुत किछी सीख सकई चे.
  271. 17:57–18:03भिल्कुल, जटे अकसर पडोसी दरी के चिनना एं मुष्किल होई चे, उते इकहानी बहुत कुछ कहे चे
  272. 18:03–18:08शहर लोग के एक ठाम लेभी तो अजाच़े, मुदा अपन नहीं दपावे चे,
  273. 18:08–18:14जे ओम आमन्शाक मित्रता में चे, वा ओम के रमाए दवारा महुवा के दुलारभा में चे,
  274. 18:14–18:18इगेर चर्चा हम्रा सब के बहुत किची सुच्वापर विवष करे चे.
  275. 18:18–18:24आई इदिक हावेट चे जे समाज कोना सुख्श्म रूब सां काज करेच चे,
  276. 18:24–18:29बाल पनक जे उ खाली पन्ना चे उ कितेक सुन्दर आनिश्कलंक होएच चे.
  277. 18:29–18:31इच चुच वाक बाट चे.
  278. 18:31–18:36ता आई आई चर्चाक समापन करेच काल एक तक गमभीर प्रष्न उटेच चे,
  279. 18:36–18:40जे आई साँज मे हम सब अपन दरवाजा सब बहारता की
  280. 18:40–18:44तक तक लिए हम सब उही अलगलक देश के विषे में जोनी ची
  281. 18:44–18:48जे अडोस पडोसक एक समान दरवाजा कपच्जा वैसल चे
  282. 18:48–18:50ह! इब बडनीक प्रशन चे
  283. 18:50–18:52आए एक ता अर बात
  284. 18:52–18:57की हम सब कहीो आपन महुवा किर वास्तविक नाम पुछवाग प्रयास के लूए ची?
  285. 18:57–19:02यह उ विचार चे जिकर उत्र हम्रा सवक समाच के ताख्वा कवस्ष्टा चे,
  286. 19:02–19:07आई विचार सवम सब भिदालेची बेटेची अगला गहीर चर्चा मे.

Plain text

तजगन हम सब मने कोनो पएक शेहरक उपर से हवाई जहाज से निचा ताकिच्छि, तजब किच एक दम एक रंग लागिच्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्� अई आई क हम्रा सबक यी गहीर चर्चा एक ता एहने अद्दुद दुन्या क्यात्रा चे, हम्रा सबक लोग एक ता बहुत मार्मिक मैंने बहुत रोचक सहेटिक कारजक स्वोट चे. आई गजेंद्र ताकुर जी रचित कता. अगर सबक लोग एक ता बहुत मार्मिक, मैंने बहुत रोचक सहेटिक कारजक स्वोट चे आँ, गजेंद्र ताकुर जी रचित कता बिल्कुल, बाल गुरू जे मैठिलिक प्रतम पाखषिक इपत्रिका विदे हैसे लेल गिल चे आई आई हम सब एह पर विस्तार सगब करव। इग कता मने मुल रूपसा अम आम वन्शा नाम दूईता चोट बच्चाक छे सदहरन तह लोग भाल कता के एक ता हल्का फुल का किस्सा मानी लिट चे आँ लोग सोचे चेज बच्चाक कहनी च्याते की है ते मुदा एमे शेहरक महानगरी जीवन साँच्रतिग विविद्ध्ता, आमानविय समबनदग जे गुड आर्थ चिपल चे, उ हम्रा सब कलेल एक ता पएक समाज सास्त्री अद्द्यन सिक्व नहीं चे. मनी कहानी इते गमवीर बात कहेचे, जे शायएद मोट-मोट पोथी स्यों नहीं कही सकेचे. हमरात अगते इस वोच्टी का आश्चरे होएचे, जे आजा वयस्क लोग सोचे चे, जे बच्चा कहानी से जीवन का की पाएक सीख बेटाद. मुदा एश रोत के पहलादरी हमर इदारना एक दम बडलीगल. तटीक चे आवेक रा विस्तार सबूजी. एक दम. कहनी शुरू होए चे दिल्लिक एक ता हाँसिंग कोलोनी सा. जताई पूरा देशक लोक आबी कबहिसल चे. कोलोनी की जे वास्तू कला या बनावर चे, अकरा बहुत सुख्श्मता से दिखाँन गल चे. आप, माने