MACHINE ASR ACCESSIBILITY AID
मैथिली_कंप्यूटर_शब्दकोश_को_बेहतर_कैसे_बनाएं.m4a
Timestamped machine output
- 0:00–0:05आजा में अछिण विस्त्रत अंग्रेजी मेथली कमपुटर सब्दकोष की समीख्षा कर रहे है,
- 0:05–0:07जिस में तकनी की सब्दावली को,
- 0:07–0:12आँम आईपी आ, देवनागरी, और मितलाक्षर लिपियो में प्रस्थ॥ की आ गया है.
- 0:12–0:16और भिना कोई समए बरभाद किये हम सीदे फीटबैक पर आते है
- 0:17–0:20कियोंकी इस सामगरी में चर्चा करने के लिए बहुत कुछ है
- 0:20–0:21बलकुल
- 0:21–0:22तो पहली एहम बात
- 0:23–0:26इस प्राक्कतन का इतिहासिक और जन सांखिकी की इद्रिष्टिकोन
- 0:26–0:28एक उतक्रिष्ट शोद है
- 0:28–0:33लेकिन यह इस विषिष्ट तकनी की शब्दकोष के मुल उद्टेश से तोडा बददग जाता है.
- 0:33–1:03आप पक दिश्टार दिश्टार दिश्टार दिश्टार दिश्टार दिश्टार दिश्टार दिश्टार दिश्टार दिश्टार दिश्टार दिश्टार दिश्टार दिश्टार दिश्टार दिश्टार दिश्टार दिश्टार दिश्टार दिश्टार दिश्टार दिश्
- 1:03–1:19यह आप यह था एक पाट़ख जो यह जानने आया है कि पाट़ख जो यह जानने आया है कि पाटख जो यह जानने आया है कि पाटख जो यह जानने आया है कि बवाशा के प्राची नितिहास के इतने बारी पाटख गुजलना परता है.
- 1:19–1:49सैंबात है, नोट्ट्ट्ट को देक्टर मुझे जो समज मे आँँआँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँ
- 1:49–1:52अगर इसके पीछे उनोने वास्तर में क्या कारे प्रनाली अपनाई?
- 1:52–1:55तो क्या अपको लकता है कि यह व्यापक इतिहास पाथक को
- 1:55–1:58दिजितल युग की शब्दावली से जुनने में देरी करवाता है?
- 1:58–2:02बीको गवाता है. ये कुछ वैसाई है
- 2:02–2:05आप आप मुजे एक नहीं कोडिं लंगवेज सिकाने वाले हो,
- 2:05–2:10लिएक पहले दो गंटे आप मुजे कमपुटर हाद्वेर के विकास का इतिहास पड़ाथे रहें.
- 2:10–2:13तु फिर इसका समादान क्या है?
- 2:13–2:16मतलब हम इस प्राकतन को कैसे सुदार सकते हैं?
- 2:16–2:22मेरी राई में प्रकत्ठन के पोगस को पूरी क्रहासे पूनर्वेवस्तित करने की जरूरत है.
- 2:22–2:27अटिहासिक संदर्ब को बस एक संशिप्त प्रिष्ट भूमी के रुप में रख्खें
- 2:27–2:32अर मुख्या जोर इस बात पर दें कि दिजिटल दून्या में मैठिली का भविष्ष्ष क्या है?
- 2:32–2:35और उस कार्ये प्रनाली का क्या जिसका आपने अभी जिकर किया था?
- 2:35–2:37आप वो सब से जरूरी है.
- 2:37–2:44प्राकत्ठन मे एक नया कहन्द जोडना जाहिए, जो ये समजाए, कि तकनी की अनुवाद की चुनातिया क्या थी?
- 2:44–2:51उदहरन किलिए उनहे सपष्ट्रूब से समजाना जाहिए, कि अप्स्ट्रक टेटाटाइप या बैन्विद्ध,
- 2:51–2:54जेसे शब्डों का मैठीली करन कैसे किया गया?
- 2:54–3:24अच्छा ज़े से अप्स्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्
- 3:24–3:30अप अदिख़नादी पाथख लिए पाथख लिए पाथख लिए पाथख लिए बादी चुनोती है.
