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गजल_हाइकू_आ_लघुकथाक_शास्त्र.m4a
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- 0:00–0:07गजेंद्र ताकृर रचित मैथिली समीख्षा शास्त्र पर आदारित इहमर एक्ता त्वरित सारांशा ची.
- 0:07–0:13इपोत्ती हम्रा सब के बुजावे तची, जि साहित्य मात्र कोनो भावुक्ताक गब नहीं थेक,
- 0:13–0:18बलकी एक कर पाचु एक ता पक्का विग्यान अन्यम काज करे तचे
- 0:18–0:23जे कोनो में साहित या प्रेमिक लेल जानब एक दम जरूरी या चे
- 0:23–0:26तपहल बात विहनी कता वा लगु कताख
- 0:26–0:31आहाके की लगाई तचे की इमात्र कोनो हदबडी में लिखल विचार
- 0:31–0:36या सिन्निमाक अईतम गीत जगा कोनोग शनिक छीज छे एक दम नहीं.
- 0:37–0:39एक रा लेल एक ता पूरन कता श्रिंखला चाही.
- 0:40–0:46माने इी मात्र एक ता इट नहीं, बलकी एक ता चोट प्मुदा मस्बुत पूल जगा आची.
- 0:46–0:52दोसर गजल की कोनो भी बिना नियमक स्वतन्त्र कवीता के आहा गजल कही सके ची?
- 0:52–1:02बलकुल नहीं गजल लिखबाक लेल आरभी फारसीक बहर यहनी ले आम भात्राक कथोर नियम आब हारतीए चंदक पालन करब अनिवार र्यचे.
- 1:02–1:07अन्ततह जापानी विधा हैकुक मेत्फिली में प्रयोग.
- 1:07–1:13आहाके आस्चर यहेद जे जापानक एपाज सात पाच अख्षर वाला थीन पांतिक कविता
- 1:13–1:17मेत्फिली में एतेक नीक जका कीएक फिट भेजाई तची.
- 1:17–1:22एकर कारन इजे मैठिली भाशाक लिपी पुर तधधनात्मक अवेग्यानी कची,
- 1:22–1:25जाही से एदाचा एक्दम सतीक बैसे तचे.
- 1:25–1:31संखषेप मैं मैठिली साहित्यक इसमिख्षा शास्तर सपष्ट रुपेन सिद्ध करे तची,
- 1:31–1:34जे कोनो भी विदाक उत्क्रिष्ट रचना लेल,
- 1:34–1:37बहावनाक संगे संग, व्याक्रन,
- 1:37–1:38आच्ठन्द कद्होर पालन,
- 1:38–1:40एक दम अनिवार या चे.
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गजेंद्र ताकृर रचित मैथिली समीख्षा शास्त्र पर आदारित इहमर एक्ता त्वरित सारांशा ची. इपोत्ती हम्रा सब के बुजावे तची, जि साहित्य मात्र कोनो भावुक्ताक गब नहीं थेक, बलकी एक कर पाचु एक ता पक्का विग्यान अन्यम काज करे तचे जे कोनो में साहित या प्रेमिक लेल जानब एक दम जरूरी या चे तपहल बात विहनी कता वा लगु कताख आहाके की लगाई तचे की इमात्र कोनो हदबडी में लिखल विचार या सिन्निमाक अईतम गीत जगा कोनोग शनिक छीज छे एक दम नहीं. एक रा लेल एक ता पूरन कता श्रिंखला चाही. माने इी मात्र एक ता इट नहीं, बलकी एक ता चोट प्मुदा मस्बुत पूल जगा आची. दोसर गजल की कोनो भी बिना नियमक स्वतन्त्र कवीता के आहा गजल कही सके ची? बलकुल नहीं गजल लिखबाक लेल आरभी फारसीक बहर यहनी ले आम भात्राक कथोर नियम आब हारतीए चंदक पालन करब अनिवार र्यचे. अन्ततह जापानी विधा हैकुक मेत्फिली में प्रयोग. आहाके आस्चर यहेद जे जापानक एपाज सात पाच अख्षर वाला थीन पांतिक कविता मेत्फिली में एतेक नीक जका कीएक फिट भेजाई तची. एकर कारन इजे मैठिली भाशाक लिपी पुर तधधनात्मक अवेग्यानी कची, जाही से एदाचा एक्दम सतीक बैसे तचे. संखषेप मैं मैठिली साहित्यक इसमिख्षा शास्तर सपष्ट रुपेन सिद्ध करे तची, जे कोनो भी विदाक उत्क्रिष्ट रचना लेल, बहावनाक संगे संग, व्याक्रन, आच्ठन्द कद्होर पालन, एक दम अनिवार या चे.