बाहर से देखला पर सब फलात एक समान चे. एक दम एक रंग. रंग एके जगा, भलकनी का अकार एके जगा, दरवाजा से हो एके जगा. ये के जगा स्रोथ में दे देरी कहल गेल चे, जे उपर से देखला पर सब फलात जूर्वा भाई जगा का लगे चे. आा, बूजु चे ये एक रुप्ता महान नगरय जीवनक एक ता पहीग विडम बना चे. की? ये विडम या नहीं चे? बलकु चे. जे हम सब एक्रा पाएगपरी प्रेक्ष्षे से जोडी, तई बाहियमान की करन आदूनिक शहरी करनक एक ता जानी भुजके कयल गेल दिसाँन चेए. शहर माने, सिस्तम के सुचारूरूप से चलावे लिल सब किचुके एक दाचा मे डाले चे. अ, समके एके रंग मे रंग प्र्यास. अ, इक ता अद्रिष्य दबाब चे. मुदा अस्ली प्रती रोद उही दर्वाजा कपाशा शूरू है चे. वित्तर जाए ते, बुजहाए चे जे लोक अपन जर्दी सकते गेरा रुप से जूल चे. आव उ प्रती रोद कते क सुन्दर चे, जक्ञन तीसर तलापर ओम के गर में प्रवेश किया जै चे, तो उते जना मितला बसे चे. एक दम. भानस गर सा अर्वा चावडग कान्द, बरखाक दीन में तरुवा, अद्तिल्कोरग स्वास सा पुरा गर बड़ी जाएचे, आ अम के मैग तोर पर मैठिली लोरी रहेचे जे चोड-चोड-गीच जगा खसाएच जगेचे. मुदा हम्रा एक ता बात कहूँ कि इके वल अतीज सज्डल रहवाक एक ता बावुकता नहीं चे? आम आने आहा के तातपर ये जे लोक नव महाल में धलबास दराए चे आम खिछ लोक ता एहे कहत? मुदा एडर नहीं चे इआपन अस्तिट्व के बच्वाक एक ता स्वबाबिक तरीका चे जखन लोक आपन माटी सदूर जाएच्छे ता आपन संस्क्रिती के एक ता सुरक्षा कवद जगा पहिर लेच्छे ओई बडण नीक बात कहलीए आ, टीक अखरे सामने एक ब्लोक में दिकूं, मन्शाक किर गर चे जताए पंजाब बसच्चे. बोर होई ते तडका किर गंद हवामे पसारी जाए चे. आँ, आँ मन्शाक पिताक पाक का वरनन कते कावि अत्मक चै. जखन अ पाग बाने चती, तलगगए च्यणा भोर का सुर्य रहुंकर माथ पर बाने लेल गाल हो. अम वन्शाक माई जखन रहुंकर सर्दार जी कए कई कब जगच्छे, उतक उनो नाम नहीं, बलकी एक ता प्रेम भरेल गीज सल लागच्छे. इसे कोलनी ता हमरा एक ता एहन पुस्तकाले जका लागल, जते सब पूति कवर एक रंग चे. बलकल, बाँईंटिंग, रंग, अकार, सब समान. मुदा जखन पन्ना पलएटी, ता हर पूतिसा एक दम विन्न भिन कहानी, एक्दम अलक्ष्बू आएहेसास भीताएचे आँ, येगेवल एक ता कोलनिक चित्रन नहीं चे यी आदूनिक भारत का महान नगरी अरुप चे जताई लोग गाँउ चोडिक शहर अबाए चे एक रंक बिल्टिंग में रहे चे मुदा उ आपन सांसक्रतिक जडी के नहीं चोडे चे, एक दम, लोकक भानस, लोकक भाशा, लोकक लोडी, इसब उ अ अद्द्रुश्यक खाजाना चे, जे उ आपन संग लोक जले चे, इदेखा वए चे, जदेक भी आदूनिकता आवे जाए, बाहिय दाचा भित्रका गज़िर सांस्क्रितिक पहचान के मिता नहीं सकल चे बलकोल, मुदा एही सांस्क्रितिक खजाना के सहथ जैईत काल एक ता और कतु यतार्त सामने आबेच चे अकी यहे दूनु पर्वारक दिन्चर या आदूनिक शहर के उही पासा के दिखावे चे, जटै वी माता पीता दूनु गोटे काजपर जाइच छतिन, भोर होगते दूनु अलगलक दिशा में