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अमर_बाबाक_न्याय_आ_रक्तरंजित_त्रासदी.m4a

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Part 6 · VIDEHA MITHILA MAITHILI DISCUSSION CRITICISM SERIES PART 6
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  1. 0:00–0:01अछि।
  2. 0:01–0:06कल्पना करू, जे आहा मैंने आपन रक्षकक पूजा करो हल ची।
  3. 0:06–0:09हुनकर वेदी पर दिया जरएच ची।
  4. 0:09–0:15मुदा संगे संग रहुनका से एक ता बहयंकर काज के लेल ख्षमा से हो मागी रहूल ची।
  5. 0:15–0:17इता एक ता अजीब विरोदा बहास अची।
  6. 0:17–0:21एक्दम की न्याय जखन रक्त रन्जित बहुजाई तचे
  7. 0:21–0:24तकन उ आपने आपने एक्टा ट्रास्दी बनी जाई तचे
  8. 0:24–0:27दद्दिबेट में आहाँक स्वागा तचे
  9. 0:27–0:33राई हम्रा सब मने गजींद्र ताकुरक अछ्यन्त मार्मिक अदाश्निक कता
  10. 0:33–0:41जे आची आमर भाभा कमला नदीक रक्षक शिव्रागामक आमर सिंगक किमवदन्ती उही पर विमर्ष करो हल ची.
  11. 0:41–0:45सही कालो. इकोनो सादारन कता नहीं आचे. बजलूना.
  12. 0:45–0:49बलके एसा एक ता गमभीर नेटिक प्रष्न उठाईत आचे.
  13. 0:49–0:51एक्दम एक्टा बहुत गहीर प्रष्न
  14. 0:51–0:53आद प्रष्न यी आचे
  15. 0:53–0:55जे की आमर बाबाक यी गाता
  16. 0:55–1:00मुख्य रूप सद्द्रम अप पवित्रताक रक्षाक लेल केल ज्डिल उचित
  17. 1:00–1:03इश्वरिय अ न्याएपुन संगर्षक महमामन्दन आचे
  18. 1:03–1:06अथवा की यी कता
  19. 1:06–1:13इखथा पूर्नता दर्म के रक्षा आ अन्याय जे मने भेदलाक रुप मे त़ल चल ओगर विरुद इस्वरी इन्याय अस्थापित करवा किट्टा गव्रव्शाली गाता आची.
  20. 1:13–1:18जकन कोनो विकल्प नहीं बचे तची तचन अस्थ उट्फाए भी दर्म तेक.
  21. 1:18–1:23अगर विरुद इस्वरी अन्याय अस्थापित करवा किट्टा ग़रव्श्याली गाता आची.
  22. 1:23–1:28जखन कोनो विकल्प नहीं बचेत अची तखन अस्थ उठाये भी द्धर्म्तेक.
  23. 1:28–1:32विकल्प नहीं बचेत अची तकन आस्ट्र उठाये भी द्धर्म तेक.
  24. 1:32–1:37मुदा देखू, आहाक इस वर्वात्ती प्रश्न वास्तमे सुचने पर मजबूर करे तची.
  25. 1:37–1:40मुदा हमर द्रिष्टिकों आहासे सरवता बहिन आची.
  26. 1:40–1:41आच्ट्या?
  27. 1:41–1:49आँ, हम माने ची जी इग गठाक मूल स्वर उही खुन खराबाक लेल इक ता शाष्वत उदासी अश्वमायाचना आची.
  28. 1:49–1:52रक्षक का आवषकता होई तची इस सत्यची.
  29. 1:52–1:53आव, उटा आची है.
  30. 1:53–1:58मुदा, इग कत्हा इज सिद्द करेत अची, जे कोनो भी रक्षात्मक हिंसा,
  31. 1:58–2:01माने चाहे उकत्द बु न्यायोचित की एक नहीं हुए,
  32. 2:01–2:04आपन संगे एक ता बारी नेटिक भोज अने तची.
  33. 2:04–2:07हम्रा विचार सब इग कत्हा महीमा मन्दन नहीं,
  34. 2:07–2:11बलकी हिंसाख अ परिहारियता पर एक ता गेर विलाप अची
  35. 2:11–2:15इस पच्ट अची जे हम्रा सब के द्रिष्टिकोन भिन अची
  36. 2:15–2:18तच्ट चलू हम आपन पक्ष विस्ट्रित रूप से रके इच्ट जी
  37. 2:18–2:19हा राखु
  38. 2:19–2:25आए एक्रायेल हम्रा सब के उही कताक अटियासिक अ सामाजिक परीवेशके बुजव आवश्षक अची
  39. 2:25–2:28आहा श्रोथ सामगरिक प्रथम अद्ध्याया पर द्यान द्योग
  40. 2:28–2:30जताय अकालग वरन न आची
  41. 2:30–2:31एक दम सही
  42. 2:31–2:33अकालग समए चल
  43. 2:33–2:40मने मित्लाक दर्ती भाटी गल चल, कूवा सुखी गल चल, लोकक प्रान कंठ में आवी गल चल.
  44. 2:40–2:42आप इस्तती बहुत भ्यंकर चल.
  45. 2:42–2:47तएहन विपत्ती क समहे में, कमला नदीक अवतरन कोन।
  46. 2:47–2:50सादारन भोगलिक वा प्राक्रतिग गतना मात्र नहीं चल.
  47. 2:50–2:54उ साख्शा देवी क्रूप में पहार्षा उतरनी हैं
  48. 2:54–2:59अक्रिषक तता मल्ला सबखलेल जीवन दाईनी माता बन ली हैं
  49. 2:59–3:03अख्रिषक अमला हूंकर दूटा पुत्र जका चला
  50. 3:03–3:07आँ, जे पूर्ण रुपेन हूंका पर आश्रित चला
  51. 3:07–3:37आब आईन में बईदलासन क्रूर आ अत्याचारी व्यक्ती आवेत आवेत आवेत आवेत आवेत आवेत आवेत आवेत आवेत आवेत आवेत आवेत आवेत आवेत आवेत आवेत आवेत आवेत आवेत आवेत आवेत आवेत आवेत आवेत आवेत आवेत आवेत आवेत आवेत
  52. 3:37–4:07अगर अज़्ा अज़्ा अज़्ा अज़्ा अज़्ा अज़्ा अज़्ा अज़्ा अज़्ा अज़्ा अज़्ा अज़्ा अज़्ा अज़्ा अज़्ा अज़्ा अज़्ा अज़्ा अज़्ा अज़्ा अज़्ा अज़्ा अज़्ा अज़्ा अज़्ा अज़्ा अज़्ा अ
  53. 4:07–4:12अगर सत्ताक नशा और उकर दुस्साहस निस न्देहक शमाक योग्या नहीं चल.
  54. 4:12–4:18मुदा जगन आहा एक रा के वल दर्मक विज़य कही का महिमा मंदित करे ची,
  55. 4:18–4:25तकन हम्रा लागे ची जी आहा कताक सब से महत्वपून डाशनिक निष्करष के अंदेखा कर रहल्ची.
