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दीना_भदरी_आ_पाँच_मनक_कुदाइ.m4a
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- 0:00–0:30आयामर चर्चा दीना भद्रिक उईलोक कतापृर आची जाई में दूी मुसहर भाई, जालिम जमिन्दार सबदेच्छत्छतिं, आमरनो प्रान्त मजलुमक रक्षक बन जाई च्छत्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्�
- 0:30–0:34विस्त्रित अ दिमा द्रिष्य आची उ बहुत प्रभाव कारी आची
- 0:34–1:04मुदा कतया जंगल के दिश्षद हरी पूँचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचच
- 1:04–1:06वजन महसुस हेवाख चाही
- 1:06–1:09यक दम हम देखी रहल ची
- 1:09–1:12जे लेखख के तै की कोरे चाहक चाथथें
- 1:12–1:14मुदैता उहना भाएल
- 1:14–1:16जेना कोनो भभ बे नाटकक लेल
- 1:16–1:18एक ता पाइग मनच ची साजाल जाए
- 1:18–1:21दर सक्सास रोक के बैसल हो थें
- 1:21–1:24अन्तिम अंक के मात्र दस मिनेत में कहतम को देल जाए,
- 1:24–1:26की अहाक के नहीं लगेत अची,
- 1:26–1:28जे अवाक करवाक चकर में,
- 1:28–1:30ये ते पाथकक बाबना पाचा चुडगेल?
- 1:30–1:34इए अस्पष्त रूप से राखल गल अची अहाक दिस्सा.
- 1:34–1:36मुदा हम सोचे ची जे,
- 1:36–1:40अगरा जंगलक दूश्यमे आरो विस्तार सदेखा लिए जासके ची.
- 1:40–1:44अगरा जंगलक दूश्यमे आरो विस्तार सदेखा लिए ची.
- 1:44–1:47अगरा जंगलक दूश्यमे आरो विस्तार सदेखा लिए ची.
- 1:47–1:50अगरा जंगलक दूश्यमे आरो विस्तार सदेखा लिए ची.
- 1:50–1:54अग, बलक्कि पात्रक मान्सिक स्तिति में गोता लगाया वच्छी.
- 1:54–1:58अग, बिल्कुल, राजा सलहेस जे वचन अन्याय के भीच फसल चला,
- 1:58–2:01तक गतया जंगल अख जे सन्नाता आची,
- 2:01–2:04जते केवल चम्गाद्रक फ़भभडाट सूनी पडे तची,
- 2:04–2:09उही सन्नाता के हुनर मान आल्लाचारी संगे जोडल जासके तची.
- 2:09–2:13गती के दिमा करबाक आर्थ केवल पनाक संख्या बड़ायव नहीं आची
- 2:13–2:17बलकी पात्रक मान्सिक स्थिती में गोता लगायव आची
- 2:17–2:18एक दम सतीक
- 2:18–2:23आजकन मरुक परान्त जालिम जमिंदार सब के वदख के बात अवएत आचे
- 2:23–2:26तो उक्रा केवल नाम गिनाबग बदला
- 2:26–2:28हमरेक्ता कंक्रीट उदारा नी अची
- 2:28–2:31जे कोनो एक्ता जमिंदार संगे
- 2:31–2:33भेल संगर्स के निक्ता चोट
- 2:33–2:36मुदास्पस्त मनो वैग्यानिक दिर्स्सिम बबडलू
- 2:36–2:37आच्छा
- 2:37–2:39जना जुरावर सिंका प्रसंग लोलिो
- 2:39–2:40आच्छा
- 2:40–2:41के वली कही देव
- 2:41–2:46जो जो जो डावर सिंके मार दिलनी उत्बा प्रभाब कारी ने अची
- 2:46–2:52औही अद्रिष्ष्षक्तिर जे प्रभाब अची से पाट्को के बेसी मेंसु सेवाग चाही
- 2:52–2:54औही बात के आगो बड़ेत
- 2:54–2:55की हम कलपना कर सके ची
- 2:56–2:58जो जो डावर सिंक पन महल में सुतल अची
- 2:58–3:04आजानक चारो काथ से एक ता द्रष्ष्ग कुदाई जमीन पर तक तक करवा कवाज आवेला गगे ता चे.
