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Part 7 · VIDEHA MITHILA MAITHILI DISCUSSION CRITICISM SERIES PART 7
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  1. 0:00–0:11ता आए हम्रा सब लग, गजेंद्र ताकुर द्वारा संकलित 3,61,000 से भेशी प्रविष्टिक कर एक ता अट्यंत विस्त्रत अंग्रेजी मैठली तिसवरा सची,
  2. 0:11–0:18और हम्रा सब एक रा और भेशी उप्योगी बनेवा किलेल तींटा मुख्य सुदार पर सोजे बात करब.
  3. 0:18–0:22एक्तम! और हम सोजे पहल बिन्दूपर आबेत ची.
  4. 0:22–0:27प्रविष्टी सबख वर्तमान वर्ण माला अदारित क्रम बद्ध्धा
  5. 0:27–0:31विषेश रुप से न एटाईप अप जका लंभा वा क्यान्षक प्रियोग
  6. 0:31–0:36पात्ठक लेल होजवाक प्रक्रिया के अथ्यदेक जटल बना रहलाची.
  7. 0:36–0:40आप बआई जकन हम एही गरन्तक पन्ना पलती रहाच जलों,
  8. 0:40–0:43तहम्रा इए अस्पष्ट रूप से देखा रहाचल,
  9. 0:43–0:47जे ए सामगरी में साक्डो सान्स्क्रितिक आविशिष्ट शब्द सब आची.
  10. 0:47–0:53सत्तिक है, जना दान कप्रकार, माच्ख्ख्प्रकार, वा गाच्ख्ख्ख्प्रकार.
  11. 0:53–1:23बिल्ल्कुल! और एही सब के मात्र एटाईप फिष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष
  12. 1:23–1:28अख्शरक नीचा जाकर एटाईप फिश खन्ड मे रोहु खोजबा कची
  13. 1:29–1:32इटो उहिना भेल जे कोनो विशाल जंगल में
  14. 1:32–1:34आहा विष्ट गाछ खोजी रहल ची
  15. 1:35–1:36मुदा पूरा जंगल में
  16. 1:36–1:38रस्ता कोनो संकेत नहीं चे
  17. 1:38–1:49अखा, हम आते एक तद्रिष्टान्त देवाचाव, इष्तिति बिलकुल उहीना आची, जिना आहा कोनो पैंग पुस्तकाले में प्रवेश करी, जै हमें लाको पुत्ठी होयाए.
  18. 1:49–1:52अखा, पुस्तकाले कुदारन बहुत नीक रहात.
  19. 1:52–1:57ता आहा आशा करे ची जे पोठी सब विशैक आदार पर सुविवस्तित होगत,
  20. 1:57–1:59माने इतिहासक पोठी इतिहास क्हन्ड में,
  21. 1:59–2:02और विग्यानक विग्यान क्हन्ड में,
  22. 2:02–2:05मुदद तकने आजा के बुजाए जो उही पुस्तकाले में,
  23. 2:05–2:07पोठी सब विश्यक आदार पर नहीं
  24. 2:07–2:11बलकी पोठी के कवर के रंके आदार पर सजाजा दिल गेलाचे.
  25. 2:11–2:12बाप्रे,
  26. 2:12–2:17तल लाल रंके खंड मे आहा के विग्यान से लैगा साहित दरे पोठी एकि तम वेंजात.
  27. 2:17–2:17एक दम.
  28. 2:17–2:20आए इद्रिष्तानत इतन एक दम सती कचे.
  29. 2:20–2:25जखना ए ताईप बुलक कनीचा चरकावा चवरा जे बेलक प्रकार अची,
  30. 2:25–2:31उक्रा राखाई ची, ता आहा मूल शब्दा के एक ता क्रित्रिम अंग्रेजी वाख्यांश के पाचा नुकाई रहल ची.
  31. 2:31–2:36चही कहली आए, एकर परिनाम एब है लग जे केवल ए,
  32. 2:36–2:45ने, मैंजे आटिकल आची, उही से शुरूएब आखन्ड में लग भग अग आट्टाःी साचार नाशो उन्तालिस प्रविष्टी बहेगे लची.
  33. 2:45–2:49इदिक्षनरीक सन्तुलन के पुरन रुब से भिगाडी रहा लची.
  34. 2:49–2:52पात्खक मनोविग्यानक विरुद्द काज कर रहला ची
  35. 2:53–2:55मुदा एते हम एक ता प्रष्न अथा वचा हब
  36. 2:56–2:59जा हम दिक्षनरीक पारमपरीक नियमक बात करी
  37. 2:59–3:03ता दिक्षनरी वरन्माला मने आलपा बेटिकल करम में होई ता चे की
  38. 3:03–3:04हाँ उता ची
  39. 3:04–3:08तजग कोनो वाख्यांश ए ताईप अप से सुरूब हरहल आची
  40. 3:08–3:12तटकनी की रूप से तव उक्रा ए खण्ड में हेबाख चाही
  41. 3:12–3:16की एते लेक्ख मात्र वन्माला कडाई से पालन नहीं करहल चती
  42. 3:16–3:21आप देखो आहां की तर क सद्ध्धानतिक रूप से सहीभ है सके तची
  43. 3:21–3:27मुदव व्यावाहारीक रूप से इएक ता थिसोरस वा सब्द कोशक मुल उदेशे के विफल करहल आची.