  56. 4:25–4:37मुदा, जगन आहा एकरा केवल दर्मक विजय कही का महीमा मन्दित करे चे, तकन हमरा लागगे चे, जे आहा कताक सब से महत्वपुन डाशनिक निषकर्ष के अन्देखा करहल चे.
  57. 4:37–4:39अन्देखा करोल ची कोना?
  58. 4:39–5:09रब वादन्ती बादन्ती नहीं ज़ाएग बावार्ट प्रज्द बावार्ट बावार्ट बावार्ट बावार्ट बावार्ट बावार्ट बावार्ट बावार्ट बावार्ट बावार्ट बावार्ट बावार्ट बावार्ट बावार्ट बावार्ट बावार्ट बावार्
  59. 5:09–5:39अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अ�
  60. 5:39–5:44आहा तराजु अर तरवारिक जे बात कर रहल ची वो कर आम तनिक पाचा से देखव.
  61. 5:44–5:49आमर्सिंक उपप्ती पर वीचार करू उकोनो सादारन मनुष्य नहें चला.
  62. 5:49–5:55जकन मला हसब असहाए बहगेला करन हुनका सब लग केवल जाल आर पत्वार चल.
  63. 5:55–5:57जे उनकर जीवन बजेवाख सादन चल
  64. 5:57–6:00आब बैदलाक लाग लाथी दन्डाक पोज चल
  65. 6:00–6:02जे जीवन लेवाख सादन चक
  66. 6:02–6:05इकेवल दूईता व्यक्तिक भीचक लडाई चल
  67. 6:05–6:09बुजलोना इस शक्ति समी करनक चरम विशमता चल
  68. 6:09–6:12तकन उस भोला बाबाक शरन मेगे ला
  69. 6:12–6:17बेल पतक कर देर लागी गला, मंदिर का गंटी राती राती बर भजे लागल,
  70. 6:17–6:24एकर भाद जे संटान भेल, आमर्सिंग, हुंकर भाल्या वस्था साही इश्वरिये शक्ती परिलक्षित होई चल.
  71. 6:24–6:26उद कथा में स्पष्ट चे.
  72. 6:26–6:33तजगा आमर्सिंका कार्ये मने बैदलासा युध, नेटेक रूप से कोनो भी द्रिष्टी से संदिक दिछल,
  73. 6:33–6:38तब हुला बाभा मलाह सबक तपस्या से प्रसन भही उनका एहन संटान की एक दितें?
  74. 6:38–6:42इश्वर्ये शक्ती ता अकारन हिन्साक समर्ठन ने का रहता ची.
  75. 6:42–6:43मुदा
  76. 6:43–6:45अग मिनट, हमरा पूरा करे दियोंक,
  77. 6:45–6:48आमर्सिंका जनम ही अन्याय के समाप्त करबाकले भेलिचल,
  78. 6:48–6:51उ प्रक्रिति अप पवित्रताक रक्षक चला,
  79. 6:51–6:53ते हुनका कार्यके त्रासद कहब,
  80. 6:53–6:56हुनका इश्वर्य उदेश्षक अवमूल्यन करब अची.
  81. 6:56–7:26अपने अपने अपने अपने अपने अपने अपने अपने अपने अपने अपने अपने अपने अपने अपने अपने अपने अपने अपने अपने अपने अपने अपने अपने अपने अपने अपने अपने अपने अपने अपने अपने अपने अपने अपने अपने अपने �
  82. 7:26–7:56अगर खाज एक्दम उचीतचे खाज खाज खाज खाज खाज खाज खाज खाज खाज खाज खाज खाज खाज खाज खाज खाज खाज खाज खाज खाज खाज खाज खाज खाज खाज खाज खाज खाज खाज खाज खाज खाज खाज खाज खाज खाज खाज खाज खाज ख
  83. 7:56–8:02इग्हाँ उही वेद्द दे ग्हाँ जका आजे जे प्रान्त बचोलक मुदा शरीर के खन्दित कदे लक
  84. 8:02–8:05आए एक मिनेट एत एक हमरा आहाँ बाद सकनी आपती आची
  85. 8:05–8:07की आपती आची
  86. 8:07–8:10आहा इश्छल्ले चिकिट्सिकक उपमा नीक आची
  87. 8:10–8:14मुदाई परिस्तितिक भ्यानक्ता के बहुत नीचा कके दिखार रहा लगची
  88. 8:14–8:15नीचा कोना?
  89. 8:15–8:17इक केवल शल ले चिकिच्सा नहीं चल
  90. 8:17–8:22जते एक ता डोक्तर शान्ती से अप्रेशन खेटर में काज कर रहा लो
  91. 8:22–8:24इए हन अची जिनहा कोनो गामक
  92. 8:24–8:31दावानल माने ब्यंकर आग से बचेबाक ले आहाके उही गामक एक हिस्सा के स्वयम जराइप परेत.
  93. 8:31–8:34जिक्रा कंट्रोल्ट बाईन कहल जाएत अची.
  94. 8:34–8:38इक्दम गामत बची गेल मुदा जे गर आहा जरल हु,
  95. 8:38–8:42उकर दूवा आहा के जिन्दगी बहर कान्दे लेल मजबूर करत.
  96. 8:42–8:45मुदा एकर अर्थी तब नहीं जे आहा औआगी नहीं लगभाइत,
  97. 8:45–8:52स्रोट सामकरी सपष्ट करे तची जे गाट पर दिया के जगा लाटी सलैस भेदला कुगुन्डा सब्ठार चल.
  98. 8:52–8:54अज्त्तेतिव इस पोटक चल
  99. 8:54–9:00बेदला दुरा कमला जेना पवित्र देवी के बल पुर्वक विवाग कर्वाएबाग जे दु सहस कलगेल
  100. 9:00–9:04उ केवल एक ता इस्त्रीक वाएक ता नदी को प्मान न नहीं चल
  101. 9:04–9:10उ सम्पुर्न समाज के जीवन स्रोटाक आहुंकर आस्थापर, उनकर अस्तित्वापर प्रार्च्छल.
  102. 9:10–9:15जगन आहाक जीवन दात्री माताक अस्मिता पर अक्रमन भारहल होए,
  103. 9:15–9:20तकन रक्षक कलेल गाव अ पीडाक छिन्ता करवाक समय नहीं रहता ची.
  104. 9:20–9:24उही परिस्तिती में जे रक्त्पात भेल उ पूर्न तेहने उचिछ्छल
  105. 9:24–9:28मल्ला हसब कमला माताक सम्मान बचेला
  106. 9:28–9:31जगन यॉध होए तची तकन रक्त्पात होए तची
  107. 9:31–9:33मुदा उ रक्त्पात यदी द्रम कले लची
  108. 9:33–9:37तो उही में संशेवा अप्राद बोदख कोनो अस्थान नहीं होई बाक चाही
  109. 9:37–9:40आग दावानल बलावप्मा बहुत सतीक अची
  110. 9:40–9:46आप हम इबात माने च्ये जे कखनो कखनो पहेग विनाश के रोक बाक लेल कथोर कदम उधावे पडे तची
  111. 9:46–9:49अग, तक्ठन्ता हमर बात मानी रहल चीए
  112. 9:49–9:52मुदा चमा करव, हम इबात नहीं मानी रहल चीए
  113. 9:52–9:56जो उही में अप्राद बोदख कोनो अस्थान नहीं होई बाक चाही
  114. 9:56–9:58वं, तक्यक
  115. 9:58–10:00हम बतावे चीए चीए क्यक
  116. 10:00–10:02आहा आपन गाम जरेबाक ची उदारन दिल हो,
  117. 10:02–10:07अही में जरेत किये गरन, मुदा एते बात प्रानक भार है लची.
