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चारि_उत्तर-आधुनिक_नाटक.mp4
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- 0:00–0:02सवागते थी आहा सबक आई गजजब विश्छलेषन में
- 0:02–0:03आओ, सोजे विष्छे पर आवेच्छे
- 0:03–0:07गजिंद्र तहाकृर कालुचनात्मक निबंद पर आदारित इविश्छलेषन
- 0:07–0:10हमरा सबके एक तो बहुत नीक परी प्रेख्ष दैई तैई छे
- 0:10–0:14अम सब देखाब जे कोना एक तसम कालीन मेठली नातक वेश्विक उत्तरादूनिक
- 0:14–0:18यानी पोस्ट मोडन, कलासिक रच्ना सबक संग कान सकान मिलाके तान अचे
- 0:18–0:21सच पुछुत यास साहित्तिक कोनु सीमन नहीं होईचे
- 0:21–0:25तो आएक ए बोदिक यात्रा करूप रेखा किच एतर हरहत,
- 0:25–0:28हम सब विदे हम मेठली साहित्ते सन शुरू करके,
- 0:28–0:35वेश्विक उत्तरादूनिक रंग मन्च भार्तिये परिद्रुष्य अपहेर नो अंट्री स्माप रवेश पर बात करव.
- 0:35–0:41अकर बाद मरनोपरान्त जीवन में नहित व्यंगय अ अन्त में साहित्तिक परमपरा का कंडन दरी पहुचव.
- 0:41–0:43चलू आगा बड़ेई ची.
- 0:43–0:47तस सबस बहली विदेह आम मेत्ली साहित्तिक एजे आदार बूमी चै,
- 0:47–0:50तकर सांस्क्रितिक परिद्रुष्यके समजब जरूरी आची.
- 0:50–0:57आहाजे विदेर इप पत्रिका आगाजेंद्र ताकुर कक आलोचनात्मक काज प्रबंद निबंद समालोचना देख्राल ची,
- 0:57–1:01इदर असल मेतली साहित्यक अगाद गेराए के सोजे अनेद आची.
- 1:01–1:08मेतली बाशक जे विमर्स चे उकोनो आयकालिक नहीं बल गी बहुत कंभीर समकालीन अविस्त्रित रहल चे,
- 1:08–1:14आ ये हे उ मजबूत आदार भूमी चे जदे इसे एक गंभीर साहित्तिक विष्लेशन निकललएज.
- 1:14–1:19आब आगम बदबा सबहिला वेश्विक उतर आदूनिक रंवन्च यानी,
- 1:19–1:24गलोबल पोस्ट मोडन �theater अक परद्रष्खे एक बेर देख लेब आवश्षक चे.
- 1:24–1:30अबसर्टिस त्रामा यानी विसंगत नाटक ये एक ता इहन नाट्ते विदा चे,
- 1:30–1:34जे पारमपरिक कतावस्तु सों एक दम अलग रहेत अचे
- 1:34–1:36एक रमुख्या फोकस रहे चे
- 1:36–1:39अस्तित्वावादी भाई, निरर्ठक प्रतिक्षा,
- 1:39–1:41आम आनविय स्तितिक, भे तुकापन पर
- 1:41–1:43इबूजु जे यू चश्मा चे
- 1:43–1:48जखर माद्यम्सुं हम सब आंगाक पूरा विष्लेशन के निक चकाबूजी सकब.
- 1:48–1:54आजगन बात अबजर्दिस त्रामा कोई चे, तसम्ल बाकेट ककोना बिस्री सकेझची.
- 1:54–1:59उनिसो पचास कदशक में औए विद्धा के एक दम्सा अग्रिम पंगती में आन्तिलनी.
- 1:59–2:03अगर खुबी इचे जे आई में प्रतिक्षा आप ने आप मेंटा गड़ना बनी जाई तचे.
- 2:03–2:09ता एक गलोबल ख्लासिक्स में भ्योल की, जे पारम पर एक कता के समपून रूप सत्याग देलगेल,
- 2:09–2:11अपने आप मेंक्ता गटना बनी जाई तचे.
- 2:11–2:13ता आ एक गलोबल कलासिक्स में भहल की
- 2:13–2:17जि पारम पर एक कता के समपुन रूप सत्याग देलगेल
- 2:17–2:19जेना वेटिंग फो गुडो में वलादिमीर
- 2:19–2:22और एस्टरगोनिक अनन्त आब भेतु का प्रतिक्षा आची
- 2:22–2:26जदे कोनो अर्थ पुन बात नहीं चे बसमवाद दोरावाल जाएचे.