- 3:04–3:08बापरे इत एक दम रोंगता ताड़ करे वाला द्रिष्ष बहुजाएत.
- 3:08–3:11आजामिन्दारोग मात्प पसीना आवी जाएत चे,
- 3:11–3:15उ आपन रक्षक सब के बज़ेत अचे मुगकोन भोतेक स्थ्रो सुजान ने आची
- 3:15–3:21इद्रष्षे पाट्षकक उई पारलोकी कुपस्तितिक सक्षात अनुबूद कर रवाइत
- 3:21–3:27एई सदिना भद्रिक सक्ती केवल शरिरिक ने बलकी क्होफ के रूप में स्तापे थेद
- 3:27–3:32आ, देखो, एही सब लेल लेखषें छोट-छोट-वागे का प्रेजोग चोडिका,
- 3:32–3:36वरननात्मक अदीमा वागे सन्जचना कुप्योग कराई परत.
- 3:36–3:40खेर, जकन हम पात्रक का मनूभि ज्यान परदियान देच्छी,
- 3:40–3:46तक हलनयक करूप में कनक्सिं अबिषेस रूप से बूधनीक चरीटर चित्रन प्रभाव कारी आची.
- 3:46–3:51मुदा अक्रा आरो मेसी बहु आयामी अज्जटिल बनायवाग अवष्खता आचे.
- 3:51–3:53इघमर दूसर मुख्य बिन्दू आची.
- 3:53–3:55सत्ति कहली आची.
- 3:55–4:05अथे कम्जोरी इए जी कत्था गतिक संगे आगुत बड़े तची, मुदा दुन्नो खलनायक पूरन रूपेन केवल क्रूर अग्धमन्दी दिखायल गेल चती.
- 4:05–4:12बूदनी जखन राजा सलहसक तपस्या करेता ची, बूजली आने उएक ता बहुत शक्तीशाली द्रूष्चे आची.
- 4:12–4:17मुदा अकर इजिद अतपस्याक पाचुक प्रेरना अस्पष्ट नई आची.
- 4:17–4:38अगर इक ता सामान्यक खलनायका बनादे ची बात, ता हमर सुजाव इए ची, जे खलनायक कप्रेरना, अगर जित के एक ता मजबुत वेचारिक आदार दीए जाए से नायक अखलनायक कर संगर्ष आरो परिपक्व बहुजाए.
- 4:38–5:08जाएदरी हम बूजीरा आईची, एठाम एटर्क अची, जे बूदनिक चरित्र क्रूरता कप्रती कची, मुदा आजा हम खलनायक के बेसी मानविय जतिलता वा वैचारिक आदार दिदेव, तक एकर खत्रा नहीं अची जे दीना भद्रिक शुद्द्था से पाथक के द्यान �
- 5:08–5:12अगर मोन के पाषु का मानसिक उतल पूतल श्पष्ट करू,
- 5:12–5:15जैना उई तपस्च्या केवल बदला लेवाकलेल नहीं,
- 5:15–5:20बलकी अपन् तुतल आगंकार केन फेर से स्तापित करवाकलेल करूलच्ट.
- 5:20–5:23अगर मोन के पाषू का मानसिक उतल पूतल श्पष्ट करू,
- 5:23–5:26यक्त समनान्तर रेखा क्रूप में दिखा सके चती.
- 5:26–5:30अकर मोन के पाजु का मानसिक उतल पूतल स्पष्ट करूँ.
- 5:30–5:33जैना औई तपस्या केवल बद्ला लेवाक लेल नहीं,
- 5:33–5:38बलकी अपन तुतल आगंकार ख्यन फेर से स्थापित करवाक लेल करोल अची.
- 5:38–5:43आँ, एक तव मज्दूर उनका मने एक तव समवन्ती रानिक के चुनाती दे सके ची,
- 5:43–5:46इबात उकर पूरा विश्वद्द्रुष्टी कोन के हिलाकर रकिदने आचे.
