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01_टिनही_थाली.mp4

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Collection
Part 5 · VIDEHA MITHILA MAITHILI DISCUSSION CRITICISM SERIES PART 5
Status
asr-draft
Human verified
No
Editorial review
not-reviewed
ASR model
small
Detected language
hi (0.426319)
Duration
2:58
Source
Open preserved recording

Timestamped machine output

  1. 0:00–0:18पता नहीं गूरी कै जायो, आखियत ही मरी पी बिलायो,
  2. 0:18–0:25गर आगन बाहारी गामे आभी दूआरी,
  3. 0:25–0:32दैदू भी गाए के मालग गर में गूर लगाए,
  4. 0:32–0:38फेर पैंजाब ले चाहक स्वाद का देकनीक
  5. 0:38–0:44दिन बहरी खष्टनीक बादो नहीं ठाखई चला हुमीद
  6. 0:44–0:48आब सूने तची एक जे चामे हप्हिम रहे चल मिलाओ
  7. 0:48–0:53तकने ओही बच्चा शोजा गोर नाक छता खसला
  8. 0:53–0:59मोन पड़ रूरी चलू देस बजाओ
  9. 0:59–1:02मित्लाक माडिक वास
  10. 1:02–1:09ले आची माडिक आखी आते
  11. 1:09–1:20गाचक पात खसी रहल
  12. 1:20–1:23लजबिज़ सब पस्रल होए
  13. 1:23–1:26गाचक जडिक चारुकात
  14. 1:26–1:29नहीं गाचक जडि बने लाहु
  15. 1:29–1:32नहीं पुखरिक गार्ट
  16. 1:32–1:35इक पेरी यो पर जन माल होए
  17. 1:35–1:38अखछ दूभी आखांट
  18. 1:38–1:42तरे गनक ता दरशनो नहीं हो ये
  19. 1:42–1:45प्रदूशन किदनी एते
  20. 1:45–1:47प्रदूशन किदनी एते
  21. 1:47–1:50रुक लक चंद मामा के
  22. 1:50–1:53तारीो मे आबेस
  23. 1:53–1:56हम्रा इसब किदन भी हारी कहे
  24. 1:56–1:58क्योले चलू नहीं ये ते लगाए मानहीं
  25. 1:58–2:02ये ते किनाए का तेख हसल रही प्रसन भाए
  26. 2:02–2:05सब भाई बेरा भेरी खाए तो ही तारी में
  27. 2:06–2:20एही दिली नागर्याम बोलो हुस बेश्वाई
  28. 2:20–2:28तरी भी हारी स्वरक लीज बे सैच विग़ बापापन मसाजर जाड कसे होगने चन्डाल
  29. 2:28–2:29सोजा में एक ता उने चन्डाल
  30. 2:29–2:33सोजा में था गाजा में अची चे माराल निकले दीवो करासर खुन
  31. 2:33–2:40उजर लों मुदा फेर बनाये खल खल चर्गल सन इगा चबाज

Plain text

पता नहीं गूरी कै जायो, आखियत ही मरी पी बिलायो, गर आगन बाहारी गामे आभी दूआरी, दैदू भी गाए के मालग गर में गूर लगाए, फेर पैंजाब ले चाहक स्वाद का देकनीक दिन बहरी खष्टनीक बादो नहीं ठाखई चला हुमीद आब सूने तची एक जे चामे हप्हिम रहे चल मिलाओ तकने ओही बच्चा शोजा गोर नाक छता खसला मोन पड़ रूरी चलू देस बजाओ मित्लाक माडिक वास ले आची माडिक आखी आते गाचक पात खसी रहल लजबिज़ सब पस्रल होए गाचक जडिक चारुकात नहीं गाचक जडि बने लाहु नहीं पुखरिक गार्ट इक पेरी यो पर जन माल होए अखछ दूभी आखांट तरे गनक ता दरशनो नहीं हो ये प्रदूशन किदनी एते प्रदूशन किदनी एते रुक लक चंद मामा के तारीो मे आबेस हम्रा इसब किदन भी हारी कहे क्योले चलू नहीं ये ते लगाए मानहीं ये ते किनाए का तेख हसल रही प्रसन भाए सब भाई बेरा भेरी खाए तो ही तारी में एही दिली नागर्याम बोलो हुस बेश्वाई तरी भी हारी स्वरक लीज बे सैच विग़ बापापन मसाजर जाड कसे होगने चन्डाल सोजा में एक ता उने चन्डाल सोजा में था गाजा में अची चे माराल निकले दीवो करासर खुन उजर लों मुदा फेर बनाये खल खल चर्गल सन इगा चबाज

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