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मिथिलाक्षर_आ_डिजिटल_मैथिली-अंगरेजी_शब्दकोश.m4a

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Collection
Part 7 · VIDEHA MITHILA MAITHILI DISCUSSION CRITICISM SERIES PART 7
Status
asr-draft
Human verified
No
Editorial review
not-reviewed
ASR model
small
Detected language
hi (0.805559)
Duration
1:36
Source
Open preserved recording

Timestamped machine output

  1. 0:00–0:04मैथिली अंग्रेजी शब्द्खोष्क विषेपर यहमर तोरिट समिखशा चे
  2. 0:05–0:11गजेंद्र ताकृर, नागेंद्र कुमार जा, आपंजीकार विद्यान्द जा द्वारा रचित,
  3. 0:11–0:16इदबुत शब्द कोश मात्र एक ता पोत्ठी नहीं बलकी मेतली बाशा के,
  4. 0:16–0:21वेश्वी करन आ आददुविक धिजितल तकनीक से जोडबाक एक ता बहुत नीक प्रयास अचे,
  5. 0:21–0:24जै य साहं तुर्थ लाब उता सकच्चे.
  6. 0:24–0:30पहल, इस सोचु जे इपोती मात्र शब्दक अर्थदरी सीमित नहीं अचे,
  7. 0:30–0:34बलकी शब्दक व्याक्रन, सही उच्चारन, बुजबाक लेल,
  8. 0:34–0:38अन्तर राश्ट्री ध्वन्यात्मक लिपी, अदेवनागरीक संगे संग,
  9. 0:38–0:43अगर उद्यान्गार अगर अगर अगर अगर अगर अगर थेट बोली अपन्द्लाक सामाजिक तानाबाना के से हो बडनीग जका दिखावाईत अचे.
  10. 0:43–0:48कि یہा कल्पना कै सकची जे कोनो विदेशी वन नव सीखवाक लेल,
  11. 0:48–0:53मैत्हली पडबा लिखबाक लेल ये एक दम सतिक जीप्ये सन काज नहीं करत,
  12. 0:53–0:58बिलकुल करत. तो सर, इग्रन्त के वल किताभी ज्यान के दरी सीमित नहीं अचे,
  13. 0:58–1:05बलकी इआपन गाँंगर अथो थेट बोली आमितलाक समाजिक तानाबाना के से हो बडनीग जका दिखा वैट अईत अचे.
  14. 1:05–1:10अनतता एटेक पैक भाशिक द्रोहर के सुरक्षित राखबाक लेल,
  15. 1:10–1:14अगरा चःप आल अ एल्ट्रोनिक दुनु सो रुप में उपलप्ट कराओल गे लची
  16. 1:14–1:17जैमे खोजबाग बतन सन सुलव सुविदा आची
  17. 1:17–1:23सोचुता आपन प्राचीन लिपी के आदूनिक कमपुटरक बस एक ता क्लिक कदूरी पर लावी देव
  18. 1:23–1:25की कोनो चमतकार संकम आचे?
  19. 1:25–1:27संक्षेप में कहीता,
  20. 1:27–1:29इश्व्द कोश मैठली बाशा के
  21. 1:29–1:31अपन मुल मित्लाक्षर सल्ला के
  22. 1:31–1:33आदूनिक दिजितल युगद्धरी
  23. 1:33–1:35विश्वस तरपर स्तापित करबाक
  24. 1:35–1:37एक एतिहासिक अप्रामानिक दस्तावाए जचे

Plain text

मैथिली अंग्रेजी शब्द्खोष्क विषेपर यहमर तोरिट समिखशा चे गजेंद्र ताकृर, नागेंद्र कुमार जा, आपंजीकार विद्यान्द जा द्वारा रचित, इदबुत शब्द कोश मात्र एक ता पोत्ठी नहीं बलकी मेतली बाशा के, वेश्वी करन आ आददुविक धिजितल तकनीक से जोडबाक एक ता बहुत नीक प्रयास अचे, जै य साहं तुर्थ लाब उता सकच्चे. पहल, इस सोचु जे इपोती मात्र शब्दक अर्थदरी सीमित नहीं अचे, बलकी शब्दक व्याक्रन, सही उच्चारन, बुजबाक लेल, अन्तर राश्ट्री ध्वन्यात्मक लिपी, अदेवनागरीक संगे संग, अगर उद्यान्गार अगर अगर अगर अगर अगर अगर थेट बोली अपन्द्लाक सामाजिक तानाबाना के से हो बडनीग जका दिखावाईत अचे. कि یہा कल्पना कै सकची जे कोनो विदेशी वन नव सीखवाक लेल, मैत्हली पडबा लिखबाक लेल ये एक दम सतिक जीप्ये सन काज नहीं करत, बिलकुल करत. तो सर, इग्रन्त के वल किताभी ज्यान के दरी सीमित नहीं अचे, बलकी इआपन गाँंगर अथो थेट बोली आमितलाक समाजिक तानाबाना के से हो बडनीग जका दिखा वैट अईत अचे. अनतता एटेक पैक भाशिक द्रोहर के सुरक्षित राखबाक लेल, अगरा चःप आल अ एल्ट्रोनिक दुनु सो रुप में उपलप्ट कराओल गे लची जैमे खोजबाग बतन सन सुलव सुविदा आची सोचुता आपन प्राचीन लिपी के आदूनिक कमपुटरक बस एक ता क्लिक कदूरी पर लावी देव की कोनो चमतकार संकम आचे? संक्षेप में कहीता, इश्व्द कोश मैठली बाशा के अपन मुल मित्लाक्षर सल्ला के आदूनिक दिजितल युगद्धरी विश्वस तरपर स्तापित करबाक एक एतिहासिक अप्रामानिक दस्तावाए जचे

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