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इंग्लिश-मैथिली_थिसॉरस.mp4

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Part 7 · VIDEHA MITHILA MAITHILI DISCUSSION CRITICISM SERIES PART 7
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  1. 0:00–0:03बाषा श्वबाज्चीत का जर्या नहीं होती है ना?
  2. 0:03–0:08ये एक पूरी सबव्यता, उसके इतिहास, उसकी आत्मा को अपने अंदर समेटे रकती है.
  3. 0:08–0:11आज हम एक आज़े ही अज़े अद्बूत काम पर नजर डालने वाले है,
  4. 0:11–0:14जिसे किसी मास्टर पीस से कम नहीं कहा जा सकता.
  5. 0:14–0:44अम इप्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट
  6. 0:44–0:46अगरे की विश्शालता के बारे में सुच्छिए,
  7. 0:46–0:48ये महस शब्दों की कोई आम लिस नहीं है,
  8. 0:48–0:50ये अपनी मात्र भाशा को जिन्दा रक्ने के लिए,
  9. 0:50–0:53एक अचान के अथक परश्ष्रम का जीटा जाक्ता सबुत है.
  10. 0:53–0:55गजेंद ताकृर जीने इस थिसवरस में,
  11. 0:55–1:25तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो �
  12. 1:25–1:55यान इस दिए बाज़ा लिए बाज़ा लिए बाज़ा लिए बाज़ा लिए बाज़ा लिए बाज़ा लिए बाज़ा लिए बाज़ा लिए बाज़ा लिए बाज़ा लिए बाज़ा लिए बाज़ा लिए बाज़ा लिए बाज़ा लिए बाज़ा लिए बाज़ा लिए बा
  13. 1:55–1:58कुकी ये बताता है की बाशा कभी भी रुकती नहीं है,
  14. 1:58–2:01वो लगातार बड़ती और विखसित होती रहती है.
  15. 2:01–2:04बाग दो बाए the numbers
  16. 2:04–2:07चल ये आकडों पर एक नजर डालते हैं.
  17. 2:07–2:09अगर आम एन आकडों को दिकोड करें,
  18. 2:09–2:12तो पता चलता है की अंगरेजी वन्माला के
  19. 2:12–2:42अगर तोडा गेराइ से सोचें तुछें तुछें तुछें तुछें तुछें तुछें तुछें तुछें तुछें तुछें तुछें तुछें तुछें तुछें तुछें तुछें तुछें तुछें तुछें तुछें तुछें तुछें तुछें तुछें तु�
  20. 2:42–2:46इन में से हरेक शब्द के लिए में एक दम सटी करत खूज निकाला है.
  21. 2:46–2:48ये देटा का क्या शान्दार विजिलाईशियष्यन है.
  22. 2:48–3:18बाग तीन अनाटमी अफ आन आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आ� आ� आप आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� �
  23. 3:18–3:22उदारन के लिए, स्रिव शब एक एगी इतने अलगलग उप्योग दिखाए गए हैं.
  24. 3:22–3:24संगया के रूप में, विषेशन के रूप में,
  25. 3:24–3:27और यहां तक की संगीट के एक सुर के रूप में भी,
  26. 3:27–3:31यही विववस्तित और बारिक तरीका इसे सच में एक मास्टर पीस बनाता है.
  27. 3:32–3:35बाग चार, ख्रान्स्लेतिं मैत्ली कल्च्र,
  28. 3:36–3:38यानी मैत्ली संस्क्रती का अनुवाद.
  29. 3:39–3:42देखे किसी भी चीस के लिट्रल, यानी सीधे अनुवाद
  30. 3:42–4:12अगर आम ने नोँब यागा नोब आप ज़ीए नोब आप प्रद नोब आप प्रद नोब आप प्रद नोब प्रद नोब आप प्रद नोब प्रद नोब प्रद नोब प्रद नोब प्रद नोब प्रद नोब प्रद नोब प्रद नोब प्रद नोब प्रद नोब प्रद न
  31. 4:12–4:17बूद्पूल बना देते हैं. संज्क्रितिक अनुवात का एक और बहुति खुबसुरत उदारन देखते हैं,
  32. 4:17–4:23जत जतिन, इस थिस्फिस्वोरस में इसे एमेठली फोल्क तान्स और बलेड के रूप में
  33. 4:23–4:25यह रूप में देफाइन की आगया है.
