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ElevenLabs_भगवदज्जुकम्_श्रव्य_नाटक_रूपान्तरण_TTS_आ_मानव-स्व_.mp3

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Collection
Part 5 · VIDEHA MITHILA MAITHILI DISCUSSION CRITICISM SERIES PART 5
Status
asr-draft
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No
Editorial review
not-reviewed
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small
Detected language
hi (0.588463)
Duration
5:00
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  1. 0:00–0:33नाटक नाटक नाटक नाटक नाटक नाटक नाटक नाटक नाटक नाटक नाटक नाटक नाटक नाटक नाटक नाटक नाटक नाटक नाटक नाटक नाटक नाटक नाटक नाटक नाटक नाटक नाटक नाटक नाटक नाटक नाटक नाटक नाटक नाटक नाटक नाटक नाटक �
  2. 0:33–0:41गर में की यो ने अची स्वामी कही यो ने की चूनी गप
  3. 0:41–0:44तूना आई हम एकता ब्राहमन सम भेट केलों
  4. 0:44–0:46उब बाहर सम आयल चला
  5. 0:46–0:50एकता जोतिषी जिनकर भविष्वानी वड सतीक होई चै
  6. 0:50–0:51उब विष्वानी केलनी
  7. 0:51–0:55श्रीमान, आएक साथ दिन बादे राज्महल में आहा नाटक देखाएव
  8. 0:55–1:00राजा आहक प्रदर्षन सम बद्प्रसन नहेता आहाँ के खुब धन देटा
  9. 1:00–1:06इसत्यो में अबला भविष्यवानी हमरा में उर्जा भरी देल लगतें हम एकटा नाटक खेलाएव
  10. 1:06–1:07कों तरक नाटक खिलाईब?
  11. 1:07–1:09इब नीक प्रष्ना ची
  12. 1:09–1:12नाटक में कोनो दस तरक भावना देखखा सकाए ची
  13. 1:12–1:14आजहां दरी हमरा बुजाईए
  14. 1:14–1:16प्रष्य सबसम श्रेष्ट है ची
  15. 1:16–1:18ते हम एकटा प्रहसन खिलाईब
  16. 1:18–1:19स्वामी
  17. 1:19–1:22अप्रश्वन में से हो रास्य नै बुजा ये
  18. 1:22–1:25तकन हमरा तो राप्रशिक्षित कर पडद
  19. 1:25–1:27अप्रशिक्षित मन कि चु नै पाभई ये
  20. 1:27–1:31अवश्व जम आहा ग्यान पर मन लगोने ची
  21. 1:31–1:34तम नीक मरग पर चले बलाक संग चलू
  22. 1:34–2:04वो आपाचा माव सादुक्षिष्ष्वनी जेना द्रद्योगी श्वरक्षिष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्
  23. 2:04–2:17आजम तो एक अर्दोषकें शक्ती सुन्दर्य, स्वास्त्तिया आदिगुन सम्जाम्पल देखे चे है, तम तों पागल चै, तें शाईत अ उदूखी भोध, पूरा पूरी दोखी ने अच्छे.
  24. 2:17–2:23हम एक भेर फेर बजबाई ची है, शान्दिल्य, कतम चे है.