- 3:30–3:36प्रविष्टियो में तीन अलग �alag lippiyo का एक सामनांतर उप्योग पाथख के लिए बारी विज्वल अबर्लोड यानी द्रिष अदिभार उपन करता है.
- 3:36–3:39अगर दिक्छनरी के वर्तमान लेयाूट को देखते है,
- 3:39–3:41तो रर तकनी की शब्द के लिए,
- 3:41–3:44जानकारी को खषेटिज रूब से,
- 3:44–3:47यानी हरुजांतली एक ही पंक्ती में प्लागतन को बड़ल दिया,
- 3:47–3:49और पात्ठदीष शान्दार मत्रोलोगी को पड़कर
- 3:49–3:54पाथक के लिए एक बारी विज्योल अवर्लोड यानी द्रिश अदिबार उत्पन करता है
- 3:54–3:58आँ, जब हम दिक्षनरी के वर्तमान लेया। को देखते है,
- 3:58–4:03तो रर तकनी की शब्द के लिए जानकारी को खषेटिज रूप से,
- 4:03–4:07यानी हरुजान्तली एक ही पंक्ती में फलाया गया है
- 4:07–4:09मतलब अगर कोई अपसलूट अद्रेस
- 4:09–4:12या बाग्ग्राँन प्रिंटिंग जैसा शबद कोज रहा है
- 4:12–4:16तो उसे एक ही लाईन में पहले उसका व्याक्रनेक पहलू
- 4:16–4:18फिर अंतर राश्ट्रे धून्यात्मक वरनमाला
- 4:33–4:39तो इतनी सारी समवनान्तर लिपियों को एक साथ सन्साधित करने में
- 4:39–4:44उसे बारी संगर्ष करना परता है. ये संदर्ब गरन्त के उप्योग की गती को
- 4:44–4:48बहुत दीमा कर देता है. मुझे इस हिसे की जो बात सबसे अच्छी
- 4:48–4:53वो है बाशा के मुल स्वरूप यानी मित्लाक्षर को सहेजने का प्रयास.
- 4:53–4:55लेकिन उस बिन्दू को आगे बड़ाते हुए,
- 4:55–4:59क्या ये समबव है कि सर्फ देवनागरी को प्रात्मिक बनाकर,
- 4:59–5:01हम लेयाव। सुदार सकते है?
- 5:01–5:02बिलकुल समबव है.
- 5:02–5:07हमे एक आरकाइव और एक तूल के भीच्ट का अंतर समचना होगा.
- 5:07–5:10एक शब्द कोश मुख्यरूप से एक तूल है.
- 5:10–5:17जो यूवा उप्योख करता जल्दी से डाता बेस या कमपालर का अर्थ खोजना चाते है,
- 5:17–5:19उनके लिए हमें प्रिष्ट की सन्रच्ना
- 5:19–5:22और इन्फमेशन हैरार की को बडलना होगा
- 5:22–5:25यानी जो सब से ज़ोरी जानकारी है
- 5:25–5:26वो सब से बहले दिखें
- 5:26–5:29तो हम इस द्रिष अदिबार को कम करने किलिए
- 5:29–5:30क्या सुजाओ दे सकते हैं
- 5:30–5:36आखे बाये से दाये बदखने के बजाए उपर से नीचे की योर जाना चाहीए.
- 5:36–5:43कोलम आदारित ग्रिट को हताखर एक उर्द्वादर या वर्टिकल प्रविष्ट सन्रच्ना अपनानी चाहीए.
- 5:43–5:46तो उदारन के तोर पर पन्ने पर ये कैसा दिखेखा?
- 5:46–5:48मान लीजे शबद है बैकव
- 5:48–5:51तो सब से उपर मुख्यशी शवक के रूप में
- 5:51–5:54अंग्रेजी शबद बैकव को बोल्ड अखशरो मे रखें
- 5:54–5:57उम उसकी तीक नीचे अग्ली लाईन में
- 5:57–6:00देवनागरी में उसका अर्थ सपश्ट रूप से लिखें
- 6:00–6:03जैसे प्रतिलेक या प्रतिक्रति
- 6:03–6:06इसे जो पाटक सर्फ अर्थ दून्डा था
- 6:06–6:08उसका काम तो यही कदम हो गया
- 6:08–6:09एक दम सही
- 6:09–6:13और अन्या लिपियों को हम एक द्वितियक द्रिष्टर
- 6:13–6:15यानी सेकिन्ट्री विज्वल लेर पर रक सकते है
- 6:15–6:18IPA और मित्लाक्षर को
- 6:18–6:24देवनागरी के नीचे एक �alag halkerang mein ya kooshthaq ki bhiita rakhha jaa sakta hai.
