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दीना-भदरी__शक्ति_और_छल_की_कथा.mp4

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Part 6 · VIDEHA MITHILA MAITHILI DISCUSSION CRITICISM SERIES PART 6
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  1. 0:00–0:10नमस्ते, आजके स्खास कता विष्लेषन में, चलिये सीदे नेपाल के मिथलाक शेत्र की उन जड़ो में गोता लगाते हैं, जहांकी कहानिो में आज भी इक अलगी गुँज है.
  2. 0:10–0:15सुच्ये, एक अजी कहानी के बारे में जो किसी भव्या महल के राजा रानिो की नहीं है.
  3. 0:15–0:19ये उन दो मुसहर भायों दीना और भदरी की गाता है,
  4. 0:19–0:22जिनके पावडे की ताप आज भी वहां की द्रती मेंसुस करती है.
  5. 0:22–0:26ये वो महनत कषकिसान ते जिनकी बाहो में इतनी भेताहाशा ताकत ती,
  6. 0:26–0:29कि उने देकर खुद कथोर द्रती भी नरम पचाती थी.
  7. 0:29–0:37च्छलिये समच्त्ते हैं के कैसे इस आसीम शक्ती, वर्ग भेद और च्ल के भीच एक बेहत खोफनाक ताना बाना बूना गया.
  8. 0:37–0:41यहां दिखरे इस बेहत खुपसुरत और जीवन्त मितला कला शेली को दिखिए.
  9. 0:41–0:46ये हमे सीदे जोगी आनगर की उस दून्या में लेजाती है, जहां ये पूरी खटना गडी.
  10. 0:46–0:50ये हमे उस सांसक्रतिक परीवेश्ष्छे जोडती है, जहां जीवन सादारन तो ता,
  11. 0:50–0:53लेकिन उस में अलक तरे की भववेता थी.
  12. 0:53–0:56यहां कोई दन्दूलत्या बडी बडी जागीरे दही दही दही
  13. 0:56–0:59बलकी यहां के लोगो की आस्ली समपत्ती उनका अपना शरीर
  14. 0:59–1:01और उनकी अपार महनत थी.
  15. 1:01–1:03ये समजना बहुत दिल्चस्त है,
  16. 1:03–1:05कि दीना और भद्री की वो ताकत
  17. 1:05–1:07यसी यूध्द के मेडान के ले नहीं बनी दिए,
  18. 1:07–1:09बलकी वो तो पूरी तरह से मिट्टी
  19. 1:09–1:11और इन खितो कि लिए ही थी.
  20. 1:11–1:13बाग एक जोगी आनगर के नायक
  21. 1:13–1:15मिट्टी के दो बेटे.
  22. 1:15–1:17अब ये जो संख्या पाच है ना
  23. 1:17–1:19ये कोई सादारन नमबर नहीं है.
  24. 1:19–1:23ये उन भाईयों की पारानेक और अविश्वसनी ये शक्ती का एक दं सीदा सुबूत है.
  25. 1:23–1:28श्रोद बताते हैं कि दीना और भद्री दोनो में से हरेग भाई दियान दीजेगा,
  26. 1:28–1:30पूरे पाच मन का बारी भरकं फावडा इस्तमाल करता था.
  27. 1:30–1:36पाच मन, मतलप कोई आम अँईन्सान अगर उठाने की जरासी कोशिष भी कर लें तोसका कंदाई तुट जैए.
  28. 1:36–1:39लेकि न दोनो के हातो में विखावडे किसी खिलोने कितरा नाचते ते.
  29. 1:39–1:43सूरा जुगने के साथ वो खितो में उतरते थे और शाम हुते हुते,
  30. 1:43–1:51वे दोनो मिलकर पूरे एक भीगा जमीन जोथ डालते थे, बस एक ही दिन में, उनकी बाहो में सच्छ में एक पूँँड विखसित बैल जैसी ताकत थी.
  31. 1:51–1:56यही पर एक बहुत गह्राट तक्राव सामने आता है, जो यस पूरी कहानी का मूल है.
  32. 1:56–2:02जब दीना के बूडि मा उनके हातो के चाले देकर पूछती थी के वे इतनी कडी महनत आकर क्यों करते हैं
  33. 2:02–2:05तो दीना का जवाब होता था कि दर्ती भी हमारी माः है
  34. 2:05–2:09और मा की सेवा करने में भला कोई कैसे तख सकता है
  35. 2:09–2:11ये उनके लिए उनका सच्चा दरम ता
  36. 2:11–2:20लेकिन, सिक्के का दुस्रा पहलूभी है, पडोसी गाउजजंजार का जमींदार कनक्सिं, इस अपार सक्ती को बिलकुल अलग नजरये से दिकता था.