- 5:46–5:51एक दम सतीक, जखनो राजा सलहे समवर्दान मागगता ची,
- 5:51–5:55तो कर सम्वाद मात्र क्रोदख प्रकतिकरन नहीं है,
- 5:55–5:58उही ताम औई कही सकेता ची,
- 5:58–6:01जे जा इदोनो भाई जीवित रहें,
- 6:01–6:03तकाली सां कोनो मज्दूर हमर्खेत में
- 6:03–6:06मूडी जुका काज नहीं करत,
- 6:06–6:09इपुरा सामन्ती वेवस्ताक पतन आची.
- 6:09–6:14इवेचारी कादार अक्रा केवल एक्ता एब उश्यालु महला से उठाक,
- 6:14–6:17एक्ता एहन वेवस्ताक रक्षक बना देता ची,
- 6:17–6:20जे दीना भद्री के आगा बड़ाय नही देवे चाहता ची.
- 6:20–6:23इविरुदवावा सामागरी के बहुत गहाई देत.
- 6:23–6:32आजगन इदूनो विचार्दारा तक्राएता ची, तक्चन कता एकता सादारन लोग कता सावूथी का एकता महाकावे बनी जाएता ची.
- 6:32–6:36उकर दर वास्तविक ची सत्ता कोई बाग्दर.
- 6:36–6:40आजगन हम सत्ता अस्संगर्सक विचार्दाराग गब कर अची,
- 6:40–6:44तो उ स्वबहाविक रूप सा उही प्रतिक दिस्लो जायत जी
- 6:44–6:47जे एही संगर्स के बहातिक रूप दित जी
- 6:47–6:52कताक श्वर्वात में पाज्मनक कुदाएक जे ससक्त प्रतिक स्थापित केल गेल जी
- 6:52–6:56उ अन्तिम लिस्साद हरी पहुचेद पहुचेद भिस्रा देल गेल जी
- 7:10–7:20अदनुक तीरक प्रुएद ख़ाएच छती आमनो प्रान्तक गटना में से हो उही कुदाएग कोनो भिषेश महत्ट नहीं देखाल गेल आची.
- 7:20–7:24इग कताएग मुल निरन्तरता के बहुत खम्जोर कर आची.
- 7:24–7:28इग्त्थाक मुल निरन्तरताके बहुत कमजोर करेताची
- 7:28–7:30तहम्म्मर द्रज सुजाव अची,
- 7:30–7:35जे कुदाएक प्रतीके पूरी कताक केंद्र बिन्दु बनाई राख हो,
- 7:35–7:40अंत दरी उक्रा हुंकर पहचान अन्न्याय के हत्यारक रुप में उप्योग करू।
- 7:40–7:48इक दम जाही दरी हम भूजी रहल ची एज समग गरीक एक तप्रमुक विशै इग लागत ची जे श्रम ही सकती इची.
- 7:48–7:52मुदा अंते में कुदाई चोड देव उहिना लागत ची,
- 7:52–7:56जिना कोनो महान योद्धा आपन अंतिम लडाये में
- 7:56–7:58आपन मुख्य आस्टर ग़ब पर चोडगर आभी जाए.
- 7:58–8:03औही बात के आगु बड़ाविद की हम एही पर विचार कर सके ची
- 8:03–8:07जे शिकार जका काज में कुदाएक उप्योख स्वबहाविक नहीं लगे तची
- 8:07–8:18एकर समभावित सीमा एब हा सके तची, जे दनुक तीर शिकार के लेल तारके कची, जकन की कुदाए से जान्वर के मारव रव रव सास्पड लागी सके चे.
- 8:18–8:25आ, एक ये तक बहुत नीक छुनोती एची, मुदा एकरा स्रिजनात्मक द्हंष समादान के तची.
