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विदेह_शब्दकोश_आ_मैथिलीक_डिजिटल_भविष्य.m4a
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- 0:00–0:091891 आईजकन पहल भेर एक ता विवस्तित बाषा सरवेख्ष्ष्ड भेल्चल जोर्ज ग्रीर्ष्श्ण्च सरवेख्ष्ष्ड
- 0:09–0:10एक दम सत्य?
- 0:10–0:17तो उही में लग बख एक करोड लोग के एक ता विषिष्ट बाषाक वक्ताक रूप में दर्जगेल गल चल.
- 0:17–0:20मुदा 60-70 साल के बाद माने
- 0:20–0:22उन्नी स्व एकसट्के जन्गडना में
- 0:22–0:25उसंख्या अचानक खसिक का आदा बहगेल.
- 0:25–0:28राग, सीदा उन्चास लाक पराभीगेल?
- 0:28–0:31सोचुता, कोनो युद्द नी भेल चल,
- 0:31–0:33कोनो एहन महामारी नहीं आएल चल,
- 0:33–0:35जे आदा अबादी के समाप्त कर दे.
- 0:35–0:37लोग शारिरिक रूपिन्त होते चला?
- 0:37–0:42आँ, मुदा कागजी आख्डावा, हुनक भाशा जेना विलुप्त बरहल चल.
- 0:42–0:46आँ, इवाकग एक ता बदपएग रहेस चे.
- 0:46–0:51एक दम, आई कोनो जासुसी कताने आची, बलकी एक ता वस्तविकता आची.
- 0:51–0:57आई हम सब जे स्रोथ समगरिक के गेराई में जार अल चे अकोनो सादारन पोती नै अची
- 0:57–0:58ने ने बलकल नहीं
- 0:58–1:04इई 4 करोड से बेशी लोकक अपन भाशा के बचेबाक, उक्रा आप्शूनिक बनेबाक,
- 1:04–1:08आब हविष्ष्चक दिजितल दुन्या लेल तट्यार करवाक एक ता जीवंद दस्तावेज अची.
- 1:08–1:09सत्य.
- 1:09–1:17आजुक एही गज्ञन चर्चाक विश्य अची 2012 में प्रकाषित विदेह अंग्रेजी मेठली शब्द्खोश
- 1:17–1:23जे गज्जंद्र ताकृ नागेर इर्कुमारज्या अपनजिकार विद्या नंजा दुरा और अची तची
- 1:23–1:32अज, अज संगे हम्रा सब एक पास जी प्रुफेसर उदै नारायन सिंग कर लिखित एकर अद्यन्च्छोद परक एतिहासिक प्रस्तावना
- 1:32–1:36जी तत्कालीन केंद्रिय भार्ति भाशा संस्तान मैसुर का निदेशक चला
- 1:36–1:37जी.
- 1:37–1:40ता आई हम सब यी भूजबाक प्रयास करव,
- 1:40–1:42जे कोनो एक ता दिक्षनरी,
- 1:42–1:43भाशाक संगर्ष,
- 1:44–1:47औगर पुनर जन्मकर अस्ट्र बनी जाईता ची.
- 1:47–1:47आहा जी.
- 1:48–1:51उही जन्गरनाक आख्डाक गिरावड़ से बात शुरूके लू,
- 1:51–1:54अगर वास्तो में एही पुरा विष्यक दूरीया ची.
- 1:54–1:55कोना?
- 1:55–1:56अखसर लोक मानी लएच्छती,
- 1:56–1:59जे दिक्षनरी मात्र एक तद्सन्दर्ब ग्रन्त छी.
- 1:59–2:01मैंने जाही में शब्द,
- 2:01–2:04अगर अगर अगर अगर अगर नीरस सुची होई दची.
- 2:04–2:07इकta moto san po thi bas aarth khojbāk leil.
- 2:07–2:12मदवास्तमे उंक्त शब्दकोश कोनो समाज का इतिहास,
- 2:12–2:18उकर भगोलिक उतल पुतल और राजनतिक उपेक्षाक सबसे प्रमानिक गवा हुईत आची.
- 2:18–2:23औहो! माने यी सरफ अंगरेजी सम्मेठिली अनुवाद कर सादन ने आची.
- 2:23–2:28बिल्कुल नहीं प्रुपेसर सिंख का प्रस्तावना अस्पस्ट करे ता ची
- 2:28–2:58जे यी तिरहुता लीपी सलोक अंतराश्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्
- 2:58–3:02अग, वो सोला सो चारी का रोबट काउट्रेक पोठीक
- 3:02–3:03सत्या
- 3:03–3:08जेना लागत अची, अंग्रेज सबहे शब्द के सहेज कर रक्बाक, कला का विषकार किलनी
- 3:08–3:11मुदा एदारना सत्या सब बहुत दूर अची भूजली है
- 3:11–3:41आँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँ�
- 3:41–4:11तो गरा अपन ग्यान के मानकी क्रित कर बाक आवश्क्ता हूँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँ�
- 4:11–4:17मुदा आई भारत कजे अटिहासिक संदर बते देल गैल अची और हमरा बहुच चकित के लक.
- 4:17–4:20आँ, प्राचीन बारतक परमप्रा वागई अदबुत अची.
- 4:20–4:24शब्द कोश कोनो भाशा किलिए एक तस समय कआप्सूल जका आची
- 4:24–4:27जही में उही समयक लोकक सोच सुरक्षित रहेत अची
- 4:27–4:28सत्ते कहलों
- 4:28–4:30एही संदरव में प्रस्तावना में
- 4:30–4:35साथ सो इसापूर्व, निगंटू, अयास्क का निरुक्त का चर्चा आची
- 4:35–4:38मुदा एता हमरा मुन मेक्ता सन्षे आची
- 4:38–4:43प्राचिन भारत्मे तग्यान मोखिक रूपे हस्तान्तरे थोईत्तलने
- 4:43–4:48आप, जिक्रा हम सब श्रूती परमप्रा कहिच्छी, पीडिदर पीडि सुनकम मौन राखभ
- 4:48–4:53तफेर वेदक सन्रक्षनक आवष्च्ता कोना ब्याकरन,
- 4:53–5:01आर एक जटिल शब्द सन्रचनाक जन्मदेलक, माने दर्मक अनुष्टान सां बाशा विग्यान कोना निकली आयल.
- 5:01–5:06इबहुत गहीर बात आची बुजलिये करन शुति परमपरा में,
- 5:06–5:10जो आहा एको ता स्वर्वा दूनिक उच्चारन गलत करे ची.
- 5:10–5:12तपूरा वेदिक मन्त्रक आर्थ बदली जातची
- 5:12–5:13एक्दम!
- 5:13–5:15अनुश्धानक शुद्था
- 5:15–5:18पूरन रुपेन दूनिक शुद्था पर निरबर करे चल
- 5:18–5:19औहो!