  37. 2:20–2:22उसे इस में कोई दरम नहीं दिकता था
  38. 2:22–2:26बलकी उसे तो बस अपने केतो की उपच दोगनी करने के लिए
  39. 2:26–2:28तो बहत्रीन भेल नजर आते थे
  40. 2:28–2:31अन्सान को महез एक समपती समजने की ये मान्सिकता
  41. 2:31–2:33वाखगी हेरान करने वाली है
  42. 2:33–2:36बाग दो जमींदार का लालगच
  43. 2:36–3:06जजगयनगर के यहन बहेत सादारन विनम्रग़ों और जजजजजजजजजजजजजजजजजजजजजजजजजजजजजजजजजजजजजजजजजजजजजजजजजजजजजजजजजजजजजजजजजजजजजजजजजजजजजजजजजजजजजजजजज
  44. 3:06–3:11बाग्तीन एक खतरनाग तबस्या देवता को बान्दना
  45. 3:11–3:16अब इस कता का सबसे दिल्चस्प और खतरनाग सांस्क्रितिक नियम समजीए
  46. 3:16–3:17तबस्या
  47. 3:17–3:20अखसर माना जाता है कि तबस्या एक पवित्र काम है
  48. 3:20–3:24लेकिन ये समझना बहुत जरूरी है कि यहां तबस्या कभी भी
  49. 3:24–3:25अभी भी तपस्वी की नियत
  50. 3:26–3:28या उसके नैधिक अरादे को नहीं देकती
  51. 3:28–3:30वो स्व्व करम की कथोर्था को देकती है.
  52. 3:30–3:32अगर कोई बेहत करूर अन्सान भी
  53. 3:32–3:34अपने संकल्प पर अडिग हो जाए
  54. 3:35–3:36तो वो देविये शक्तियो को बान सकता है.
  55. 3:37–3:38और बलकुल यही हूँँ
  56. 3:38–3:42जमींदार की पतने भुदनी के इस दूष्ट, लेकेन अटल संकलप ने,
  57. 3:42–3:45राजा सलेज जैसे रक्षक देवता को भी बान दिया.
  58. 3:45–3:48सुच्टिये, एक देवता जो रक्षा करने किले ता,
  59. 3:48–3:51वो अब एक अनिच्छुग जलाद बनने को मजबोर हुए आ ता.
  60. 3:51–3:56बाग चार देवता का जाल जंगल से एक बुलावा
  61. 3:56–4:01और फिर अगली सुभे उस खोफनाक और अग्यात यात्रा की श्र्वात हूँई
  62. 4:01–4:05दीना ने अपनी मा निरसों से कहा कि ये राजा सलहेश का बुलावा है
  63. 4:05–4:09अब माग का दिमाग तमान गया, लेकिन एक माग का दिल,
  64. 4:09–4:12उग़े ख़ाँ बाग पाच शान्त जंगल अंटका अप्षकून
  65. 4:13–4:15जंगल इतना शान्त कियो है बच्छों
  66. 4:15–4:18एक शान्त जंगल कोई अच्छा शगुन नहीं है
  67. 4:18–4:20चाचा बहुरन के मुझे निकले ये शब्द
  68. 4:20–4:22इस पूरी कता अच्छा प्छुन
  69. 4:22–4:27अब ये चार लोग ते, जो जगने और रहस्समें जंगल की गेरायो में उतर रहे थे.
  70. 4:27–4:31बाग पाच शान्त जंगल अंतका अप्षकून
  71. 4:31–4:36जंगल इतना शान्त कियो है बच्छों, एक शान्त जंगल कोई अच्छा शगून नही है?
  72. 4:36–4:41चाचा बहुरन के मुसे निकले ये शब्द, इस पूरी कता के सबसे तनावपूरनक शनो मेसे एक है.
  73. 4:41–4:45उनके अनुभवी दिमाग ने तुरनतिस खत्रे को बहाप लिया था.
  74. 4:45–4:50कुकी एक शिकारी के लिए, जंगल की एक खामोषी सबसे बड़ा अप्षगून होती है.
  75. 4:50–4:56लेकिन, कहा जाता है ना कि जिन पैरों को किसी देवियज्याल ने जकर लिया हो, वो कभी पीचे नहीं मुड़े.