- 8:25–8:30उदाहरनक लेल लेखक एक रा कोनो हास्यास्पत द्रिस्च्यसा नहीं
- 8:30–8:35बलकी उही कुदाएक प्राक्रतिक वजन अदीना भद्रिक भाहु भल्स देखा सके चतिन
- 8:35–8:37अच्छा उकाना
- 8:37–8:41कल्पना करू जे सिकारक समय जंगल में उदनुक के बडला
- 8:41–8:44अपन उही पाज मनक कुदाएके
- 8:44–8:46जोर सब वुयापर प्रहार करए च्छतिन
- 8:47–8:49उही कुदाएक जमीन से तक्रावै देरी
- 8:49–8:51एक ता एहन कमपन पैदा होए तची
- 8:51–8:54जेना चोट मोट भूकम आभी गेल होए
- 8:54–8:57बाप्रे, इत बहुत गजजब दिश्ष भैजाएत
- 8:57–9:01उही कमपन्से जंगलक जान्वर दरी का बाहर आभी जाईतची
- 9:01–9:03अशिका रासान भाजाईतची
- 9:03–9:06आई, एक दम, एसा इप रमानित होईतचे
- 9:06–9:09जे हुंका कुनो दोसर आस्त्र आवस्सक्ता नही आची
- 9:09–9:11हुंकर जी मूल आस्त्र आची
- 9:11–9:41तब उद्दाए एक तद्दाए तद्दाए तद्दाए तद्दाए तद्दाए तद्दाए तद्दाए तद्दाए तद्दाए तद्दाए तद्दाए तद्दाए तद्दाए तद्दाए तद्दाए तद्दाए तद्दाए तद्दाए तद्दाए तद्दाए तद्�
- 9:41–9:45ज़न आपहीने जोरावर सिंवाला उदाहरन देलू,
- 9:45–9:50उआद्दिश कुदाएक प्रहार कगुज सव अथ्याचारी के दरेबाक दिशर अचू,
- 9:50–9:56जे देखावे जे हुनकर श्रम अब पुरन रूपेन नयायकर हत्यार बनी गेल अचे.
- 9:56–10:09जगन जालिम जमिन्दार रातिक अंदार में चुपल चिहे उक्रा केवल कुदाई कमाटी पर खसबक आवाज सूनी पडी रहल आची, तो अवाज उकर अंदरात्मा के चीरी देत ची.
- 10:09–10:13इग कुदाई अन्याई कोडबाक आमुर्थ अजार बनी जाईत ची.
- 10:13–10:14एक दम.
- 10:14–10:21तजगन हम यी सब बदलाउ करे ची गती के दीमा कग क, पात्र के मनो विध्यान में प्रवेश करब,
- 10:21–10:26बूदिनिजका खलनाएका के एक्ता मस्वूथ वैचारिक आदार देव
- 10:26–10:29अ पाच मनक कुदाई के शुरुस अंत दरी
- 10:29–10:32एक ता अटूट प्रतीकक रूप में स्तापित करव,
- 10:32–10:35ता इसामगरी बहुत आगु बडईजात.
- 10:35–10:40अग, संख्शेप में इचर्चा आही तींटा मुख्धे काजबर कींद्रत अची.
- 10:40–10:44लेखकके इस सुनिष्चित करबाखचा ही जे कताक उतराव्द में,
- 10:44–10:50बहावुकता की गेराई नहीं चुटे, कलनाएक कर्म के पाछुक तर्क यतार्थ्वादी होई,
- 10:50–10:53अग कुदाई के प्रतिक अंत दरी महत्व पुन राख हल जाए.
- 10:53–10:57बिल्कुल, जखन यी सब गप एक संगे अबेत अची,
- 10:57–11:01तखन यी समगरी एक ता उतक्रिष्ट महा काव्यक रूप लोले तची.
- 11:01–11:05आहासा अग्रोच, जे यी रचनात्मक सुदार केलाक बाद,
- 11:05–11:09आप आद आपन इसामगरी फेर सा फमरा लोकनिक लग पठाव.
- 11:09–11:12रमर सबख के एही पर और विचार करे में खुषी हेत.
- 11:12–11:14सुन्बाकले धननेवाद.
