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- 0:00–0:14सादु अवेश्या बबववद अज्जूकम, गाजंदरा ताकृर, सादु अवेश्या बबववद अज्जूकम, बबववद अज्जूकम, संस्क्रित प्रहसन, बबववद सन्यासी अज्जूकम वेश्या,
- 0:14–0:20वोदायन दूरा रचित मेतली अनुवाद गजेंद्र ताकृर
- 0:20–0:23पात्र सुत्रदार विदुषक
- 0:23–0:25सादू परिव्राजक
- 0:25–0:27शान्दिल्य सादू कषच्य
- 0:27–0:30वेश्या वसंत सेना दूएटा परिचारिका
- 0:30–0:32माय प्रेमी वेद्या
- 0:32–0:34म्रित्युग दूद
- 0:34–0:41नान्दी देवतासम आशीर्वाद प्राप्त करेल, कबाद सुत्रदार प्रवेश करयत चति
- 0:41–0:44सुत्रदार शिवक चरन रक्षा करो
- 0:44–0:47जोतिषी तकर महत्व जनैट चति
- 0:47–0:50देवताक मुक्टपर नीलम तकरा सपरष करयत अच्छि
- 0:50–0:52आर अवन कदुष्तता सब
- 0:52–0:55तकर अंता एक बेर जुकाल गेल
- 0:55–0:57शिवक चरन रक्षा करू
- 0:57–0:59प्रवेश करईत इरहल हमर गर
- 0:59–1:02हम भीतर जारहल ची
- 1:02–1:04विदुशक कताइ चा
- 1:04–1:07विदुशक हमेते ची सुमी
- 1:07–1:09सुट्रदार जकन तक कीो ने चैक
- 1:09–1:11हम तोरा किछुनिक गप के अबः
- 1:11–1:13विदुशक थीक अची स्वामी
- 1:13–1:15बाहर जाईए फेर भैए
- 1:15–1:17गर में कि यो नै अची स्वामी
- 1:17–1:18कही ने किछुनिगगब
- 1:18–1:19सुत्रदार
- 1:19–1:20सुनह
- 1:20–1:22आई हम एक ता ब्राहमन सम भेंट केलों
- 1:22–1:23उ बाहर सम आयल चला
- 1:23–1:26अगता जोतिऊशी जिनकर भविश्यवानी बर सतीक होई चै
- 1:26–1:28आव भविश्यवानी केलनी
- 1:28–1:28श्रीमान
- 1:28–1:29अबजला
- 1:29–1:32आएक साथ दिन बादे राज महल में आहा नाटक देखाएव
- 1:32–1:37राजा आहाग प्रदरषन सम बध प्रसन नहेता आहा आहां केम खुब धन देता
- 1:37–1:43इसत्ते हु मैंबला भविष्वानी हम्रा में उर्जा भरी देलक, तें हम एकता नातक खेलाएव.
- 1:43–1:45विधुष्वक, कों तरहक नातक खेलाएव?
- 1:45–1:51सुत्रदार, इब बडनिक प्रष्नाच्च्छी, नातक में कोनो दस तरहक भावना देका सकै ची,
- 1:51–1:53आज आज दरी हमरा बुज़ाये,
- 1:53–1:54आज ये सब सम श्वेष्ट है ची,
- 1:54–1:56ते हमें कता प्रहसन खेलाएप.
- 1:56–1:57विदूषक,
- 1:57–2:01सूमी, हमरा प्रहसन में से हो रहस्टे नै बुज़ाये.
- 2:01–2:02सूत्रदार,
- 2:02–2:04तकन हमरा तोरा प्रषिक्षित कर पडद,
- 2:04–2:06अप्रशिक्ष्ट् मन किचु नई पाभईए
- 2:06–2:10विदुशक, स्वामी, तखन अहा, हमरा प्रषिक्ष्ट करू।
- 2:10–2:15सुत्रदार, अवश्छ जाम अहा, जान पर मन लगाण ने ची।
- 2:15–2:17तरनीक मारगपर चले भलाक संग चलू।
- 2:17–2:19परदाख पाचां सम्वबाज
- 2:19–2:22पर्दा पाचान समवबाज शान्दिल्य कत चाय हो
- 2:22–2:24सुत्रदार अखानेद
- 2:24–2:27हमर पाचान आउ सादुखषिष्ष्छे बनी
- 2:27–2:30जेना द्रद योगीष्वरक्षिष्छे अनुसरन करेच जाती
- 2:30–2:32तुनु प्रस्थान करेच चाती
- 2:32–2:34प्रस्थावनाक अन्द
- 2:34–2:35मुक्छनातक
- 2:35–3:051. ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ �
- 3:05–3:11तव तव पगल चा तें शाइत ओ दुखी भवा पुरा पूरी दोखी नहीं आची
- 3:11–3:14अम एक भेर फेर भज़वी चे है, शान्दिल्या कत चा
- 3:14–3:16शान्दिल्या कप्रवेश
- 3:16–3:20शान्दिल्या तन शुरूए सम कहु, हम दंख सम जनमल चलो
- 3:20–3:23वमर परिवार गीज्द्डग आंट्कुट पर जिभैच्छले,
- 3:23–3:26वमर जिह वोक्रा पकडदने सुखा गेल,
- 3:26–3:28वमर ब्राह्मन जनो गर्दनी में सतल रहल,
- 3:28–3:31आप वम सब ब्राह्मन भेला पर बसंटुष्ट चलो,
- 3:31–3:33तें गर में खाले किचु नै चले,
- 3:33–3:38अम भूख समरे चलों, अम बूद बनाई लेल बागलों जे जलखःई भेटल,
- 3:38–3:43जलखःई भेटल, मुदाई बद्माश सब दिन में एक के बेर मात्र काई जाएए,
- 3:43–4:13तें रहां प्र भुखले रहां, हम गेरूवावस्त्र फेक्लों, भिख्षा पात्र तोट्ड्ड्ड्ड्ड्ड्ड्ड्ड्ड्ड्ड्ड्ड्ड्ड्ड्ड्ड्ड्ड्ड्ड्ड्ड्ड्ड्ड्ड्ड्ड्ड्ड्ड्ड्ड्ड्ड्ड्ड्ड्ड्ड्ड्ड्ड्ड्ड्ड्�
- 4:13–4:20आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप इते क्रिपा किये करें.
- 4:43–4:49अम सादुक लाथी आईले नै पकडलों जे पुन्ने बेटत, मुदा आईले जे भूखे मरी रहल चलों.
- 4:49–4:52सादु, शान्दिल्य, एकर आर्थ की?
- 4:52–4:54शान्दिल्य, सत्ते कलाबे की?
- 4:54–4:57आहा सदिकन कै चीजे जूथ बनहन आची.
- 4:57–5:11शादू, एक दम टीक, जम के उ जूट कें संगी बन बईए तब नहन में बना जाए, बूच चाह चाह कि ए, जकन एक ता सचर लोक नीक प्रेरना सम नीक काज कर आए, देवता तकर फलकें एना राख है चतिजेना कोनो दरो हरी.
- 5:11–5:14शान्दिल्य, मुदा अपस कखन भेतत?
- 5:14–5:16शादू, चीज़क इच्छा न नहें केलास
- 5:16–5:18शादू, पुजजवर इप्रष्न उठाए जे इच्छा खेना नहें केल जाए
- 5:18–5:20शादू, प्रेम आग्ना सम एकातब
- 5:20–5:22कि ए, सुख दॉख में सम रहभ
- 5:22–5:24बहे, रहश में संटूलित रहभ
- 5:24–5:30शान्दिल्या पूज्जवर इप्रष्न उठाए जे इच्छा केना नहें कैल जाई
- 5:30–5:34शादू प्रेम आग्ना सम एकातब किये
- 5:34–5:37सुख्दूखमे सम रहभ, बहे रर्षमे संटूलित रहभ,
- 5:37–5:40मित्र शत्रुकेम समान द्रिष्ति सम देखभ,
- 5:40–5:44एकरे बुद्दिमान लोक एका तहाएब कहे चाति
- 5:44–5:45शान्दिल्या
- 5:45–5:46मुदा इय अच्छिकी
- 5:46–5:48सादू
- 5:48–5:51जे अखनो अस्तित्वमे नहें आयल तकर नाम नहें हो ये
- 5:51–5:53शान्दिल्या
- 5:53–5:54मुदा कहु
- 5:54–5:56कि एक रा कैल जा सकय पूजवर
- 5:56–5:58सादू कोनो संदे है अच्छी
- 5:58–6:08शान्दिल्य, जोट, जोट, सादू, माने शान्दिल्य, श्रिमान, आहा, हम्रापर के तम्साइ ची, सादू, तो सिखबे नै करवा,
- 6:08–6:13शान्दिल्य, हम सीखी आगी नै, आहा, कें की, आहा, तस्वतन्त्र ची,
- 6:13–6:23सादु, एना नै बाज, परमपरा अची जे चड़ी चात्रक लेल पुष्टाई होई चै, तें पून ततस्ततासम हम तोरा बडद तरीका सम्सें तब.
- 6:23–6:33शान्दिल्य, आहा, पूँन ततस्ततासम दन्द दैची, हे पुज्जवर, आब यी समवाद बन्द करू, भिख्षाक समय भीतल जाएए.
- 6:33–6:48सादू, मुर्क, अखन, भोर, सकाले, अच्छी, दूपहर्या नए, लिखल अच्छी, भिख्षात, अखन, माइगी, जखन, उखखड्डी, राखी, देल जाए, चूल ही मिजा जाए, आसब खापी, लेठी, चला, किचु, काल, कलम्मे, भितभाए ची.
- 6:48–6:51शान्दिल्या, अग, अग, अग, आख, पावन, वेवार, अपन, वचन तोड़े.
- 6:51–6:57शादू, माने? शान्दिल्या, कि आग, पावन, वेवार, एक, रव, नग, अच्छ, नीक, आख, बेजाए.
- 6:57–7:05सादू, एक दम, हमर आत्मा एक रंगक अची, नी का की बेजाए, मुदा हमर सक्रियस्वके विष्राम चाही.