  76. 4:56–5:00वे बस यही सुचते रहे कि शिकार आगे मिलेगा. और वे आगे बड़ते गय.
  77. 5:00–5:04और दिरे दिरे उस रहस्यमए जंगल ने उने पूरी तरह से निगल लिया.
  78. 5:04–5:08बाख चे दुखद अंट शक्ती पर चल की जीत
  79. 5:08–5:12यहा बुदनी की चतुराई देखिये, वो बहत अच्छी तरा जानती फी,
  80. 5:12–5:15की दीना और भदरी जैसे नाएको की आखें
  81. 5:15–5:20अब आप बज़नाग जान्वर शीदे सामने आता तो वो एक पल में उसे मार गिराते.
  82. 5:20–5:25इसी लिए ये पुरा जाल बिलकुल मासुमयत के आवरन में बुना गया.
  83. 5:25–5:27विल्कुल मासुम्यत के आव्रन में बूना गया.
  84. 5:28–5:30वो खुंकार रूप बडलने वाली बागिन
  85. 5:30–5:35एक छोटे से बिल्कुल मासुम भाख्ता पक्षी का रूप दरकर उनके करीभाई.
  86. 5:35–5:42ये एक अईसा दोका था, जिसने उनकी उस पोरानिक और अभेद्द्दे रक्षापंकती को बड़ी ही आसानी से भेद्द दिया.
  87. 5:42–5:48और जैसे ही वो मासुम सा दिखने वला पकषी उन शूर्वीरो के बिलकुल करी पूचा,
  88. 5:48–6:18उस्ट्टाकत्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्
  89. 6:18–6:20कि उनके दोनो बवतीजे मारे जा चुके हैं.
  90. 6:20–6:22सदमे में उस बूडे अन्सान के हाथो से
  91. 6:22–6:24दनुश वही चुटकर गिर पडा.
  92. 6:24–6:27अन्त में वो वफ़दार मित्रज जितन यादवी था
  93. 6:27–6:31जिसने अपनी दोस्ती का सबसे कठेन और अन्तिम फर्ज निभाया
  94. 6:31–6:33उसने वही बेटकर आसु नहीं बहाई,
  95. 6:33–6:36बलकी उन दोनो शूर्वीरों के शरीर को उठाया
  96. 6:36–6:39और शादकर्म किलिये उने वापस उनके गर तक ले गया.
  97. 6:39–6:41ये वाखई एक गेरे सद्मेक अक्षन ता.
  98. 6:41–6:45इस विश्लेशन के अंथ में एक बहुत ही गभ्रा सबाल ज़हन में आता है.
  99. 6:45–6:48ये लोग कता सर्फ दो भहईगे कहानी नहीं है,
  100. 6:48–6:53बलकी ये वर्ख शोषन, अभिमान और शकती के दूरुप्योग का एक आईना है.
  101. 6:53–6:58आखिर आज़ा क्यों है कि इतिहास और किव्दन्तियो में जो नायक मिट्टी से उट्टे हैं,
  102. 6:58–7:01जिनकि ताकत बिलकुल भेदाग और पवित्र होती है,
  103. 7:01–7:04उनका अंत अकसर किसी सम्मान जनक युध्ध में नहीं,
  104. 7:04–7:07बलकि आज़े विश्वास गात और चल से होता है,
  105. 7:07–7:09जिसे बचाही नहीं जासकता.
  106. 7:09–7:11ये कहानी आज भी हमें याध दिलाती है,
  107. 7:11–7:14कि जब ताकत का सामना क्रुरता और दोके से हो,
  108. 7:14–7:18तो सबसे मजबुत नायक भी कैसे कमजूर पड़ जाते हैं.