Plain text
आयामर चर्चा दीना भद्रिक उईलोक कतापृर आची जाई में दूी मुसहर भाई, जालिम जमिन्दार सबदेच्छत्छतिं, आमरनो प्रान्त मजलुमक रक्षक बन जाई च्छत्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्� विस्त्रित अ दिमा द्रिष्य आची उ बहुत प्रभाव कारी आची मुदा कतया जंगल के दिश्षद हरी पूँचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचच वजन महसुस हेवाख चाही यक दम हम देखी रहल ची जे लेखख के तै की कोरे चाहक चाथथें मुदैता उहना भाएल जेना कोनो भभ बे नाटकक लेल एक ता पाइग मनच ची साजाल जाए दर सक्सास रोक के बैसल हो थें अन्तिम अंक के मात्र दस मिनेत में कहतम को देल जाए, की अहाक के नहीं लगेत अची, जे अवाक करवाक चकर में, ये ते पाथकक बाबना पाचा चुडगेल? इए अस्पष्त रूप से राखल गल अची अहाक दिस्सा. मुदा हम सोचे ची जे, अगरा जंगलक दूश्यमे आरो विस्तार सदेखा लिए जासके ची. अगरा जंगलक दूश्यमे आरो विस्तार सदेखा लिए ची. अगरा जंगलक दूश्यमे आरो विस्तार सदेखा लिए ची. अगरा जंगलक दूश्यमे आरो विस्तार सदेखा लिए ची. अग, बलक्कि पात्रक मान्सिक स्तिति में गोता लगाया वच्छी. अग, बिल्कुल, राजा सलहेस जे वचन अन्याय के भीच फसल चला, तक गतया जंगल अख जे सन्नाता आची, जते केवल चम्गाद्रक फ़भभडाट सूनी पडे तची, उही सन्नाता के हुनर मान आल्लाचारी संगे जोडल जासके तची. गती के दिमा करबाक आर्थ केवल पनाक संख्या बड़ायव नहीं आची बलकी पात्रक मान्सिक स्थिती में गोता लगायव आची एक दम सतीक आजकन मरुक परान्त जालिम जमिंदार सब के वदख के बात अवएत आचे तो उक्रा केवल नाम गिनाबग बदला हमरेक्ता कंक्रीट उदारा नी अची जे कोनो एक्ता जमिंदार संगे भेल संगर्स के निक्ता चोट मुदास्पस्त मनो वैग्यानिक दिर्स्सिम बबडलू आच्छा जना जुरावर सिंका प्रसंग लोलिो आच्छा के वली कही देव जो जो जो डावर सिंके मार दिलनी उत्बा प्रभाब कारी ने अची औही अद्रिष्ष्षक्तिर जे प्रभाब अची से पाट्को के बेसी मेंसु सेवाग चाही औही बात के आगो बड़ेत की हम कलपना कर सके ची जो जो डावर सिंक पन महल में सुतल अची आजानक चारो काथ से एक ता द्रष्ष्ग कुदाई जमीन पर तक तक करवा कवाज आवेला गगे ता चे. बापरे इत एक दम रोंगता ताड़ करे वाला द्रिष्ष बहुजाएत. आजामिन्दारोग मात्प पसीना आवी जाएत चे, उ आपन रक्षक सब के बज़ेत अचे मुगकोन भोतेक स्थ्रो सुजान ने आची इद्रष्षे पाट्षकक उई पारलोकी कुपस्तितिक सक्षात अनुबूद कर रवाइत एई सदिना भद्रिक सक्ती केवल शरिरिक ने बलकी क्होफ के रूप में स्तापे थेद आ, देखो, एही सब लेल लेखषें छोट-छोट-वागे का प्रेजोग चोडिका, वरननात्मक अदीमा वागे सन्जचना कुप्योग कराई परत. खेर, जकन हम पात्रक का मनूभि ज्यान परदियान देच्छी, तक हलनयक करूप में कनक्सिं अबिषेस रूप से बूधनीक चरीटर चित्रन प्रभाव कारी आची. मुदा अक्रा आरो