- 5:19–5:21तकंत बरो सावदानिक का चल
- 5:21–5:23ताही लेल य आवश्षक चल
- 5:23–5:25जे शब्द के अगर मूल रुप में
- 5:25–5:27ताला लगा कषुरक्षित की याल जाए
- 5:27–5:29ताला लगा कषुरक्षित की लगा
- 5:29–5:35इते सां प्राचीन, वैया करन सब एक ता अद्बुत वैग्यानिक विदी निकालन ही
- 5:35–5:41उ, वैदिक वाएक सब के शब्द में आश्वद के उकर जरी में कहन्धित करव शूरू के लेन ही
- 5:41–5:44ज़ी माने दातूर प्रत्तैमे
- 5:44–5:50आप, कोनो शब्द कोना बनाला ची, उकर दातू की आची, उही में प्रत्तै की लागल आची
- 5:50–5:53इता एक्दम गनितिया विष्लेशन जका बहुगेल
- 5:53–6:00भिल्कुल, इजे गनित्या विष्लेषन चल उ प्राछीन भारत्मे दूनी विग्यान और रूप विग्यानाग जन देलक.
- 6:00–6:06मने मन्त्रक उच्चारन के दूषित होभे से बचावे किल, उसबह शब्दक एनाटोमिक अ दिलने.
- 6:06–6:12आप इक रा कोनो द्हारमिक काज नहीं बलकी पूरन रूपे न एक ता वग्याने कोडिं माने सके ची.
- 6:13–6:21इता वाकई बहुत आदूनिक सोच च्छ चिल आएकर किच्छु शताब्दी बाज्जकन संस्क्रित में आमर सिंगक आमर कोश आयल.
- 6:21–6:23जे चद्हम शताबदिक रचना जे
- 6:23–6:26आ, तो उ कोनो सादारन दिक्षनरी नहीं रहल
- 6:26–6:30श्रोथ सामगरी में एक ता आश्चर्य जनक तत्ते आचे
- 6:30–6:34जे आमर्कोष पर कम से कम चालीस्ता अलग �alak teeka लिखल गेल
- 6:34–6:36आ, चालीस्ता तीका
- 6:36–6:38अगी में तीका की करव?
- 6:38–6:40आख प्रश्न बरनी कची
- 6:40–6:42इबात प्रमानित करे तची
- 6:42–6:44जे आमर्कोश मात्र शब्दक सुची नहीं चल
- 6:44–6:46तकी चलो?
- 6:46–6:48अपर्याए वाची शब्दक
- 6:48–6:50एक ता एहन विचारी ग्रन्त चल
- 6:50–6:52जे सन्सार के वर्गी केट करे चल
- 6:52–6:54अचा
- 6:54–6:57जे सन्सार के वर्गी केत करे चल
- 6:57–6:58अच्छा
- 6:58–7:00स्वर्ग, पाताल, प्रिठ्वी, वनस्पती
- 7:00–7:02इस सब कोना एक दूसर सा जूल अची
- 7:02–7:04उकर वरनन चल
- 7:04–7:06विद्वान लोकनी एही वर्गी करन
- 7:06–7:08पर शास्ट्रार्थ करे चला
- 7:08–7:10मैंने नव शब्द जूल
- 7:10–7:12अगरान शब्दक अर्थ बदले चल
- 7:12–7:19आई, ताही लेल औटीका सब वास्तव में उई समयक अपन सोर्स सोफ्ट्वेरक अप्टेट जगा चल.
- 7:19–7:24आई, वाज, अपन सोर्स सोफ्ट्वेर का अप्टेट ये बहुत नीक तुलना चै.
- 7:24–7:28जक्रा विद्वान लोकनी अपन अपन समय में अप्टेट कर अच्टला.
- 7:28–7:33आई बाद्दिक परमपरा मात्र संस्क्रित दरी सीमित नहीं रहाल?
- 7:33–7:36आई, प्रोफेसर सिंग बहुत सुन्दर तुल्ना कराई चति.
- 7:36–7:40एक दम. उ कहे चति जजकन अंगरेजी साहित्त में
- 7:40–7:43चोसर अपन शुर्वाती पोथी सब लिखि रहाल चला.
- 7:43–7:51उ लगभग उई समें में में वीठली में जोती रिष्वर आपन महान गरन्त वरन रत्ना कर रची रहल चला.
- 7:51–7:53आप, यह कोनो चोट बात नहीं आची.
- 7:53–7:58इटुन्ना सूनी का गर्व होई तचीर मेंठली भाशाक साहितिक इतिहास,
- 7:58–8:02अंग्रेजिक समानान्तर वा अख्रासक किछु पहिनू कची
- 8:02–8:03सत्ति आची
- 8:03–8:04इप
- 8:04–8:08मुदा इतिहास का पन्नासा जकन हम वर्तमानक भोगोलिक वास्ट्विक्ता पर अवेच्ची
- 8:08–8:11अईता इस्तिती बहुत जतिल बोजगेट ची
- 8:11–8:14अग, बूगोलक वास्त्विक्ता ते एक दम गलग अची
- 8:14–8:21अकसर एक ता मित्ख अची, जे मेत्लिक अर्थ मात्र भिहारक मित्ला चेत्र, मने दर्भंगा मदूबनि किचु जिला
- 8:21–8:24इप बहुत पैग ब्रम चाई लोक में
- 8:24–8:30मुदा प्रस्तावना में भाशाक जे भबगोलिक आजन सांखिक यह परद्रिश्ष्खी चल गेल आची
- 8:30–8:33उ अकल पनी रूपेन विशाल आची
- 8:33–8:34बहुत विशाल आची
- 8:35–8:39भबगोलिक रूपेन य मात्र उत्र भिहारक सम्तल मेडान दरी सीमित नहीं आची
- 8:39–8:41ता एकर विस्तार कते दरो की अची?
- 8:41–8:44एकर विस्तार नेपालक तराए चेटर दरी अची
- 8:44–8:48जते नेपालक लगभक चोदा प्रतिषत आबादी मेठली बजगी तची
- 8:48–8:51चोदा प्रतिषत? इत बहुत पैक संख्या भेल?
- 8:51–8:52एक दम
- 8:52–8:55एकर संगे जार्खन्डक किचु हिस्सा
- 8:55–8:59जेनाक सन्ताल पर्गनाक छेट्र उते सहुई मेठलिक प्रभाव अचे
- 8:59–9:00अहो
- 9:00–9:02मुदा इस शीमा सब कुनु पक्की दिवाल नहीं आचे
- 9:02–9:07भूगोल आप प्राकरतिक माईर कुना भाशाक प्रभाविद करे था ची
- 9:07–9:10एकर सबसे पहग उदाहरान आचे कोषी नदी
- 9:10–9:15कोशी नदी मुदा नदीक दारा बदलेबा से बाशा की लेना देना
- 9:15–9:19आखी की लागी तची?
- 9:19–9:20लोक तव उत्भे रहाता?