- 6:24–6:26ये बहुत ही व्यावारिक सुजाव है.
- 6:26–6:29वर्टिकल लेया। उस संग्यानात्मक भार को कम कर देगा
- 6:29–6:33और मित्हिलाक्षर लीपी भी प्रिष्ट पर अपनी जगा बनाई रक्खेगी.
- 6:33–7:03आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आ� आ� आप आ� आ� आ� आप आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� �
- 7:03–7:08अगर हम देख हैं, देटा माइनिंग को दद्टान्शोद कहनन के रुप में अन्वादित की आगया है.
- 7:09–7:13अगर दिबगर के लिए दोशिन रुपक विदिका अई अच्तमाल हुए,
- 7:13–7:15अन्शोद कहनन के रूप में अन्वादित की आगया है
- 7:15–7:45अग, और दिबगर के लिए दोशिन रूपक विदिका अज्तमाल हूँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँ
- 7:45–8:15यह यह यह यह यह यह यह यह यह यह यह यह यह यह यह यह यह यह यह यह यह यह यह यह यह यह यह यह यह यह यह यह यह यह यह यह यह यह यह यह यह यह यह यह यह यह यह यह यह यह यह यह यह यह यह यह यह यह यह यह यह यह यह यह यह यह यह यह यह यह यह यह यह यह �
- 8:15–8:20और अगर वे अज्या अज्याटे है, तो इस शब्द कोश को बनाने की पुरी महनत ही विफल हो जाती है.
- 8:21–8:26बाशा हमेशा वही रास्ता चुनती है, जहाँ बोलने में सबसे कम गर्षन हो.
- 8:26–8:27तो फिर हम क्या करे?
- 8:27–8:30अम शुद्द्दा वादियो को नाराज की ये बिना,
- 8:30–8:33इस दिक्षनरी को आम जन्ता और तकनीकी पेशेवरों
- 8:33–8:35दोनो के लिए सुलप कैसे बना सकते हैं?
- 8:35–8:37इसका सबसे प्रभावी तरीका ये है,
- 8:37–8:40की बाशा की शुद्द्द्दा को बनाएन अखते हुए,
- 8:40–8:44वेवावारेक और हाईब्रेट विकल्पों को भी मुख्यप्रविष्टीो में
- 8:44–8:47सहे विकल्प के रूप में शामिल किया जाए.
- 8:47–8:49जा आप इसका कोई तो सुदारर दे सकती है?
- 8:49–8:52आप देखो, कठेन अनवादों के साथ साथ
- 8:52–9:22अपने आज़ान देटा माइनिग भी बाज़ी नहीं जाना जाना जाना जाईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईई�
- 9:22–9:27ब्रूव्जर को भी एक स्विकारे शब्द के रूप में स्विकारे होना चाहीे
- 9:27–9:31क्योकी आदूनिक मेठ्फली भाशी समवाद में इनका ही प्रयोग करते है
- 9:32–9:34ये हाईब्रिद द्रिष्टिकोन बहुत ही संथूलित है
- 9:34–9:36यह मूल विजन का सम्मान भी करता है
- 9:36–9:39और इस वास्त्विक्ता को भी स्विक्तार करता है,
- 9:39–9:41की भाशा एक जीवे तिकाई है.
- 9:41–9:42एक दम सही.
- 9:42–9:47हमारा उदेश्व्य इस अबहुत पूर्व अकाड्ट मेक कारे को कम आकना नहीं है.
- 9:47–9:49बलकी यह सुनिष्छित करना है,
- 9:49–9:54कि यह वास्तो में लोगों की रोज मर्रा की तकनी की बाज्चीत का हिस्सा बने.