निकल जाइच छतिन. अद्तक्हन मन्शाक पूरा दिनक चावी एक तेसर हाथ में चल जाएचे एक दम सही पकर लिये अउ तेसर हाथ चे महुवा केर इपात्र एही कताख सब से शान्त, मुदा सब से आवश्ष्यक अश्क्तिषाली उपस्तितिक रूप में सामने आवेचे अगर उमर बहुत कम चे शुवत कहेचे जे शायद औहो एकहन्दरी आपन गाँ में के क्रो कोरा में खेले तरहीत. अगर उमर बहुत कम चे, स्रोथ कहेचे जे शायद वो एकहन दरी अपन गाँ में केक्रो कोरा में खेले तरहीत. अगर उमर बहुत कम चे, स्रोथ कहेचे जे शायद वो एकहन दरी अपन गाँ में केक्रो कोरा में खेले तरहीत. अगु उखु दिक्ता बच्ची चे मुदा दिल्ली के एही फ्लाट्ट में उम वन्शाक दिनचर्याक दूरी चे मन्शाक के बोर में जगेनाई उकर भालजारी के दोनो का चुटिया बानब दूद गरम करव असाज में पारक लेभे जायब अद्रीवाँजे का लाक्व बच्चा शेहरी प्रवास अब भालश्वमक अ अनाम पहीए चती अग, मैंने एक ता बच्चा दवारा दोसर बच्चाक पालन पोषन भायर रहल चे. की, इक तेक मारमेक मुदा कतेक अजीब विडमना नहीं ता एह सब की आप चाए? एते सबसा अकर्षक बात इचे, जे ये महानगर्य अर्थ्विवस्ताक एक्ता बहुत अद्रिष्श फिस्सा चे. महुवाजे का लाको बच्चा, शेहरी प्रवास अब भाल्ष्रमक अ अनाम पहिया चती, जे करापर पूरा शेहर क्सुख सुविदा टिकल चे. मुदा हुनका कोई देखबाक प्रयास नहीं करे चे? भलकुल नहीं हम सब भालपनक, मासुम्यत ता केटची मुदा दोसर दिस एकता बच्ची अपन बच्पन गवाये का दोसरक बच्पन सवाडी रहल चे बाप्रे, इत बहुत गेहिर बाट चे जखन महुव मन्शाख के जुला जुलावेचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचच� अगर नाम दरी कोई नी जानेच्छे शहर अगर पहचान अगर नाम दरी जानेच्छे शहर अगर पहचान अगर नाम दरी जानेच्छे शहर अगर पहचान अगर नाम दरी च्छे अगर नाम दरी च्छे अगर नाम दरी च्छे अगर नाम दरी च्छे अगर उकर नामदरी कोई ने जानेच्छे शहर उकर पहचान अकर नामदरी चीन लेलक अची अखर एक तक खाज करे वाली मशीन बना दे लेलगे लाची इजे अद्रुष्शी करन चे इखोनो से हो अईन्सान के लिल सबसे पहग पीडा हो इच्छे उकर पहचान, उकर नामदरी चीन लेलक अची उकर एक तक खाज करे वाली मशीन बना दे लेलगे लची इजे अद्रुश्शी करन चे, इगोनो से हो अचान के लिल सबसे पहग पीडा हो इच्छे आम महुवा उही पीडा के मुस्कानक पाचानु का का जी भी रहाल चे. यहे बात हमरा सभीक द्यान किचे इच्छे. पारक में केवल एक गोटे शतिन रहा उक्रा उकर नाम सजाने चतिन. उम कर माए. आप एक दम. उम महूवा के आपन लग बैसावए चतिन, उक्रा सने सक्वावे कहेच्छती जि खाले हबवा तु होता एक हन बच्चे चा. आव उजी समय मववाक आखी में औडिशाक नदी चम कै च्छे. इप पंक्तित रदाए के चूलेल के, एक तचोडसन समवाद कुना के करो पूरा दून्या बडली देच्छे. कारन, जि जखन औम के माए उक्रा नाम सब बजे च्ठिन, उकर भूखख, उकर भालपनक छिन्ता करे च्ठिन, तो वास्तव में मवाग छिनाइत मानविय पहचाम के वापस दारहल च्ठिन. राग, उआया सब फिर से एक तबच्ची मानी जाएचे. इच्छोट