- 9:20–9:24आख, नदी गूम गल तकी लोक तपन गाँ मे रहता ना
- 9:24–9:27नै, लोक उत्भे नहीं रहे चती
- 9:27–9:31पिछला दोसो वर्ष में कोशी साथ बेर आपन दारा बदलना आचे
- 9:32–9:33बाप्रे साथ बेर
- 9:34–9:36आप जकन नदी आपन मार्ग बदले तचे
- 9:37–9:40तलाको लोकक गाँ अखेती पानी में दुभी जाई तचे
- 9:41–9:42तलोक पलायन करी चती
- 9:42–9:43एक दम
- 9:43–9:47अग ताम कब लोक तुस्रा थाम जाकष शरन लएच्छती
- 9:47–9:49उन नव परीवेष मे जाकबसधचती
- 9:49–9:51जटे तुसर भूली बाजल जाई तची
- 9:51–9:52आच्छा
- 9:52–9:54ताईसा भाशिक मिष्टन हुई तची
- 9:54–9:57आखटा किसी माबदलग तची
- 9:57–10:01अक कते को भेर कोनो चेत्र विषेशक भाशा का स्वरूप
- 10:01–10:03पुरन रूपेड बदली जाई तची
- 10:03–10:08माने, बोगोलिक अस्तिरता सीथा सीथा बाशिक अस्तिरता का करन बने तची
- 10:08–10:09शत्यक हल्वा हा
- 10:09–10:14रूखु, प्राक्रितिक अस्तिरता तबुजल में अवाई तची
- 10:14–10:19मुदा जोर्ज ग्रीर्सन जखन 1891 बे में भाशा सरवेखषन किलनी
- 10:19–10:21जगर चर्चा हम सब शूरू में कर लो
- 10:21–10:27आप तो उ मेठलिक वक्ता कषंक्या लग भग भान में लाक मने
- 10:27–10:2992 लाक सब भेसी दर्ज किलनी
- 10:29–10:37मुदा 1961 के जंगर नामा इई संख्या खसी का मात्र उंचास लाग कोना बहगेल
- 10:37–10:41अबादी तशत्तरी साल में शारिरीक रूपेन बहुत भेसी बड़ाल होएत
- 10:41–10:43भिल्कुल अबादी तो बदते ही आची
- 10:43–10:48तसांकिकी रूपेड बाशा बजवाईवला लोक आदा कोना बहस रकाईत छी?
- 10:48–10:54कि कोनो सोचल समजल, राजनीतिक प्रयास चल, बाशा के हिंदीके एक तब उली साभित करवाख?
- 10:54–10:59इप्रश्न प्रफेसर सिंक प्रस्तावना में बहुत तार्किक्ता से उठावल गेल अची.
- 10:59–11:03वास्तब में युकोन प्राक्रतिक जन्सांखि की गिरावद नी चल.
- 11:03–11:04तकनकी चल.
- 11:04–11:08इएक ता प्रशासनिक हेर फेर अब्रामक सुचनक परिनाम चल.
- 11:08–11:10प्रशास्निक हेर फेर कोना?
- 11:10–11:12एक ता समय में इद्दारना पसारल गेल
- 11:12–11:16जे मैत्ली मात्र मित्ला छेत्रक एक ता विषिष जातिक
- 11:16–11:18मुखिरुपे ब्रामब्र्लोकनिक बाशा आची
- 11:18–11:19अब बाकी लोग की बजे च्छती?
- 11:19–11:22ताल गेल जे बाकी लोग हिंदी बजे च्छती
- 11:38–11:41जातिगत संद्रच्ना अउते रहे वाला भिविद समुदायक देखवे
- 11:41–11:45जाही में, मुसलिम समुदायक सो हो एक तबहुत पैग लिस साज
- 11:45–11:52तब इस पष्ट भोजाई तची, जब बना सब जातिक लोग दुरा मेठली के आपन मात्र भाशा मानले
- 11:52–11:55एक रा एक व्यापक समर्तन भेटी ही नहीं सके चल.
- 11:55–11:58तफेर जन्गरना कदिकारी लोकनी कर की रहल चला?
- 11:58–12:01की गाँ में जाके लोग सब पुचल नहीं जाएचला?
- 12:01–12:05पुचल जाएचल मुदा उत एकता और वास्तबिकता काज करो रहल चल.
- 12:05–12:07बहु भाशिकता
- 12:07–12:10बवहु भाशिकता मैं एक से भेसी बाशा बजब
- 12:10–12:17आप, उच्छत्र एहन आची, जटे मेठली, भोज्पूरी, और मगहिक सीमा आपस में जुडा लगची
- 12:17–12:47आई उते बारा से अदिक अदिक आदिक आदिक आदिक आदिक आदिक आदिक आदिक आदिक आदिक आदिक आदिक आदिक आदिक आदिक आदिक आदिक आदिक आदिक आदिक आदिक आदिक आदिक आदिक आदिक आदिक आदिक आदिक आदिक आदिक आदिक आदिक आदिक आद
- 12:47–12:52अन्यबाशाजिन नेपाली, भंगाली, सन्ताली, मुन्दारी आदी से हो भाजल जाईताचे
- 12:52–12:53भलकोल
- 12:53–12:57तकन गाओक एक तक किसान से जकन अदिकारी पुचेट ची
- 12:57–13:00जे आहा की बजेट ची, तो उ कन्फुज भो जाईताची
- 13:00–13:03वा अदिकारी स्वयम आपन सुभिदा
- 13:03–13:07या उप्रक आदेश के कारन ओते हिंदी दरज कर लेत जी.
- 13:07–13:09आप यही वास्तविक ता चलो इसमाएक.
- 13:09–13:16माने वास्तविक वक्ताक संख्या अ सरकारी आक्डा मे इत्तिक पाएक जोल एही कारने चल.
- 13:16–13:19मुदा बाद में तिस थित्या सुदरली नहीं?
- 13:19–13:20दर्ली जरुर
- 13:20–13:25दूहाँचार एक कजन गरना में एई संक्या एक करोड एकीस लाक दर्ज भेल
- 13:25–13:34मुदा प्रफेसर सिंग अपन लेक में स्पप्ष्ट दाभी करहल चतीन जे वास्तवेक संक्या लगभक चार करोड अचे
- 13:34–13:35आज चार करोड
- 13:35–13:49वो था आईए संख्याक विवाद आस समविदानिक रूपेन बाशा के नकारे बागजे प्रयास भेल, उ बाशा के मारवाग के बडला में उक्रा ज्हून मजबूत कुना कदे लग.
- 13:49–13:51इएक ता बहुत नीक सवाल आची.
- 13:51–13:59प्रफेसर सिंग लिखने च्धिन जिस समविद्धानिक अदिकार के नकारब मेठलिक लेल एक ता अप्रत्यक्ष वर्दान साभिद भेल
- 13:59–14:03कुनो चीस के दबावें से उवर्दान कोन अब हो सकेच
- 14:03–14:08ये मानव मनोविग्यान अ समाज्शास्त्रक बहुत रोचक पहलु अची भूचली एग
- 14:08–14:10जक्हन कोनो समुदाय के लागत अची
- 14:10–14:13जे अकर पहचान मिटोल जार अल चे
- 14:13–14:15अकर अस्तितवःपर संकत अची
- 14:15–14:20तो उकर भीत्रक सांस्क्रतिक उर्जा ज्वाला मुखी जका फेटे तची.
- 14:20–14:21अहो!
- 14:21–14:27जखन मैठिली के समविदानक अश्टम अनुसुची में शामिल करवासो रोकल जार अल चल,
- 14:27–14:31तो एक रास साहित्तिकार, यूवा आआम वकता के अदिक उर्जा भेटल.
- 14:31–14:35उ आख्रोश एक ता रच्नात्मक आन्दोलन में बदली गेल
- 14:35–14:37एक दम लोग अग्टिक स अदिक पोठी लिखा लगला
- 14:37–14:39नु नाटक करे लगला
- 14:39–14:41सहेट्तिक पत्रिका निकाले लगला
- 14:41–14:45माने, बाशा के बचाबाक लेल सब आपन अपनस्तर पर
- 14:45–14:46काज करे लगला
- 14:46–14:50परिनामि भेल, जे सहत्तिक उपपदक्ता के मामला में
- 14:50–14:54मैइत्ली, मनीपृपृगी, अग्डिन, नेपाली, या सिंदी संबाश्या के पाचु चोडगे लग.