- 9:54–9:58तो चलिये, आजकी इस गहन समिक्षा के मुख्य बिंदुहों को संखषेप में समेट लेते हैं.
- 9:58–10:03पहला बिंदु प्राक्कतन को अई तिहासिक विव्रनो से हता कर
- 10:03–10:08तकनी की शब्दावली निर्मान की प्रक्रिया और भविश्वे के द्रिष्टिकोन पर केंद्रित करना चाहीए.
- 10:08–10:12आप, और दुस्रा लेयाउत को सरल बना चाहीए.
- 10:12–10:17देवनागरी को प्रमुखता दे और द्रिष्ष्ट्ई अदिबार को कम करने के लिए
- 10:17–10:20खशेटज के बजाए उर्द्वादर प्रविष्टी शेले अपनाई
- 10:20–10:22और तीस्रा महत्वपुन बिन्दू
- 10:22–10:26अकाद्मेक और संस्क्रिट्निष्ट अनुवादों के साथ-सात
- 10:26–10:30व्यव्हारेक और भोल्चाल की तकनी की शब्दावली को भी शामिल करें
- 10:30–10:32ताकी इसका उप्योग आसानी से हो सके.
- 10:32–10:36बिलकुल, ये हाईब्रेट द्रिष्टिकोण इस दिक्षनरी को
- 10:36–10:38बहुत अदेक उप्योगी बना देगा.
- 10:38–10:40हम शोटा को आमन्त्रत करते है,
- 10:40–10:43कि इस सामगरी को परषक्रत करने के बाद,
- 10:43–10:46इं सुजहवों को लागु करने के बाद
- 10:46–10:49आगे की चर्चा किलिए से हमारे पास वापस बेजें
- 10:49–10:51आज किलिए बस इतना ही
Plain text
आजा में अछिण विस्त्रत अंग्रेजी मेथली कमपुटर सब्दकोष की समीख्षा कर रहे है, जिस में तकनी की सब्दावली को, आँम आईपी आ, देवनागरी, और मितलाक्षर लिपियो में प्रस्थ॥ की आ गया है. और भिना कोई समए बरभाद किये हम सीदे फीटबैक पर आते है कियोंकी इस सामगरी में चर्चा करने के लिए बहुत कुछ है बलकुल तो पहली एहम बात इस प्राक्कतन का इतिहासिक और जन सांखिकी की इद्रिष्टिकोन एक उतक्रिष्ट शोद है लेकिन यह इस विषिष्ट तकनी की शब्दकोष के मुल उद्टेश से तोडा बददग जाता है. आप पक दिश्टार दिश्टार दिश्टार दिश्टार दिश्टार दिश्टार दिश्टार दिश्टार दिश्टार दिश्टार दिश्टार दिश्टार दिश्टार दिश्टार दिश्टार दिश्टार दिश्टार दिश्टार दिश्टार दिश्टार दिश्टार दिश् यह आप यह था एक पाट़ख जो यह जानने आया है कि पाट़ख जो यह जानने आया है कि पाटख जो यह जानने आया है कि पाटख जो यह जानने आया है कि बवाशा के प्राची नितिहास के इतने बारी पाटख गुजलना परता है. सैंबात है, नोट्ट्ट्ट को देक्टर मुझे जो समज मे आँँआँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँ अगर इसके पीछे उनोने वास्तर में क्या कारे प्रनाली अपनाई? तो क्या अपको लकता है कि यह व्यापक इतिहास पाथक को दिजितल युग की शब्दावली से जुनने में देरी करवाता है? बीको गवाता है. ये कुछ वैसाई है आप आप मुजे एक नहीं कोडिं लंगवेज सिकाने वाले हो, लिएक पहले दो गंटे आप मुजे कमपुटर हाद्वेर के विकास का इतिहास पड़ाथे रहें. तु फिर इसका समादान क्या है? मतलब हम इस प्राकतन को कैसे सुदार सकते हैं? मेरी राई में प्रकत्ठन के पोगस को पूरी क्रहासे पूनर्वेवस्तित करने की जरूरत है. अटिहासिक संदर्ब को बस एक संशिप्त प्रिष्ट भूमी के रुप में रख्खें अर मुख्या जोर इस बात पर दें कि दिजिटल दून्या में मैठिली का भविष्ष्ष क्या है? और उस कार्ये प्रनाली का क्या