सन्मान्वियस पर्ष इप्रमानित करे चे जे चारु काद कव्याव्साइक्ता के भीच सो हो समवेदना एकानो कतहुन अकतहु जीविच्छे. एक दम सही. अर इबित्रा गुटन अपहचानक संकत जकन गरक चारी देवाल सब आहर अबज्च्चे तब पारकक मैदान में एक ता अलक दुन्या क्डा होएच्चे आ, उगास का मैदान कोलोनिक भीच में अवस्तित उगास के पारक जे एही कहानिक जना राज्दानी चे साज होते ये दबच्चा लोकनिक ये अपन संसुध बैसट चे इजे रूपक शे संसद के रही बहुत गहीर चे इस संसद बदका लोकनिक संसध से एक दम अलक चे बुजलिये इते कोनो लिक्हित नियम नही चा, कोनो भीदबहो नही चे आप ख़ाग बाद्टाग बाद्टी बजागे दोडी रहल चे तो और बिना कोनो कारनक मात्र दोडबाक अनंद लेबे लेए दोडी रहल चे इबच्चा सबख आपनेक्ता स्वायत दून्या चे जदे बदका लोकनेक नीम ने चलेएज़े यह पारक में मितलाक लगका, पंजाबाक लगकी, औडीशाक महुवा, अदिली गास सब मिलाके जनो पूरा देश एक संखेली रहाल चे. अग किक्रो द्यान नहीं चे ही सब पर. आज़ सब से रोचक बाती चे, जे किक्रो इबातक बान ने चे, जे उसब अलग अलग प्रान तक चें. मुदा हम्रा कहूँ कि इबच्च्या सब सच्मुच में इते एक सहिष्नू होई चे, वा हूंका सब के एकन दरी समाजक भेदबहाँ सिक्हाल ने गेल चे. ये ते एक ता महत्वपूरन प्रश्न उटेच थे देखू बच्चा जनम सच्छनू वा अ सजछनू नहीं हो ये ये ता खाली पन्ना जगा हो ये जे रहां बलकु उब भाशा प्रान्त रंग वा जातिक चश्मा सा दून्या के नहीं देखे चे अई खाली पन्ना पर समाज अपना ही साभ सा लकीर किचे चे, मुदा एही अमर में हुनका लेल केबल खेल महत्वोपूरन चे. माने हुनका लेल मानो-मानो के भीचक संबंद बस उत्बे चे जितेक खेलक मैधान में का जावेच छे. अव कर बाद रव जाज जे दूनु कहीआ भेटल बस एक दिन साज मे दूनु जूला पर एक संग देखल गेल अव कर बाद रव साज मे एक संज एक संग अव दोनु एक दम विप्रीज सवबहावक चे अव व दोनु अव विप्रीज स्वबहावक चे अवकर बाद बद्र रोचक बजाए चे के कर याज चे जे दूनू कहिया भेटल बस एक दिन साज में तूनू जूला पर एक संग देखल गेल अवकर बाद रर साज एक संग अव, तूनू एक दम विप्रीट सुभावक चे अव, एक दम शान्त सुभावक चे बाजेत कम च्या सुनेत भेसी च्या आ मन्शा उत शब्द का आतिश बाजी च्या उकर सबाव में आगी च्या हमेशा बजैत रहे च्या मुदा गोर करबाग बात इच्या जे एह विप्रीट्ता हुनका सब का मित्रता के मस्वूद बनवेच्ये अम जखन बालुग किचु बन वेच्छे, तम वन्शा वोकर पहरेदार बनी जाएचे, जे कोनो दोसर बच्चा वोकरा खसान अदियाए. आजगन वन्शा कतवू फैसेच्चा, तो वन्चुप्चा पोकर हात पकरी लेच्चा. एही जोडी के देखी कब पारक के आजी दादी सबसे हो हसाई चतिन सोचुता, ओम शान चे, आम वन्शा चुप नहीं रहे सके चे इदूनु जना कोनो पहलिक, दूईता एक दम अलगलक तुक्रा चा जे ते एक तुक्डा खाली जगा चा, तुसर तुक्डा उही में एक दम सतिक बैसी जाएच चा. आँ औं और मन्शात पूरक्ता इहे दिखावे चा. इहे कारन्च आए जे औंके जनम दिन मन्शा लेल से हो कोनो