- 14:54–14:56जे पहिनेसा आश्टम अनूसुची में शामिल चाले.
- 14:56–14:57इता कमाल बहगेल?
- 14:57–14:58आग्डम.
- 14:58–15:03अन्तता स्वकार के इजन भावना अ सहित्तिक प्रमानकागु जूक्के पडल
- 15:03–15:05आ मैइत्लिके आश्टम अनुसुची में शामिल का याल गल.
- 15:05–15:08इएक ता बाशाक अदम या जीजी विशा आची.
- 15:08–15:09सत्ते कालु.
- 15:09–15:12इजीजी विशाता एक्दम उही पोरानिक पक्षीजका आची
- 15:12–15:16जे अपने ही भस्मस नव जीवन पावी का उडे तची
- 15:16–15:18एक्दम सती कुप मा ची
- 15:18–15:20मुदब भाशक इब लडाई मात्र साहित्यव
- 15:20–15:23वा कविता लिखबादरी सीमित नहीं रहाल
- 15:23–15:27आद्र प्रवेश होताची इनव विदेहे शब्दकोश कर
- 15:27–15:29आजे एह चर्चाक मुख्य बिन्दू आची
- 15:29–15:33जोकन हम एकर अंग्रेजिक एक हन्दक प्रविष्टी सब देखए चे
- 15:33–15:37तई कोनो पुरान अजायब गरक वस्तू नहीं लागत आचे
- 15:37–15:38आई आई
- 15:38–15:43इी मात्र गाज पाती नदी वग खेटकर शब्दकोष नहीं अचे
- 15:43–15:49इत सीथा क्मपूटर विग्यान, सोफ्टवेर और आदूनिक तकनीक सभीर रहल अचे
- 15:49–15:51आहा जे उदाहरनक बात करोरजी
- 15:51–15:54उवास्तम एई शब्दकोष अचे सबसे क्रान्तिकारी हिसा आचे
- 15:54–15:58एक रकिच उदाहरन देखी के हमरा बडा आश्चर्यबेल
- 15:58–16:00इदिक्षनरी इदटाए करो हाल अचे
- 16:00–16:03जे नव पीडी के तकनिक के भुजवा के लेल
- 16:03–16:05अंग्रेजी पर निरभर नहीं रहे पडे
- 16:05–16:07जे ना, अपसलुट अद्रेस
- 16:07–16:09जे कम्फुटर प्रुग्रेम्म्म कर शब्द चे
- 16:09–16:12अख्रा लेल एह में निर्पेख्ष संकेत
- 16:12–16:42वा पुण निर्देश देलगे लगे लगे लगे लगे लगे लगे लगे लगे लगे लगे लगे लगे लगे लगे लगे लगे लगे लगे लगे लगे लगे लगे लगे लगे लगे लगे लगे लगे लगे लगे लगे लगे लगे लगे लगे लगे लगे लगे लगे ल
- 16:42–16:53अद बुक्माक लेल, पुस्तक चिन्र जोडूं, अद तू पनल लेल पतल्त में जोडूं, सन शब्दावली गजल अच्छे.
- 16:53–16:55इसा बहुत व्यवहारिक शब्द चे.
- 16:55–17:05विग्यान्क शेत्रमे से हो देखूं, आई एलोए के मिश्र दातू, एलुमिन्यम के सफेद रंका दातू, वा कितल दातू कहल गेल आचे.
- 17:05–17:13मुदा आम्ballून्च शब्दके, बहुत सहेज रूप सग, आईल आ भीमार के रे जाएबला गाडी सपरिभाषित कर ले जी.
- 17:13–17:43आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� �
- 17:43–17:47अगरेजी सुएम कत्तक पेएक बाशा आची
- 17:47–17:51मुदा अहु लाटन, फ्रेंच और गरीक शब्दक स्पंज बनल रहल
- 17:51–17:53आप इत आची
- 17:53–17:58मेठली में सेहो उर्दू फार्सी आर अंगरेजी शब्द सदिखंसन आवेत रहल आची
- 17:58–18:01इविदेश शब्दकोष की करहल आची
- 18:01–18:03आप याद़ा थी
- 18:03–18:05मेठली में सेहो उर्दू फार्सी
- 18:05–18:07आर अंग्रेजीक शब्द
- 18:07–18:09सदिक्हन सन आवेत रहा लगची
- 18:09–18:11इविदेश शब्दु कोश की करहलगची
- 18:11–18:12की करहलगची
- 18:12–18:14इई नव तकनी की शब्द सब के
- 18:14–18:16याता मेठलीग व्याक्रनिक
- 18:16–18:20अगर एहन अनुवाद दो रहलत्छी
- 18:20–18:22जिन नव पीडी के बुजबा मे सहज होए
- 18:22–18:25जिना की प्रस्तावना में सपष्ट कहल गे लचे
- 18:25–18:30अगर आब मेठलिक वक्ता, अनलाईन, इपत्रिका, इदिक्षनरी
- 18:30–18:31और सोचालित प्रनालाक
- 18:31–18:33मने जे मशीनक संवाद का सब
- 18:33–18:35अगर अपिक्षा करे चाति
- 18:35–18:39इप वह वह देखागा बात बहुत महत्वापूरना ची
- 18:39–18:42मुदाम बशीन कोनो भाशा के कोना बुजत
- 18:42–18:46ताहिलेल ता लिपी आर द्वनिक के मानकिक्रित कर अब आवश्षक अची
- 18:46–18:48एक दम, आहा बहुत निक बाद द्धलो
- 18:48–18:52अद्ताहिलेल इशब्द्कोश मात्र देवनागरी में नहीं आची
- 18:52–18:53तो और को ही में आची
- 18:53–18:57एकरा तिरोठा लिपी जग्रा मितलाक्षर से हो कहल जाईता ची
- 18:57–18:59उही में दिल गे लगछी
- 18:59–19:04ता सब से विषेश बात जग्रा अंतर वाश्त्रीय द्हन्यात्मक वर्ण माला
- 19:04–19:06इकर की लाब है ची
- 19:06–19:08इकर एर्थ एभिल
- 19:08–19:10जी दून्याक कोनो भी कोना में
- 19:10–19:12बैसल भाशा वेग्यानिक
- 19:12–19:14वा कोनो आर्टेफीश्टलिजन्स के प्रोगामर
- 19:14–19:16इबुजी सकई तची
- 19:16–19:18जी मेठलिक कोनो शब्द के
- 19:18–19:20वास्तों में कोना उचारित केल जाए तची
- 19:20–19:24मैठलिक कोनो शब्द के वास्तो में कोना उचारित केल जाएत अची
- 19:24–19:27मैंने AI लेल से हो तयार केल जा रहेल चेक्रा
- 19:28–19:28एक दम
- 19:29–19:32इदिक्षनरी बाशा के आजायब गर में बन्द करवा के बडला में
- 19:33–19:36अखरा दिजितल भविष्ष्षक लेल, स।फ्ट्वेर केल
- 19:36–19:40आ आई आई जग्रा एह में क्रितक प्रग्या वा क्रितक दी कहल लेल ची
- 19:40–19:42अकर लेल तईयार को रहे लची
- 19:42–19:45क्रितक प्रग्या इश्व्दता बर सुन्दर अची
- 19:45–19:47इबहुत पेग बात अची
- 19:47–19:48आवास्ताव में
- 19:48–19:52तक्कुल मिलाता जो हम आजो के ही चर्चा के निष्कर्ष निकाली
- 19:52–19:56तई अस्पाष्ट होई तच्छे विदेह अंग्रेजी मेठली शब्द्कोश
- 19:56–20:00मात्र अख्षरक वो शब्दक सयोजन नहीं अच्छी
- 20:00–20:04बिल्कुल नही, इमात्र किचु विद्वानक बोद्धिक अभ्यास नही अची
- 20:04–20:12इच्चार करोड से भेसी लोकक संगर्ष, रूकर अस्तित्व, अब हविष्ष्चक उडानक एक ता तोस दस्तावेज अची
- 20:12–20:13सत्ते कहलो वहाँ
- 20:13–20:16एदिक्षनरी प्रमानित करे तची,
- 20:16–20:20जे जखन कोनो भाशा आपन लोकक रग मे भैसे तची,
- 20:20–20:23तो राजनेतिक उपेख्षास मरी ने जाई तची.