जिसका आपने अभी जिकर किया था? आप वो सब से जरूरी है. प्राकत्ठन मे एक नया कहन्द जोडना जाहिए, जो ये समजाए, कि तकनी की अनुवाद की चुनातिया क्या थी? उदहरन किलिए उनहे सपष्ट्रूब से समजाना जाहिए, कि अप्स्ट्रक टेटाटाइप या बैन्विद्ध, जेसे शब्डों का मैठीली करन कैसे किया गया? अच्छा ज़े से अप्स्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट् अप अदिख़नादी पाथख लिए पाथख लिए पाथख लिए पाथख लिए बादी चुनोती है. प्रविष्टियो में तीन अलग �alag lippiyo का एक सामनांतर उप्योग पाथख के लिए बारी विज्वल अबर्लोड यानी द्रिष अदिभार उपन करता है. अगर दिक्छनरी के वर्तमान लेयाूट को देखते है, तो रर तकनी की शब्द के लिए, जानकारी को खषेटिज रूब से, यानी हरुजांतली एक ही पंक्ती में प्लागतन को बड़ल दिया, और पात्ठदीष शान्दार मत्रोलोगी को पड़कर पाथक के लिए एक बारी विज्योल अवर्लोड यानी द्रिश अदिबार उत्पन करता है आँ, जब हम दिक्षनरी के वर्तमान लेया। को देखते है, तो रर तकनी की शब्द के लिए जानकारी को खषेटिज रूप से, यानी हरुजान्तली एक ही पंक्ती में फलाया गया है मतलब अगर कोई अपसलूट अद्रेस या बाग्ग्राँन प्रिंटिंग जैसा शबद कोज रहा है तो उसे एक ही लाईन में पहले उसका व्याक्रनेक पहलू फिर अंतर राश्ट्रे धून्यात्मक वरनमाला तो इतनी सारी समवनान्तर लिपियों को एक साथ सन्साधित करने में उसे बारी संगर्ष करना परता है. ये संदर्ब गरन्त के उप्योग की गती को बहुत दीमा कर देता है. मुझे इस हिसे की जो बात सबसे अच्छी वो है बाशा के मुल स्वरूप यानी मित्लाक्षर को सहेजने का प्रयास. लेकिन उस बिन्दू को आगे बड़ाते हुए, क्या ये समबव है कि सर्फ देवनागरी को प्रात्मिक बनाकर, हम लेयाव। सुदार सकते है? बिलकुल समबव है. हमे एक आरकाइव और एक तूल के भीच्ट का अंतर समचना होगा. एक शब्द कोश मुख्यरूप से एक तूल है. जो यूवा उप्योख करता जल्दी से डाता बेस या कमपालर का अर्थ खोजना चाते है, उनके लिए हमें प्रिष्ट की सन्रच्ना और इन्फमेशन हैरार की को बडलना होगा यानी जो सब से ज़ोरी जानकारी है वो सब से बहले दिखें तो हम इस द्रिष अदिबार को कम करने किलिए क्या सुजाओ दे सकते हैं आखे बाये से दाये बदखने के बजाए उपर से नीचे की योर जाना चाहीए. कोलम आदारित ग्रिट को हताखर एक उर्द्वादर या वर्टिकल प्रविष्ट सन्रच्ना अपनानी चाहीए. तो उदारन के तोर पर पन्ने पर ये कैसा दिखेखा? मान लीजे शबद है बैकव तो सब से उपर मुख्यशी शवक के रूप में अंग्रेजी शबद बैकव को बोल्ड अखशरो मे रखें उम उसकी तीक नीचे अग्ली लाईन में देवनागरी में उसका अर्थ सपश्ट रूप से लिखें जैसे प्रतिलेक या प्रतिक्रति इसे जो पाटक सर्फ अर्थ दून्डा था उसका काम तो यही कदम हो गया एक दम सही और अन्या लिपियों को हम एक द्वितियक द्रिष्टर यानी सेकिन्ट्री विज्वल लेर पर रक सकते है IPA और मित्लाक्षर को देवनागरी के नीचे एक �alag halkerang mein ya kooshthaq ki bhiita rakhha jaa sakta hai. ये बहुत ही व्यावारिक सुजाव है. वर्टिकल लेया। उस संग्यानात्मक भार को कम कर देगा और