  118. 10:07–10:11आहक तरक में एक ता बहुत बडदत थे चूटी रहे लची,
  119. 10:11–10:15जे लेक्ख बहुत साभ्दानी पूर्वक शब्द चूनेत लिख है लची.
  120. 10:15–10:16कुव शब्द?
  121. 10:16–10:23आहा बार-बार केवल बेदलाग वदख माने एक ता क्रूर शाषक का अंथ का बात कर रहल जी.
  122. 10:23–10:29मुदा कता कषब्दावली पर द्यान दियो. गजेंद्र ताकृ लिखाई चेट निर्दोषक रक्त.
  123. 10:29–10:34इस्वद इत्बाद्धरी संकेत करे तची जे यूद्ध में केवल बैदला नहीं मारल्गिल
  124. 10:34–10:37मुदा देखू यूद्ध में तचेना मरली जाए तची ना
  125. 10:37–10:39उबैदला गुन्दा सब चल
  126. 10:39–10:41उगुन्दा सब रहुसके तची
  127. 10:41–10:43उबदला गुन्डा सब चल
  128. 10:43–10:45उगुन्डा सब हो सके तची
  129. 10:45–10:47मुडा लेक्खुन का निर्दोष के कहछ चच्छती
  130. 10:48–10:51एताई लेक्ख हम्रा सब के बुजावे चच्छती
  131. 10:51–10:53जगन हिंसा बदखगत चे
  132. 10:53–10:56तकनो केवल मुख्ध्य अप्रादिदरी सीमित नहीं तचे
  133. 10:56–10:58माने
  134. 10:58–11:01आख खाव अची जे आनलोक सो हु मारल.
  135. 11:01–11:05एक दम, उही संगार में आनलोक भे हू मारल,
  136. 11:05–11:08जे शाएद उही संगर्ष का हिस्सा न नहीं चला,
  137. 11:08–11:12वाजे गरीब चला, आगे वल बैदलाग दर सोटे कहर चला.
  138. 11:12–11:15हिन्साक की सब सब पक त्रास्ती एचे,
  139. 11:15–11:17जे इ अन्यन्त्रिद भोजाईता जे.
  140. 11:17–11:20इक ता दर्दनाक सत्या जे.
  141. 11:20–11:26आई, इ निर्दोषक रक्त लिए रख्त रख्त ब्यानक्ता के दर्षावाए ता जे.
  142. 11:26–11:33युद्द जोद बो नियायोचित की एक नहूए उ आपन रस्ता में निर्दोषक प्रान से हो लेवत आजे.
  143. 11:45–11:49अगर उद्वादा के अगर कोनो खेद नाईभिल होएत,
  144. 11:49–11:53मुदा हमरा एक्रा दोसर रूपे रखव,
  145. 11:53–11:58अहान निर्दोषक रक्त के हिन्साक समग्र विफलता वा ध्रास्दी मानी रहल ची.
  146. 11:58–12:03आपने इनही कहे रहल ची जी आमर भबा के वोकर कुनो केद नाएभेल होएत,
  147. 12:03–12:06मुदा हमरा एक्रा दोसर रूपे रखफ,
  148. 12:06–12:12आपने निर्दोषक रक्ट के हिन्साख समग्र विफलता वा त्रास्दी मानी रहल ची.
  149. 12:12–12:20मुदा जखन पेग पेग पशाच्छिक सबखक विनाश होई तची, तचन किछ अन्चाह परिनाम होईप सवभाविक अची.
  150. 12:20–12:23हमरा कताक वर्तमान पर विचार कर बाखचाई.
  151. 12:23–12:25वर्तमान पर कुना?
  152. 12:25–12:31बाडी वा अकालक समय में कमला नदीक पूजा होई तची आगाख पर दिया जरे तची
  153. 12:31–12:37मलाहक बुड लोक सब आए आमर भाबाक वेदी पर दिया जरे बएच्छती
  154. 12:37–12:44इप्रकाश इदीप की आची, हम्रा लेल इद़्र्मक, विजै आ औमर भावाक अदम्य साहस कप्रतीग आची,
  155. 12:45–12:46जे कमला मातक सम्मान बची लेनी.
  156. 12:47–12:51इग केवल उदासी नहीं आची, इए असीम क्रितग्यताक बाव आची.
  157. 12:51–12:54समाज आमर भाबा के एक्ता रक्षक के रूप में पूजगट अची
  158. 12:54–12:57कोनो पश्षाताप करेवाला अप्रादीक रूप में नहीं
  159. 12:57–12:59आप, पूजड़ा ता होई तचे
  160. 12:59–13:02हूनक वेदि कस्तिट्वा इप्रमानित करेट ची
  161. 13:02–13:12जे समाजक लेल हो रक्टपाद द्रम कस्थापना के लेल देल गेल एक ता आवश्षक बलिदान चल, रक्षक कस्थान समाज में सरवोच च्या ची, यी वेदी उकर प्रमान आची.
  162. 13:12–13:17ये एक ता प्रभाव शाली तर कछे और क्रतदग्यता कुबहाँ निष्चित रूपे नचे
  163. 13:17–13:23मुदा क्या आहा इ विचार के लोग जे उ पूजा वास्तो में किस रूप में होई तच्छे
  164. 13:23–13:25मने पूजा तपूजा इ ची
  165. 13:25–13:34वहां दियाक बातके लो, वेदिक बातके लो, जे समाजक याद्दाश मने मेंरी कप्रती कचे, मुदा स्रोद समगरी की कहे तचे?
  166. 13:34–13:37कता कै एक दब अन्तिम पांती पर प्रहार करे ची हम.
  167. 13:37–13:43जकन बोड मल्ला आयो आमर भाबाक वेदी पर दिया जरवे तची,
  168. 13:43–13:48तो केवल स्तुती वाजेकार नहीं करेता चे, उदूटा प्रार्त्ना करेता चे.
  169. 13:48–13:52दियान दियोग, एक ता रक्षाक लेल, और दो सर ख्षमाक लेल.
  170. 13:52–13:54राद, मुदा उच्वमा...
  171. 13:54–13:59हम रा पूरा करे दियोग, हम आहासे एक तेखषन प्रष्न पूच आच्छे.
  172. 13:59–14:07जो इ केवल दर्मकर, शुद्ध विजेए चल, जो इ केवल महीमा मन्दन चल, तच्षमा कि आचना कि एक.
  173. 14:07–14:10इ च्षमा मांगब कोनो सादारन बात नहीं अचे.
  174. 14:10–14:17इ प्रमाडित कराईत चे जे बिना पाप आ अप्राद बोदख, कोनो हिंसक विजेः समबभ नहीं.