- 7:05–7:08शान्दिल्य, श्रीमान आत्मा की अची, सक्रियस्वकी अची.
- 7:08–7:12सादू, सुना, अन्तर आत्मा अची जे सुतलाए पर सवर्ग जाए,
- 7:12–7:17फिर मात्र आत्मा अच्छी जे आपन कर्तवे करए आजन्म जन्मान्तर यात्रा करए
- 7:17–7:22आतकन इहो आत्मा अच्छी जकरा हम सक्रियस्वक है ची
- 7:22–7:23मनुश्व आपन देह अच्छी
- 7:23–7:26आई आत्मा विश्रामक सुख्चा है
- 7:26–7:27शान्डिल्य थीके
- 7:27–7:39अद्मा जे बूर्ह नहें हो ये, मरें नहें अविनाशी अच्छी, अख्छा अच्छी, वहे अच्छी आज्छी, आजे हंसच्छी, हसबःें, सुताई, मरें, वहे सक्रियस्वाच्छी.
- 7:39–7:42ये ना सिक्छे लों, से अच्छे लों?
- 7:42–7:45शान्दिल्य, अग, अग, चलू, आहा थखा गेलों.
- 7:45–7:51सादू, माने, शान्दिल्य, आत्माजे अखन अची, दीकने, जम देइनाय तम किचुनाय.
- 7:51–8:01सादू, जन सादारन सन बजगछा, सब प्रानी कई एक अवस्था सम गुजराये भूजलही, तेन हम सब औई रूपमे बजगछी.
- 8:01–8:04शान्टिल्या, आ, आ, अ, कोन अवस्था मे ची?
- 8:04–8:09सादू, सून, आखाश, वायू, जल आगनिक कनसम बनल देलेने,
- 8:09–8:15बाखी मात्र माती, कान, आखी, जीह, नाक, आस, पर्षसम, चेतन,
- 8:15–8:18हम श्वास लेब, बला प्रानी ची, जकर नाम, मनुश्षे अची.
- 8:18–8:23शान्टिल्य, अह, अह, एना आज़्वकेम नै, जानी सकब,
- 8:23–8:25अपन आत्मा तम्दूरक बात
- 8:25–8:26चारू दिश्ट देखेट
- 8:26–8:29श्रीमान इदेखु एकता कलम अची
- 8:29–8:31सादू तो पहिने जा
- 8:31–8:34अई इकान तक आश्रे वन हमरा सब के चाहदेट तची
- 8:34–8:35शान्दिल्या
- 8:35–8:36श्रीमान
- 8:36–8:37अहा श्रेष्थ
- 8:37–8:38पहिने जाओ
- 8:38–8:39हम पाचान आईब
- 8:39–8:41शादु कों प्रेवजन?
- 8:41–8:50शान्दिल्य, हमर माए एक भेर एकटा पवित्र महिलासम सूनलनी जे अशोकक फूल में बागनु कायल रहाये, तें आहां के पहिने जाय पडता श्रीमान.
- 8:50–8:54शादु, तीक चाय, तुनू प्रवेश करायत चाती.
- 8:54–9:03शान्दिल्य, आप बाग काती लेलग, बाग अख मुहसम बचाओ, बिन मुकती आब खालेलग, हमर गर्दनिसम खुन बही रहल अची.
- 9:03–9:08सादू, दरहने, शान्दिल्य, इं मात्र एक ता मोर अची.
- 9:08–9:10शान्दिल्य, ता मोर अची.
- 9:10–9:12सादू, हां, मात्र मोर.
- 9:12–9:16शान्दिल्य, तकन आखी खोलाए ची, सादु खोलाग.
- 9:16–9:18शान्दिल्य, कल्मके देक्यात,
- 9:18–9:21हे, उ बद्माश बाग, हम्रासम देरा गेल,
- 9:21–9:23मोर बनी गेल, आई आब भागी रहल आची.
- 9:23–9:26कल्मके देक्यात, आई, कते एक सुन्दर कलम,
- 9:26–9:34अपन प्रियतमक अनुपस्तित में कष्ट पबःए आवो करा सब कें सुख दैई जकर प्रियतम उपस्तित अच्छी
- 9:34–9:37आँ में देखे ची अंकृर पात फूल आज हूंज
- 9:37–9:41सब एकता कलम में जे चमेली कलताक मन्दपसम सजल अच्छी
- 9:41–9:45मोर कोईरी आ मातल भूँराक मदूर गायन सम गुनजी रहल अच्छी
- 9:45–9:56ये एक ता कलम अची जे ओई यूवती सबकें पष्चा ता पदैए जे आपन प्रियतमक अनुपस्तिति में कष्ट पबई ये आवो करा सबकें सुख दैए जक्कर प्रियतम अपस्तित अची
- 9:56–10:02सादु मुर्क दिन प्रतिदन प्रदिद आजट होगत अच्छी से एते एक सुन्दर की अच्छी
- 10:02–10:06सुना एक ता बच्चा कहे ये आजबसान्त आयल
- 10:06–10:08पूलक चंदरी मेल पतल
- 10:08–10:11आनवरत में आनन्दल आए पतजाड आयल
- 10:11–10:12कमलक गुच्छ में है लेद
- 10:12–10:15मुदा उ कति में आनन्दल रहला ची
- 10:15–10:17जकन जीवन छोट भेल जाए
- 10:17–10:18शान्टिल्या
- 10:18–10:19एक ता प्रष्न
- 10:19–10:23सुंदर्ता जकन आजध हो ये ई होई ते अची
- 10:23–10:24सादू
- 10:24–10:25एक बेर फेर
- 10:25–10:27कोनो शैक्षनिक प्रिष्ट भूमी नै
- 10:27–10:33लोग उसब भविष्चलेल प्रार्ठना करहे, अटीत पर शोक मनाबई न वर्तमान सम ग्रना करहे.
- 10:33–10:38शान्टिल्या इरस्ताक अंत अची हम सब कत बैसब
- 10:38–10:40सादू एट्ताई बैसब
- 10:40–10:43शान्टिल्या गंदा गंदा
- 10:43–10:47सादू बोन सवच अची दर्टी पवित्र अची
- 10:47–10:53शान्दिल्य, मुदाजम थाकला पर भैससस चाहे ची तां सदिकन पुच्चे ची सुच्च अची वागन्द.
- 10:53–10:58सादू, प्रादिकरन शास्ट्र अची हम नहीं कि ए,
- 10:58–11:01आपन आत्म सम्मान सम बता हलोकपर भरोस नहीं,
- 11:01–11:04जे कहे जे करापसम नीक होई चे,
- 11:04–11:07तिनकर प्रादिकरन मात्र संकक सुंगर लेने अच्छी
- 11:07–11:11शान्डिल्या तेन आहाग भेसी बजला पर भरोस नहें
- 11:11–11:14सादु आबहा भेटा किच्षु सीखा
- 11:14–11:16शान्डिल्या हम आब आर नहीं सीखभ
- 11:16–11:18सादु किए नहें?
- 11:18–11:21शान्डिल्या बेसी सीखभ अग की फप्यदा
- 11:21–11:26सादु, जे चात्र पाट सीखाये से अन्तमे भुजिये जाएए तेंकिचु सीखा.
- 11:26–11:29शान्दिल्य, आर्टकन की होईच है?
- 11:29–11:35सादु, सुन, ज्यान सम विवेक बड़े चै, विवेक सम आत्मनिग्रह, आत्मनिग्रह सम तपस्या,
- 11:35–11:40तपस्या सम्योग, योग सम्वूत्वर्त्मान, भविष्यक यतार्थक अंपर्द्रिष्टी,
- 11:40–11:44आओई अंपर्द्रिष्टी सम् 8 गुना प्रबुत्व प्राप्त होई चै.
- 11:44–11:48शान्दिल्य, हे गुरू, आहा, हमर्विचार पडिक बजजे ची,
- 11:48–11:50मुदा हम उक्रा नुका सकै ची
- 11:50–11:54तें बिना पाप केने दोस्राक गर में गुसब की समब
- 11:54–11:56सादू माने शान्टिल्या
- 11:56–12:01माने बोद भिक्षु लेल बनावल स्वादिष्ट भोजन मट्सम खाएव
- 12:01–12:05सादू तोहर सन पेट मदबा कोनो गडी नै मानी सकै
- 12:05–12:11शान्दिल्य, आईलेल आहा सब सबक चानी उदडल आची, हमरा आर कोनो कारन नै बुजाई ए.
- 12:11–12:15सादू, इना नै बाजा, योगक पल महान आची,
- 12:15–12:20सही, अदिग, अकल्पनी आख्षै, उच्वनस्क ब्राह्मन द्वारा आदर देल,
- 12:20–12:22देव आ दानव दवारा अनमोदित
- 12:22–12:24शान्डिल्यः
- 12:24–12:26तकन आहा आपन योग के भक्तिसम सोचु
- 12:26–12:28आ एक अन्तमे रहु
- 12:28–12:30हम भक्तिसम कि चट्डिक भिखयमे सोचब
- 12:30–12:32मुदा श्रिमान
- 12:32–12:35आहा सन सादू अए योगक विशय मे बध सोचः ए
- 12:35–12:37आकि नै?
- 12:37–12:38इआचिकी?
- 12:38–12:43सादु, सुनहा, तपस्या कसार, सब ग्यानक्मुल, सत्यक परीक्षा,
- 12:43–12:50सब विरोदा भास दूर करे, आप प्रेम गनासम रहित, वेह अच्छी योग, शान्टिल्या,
- 12:50–12:55दन्ने पुज्द बुद्ध, जे भोजन चोडब, आशभटा भोस्तु चोडब सिखाभ ये चाती.
- 12:55–12:57सादु, शान्दिल्य, एक रवानी की?
- 12:57–13:02शान्दिल्य, श्रिमान, मोन नाय, हम पहिने जल का लेल बवध बनल चलो.
- 13:02–13:04सादु, मुदा अखन आहां किचु सिखलो?
- 13:04–13:07शान्दिल्य, किचु, हम आप बहुत किचु जनाए ची.
