MACHINE ASR ACCESSIBILITY AID

Mattavilasa Prahasanam 2 sarvam.mp3

Not an editorially verified transcript. This text was generated automatically from the preserved recording and may contain recognition, language-detection, spelling, segmentation or name errors. Consult the source recording for authoritative content.
Collection
Part 5 · VIDEHA MITHILA MAITHILI DISCUSSION CRITICISM SERIES PART 5
Status
asr-draft
Human verified
No
Editorial review
not-reviewed
ASR model
small
Detected language
hi (0.571829)
Duration
5:15
Source
Open preserved recording

Timestamped machine output

  1. 0:00–0:05अनन में मत्खरेबला प्रहसन
  2. 0:05–0:14पल्लोण नरेश्ष्वी महेंदर्विक्रम वर्मा प्रथम केर मुल संस्क्रित, मत्दविलास प्रहसनम केर मैठिली अनुवाद, गजेंद्र खाकृर पात्र परीचाए
  3. 0:14–0:19सुट्रदार रंगो मन्चक वेवस्तापका नाटक निर्देशक
  4. 0:19–0:23अबिनेत्री सुत्रदारक पहल्कतनी नाटकत आयोजन में सहायक
  5. 0:23–0:32सब्तिसों कापालिक एक कापालिक शेव सादू कपाल के भिख्षापात रुप में दारन कर बला, विद्रोही आसाबला
  6. 0:32–0:35देव सोमा सब्तिसोमक संगिने
  7. 0:35–0:44नागसेन शाक्के समप्रदायक एक बोध भिख्षू बब्रुकल्प एक अन्ने शेव सादू पाशुपत समप्रदायक अनुयाई
  8. 0:44–0:52उन्मत एक ता बताह मनुख्ख, प्रस्तावना, सुख्रदार प्राथनाग बाद प्रवेष करेच्ट
  9. 0:52–0:59सुत्रदार, आहा, आपन दोसर पत्नी दूरे तम्सायल पहल पत्नी के प्रसन्द करबाक एक तनीक उपाई भेटल.
  10. 0:59–1:04बड दिनक बाद राज्दरबार सर नाटब प्रस्तुत करबाक आदेश आयलाएच.
  11. 1:04–1:07चलू, उक्रास पुछेची.
  12. 1:07–1:09नेपत्ठ्यमे हुल्की दैप.
  13. 1:09–1:12सुत्रदार, ये महरानी इताओ.
  14. 1:12–1:16पहल पतनी, जे अबिनेत्री च्छत, प्रवेष करे च्छत.
  15. 1:16–1:20अबिनेत्री, तमसाइती कोन गब ल्हिल,
  16. 1:20–1:24अब वुडहारी में, आहा जवान जुहान पीकः बताह भिल चोडा,
  17. 1:24–1:27सबक सुजा प्रहसन कर चाहे ची.
  18. 1:27–1:37सुत्रदार, हा, बात्त सैएच, अबिनेत्री, तक्हन कुनो, जवान अबिनेत्री के लओ आउ, जे ईमोन लगा ककर्बो करत, आ, उक्रा मोनो लकते.
  19. 1:37–1:45सुत्रदार, हम तए आहिक सोजा करब, अबिनेत्री, उदोसर की आहाके इई सिक्धा कपतेने आच.
  20. 1:45–1:53सुत्रदार, चोडू अ गब, दूनू गोते राज दर्बार जायब, तक खुभे राज किय सम्मान बेटप.
  21. 1:53–1:58अबिनेत्री से बडखा बडखा गब चोडप्त अही सहेथ.