मेसी बहु आयामी अज्जटिल बनायवाग अवष्खता आचे. इघमर दूसर मुख्य बिन्दू आची. सत्ति कहली आची. अथे कम्जोरी इए जी कत्था गतिक संगे आगुत बड़े तची, मुदा दुन्नो खलनायक पूरन रूपेन केवल क्रूर अग्धमन्दी दिखायल गेल चती. बूदनी जखन राजा सलहसक तपस्या करेता ची, बूजली आने उएक ता बहुत शक्तीशाली द्रूष्चे आची. मुदा अकर इजिद अतपस्याक पाचुक प्रेरना अस्पष्ट नई आची. अगर इक ता सामान्यक खलनायका बनादे ची बात, ता हमर सुजाव इए ची, जे खलनायक कप्रेरना, अगर जित के एक ता मजबुत वेचारिक आदार दीए जाए से नायक अखलनायक कर संगर्ष आरो परिपक्व बहुजाए. जाएदरी हम बूजीरा आईची, एठाम एटर्क अची, जे बूदनिक चरित्र क्रूरता कप्रती कची, मुदा आजा हम खलनायक के बेसी मानविय जतिलता वा वैचारिक आदार दिदेव, तक एकर खत्रा नहीं अची जे दीना भद्रिक शुद्द्था से पाथक के द्यान � अगर मोन के पाषु का मानसिक उतल पूतल श्पष्ट करू, जैना उई तपस्च्या केवल बदला लेवाकलेल नहीं, बलकी अपन् तुतल आगंकार केन फेर से स्तापित करवाकलेल करूलच्ट. अगर मोन के पाषू का मानसिक उतल पूतल श्पष्ट करू, यक्त समनान्तर रेखा क्रूप में दिखा सके चती. अकर मोन के पाजु का मानसिक उतल पूतल स्पष्ट करूँ. जैना औई तपस्या केवल बद्ला लेवाक लेल नहीं, बलकी अपन तुतल आगंकार ख्यन फेर से स्थापित करवाक लेल करोल अची. आँ, एक तव मज्दूर उनका मने एक तव समवन्ती रानिक के चुनाती दे सके ची, इबात उकर पूरा विश्वद्द्रुष्टी कोन के हिलाकर रकिदने आचे. एक दम सतीक, जखनो राजा सलहे समवर्दान मागगता ची, तो कर सम्वाद मात्र क्रोदख प्रकतिकरन नहीं है, उही ताम औई कही सकेता ची, जे जा इदोनो भाई जीवित रहें, तकाली सां कोनो मज्दूर हमर्खेत में मूडी जुका काज नहीं करत, इपुरा सामन्ती वेवस्ताक पतन आची. इवेचारी कादार अक्रा केवल एक्ता एब उश्यालु महला से उठाक, एक्ता एहन वेवस्ताक रक्षक बना देता ची, जे दीना भद्री के आगा बड़ाय नही देवे चाहता ची. इविरुदवावा सामागरी के बहुत गहाई देत. आजगन इदूनो विचार्दारा तक्राएता ची, तक्चन कता एकता सादारन लोग कता सावूथी का एकता महाकावे बनी जाएता ची. उकर दर वास्तविक ची सत्ता कोई बाग्दर. आजगन हम सत्ता अस्संगर्सक विचार्दाराग गब कर अची, तो उ स्वबहाविक रूप सा उही प्रतिक दिस्लो जायत जी जे एही संगर्स के बहातिक रूप दित जी कताक श्वर्वात में पाज्मनक कुदाएक जे ससक्त प्रतिक स्थापित केल गेल जी उ अन्तिम लिस्साद हरी पहुचेद पहुचेद भिस्रा देल गेल जी अदनुक तीरक प्रुएद ख़ाएच छती आमनो प्रान्तक गटना में से हो उही कुदाएग कोनो भिषेश महत्ट नहीं देखाल गेल आची. इग कताएग मुल निरन्तरता के बहुत खम्जोर कर आची. इग्त्थाक मुल निरन्तरताके बहुत कमजोर करेताची तहम्म्मर द्रज सुजाव अची, जे कुदाएक प्रतीके पूरी कताक केंद्र बिन्दु बनाई राख हो, अंत दरी उक्रा हुंकर