मित्हिलाक्षर लीपी भी प्रिष्ट पर अपनी जगा बनाई रक्खेगी. आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आ� आ� आप आ� आ� आ� आप आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� � अगर हम देख हैं, देटा माइनिंग को दद्टान्शोद कहनन के रुप में अन्वादित की आगया है. अगर दिबगर के लिए दोशिन रुपक विदिका अई अच्तमाल हुए, अन्शोद कहनन के रूप में अन्वादित की आगया है अग, और दिबगर के लिए दोशिन रूपक विदिका अज्तमाल हूँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँ यह यह यह यह यह यह यह यह यह यह यह यह यह यह यह यह यह यह यह यह यह यह यह यह यह यह यह यह यह यह यह यह यह यह यह यह यह यह यह यह यह यह यह यह यह यह यह यह यह यह यह यह यह यह यह यह यह यह यह यह यह यह यह यह यह यह यह यह यह यह यह यह यह यह � और अगर वे अज्या अज्याटे है, तो इस शब्द कोश को बनाने की पुरी महनत ही विफल हो जाती है. बाशा हमेशा वही रास्ता चुनती है, जहाँ बोलने में सबसे कम गर्षन हो. तो फिर हम क्या करे? अम शुद्द्दा वादियो को नाराज की ये बिना, इस दिक्षनरी को आम जन्ता और तकनीकी पेशेवरों दोनो के लिए सुलप कैसे बना सकते हैं? इसका सबसे प्रभावी तरीका ये है, की बाशा की शुद्द्द्दा को बनाएन अखते हुए, वेवावारेक और हाईब्रेट विकल्पों को भी मुख्यप्रविष्टीो में सहे विकल्प के रूप में शामिल किया जाए. जा आप इसका कोई तो सुदारर दे सकती है? आप देखो, कठेन अनवादों के साथ साथ अपने आज़ान देटा माइनिग भी बाज़ी नहीं जाना जाना जाना जाईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईई� ब्रूव्जर को भी एक स्विकारे शब्द के रूप में स्विकारे होना चाहीे क्योकी आदूनिक मेठ्फली भाशी समवाद में इनका ही प्रयोग करते है ये हाईब्रिद द्रिष्टिकोन बहुत ही संथूलित है यह मूल विजन का सम्मान भी करता है और इस वास्त्विक्ता को भी स्विक्तार करता है, की भाशा एक जीवे तिकाई है. एक दम सही. हमारा उदेश्व्य इस अबहुत पूर्व अकाड्ट मेक कारे को कम आकना नहीं है. बलकी यह सुनिष्छित करना है, कि यह वास्तो में लोगों की रोज मर्रा की तकनी की बाज्चीत का हिस्सा बने. तो चलिये, आजकी इस गहन समिक्षा के मुख्य बिंदुहों को संखषेप में समेट लेते हैं. पहला बिंदु प्राक्कतन को अई तिहासिक विव्रनो से हता कर तकनी की शब्दावली निर्मान की प्रक्रिया और भविश्वे के द्रिष्टिकोन पर केंद्रित करना चाहीए. आप, और दुस्रा लेयाउत को सरल बना चाहीए. देवनागरी को प्रमुखता दे और द्रिष्ष्ट्ई अदिबार को कम करने के लिए खशेटज के बजाए उर्द्वादर प्रविष्टी शेले अपनाई और तीस्रा महत्वपुन बिन्दू अकाद्मेक और संस्क्रिट्निष्ट अनुवादों के साथ-सात व्यव्हारेक और भोल्चाल की तकनी की शब्दावली को भी शामिल करें ताकी इसका उप्योग आसानी से हो सके. बिलकुल, ये हाईब्रेट द्रिष्टिकोण इस दिक्षनरी को बहुत अदेक उप्योगी बना देगा. हम शोटा को आमन्त्रत करते है, कि इस सामगरी को परषक्रत करने के बाद, इं सुजहवों को लागु करने के बाद आगे की चर्चा किलिए से हमारे पास वापस बेजें आज किलिए बस इतना ही