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मोती_दाईक_छह_दिनक_मातृत्व.m4a
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- 0:00–0:05इगजेंद्र ताकृर के लिखल कता मोती दाई के एक ता चोट संसाराव्च अचे,
- 0:05–0:09इवित्लाक उजैनी गामक एक ता दोबनिक उ मार्मिक कहानी च्यल्क,
- 0:09–0:14जे दिखाभे तचे जे कोना बाजपनाग दर्द और चरम भकती
- 0:14–0:18इकta ekdam asadharan ghatna khen janma dasa keta chhi.
- 0:18–0:24पहले बात, आहाग बतादी, जे मोती दाई गामक देवी माता गाहिलक परम भक्त चले है.
- 0:24–0:29लोग हुंका भक्तिनत कहे चल, मुदभाल बच्चा नहीं है बाक कारने,
- 0:29–0:33गाँके लोग सब उक्रा बाज कहे, कुब अप्मानित करे चल.
- 0:33–0:37इत्वा दरीज उकर च्याया के से हो अशुब मानलजाइद चल.
- 0:37–0:43आब आहा सोचु कि समाज कई कत्होर शब्द कोनो व्यक्तिक जीवन भरिक निस्वार्त समर्पन्ख है,
- 0:43–0:46एक जटके में खतम कर सके दची.
- 0:46–0:50तो सर बात, इबहारी अपमान मोतिदाई साहस सहल नहीं गेल,
- 1:03–1:06इक ता बखत का सोज नयाई मंबाक तरीकाचल,
- 1:06–1:09बिलकुर उही नाजयना कोनो जिद्दी बच्चा,
- 1:09–1:12अपना माएक साडिक आचे पकडी के जिद मनबैथ हो.
- 1:12–1:15अनतता हुंकर इमांपुरनभेल,
- 1:15–1:18आहुंका चैदिन कलेल मात्रत्वक सुखबेटल.
- 1:18–1:22खेर च्यादिन बाद उ बच्या नहीं बचल इसत्ते चे
- 1:22–1:26मुदाई गठन ख़ना उकर भाज हेबाक आजीवन कलंक के दो देल के
- 1:26–1:29आव फेर से माता भकती में जुमए लगली है
- 1:29–1:31एते आजाख लेल एक तप रषन चे
- 1:31–1:37की मात्र च्यादिन का इच्वोट सन्सुक कोनो जीवन बरेग दुखख बरपाई को सकेतचे.
- 1:37–1:40सन्शेप में इगता सावित करेतचे,
- 1:40–1:44जे साज भक्ती भग्वान के से हो जुखाएबाक लेल मजबूर का देतचे,
- 1:44–1:50अब मात्रत्वक मात्र च्ये दिन समाज़क्दिल आजीवन कलंक्ये सदा सर्वदा लिल मितासके तचे.
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इगजेंद्र ताकृर के लिखल कता मोती दाई के एक ता चोट संसाराव्च अचे, इवित्लाक उजैनी गामक एक ता दोबनिक उ मार्मिक कहानी च्यल्क, जे दिखाभे तचे जे कोना बाजपनाग दर्द और चरम भकती इकta ekdam asadharan ghatna khen janma dasa keta chhi. पहले बात, आहाग बतादी, जे मोती दाई गामक देवी माता गाहिलक परम भक्त चले है. लोग हुंका भक्तिनत कहे चल, मुदभाल बच्चा नहीं है बाक कारने, गाँके लोग सब उक्रा बाज कहे, कुब अप्मानित करे चल. इत्वा दरीज उकर च्याया के से हो अशुब मानलजाइद चल. आब आहा सोचु कि समाज कई कत्होर शब्द कोनो व्यक्तिक जीवन भरिक निस्वार्त समर्पन्ख है, एक जटके में खतम कर सके दची. तो सर बात, इबहारी अपमान मोतिदाई साहस सहल नहीं गेल, इक ता बखत का सोज नयाई मंबाक तरीकाचल, बिलकुर उही नाजयना कोनो जिद्दी बच्चा, अपना माएक साडिक आचे पकडी के जिद मनबैथ हो. अनतता हुंकर इमांपुरनभेल, आहुंका चैदिन कलेल मात्रत्वक सुखबेटल. खेर च्यादिन बाद उ बच्या नहीं बचल इसत्ते चे मुदाई गठन ख़ना उकर भाज हेबाक आजीवन कलंक के दो देल के आव फेर से माता भकती में जुमए लगली है एते आजाख लेल एक तप रषन चे की मात्र च्यादिन का इच्वोट सन्सुक कोनो जीवन बरेग दुखख बरपाई को सकेतचे. सन्शेप में इगता सावित करेतचे, जे साज भक्ती भग्वान के से हो जुखाएबाक लेल मजबूर का देतचे, अब मात्रत्वक मात्र च्ये दिन समाज़क्दिल आजीवन कलंक्ये सदा सर्वदा लिल मितासके तचे.