- 20:23–20:28नहीं, उजंगन्न्ना कब रामक आक्डाक नीचा दबी ने जाई तची.
- 20:28–20:32बल कि उ संगर्ष्सशा और निखर कबहर अबेत अची
- 20:32–20:38आ आदूनिक तकनीकी पक्हिट्ता लगा कब अप यन्ट्रनेट अ एएएए कद दून्या में उडी जाए तची
- 20:38–20:43इश्व्द्खोश भविशक पीडिक लेल एक ता मस्वुत नीव ची भुजलिये
- 20:43–20:44एक दं
- 20:44–20:46इंका इ विश्वास दिया रहल अची
- 20:47–20:50जे उ आपन मात्री भाशा मे विश्विसान समवाद कर सकेच चाथी
- 20:51–20:55उंका ग्यान विग्यान, कमपुटर अ तकनीकी विषेप बात करबाक लेल
- 20:55–20:58कोनो दोसर भाशाक बैसाखिक अवष्चकता नहीं ची
- 20:58–21:03बाशाक विकासक यात्रा, वास्ताँ में मानव समाजक विकासक यात्रा आची.
- 21:03–21:04एक्दम सत.
- 21:04–21:07वाखई, ये एक्टा अदबुद यात्रा रहेल.
- 21:07–21:12एक्टा बाशा कोना आपन पुरान स्वरुप के सहेजद, नाव पहिरन पहिरी लेद अची,
- 21:12–21:16अगरी येटा शान्दार उदारन अची
- 21:16–21:21मुदा अही चर्चाक अंप में येटा बडगहीर प्रश्नमोन में उठी रहुल अची
- 21:21–21:26ग्रीक दर्षन में येटा परडोक्स अची शिप अप फीषीस
- 21:26–21:28अग, उजहाज वला
- 21:28–21:34जा कोनो जाहाजक सबता पुरान कात के निकालिक औही में नव कात लगा देल जायत,
- 21:34–21:38तक कि ओही पुरान जाहाज रही जाएत सन.
- 21:38–22:01उगर अद्उनिक तक्नी की शब्दावली अंग्रेजी शब्द आर दिजिटल व्याक्रन के अपन भीदर पूरी तर समहित कल ले ताईची, तब विश्ष में प्चास्वा सो सालक बाद, उकर अपन प्चाचीन शब्दावली कते खिस्सा द्बैनिक जीवन में बचल रहत.
- 22:08–22:15वदिरे-दिरे उकर मुल आत्मा के बद्ली का, उकरा एक ता पुर्न रूपेन नव बाशा बना रहा लैएच.
- 22:15–22:23ये एक ता एहन प्रष्न ची, जे भविश्षक गर्व में आची, अजक्ला पर हर बाशाप्रेमिक के गेराईई से विचार करवा कावष्च्ताच.
- 22:23–22:29सत्तिमे, इसमें के ही तैकरे पडद, इक ता एहन वेचारिक मन्तन अची,
- 22:29–22:34जी हर उ व्यक्तिके करब उची तची, जे अपन मात्रि भाशा सजोड़ अची,
- 22:34–22:38जी सुन रहल चती, उसब सवो इस पर विचार कर थी.
- 22:38–22:39नमशकार.
- 22:39–22:40नमशकार.
Plain text
1891 आईजकन पहल भेर एक ता विवस्तित बाषा सरवेख्ष्ष्ड भेल्चल जोर्ज ग्रीर्ष्श्ण्च सरवेख्ष्ष्ड एक दम सत्य? तो उही में लग बख एक करोड लोग के एक ता विषिष्ट बाषाक वक्ताक रूप में दर्जगेल गल चल. मुदा 60-70 साल के बाद माने उन्नी स्व एकसट्के जन्गडना में उसंख्या अचानक खसिक का आदा बहगेल. राग, सीदा उन्चास लाक पराभीगेल? सोचुता, कोनो युद्द नी भेल चल, कोनो एहन महामारी नहीं आएल चल, जे आदा अबादी के समाप्त कर दे. लोग शारिरिक रूपिन्त होते चला? आँ, मुदा कागजी आख्डावा, हुनक भाशा जेना विलुप्त बरहल चल. आँ, इवाकग एक ता बदपएग रहेस चे. एक दम, आई कोनो जासुसी कताने आची, बलकी एक ता वस्तविकता आची. आई हम सब जे स्रोथ समगरिक के गेराई में जार अल चे अकोनो सादारन पोती नै अची ने ने बलकल नहीं इई 4 करोड से बेशी लोकक अपन भाशा के बचेबाक, उक्रा आप्शूनिक बनेबाक, आब हविष्ष्चक दिजितल दुन्या लेल तट्यार करवाक एक ता जीवंद दस्तावेज अची. सत्य. आजुक एही गज्ञन चर्चाक विश्य अची 2012 में प्रकाषित विदेह अंग्रेजी मेठली शब्द्खोश जे गज्जंद्र ताकृ नागेर इर्कुमारज्या अपनजिकार विद्या नंजा दुरा और अची तची अज, अज संगे हम्रा सब एक पास जी प्रुफेसर उदै नारायन सिंग कर लिखित एकर अद्यन्च्छोद परक एतिहासिक प्रस्तावना जी तत्कालीन केंद्रिय भार्ति भाशा संस्तान मैसुर का निदेशक चला जी. ता आई हम सब यी भूजबाक प्रयास करव, जे कोनो एक ता दिक्षनरी, भाशाक संगर्ष, औगर पुनर जन्मकर अस्ट्र बनी जाईता ची. आहा जी. उही जन्गरनाक आख्डाक गिरावड़ से बात शुरूके लू, अगर वास्तो में एही पुरा विष्यक दूरीया ची. कोना? अखसर लोक मानी लएच्छती, जे दिक्षनरी मात्र एक तद्सन्दर्ब ग्रन्त छी. मैंने जाही में शब्द, अगर अगर अगर अगर अगर नीरस सुची होई दची. इकta moto san po thi bas aarth khojbāk leil. मदवास्तमे उंक्त शब्दकोश कोनो समाज का इतिहास, उकर भगोलिक उतल पुतल और राजनतिक उपेक्षाक सबसे प्रमानिक गवा हुईत आची. औहो! माने यी सरफ अंगरेजी सम्मेठिली अनुवाद कर सादन ने आची. बिल्कुल नहीं प्रुपेसर सिंख का प्रस्तावना अस्पस्ट करे ता ची जे यी तिरहुता लीपी सलोक अंतराश्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च् अग, वो सोला सो चारी का रोबट काउट्रेक पोठीक सत्या जेना लागत अची, अंग्रेज सबहे शब्द के सहेज कर रक्बाक, कला का विषकार किलनी मुदा एदारना सत्या सब बहुत दूर अची भूजली है आँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँ� तो गरा अपन ग्यान के मानकी क्रित कर बाक आवश्क्ता हूँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँ� मुदा आई भारत कजे अटिहासिक संदर बते देल गैल अची और हमरा बहुच चकित के