  109. 7:18–7:21सोचने पर मजबोर कर देने वाले इसी विचार के साथ,
  110. 7:21–7:23अमारा ये कत्ठा विश्लेशन यही समपन हुता है

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नमस्ते, आजके स्खास कता विष्लेषन में, चलिये सीदे नेपाल के मिथलाक शेत्र की उन जड़ो में गोता लगाते हैं, जहांकी कहानिो में आज भी इक अलगी गुँज है. सुच्ये, एक अजी कहानी के बारे में जो किसी भव्या महल के राजा रानिो की नहीं है. ये उन दो मुसहर भायों दीना और भदरी की गाता है, जिनके पावडे की ताप आज भी वहां की द्रती मेंसुस करती है. ये वो महनत कषकिसान ते जिनकी बाहो में इतनी भेताहाशा ताकत ती, कि उने देकर खुद कथोर द्रती भी नरम पचाती थी. च्छलिये समच्त्ते हैं के कैसे इस आसीम शक्ती, वर्ग भेद और च्ल के भीच एक बेहत खोफनाक ताना बाना बूना गया. यहां दिखरे इस बेहत खुपसुरत और जीवन्त मितला कला शेली को दिखिए. ये हमे सीदे जोगी आनगर की उस दून्या में लेजाती है, जहां ये पूरी खटना गडी. ये हमे उस सांसक्रतिक परीवेश्ष्छे जोडती है, जहां जीवन सादारन तो ता, लेकिन उस में अलक तरे की भववेता थी. यहां कोई दन्दूलत्या बडी बडी जागीरे दही दही दही बलकी यहां के लोगो की आस्ली समपत्ती उनका अपना शरीर और उनकी अपार महनत थी. ये समजना बहुत दिल्चस्त है, कि दीना और भद्री की वो ताकत यसी यूध्द के मेडान के ले नहीं बनी दिए, बलकी वो तो पूरी तरह से मिट्टी और इन खितो कि लिए ही थी. बाग एक जोगी आनगर के नायक मिट्टी के दो बेटे. अब ये जो संख्या पाच है ना ये कोई सादारन नमबर नहीं है. ये उन भाईयों की पारानेक और अविश्वसनी ये शक्ती का एक दं सीदा सुबूत है. श्रोद बताते हैं कि दीना और भद्री दोनो में से हरेग भाई दियान दीजेगा, पूरे पाच मन का बारी भरकं फावडा इस्तमाल करता था. पाच मन, मतलप कोई आम अँईन्सान अगर उठाने की जरासी कोशिष भी कर लें तोसका कंदाई तुट जैए. लेकि न दोनो के हातो में विखावडे किसी खिलोने कितरा नाचते ते. सूरा जुगने के साथ वो खितो में उतरते थे और शाम हुते हुते, वे दोनो मिलकर पूरे एक भीगा जमीन जोथ डालते थे, बस एक ही दिन में, उनकी बाहो में सच्छ में एक पूँँड विखसित बैल जैसी ताकत थी. यही पर एक बहुत गह्राट तक्राव सामने आता है, जो यस पूरी कहानी का मूल है. जब दीना के बूडि मा उनके हातो के चाले देकर पूछती थी के वे इतनी कडी महनत आकर क्यों करते हैं तो दीना का जवाब होता था कि दर्ती भी हमारी माः है और मा की सेवा करने में भला कोई कैसे तख सकता है ये उनके लिए उनका सच्चा दरम ता लेकिन, सिक्के का दुस्रा पहलूभी है, पडोसी गाउजजंजार का जमींदार कनक्सिं, इस अपार सक्ती को बिलकुल अलग नजरये से दिकता था. उसे इस में कोई दरम नहीं दिकता था बलकी उसे तो बस अपने केतो की उपच दोगनी करने के लिए तो बहत्रीन भेल नजर आते थे अन्सान को महез एक समपती समजने की ये मान्सिकता वाखगी हेरान करने वाली है बाग दो जमींदार का लालगच जजगयनगर के यहन बहेत सादारन विनम्रग़ों और जजजजजजजजजजजजजजजजजजजजजजजजजजजजजजजजजजजजजजजजजजजजजजजजजजजजजजजजजजजजजजजजजजजजजजजजजजजजजजजजजजजजजजजजज बाग्तीन एक खतरनाग तबस्या देवता को बान्दना अब इस कता का सबसे दिल्चस्प और खतरनाग सांस्क्रितिक नियम समजीए तबस्या अखसर माना जाता है कि तबस्या एक पवित्र काम है लेकिन ये समझना बहुत जरूरी है कि यहां तबस्या कभी भी अभी भी तपस्वी की नियत या उसके नैधिक अरादे को नहीं देकती वो स्व्व करम की कथोर्था को देकती है. अगर कोई बेहत