  175. 14:17–14:22उ मल्ला समाज आई दरी उई हिन्सक अतीज से मुक्त नहीं भहसकल अची
  176. 14:22–14:25आज समाज अक याद डाश्ट कटंट्र के बूचो
  177. 14:25–14:29जो खोनो समाज केवल तर्वारेक महीमाम नदन कराई तचे
  178. 14:29–14:32उच्समाज क्रूर आई हिन्सक बनी जाई तचे
  179. 14:32–14:35उज़़ समस्यक समदान काटमारी में खोजे लगाई तचे
  180. 14:35–14:37मुदा इमला समाज आहन नहीं आचे
  181. 14:37–14:41उआमर भाबासे उआँ रक्षाक गुहारत लगबाई तचे
  182. 14:41–14:44करन संसार में बेदला सन लोक आएुच अदी
  183. 14:44–14:47मुदा संगे संग उही रक्टर अजित इतिहास के लिल
  184. 14:47–14:49च्वामा से हु मागे तचे
  185. 14:49–14:51इटराजु कषन्तुलन अची
  186. 14:51–14:53इषन्तुलन अवष्षक है
  187. 14:53–14:54एक तम
  188. 14:54–14:57इच्वामा समाज के आमानविय बन्बासे रोकगे तची
  189. 14:57–14:59ते हम कहे तची
  190. 14:59–15:01जे एव विजेक उल्लास नहीं
  191. 15:01–15:03बलकी एक तरासदीक सुईका रोक ती आची
  192. 15:03–15:07अगा की बाद जे समाजके आमानविय बनावसा रोकब वास्तमे एक दागेर विष्लेशन अचे
  193. 15:08–15:09आद दन्नेवाद
  194. 15:10–15:14अँम स्विकार कर इच्छी जे हिन्सा कोन भी रुब चाहे यो कत बो आवश्षक गेग नी हुए
  195. 15:15–15:17अपन संके किच मलिन्ता अने तचे
  196. 15:17–15:47अगर उगर बविरुद कर अज़ाज़ी ज़ाज़ी ज़ाज़ी ज़ाज़ी ज़ाज़ी ज़ाज़ी ज़ाज़ी ज़ाज़ी ज़ाज़ी ज़ाज़ी ज़ाज़ी ज़ाज़ी ज़ाज़ी ज़ाज़ी ज़ाज़ी ज़ाज़ी ज़ाज़ी ज़ाज़ी ज़ाज़ी ज़ाज़
  197. 15:47–15:49जरा सोचु जे आमर भाबा नहीं होगतेखिं
  198. 15:49–15:51तकन की होगतेखिं
  199. 15:51–15:54बैदला कमला माता पर अदिकार कर ले तेखिन
  200. 15:54–15:56दर्मक पुड नाश भेजाइत
  201. 15:56–15:58मलाक समाच सदाकले दास बनी जाइत
  202. 15:58–16:02हुंक नदी, हुंक जीवन श्रोत अपवित्र भाजाइत
  203. 16:02–16:07ते यद्दपी खून भहल, मुदा औरक्त पात एक्ता पेग अनर्त के रोक्बाक लिल का लिल के.
  204. 16:07–16:09आ, इत आचे.
  205. 16:09–16:12रक्षक कब वूमिका में एक ता कथिन निरने लेवा परेज.
  206. 16:12–16:14आ, आमर्सिंग और निरने लिल हनी.
  207. 16:14–16:18समाजी जानेत फी, जे रक्षाके लेलजा हात में रक्त लागल अचे,
  208. 16:18–16:23तो रक्त आपन लेल नहीं, बलकी समाजक रक्षाके लेल बहल आचे.
  209. 16:23–16:25उच्माय आचना हुंकर विनम्रता आची.
  210. 16:25–16:28उमल्ला समाजक आद्ध्यात्मिक उचाई आची,
  211. 16:28–16:58अगर बाद कहलाओ, जे रक्षक अपन अद्यात्मिक पवित्रता डवाई देताई थाई तजी इवास्तव में बहुत सुन्द्दान, अगर बाद कहलाओ, जे रक्षक अपन अद्द्दियात्मिक पवित्रता डवाई देताई थाई तजी यवास्तव में बहुत सुन्द्द
  212. 16:58–17:00अदर और गेहर बात अची
  213. 17:00–17:01दनेवाद
  214. 17:01–17:03हमहाक द्रिष्टान तक आदर करे ची
  215. 17:03–17:05मुदा हम यी नहीं माननी शके ची
  216. 17:05–17:07जे ख्षमा याचना द्वीत्या कची
  217. 17:07–17:09गजंद्र थाखुरा की कता
  218. 17:09–17:11यदी केवल सहसक महीमा मन्दन होएत
  219. 17:11–17:13ता इी अंतिम पातिक अवषकता ही नहीं चल.
  220. 17:13–17:17लेक्खग जानी भूजे कैगरा अंत में रकल नहीं आचे.
  221. 17:17–17:20रक्षक का अवषकता सत्ते अचे.
  222. 17:20–17:22इह हम पून रूपिन मानेत ची.
  223. 17:22–17:26बेदिला जगा क्रूर लोकक अंत अवषक चल यहो सत्ते चे.
  224. 17:26–17:32मुदाई कता महान अची, करन इन्याई आहिंसक भीज कशुख्ष्म सीमारेखा कबुजाई तची.
  225. 17:32–17:35आई, सीमारेखा तब वहुत पातर होई तची.
  226. 17:35–17:41एक दम, इम आने तची जे दर्मक मारक पर चलीत का से हू, न्याई करीत काल से हू,
  227. 17:41–17:55आहा सो एहन काज भासके तछ जगरा लिल आहाके अनन्त काल दरी च्वमाक आवष्खता भासके तछ इक तदाशनिक उचाई आछी जदे केवल जीत आहार नहीं होई तछ बलकी कर्म अउकर परिणाम होई तछ अछी.
  228. 17:55–17:59अमर भाबाक वेदिपर च्माक प्रार्त्ना इसिध करेत अची
  229. 17:59–18:02जे मानवताक सर्वोच रूप, हिंसक उलास में नहीं
  230. 18:02–18:06बलकी हिंसक अ परिहारियता पर दुक प्रकत करबामे अची
  231. 18:06–18:08ओ दिया जे गाड पर जरेत अची
  232. 18:08–18:11ओ केवल जीद कप्रकाष नहीं अची
  233. 18:11–18:16उ उही निर्दोशक लेल जरल एक तश्वोक दीप से हूँए जे याद दियाबे तची,
  234. 18:16–18:19जे यूद में जकन तरवारी उठाई तची,
  235. 18:19–18:21तटराजुक सन्तूलन बिग्डी जाई तची,
  236. 18:21–18:26अवक्रा वापस लाभे लेल सद्यो दरी च्यमा मांगभ आवश्षक बहजाईता चे.
  237. 18:26–18:29आहा के य विष्रेषक बहुत सुख्ष्मज़ेच.
  238. 18:29–18:35और हम माने ची जे आई हमर स्वेंके विचार करबाक तरीका में कनी विस्तार बहगे लेच.
  239. 18:35–18:36हा, हम रो.