- 2:26–2:31तो सर्दीस, उनीस सो अंटावन का हेरार पिंटर का दे बफ्ट्डे पार्टी देखू,
- 2:31–2:35इगे रहेस यमाए खत्रा अब बोडिंख हाँस के समान ये जीवन के मिलागग,
- 2:35–2:38समाजका एक ता डरावा रूप प्रस्तूत करेत ची,
- 2:38–2:41इस सब आपन समएकम मास्तर पीस चे.
- 2:41–2:45मुदा, इग ल़री मात्र पाश्चात्तिद हरी सीमित नहीं रहल,
- 2:45–2:50आव देखेचची, जे भ्हारते पर द्रिष्श मे आई उत्तरादूनिक्ताक की प्रभाव पडल.
- 2:50–2:55जना हम कहलों इगलोबल लेहरी भारत में से हो अपनस्तान बने लक.
- 2:55–3:02बादल सरकारक उने सो पैहसेट का बंगाली नाटक एवम एंद्रजीत एकर पहोत नी कुदारन चै.
- 3:02–3:32आई में मुख्य पात्र इंद्र जीत समाजग बान्दल नियम सव पहर निकल बाक लेचचद पताई तची, संगर्ष करे तची, मुद्दा अन्ततव उक्रा बोद हो इच्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च
- 3:32–3:36उदेनारायन्सिं नचिकेता जीक रचित य उतक्रुष्ट नाटक,
- 3:36–3:40कुल चार कलोल, यानी चार अंक में आगामबड है च्ये,
- 3:40–3:44एकर बनावद बद दिल्चस पची, पहिल कलोल में स्वर्ग अननरग कद्वार
- 3:44–3:47पर आत्मा सपक भीर जमा हुई तची, दोसर में,
- 3:47–3:50एक तनेता अवाम पन्तेक प्रवेश होई तची
- 3:50–3:52तेसर कलल में तगद्बन्दन बनेच चे
- 3:52–3:56जते एक तम्रित अबहीनेता आपन उपनाम हटाबा चाहत ची
- 3:56–4:00आपहेर अंतिम कलल में द्वार परजे रहस्योद खाटन होई चे
- 4:00–4:02उआप एक दम्सच चुंका दे तची
- 4:02–4:07आब एी तुलना देखू, एव विष्यगत विरुदधा बास कते गजब चे.
- 4:07–4:10एक दिष वेटिश गोडो का मिनमलिस्ट द्रुष्या ची,
- 4:10–4:12जटे एक ता सून्सान सडग, मात रेक्ता गाच,
- 4:12–4:15अपात्र रहस्यमए प्रतिक्षा करहल चती.
- 4:15–4:20अदो सर्दिस नो एंट्री माप्रविष में मरनो पराव्ण्त जीवन के बंद द्वार ची,
- 4:20–4:25जटे अलग-गलक तरह के भितुका आत्मा सबक एक ता भारी अव्यवस्तित और
- 4:25–4:28प्रवेशक बीड बिड बिटर प्रवेशक लिल ठाडज.
- 4:28–4:34पूरा के आज्मचल चाई अक ते इजे मरनो परान्तक जीवन चे आईमे व्यंग्यक जे च्हूक लागल चे,
- 4:34–4:40उक्रा समजनाई बहुत जरूरी चे. देखो कोनाई पाखंडक रास्यास पद रूप सामने आने देई चे.
- 4:40–4:48स्वर्ग आन्नरक द्वार पर थाड पात्र सब समाजिक और राजनितिक पाखच्णद पर जिना कडा प्रार करे च्छती.
- 4:48–4:55एक चा नेता के वोकर जाली उमर प्रमान प्रक का कारन उपर से प्रिथवी पर वापिस प्ठादेल जाए च्छे.
- 4:55–4:57मतलप उत हु पर जीवाडा.
- 5:10–5:12उपनाम हतावाक ले गिडगिडाई च्छती
- 5:12–5:14अवाम पन्ती महोदेता
- 5:14–5:16उतो हु चोर सब के सुद्ठर्बक ले
- 5:16–5:18राजनिती में लागल च्छती
- 5:18–5:20कमालक बाच्छ नहीं
- 5:20–5:22दूर परग के इस्तितित पूरन तया
- 5:22–5:24भितुका आहास्यास्पत बहुर जाईताई ची
- 5:24–5:28सुचु, एक तबीमा इजन्त बिना मरले उताई पहुच जाईता ची.