लक. आँ, प्राचीन बारतक परमप्रा वागई अदबुत अची. शब्द कोश कोनो भाशा किलिए एक तस समय कआप्सूल जका आची जही में उही समयक लोकक सोच सुरक्षित रहेत अची सत्ते कहलों एही संदरव में प्रस्तावना में साथ सो इसापूर्व, निगंटू, अयास्क का निरुक्त का चर्चा आची मुदा एता हमरा मुन मेक्ता सन्षे आची प्राचिन भारत्मे तग्यान मोखिक रूपे हस्तान्तरे थोईत्तलने आप, जिक्रा हम सब श्रूती परमप्रा कहिच्छी, पीडिदर पीडि सुनकम मौन राखभ तफेर वेदक सन्रक्षनक आवष्च्ता कोना ब्याकरन, आर एक जटिल शब्द सन्रचनाक जन्मदेलक, माने दर्मक अनुष्टान सां बाशा विग्यान कोना निकली आयल. इबहुत गहीर बात आची बुजलिये करन शुति परमपरा में, जो आहा एको ता स्वर्वा दूनिक उच्चारन गलत करे ची. तपूरा वेदिक मन्त्रक आर्थ बदली जातची एक्दम! अनुश्धानक शुद्था पूरन रुपेन दूनिक शुद्था पर निरबर करे चल औहो! तकंत बरो सावदानिक का चल ताही लेल य आवश्षक चल जे शब्द के अगर मूल रुप में ताला लगा कषुरक्षित की याल जाए ताला लगा कषुरक्षित की लगा इते सां प्राचीन, वैया करन सब एक ता अद्बुत वैग्यानिक विदी निकालन ही उ, वैदिक वाएक सब के शब्द में आश्वद के उकर जरी में कहन्धित करव शूरू के लेन ही ज़ी माने दातूर प्रत्तैमे आप, कोनो शब्द कोना बनाला ची, उकर दातू की आची, उही में प्रत्तै की लागल आची इता एक्दम गनितिया विष्लेशन जका बहुगेल भिल्कुल, इजे गनित्या विष्लेषन चल उ प्राछीन भारत्मे दूनी विग्यान और रूप विग्यानाग जन देलक. मने मन्त्रक उच्चारन के दूषित होभे से बचावे किल, उसबह शब्दक एनाटोमिक अ दिलने. आप इक रा कोनो द्हारमिक काज नहीं बलकी पूरन रूपे न एक ता वग्याने कोडिं माने सके ची. इता वाकई बहुत आदूनिक सोच च्छ चिल आएकर किच्छु शताब्दी बाज्जकन संस्क्रित में आमर सिंगक आमर कोश आयल. जे चद्हम शताबदिक रचना जे आ, तो उ कोनो सादारन दिक्षनरी नहीं रहल श्रोथ सामगरी में एक ता आश्चर्य जनक तत्ते आचे जे आमर्कोष पर कम से कम चालीस्ता अलग �alak teeka लिखल गेल आ, चालीस्ता तीका अगी में तीका की करव? आख प्रश्न बरनी कची इबात प्रमानित करे तची जे आमर्कोश मात्र शब्दक सुची नहीं चल तकी चलो? अपर्याए वाची शब्दक एक ता एहन विचारी ग्रन्त चल जे सन्सार के वर्गी केट करे चल अचा जे सन्सार के वर्गी केत करे चल अच्छा स्वर्ग, पाताल, प्रिठ्वी, वनस्पती इस सब कोना एक दूसर सा जूल अची उकर वरनन चल विद्वान लोकनी एही वर्गी करन पर शास्ट्रार्थ करे चला मैंने नव शब्द जूल अगरान शब्दक अर्थ बदले चल आई, ताही लेल औटीका सब वास्तव में उई समयक अपन सोर्स सोफ्ट्वेरक अप्टेट जगा चल. आई, वाज, अपन सोर्स सोफ्ट्वेर का अप्टेट ये बहुत नीक तुलना चै. जक्रा विद्वान लोकनी अपन अपन समय में अप्टेट कर अच्टला. आई बाद्दिक परमपरा मात्र संस्क्रित दरी सीमित नहीं रहाल? आई, प्रोफेसर सिंग बहुत सुन्दर तुल्ना कराई चति. एक दम. उ कहे चति जजकन अंगरेजी साहित्त में चोसर अपन शुर्वाती पोथी सब लिखि रहाल चला. उ लगभग उई समें में में वीठली में जोती रिष्वर आपन महान गरन्त वरन रत्ना कर रची रहल चला. आप, यह कोनो चोट बात नहीं आची. इटुन्ना सूनी का गर्व होई तचीर मेंठली भाशाक साहितिक इतिहास, अंग्रेजिक समानान्तर वा अख्रासक किछु पहिनू कची सत्ति आची इप मुदा इतिहास का पन्नासा जकन हम वर्तमानक भोगोलिक वास्ट्विक्ता पर अवेच्ची अईता इस्तिती बहुत जतिल बोजगेट ची अग, बूगोलक वास्त्विक्ता ते एक दम गलग अची अकसर एक ता मित्ख अची, जे मेत्लिक अर्थ मात्र भिहारक मित्ला चेत्र, मने दर्भंगा मदूबनि किचु जिला इप बहुत पैग ब्रम चाई लोक में मुदा प्रस्तावना में भाशाक जे भबगोलिक आजन सांखिक यह परद्रिश्ष्खी चल गेल आची उ अकल पनी रूपेन विशाल आची बहुत विशाल आची भबगोलिक रूपेन य मात्र उत्र भिहारक सम्तल मेडान दरी सीमित नहीं आची ता एकर विस्तार कते दरो की अची? एकर विस्तार नेपालक तराए चेटर दरी अची जते नेपालक लगभक चोदा प्रतिषत आबादी मेठली बजगी तची चोदा प्रतिषत? इत बहुत पैक संख्या भेल? एक दम एकर संगे जार्खन्डक किचु हिस्सा जेनाक सन्ताल पर्गनाक छेट्र उते सहुई मेठलिक प्रभाव अचे अहो मुदा इस शीमा सब कुनु पक्की दिवाल नहीं आचे भूगोल आप प्राकरतिक माईर कुना भाशाक प्रभाविद करे था ची एकर सबसे पहग उदाहरान आचे कोषी नदी कोशी नदी मुदा नदीक दारा बदलेबा से बाशा की लेना देना आखी की लागी तची? लोक तव उत्भे रहाता? आख, नदी गूम गल तकी लोक तपन गाँ मे रहता ना नै, लोक उत्भे नहीं रहे चती पिछला दोसो वर्ष में कोशी साथ बेर आपन दारा बदलना आचे बाप्रे साथ बेर आप जकन नदी आपन मार्ग बदले तचे तलाको लोकक गाँ अखेती पानी में दुभी जाई तचे तलोक पलायन करी चती एक दम अग ताम कब लोक तुस्रा थाम जाकष शरन लएच्छती उन नव परीवेष मे जाकबसधचती जटे तुसर भूली बाजल जाई तची आच्छा ताईसा भाशिक मिष्टन हुई तची आखटा किसी माबदलग तची अक कते को भेर कोनो चेत्र विषेशक भाशा का