  240. 18:36–18:42दूनु द्र्ष्टी कोनक अपन अपन अदार स्थ्रोट समगरी में स्पष्ट रूपे विद्खमान अची.
  241. 18:42–18:51इसत्ते अची जे गजंद्र थाकुरक इकता कोनो सीदा सादा लोक अचाथा वा केवल एक ता अक्ष्टन से बभरल मिखख नहीं अची.
  242. 18:51–18:59इमानव्द्र्म, कर्म, सक्ती समीकरन, अन्याय अन्यायक, एक्ता अत्यंत जटिल अद्दार्ष्निक रच्ना आच्ना आच्छी.
  243. 18:59–19:00एक्दम सत्यकालों.
  244. 19:00–19:05जते हम्रा आमर्भाबाक स्वरूप में, एक्ता अदम्म्य रक्षक दिखाए च्छती,
  245. 19:05–19:11जे प्रक्रति अ समाजक लेल आपन प्रानक आ आपन आत्मक भाजी लगाई देच्छति
  246. 19:11–19:18ओते आहाके उब्जल त्रास्दिक एह्साज दिखाई तची
  247. 19:18–19:22तुनु पक्छ आपन ताम से एक तागान सत्यक उद्खाटन करे तची
  248. 19:22–19:28आदो सर्दी समाज के आत्मेक रक्षा
  249. 19:28–19:29इक दम सही
  250. 19:29–19:31इक खता क सुन्दर्या ही आची
  251. 19:31–19:34जे इक उनो एक तसरल साथा उतर नहीं देगी तची
  252. 19:34–19:37इक हम्रा सब के मजबोर करे तची
  253. 19:37–19:39इक हम्रा सब रक्षक का तर्वारी
  254. 19:39–19:43अन्यायक तराजुक भीचक मनोवैग्यानिक दुन्ध के भूजी
  255. 19:43–19:45आप भूजव अवष्षक अची
  256. 19:45–19:50इग खता एक संगे कमला मदिंगे लहरी जका चन्चल आ उत्बे गही रची
  257. 19:50–19:54जते सुर्जिक प्रकास मे इग खता सुवनजका चम कै तची
  258. 19:54–19:57रक्षकक गात्था गावी तची,
  259. 19:57–20:02उते राटिक अन्यार में इक टा गहिर उदासी से हो समेट ने आची.
  260. 20:02–20:03इक टा एहन विमर्ष,
  261. 20:03–20:07जते रक्षकक सहस आहिंसाक त्रास्दी,
  262. 20:07–20:09दून्नूपर समान रुपे विचार कल जाए,
  263. 20:09–20:10वास्तो में,
  264. 20:10–20:13अमरा सबक समजके व्यापक वन वेईताशी
  265. 20:13–20:17ता आएक हमर यी बोद्धिक विमर्ष एह निसकर्ष पर आवएईताशी
  266. 20:17–20:21जे आमर भाबा कता कोनो एक तरंग में नहें रंगल जासकी तचे
  267. 20:21–20:25शोटागन आब यी आहा के विचार करबाक अचे
  268. 20:25–20:27आहा सब सोचु
  269. 20:27–20:33जखन आहा कमला नदिक उही कलपित गाट पर धाड़ा हुएप आनिरमल जल्क प्रतिविंद में ताकब,
  270. 20:33–20:38तक टक इहा के उही जल में दरमक रक्षाक के लेल उठलेक ताचमकए तर्वारी देखाई तची,
  271. 20:38–20:43वा उही रक्त रन्जित इतिहासक कारन असीम उदासी सबहरल नयक तराजू।
  272. 20:43–20:47की आहा हुंका एक ता रक्षक के रूप में देखे ची
  273. 20:47–20:50जकर काज पूँथ ता नयायो चिछल
  274. 20:50–20:53वा एक ता एहन तरासध नयक के रूप में
  275. 20:53–20:58जक्रा आपनी काज के लेल अन्न्त काल दरीक श्हामा मागे परी रहाला चे
  276. 20:59–21:05इक ता आँा स्वेम पड़ी आर एही पर विचार करी कारन नीक साहित ते उही होई तची
  277. 21:05–21:09जे उतर नहीं दे तची बलकी नवक प्रस्नट ठाड करे तची
  278. 21:09–21:13दबेट से आएक लेल बस इत भे दश्वाद
  279. 21:13–21:14दश्वाद

Plain text

अछि। कल्पना करू, जे आहा मैंने आपन रक्षकक पूजा करो हल ची। हुनकर वेदी पर दिया जरएच ची। मुदा संगे संग रहुनका से एक ता बहयंकर काज के लेल ख्षमा से हो मागी रहूल ची। इता एक ता अजीब विरोदा बहास अची। एक्दम की न्याय जखन रक्त रन्जित बहुजाई तचे तकन उ आपने आपने एक्टा ट्रास्दी बनी जाई तचे दद्दिबेट में आहाँक स्वागा तचे राई हम्रा सब मने गजींद्र ताकुरक अछ्यन्त मार्मिक अदाश्निक कता जे आची आमर भाभा कमला नदीक रक्षक शिव्रागामक आमर सिंगक किमवदन्ती उही पर विमर्ष करो हल ची. सही कालो. इकोनो सादारन कता नहीं आचे. बजलूना. बलके एसा एक ता गमभीर नेटिक प्रष्न उठाईत आचे. एक्दम एक्टा बहुत गहीर प्रष्न आद प्रष्न यी आचे जे की आमर बाबाक यी गाता मुख्य रूप सद्द्रम अप पवित्रताक रक्षाक लेल केल ज्डिल उचित इश्वरिय अ न्याएपुन संगर्षक महमामन्दन आचे अथवा की यी कता इखथा पूर्नता दर्म के रक्षा आ अन्याय जे मने भेदलाक रुप मे त़ल चल ओगर विरुद इस्वरी इन्याय अस्थापित करवा किट्टा गव्रव्शाली गाता आची. जकन कोनो विकल्प नहीं बचे तची तचन अस्थ उट्फाए भी दर्म तेक. अगर विरुद इस्वरी अन्याय अस्थापित करवा किट्टा ग़रव्श्याली गाता आची. जखन कोनो विकल्प नहीं बचेत अची तखन अस्थ उठाये भी द्धर्म्तेक. विकल्प नहीं बचेत अची तकन आस्ट्र उठाये भी द्धर्म तेक. मुदा देखू, आहाक इस वर्वात्ती प्रश्न वास्तमे सुचने पर मजबूर करे तची. मुदा हमर द्रिष्टिकों आहासे सरवता बहिन आची. आच्ट्या? आँ, हम माने ची जी इग गठाक मूल स्वर उही खुन खराबाक लेल इक ता शाष्वत उदासी अश्वमायाचना आची. रक्षक का आवषकता होई तची इस सत्यची. आव, उटा आची है. मुदा, इग कत्हा इज सिद्द करेत अची, जे कोनो भी रक्षात्मक हिंसा, माने चाहे उकत्द बु न्यायोचित की एक नहीं हुए, आपन संगे एक ता बारी नेटिक भोज अने तची. हम्रा