  22. 1:58–2:05सुत्रदार, हेत, मुदा, आहा, अपन अबिनैसद, दर्षक सब के असीम अन्दक सागर में दुमा देप.
  23. 2:05–2:10अबिनेत्री, प्रसन्द भोमाने आदरनिय महराचस अनुमति भेट गेल.
  24. 2:10–2:12सुत्रदार, हाँ.
  25. 2:12–2:18अबिनेत्री, तक्ञनेहन शुप समाचार देबाग बडला मे हम अहाके की पूरसकार दिया.
  26. 2:18–2:23सुत्रदार अहाक प्रसनते हमर पूरसकार भेल आर की चाही.
  27. 2:23–2:27अबिनेत्री तक्ञन को नाटक प्रस्तुत करबाक विचार एच.
  28. 2:27–2:32सुत्रदार, आही तख कहलो, आनन्द में मत करे बलाप्रहसन.
  29. 2:32–2:38अबीनेत्री, स्वगग जे किछ हम कहे ची, से उकर मून्सम मिल जाए चे,
  30. 2:38–2:41तहमर तमसेनाइ से उकर स्वबाविक लगे चे,
  31. 2:41–2:45प्रकत आई नातक सविज़ेई होई बला लेक्ध के चथ.
  32. 2:45–2:47सुत्रदार सुनुप्रिये
  33. 2:47–2:51को आन कियो नै आपन श्री महेंद्रवर माच्ठ, राजोग राजा
  34. 2:51–2:57जे काम, क्रोद, आहंकार, आए इर्खाय सब दूर्गुन के जीकने चैत
  35. 2:57–2:58जे सम चिथ चैत
  36. 2:58–3:02आप सादारन लोग सबखबीच उहना मिजजर बहुजाए चैत
  37. 3:02–3:05समपैत में कुबेर अ पराक्रम में अद्र के माथ करे चाइत
  38. 3:05–3:08अपन सहज व्यवार अ सक्शम शासन सा
  39. 3:08–3:10अपन राज्यक सुंदर संचालन करे चाइत
  40. 3:10–3:12पलडव वनशक मेरु परवत
  41. 3:12–3:14श्री विश्नुसी हक्पुत्र
  42. 3:14–3:18वहे महाराजा दी राज एही नाटकक लेक हक चाछती
  43. 3:32–4:02अब आप आप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अ�
  44. 4:02–4:08इसब्त्याइच जे कोनो मनुश्य अपन तपोबल सकोनो रूप दारन का सकेताइच
  45. 4:08–4:12मुदातु अपन व्रत्सर एक दम नव्रूप दारन का लेल ही
  46. 4:12–4:15मुक्ता करन्ज का चमकेत मुक
  47. 4:15–4:22सुंदर भों को मेथोड तोबर सुंदर ता शब्दसा वरनित नहीं भो सकेए
  48. 4:22–4:27देव सोमा नात अखन आहा नवरासा एना बजएच फीजेना हम मातली होई.
  49. 4:27–4:30कापालिक की कहलही प्रिये.
  50. 4:30–4:35देव सोमा नात समपुरन सन्सार लट्टुस का गूमी रहा लाएच.
  51. 4:35–4:39दर लागेत आएच जे खजस पडब, पकर लिया हम्रा.
  52. 4:39–4:42कापालिक खीक आएच प्रिये.
  53. 4:52–4:56वोर की ए बागी गेली ही की हम्रा सर रिसायल चही
  54. 4:56–4:59देव सोमा हा, सोम देवा रिसायल आएच
  55. 4:59–5:03चाहे मात नमा कविंति करी नहीं मानत
  56. 5:03–5:06कापालिक, तु सोम देवा चही ने
  57. 5:06–5:08एक शन् सोचे चआद
  58. 5:08–5:12कापालिक नहीं नहीं, तु देव सोमा चही
  59. 5:12–5:15बेव सोमा सब नाटा काएच अहा के सो