पावनिक से कम नही हो एच चा. एक्दम, अम कर्माय भोर से जे तएरी करे चती, उई में एक्टा काज अगवेने विस्रे चती, मन्शा लेल से हो विशेश उपहार किनब. आँ, अगवेन चती जे की, बेटी बिना उपहारक गर जाएत, ये एक ता बहुत पैग सान्स्क्रतिक आम्मानविया मुल्ले के दर्शावे च्याए. औम कर माए खीक सुचे च्यादी, ये दिखावे च्याए, जे प्रेम कोना देवाल के पार कजाए च्याए. जगन लोग आपनापन से बहरल होगचें, तब पडोसी बच्चा से हो आपन बच्चा जगा लगेच हैं. औही दिस महुवा मन्शाक के नहवादूवाग क, नोफ रोग पहिराग क, समझे से पहले वोंगे दर्वाजा पर लोवाभी जाएचे. गन्ती बजे चे, दरवाजा खूले चे, आम वन्शा आपी ब्रत्दे वूम, कहत भितर दोडी जाए चे, जेना उ कोनो पाहुन नहीं, बलकी उही गर कब भीटी होई. के कटलादरी उ गर का हिस्सा बनी जाए चे, अदूनु बच्चा एक दूस्राके केक हो वावे च्ये इपूरा द्रिष्छ इप्रमानित करे च्ये जे की मित्रता कोनो पोठी से सिखावला जासके च्ये इस पष्च च्ये नहीं आप इई स्वता जनम लाई च्ये एही निर्दोष मित्रता में भाशा प्रान्त आस्वबहाँ के कोनो बादा नहीं चे इस समाजले ले लेगता बहुत पैग सीक चे जे निष्छल प्रेम कोना बिला कोनो प्रे आसक अपना पन प्यदा करेद चे रुव, कोना अ अडोस-पडोस के एक ता परिवार में बडली देच चे इजे चार सालक निरबाद मित्रता चलेई इग कुनो जीवन्सा कम नचली उसब जना एक ता सुरक्षिद बुल्बुला मे रही रही रहे लचल, मुदद जना की हर कहानी में होईट चे, इशान्ती असम्रस्ता हमेशा नहीं रहे चे. नहीं रहे चे, एक दम सही. जगन उसब आपन मित्रताक पाचम साल में प्रवेश करेच चे, तो कहानी में क्ता पैग मोड़ बईच्छे आ उ मोड़ बईच्छे एक ता नव परिवार आ एक ता नव बच्चाक अगमन्सा कोलनी में जे नव बच्चा आवेच्छे उकर नाम चे सुसेन आ, सुसेन सुसेन कहानी में एक ता बाहे व्वदान या बाहरी दखल बनी कप्रवेश करेट चे सुसेन अम आमन्चा सा उमर में पैग चे शरीर सा मजबूद चे अब भोली सा टीक चे आप उपहल दिन से जना पारक कन्नियम बदल्वाग प्रयाज करेट चे उखेल आईद कम चे अखेल बिगाडईद बेसी चे के क्रो साएकिले गंती बजाके बागीजाब के क्रो बालू महल के लात्मारी के खसादेब अब बच्च्च्या सब के नाम के बिगाडी के फोड बनादेब इसबोकर प्रब्रती चे एक दम मुदायते हमरा मन में एक ता बाश्द चे की सुसेन जानी भूजी के खराब चे, वा यी एक ता बच्चाक मनोविग्यान चे. मैंने जखन कोना बच्चा एक ता एक दम नवप परीवेश में अबई चे, जते पहले से सबखक आपन आपना समुग बनल चे, तकि यो आपना दिस द्यान आक्रिष्ट करवाक लेल आकारन विद्रों ने कराल चे. ये एक तब बहुत गहेर आ सत्तिक लगिक भिसलेशन चे. अकसर जे बच्चा आक्रामक दिखाएद चे, उबही तर सा असुरक्षित महसुस कर्रहल होगे चे. आप बूजु जे उडरायल जे सुसेन के उही इस्तापित सन्सद में आपन जगा न बेटी रहल जे सब बच्चा पहले सा एक दुसरा से जुडल चे आव उई ते एक दम नव चे ते आव उही सन्सद के नियम के तोडी के अपन उपस्तिती दर्ज करावे चाहे चे ओ, मने ओ नकारात्मक तरीका से हे, सही, मुदा उई समुक हिस्सा बन्वा खोषिष करावल चे भिल्कुल एक अन्दरी जे एक ता सम्रस अशान्ती पूरन सुख्श्म संसार पार्क मेचल सुसेन उई शान्ती चे भंग करे चे, आई देखाई रहल चे, जे जीवन में हमेशा केवल अनुकुल परिस्थिती नहीं रही चे. इन आजरया सुसेन के विवहार के एक तनव आप देई चे, मुदा उकर एही विवहारक चे प्रभाव, उम आम्मन्शांक दुन्यापर पड़ई चे उ कहानी के एक नव गंभीरता दिस लेज़े चे आँ उजे सुरक्षित बुल्बुला चल उक्रा आब एक टाप्टु याद्ध सद सामना करे परी रहल चे वी मात्र बच्च्का खेलनी चे, इजीवनक उसंगर्स चे, जे ते शान्ती के बहरी तत्तु दोडार चुनोती दिल जाएचे, आव उही चुनोतिक सामना कुना कल जाए, इजी सिकनाई आवश्षक बहे जाएचे. आई है उ विन्दुच है, जे ते बाल गुरू शीर्षकक अस्ली आप दीरे दीरे स्पष्ट हो में लगे चे. बच्चा कोना एही वेवदान के समहले चे, कोना उ बिना बडगक रस्टक्शेप का, अपन दुन्या के रक्षा करे चे इख्टा पाग सीक चे की वाच चे? जना जना कहानी आगो बड़े चे हम सब दिख़े ची जे इच्छो चोट बच्चा जीवनक अपाट पड़ा रहल चे जे अखसर पैक पैक गुरूसे हो नहीं पड़ा पावे च्छती. ये सच्मुच अदबुच है. तजगन हम सब आईप पूरी चर्चा के समेटेई ची, तई ये सपष्ट हुई चे गजेंदर ताकृगी कर एकाज मात्र कुछ बच्चा कानी नहीं चे. इस शेहरी करनक, सांस्क्रितिक पह्चानक, आमानविय सदबावा के क्कट गेर दस्तावेष च्याए. इक्दम, इस हम्रा सवा कपन महान नगरी या जीवन का आईना चे. इचर्चा श्रोता लोकनी लेल बहुत प्रसंगिक चे जे शहर कर विस्त आएका की जीवन जीवी रोल चातीन. इखाहनी इए याद दिवाए चे जे शहर कर कोंक्रीट जंगल में सहो मातिक ज़द भीतर द़री जीवित रहे चे. अज़़ सब से पैक बात इज़ निर्दोषता चे जे बिना कुनो भेद्भाँ प्रेम करवप चे उकोनो पोठिक मोठाज नी चे. आप, लोग चाहे तई बच्चा सब से बहुत किछी सीख सकई चे. भिल्कुल, जटे अकसर पडोसी दरी के चिनना एं मुष्किल होई चे, उते इकहानी बहुत कुछ कहे चे शहर लोग के एक ठाम लेभी तो अजाच़े, मुदा अपन नहीं दपावे चे, जे ओम आमन्शाक मित्रता में चे, वा ओम के रमाए दवारा महुवा के दुलारभा में चे, इगेर चर्चा हम्रा सब के बहुत किची सुच्वापर विवष करे चे. आई इदिक हावेट चे जे समाज कोना सुख्श्म रूब सां काज करेच चे, बाल पनक जे उ खाली पन्ना चे उ कितेक सुन्दर आनिश्कलंक होएच चे. इच चुच वाक बाट चे. ता आई आई चर्चाक समापन करेच काल एक तक गमभीर प्रष्न उटेच चे, जे आई साँज मे हम सब अपन दरवाजा सब बहारता की तक तक लिए हम सब उही अलगलक देश के विषे में जोनी ची जे अडोस पडोसक एक समान दरवाजा कपच्जा वैसल चे ह! इब बडनीक प्रशन चे आए एक ता अर बात की हम सब कहीो आपन महुवा किर वास्तविक नाम पुछवाग प्रयास के लूए ची? यह उ विचार चे जिकर उत्र हम्रा सवक समाच के ताख्वा कवस्ष्टा चे, आई विचार सवम सब भिदालेची बेटेची अगला गहीर चर्चा मे.

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