- 13:07–13:10सादु, थी कची, सुनाओ.
- 13:10–13:21शान्दिल्या, सुनु श्रीमान, आद कारनाची, सोलह उपाद मुदा आत्मा पाच्वायुक अची, मन तीन सुत्रक आऔ भटकाई आविलीन होई, इपवित्र भुद्द पिताका गरन्त्ठ में कहल गेल अची.
- 13:21–13:25सादू, शान्दिल्य, इब अद दर्म नहीं, इसान क्या ची?
- 13:25–13:32शान्दिल्य, खषमा करू, भूक में हम कि चड़्दिप द्यान देलों, तेम एक बात सोचलों आदो सर कहलों.
- 13:32–14:02अप सुनु, श्रीमान, आग्या अच्छीजे भिख्षु अदत्वस्तु अस्विकार करे, आग्या अच्छीजे भिख्षु प्रान राद्या नाय करे, आग्या अच्छीजे भिख्षु बकभक नाय करे, आग्या अच्छीजे भिख्षु काम वासना सम दूर रहे, आग्या
- 14:02–14:05आब आँ भक्तिस्सम योगक छिंतन करू श्रीमान
- 14:05–14:08हम उतबे भक्तिस्सम खिचचद्धिक छिंतन करब
- 14:08–14:11सादू की समवाद बन्न करू
- 14:11–14:15आत्मा कबन्दन लेल अई सन्सार केम स्तधित करू
- 14:15–14:17इंद्रियके आत्मा मे बानू
- 14:17–14:20इन्णक सहाईता सम्सत्यता कू
- 14:20–14:50अपने आपने आपने आपने आपने आपने आपने आपने आपने आपने आपने आपने आपने आपने आपने आपने आपने आपने आपने आपने आपने आपने आपने आपने आपने आपने आपने आपने आपने आपने आपने आपने आपने आपने आपने आपने आपने �
- 14:50–14:53वेश्या आई न्रित्य मन्दप नै बैसाई ये
- 14:53–14:57परिचारिका मालकिन आहा एक दम सही कहलों
- 14:57–15:01मुदा न्रित्य मन्दप एक ता मदिरालगे अच्छ्या महिला सब
- 15:01–15:05कते को शालीन हो ती नशा में माती हंसाई चती
- 15:05–15:07वेश्या तकन तों जल्दी जा
- 15:07–15:12परिचारिका आ आहांकें से हो जेबा का ची मालकिन प्रस्थान करेएद
- 15:12–15:16विश्या चोटकी कोईरी प्रिये हम सब कत बैसब
- 15:16–15:20परिचारिका � thode kale pathrak asan par baesu
- 15:20–15:29देखू, एक्ता मोजरल आमक तारही सम सजाल अच्छी, मुपरहक सजावदिसन आतकन मालकिन, आहाके एक्ता गीत गेबाख चाही.
- 15:29–15:33विश्या, चोटकी कोईरी, प्रिये, हम से करब.
- 15:33–15:35दूनू बैसे तागा बैच्छती.
- 15:35–15:36दूनू...
- 15:36–15:39अग, काम स्यमेते आची, हम सूने आची.
- 15:39–15:42कोईरी आब हून राग, धनूशक दोरग गाएन सम.
- 15:42–15:44अ, आमक्तार ही बाजी रहल आची.
- 15:44–15:48आ, अवश्य एक द्रस्टाक, मन ललचाईत आची, शान्दिल्लि.
- 15:48–15:51सूने आच, कोईरी कबाज.
- 15:51–15:53ने, एक दम कोईरी कबाज ने.
- 15:53–16:23अग, अग, अग, इख, इख, अग, अग, इख, इख, इख, इख, इख, इख, इख, इख, इख, इख, इख, इख, इख, इख, इख, इख, इख, इख, इख, इख, इख, इख, इख, इख, इख, इख, इख, इख, इख, इख, इख, इख, इख, इख, इख, इख, इख, इ�
- 16:23–16:27विश्या हम गाएब फेर गाबईत
- 16:27–16:29आप काम फेर आद अची
- 16:29–16:31आब असन्त तपन गर वुटेने आची
- 16:31–16:33आप प्रेमिकाक द्रिष्टी अखर असंग जाएद आची
- 16:33–16:36आप काम फेर प्रेम जगाबईत अची
- 16:36–16:38आप रियनव विवाइता क्रिदैसे हो
- 16:38–16:45अखर आप फिर फूल सम गंटने आची, शान्दिल्य, कतेक मदूर गीत अखर कंटसम उठाए, सूनु श्रिमान,
- 16:45–16:52सादू नै कान सुन बाक लेल बनल आची, हम एतेक दूर नै जाए भजे सूनी,
- 16:52–16:57शान्दिल्य, जाओ उतेक दूर जम खरच करबाक पाए हू आए,
- 16:57–17:27आप द़ाँ पर बवाज़ा था आप द़ाँ तामस नाई करू आप द़ाँ पर बवाज़ा तामस नाई करू आप द़ाँ तामस नाई करू आप द़ाँ पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर �
- 17:27–17:57अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अ�
- 17:57–18:00अगर तोडे कर्म बचल अच्छी ते हम तोडे काल प्रतीख्षा करब
- 18:00–18:01परिचारिका
- 18:01–18:02मालकिन
- 18:02–18:05इआशोकक पूल कते एक सुन्दर अच्छी
- 18:05–18:06हम तोडब
- 18:06–18:07वेश्या
- 18:07–18:08नै नै नै
- 18:08–18:09हम स्वयम तोडब
- 18:09–18:10दूद
- 18:10–18:13एकरा चुट्टी काटबाक आप समय अच्छी
- 18:13–18:15वेश्या आजखी चुकाती लेलक, पर आप कुदब आएकरा अपन स्वामी लगलजाएब.
- 18:43–19:13वेश्या या वेश्या या वेश्या वेश्या वेश्या वेश्या वेश्या वेश्या वेश्या वेश्या वेश्या वेश्या वेश्या वेश्या वेश्या वेश्या वेश्या वेश्या वेश्या वेश्या वेश्या वेश्या वेश्या वेश्या वेश्या वेश्या वेश्या �
- 19:13–19:15वेश्या रवागें के रोकिसकेत अच्छी
- 19:15–19:17वेश्या हम देजमारीक खषाइबला ची
- 19:17–19:19साँस फूली रहल अच्छी
- 19:19–19:21हमरा पद्डबा का अच्छी
- 19:21–19:23परचारीका शान्तिस्सम पद्डी रहु मालकिन
- 19:23–19:25वेश्या मायकें हमर प्रनाम पहुचा देबाई प्रीए
- 19:25–19:29वेश्या मायकेम हमर प्रनाम पूँचा देभाई प्रिये
- 19:29–19:32परिचारिका औह नै, आहा स्वेम जा का प्रनाम करव
- 19:32–19:36वेश्या आप वेमी केम हमरा लेल आलिंगन करव
- 19:36–19:39उचेतनाहीं खसी पद्ध्ध्छाती
- 19:39–19:43परिचारिका आप मालकेम बरी रहल चाती
- 19:43–19:47अखर प्रानला लेलों आआब रस्ता पक्रबा कच्छी
- 19:47–19:49अखनो गंगा पार करबा कच्छी
- 19:49–19:52आविंद्य परवत आनर्मदा नदीक शुभ प्रवाज
- 19:52–19:54सह्या गोलगी
- 19:54–19:57क्रिष्नवेना आब हवान शिवक पवित्र नगर कान्ची पुरम
- 19:57–19:58आद अखन कावेरी
- 19:58–20:07वेरी, ताम्र परनी, मले पर्वत आ अन्त्मे समुद्र, जादरी हम, वायु वेगसम, लंका पर उडी म्रित्त्यो लोक नहें पहुची जाए, प्रस्थान.
- 20:07–20:10परिचारिका, आ, हमर मालकिन मरी गेली.
- 20:10–20:13शान्टिल्या, गुरू, विष्याग जान गेलनी?
- 20:13–20:22सादू, लोक आपन जान ने हेरभै आछिमुर्क, जिन्गी हुनका लेल बड्मुल्लिवान अच्छी, कहुजे जिन्गी तिन्का चोडि गेलनी.
- 20:22–20:31शान्दिल्य, चि आहा में दया नै, प्रेम नै एक को रत्ती, कतोर रिदै दुष्ट भिलासी, क्रूर थक भेल चिल्ला.
- 20:31–20:33सादू, एकर माने की?
- 20:33–20:37शान्दिल्य, तम हु, हम आहाक हजार नाम शुरू मात्र केने ची
- 20:37–20:40सादू, हमारा रोकेले विबस्जूनि करा
- 20:40–20:43शान्दिल्य, श्रिमान, हम शोक में ची
- 20:43–20:45सादू, की लेल
- 20:45–20:47शान्दिल्य, उ हमर संबन्दी चली
- 20:47–20:49सादू, संबन्दी
- 20:49–20:53शान्दिल्या, उ कोनो सादू सना ची? जक्रामे प्रेमनै?
