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विद्यापति_आ_वेदक_ऐतिहासिक_सच.m4a

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Collection
Part 4 · VIDEHA MITHILA MAITHILI DISCUSSION CRITICISM SERIES PART 4
Status
asr-draft
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not-reviewed
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small
Detected language
hi (0.463923)
Duration
2:02
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  1. 0:00–0:10आव, आई, हम्रा सब गजेंद्र ताकृ चर्च्ट्पोत्फी, मैथिली समिक्षा शास्त्र भाग्दुक, मुख्ये बाथ सब काएक्ता त्वरिज्सार पर नजरी दिये.
  2. 0:10–0:25इपो थी वास्तो में एक ता आईना जका अची जे एडिखावेटाची जे कोना पश्मी विद्वाना गल्तिक आ अपन लोकक अग्यान्ता कारने हमर प्राचीन इतिहास अ साहित्ते क्रुप बडल देल्गिलक.
  3. 0:25–0:30त, सबसबहील बात करी वेदक ब्रामक पश्मी अनुवादक
  4. 0:30–0:34आहा के सुन का आश्चर यहत जे पश्मी अनुवादक लोकनी
  5. 0:34–0:38कोना बिना संस्क्रतिक संदर्भ भुजने अर्थ का अनर्थ कहीदलनी
  6. 0:38–0:42जना वेद मे आयल्षब्द योशा के गुलाम कहीदलनी
  7. 0:42–0:47अच्छन की मुल रूपे वेद में सब वर्ग के इश्वरक समान संटान मानल गेल चे.
  8. 0:47–0:52तकी कोनो ग्रन्तक पुरा भावार्त एही तरे बदल देब उचिट चेख.
  9. 0:52–0:57तो सर बात मेठली सहिति में चंदक महत्व असम्पाद किय त्रूटीक.
  10. 0:57–1:02अब ही कहु कि समपादक के बना चन्द शास्त्र भुजने मूल पात बदलबक अदिकार चेने
  11. 1:02–1:07जखन लाल्दास अपन रामायन में, कुंडलिया सन जटिल चंद कप्रियोक केलनी,
  12. 1:07–1:12तब बादक आदनिक संपादक लोकनी, मात्रक कगरना नहीं भूजी के,
  13. 1:12–1:16अग्यान्ता वश उक्रत्रूती मानी लेलनी, अम्मूल पाठे से चिडचाड कदलनी.
  14. 1:16–1:23आब ही कहु की सम्पादक के बिना चन्द शास्त्र भुजने मूल पाट बदलबक अदिकार चेने
  15. 1:23–1:29आ अन्तता सब से पैग खुलासा आची महाकवी विद्यापतिक आस्ली पहचानक विषे में
  16. 1:29–1:34की आहा के जनतवची जे पदावली लिखनिहार जनकवी विद्यापती
  17. 1:34–1:39वास्तव में संस्क्रित आवहत के दर्बारी विद्वान विद्ध्यापती से बिल्कुल बिन्न चला,
  18. 1:40–1:45उतस सर्वा हाराक ले लिखे चला मुदजेना कोनो एतिहासिक ग्रन्त कचन्द बडल देल जैता ची,
  19. 1:46–1:49थीक अहेंआ समाज हुनका पाग पहरा का कुलीन बना दिलक,
  20. 1:49–1:53अग्ता जन्कविक अटियासिक पहचाने बदल देलगिल.
  21. 1:53–1:57अनतता एपोती हम्रा सब के अस्थापित माननेता पर प्रषन उठाभे,
  22. 1:57–2:02आम मूल पात के एक्दम विष्लेशनात्मक द्रिष्टी से पडबाकले प्रेरिद करेता ची.

Plain text

आव, आई, हम्रा सब गजेंद्र ताकृ चर्च्ट्पोत्फी, मैथिली समिक्षा शास्त्र भाग्दुक, मुख्ये बाथ सब काएक्ता त्वरिज्सार पर नजरी दिये. इपो थी वास्तो में एक ता आईना जका अची जे एडिखावेटाची जे कोना पश्मी विद्वाना गल्तिक आ अपन लोकक अग्यान्ता कारने हमर प्राचीन इतिहास अ साहित्ते क्रुप बडल देल्गिलक. त, सबसबहील बात करी वेदक ब्रामक पश्मी अनुवादक आहा के सुन का आश्चर यहत जे पश्मी अनुवादक लोकनी कोना बिना संस्क्रतिक संदर्भ भुजने अर्थ का अनर्थ कहीदलनी जना वेद मे आयल्षब्द योशा के गुलाम कहीदलनी अच्छन की मुल रूपे वेद में सब वर्ग के इश्वरक समान संटान मानल गेल चे. तकी कोनो ग्रन्तक पुरा भावार्त एही तरे बदल देब उचिट चेख. तो सर बात मेठली सहिति में चंदक महत्व असम्पाद किय त्रूटीक. अब ही कहु कि समपादक के बना चन्द शास्त्र भुजने मूल पात बदलबक अदिकार चेने जखन लाल्दास अपन रामायन में, कुंडलिया सन जटिल चंद कप्रियोक केलनी, तब बादक आदनिक संपादक लोकनी, मात्रक कगरना नहीं भूजी के, अग्यान्ता वश उक्रत्रूती मानी लेलनी, अम्मूल पाठे से चिडचाड कदलनी. आब ही कहु की सम्पादक के बिना चन्द शास्त्र भुजने मूल पाट बदलबक अदिकार चेने आ अन्तता सब से पैग खुलासा आची महाकवी विद्यापतिक आस्ली पहचानक विषे में की आहा के जनतवची जे पदावली लिखनिहार जनकवी विद्यापती वास्तव में संस्क्रित आवहत के दर्बारी विद्वान विद्ध्यापती से बिल्कुल बिन्न चला, उतस सर्वा हाराक ले लिखे चला मुदजेना कोनो एतिहासिक ग्रन्त कचन्द बडल देल जैता ची, थीक अहेंआ समाज हुनका पाग पहरा का कुलीन बना दिलक, अग्ता जन्कविक अटियासिक पहचाने बदल देलगिल. अनतता एपोती हम्रा सब के अस्थापित माननेता पर प्रषन उठाभे, आम मूल पात के एक्दम विष्लेशनात्मक द्रिष्टी से पडबाकले प्रेरिद करेता ची.

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