  34. 4:25–4:27अब जद जट यहन कोई मामूली शब्द नहीं
  35. 4:27–4:29बलकी यह वहां की लोक कला का
  36. 4:29–4:31एक बहद आहम हिस्चा है
  37. 4:31–4:33जो पीडियो पुरानी कहानियो को
  38. 4:33–4:35दान्स और मुझिक के जर यह बयान करता है.
  39. 4:35–4:37जर ज़ा जब भी कोई बहरी वेकती
  40. 4:53–4:55केख के रूप में दरज की आगे है.
  41. 4:55–4:58किसी भी लोकल दिष्ख को विदेशी भाशा में समजाना
  42. 4:58–5:00हमेशा से एक बड़ा तास करहा है, है ना?
  43. 5:00–5:05लेकिन यहां, इसे कितने सिमपल और सतीक तरीके से समजाया गया है.
  44. 5:05–5:09रोज मर्रा की जिन्दगी, खान पान, त्योहारों,
  45. 5:09–5:12और रिवाजों को जिस खुबसुर्ती से न पन्नो में समेटा गया है,
  46. 5:12–5:16उईस बात का पक्का सबूथ है, कि सर्फ एक भाशा के जर्ये,
  47. 5:16–5:20पूरी की पूरी सबभिता को महफुज रखा जा सकता है.
  48. 5:20–5:23बाग पाज प्रद बाच बादनाईजिं दीवोख्याबिलरी,
  49. 5:23–5:26आदूनिक शब्दावली की ओर एक कदम
  50. 5:26–5:29अब बाद करते हैं इस थिस्फिसट्फरस के कुछ बहुती खास्वीच्वस की
  51. 5:29–5:32इस में समनारती शब्दो यानी सिननिम्स की
  52. 5:32–5:35चेहाजार चेहसो बारा और विलोम शब्दो यानी अन्तिनिम्स की
  53. 5:35–5:38अंटनिम्स की 3955 अंट्रीज मोजुद हैं
  54. 5:38–5:42इसके लावा एक पुरा इंगलिश अपनेश्टीन इंट्रीखष भी है
  55. 5:42–5:47जिस में तएई सच्छ में हरान करती है
  56. 5:47–5:49वो है इसकी अईटी गलोसरी
  57. 5:49–5:51इस में 2204 अंट्रीज हैं
  58. 5:51–5:59जिसका सीदा समब अब यह ज़े की कमपुटर, इंटनेट, और आजकी मोडन टेकनलोगी से जोडे शब्दो को भी मेठली में गडा और सहेजा गया है.
  59. 5:59–6:08तो आप बज़ा ज़ा ज़ा गया है, किसी बि पारमपर एक भाशा की दिक्षनरी में इतने सारे अटी तरमस का हूना अपने आप में प्राचीन और आदूनिक्ता का एक बहुती शान्दार संगम है.
  60. 6:08–6:14बाग च्याए एन अपन सूर्स लेगसी एक अईसी लेगसी जो सब के लिए खुली है
  61. 6:14–6:20और यही वो चीज है जो इस पूरे प्रोजेट को आजके दिजितल दोर में इतना प्रासंगिग बनाती है
  62. 6:20–6:24इस विशाल तिसवारस को एक अपन सूर्स लिसेंस के तहत रिलीस की आगया है
  63. 6:24–6:28ताकि दून्याबहर में कोई भी, कही से भी इसे दिजिटली अख्सेस कर सके.
  64. 6:28–6:31ये किसी एक अईक अईक अईक अईक अईग प्रवेट्प्रप्रटी बनकर नहीं रहे गया है.
  65. 6:31–6:34बलकी गलोबिल जिटल कम्युन्टी के लिए एक अपन खजाना है
  66. 6:34–6:38इसके अपन सूर्स होने का फ़दा यह है कि दुन्याबभर के रिसर्चौर्स,
  67. 6:38–6:41स्टूडन्स और भाशाविद इसका इस्तमाल कर सकते हैं,
  68. 6:41–6:45इस पर आगे काम कर सकते हैं और इसे वकत के साथ और भी बहतर बना सकते हैं
  69. 6:45–6:50तो इस पुरे एकस्पलेनर को समेट ते हुए एक बहुती एहम सवाल जहन में आता है
  70. 6:50–6:54एक कीस्वी सदी में ये जो अपन सोर्स धिजिटाईटाइसेशन का दोर है
  71. 6:54–6:57ये दून्या बर की बाशाँ के बहुविष्खे कैसे आकार देगा?