- 20:53–21:00सादू, हम इठीक, आस्ते आस्ते प्रेम करी, हम उच्छ उद्टेश्य सम् प्रेम करे ची,
- 21:00–21:04वास्तव में, हम जेनी स्वार्त रूप सम, मोक्षक पत्पर समर्पिच ची,
- 21:04–21:07आशास्त्रक निदारित मारग पर चलए ची
- 21:07–21:10हम मात्र सादारन शनेजसम मुह मोड़ची
- 21:10–21:13आधमर रिदाय मात्र सद्गुनकेम देखाई
- 21:13–21:15शान्दिल्या श्रीमान
- 21:15–21:17हम आपनापर काबू नैराखी सकैची
- 21:17–21:20हम विस्याक के अख्रा लगजाएब आकानब
- 21:20–21:22शादु औब नहीं से नहीं करा
- 21:22–21:23शान्दिल्या
- 21:23–21:25तामस नहीं करू
- 21:25–21:27शादु के नहीं करबाक चाही
- 21:27–21:29वेश्याक लगजाइत
- 21:29–21:30हे मालकिन
- 21:30–21:31एते एक प्रेमी चल
- 21:31–21:33एते एक निखसम जुमे चलों
- 21:33–21:35परिचारिका
- 21:35–21:37श्रीमान
- 21:37–21:39आहाकें की भेल
- 21:39–21:40शान्दिल्या
- 21:40–21:42प्रेम आर किछु नहीं
- 21:42–21:44परिचारिका मन में तीके
- 21:44–21:47संत सब में सबख लेल करूना हो इच है
- 21:47–21:50शान्दिल्या मालकिन हम रास परष कर दिया
- 21:50–21:53परिचारिका आहाम में सकती अच्छी
- 21:53–21:55श्रीमान शान्दिल्या
- 21:55–21:57अपेर चुबाये
- 21:57–21:59परिचारिका पेर नहीं चुभी आव
- 21:59–22:04शान्दिल्य, अ, हम, हम बद भ्रमिद ची, उपर नीचां किछु पतान है,
- 22:04–22:08आ, ह, इरहल, नारिकेर संद्रध, केसरा चंदन सम अनुलिप्त,
- 22:08–22:12उर्दो मुखि, हमर माल किनक, दिव्यवक्ष्जे, दूर्बाग्यसम,
- 22:12–22:14जीवित रहला पर हमरा कखनो उपलप दनाई भेल
- 22:14–22:18परिचारिका मन में से हमरा करबाक चाही
- 22:18–22:20जो रसम श्रीमान
- 22:20–22:22� thode kaal pratikshakaroo jadhari
- 22:22–22:25हम उकर माय केमला आने ची
- 22:25–22:27शान्टिल्य देरी नाई करी हा
- 22:27–22:29माय विहीन सबख लेल हम माय ची
- 22:29–22:31परिचारिका मन में
- 22:31–22:37इदयालु ब्राह्मन हमर मालकिन केम नै चोड्दिक जाएत हमरा जे बाख चाही. प्रस्थान.
- 22:37–22:40शान्दिल्य उ गेली आप मों बरिकु कानी सकै ची.
- 22:40–22:44इबेचारी वेश्या जे एते एक निएक सम चलाई चली. कानेईत.
- 22:44–22:47शान्दिल्य इनाई करा.
- 22:47–22:52शान्दिल्या, जाओ प्रेमहीन, आहा भुज़े चीजे, हम आहा सन्ची.
- 22:52–22:54सादू, आउ, बेटा थोडेख सीखा.
- 22:54–22:58शान्दिल्या, श्रिमान, इबेचार इस्त्री केना दीख है ती.
- 22:58–23:00सादू, कोनो दवाई जनै चा?
- 23:00–23:04शान्दिल्य, पाप अच्छी आखाई क्योगगख्पल
- 23:04–23:10सादू वन में, इबेचारा अखनो नईभुज़ाये जे सादू हैब माने, नईभुजबजे कि करबाक अच्छी,
- 23:10–23:14एकता नियम चैजे महान शैव योग आचारे केम प्रकत काल गेल चै,
- 23:14–23:17शिष्यक करूना आसक्तिकें प्रभल कराए च्ये,
- 23:17–23:20तक्हन हम एकरा में एकता अंतर द्रिष्ती उत्पन करव,
- 23:20–23:22तीक, इसही योग अच्छी,
- 23:22–23:25योग सम हम एई वेश्या का शरीर में प्रवेश करव,
- 23:25–23:29वेश्या मुर्दा सम जिन्दाब हुतेत अच्छी,
- 23:29–23:32सादु अरद्दा कक्हसी पडद्धी
- 23:32–23:35वेश्या शान्दिल्या
- 23:35–23:37शान्दिल्या प्रसण्नतासम
- 23:37–23:39माल्किन आहा जीवित ची
- 23:39–23:41आहा पुनरजन्म पेलो
- 23:41–23:42हमेत ची माल्किन
- 23:42–23:45वेश्या गन्दा हाच्सम हमरा नैई चुबह
- 23:45–23:46शान्दिल्या
- 23:46–23:48मुदा हम बहुत साव ची
- 23:48–23:49आबव, बिटा तोडेक सीखा.
- 23:49–23:50शान्दिल्य,
- 23:50–23:56इत तो सीखे पडद, दीका जी, इत हम आगा के इंश्रेष्ट तासम, नम्रतासम संपर करे ची,
- 23:56–24:00साधुखशव लगजाए, श्रिमान, दुखीची, आहा मरी गेलों,
- 24:00–24:03खषमा करू बक्बकिया अतियोग मनस्क गुरू,
- 24:18–24:21अगर बद्यारी का उएत आची एक लममे नागसम काटल
- 24:21–24:24माए आँ हम बरबाद बगेलों
- 24:24–24:27परिचारी का शान्त हो माए
- 24:27–24:29शान्त हो मालकिन छीक छती
- 24:29–24:31माए के ना छीक हेती
- 24:31–24:34लगजाइत वसन्त सेना हमर भेटी
- 24:34–24:35की बरहाहल आची
- 24:35–24:37विष्या चुबु नाई बुडिया
- 24:37–24:39माई, औरे एकर माने की?
- 24:39–24:42परिचारिका, बिख माहुर मात में पैसी गेल हैत
- 24:42–24:45माई, फुर्ती सम वेद्खेम बजाओ
- 24:45–24:47परिचारिका, हां, मालकिन
- 24:47–24:49परिचारिका जाईत अची
- 24:49–24:51प्रेमी आ दो सर परिचारिकाक प्रवेश
- 24:51–24:57परिचारिका, आहांकेम बेशी शक्ति बेटे प्रेमी, हमर मालकिन आहांके नै देखी कतदपै चती.
- 24:57–25:03प्रेमी, आहाम से हो उई मदुर गाबईबला, विशाल आखिबला मुह देख चाहे ची,
- 25:03–25:07इमदुमा ची कप्रतिग्या चैक जे फुलायल सुंदर कमल सं पीबः,
- 25:07–25:24उखर आचर पक्ड़ेद लेड़ी अपन मुह गुमाउ पोखरी में लेड़ी सम थोडे कहिलायल कमलसन अहाग कहीो काल देखाए दैत मुह एहन प्रसन कारक अची जेना हात में लेल अचीन्जल.
- 25:24–25:29वेश्या दूश्त हमर आचर चोडू प्रेमी इगी अची
- 25:29–25:43अगर मन सते बवरा गेल चाए बेचारी स्विछ़्ी शून्यमे दूमल कोनो पवित्र मोंबला एकर शरीर के मतिक्रमित केने बुजाए चाए
- 25:43–25:49वेद्य आप परीचारी का का प्रवेश परीचारी का आईदिस श्रीमान हम
- 25:49–25:52वेद्य प्रवेश कर अगा तो चाती
- 25:52–25:56वेद्या उ अपना मेन आई चाति
- 25:56–25:59सत्ते उ नाग दवारा अक्रमन अक अतल गेल चाति
- 25:59–26:02परिचारिका आहा केना बुजलो
- 26:02–26:06वेद्या जेना कहल जाए वेग माहुर भिखसम बद फरक पद आई चाए
- 26:06–26:10एक राएत आनु हम माहुर भिखख शास्तर में पारंगत ची
- 26:10–26:40बैसा ए आइशारा सम गेराबा बन बै, चोटका गेराबा, तो जे कानक जुमका सन सुमिनि के मराखई चा, अई जादुबला गेराबा मे प्रवेश करा, जादुबला गेराबा मे थार, सामपक भेटा, थार, शान्त, शान्त, वेश्या दिस आंगुर देखभैत, हम एक रास
- 26:40–26:51प्रेमी प्रेट्न करु श्रीमान आहा हम्रा क्रतगन न नई पाएप वेद्य, हम एक ताभिग जारना हारके आनप जे बद सुन्दर गोली रकहेत अची प्रस्थान.
- 26:51–26:53ब्रित्युक दूटक प्रवेश दूट
- 26:53–26:57वाह! यम हमरा चावर नई बना देलनी
- 26:57–26:59वसंत सेना नई, उगरजला
- 26:59–27:01तुरन्त उखरा आपस आनु
- 27:01–27:02दोसर वसंत सेना
- 27:02–27:04जकर जिन्गी कष्म भेल आची
- 27:04–27:06आनु आजल्दी
- 27:06–27:06थीक आची
- 27:06–27:08जादर शरीर जरल नई हो
- 27:08–27:10हम उखरा पुनर जीविद करब
- 27:10–27:23चारु दिस देखेत, ओतम पहिनही ए, उटिक गूमी रहल चती, उटिक गूमी रहल चती, मुदा उकर जिनगी हमर हात मेचल, एहन चमत कार केना, सब दिस देखेत, ओ, इक्यो आन नही, महान योगी अपन खेल खेला रहल अच्छी.
- 27:23–27:30वेश्या का आत्मा केम सादू कषरीर में राखव, आतकन वेश्याग जिन्गी सही ताम प्रवेश कराएप तहीना कराएई.
- 27:30–27:33देखू, स्त्रीका जीवन शक्ती.
- 27:33–27:35आप पुन्यात्मा का शरीर में प्रवेश.
- 27:35–27:37आप सादू केम खराप कम देता?
- 27:37–27:39चरित्र, नेतिक्ता आयश में
- 27:39–27:42सादू, उठायत, चोटकी कोईरी
- 27:42–27:47शान्दिल्य, औख, औख, औख, श्रेष्ट फेरजी उठला,
- 27:47–27:50हम सदिकन सोचलों इबद्माश कखनो नैमरत,
- 27:50–27:55सादू, प्रेमी, तो कत, चा, कत, चा,
- 27:55–27:58प्रेमी, प्रेमी, हमर आलिंगन करू,
- 27:58–28:01शान्दिल्य, जाँ औई गुलाबक जोंजा कालिंगन करू,
- 28:01–28:06शादू, हे हमर प्रेमी, हम कते क मुर्ख, हम मातल ची,
- 28:06–28:09शान्दिल्य, नै, अहा, सोजे बताहा ची,
- 28:09–28:14प्रेमी, अहाक पवित्रता, अहाक वानी, अहाक पदलेल अनुचित अची,
- 28:14–28:27सादू, चलू एक बेर आर्पीबी, शान्दिल्य जाू माहुर क्वाँ, तीक अच्छी हम भूजी लेलों जे प्रहसन की होई चै, नि सादू नहीं वेश्या वोक्रा सादू वेश्या कही सकै ची, तीक चै.
