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परिश्रम_सँ_लिखल.mp4
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- 0:19–0:29के चत्थि जिन कर, हस्त रेख में
- 0:30–0:37आच्छी परिष्मस बड़ब लिखल
- 0:37–0:48के च्छती जिन का लला आट माद्या
- 0:48–0:58परिश्म गा था रहाईच ससक
- 0:58–1:04जे च्थिसुस्त तक्रे चम कईतव
- 1:04–1:09जे च्थिसुस्त तक्रे चम कईतव
- 1:09–1:14अच्छिहा तक्रे खा बूजु सखा
- 1:14–1:20जिन का गाम नहीं कह सनी
- 1:20–1:26चनी ला लाडद चम कईत नहीं भेजा
- 1:26–2:10जे चा थी सुस्त तक्रे चम कईतव, जे चा थी सुस्त तक्रे चम कईतव, अच्छी हा तक्रे खा बुजु सखा जिन का दाम नही खसनी,
- 2:10–2:37जिद नही खसनी जिन का खसनी, जिन का खसनी,
Plain text
के चत्थि जिन कर, हस्त रेख में आच्छी परिष्मस बड़ब लिखल के च्छती जिन का लला आट माद्या परिश्म गा था रहाईच ससक जे च्थिसुस्त तक्रे चम कईतव जे च्थिसुस्त तक्रे चम कईतव अच्छिहा तक्रे खा बूजु सखा जिन का गाम नहीं कह सनी चनी ला लाडद चम कईत नहीं भेजा जे चा थी सुस्त तक्रे चम कईतव, जे चा थी सुस्त तक्रे चम कईतव, अच्छी हा तक्रे खा बुजु सखा जिन का दाम नही खसनी, जिद नही खसनी जिन का खसनी, जिन का खसनी,