- 5:28–5:34मरनो परान्द जीवन में से हो वी आपी सूविदा के लेल एक ता �alag panti lagi rahal शे.
- 5:34–5:36वाम पन्ती नेता के बहार से समर्ठन्दा रहा लग ची.
- 5:36–5:43अर सब से हाँ स्यास पत इई, जे यम राज स्वेम प्रेम पड़िजाए चती आपन चाभी ददेच चती.
- 5:43–5:46मतलब अपसर्टिटी को कहनु सीमा नहीं.
- 5:46–5:52मुदा अन्तिम में छित्र गुप तक इखतन समझोंन नाटक कपरी प्रेक्षे के बदली के रखी देचे.
- 5:52–5:55इमोन के दर्वाजा ठेक उना नहीं कुजत.
- 5:55–5:58बूजलिये, बहुत इक रूप से जि बन्द द्वार अचे,
- 5:58–6:00जकर भाहेर नो आंट्री लिखल अचे,
- 6:00–6:04उवास्दव में हम्रा सबक अपन मस्तिष्ट के ताला चे.
- 6:04–6:06इक ता जबर दस दर्ष्निक मोड चे,
- 6:06–6:09जदर्शक्क्के भेटर दरे जगजोरी देतचे.
- 6:09–6:13आब हम सब एई विष्लेशनक अन्तिम पडावपर च्ये,
- 6:13–6:19साहित्तिक परमपरा कखंडन और मेत्फिली इतिहाँस से एकर समबंद.
- 6:19–6:24मैतली में समाज कर नियम के चूनोती देवा के तिब बहुत लंबा परमपर रहल चै.
- 6:24–6:30जते आदूनिक समय में नो एंट्री राजने तिग गत्बंदन, जातिय पहचान,
- 6:30–6:32और अस्तित्वा वादी प्रतिक्ष्यके क्हन्दन करे तची,
- 6:32–6:35अदे श्टाब्दियो पैने महाकवी विद्ध्यापती
- 6:35–6:37अपन अटिहासिक कवीता में
- 6:37–6:40कथोर जातिय नियमक विरुद करत कहने चला
- 6:40–6:43जिस सब पैग लोग एकी जातिके होए च्छतीं
- 6:43–6:45इज़ वैचारिक निरन्तरता चेना
- 6:45–6:47इवास्तव में प्रेडना दायक छे
- 6:47–6:51इदेखवाई च्याजे मैठली साहित यक देख प्रोग्रसिव रहल च्याजे
- 6:51–6:55ता एक ता बहुत पहेख प्रष्नसा आहा सब के चूडिके जारहल ची
- 6:55–6:59जो उद्वार जक्रा पार कर वाके लिल हम सब एतेख प्रतिक्षाक कै रहल ची
- 6:59–7:02अके वल हम्रा सब के आपन मनेक ताला चे,
- 7:02–7:05ता हम सव वास्तव में कक्कर प्रतिक्षा कै रहल ची.
- 7:05–7:08इविस्लेशन हम्रा सब के इस शोचने पर विवष करे चे,
- 7:08–7:11जे बन दन बाहर नहीं हम्रा सब के भीतर चे.
- 7:11–7:14हम्रा आशा ची जे आई विषेपर आहा सबसी हो विचार करव.