  25. 2:23–2:35ता शुर्वेसों कहु, हम दंख सम जनमल चलों, हमर परिवार, गीदरक, आईट कूट पर जिभैचले, हमर जीह अग्रा पकरने सुखा गेल, हमर ब्राहमन जनूव गरदनी में सतल रहेल,
  26. 2:35–2:38आँ हम सब ब्रामन भेला पर बद सन्तुष्त चलों
  27. 2:38–2:40ते गर में खाईले किछु ने चल लै
  28. 2:40–2:41हम भूख सम मरे चलों
  29. 2:41–2:44हम भोद बने लेलजे जल्के बेटल
  30. 2:44–2:48जल्के बेटल मुदाई बदमाः सब दिन में के भेर मात्र खाईजाईए
  31. 2:48–2:49ते आन हम फिर भुखले रहे लों
  32. 2:49–2:52अम गेरुवा वस्त्र फेकलों बिख्षापात्र तोडलों
  33. 2:52–2:55आम आत्र एकट्ता दरिया पहीरी चत्ता लेने चलिये लों
  34. 2:56–2:59आअ आखिरी में आए दूष्त गुरुक मोटा उथ्बैबला बनलों
  35. 2:59–3:03कतन चति यो पुजवर औव आपने बिख्षाटन पर गेल हैता आलसी
  36. 3:03–3:05वेसी दूरने गेल हेता औहो उगी रहला पुज़वर
  37. 3:05–3:08ख्षमा करु ख्षमा करु पुजवर
  38. 3:08–3:09दरहने शान्डिल्या
  39. 3:09–3:11दरहने शान्डिल्या
  40. 3:11–3:14एई सन्सार में जतन सदिकन जगला होईत रहे
  41. 3:14–3:17जतन सुखे सब भोस्तू अच्छी
  42. 3:17–3:19आहा भिख्षाटन के ना करे ची है?
  43. 3:19–3:24सुना, हमरा मान सम मानक कामना नहीं आच्छी, संकत सदिकन हमर पाचाम रहत,
  44. 3:24–3:27आहमरा खाई लेल, जे भिख्षा चाही से दुबल लोक समवबई.
  45. 3:27–3:33हमाई वेसंग्रस्त संसार में समदानिकम, चलै ची, जेना पनी दुम्मी समबरल पोखरी.
  46. 3:33–3:48मुदा पुज़वर, हमर्तम नहीं परिवार अच्छी, नहीं भाई ने बाप, आहा पर आद ते क्रिपा किये कर अच्छी, हम सादूक लाठी आले ने पकडलों जे पुन्ने बेटत, मुदा आले जे बुखे मरी रहल चलों.
  47. 3:48–4:18बाहम आयल ची, हम राओ पटोलनी जे सब प्रानी के लजाई चति, बाग्य सम आद, औजे देख़े चतिनीक आदला काज, बबबाईन यम शान्ति दाता, आद औब बबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबब�
  48. 4:18–4:20अग रहल, अग चमकेत आची
  49. 4:20–4:23औई सुंदर सोई ज़ल आशोक गुच्छमे नुकायल
  50. 4:23–4:26संद्या करुद्र बादलक भीच आद्चंद्र सन्सुंदर
  51. 4:26–4:30तीख आची, अगर किच्छु कर्म बचल आची
  52. 4:30–4:33तें हम थोडे काल प्रतीक्षा करब
  53. 4:33–4:35आज किचु काति लेलक
  54. 4:35–4:36साप
  55. 4:36–4:37औव
  56. 4:37–4:40हम देज हमारी कम खसेबला ची
  57. 4:40–4:42साँस फूली रल आची
  58. 4:42–4:44हमरा पडबा का ची
  59. 4:44–4:47माए के हमर प्रनाम पहुचा देबाई प्रीय
  60. 4:47–4:49आप प्रेमी के हमरा लेल आलिंगन करब
  61. 4:49–4:50श्रीमान
  62. 4:50–4:52हमर मालकिन के नाग काति लेलक
  63. 4:52–4:59अवर प्रियकत बची, औए त्याची आखल में नाग्स काटल आँ रवाद बगे लों