विचार सब इग कत्हा महीमा मन्दन नहीं, बलकी हिंसाख अ परिहारियता पर एक ता गेर विलाप अची इस पच्ट अची जे हम्रा सब के द्रिष्टिकोन भिन अची तच्ट चलू हम आपन पक्ष विस्ट्रित रूप से रके इच्ट जी हा राखु आए एक्रायेल हम्रा सब के उही कताक अटियासिक अ सामाजिक परीवेशके बुजव आवश्षक अची आहा श्रोथ सामगरिक प्रथम अद्ध्याया पर द्यान द्योग जताय अकालग वरन न आची एक दम सही अकालग समए चल मने मित्लाक दर्ती भाटी गल चल, कूवा सुखी गल चल, लोकक प्रान कंठ में आवी गल चल. आप इस्तती बहुत भ्यंकर चल. तएहन विपत्ती क समहे में, कमला नदीक अवतरन कोन। सादारन भोगलिक वा प्राक्रतिग गतना मात्र नहीं चल. उ साख्शा देवी क्रूप में पहार्षा उतरनी हैं अक्रिषक तता मल्ला सबखलेल जीवन दाईनी माता बन ली हैं अख्रिषक अमला हूंकर दूटा पुत्र जका चला आँ, जे पूर्ण रुपेन हूंका पर आश्रित चला आब आईन में बईदलासन क्रूर आ अत्याचारी व्यक्ती आवेत आवेत आवेत आवेत आवेत आवेत आवेत आवेत आवेत आवेत आवेत आवेत आवेत आवेत आवेत आवेत आवेत आवेत आवेत आवेत आवेत आवेत आवेत आवेत आवेत आवेत आवेत आवेत आवेत अगर अज़्ा अज़्ा अज़्ा अज़्ा अज़्ा अज़्ा अज़्ा अज़्ा अज़्ा अज़्ा अज़्ा अज़्ा अज़्ा अज़्ा अज़्ा अज़्ा अज़्ा अज़्ा अज़्ा अज़्ा अज़्ा अज़्ा अज़्ा अज़्ा अज़्ा अज़्ा अज़्ा अ अगर सत्ताक नशा और उकर दुस्साहस निस न्देहक शमाक योग्या नहीं चल. मुदा जगन आहा एक रा के वल दर्मक विज़य कही का महिमा मंदित करे ची, तकन हम्रा लागे ची जी आहा कताक सब से महत्वपून डाशनिक निष्करष के अंदेखा कर रहल्ची. मुदा, जगन आहा एकरा केवल दर्मक विजय कही का महीमा मन्दित करे चे, तकन हमरा लागगे चे, जे आहा कताक सब से महत्वपुन डाशनिक निषकर्ष के अन्देखा करहल चे. अन्देखा करोल ची कोना? रब वादन्ती बादन्ती नहीं ज़ाएग बावार्ट प्रज्द बावार्ट बावार्ट बावार्ट बावार्ट बावार्ट बावार्ट बावार्ट बावार्ट बावार्ट बावार्ट बावार्ट बावार्ट बावार्ट बावार्ट बावार्ट बावार्ट बावार् अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अ� आहा तराजु अर तरवारिक जे बात कर रहल ची वो कर आम तनिक पाचा से देखव. आमर्सिंक उपप्ती पर वीचार करू उकोनो सादारन मनुष्य नहें चला. जकन मला हसब असहाए बहगेला करन हुनका सब लग केवल जाल आर पत्वार चल. जे उनकर जीवन बजेवाख सादन चल आब बैदलाक लाग लाथी दन्डाक पोज चल जे जीवन लेवाख सादन चक इकेवल दूईता व्यक्तिक भीचक लडाई चल बुजलोना इस शक्ति समी करनक चरम विशमता चल तकन उस भोला बाबाक शरन मेगे ला बेल पतक कर देर लागी गला, मंदिर का गंटी राती राती बर भजे लागल, एकर भाद जे संटान भेल, आमर्सिंग, हुंकर भाल्या वस्था साही इश्वरिये शक्ती परिलक्षित होई चल. उद कथा में स्पष्ट चे. तजगा आमर्सिंका कार्ये मने बैदलासा युध, नेटेक रूप से कोनो भी द्रिष्टी से संदिक दिछल, तब हुला बाभा मलाह सबक तपस्या से प्रसन भही उनका एहन संटान की एक दितें? इश्वर्ये शक्ती ता अकारन हिन्साक समर्ठन ने का रहता ची. मुदा अग मिनट, हमरा पूरा करे दियोंक, आमर्सिंका जनम ही अन्याय के समाप्त करबाकले भेलिचल, उ प्रक्रिति अप पवित्रताक रक्षक चला, ते हुनका कार्यके त्रासद कहब, हुनका इश्वर्य उदेश्षक अवमूल्यन करब अची. अपने अपने अपने अपने अपने अपने अपने अपने अपने अपने अपने अपने अपने अपने अपने अपने अपने अपने अपने अपने अपने अपने अपने अपने अपने अपने अपने अपने अपने अपने अपने अपने अपने अपने अपने अपने अपने � अगर खाज एक्दम उचीतचे खाज खाज खाज खाज खाज खाज खाज खाज खाज खाज खाज खाज खाज खाज खाज खाज खाज खाज खाज खाज खाज खाज खाज खाज खाज खाज खाज खाज खाज खाज खाज खाज खाज खाज खाज खाज खाज खाज खाज ख इग्हाँ उही वेद्द दे ग्हाँ जका आजे जे प्रान्त बचोलक मुदा शरीर के खन्दित कदे लक आए एक मिनेट एत एक हमरा आहाँ बाद सकनी आपती आची की आपती आची आहा इश्छल्ले चिकिट्सिकक उपमा नीक आची मुदाई परिस्तितिक भ्यानक्ता के बहुत नीचा कके दिखार रहा लगची नीचा कोना? इक केवल शल ले चिकिच्सा नहीं चल जते एक ता डोक्तर शान्ती से अप्रेशन खेटर में काज कर रहा लो इए हन अची जिनहा कोनो गामक दावानल माने ब्यंकर आग से बचेबाक ले आहाके उही गामक एक हिस्सा के स्वयम जराइप परेत. जिक्रा कंट्रोल्ट बाईन कहल जाएत अची. इक्दम गामत बची गेल मुदा जे गर आहा जरल हु, उकर दूवा आहा के जिन्दगी बहर कान्दे लेल मजबूर करत. मुदा एकर अर्थी तब नहीं जे आहा औआगी नहीं लगभाइत, स्रोट सामकरी सपष्ट करे तची जे गाट पर दिया के जगा लाटी सलैस भेदला कुगुन्डा सब्ठार चल. अज्त्तेतिव इस पोटक चल बेदला दुरा कमला जेना पवित्र देवी के बल पुर्वक विवाग कर्वाएबाग जे दु सहस कलगेल उ केवल एक ता इस्त्रीक वाएक ता नदी को प्मान न नहीं चल उ सम्पुर्न समाज के जीवन स्रोटाक आहुंकर आस्थापर, उनकर अस्तित्वापर प्रार्च्छल. जगन आहाक जीवन दात्री माताक अस्मिता पर अक्रमन भारहल होए, तकन रक्षक