- 7:14–7:18आई बवदिक अनवेशनक लेज़़ा बनवाख लेल बहुत-बहुत दन्नेवाद
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सवागते थी आहा सबक आई गजजब विश्छलेषन में आओ, सोजे विष्छे पर आवेच्छे गजिंद्र तहाकृर कालुचनात्मक निबंद पर आदारित इविश्छलेषन हमरा सबके एक तो बहुत नीक परी प्रेख्ष दैई तैई छे अम सब देखाब जे कोना एक तसम कालीन मेठली नातक वेश्विक उत्तरादूनिक यानी पोस्ट मोडन, कलासिक रच्ना सबक संग कान सकान मिलाके तान अचे सच पुछुत यास साहित्तिक कोनु सीमन नहीं होईचे तो आएक ए बोदिक यात्रा करूप रेखा किच एतर हरहत, हम सब विदे हम मेठली साहित्ते सन शुरू करके, वेश्विक उत्तरादूनिक रंग मन्च भार्तिये परिद्रुष्य अपहेर नो अंट्री स्माप रवेश पर बात करव. अकर बाद मरनोपरान्त जीवन में नहित व्यंगय अ अन्त में साहित्तिक परमपरा का कंडन दरी पहुचव. चलू आगा बड़ेई ची. तस सबस बहली विदेह आम मेत्ली साहित्तिक एजे आदार बूमी चै, तकर सांस्क्रितिक परिद्रुष्यके समजब जरूरी आची. आहाजे विदेर इप पत्रिका आगाजेंद्र ताकुर कक आलोचनात्मक काज प्रबंद निबंद समालोचना देख्राल ची, इदर असल मेतली साहित्यक अगाद गेराए के सोजे अनेद आची. मेतली बाशक जे विमर्स चे उकोनो आयकालिक नहीं बल गी बहुत कंभीर समकालीन अविस्त्रित रहल चे, आ ये हे उ मजबूत आदार भूमी चे जदे इसे एक गंभीर साहित्तिक विष्लेशन निकललएज. आब आगम बदबा सबहिला वेश्विक उतर आदूनिक रंवन्च यानी, गलोबल पोस्ट मोडन �theater अक परद्रष्खे एक बेर देख लेब आवश्षक चे. अबसर्टिस त्रामा यानी विसंगत नाटक ये एक ता इहन नाट्ते विदा चे, जे पारमपरिक कतावस्तु सों एक दम अलग रहेत अचे एक रमुख्या फोकस रहे चे अस्तित्वावादी भाई, निरर्ठक प्रतिक्षा, आम आनविय स्तितिक, भे तुकापन पर इबूजु जे यू चश्मा चे जखर माद्यम्सुं हम सब आंगाक पूरा विष्लेशन के निक चकाबूजी सकब. आजगन बात अबजर्दिस त्रामा कोई चे, तसम्ल बाकेट ककोना बिस्री सकेझची. उनिसो पचास कदशक में औए विद्धा के एक दम्सा अग्रिम पंगती में आन्तिलनी. अगर खुबी इचे जे आई में प्रतिक्षा आप ने आप मेंटा गड़ना बनी जाई तचे. ता एक गलोबल ख्लासिक्स में भ्योल की, जे पारम पर एक कता के समपून रूप सत्याग देलगेल, अपने आप मेंक्ता गटना बनी जाई तचे. ता आ एक गलोबल कलासिक्स में भहल की जि पारम पर एक कता के समपुन रूप सत्याग देलगेल जेना वेटिंग फो गुडो में वलादिमीर और एस्टरगोनिक अनन्त आब भेतु का प्रतिक्षा आची जदे कोनो अर्थ पुन बात नहीं चे बसमवाद दोरावाल जाएचे. तो सर्दीस, उनीस सो अंटावन का हेरार पिंटर का दे बफ्ट्डे पार्टी देखू, इगे रहेस यमाए खत्रा अब बोडिंख हाँस के समान ये जीवन के मिलागग, समाजका एक ता डरावा रूप प्रस्तूत करेत ची, इस सब आपन समएकम मास्तर पीस चे. मुदा, इग ल़री मात्र पाश्चात्तिद हरी सीमित नहीं रहल, आव देखेचची, जे भ्हारते पर द्रिष्श मे आई उत्तरादूनिक्ताक की प्रभाव पडल. जना हम कहलों इगलोबल लेहरी भारत में से हो अपनस्तान बने लक. बादल सरकारक उने सो पैहसेट का बंगाली नाटक एवम एंद्रजीत एकर पहोत नी कुदारन चै. आई में मुख्य पात्र इंद्र जीत समाजग बान्दल नियम सव पहर निकल बाक लेचचद पताई तची, संगर्ष करे तची, मुद्दा अन्ततव उक्रा बोद हो इच्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च उदेनारायन्सिं नचिकेता जीक रचित य