  72. 6:58–7:00गजंजें़र ताकृर जी के समथली अंग्रेजी तिसवरस से
  73. 7:00–7:02हमने साथ तोर पर देखा है,
  74. 7:02–7:05कि जब तक्नीक और अटूट समरपन आपस में मिलते है,
  75. 7:05–7:08तो किसी भी बाशा को कैसे आमर बनाया जा सकता है.
  76. 7:08–7:11तीन लाख से जाडा शब्डों, एक पूरी तकनी की शब्डावली
  77. 7:11–7:14और गेरी सांस्क्रितिक ज़ो से लैस ये प्रोज्च्ट्
  78. 7:14–7:18सुचने पर मजबूर करता है, कि भाई आब दूनिया की बाखी बाशाँगो भी
  79. 7:18–7:21बिल्कुल इसी तरे सहीजने का वक नहीं आगया है.
  80. 7:21–7:24सुचने वाली बाता है नहीं ख़ेर, इस टर्चा में सामिल होने किले,
  81. 7:24–7:25बहुत बहुत शुक्रिया.

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बाषा श्वबाज्चीत का जर्या नहीं होती है ना? ये एक पूरी सबव्यता, उसके इतिहास, उसकी आत्मा को अपने अंदर समेटे रकती है. आज हम एक आज़े ही अज़े अद्बूत काम पर नजर डालने वाले है, जिसे किसी मास्टर पीस से कम नहीं कहा जा सकता. अम इप्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट अगरे की विश्शालता के बारे में सुच्छिए, ये महस शब्दों की कोई आम लिस नहीं है, ये अपनी मात्र भाशा को जिन्दा रक्ने के लिए, एक अचान के अथक परश्ष्रम का जीटा जाक्ता सबुत है. गजेंद ताकृर जीने इस थिसवरस में, तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो � यान इस दिए बाज़ा लिए बाज़ा लिए बाज़ा लिए बाज़ा लिए बाज़ा लिए बाज़ा लिए बाज़ा लिए बाज़ा लिए बाज़ा लिए बाज़ा लिए बाज़ा लिए बाज़ा लिए बाज़ा लिए बाज़ा लिए बाज़ा लिए बाज़ा लिए बा कुकी ये बताता है की बाशा कभी भी रुकती नहीं है, वो लगातार बड़ती और विखसित होती रहती है. बाग दो बाए the numbers चल ये आकडों पर एक नजर डालते हैं. अगर आम एन आकडों को दिकोड करें, तो पता चलता है की अंगरेजी वन्माला के अगर तोडा गेराइ से सोचें तुछें तुछें तुछें तुछें तुछें तुछें तुछें तुछें तुछें तुछें तुछें तुछें तुछें तुछें तुछें तुछें तुछें तुछें तुछें तुछें तुछें तुछें तुछें तुछें तु� इन में से हरेक शब्द के लिए में एक दम सटी करत खूज निकाला है. ये देटा का क्या शान्दार विजिलाईशियष्यन है. बाग तीन अनाटमी अफ आन आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आ� आ� आप आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� � उदारन के लिए, स्रिव शब एक एगी इतने अलगलग उप्योग दिखाए गए हैं. संगया के रूप में, विषेशन के रूप में, और यहां तक की संगीट के एक सुर के रूप में भी, यही विववस्तित और बारिक तरीका इसे सच में एक मास्टर पीस बनाता है. बाग चार, ख्रान्स्लेतिं मैत्ली कल्च्र, यानी मैत्ली संस्क्रती का अनुवाद. देखे किसी भी चीस के लिट्रल, यानी सीधे अनुवाद अगर आम ने नोँब यागा नोब आप ज़ीए नोब आप प्रद नोब आप प्रद नोब आप प्रद नोब प्रद नोब आप प्रद नोब प्रद नोब प्रद नोब प्रद नोब प्रद नोब प्रद नोब प्रद नोब प्रद नोब प्रद नोब प्रद नोब प्रद न बूद्पूल बना देते हैं. संज्क्रितिक अनुवात का एक और बहुति खुबसुरत उदारन