- 28:27–28:31सादु, चोटकी कोईरी, चोटकी कोईरी, हमरा लिंगन करू,
- 28:31–28:33परिचारी का दूर भागु,
- 28:33–28:35माए, बेटी वसन्त सेना,
- 28:35–28:38सादु, हम एत ची, माए,
- 28:38–28:39नमसकार, माए,
- 28:39–28:42माए, मुदा श्रीमान, की बरहल अची?
- 28:42–28:45सादु, माए, अहा, हमरा खोक्रा रहल ची,
- 28:45–28:47प्रेमी, आहा आई बड शुस्त थची
- 28:47–28:50प्रेमी, श्रीमान, हम नपुन्सक
- 28:50–28:53शान्दिल्य, तीक अची, तीक अची
- 28:53–28:54वेद्धिख प्रवेज
- 28:54–28:58वेद्धिध, हमरा आट्टा गोली आग चिचु जडी भूटी बेटल
- 28:58–29:06तुरत्ते जीवा तुरत्ते मुद्तिव क्यो पानि आनु पानि परिचारिका लगजाइत।
- 29:06–29:08परिचारिका इलिया पानि
- 29:08–29:10वेद्या हम गोली पीस रहल ची
- 29:10–29:14ओफ एक रा काटल नई गेल चै इवष मे अची
- 29:14–29:17वेच्या मुर्क तो बर देरी सम भुडवेला
- 29:17–29:21आहा के यहो नै बूजल अच्छी जे के मरी रहेल अच्छी
- 29:21–29:23स्विकार करू रहा साप नै काटलक
- 29:23–29:24वेद्ध्या
- 29:24–29:25तकन आपे खला किये
- 29:25–29:26वेश्या
- 29:26–29:28आहा लक पाथे पुस्तक अच्छी नै
- 29:28–29:29वेद्ध्या
- 29:29–29:29अच्छी
- 29:29–29:30कम सम कम पाज सै
- 29:30–29:31वेश्या
- 29:31–29:39तकन उ सब सूनाउ वेद्द मालकिन सूनु वायु पिट्द आखफ कफ औह औह एक टा पुस्तक एक टा पुस्तक
- 29:39–29:48शान्दिल्य आज एक टा खेथ वेद्द ये उपहिनही ए भिस्रि गेला थीक अची सह्योगी एद अची पुस्तक
- 29:48–29:56वेद्य, मालकिन सुनु, वायुजन्य, पिटजन्य, अकफजन्य, रोग, तीनू निकले माहुरसम, चारिम अग्यात अची.
- 29:56–30:04वेश्य, क्राप भाशा, कहबाक चाही, तीनू उपन्न होईत अची, सदिकन करता पहले राखू.
- 30:04–30:08वेद्या उ, हम एक ता व्याकरन जसम कातल गेलों
- 30:08–30:11वेश्या, साब दन्षक करत लक्षन होई चै?
- 30:11–30:15वेश्या, साब दन्षक नै, साथ होई तच्छी, जेना,
- 30:15–30:18रोयां तारहा हैब, मुसुख्खाईब, तर्तरी,
- 30:18–30:21पीर पद्डब, हिचकी, तीवर श्वास आबे होशी,
- 30:21–30:51भी बवाँ बाजु वेद्ध, हम भिसरी गेल ची, शुभविदा मालकिन, हम जार हैल ची, ब्रित्योग दूटक प्रवेश, दूट, हम फेर हैल ची, देखु कोना मनुश्ष्ष्व दोग आप आप अची, हमरा भेट करया लेल, गर भपाद, फोका, बुखार, कान दरद, पे
- 30:51–30:57अब हमर स्वामीक आदेश वेश्या लगजाइत, श्रिमान पो शरीर उतारू,
- 30:57–31:02वेश्या, खृशीसम, दूथ, से हम आत्माक अदला बदलीक सकय,
- 31:02–31:07छी आजे पहिने करबाक चल से करे ची, अना करे ट प्रस्थान करे,
- 31:07–31:11उज़ाई परजाएग चाएग ची आजे पहीने करबाक चल से करेई ची
- 31:11–31:13आना करेद प्रस्थान करेग
- 31:13–31:16सादू शान्डिल्ल्या शान्डिल्या
- 31:16–31:18शान्डिल्या
- 31:18–31:20लेई श्रेष्थ बारंभार जीभी उप्ताई चती
- 31:20–31:21वेश्या
- 31:21–31:23चोट की कोईरी
- 31:23–31:25परिचारिका
- 31:25–31:27अगर अबा चलत मेख्केम लाल करई,
- 31:27–31:31अगर अबा चलत मेख्केम लाल कर ही अखास अगनिक गर्बसम अच्छी गर्भवती
- 31:31–31:34अगर अगनिक गर्बसम अच्छी गर्बवती
- 31:34–31:40अखर अभा चलत मेख्केम लाल करे, अखास अगनिक गर्भसम अच्छी गर्भवती
- 31:40–31:44दूनुक प्रस्थान, सब चलै भिला प्रानी सुखी रहे
- 31:44–31:46अखर अबा चलेत मेख्केम लाल करए, अखास अगनिक गर्ब हसम अच्छी गर्ब हवती.
- 31:46–31:48तुनुक प्रस्थान, सब चले बिला प्रानी सुखी रहे.
- 31:48–31:50आहम एक दो सरक भाग्य सम प्रेम करी,
- 31:50–31:52सब पापक विनाश हुए.
- 31:52–31:54आजगत मेश बधाम सुखर है.
- 31:54–31:56समाप्त।
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सादु अवेश्या बबववद अज्जूकम, गाजंदरा ताकृर, सादु अवेश्या बबववद अज्जूकम, बबववद अज्जूकम, संस्क्रित प्रहसन, बबववद सन्यासी अज्जूकम वेश्या, वोदायन दूरा रचित मेतली अनुवाद गजेंद्र ताकृर पात्र सुत्रदार विदुषक सादू परिव्राजक शान्दिल्य सादू कषच्य वेश्या वसंत सेना दूएटा परिचारिका माय प्रेमी वेद्या म्रित्युग दूद नान्दी देवतासम आशीर्वाद प्राप्त करेल, कबाद सुत्रदार प्रवेश करयत चति सुत्रदार शिवक चरन रक्षा करो जोतिषी तकर महत्व जनैट चति देवताक मुक्टपर नीलम तकरा सपरष करयत अच्छि आर अवन कदुष्तता सब तकर अंता एक बेर जुकाल गेल शिवक चरन रक्षा करू प्रवेश करईत इरहल हमर गर हम भीतर जारहल ची विदुशक कताइ चा विदुशक हमेते ची सुमी सुट्रदार जकन तक कीो ने चैक हम तोरा किछुनिक गप के अबः विदुशक थीक अची स्वामी बाहर जाईए फेर भैए गर में कि यो नै अची स्वामी कही ने किछुनिगगब सुत्रदार सुनह आई हम एक ता ब्राहमन सम भेंट केलों उ बाहर सम आयल चला अगता जोतिऊशी जिनकर भविश्यवानी बर सतीक होई चै आव भविश्यवानी केलनी श्रीमान अबजला आएक साथ दिन बादे राज महल में आहा नाटक देखाएव राजा आहाग प्रदरषन सम बध प्रसन नहेता आहा आहां केम खुब धन देता इसत्ते हु मैंबला भविष्वानी हम्रा में उर्जा भरी देलक, तें हम एकता नातक खेलाएव. विधुष्वक, कों तरहक नातक खेलाएव? सुत्रदार, इब बडनिक प्रष्नाच्च्छी, नातक में कोनो दस तरहक भावना देका सकै ची, आज आज दरी हमरा बुज़ाये, आज ये सब सम श्वेष्ट है ची, ते हमें कता प्रहसन खेलाएप. विदूषक, सूमी, हमरा प्रहसन में से हो रहस्टे नै बुज़ाये. सूत्रदार, तकन हमरा तोरा प्रषिक्षित कर पडद, अप्रशिक्ष्ट् मन किचु नई पाभईए विदुशक, स्वामी, तखन अहा, हमरा प्रषिक्ष्ट करू। सुत्रदार, अवश्छ जाम अहा, जान पर मन लगाण ने ची। तरनीक मारगपर चले भलाक संग चलू। परदाख पाचां सम्वबाज पर्दा पाचान समवबाज शान्दिल्य कत चाय हो सुत्रदार अखानेद हमर पाचान आउ सादुखषिष्ष्छे बनी जेना द्रद योगीष्वरक्षिष्छे अनुसरन करेच जाती तुनु प्रस्थान करेच चाती प्रस्थावनाक अन्द मुक्छनातक 1. ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ � तव तव पगल चा तें शाइत ओ दुखी भवा पुरा पूरी दोखी नहीं आची अम एक भेर फेर भज़वी चे है, शान्दिल्या कत चा शान्दिल्या कप्रवेश शान्दिल्या तन शुरूए सम कहु, हम दंख सम जनमल चलो वमर परिवार गीज्द्डग आंट्कुट पर जिभैच्छले, वमर जिह वोक्रा पकडदने सुखा गेल, वमर ब्राह्मन जनो गर्दनी में सतल रहल, आप वम सब ब्राह्मन भेला पर बसंटुष्ट चलो, तें गर में खाले किचु नै चले, अम भूख समरे चलों, अम बूद बनाई लेल बागलों जे जलखःई भेटल, जलखःई भेटल, मुदाई बद्माश सब दिन में एक के बेर मात्र काई जाएए, तें रहां प्र भुखले रहां, हम गेरूवावस्त्र फेक्लों, भिख्षा पात्र तोट्ड्ड्ड्ड्ड्ड्ड्ड्ड्ड्ड्ड्ड्ड्ड्ड्ड्ड्ड्ड्ड्ड्ड्ड्ड्ड्ड्ड्ड्ड्ड्ड्ड्ड्ड्ड्ड्ड्ड्ड्ड्ड्ड्ड्ड्ड्ड्ड्ड्� आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप इते क्रिपा किये करें. अम सादुक लाथी आईले नै पकडलों जे पुन्ने बेटत, मुदा आईले जे भूखे मरी रहल चलों. सादु, शान्दिल्य, एकर आर्थ की? शान्दिल्य, सत्ते कलाबे की? आहा सदिकन कै चीजे जूथ बनहन आची. शादू, एक दम टीक, जम के उ जूट कें संगी बन बईए तब नहन में बना जाए, बूच चाह चाह कि ए, जकन एक ता सचर लोक नीक प्रेरना सम नीक काज कर आए, देवता तकर फलकें एना राख है चतिजेना कोनो दरो हरी. शान्दिल्य, मुदा अपस कखन भेतत? शादू, चीज़क इच्छा न नहें केलास शादू, पुजजवर इप्रष्न उठाए जे इच्छा खेना नहें केल जाए शादू, प्रेम आग्ना सम एकातब कि ए, सुख दॉख में सम रहभ बहे, रहश में संटूलित रहभ शान्दिल्या पूज्जवर इप्रष्न उठाए जे इच्छा केना नहें कैल जाई शादू प्रेम आग्ना सम एकातब किये सुख्दूखमे सम रहभ, बहे रर्षमे संटूलित रहभ, मित्र शत्रुकेम समान द्रिष्ति सम देखभ, एकरे बुद्दिमान लोक एका तहाएब कहे चाति शान्दिल्या मुदा इय अच्छिकी सादू जे अखनो अस्तित्वमे नहें आयल तकर नाम नहें हो ये शान्दिल्या मुदा कहु कि एक रा कैल जा सकय पूजवर सादू कोनो संदे है अच्छी शान्दिल्य, जोट, जोट, सादू, माने शान्दिल्य, श्रिमान, आहा, हम्रापर के तम्साइ ची, सादू, तो सिखबे नै करवा, शान्दिल्य, हम सीखी आगी नै, आहा, कें की, आहा, तस्वतन्त्र ची, सादु, एना नै बाज, परमपरा अची जे चड़ी चात्रक लेल पुष्टाई होई चै, तें पून ततस्ततासम हम तोरा बडद तरीका सम्सें तब. शान्दिल्य, आहा, पूँन ततस्ततासम दन्द दैची, हे पुज्जवर, आब यी समवाद बन्द करू, भिख्षाक समय भीतल जाएए. सादू, मुर्क, अखन, भोर, सकाले, अच्छी, दूपहर्या नए, लिखल अच्छी, भिख्षात, अखन, माइगी, जखन, उखखड्डी, राखी, देल जाए, चूल ही मिजा जाए, आसब खापी, लेठी, चला, किचु, काल, कलम्मे, भितभाए ची. शान्दिल्या, अग, अग, अग, आख, पावन, वेवार, अपन, वचन तोड़े. शादू, माने? शान्दिल्या, कि आग, पावन, वेवार, एक, रव, नग, अच्छ, नीक, आख, बेजाए. सादू, एक दम, हमर आत्मा एक रंगक अची, नी का की बेजाए, मुदा हमर सक्रियस्वके विष्राम चाही. शान्दिल्य, श्रीमान आत्मा की अची, सक्रियस्वकी अची. सादू, सुना, अन्तर आत्मा अची जे सुतलाए पर सवर्ग जाए, फिर मात्र आत्मा अच्छी जे आपन कर्तवे करए आजन्म जन्मान्तर यात्रा करए आतकन इहो आत्मा अच्छी जकरा हम सक्रियस्वक है ची मनुश्व आपन देह अच्छी आई आत्मा विश्रामक सुख्चा है शान्डिल्य थीके अद्मा जे बूर्ह नहें हो ये, मरें नहें अविनाशी अच्छी, अख्छा अच्छी, वहे अच्छी आज्छी, आजे हंसच्छी, हसबःें, सुताई, मरें, वहे सक्रियस्वाच्छी. ये ना सिक्छे लों, से अच्छे लों? शान्दिल्य, अग, अग, चलू, आहा थखा गेलों. सादू, माने, शान्दिल्य, आत्माजे अखन अची, दीकने, जम देइनाय तम किचुनाय. सादू, जन सादारन सन बजगछा, सब प्रानी कई एक अवस्था सम गुजराये भूजलही, तेन हम सब औई रूपमे बजगछी. शान्टिल्या, आ, आ, अ, कोन अवस्था मे ची? सादू, सून, आखाश, वायू, जल आगनिक कनसम बनल देलेने, बाखी मात्र माती, कान, आखी, जीह, नाक, आस, पर्षसम, चेतन, हम श्वास लेब, बला प्रानी ची, जकर नाम, मनुश्षे अची. शान्टिल्य, अह, अह, एना आज़्वकेम नै, जानी सकब, अपन आत्मा तम्दूरक बात चारू दिश्ट देखेट श्रीमान इदेखु एकता कलम अची सादू तो पहिने जा अई इकान तक आश्रे वन हमरा सब के चाहदेट तची शान्दिल्या श्रीमान अहा श्रेष्थ पहिने जाओ हम पाचान आईब शादु कों प्रेवजन? शान्दिल्य, हमर माए एक भेर एकटा पवित्र महिलासम सूनलनी जे अशोकक फूल में बागनु कायल रहाये, तें आहां के पहिने जाय पडता श्रीमान. शादु, तीक चाय, तुनू प्रवेश करायत चाती. शान्दिल्य, आप बाग काती लेलग, बाग अख मुहसम बचाओ, बिन मुकती आब खालेलग, हमर गर्दनिसम खुन बही रहल अची. सादू, दरहने, शान्दिल्य, इं मात्र एक ता मोर अची. शान्दिल्य, ता मोर अची. सादू, हां, मात्र मोर. शान्दिल्य, तकन आखी खोलाए ची, सादु खोलाग. शान्दिल्य, कल्मके देक्यात, हे, उ बद्माश बाग, हम्रासम देरा गेल, मोर बनी गेल, आई आब भागी रहल आची. कल्मके देक्यात, आई, कते एक सुन्दर कलम, अपन प्रियतमक अनुपस्तित में कष्ट पबःए आवो करा सब कें सुख दैई जकर प्रियतम उपस्तित अच्छी आँ में देखे ची अंकृर पात फूल आज हूंज सब एकता कलम में जे चमेली कलताक मन्दपसम सजल अच्छी मोर कोईरी आ मातल भूँराक मदूर गायन सम गुनजी रहल अच्छी ये एक ता कलम अची जे ओई यूवती सबकें पष्चा ता पदैए जे आपन प्रियतमक अनुपस्तिति में कष्ट पबई ये आवो करा सबकें सुख दैए जक्कर प्रियतम अपस्तित अची सादु मुर्क दिन प्रतिदन प्रदिद आजट होगत अच्छी से एते एक सुन्दर की अच्छी सुना एक ता बच्चा कहे ये आजबसान्त आयल पूलक चंदरी मेल पतल आनवरत में आनन्दल आए पतजाड आयल कमलक गुच्छ में है लेद मुदा उ कति में आनन्दल रहला ची जकन जीवन छोट भेल जाए शान्टिल्या एक ता प्रष्न सुंदर्ता जकन आजध हो ये ई होई ते अची सादू एक बेर फेर कोनो शैक्षनिक प्रिष्ट भूमी नै लोग उसब भविष्चलेल प्रार्ठना करहे, अटीत पर शोक मनाबई न वर्तमान सम ग्रना करहे. शान्टिल्या इरस्ताक अंत अची हम सब कत बैसब सादू एट्ताई बैसब शान्टिल्या गंदा गंदा सादू बोन सवच अची दर्टी पवित्र अची शान्दिल्य, मुदाजम थाकला पर भैससस चाहे ची तां सदिकन पुच्चे ची सुच्च अची वागन्द. सादू, प्रादिकरन शास्ट्र अची हम नहीं कि ए, आपन आत्म सम्मान सम बता हलोकपर भरोस नहीं, जे कहे जे करापसम नीक होई चे, तिनकर प्रादिकरन मात्र संकक सुंगर लेने अच्छी शान्डिल्या तेन आहाग भेसी बजला पर भरोस नहें सादु आबहा भेटा किच्षु सीखा शान्डिल्या हम आब आर नहीं सीखभ सादु किए नहें? शान्डिल्या बेसी सीखभ अग की फप्यदा सादु, जे चात्र पाट सीखाये से अन्तमे भुजिये जाएए तेंकिचु सीखा. शान्दिल्य, आर्टकन की होईच है? सादु, सुन, ज्यान सम विवेक बड़े चै, विवेक सम आत्मनिग्रह, आत्मनिग्रह सम तपस्या, तपस्या सम्योग, योग सम्वूत्वर्त्मान, भविष्यक यतार्थक अंपर्द्रिष्टी, आओई अंपर्द्रिष्टी सम् 8 गुना प्रबुत्व प्राप्त होई चै. शान्दिल्य, हे गुरू, आहा, हमर्विचार पडिक बजजे ची, मुदा हम उक्रा नुका सकै ची तें बिना पाप केने दोस्राक गर में गुसब की समब सादू माने शान्टिल्या माने बोद भिक्षु लेल बनावल स्वादिष्ट भोजन मट्सम खाएव सादू तोहर सन पेट मदबा कोनो गडी नै मानी सकै शान्दिल्य, आईलेल आहा सब सबक चानी उदडल आची, हमरा आर कोनो कारन नै बुजाई ए. सादू, इना नै बाजा, योगक पल महान आची, सही, अदिग, अकल्पनी आख्षै, उच्वनस्क ब्राह्मन द्वारा आदर देल, देव आ दानव दवारा अनमोदित शान्डिल्यः तकन आहा आपन योग के भक्तिसम सोचु आ एक अन्तमे रहु हम भक्तिसम कि चट्डिक भिखयमे सोचब मुदा श्रिमान आहा सन सादू अए योगक विशय मे बध सोचः ए आकि नै? इआचिकी? सादु, सुनहा, तपस्या कसार, सब ग्यानक्मुल, सत्यक परीक्षा, सब विरोदा भास दूर करे, आप प्रेम गनासम रहित, वेह अच्छी योग, शान्टिल्या, दन्ने पुज्द बुद्ध, जे भोजन