उतक्रुष्ट नाटक, कुल चार कलोल, यानी चार अंक में आगामबड है च्ये, एकर बनावद बद दिल्चस पची, पहिल कलोल में स्वर्ग अननरग कद्वार पर आत्मा सपक भीर जमा हुई तची, दोसर में, एक तनेता अवाम पन्तेक प्रवेश होई तची तेसर कलल में तगद्बन्दन बनेच चे जते एक तम्रित अबहीनेता आपन उपनाम हटाबा चाहत ची आपहेर अंतिम कलल में द्वार परजे रहस्योद खाटन होई चे उआप एक दम्सच चुंका दे तची आब एी तुलना देखू, एव विष्यगत विरुदधा बास कते गजब चे. एक दिष वेटिश गोडो का मिनमलिस्ट द्रुष्या ची, जटे एक ता सून्सान सडग, मात रेक्ता गाच, अपात्र रहस्यमए प्रतिक्षा करहल चती. अदो सर्दिस नो एंट्री माप्रविष में मरनो पराव्ण्त जीवन के बंद द्वार ची, जटे अलग-गलक तरह के भितुका आत्मा सबक एक ता भारी अव्यवस्तित और प्रवेशक बीड बिड बिटर प्रवेशक लिल ठाडज. पूरा के आज्मचल चाई अक ते इजे मरनो परान्तक जीवन चे आईमे व्यंग्यक जे च्हूक लागल चे, उक्रा समजनाई बहुत जरूरी चे. देखो कोनाई पाखंडक रास्यास पद रूप सामने आने देई चे. स्वर्ग आन्नरक द्वार पर थाड पात्र सब समाजिक और राजनितिक पाखच्णद पर जिना कडा प्रार करे च्छती. एक चा नेता के वोकर जाली उमर प्रमान प्रक का कारन उपर से प्रिथवी पर वापिस प्ठादेल जाए च्छे. मतलप उत हु पर जीवाडा. उपनाम हतावाक ले गिडगिडाई च्छती अवाम पन्ती महोदेता उतो हु चोर सब के सुद्ठर्बक ले राजनिती में लागल च्छती कमालक बाच्छ नहीं दूर परग के इस्तितित पूरन तया भितुका आहास्यास्पत बहुर जाईताई ची सुचु, एक तबीमा इजन्त बिना मरले उताई पहुच जाईता ची. मरनो परान्द जीवन में से हो वी आपी सूविदा के लेल एक ता �alag panti lagi rahal शे. वाम पन्ती नेता के बहार से समर्ठन्दा रहा लग ची. अर सब से हाँ स्यास पत इई, जे यम राज स्वेम प्रेम पड़िजाए चती आपन चाभी ददेच चती. मतलब अपसर्टिटी को कहनु सीमा नहीं. मुदा अन्तिम में छित्र गुप तक इखतन समझोंन नाटक कपरी प्रेक्षे के बदली के रखी देचे. इमोन के दर्वाजा ठेक उना नहीं कुजत. बूजलिये, बहुत इक रूप से जि बन्द द्वार अचे, जकर भाहेर नो आंट्री लिखल अचे, उवास्दव में हम्रा सबक अपन मस्तिष्ट के ताला चे. इक ता जबर दस दर्ष्निक मोड चे, जदर्शक्क्के भेटर दरे जगजोरी देतचे. आब हम सब एई विष्लेशनक अन्तिम पडावपर च्ये, साहित्तिक परमपरा कखंडन और मेत्फिली इतिहाँस से एकर समबंद. मैतली में समाज कर नियम के चूनोती देवा के तिब बहुत लंबा परमपर रहल चै. जते आदूनिक समय में नो एंट्री राजने तिग गत्बंदन, जातिय पहचान, और अस्तित्वा वादी प्रतिक्ष्यके क्हन्दन करे तची, अदे श्टाब्दियो पैने महाकवी विद्ध्यापती अपन अटिहासिक कवीता में कथोर जातिय नियमक विरुद करत कहने चला जिस सब पैग लोग एकी जातिके होए च्छतीं इज़ वैचारिक निरन्तरता चेना इवास्तव में प्रेडना दायक छे इदेखवाई च्याजे मैठली साहित यक देख प्रोग्रसिव रहल च्याजे ता एक ता बहुत पहेख प्रष्नसा आहा सब के चूडिके जारहल ची जो उद्वार जक्रा पार कर वाके लिल हम सब एतेख प्रतिक्षाक कै रहल ची अके वल हम्रा सब के आपन मनेक ताला चे, ता हम सव वास्तव में कक्कर प्रतिक्षा कै रहल ची. इविस्लेशन हम्रा सब के इस शोचने पर विवष करे चे, जे बन दन बाहर नहीं हम्रा सब के भीतर चे. हम्रा आशा ची जे आई विषेपर आहा सबसी हो विचार करव. आई बवदिक अनवेशनक लेज़़ा बनवाख लेल बहुत-बहुत दन्नेवाद