कलेल गाव अ पीडाक छिन्ता करवाक समय नहीं रहता ची. उही परिस्तिती में जे रक्त्पात भेल उ पूर्न तेहने उचिछ्छल मल्ला हसब कमला माताक सम्मान बचेला जगन यॉध होए तची तकन रक्त्पात होए तची मुदा उ रक्त्पात यदी द्रम कले लची तो उही में संशेवा अप्राद बोदख कोनो अस्थान नहीं होई बाक चाही आग दावानल बलावप्मा बहुत सतीक अची आप हम इबात माने च्ये जे कखनो कखनो पहेग विनाश के रोक बाक लेल कथोर कदम उधावे पडे तची अग, तक्ठन्ता हमर बात मानी रहल चीए मुदा चमा करव, हम इबात नहीं मानी रहल चीए जो उही में अप्राद बोदख कोनो अस्थान नहीं होई बाक चाही वं, तक्यक हम बतावे चीए चीए क्यक आहा आपन गाम जरेबाक ची उदारन दिल हो, अही में जरेत किये गरन, मुदा एते बात प्रानक भार है लची. आहक तरक में एक ता बहुत बडदत थे चूटी रहे लची, जे लेक्ख बहुत साभ्दानी पूर्वक शब्द चूनेत लिख है लची. कुव शब्द? आहा बार-बार केवल बेदलाग वदख माने एक ता क्रूर शाषक का अंथ का बात कर रहल जी. मुदा कता कषब्दावली पर द्यान दियो. गजेंद्र ताकृ लिखाई चेट निर्दोषक रक्त. इस्वद इत्बाद्धरी संकेत करे तची जे यूद्ध में केवल बैदला नहीं मारल्गिल मुदा देखू यूद्ध में तचेना मरली जाए तची ना उबैदला गुन्दा सब चल उगुन्दा सब रहुसके तची उबदला गुन्डा सब चल उगुन्डा सब हो सके तची मुडा लेक्खुन का निर्दोष के कहछ चच्छती एताई लेक्ख हम्रा सब के बुजावे चच्छती जगन हिंसा बदखगत चे तकनो केवल मुख्ध्य अप्रादिदरी सीमित नहीं तचे माने आख खाव अची जे आनलोक सो हु मारल. एक दम, उही संगार में आनलोक भे हू मारल, जे शाएद उही संगर्ष का हिस्सा न नहीं चला, वाजे गरीब चला, आगे वल बैदलाग दर सोटे कहर चला. हिन्साक की सब सब पक त्रास्ती एचे, जे इ अन्यन्त्रिद भोजाईता जे. इक ता दर्दनाक सत्या जे. आई, इ निर्दोषक रक्त लिए रख्त रख्त ब्यानक्ता के दर्षावाए ता जे. युद्द जोद बो नियायोचित की एक नहूए उ आपन रस्ता में निर्दोषक प्रान से हो लेवत आजे. अगर उद्वादा के अगर कोनो खेद नाईभिल होएत, मुदा हमरा एक्रा दोसर रूपे रखव, अहान निर्दोषक रक्त के हिन्साक समग्र विफलता वा ध्रास्दी मानी रहल ची. आपने इनही कहे रहल ची जी आमर भबा के वोकर कुनो केद नाएभेल होएत, मुदा हमरा एक्रा दोसर रूपे रखफ, आपने निर्दोषक रक्ट के हिन्साख समग्र विफलता वा त्रास्दी मानी रहल ची. मुदा जखन पेग पेग पशाच्छिक सबखक विनाश होई तची, तचन किछ अन्चाह परिनाम होईप सवभाविक अची. हमरा कताक वर्तमान पर विचार कर बाखचाई. वर्तमान पर कुना? बाडी वा अकालक समय में कमला नदीक पूजा होई तची आगाख पर दिया जरे तची मलाहक बुड लोक सब आए आमर भाबाक वेदी पर दिया जरे बएच्छती इप्रकाश इदीप की आची, हम्रा लेल इद़्र्मक, विजै आ औमर भावाक अदम्य साहस कप्रतीग आची, जे कमला मातक सम्मान बची लेनी. इग केवल उदासी नहीं आची, इए असीम क्रितग्यताक बाव आची. समाज आमर भाबा के एक्ता रक्षक के रूप में पूजगट अची कोनो पश्षाताप करेवाला अप्रादीक रूप में नहीं आप, पूजड़ा ता होई तचे हूनक वेदि कस्तिट्वा इप्रमानित करेट ची जे समाजक लेल हो रक्टपाद द्रम कस्थापना के लेल देल गेल एक ता आवश्षक बलिदान चल, रक्षक कस्थान समाज में सरवोच च्या ची, यी वेदी उकर प्रमान आची. ये एक ता प्रभाव शाली तर कछे और क्रतदग्यता कुबहाँ निष्चित रूपे नचे मुदा क्या आहा इ विचार के लोग जे उ पूजा वास्तो में किस रूप में होई तच्छे मने पूजा तपूजा इ ची वहां दियाक बातके लो, वेदिक बातके लो, जे समाजक याद्दाश मने मेंरी कप्रती कचे, मुदा स्रोद समगरी की कहे तचे? कता कै एक दब अन्तिम पांती पर प्रहार करे ची हम. जकन बोड मल्ला आयो आमर भाबाक वेदी पर दिया जरवे तची, तो केवल स्तुती वाजेकार नहीं करेता चे, उदूटा प्रार्त्ना करेता चे. दियान दियोग, एक ता रक्षाक लेल, और दो सर ख्षमाक लेल. राद, मुदा उच्वमा... हम रा पूरा करे दियोग, हम आहासे एक तेखषन प्रष्न पूच आच्छे. जो इ केवल दर्मकर, शुद्ध विजेए चल, जो इ केवल महीमा मन्दन चल, तच्षमा कि आचना कि एक. इ च्षमा मांगब कोनो सादारन बात नहीं अचे. इ प्रमाडित कराईत चे जे बिना पाप आ अप्राद बोदख, कोनो हिंसक विजेः समबभ नहीं. उ मल्ला समाज आई दरी उई हिन्सक अतीज से मुक्त नहीं भहसकल अची आज समाज अक याद डाश्ट कटंट्र के बूचो जो खोनो समाज केवल तर्वारेक महीमाम नदन कराई तचे उच्समाज क्रूर आई हिन्सक बनी जाई तचे उज़़ समस्यक समदान काटमारी में खोजे लगाई तचे मुदा इमला समाज आहन नहीं आचे उआमर भाबासे उआँ रक्षाक गुहारत लगबाई तचे करन संसार में बेदला सन लोक आएुच अदी मुदा संगे संग उही रक्टर अजित इतिहास के लिल च्वामा से हु मागे तचे इटराजु कषन्तुलन अची इषन्तुलन अवष्षक है एक तम इच्वामा समाज के आमानविय बन्बासे रोकगे तची ते हम कहे तची जे एव विजेक उल्लास नहीं बलकी एक तरासदीक सुईका रोक ती आची अगा की बाद जे समाजके आमानविय बनावसा रोकब वास्तमे एक दागेर विष्लेशन