स्वरूप पुरन रूपेड बदली जाई तची माने, बोगोलिक अस्तिरता सीथा सीथा बाशिक अस्तिरता का करन बने तची शत्यक हल्वा हा रूखु, प्राक्रितिक अस्तिरता तबुजल में अवाई तची मुदा जोर्ज ग्रीर्सन जखन 1891 बे में भाशा सरवेखषन किलनी जगर चर्चा हम सब शूरू में कर लो आप तो उ मेठलिक वक्ता कषंक्या लग भग भान में लाक मने 92 लाक सब भेसी दर्ज किलनी मुदा 1961 के जंगर नामा इई संख्या खसी का मात्र उंचास लाग कोना बहगेल अबादी तशत्तरी साल में शारिरीक रूपेन बहुत भेसी बड़ाल होएत भिल्कुल अबादी तो बदते ही आची तसांकिकी रूपेड बाशा बजवाईवला लोक आदा कोना बहस रकाईत छी? कि कोनो सोचल समजल, राजनीतिक प्रयास चल, बाशा के हिंदीके एक तब उली साभित करवाख? इप्रश्न प्रफेसर सिंक प्रस्तावना में बहुत तार्किक्ता से उठावल गेल अची. वास्तब में युकोन प्राक्रतिक जन्सांखि की गिरावद नी चल. तकनकी चल. इएक ता प्रशासनिक हेर फेर अब्रामक सुचनक परिनाम चल. प्रशास्निक हेर फेर कोना? एक ता समय में इद्दारना पसारल गेल जे मैत्ली मात्र मित्ला छेत्रक एक ता विषिष जातिक मुखिरुपे ब्रामब्र्लोकनिक बाशा आची अब बाकी लोग की बजे च्छती? ताल गेल जे बाकी लोग हिंदी बजे च्छती जातिगत संद्रच्ना अउते रहे वाला भिविद समुदायक देखवे जाही में, मुसलिम समुदायक सो हो एक तबहुत पैग लिस साज तब इस पष्ट भोजाई तची, जब बना सब जातिक लोग दुरा मेठली के आपन मात्र भाशा मानले एक रा एक व्यापक समर्तन भेटी ही नहीं सके चल. तफेर जन्गरना कदिकारी लोकनी कर की रहल चला? की गाँ में जाके लोग सब पुचल नहीं जाएचला? पुचल जाएचल मुदा उत एकता और वास्तबिकता काज करो रहल चल. बहु भाशिकता बवहु भाशिकता मैं एक से भेसी बाशा बजब आप, उच्छत्र एहन आची, जटे मेठली, भोज्पूरी, और मगहिक सीमा आपस में जुडा लगची आई उते बारा से अदिक अदिक आदिक आदिक आदिक आदिक आदिक आदिक आदिक आदिक आदिक आदिक आदिक आदिक आदिक आदिक आदिक आदिक आदिक आदिक आदिक आदिक आदिक आदिक आदिक आदिक आदिक आदिक आदिक आदिक आदिक आदिक आदिक आदिक आद अन्यबाशाजिन नेपाली, भंगाली, सन्ताली, मुन्दारी आदी से हो भाजल जाईताचे भलकोल तकन गाओक एक तक किसान से जकन अदिकारी पुचेट ची जे आहा की बजेट ची, तो उ कन्फुज भो जाईताची वा अदिकारी स्वयम आपन सुभिदा या उप्रक आदेश के कारन ओते हिंदी दरज कर लेत जी. आप यही वास्तविक ता चलो इसमाएक. माने वास्तविक वक्ताक संख्या अ सरकारी आक्डा मे इत्तिक पाएक जोल एही कारने चल. मुदा बाद में तिस थित्या सुदरली नहीं? दर्ली जरुर दूहाँचार एक कजन गरना में एई संक्या एक करोड एकीस लाक दर्ज भेल मुदा प्रफेसर सिंग अपन लेक में स्पप्ष्ट दाभी करहल चतीन जे वास्तवेक संक्या लगभक चार करोड अचे आज चार करोड वो था आईए संख्याक विवाद आस समविदानिक रूपेन बाशा के नकारे बागजे प्रयास भेल, उ बाशा के मारवाग के बडला में उक्रा ज्हून मजबूत कुना कदे लग. इएक ता बहुत नीक सवाल आची. प्रफेसर सिंग लिखने च्धिन जिस समविद्धानिक अदिकार के नकारब मेठलिक लेल एक ता अप्रत्यक्ष वर्दान साभिद भेल कुनो चीस के दबावें से उवर्दान कोन अब हो सकेच ये मानव मनोविग्यान अ समाज्शास्त्रक बहुत रोचक पहलु अची भूचली एग जक्हन कोनो समुदाय के लागत अची जे अकर पहचान मिटोल जार अल चे अकर अस्तितवःपर संकत अची तो उकर भीत्रक सांस्क्रतिक उर्जा ज्वाला मुखी जका फेटे तची. अहो! जखन मैठिली के समविदानक अश्टम अनुसुची में शामिल करवासो रोकल जार अल चल, तो एक रास साहित्तिकार, यूवा आआम वकता के अदिक उर्जा भेटल. उ आख्रोश एक ता रच्नात्मक आन्दोलन में बदली गेल एक दम लोग अग्टिक स अदिक पोठी लिखा लगला नु नाटक करे लगला सहेट्तिक पत्रिका निकाले लगला माने, बाशा के बचाबाक लेल सब आपन अपनस्तर पर काज करे लगला परिनामि भेल, जे सहत्तिक उपपदक्ता के मामला में मैइत्ली, मनीपृपृगी, अग्डिन, नेपाली, या सिंदी संबाश्या के पाचु चोडगे लग. जे पहिनेसा आश्टम अनूसुची में शामिल चाले. इता कमाल बहगेल? आग्डम. अन्तता स्वकार के इजन भावना अ सहित्तिक प्रमानकागु जूक्के पडल आ मैइत्लिके आश्टम अनुसुची में शामिल का याल गल. इएक ता बाशाक अदम या जीजी विशा आची. सत्ते कालु. इजीजी विशाता एक्दम उही पोरानिक पक्षीजका आची जे अपने ही भस्मस नव जीवन पावी का उडे तची एक्दम सती कुप मा ची मुदब भाशक इब लडाई मात्र साहित्यव वा कविता लिखबादरी सीमित नहीं रहाल आद्र प्रवेश होताची इनव विदेहे शब्दकोश कर आजे एह चर्चाक मुख्य बिन्दू आची जोकन हम एकर अंग्रेजिक एक हन्दक प्रविष्टी सब देखए चे तई कोनो पुरान अजायब गरक वस्तू नहीं लागत आचे आई आई इी मात्र गाज पाती नदी वग खेटकर शब्दकोष नहीं अचे इत सीथा क्मपूटर विग्यान, सोफ्टवेर और आदूनिक तकनीक सभीर रहल अचे आहा जे उदाहरनक बात करोरजी उवास्तम एई शब्दकोष अचे सबसे क्रान्तिकारी हिसा आचे एक रकिच उदाहरन देखी के हमरा बडा आश्चर्यबेल इदिक्षनरी इदटाए करो हाल अचे जे नव पीडी के