चोडब, आशभटा भोस्तु चोडब सिखाभ ये चाती. सादु, शान्दिल्य, एक रवानी की? शान्दिल्य, श्रिमान, मोन नाय, हम पहिने जल का लेल बवध बनल चलो. सादु, मुदा अखन आहां किचु सिखलो? शान्दिल्य, किचु, हम आप बहुत किचु जनाए ची. सादु, थी कची, सुनाओ. शान्दिल्या, सुनु श्रीमान, आद कारनाची, सोलह उपाद मुदा आत्मा पाच्वायुक अची, मन तीन सुत्रक आऔ भटकाई आविलीन होई, इपवित्र भुद्द पिताका गरन्त्ठ में कहल गेल अची. सादू, शान्दिल्य, इब अद दर्म नहीं, इसान क्या ची? शान्दिल्य, खषमा करू, भूक में हम कि चड़्दिप द्यान देलों, तेम एक बात सोचलों आदो सर कहलों. अप सुनु, श्रीमान, आग्या अच्छीजे भिख्षु अदत्वस्तु अस्विकार करे, आग्या अच्छीजे भिख्षु प्रान राद्या नाय करे, आग्या अच्छीजे भिख्षु बकभक नाय करे, आग्या अच्छीजे भिख्षु काम वासना सम दूर रहे, आग्या आब आँ भक्तिस्सम योगक छिंतन करू श्रीमान हम उतबे भक्तिस्सम खिचचद्धिक छिंतन करब सादू की समवाद बन्न करू आत्मा कबन्दन लेल अई सन्सार केम स्तधित करू इंद्रियके आत्मा मे बानू इन्णक सहाईता सम्सत्यता कू अपने आपने आपने आपने आपने आपने आपने आपने आपने आपने आपने आपने आपने आपने आपने आपने आपने आपने आपने आपने आपने आपने आपने आपने आपने आपने आपने आपने आपने आपने आपने आपने आपने आपने आपने आपने आपने � वेश्या आई न्रित्य मन्दप नै बैसाई ये परिचारिका मालकिन आहा एक दम सही कहलों मुदा न्रित्य मन्दप एक ता मदिरालगे अच्छ्या महिला सब कते को शालीन हो ती नशा में माती हंसाई चती वेश्या तकन तों जल्दी जा परिचारिका आ आहांकें से हो जेबा का ची मालकिन प्रस्थान करेएद विश्या चोटकी कोईरी प्रिये हम सब कत बैसब परिचारिका � thode kale pathrak asan par baesu देखू, एक्ता मोजरल आमक तारही सम सजाल अच्छी, मुपरहक सजावदिसन आतकन मालकिन, आहाके एक्ता गीत गेबाख चाही. विश्या, चोटकी कोईरी, प्रिये, हम से करब. दूनू बैसे तागा बैच्छती. दूनू... अग, काम स्यमेते आची, हम सूने आची. कोईरी आब हून राग, धनूशक दोरग गाएन सम. अ, आमक्तार ही बाजी रहल आची. आ, अवश्य एक द्रस्टाक, मन ललचाईत आची, शान्दिल्लि. सूने आच, कोईरी कबाज. ने, एक दम कोईरी कबाज ने. अग, अग, अग, इख, इख, अग, अग, इख, इख, इख, इख, इख, इख, इख, इख, इख, इख, इख, इख, इख, इख, इख, इख, इख, इख, इख, इख, इख, इख, इख, इख, इख, इख, इख, इख, इख, इख, इख, इख, इख, इख, इख, इख, इख, इ� विश्या हम गाएब फेर गाबईत आप काम फेर आद अची आब असन्त तपन गर वुटेने आची आप प्रेमिकाक द्रिष्टी अखर असंग जाएद आची आप काम फेर प्रेम जगाबईत अची आप रियनव विवाइता क्रिदैसे हो अखर आप फिर फूल सम गंटने आची, शान्दिल्य, कतेक मदूर गीत अखर कंटसम उठाए, सूनु श्रिमान, सादू नै कान सुन बाक लेल बनल आची, हम एतेक दूर नै जाए भजे सूनी, शान्दिल्य, जाओ उतेक दूर जम खरच करबाक पाए हू आए, आप द़ाँ पर बवाज़ा था आप द़ाँ तामस नाई करू आप द़ाँ पर बवाज़ा तामस नाई करू आप द़ाँ तामस नाई करू आप द़ाँ पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर � अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अ� अगर तोडे कर्म बचल अच्छी ते हम तोडे काल प्रतीख्षा करब परिचारिका मालकिन इआशोकक पूल कते एक सुन्दर अच्छी हम तोडब वेश्या नै नै नै हम स्वयम तोडब दूद एकरा चुट्टी काटबाक आप समय अच्छी वेश्या आजखी चुकाती लेलक, पर आप कुदब आएकरा अपन स्वामी लगलजाएब. वेश्या या वेश्या या वेश्या वेश्या वेश्या वेश्या वेश्या वेश्या वेश्या वेश्या वेश्या वेश्या वेश्या वेश्या वेश्या वेश्या वेश्या वेश्या वेश्या वेश्या वेश्या वेश्या वेश्या वेश्या वेश्या वेश्या वेश्या � वेश्या रवागें के रोकिसकेत अच्छी वेश्या हम देजमारीक खषाइबला ची साँस फूली रहल अच्छी हमरा पद्डबा का अच्छी परचारीका शान्तिस्सम पद्डी रहु मालकिन वेश्या मायकें हमर प्रनाम पहुचा देबाई प्रीए वेश्या मायकेम हमर प्रनाम पूँचा देभाई प्रिये परिचारिका औह नै, आहा स्वेम जा का प्रनाम करव वेश्या आप वेमी केम हमरा लेल आलिंगन करव उचेतनाहीं खसी पद्ध्ध्छाती परिचारिका आप मालकेम बरी रहल चाती अखर प्रानला लेलों आआब रस्ता पक्रबा कच्छी अखनो गंगा पार करबा कच्छी आविंद्य परवत आनर्मदा नदीक शुभ प्रवाज सह्या गोलगी क्रिष्नवेना आब हवान शिवक पवित्र नगर कान्ची पुरम आद अखन कावेरी वेरी, ताम्र परनी, मले पर्वत आ अन्त्मे समुद्र, जादरी हम, वायु वेगसम, लंका पर उडी म्रित्त्यो लोक नहें पहुची जाए, प्रस्थान. परिचारिका, आ, हमर मालकिन मरी गेली. शान्टिल्या, गुरू, विष्याग जान गेलनी? सादू, लोक आपन जान ने हेरभै आछिमुर्क, जिन्गी हुनका लेल बड्मुल्लिवान अच्छी, कहुजे जिन्गी तिन्का चोडि गेलनी. शान्दिल्य, चि आहा में दया नै, प्रेम नै एक को रत्ती, कतोर रिदै दुष्ट भिलासी, क्रूर थक भेल चिल्ला. सादू, एकर माने की? शान्दिल्य, तम हु, हम आहाक हजार नाम शुरू मात्र केने ची सादू, हमारा रोकेले विबस्जूनि करा शान्दिल्य, श्रिमान, हम शोक में ची सादू, की लेल शान्दिल्य, उ हमर संबन्दी चली सादू, संबन्दी शान्दिल्या, उ कोनो सादू सना ची? जक्रामे प्रेमनै? सादू, हम इठीक, आस्ते आस्ते प्रेम करी, हम उच्छ उद्टेश्य सम् प्रेम करे ची, वास्तव में, हम जेनी स्वार्त रूप सम, मोक्षक पत्पर समर्पिच ची, आशास्त्रक निदारित मारग पर चलए ची हम मात्र सादारन शनेजसम मुह मोड़ची आधमर रिदाय मात्र सद्गुनकेम देखाई शान्दिल्या श्रीमान हम आपनापर काबू नैराखी सकैची हम विस्याक के अख्रा लगजाएब आकानब शादु औब नहीं से नहीं करा शान्दिल्या तामस नहीं करू शादु के नहीं करबाक चाही वेश्याक लगजाइत हे मालकिन एते एक प्रेमी चल एते एक निखसम जुमे चलों परिचारिका श्रीमान आहाकें की भेल शान्दिल्या प्रेम आर किछु नहीं परिचारिका मन में तीके संत सब में सबख लेल करूना हो इच है शान्दिल्या मालकिन हम रास परष कर दिया परिचारिका आहाम में सकती अच्छी श्रीमान शान्दिल्या अपेर चुबाये परिचारिका पेर नहीं चुभी आव शान्दिल्य, अ, हम, हम बद भ्रमिद ची, उपर नीचां किछु पतान है, आ, ह, इरहल, नारिकेर संद्रध, केसरा चंदन सम अनुलिप्त, उर्दो मुखि, हमर माल किनक, दिव्यवक्ष्जे, दूर्बाग्यसम, जीवित रहला पर हमरा कखनो उपलप दनाई भेल परिचारिका मन में से हमरा करबाक चाही जो रसम श्रीमान � thode kaal pratikshakaroo jadhari हम उकर माय केमला आने ची शान्टिल्य देरी नाई करी हा माय विहीन सबख लेल हम माय ची परिचारिका मन में इदयालु ब्राह्मन हमर मालकिन केम नै चोड्दिक जाएत हमरा जे बाख चाही. प्रस्थान. शान्दिल्य उ गेली आप मों बरिकु कानी सकै ची. इबेचारी वेश्या जे एते एक निएक सम चलाई चली. कानेईत. शान्दिल्य इनाई करा. शान्दिल्या, जाओ प्रेमहीन, आहा भुज़े चीजे, हम आहा सन्ची. सादू, आउ, बेटा थोडेख सीखा. शान्दिल्या, श्रिमान, इबेचार इस्त्री