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नाटक नाटक नाटक नाटक नाटक नाटक नाटक नाटक नाटक नाटक नाटक नाटक नाटक नाटक नाटक नाटक नाटक नाटक नाटक नाटक नाटक नाटक नाटक नाटक नाटक नाटक नाटक नाटक नाटक नाटक नाटक नाटक नाटक नाटक नाटक नाटक नाटक � गर में की यो ने अची स्वामी कही यो ने की चूनी गप तूना आई हम एकता ब्राहमन सम भेट केलों उब बाहर सम आयल चला एकता जोतिषी जिनकर भविष्वानी वड सतीक होई चै उब विष्वानी केलनी श्रीमान, आएक साथ दिन बादे राज्महल में आहा नाटक देखाएव राजा आहक प्रदर्षन सम बद्प्रसन नहेता आहाँ के खुब धन देटा इसत्यो में अबला भविष्यवानी हमरा में उर्जा भरी देल लगतें हम एकटा नाटक खेलाएव कों तरक नाटक खिलाईब? इब नीक प्रष्ना ची नाटक में कोनो दस तरक भावना देखखा सकाए ची आजहां दरी हमरा बुजाईए प्रष्य सबसम श्रेष्ट है ची ते हम एकटा प्रहसन खिलाईब स्वामी अप्रश्वन में से हो रास्य नै बुजा ये तकन हमरा तो राप्रशिक्षित कर पडद अप्रशिक्षित मन कि चु नै पाभई ये अवश्व जम आहा ग्यान पर मन लगोने ची तम नीक मरग पर चले बलाक संग चलू वो आपाचा माव सादुक्षिष्ष्वनी जेना द्रद्योगी श्वरक्षिष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष् आजम तो एक अर्दोषकें शक्ती सुन्दर्य, स्वास्त्तिया आदिगुन सम्जाम्पल देखे चे है, तम तों पागल चै, तें शाईत अ उदूखी भोध, पूरा पूरी दोखी ने अच्छे. हम एक भेर फेर बजबाई ची है, शान्दिल्य, कतम चे है. ता शुर्वेसों कहु, हम दंख सम जनमल चलों, हमर परिवार, गीदरक, आईट कूट पर जिभैचले, हमर जीह अग्रा पकरने सुखा गेल, हमर ब्राहमन जनूव गरदनी में सतल रहेल, आँ हम सब ब्रामन भेला पर बद सन्तुष्त चलों ते गर में खाईले किछु ने चल लै हम भूख सम मरे चलों हम भोद बने लेलजे जल्के बेटल जल्के बेटल मुदाई बदमाः सब दिन में के भेर मात्र खाईजाईए ते आन हम फिर भुखले रहे लों अम गेरुवा वस्त्र फेकलों बिख्षापात्र तोडलों आम आत्र एकट्ता दरिया पहीरी चत्ता लेने चलिये लों आअ आखिरी में आए दूष्त गुरुक मोटा उथ्बैबला बनलों कतन चति यो पुजवर औव आपने बिख्षाटन पर गेल हैता आलसी वेसी दूरने गेल हेता औहो उगी रहला पुज़वर ख्षमा करु ख्षमा करु पुजवर दरहने शान्डिल्या दरहने शान्डिल्या एई सन्सार में जतन सदिकन जगला होईत रहे जतन सुखे सब भोस्तू अच्छी आहा भिख्षाटन के ना करे ची है? सुना, हमरा मान सम मानक कामना नहीं आच्छी, संकत सदिकन हमर पाचाम रहत, आहमरा खाई लेल, जे भिख्षा चाही से दुबल लोक समवबई. हमाई वेसंग्रस्त संसार में समदानिकम, चलै ची, जेना पनी दुम्मी समबरल पोखरी. मुदा पुज़वर, हमर्तम नहीं परिवार अच्छी, नहीं भाई ने बाप, आहा पर आद ते क्रिपा किये कर अच्छी, हम सादूक लाठी आले ने पकडलों जे पुन्ने बेटत, मुदा आले जे बुखे मरी रहल चलों. बाहम आयल ची, हम राओ पटोलनी जे सब प्रानी के लजाई चति, बाग्य सम आद, औजे देख़े चतिनीक आदला काज, बबबाईन यम शान्ति दाता, आद औब बबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबब� अग रहल, अग चमकेत आची औई सुंदर सोई ज़ल आशोक गुच्छमे नुकायल संद्या करुद्र बादलक भीच आद्चंद्र सन्सुंदर तीख आची, अगर किच्छु कर्म बचल आची तें हम थोडे काल प्रतीक्षा करब आज किचु काति लेलक साप औव हम देज हमारी कम खसेबला ची साँस फूली रल आची हमरा पडबा का ची माए के हमर प्रनाम पहुचा देबाई प्रीय आप प्रेमी के हमरा लेल आलिंगन करब श्रीमान हमर मालकिन के नाग काति लेलक अवर प्रियकत बची, औए त्याची आखल में नाग्स काटल आँ रवाद बगे लों

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