Plain text

अनन में मत्खरेबला प्रहसन पल्लोण नरेश्ष्वी महेंदर्विक्रम वर्मा प्रथम केर मुल संस्क्रित, मत्दविलास प्रहसनम केर मैठिली अनुवाद, गजेंद्र खाकृर पात्र परीचाए सुट्रदार रंगो मन्चक वेवस्तापका नाटक निर्देशक अबिनेत्री सुत्रदारक पहल्कतनी नाटकत आयोजन में सहायक सब्तिसों कापालिक एक कापालिक शेव सादू कपाल के भिख्षापात रुप में दारन कर बला, विद्रोही आसाबला देव सोमा सब्तिसोमक संगिने नागसेन शाक्के समप्रदायक एक बोध भिख्षू बब्रुकल्प एक अन्ने शेव सादू पाशुपत समप्रदायक अनुयाई उन्मत एक ता बताह मनुख्ख, प्रस्तावना, सुख्रदार प्राथनाग बाद प्रवेष करेच्ट सुत्रदार, आहा, आपन दोसर पत्नी दूरे तम्सायल पहल पत्नी के प्रसन्द करबाक एक तनीक उपाई भेटल. बड दिनक बाद राज्दरबार सर नाटब प्रस्तुत करबाक आदेश आयलाएच. चलू, उक्रास पुछेची. नेपत्ठ्यमे हुल्की दैप. सुत्रदार, ये महरानी इताओ. पहल पतनी, जे अबिनेत्री च्छत, प्रवेष करे च्छत. अबिनेत्री, तमसाइती कोन गब ल्हिल, अब वुडहारी में, आहा जवान जुहान पीकः बताह भिल चोडा, सबक सुजा प्रहसन कर चाहे ची. सुत्रदार, हा, बात्त सैएच, अबिनेत्री, तक्हन कुनो, जवान अबिनेत्री के लओ आउ, जे ईमोन लगा ककर्बो करत, आ, उक्रा मोनो लकते. सुत्रदार, हम तए आहिक सोजा करब, अबिनेत्री, उदोसर की आहाके इई सिक्धा कपतेने आच. सुत्रदार, चोडू अ गब, दूनू गोते राज दर्बार जायब, तक खुभे राज किय सम्मान बेटप. अबिनेत्री से बडखा बडखा गब चोडप्त अही सहेथ. सुत्रदार, हेत, मुदा, आहा, अपन अबिनैसद, दर्षक सब के असीम अन्दक सागर में दुमा देप. अबिनेत्री, प्रसन्द भोमाने आदरनिय महराचस अनुमति भेट गेल. सुत्रदार, हाँ. अबिनेत्री, तक्ञनेहन शुप समाचार देबाग बडला मे हम अहाके की पूरसकार दिया. सुत्रदार अहाक प्रसनते हमर पूरसकार भेल आर की चाही. अबिनेत्री तक्ञन को नाटक प्रस्तुत करबाक विचार एच. सुत्रदार, आही तख कहलो, आनन्द में मत करे बलाप्रहसन. अबीनेत्री, स्वगग जे किछ हम कहे ची, से उकर मून्सम मिल जाए चे, तहमर तमसेनाइ से उकर स्वबाविक लगे चे, प्रकत आई नातक सविज़ेई होई बला लेक्ध के चथ. सुत्रदार सुनुप्रिये को आन कियो नै आपन श्री महेंद्रवर माच्ठ, राजोग राजा जे काम, क्रोद, आहंकार, आए इर्खाय सब दूर्गुन के जीकने चैत जे सम चिथ चैत आप सादारन लोग सबखबीच उहना मिजजर बहुजाए चैत समपैत में कुबेर अ पराक्रम में अद्र के माथ करे चाइत अपन सहज व्यवार अ सक्शम शासन सा अपन राज्यक सुंदर संचालन करे चाइत पलडव वनशक मेरु परवत श्री विश्नुसी हक्पुत्र वहे महाराजा दी राज एही नाटकक लेक हक चाछती अब आप आप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अ� इसब्त्याइच जे कोनो मनुश्य अपन तपोबल सकोनो रूप दारन का सकेताइच मुदातु अपन व्रत्सर एक दम नव्रूप दारन का लेल ही मुक्ता करन्ज का चमकेत मुक सुंदर भों को मेथोड तोबर सुंदर ता शब्दसा वरनित नहीं भो सकेए देव सोमा नात अखन आहा नवरासा एना बजएच फीजेना हम मातली होई. कापालिक की कहलही प्रिये. देव सोमा नात समपुरन सन्सार लट्टुस का गूमी रहा लाएच. दर लागेत आएच जे खजस पडब, पकर लिया हम्रा. कापालिक खीक आएच प्रिये. वोर की ए बागी गेली ही की हम्रा सर रिसायल चही देव सोमा हा, सोम देवा रिसायल आएच चाहे मात नमा कविंति करी नहीं मानत कापालिक, तु सोम देवा चही ने एक शन् सोचे चआद कापालिक नहीं नहीं, तु देव सोमा चही बेव सोमा सब नाटा काएच अहा के सो

← Transcript index