केना दीख है ती. सादू, कोनो दवाई जनै चा? शान्दिल्य, पाप अच्छी आखाई क्योगगख्पल सादू वन में, इबेचारा अखनो नईभुज़ाये जे सादू हैब माने, नईभुजबजे कि करबाक अच्छी, एकता नियम चैजे महान शैव योग आचारे केम प्रकत काल गेल चै, शिष्यक करूना आसक्तिकें प्रभल कराए च्ये, तक्हन हम एकरा में एकता अंतर द्रिष्ती उत्पन करव, तीक, इसही योग अच्छी, योग सम हम एई वेश्या का शरीर में प्रवेश करव, वेश्या मुर्दा सम जिन्दाब हुतेत अच्छी, सादु अरद्दा कक्हसी पडद्धी वेश्या शान्दिल्या शान्दिल्या प्रसण्नतासम माल्किन आहा जीवित ची आहा पुनरजन्म पेलो हमेत ची माल्किन वेश्या गन्दा हाच्सम हमरा नैई चुबह शान्दिल्या मुदा हम बहुत साव ची आबव, बिटा तोडेक सीखा. शान्दिल्य, इत तो सीखे पडद, दीका जी, इत हम आगा के इंश्रेष्ट तासम, नम्रतासम संपर करे ची, साधुखशव लगजाए, श्रिमान, दुखीची, आहा मरी गेलों, खषमा करू बक्बकिया अतियोग मनस्क गुरू, अगर बद्यारी का उएत आची एक लममे नागसम काटल माए आँ हम बरबाद बगेलों परिचारी का शान्त हो माए शान्त हो मालकिन छीक छती माए के ना छीक हेती लगजाइत वसन्त सेना हमर भेटी की बरहाहल आची विष्या चुबु नाई बुडिया माई, औरे एकर माने की? परिचारिका, बिख माहुर मात में पैसी गेल हैत माई, फुर्ती सम वेद्खेम बजाओ परिचारिका, हां, मालकिन परिचारिका जाईत अची प्रेमी आ दो सर परिचारिकाक प्रवेश परिचारिका, आहांकेम बेशी शक्ति बेटे प्रेमी, हमर मालकिन आहांके नै देखी कतदपै चती. प्रेमी, आहाम से हो उई मदुर गाबईबला, विशाल आखिबला मुह देख चाहे ची, इमदुमा ची कप्रतिग्या चैक जे फुलायल सुंदर कमल सं पीबः, उखर आचर पक्ड़ेद लेड़ी अपन मुह गुमाउ पोखरी में लेड़ी सम थोडे कहिलायल कमलसन अहाग कहीो काल देखाए दैत मुह एहन प्रसन कारक अची जेना हात में लेल अचीन्जल. वेश्या दूश्त हमर आचर चोडू प्रेमी इगी अची अगर मन सते बवरा गेल चाए बेचारी स्विछ़्ी शून्यमे दूमल कोनो पवित्र मोंबला एकर शरीर के मतिक्रमित केने बुजाए चाए वेद्य आप परीचारी का का प्रवेश परीचारी का आईदिस श्रीमान हम वेद्य प्रवेश कर अगा तो चाती वेद्या उ अपना मेन आई चाति सत्ते उ नाग दवारा अक्रमन अक अतल गेल चाति परिचारिका आहा केना बुजलो वेद्या जेना कहल जाए वेग माहुर भिखसम बद फरक पद आई चाए एक राएत आनु हम माहुर भिखख शास्तर में पारंगत ची बैसा ए आइशारा सम गेराबा बन बै, चोटका गेराबा, तो जे कानक जुमका सन सुमिनि के मराखई चा, अई जादुबला गेराबा मे प्रवेश करा, जादुबला गेराबा मे थार, सामपक भेटा, थार, शान्त, शान्त, वेश्या दिस आंगुर देखभैत, हम एक रास प्रेमी प्रेट्न करु श्रीमान आहा हम्रा क्रतगन न नई पाएप वेद्य, हम एक ताभिग जारना हारके आनप जे बद सुन्दर गोली रकहेत अची प्रस्थान. ब्रित्युक दूटक प्रवेश दूट वाह! यम हमरा चावर नई बना देलनी वसंत सेना नई, उगरजला तुरन्त उखरा आपस आनु दोसर वसंत सेना जकर जिन्गी कष्म भेल आची आनु आजल्दी थीक आची जादर शरीर जरल नई हो हम उखरा पुनर जीविद करब चारु दिस देखेत, ओतम पहिनही ए, उटिक गूमी रहल चती, उटिक गूमी रहल चती, मुदा उकर जिनगी हमर हात मेचल, एहन चमत कार केना, सब दिस देखेत, ओ, इक्यो आन नही, महान योगी अपन खेल खेला रहल अच्छी. वेश्या का आत्मा केम सादू कषरीर में राखव, आतकन वेश्याग जिन्गी सही ताम प्रवेश कराएप तहीना कराएई. देखू, स्त्रीका जीवन शक्ती. आप पुन्यात्मा का शरीर में प्रवेश. आप सादू केम खराप कम देता? चरित्र, नेतिक्ता आयश में सादू, उठायत, चोटकी कोईरी शान्दिल्य, औख, औख, औख, श्रेष्ट फेरजी उठला, हम सदिकन सोचलों इबद्माश कखनो नैमरत, सादू, प्रेमी, तो कत, चा, कत, चा, प्रेमी, प्रेमी, हमर आलिंगन करू, शान्दिल्य, जाँ औई गुलाबक जोंजा कालिंगन करू, शादू, हे हमर प्रेमी, हम कते क मुर्ख, हम मातल ची, शान्दिल्य, नै, अहा, सोजे बताहा ची, प्रेमी, अहाक पवित्रता, अहाक वानी, अहाक पदलेल अनुचित अची, सादू, चलू एक बेर आर्पीबी, शान्दिल्य जाू माहुर क्वाँ, तीक अच्छी हम भूजी लेलों जे प्रहसन की होई चै, नि सादू नहीं वेश्या वोक्रा सादू वेश्या कही सकै ची, तीक चै. सादु, चोटकी कोईरी, चोटकी कोईरी, हमरा लिंगन करू, परिचारी का दूर भागु, माए, बेटी वसन्त सेना, सादु, हम एत ची, माए, नमसकार, माए, माए, मुदा श्रीमान, की बरहल अची? सादु, माए, अहा, हमरा खोक्रा रहल ची, प्रेमी, आहा आई बड शुस्त थची प्रेमी, श्रीमान, हम नपुन्सक शान्दिल्य, तीक अची, तीक अची वेद्धिख प्रवेज वेद्धिध, हमरा आट्टा गोली आग चिचु जडी भूटी बेटल तुरत्ते जीवा तुरत्ते मुद्तिव क्यो पानि आनु पानि परिचारिका लगजाइत। परिचारिका इलिया पानि वेद्या हम गोली पीस रहल ची ओफ एक रा काटल नई गेल चै इवष मे अची वेच्या मुर्क तो बर देरी सम भुडवेला आहा के यहो नै बूजल अच्छी जे के मरी रहेल अच्छी स्विकार करू रहा साप नै काटलक वेद्ध्या तकन आपे खला किये वेश्या आहा लक पाथे पुस्तक अच्छी नै वेद्ध्या अच्छी कम सम कम पाज सै वेश्या तकन उ सब सूनाउ वेद्द मालकिन सूनु वायु पिट्द आखफ कफ औह औह एक टा पुस्तक एक टा पुस्तक शान्दिल्य आज एक टा खेथ वेद्द ये उपहिनही ए भिस्रि गेला थीक अची सह्योगी एद अची पुस्तक वेद्य, मालकिन सुनु, वायुजन्य, पिटजन्य, अकफजन्य, रोग, तीनू निकले माहुरसम, चारिम अग्यात अची. वेश्य, क्राप भाशा, कहबाक चाही, तीनू उपन्न होईत अची, सदिकन करता पहले राखू. वेद्या उ, हम एक ता व्याकरन जसम कातल गेलों वेश्या, साब दन्षक करत लक्षन होई चै? वेश्या, साब दन्षक नै, साथ होई तच्छी, जेना, रोयां तारहा हैब, मुसुख्खाईब, तर्तरी, पीर पद्डब, हिचकी, तीवर श्वास आबे होशी, भी बवाँ बाजु वेद्ध, हम भिसरी गेल ची, शुभविदा मालकिन, हम जार हैल ची, ब्रित्योग दूटक प्रवेश, दूट, हम फेर हैल ची, देखु कोना मनुश्ष्ष्व दोग आप आप अची, हमरा भेट करया लेल, गर भपाद, फोका, बुखार, कान दरद, पे अब हमर स्वामीक आदेश वेश्या लगजाइत, श्रिमान पो शरीर उतारू, वेश्या, खृशीसम, दूथ, से हम आत्माक अदला बदलीक सकय, छी आजे पहिने करबाक चल से करे ची, अना करे ट प्रस्थान करे, उज़ाई परजाएग चाएग ची आजे पहीने करबाक चल से करेई ची आना करेद प्रस्थान करेग सादू शान्डिल्ल्या शान्डिल्या शान्डिल्या लेई श्रेष्थ बारंभार जीभी उप्ताई चती वेश्या चोट की कोईरी परिचारिका अगर अबा चलत मेख्केम लाल करई, अगर अबा चलत मेख्केम लाल कर ही अखास अगनिक गर्बसम अच्छी गर्भवती अगर अगनिक गर्बसम अच्छी गर्बवती अखर अभा चलत मेख्केम लाल करे, अखास अगनिक गर्भसम अच्छी गर्भवती दूनुक प्रस्थान, सब चलै भिला प्रानी सुखी रहे अखर अबा चलेत मेख्केम लाल करए, अखास अगनिक गर्ब हसम अच्छी गर्ब हवती. तुनुक प्रस्थान, सब चले बिला प्रानी सुखी रहे. आहम एक दो सरक भाग्य सम प्रेम करी, सब पापक विनाश हुए. आजगत मेश बधाम सुखर है. समाप्त।