अचे आद दन्नेवाद अँम स्विकार कर इच्छी जे हिन्सा कोन भी रुब चाहे यो कत बो आवश्षक गेग नी हुए अपन संके किच मलिन्ता अने तचे अगर उगर बविरुद कर अज़ाज़ी ज़ाज़ी ज़ाज़ी ज़ाज़ी ज़ाज़ी ज़ाज़ी ज़ाज़ी ज़ाज़ी ज़ाज़ी ज़ाज़ी ज़ाज़ी ज़ाज़ी ज़ाज़ी ज़ाज़ी ज़ाज़ी ज़ाज़ी ज़ाज़ी ज़ाज़ी ज़ाज़ी ज़ाज़ जरा सोचु जे आमर भाबा नहीं होगतेखिं तकन की होगतेखिं बैदला कमला माता पर अदिकार कर ले तेखिन दर्मक पुड नाश भेजाइत मलाक समाच सदाकले दास बनी जाइत हुंक नदी, हुंक जीवन श्रोत अपवित्र भाजाइत ते यद्दपी खून भहल, मुदा औरक्त पात एक्ता पेग अनर्त के रोक्बाक लिल का लिल के. आ, इत आचे. रक्षक कब वूमिका में एक ता कथिन निरने लेवा परेज. आ, आमर्सिंग और निरने लिल हनी. समाजी जानेत फी, जे रक्षाके लेलजा हात में रक्त लागल अचे, तो रक्त आपन लेल नहीं, बलकी समाजक रक्षाके लेल बहल आचे. उच्माय आचना हुंकर विनम्रता आची. उमल्ला समाजक आद्ध्यात्मिक उचाई आची, अगर बाद कहलाओ, जे रक्षक अपन अद्यात्मिक पवित्रता डवाई देताई थाई तजी इवास्तव में बहुत सुन्द्दान, अगर बाद कहलाओ, जे रक्षक अपन अद्द्दियात्मिक पवित्रता डवाई देताई थाई तजी यवास्तव में बहुत सुन्द्द अदर और गेहर बात अची दनेवाद हमहाक द्रिष्टान तक आदर करे ची मुदा हम यी नहीं माननी शके ची जे ख्षमा याचना द्वीत्या कची गजंद्र थाखुरा की कता यदी केवल सहसक महीमा मन्दन होएत ता इी अंतिम पातिक अवषकता ही नहीं चल. लेक्खग जानी भूजे कैगरा अंत में रकल नहीं आचे. रक्षक का अवषकता सत्ते अचे. इह हम पून रूपिन मानेत ची. बेदिला जगा क्रूर लोकक अंत अवषक चल यहो सत्ते चे. मुदाई कता महान अची, करन इन्याई आहिंसक भीज कशुख्ष्म सीमारेखा कबुजाई तची. आई, सीमारेखा तब वहुत पातर होई तची. एक दम, इम आने तची जे दर्मक मारक पर चलीत का से हू, न्याई करीत काल से हू, आहा सो एहन काज भासके तछ जगरा लिल आहाके अनन्त काल दरी च्वमाक आवष्खता भासके तछ इक तदाशनिक उचाई आछी जदे केवल जीत आहार नहीं होई तछ बलकी कर्म अउकर परिणाम होई तछ अछी. अमर भाबाक वेदिपर च्माक प्रार्त्ना इसिध करेत अची जे मानवताक सर्वोच रूप, हिंसक उलास में नहीं बलकी हिंसक अ परिहारियता पर दुक प्रकत करबामे अची ओ दिया जे गाड पर जरेत अची ओ केवल जीद कप्रकाष नहीं अची उ उही निर्दोशक लेल जरल एक तश्वोक दीप से हूँए जे याद दियाबे तची, जे यूद में जकन तरवारी उठाई तची, तटराजुक सन्तूलन बिग्डी जाई तची, अवक्रा वापस लाभे लेल सद्यो दरी च्यमा मांगभ आवश्षक बहजाईता चे. आहा के य विष्रेषक बहुत सुख्ष्मज़ेच. और हम माने ची जे आई हमर स्वेंके विचार करबाक तरीका में कनी विस्तार बहगे लेच. हा, हम रो. दूनु द्र्ष्टी कोनक अपन अपन अदार स्थ्रोट समगरी में स्पष्ट रूपे विद्खमान अची. इसत्ते अची जे गजंद्र थाकुरक इकता कोनो सीदा सादा लोक अचाथा वा केवल एक ता अक्ष्टन से बभरल मिखख नहीं अची. इमानव्द्र्म, कर्म, सक्ती समीकरन, अन्याय अन्यायक, एक्ता अत्यंत जटिल अद्दार्ष्निक रच्ना आच्ना आच्छी. एक्दम सत्यकालों. जते हम्रा आमर्भाबाक स्वरूप में, एक्ता अदम्म्य रक्षक दिखाए च्छती, जे प्रक्रति अ समाजक लेल आपन प्रानक आ आपन आत्मक भाजी लगाई देच्छति ओते आहाके उब्जल त्रास्दिक एह्साज दिखाई तची तुनु पक्छ आपन ताम से एक तागान सत्यक उद्खाटन करे तची आदो सर्दी समाज के आत्मेक रक्षा इक दम सही इक खता क सुन्दर्या ही आची जे इक उनो एक तसरल साथा उतर नहीं देगी तची इक हम्रा सब के मजबोर करे तची इक हम्रा सब रक्षक का तर्वारी अन्यायक तराजुक भीचक मनोवैग्यानिक दुन्ध के भूजी आप भूजव अवष्षक अची इग खता एक संगे कमला मदिंगे लहरी जका चन्चल आ उत्बे गही रची जते सुर्जिक प्रकास मे इग खता सुवनजका चम कै तची रक्षकक गात्था गावी तची, उते राटिक अन्यार में इक टा गहिर उदासी से हो समेट ने आची. इक टा एहन विमर्ष, जते रक्षकक सहस आहिंसाक त्रास्दी, दून्नूपर समान रुपे विचार कल जाए, वास्तो में, अमरा सबक समजके व्यापक वन वेईताशी ता आएक हमर यी बोद्धिक विमर्ष एह निसकर्ष पर आवएईताशी जे आमर भाबा कता कोनो एक तरंग में नहें रंगल जासकी तचे शोटागन आब यी आहा के विचार करबाक अचे आहा सब सोचु जखन आहा कमला नदिक उही कलपित गाट पर धाड़ा हुएप आनिरमल जल्क प्रतिविंद में ताकब, तक टक इहा के उही जल में दरमक रक्षाक के लेल उठलेक ताचमकए तर्वारी देखाई तची, वा उही रक्त रन्जित इतिहासक कारन असीम उदासी सबहरल नयक तराजू। की आहा हुंका एक ता रक्षक के रूप में देखे ची जकर काज पूँथ ता नयायो चिछल वा एक ता एहन तरासध नयक के रूप में जक्रा आपनी काज के लेल अन्न्त काल दरीक श्हामा मागे परी रहाला चे इक ता आँा स्वेम पड़ी आर एही पर विचार करी कारन नीक साहित ते उही होई तची जे उतर नहीं दे तची बलकी नवक प्रस्नट ठाड करे तची दबेट से आएक लेल बस इत भे दश्वाद दश्वाद

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