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असली_विद्यापति_आ_झाड़ूदारक_क्रान्तिकारी_साहित्य.m4a
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- 0:00–0:06मैथिली साहित्यक अटिहासेक आ आदूनिक स्वरूप पर इ आहांक प्टापट सारान्ष अछि.
- 0:06–0:10गजेन द्हाकुरक सोद निबंद प्रबंद निबंद समालोचना,
- 0:11–0:14सा लेलगेल इ तत्च्साभित करएट अछि,
- 0:14–0:17जे हमर भाषाक अस्ली जान दरबार में नहीं,
- 0:17–0:20बलके आम लोकक गबषवप में बसाईत अची
- 0:20–0:24पहले कि आहां के बुजल अची जे इतिहास में वास्तों में
- 0:24–0:26दूटा अलगलग विद्ध्यापती चला?
- 0:26–0:29आँ, एक दम सही सुनलहू,
- 0:29–0:32एक ता संसक्रित अवहट्टक दरबारी कवी
- 0:32–0:35अदो सर मैठ्लिक अस्ली जनक कवी
- 0:47–1:00सोचु, इता उहिना भेल, जेना कोनो खेद खलिहानक लोक गीतके, रात अ रात महलक संपती गोषित कर देल जाओ, ता हमरा लोकनी आएदھरी कख्रा अस्ली मानी रहल चलूं.
- 1:00–1:08तो सर, जहना हम अपन अछीत नहीं भुजलहू, तहीना वर्तमान सहित्यक से हो कम आके छी.
- 1:08–1:18उदेनारायन सिंग नचिकेता के नाटक, नो आन्टरी, माप्रवेश, सम्वल बैकेट के नाटक जका एक दम विष्वस्तर्ये अपसर्ट शेलिक कछी.
- 1:18–1:24एत स्वर्ग्क दर्वज्या पर नेता, चोर, पोकेट मार, अई यम्राजक भीच्क विदंबना,
- 1:24–1:28पून स्त्तिसां समाजक कर्वा सच्चाई दिखावल गे लची.
- 1:28–1:32अन्त में आव उही क्रान्तिकारी आवाजक बात करी,
- 1:32–1:34जे सोजे मातिसन जोडल ऐची.
- 1:34–1:44मैत्लिक भिखारी ताकृर कहल जायवला, राम्देव प्रसाद मन्डल, जाडूदार, एक ता नव कावे विधा, जाडूकेर आविषकार के लहनी.
- 1:44–1:53इविधा समाजक अंदविष्वास अ पैसाक रोग के उहिना साथ करए तची, जेना क्हरडासा उसरा बहरल जाई तची.
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मैथिली साहित्यक अटिहासेक आ आदूनिक स्वरूप पर इ आहांक प्टापट सारान्ष अछि. गजेन द्हाकुरक सोद निबंद प्रबंद निबंद समालोचना, सा लेलगेल इ तत्च्साभित करएट अछि, जे हमर भाषाक अस्ली जान दरबार में नहीं, बलके आम लोकक गबषवप में बसाईत अची पहले कि आहां के बुजल अची जे इतिहास में वास्तों में दूटा अलगलग विद्ध्यापती चला? आँ, एक दम सही सुनलहू, एक ता संसक्रित अवहट्टक दरबारी कवी अदो सर मैठ्लिक अस्ली जनक कवी सोचु, इता उहिना भेल, जेना कोनो खेद खलिहानक लोक गीतके, रात अ रात महलक संपती गोषित कर देल जाओ, ता हमरा लोकनी आएदھरी कख्रा अस्ली मानी रहल चलूं. तो सर, जहना हम अपन अछीत नहीं भुजलहू, तहीना वर्तमान सहित्यक से हो कम आके छी. उदेनारायन सिंग नचिकेता के नाटक, नो आन्टरी, माप्रवेश, सम्वल बैकेट के नाटक जका एक दम विष्वस्तर्ये अपसर्ट शेलिक कछी. एत स्वर्ग्क दर्वज्या पर नेता, चोर, पोकेट मार, अई यम्राजक भीच्क विदंबना, पून स्त्तिसां समाजक कर्वा सच्चाई दिखावल गे लची. अन्त में आव उही क्रान्तिकारी आवाजक बात करी, जे सोजे मातिसन जोडल ऐची. मैत्लिक भिखारी ताकृर कहल जायवला, राम्देव प्रसाद मन्डल, जाडूदार, एक ता नव कावे विधा, जाडूकेर आविषकार के लहनी. इविधा समाजक अंदविष्वास अ पैसाक रोग के उहिना साथ करए तची, जेना क्हरडासा उसरा बहरल जाई तची.