पहचान अन्न्याय के हत्यारक रुप में उप्योग करू। इक दम जाही दरी हम भूजी रहल ची एज समग गरीक एक तप्रमुक विशै इग लागत ची जे श्रम ही सकती इची. मुदा अंते में कुदाई चोड देव उहिना लागत ची, जिना कोनो महान योद्धा आपन अंतिम लडाये में आपन मुख्य आस्टर ग़ब पर चोडगर आभी जाए. औही बात के आगु बड़ाविद की हम एही पर विचार कर सके ची जे शिकार जका काज में कुदाएक उप्योख स्वबहाविक नहीं लगे तची एकर समभावित सीमा एब हा सके तची, जे दनुक तीर शिकार के लेल तारके कची, जकन की कुदाए से जान्वर के मारव रव रव सास्पड लागी सके चे. आ, एक ये तक बहुत नीक छुनोती एची, मुदा एकरा स्रिजनात्मक द्हंष समादान के तची. उदाहरनक लेल लेखक एक रा कोनो हास्यास्पत द्रिस्च्यसा नहीं बलकी उही कुदाएक प्राक्रतिक वजन अदीना भद्रिक भाहु भल्स देखा सके चतिन अच्छा उकाना कल्पना करू जे सिकारक समय जंगल में उदनुक के बडला अपन उही पाज मनक कुदाएके जोर सब वुयापर प्रहार करए च्छतिन उही कुदाएक जमीन से तक्रावै देरी एक ता एहन कमपन पैदा होए तची जेना चोट मोट भूकम आभी गेल होए बाप्रे, इत बहुत गजजब दिश्ष भैजाएत उही कमपन्से जंगलक जान्वर दरी का बाहर आभी जाईतची अशिका रासान भाजाईतची आई, एक दम, एसा इप रमानित होईतचे जे हुंका कुनो दोसर आस्त्र आवस्सक्ता नही आची हुंकर जी मूल आस्त्र आची तब उद्दाए एक तद्दाए तद्दाए तद्दाए तद्दाए तद्दाए तद्दाए तद्दाए तद्दाए तद्दाए तद्दाए तद्दाए तद्दाए तद्दाए तद्दाए तद्दाए तद्दाए तद्दाए तद्दाए तद्दाए तद्दाए तद्� ज़न आपहीने जोरावर सिंवाला उदाहरन देलू, उआद्दिश कुदाएक प्रहार कगुज सव अथ्याचारी के दरेबाक दिशर अचू, जे देखावे जे हुनकर श्रम अब पुरन रूपेन नयायकर हत्यार बनी गेल अचे. जगन जालिम जमिन्दार रातिक अंदार में चुपल चिहे उक्रा केवल कुदाई कमाटी पर खसबक आवाज सूनी पडी रहल आची, तो अवाज उकर अंदरात्मा के चीरी देत ची. इग कुदाई अन्याई कोडबाक आमुर्थ अजार बनी जाईत ची. एक दम. तजगन हम यी सब बदलाउ करे ची गती के दीमा कग क, पात्र के मनो विध्यान में प्रवेश करब, बूदिनिजका खलनाएका के एक्ता मस्वूथ वैचारिक आदार देव अ पाच मनक कुदाई के शुरुस अंत दरी एक ता अटूट प्रतीकक रूप में स्तापित करव, ता इसामगरी बहुत आगु बडईजात. अग, संख्शेप में इचर्चा आही तींटा मुख्धे काजबर कींद्रत अची. लेखकके इस सुनिष्चित करबाखचा ही जे कताक उतराव्द में, बहावुकता की गेराई नहीं चुटे, कलनाएक कर्म के पाछुक तर्क यतार्थ्वादी होई, अग कुदाई के प्रतिक अंत दरी महत्व पुन राख हल जाए. बिल्कुल, जखन यी सब गप एक संगे अबेत अची, तखन यी समगरी एक ता उतक्रिष्ट महा काव्यक रूप लोले तची. आहासा अग्रोच, जे यी रचनात्मक सुदार केलाक बाद, आप आद आपन इसामगरी फेर सा फमरा लोकनिक लग पठाव. रमर सबख के एही पर और विचार करे में खुषी हेत. सुन्बाकले धननेवाद.