देखते हैं, जत जतिन, इस थिस्फिस्वोरस में इसे एमेठली फोल्क तान्स और बलेड के रूप में यह रूप में देफाइन की आगया है. अब जद जट यहन कोई मामूली शब्द नहीं बलकी यह वहां की लोक कला का एक बहद आहम हिस्चा है जो पीडियो पुरानी कहानियो को दान्स और मुझिक के जर यह बयान करता है. जर ज़ा जब भी कोई बहरी वेकती केख के रूप में दरज की आगे है. किसी भी लोकल दिष्ख को विदेशी भाशा में समजाना हमेशा से एक बड़ा तास करहा है, है ना? लेकिन यहां, इसे कितने सिमपल और सतीक तरीके से समजाया गया है. रोज मर्रा की जिन्दगी, खान पान, त्योहारों, और रिवाजों को जिस खुबसुर्ती से न पन्नो में समेटा गया है, उईस बात का पक्का सबूथ है, कि सर्फ एक भाशा के जर्ये, पूरी की पूरी सबभिता को महफुज रखा जा सकता है. बाग पाज प्रद बाच बादनाईजिं दीवोख्याबिलरी, आदूनिक शब्दावली की ओर एक कदम अब बाद करते हैं इस थिस्फिसट्फरस के कुछ बहुती खास्वीच्वस की इस में समनारती शब्दो यानी सिननिम्स की चेहाजार चेहसो बारा और विलोम शब्दो यानी अन्तिनिम्स की अंटनिम्स की 3955 अंट्रीज मोजुद हैं इसके लावा एक पुरा इंगलिश अपनेश्टीन इंट्रीखष भी है जिस में तएई सच्छ में हरान करती है वो है इसकी अईटी गलोसरी इस में 2204 अंट्रीज हैं जिसका सीदा समब अब यह ज़े की कमपुटर, इंटनेट, और आजकी मोडन टेकनलोगी से जोडे शब्दो को भी मेठली में गडा और सहेजा गया है. तो आप बज़ा ज़ा ज़ा गया है, किसी बि पारमपर एक भाशा की दिक्षनरी में इतने सारे अटी तरमस का हूना अपने आप में प्राचीन और आदूनिक्ता का एक बहुती शान्दार संगम है. बाग च्याए एन अपन सूर्स लेगसी एक अईसी लेगसी जो सब के लिए खुली है और यही वो चीज है जो इस पूरे प्रोजेट को आजके दिजितल दोर में इतना प्रासंगिग बनाती है इस विशाल तिसवारस को एक अपन सूर्स लिसेंस के तहत रिलीस की आगया है ताकि दून्याबहर में कोई भी, कही से भी इसे दिजिटली अख्सेस कर सके. ये किसी एक अईक अईक अईक अईक अईग प्रवेट्प्रप्रटी बनकर नहीं रहे गया है. बलकी गलोबिल जिटल कम्युन्टी के लिए एक अपन खजाना है इसके अपन सूर्स होने का फ़दा यह है कि दुन्याबभर के रिसर्चौर्स, स्टूडन्स और भाशाविद इसका इस्तमाल कर सकते हैं, इस पर आगे काम कर सकते हैं और इसे वकत के साथ और भी बहतर बना सकते हैं तो इस पुरे एकस्पलेनर को समेट ते हुए एक बहुती एहम सवाल जहन में आता है एक कीस्वी सदी में ये जो अपन सोर्स धिजिटाईटाइसेशन का दोर है ये दून्या बर की बाशाँ के बहुविष्खे कैसे आकार देगा? गजंजें़र ताकृर जी के समथली अंग्रेजी तिसवरस से हमने साथ तोर पर देखा है, कि जब तक्नीक और अटूट समरपन आपस में मिलते है, तो किसी भी बाशा को कैसे आमर बनाया जा सकता है. तीन लाख से जाडा शब्डों, एक पूरी तकनी की शब्डावली और गेरी सांस्क्रितिक ज़ो से लैस ये प्रोज्च्ट् सुचने पर मजबूर करता है, कि भाई आब दूनिया की बाखी बाशाँगो भी बिल्कुल इसी तरे सहीजने का वक नहीं आगया है. सुचने वाली बाता है नहीं ख़ेर, इस टर्चा में सामिल होने किले, बहुत बहुत शुक्रिया.

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