तकनिक के भुजवा के लेल अंग्रेजी पर निरभर नहीं रहे पडे जे ना, अपसलुट अद्रेस जे कम्फुटर प्रुग्रेम्म्म कर शब्द चे अख्रा लेल एह में निर्पेख्ष संकेत वा पुण निर्देश देलगे लगे लगे लगे लगे लगे लगे लगे लगे लगे लगे लगे लगे लगे लगे लगे लगे लगे लगे लगे लगे लगे लगे लगे लगे लगे लगे लगे लगे लगे लगे लगे लगे लगे लगे लगे लगे लगे लगे लगे ल अद बुक्माक लेल, पुस्तक चिन्र जोडूं, अद तू पनल लेल पतल्त में जोडूं, सन शब्दावली गजल अच्छे. इसा बहुत व्यवहारिक शब्द चे. विग्यान्क शेत्रमे से हो देखूं, आई एलोए के मिश्र दातू, एलुमिन्यम के सफेद रंका दातू, वा कितल दातू कहल गेल आचे. मुदा आम्ballून्च शब्दके, बहुत सहेज रूप सग, आईल आ भीमार के रे जाएबला गाडी सपरिभाषित कर ले जी. आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� � अगरेजी सुएम कत्तक पेएक बाशा आची मुदा अहु लाटन, फ्रेंच और गरीक शब्दक स्पंज बनल रहल आप इत आची मेठली में सेहो उर्दू फार्सी आर अंगरेजी शब्द सदिखंसन आवेत रहल आची इविदेश शब्दकोष की करहल आची आप याद़ा थी मेठली में सेहो उर्दू फार्सी आर अंग्रेजीक शब्द सदिक्हन सन आवेत रहा लगची इविदेश शब्दु कोश की करहलगची की करहलगची इई नव तकनी की शब्द सब के याता मेठलीग व्याक्रनिक अगर एहन अनुवाद दो रहलत्छी जिन नव पीडी के बुजबा मे सहज होए जिना की प्रस्तावना में सपष्ट कहल गे लचे अगर आब मेठलिक वक्ता, अनलाईन, इपत्रिका, इदिक्षनरी और सोचालित प्रनालाक मने जे मशीनक संवाद का सब अगर अपिक्षा करे चाति इप वह वह देखागा बात बहुत महत्वापूरना ची मुदाम बशीन कोनो भाशा के कोना बुजत ताहिलेल ता लिपी आर द्वनिक के मानकिक्रित कर अब आवश्षक अची एक दम, आहा बहुत निक बाद द्धलो अद्ताहिलेल इशब्द्कोश मात्र देवनागरी में नहीं आची तो और को ही में आची एकरा तिरोठा लिपी जग्रा मितलाक्षर से हो कहल जाईता ची उही में दिल गे लगछी ता सब से विषेश बात जग्रा अंतर वाश्त्रीय द्हन्यात्मक वर्ण माला इकर की लाब है ची इकर एर्थ एभिल जी दून्याक कोनो भी कोना में बैसल भाशा वेग्यानिक वा कोनो आर्टेफीश्टलिजन्स के प्रोगामर इबुजी सकई तची जी मेठलिक कोनो शब्द के वास्तों में कोना उचारित केल जाए तची मैठलिक कोनो शब्द के वास्तो में कोना उचारित केल जाएत अची मैंने AI लेल से हो तयार केल जा रहेल चेक्रा एक दम इदिक्षनरी बाशा के आजायब गर में बन्द करवा के बडला में अखरा दिजितल भविष्ष्षक लेल, स।फ्ट्वेर केल आ आई आई जग्रा एह में क्रितक प्रग्या वा क्रितक दी कहल लेल ची अकर लेल तईयार को रहे लची क्रितक प्रग्या इश्व्दता बर सुन्दर अची इबहुत पेग बात अची आवास्ताव में तक्कुल मिलाता जो हम आजो के ही चर्चा के निष्कर्ष निकाली तई अस्पाष्ट होई तच्छे विदेह अंग्रेजी मेठली शब्द्कोश मात्र अख्षरक वो शब्दक सयोजन नहीं अच्छी बिल्कुल नही, इमात्र किचु विद्वानक बोद्धिक अभ्यास नही अची इच्चार करोड से भेसी लोकक संगर्ष, रूकर अस्तित्व, अब हविष्ष्चक उडानक एक ता तोस दस्तावेज अची सत्ते कहलो वहाँ एदिक्षनरी प्रमानित करे तची, जे जखन कोनो भाशा आपन लोकक रग मे भैसे तची, तो राजनेतिक उपेख्षास मरी ने जाई तची. नहीं, उजंगन्न्ना कब रामक आक्डाक नीचा दबी ने जाई तची. बल कि उ संगर्ष्सशा और निखर कबहर अबेत अची आ आदूनिक तकनीकी पक्हिट्ता लगा कब अप यन्ट्रनेट अ एएएए कद दून्या में उडी जाए तची इश्व्द्खोश भविशक पीडिक लेल एक ता मस्वुत नीव ची भुजलिये एक दं इंका इ विश्वास दिया रहल अची जे उ आपन मात्री भाशा मे विश्विसान समवाद कर सकेच चाथी उंका ग्यान विग्यान, कमपुटर अ तकनीकी विषेप बात करबाक लेल कोनो दोसर भाशाक बैसाखिक अवष्चकता नहीं ची बाशाक विकासक यात्रा, वास्ताँ में मानव समाजक विकासक यात्रा आची. एक्दम सत. वाखई, ये एक्टा अदबुद यात्रा रहेल. एक्टा बाशा कोना आपन पुरान स्वरुप के सहेजद, नाव पहिरन पहिरी लेद अची, अगरी येटा शान्दार उदारन अची मुदा अही चर्चाक अंप में येटा बडगहीर प्रश्नमोन में उठी रहुल अची ग्रीक दर्षन में येटा परडोक्स अची शिप अप फीषीस अग, उजहाज वला जा कोनो जाहाजक सबता पुरान कात के निकालिक औही में नव कात लगा देल जायत, तक कि ओही पुरान जाहाज रही जाएत सन. उगर अद्उनिक तक्नी की शब्दावली अंग्रेजी शब्द आर दिजिटल व्याक्रन के अपन भीदर पूरी तर समहित कल ले ताईची, तब विश्ष में प्चास्वा सो सालक बाद, उकर अपन प्चाचीन शब्दावली कते खिस्सा द्बैनिक जीवन में बचल रहत. वदिरे-दिरे उकर मुल आत्मा के बद्ली का, उकरा एक ता पुर्न रूपेन नव बाशा बना रहा लैएच. ये एक ता एहन प्रष्न ची, जे भविश्षक गर्व में आची, अजक्ला पर हर बाशाप्रेमिक के गेराईई से विचार करवा कावष्च्ताच. सत्तिमे, इसमें के ही तैकरे पडद, इक ता एहन वेचारिक मन्तन अची, जी हर उ व्यक्तिके करब उची तची, जे अपन मात्रि भाशा सजोड़ अची, जी सुन रहल चती, उसब सवो इस पर विचार कर थी. नमशकार. नमशकार.