करूर अन्सान भी अपने संकल्प पर अडिग हो जाए तो वो देविये शक्तियो को बान सकता है. और बलकुल यही हूँँ जमींदार की पतने भुदनी के इस दूष्ट, लेकेन अटल संकलप ने, राजा सलेज जैसे रक्षक देवता को भी बान दिया. सुच्टिये, एक देवता जो रक्षा करने किले ता, वो अब एक अनिच्छुग जलाद बनने को मजबोर हुए आ ता. बाग चार देवता का जाल जंगल से एक बुलावा और फिर अगली सुभे उस खोफनाक और अग्यात यात्रा की श्र्वात हूँई दीना ने अपनी मा निरसों से कहा कि ये राजा सलहेश का बुलावा है अब माग का दिमाग तमान गया, लेकिन एक माग का दिल, उग़े ख़ाँ बाग पाच शान्त जंगल अंटका अप्षकून जंगल इतना शान्त कियो है बच्छों एक शान्त जंगल कोई अच्छा शगुन नहीं है चाचा बहुरन के मुझे निकले ये शब्द इस पूरी कता अच्छा प्छुन अब ये चार लोग ते, जो जगने और रहस्समें जंगल की गेरायो में उतर रहे थे. बाग पाच शान्त जंगल अंतका अप्षकून जंगल इतना शान्त कियो है बच्छों, एक शान्त जंगल कोई अच्छा शगून नही है? चाचा बहुरन के मुसे निकले ये शब्द, इस पूरी कता के सबसे तनावपूरनक शनो मेसे एक है. उनके अनुभवी दिमाग ने तुरनतिस खत्रे को बहाप लिया था. कुकी एक शिकारी के लिए, जंगल की एक खामोषी सबसे बड़ा अप्षगून होती है. लेकिन, कहा जाता है ना कि जिन पैरों को किसी देवियज्याल ने जकर लिया हो, वो कभी पीचे नहीं मुड़े. वे बस यही सुचते रहे कि शिकार आगे मिलेगा. और वे आगे बड़ते गय. और दिरे दिरे उस रहस्यमए जंगल ने उने पूरी तरह से निगल लिया. बाख चे दुखद अंट शक्ती पर चल की जीत यहा बुदनी की चतुराई देखिये, वो बहत अच्छी तरा जानती फी, की दीना और भदरी जैसे नाएको की आखें अब आप बज़नाग जान्वर शीदे सामने आता तो वो एक पल में उसे मार गिराते. इसी लिए ये पुरा जाल बिलकुल मासुमयत के आवरन में बुना गया. विल्कुल मासुम्यत के आव्रन में बूना गया. वो खुंकार रूप बडलने वाली बागिन एक छोटे से बिल्कुल मासुम भाख्ता पक्षी का रूप दरकर उनके करीभाई. ये एक अईसा दोका था, जिसने उनकी उस पोरानिक और अभेद्द्दे रक्षापंकती को बड़ी ही आसानी से भेद्द दिया. और जैसे ही वो मासुम सा दिखने वला पकषी उन शूर्वीरो के बिलकुल करी पूचा, उस्ट्टाकत्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट् कि उनके दोनो बवतीजे मारे जा चुके हैं. सदमे में उस बूडे अन्सान के हाथो से दनुश वही चुटकर गिर पडा. अन्त में वो वफ़दार मित्रज जितन यादवी था जिसने अपनी दोस्ती का सबसे कठेन और अन्तिम फर्ज निभाया उसने वही बेटकर आसु नहीं बहाई, बलकी उन दोनो शूर्वीरों के शरीर को उठाया और शादकर्म किलिये उने वापस उनके गर तक ले गया. ये वाखई एक गेरे सद्मेक अक्षन ता. इस विश्लेशन के अंथ में एक बहुत ही गभ्रा सबाल ज़हन में आता है. ये लोग कता सर्फ दो भहईगे कहानी नहीं है, बलकी ये वर्ख शोषन, अभिमान और शकती के दूरुप्योग का एक आईना है. आखिर आज़ा क्यों है कि इतिहास और किव्दन्तियो में जो नायक मिट्टी से उट्टे हैं, जिनकि ताकत बिलकुल भेदाग और पवित्र होती है, उनका अंत अकसर किसी सम्मान जनक युध्ध में नहीं, बलकि आज़े विश्वास गात और चल से होता है, जिसे बचाही नहीं जासकता. ये कहानी आज भी हमें याध दिलाती है, कि जब ताकत का सामना क्रुरता और दोके से हो, तो सबसे मजबुत नायक भी कैसे कमजूर पड़ जाते हैं. सोचने पर मजबोर कर देने वाले इसी विचार के साथ, अमारा ये कत्ठा विश्लेशन यही समपन हुता है

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