  44. 3:27–3:32दिक्षनरी में जे हेटवर्ड वा मुख्ध्य सब्द जी तकर महत्व होई दची.
  45. 3:32–3:37नहीं कि अगर आगु लागल आटिकल ए आन वा दग.
  46. 3:37–3:42बूजलीए, मने एक दब्याकरनी कुपकरन आची उ मुख्य संगय नहीं आची?
  47. 3:42–3:49बिल्कोल, जखन हम एही तरहकर क्रित्रम वाख्यान्शक आदार पर वर्गी करन करेची,
  48. 3:49–3:55तहम पातख के उशवद खोजबा सववन्चित करोल ची जे उवास्तों में खोजे चाहत आची.
  49. 4:07–4:10जे इ प्रकारक विषिष्ट श्रेनी बद्द शब्द सब के लेल
  50. 4:10–4:14मुख्ध शब्द कोश स �alag ekta विषेग गत अनुक्रमनिका
  51. 4:14–4:16माने थ्फीमातिक अपन्टिक्स बनाल जाए.
  52. 4:16–4:20अच्छा, मुख्ध बाग में शब्द के अकर मुल अंगरेजी
  53. 4:20–4:24वो मैत्ली अख्ष्रक अनुसार राखल जाए, अप पच्षाती में?
  54. 4:24–4:27पच्षाती में विष्यक अदार पर सुची देल जाए.
  55. 4:27–4:29एक रा एक तथोस उदारन्स बूजी ली.
  56. 4:29–4:35मूल ग्रन्त में जना लिखल अची, अट ताइप अप फिष, अनीचा मगुर.
  57. 4:35–4:43हमरा सब के सुजाओ एजी जे एक रा एक हन्द सा हताए के मगुर के सोजे मएक्षरक के नीचा राखल जाए?
  58. 4:43–4:48एक दम सही अटकर बाद ग्रन्त का अंत में एक परिषिष्ट वा अपन्टिक्स बनावल जाए,
  59. 4:48–4:52जक्र नाम होया माचक प्रकार वर ताइप्सोप फिषिस
  60. 4:52–4:59उही परिषिष्ट में रोहु, मगोर, पोठी, भुनना, सबता माचक नाम एक संगे सुची बद्खेल जाए.
  61. 4:59–5:02आप, एही पद्दती सें दूईता काज हैत.
  62. 5:02–5:06पहिलता खोज के प्रक्रिया बहुत आसान भजेत?
  63. 5:18–5:21अग्रा एक ता मेठलिक जैव विविद्ताक भान हैत
  64. 5:22–5:27अग्रा भुजहाइत जै एही भाशा में माच्धलिल कत्यक विषिष्ट शब्द अची
  65. 5:28–5:28ताई ता?
  66. 5:29–5:32इग्रन्त के मात्रे एक ता दिक्षनरी से उथाख कर
  67. 5:32–5:36शोद के एक ता महत्व पुड उपकरन बना देत
  68. 5:36–5:43इसमादान वास्तव में रंग आदारिट पुस्त्तकालै के वापस विशया आदारिट पुस्त्तकालै में बदली देत.
  69. 5:43–5:50बलकोल. मुदा विसयगत अनुक्रमनिका बना क, हम्रा सब पाधख के शब्द खोजबाक रस्तात दे दे दे लियें.
  70. 5:50–5:57मुता जकन पात्ध, उही शवददरी पहुचे तची, तो उक्रा एक तनव समस्स्याक सामना करे पडे तची.
  71. 5:57–6:02आई हम्रा सब के एही समिख्षाक दोसर मुख्धे बिन्दू दिसलग जाई तची.
  72. 6:02–6:08इक अद्थ वः समान शब्द लेल अनेक अलग-गलक प्रविष्टिक उपस्थिती,
  73. 6:08–6:12शब्द कोशक समग्र सपष्टता अग केंद्र बिन्दूके कमजोर करेता ची.
  74. 6:12–6:15इद्दम इएहन अची,
  75. 6:15–6:19जे नहां के जे पोठी कोजबाखचल से तभेट गेल,
  76. 6:19–6:23मगर उपोत्थी के पन्ना अलग-गलग �theam चित्रायलचे
  77. 6:23–6:26जो हमरा सब मुल सामगरी में
  78. 6:26–6:28अफ्रेंड शब्द के देखी
  79. 6:28–6:30तएकर लेल सखा
  80. 6:30–6:31संगी
  81. 6:31–6:32संगाती
  82. 6:32–6:33मीद
  83. 6:33–6:34आदिक लेल
  84. 6:34–6:37पाच्छोट अलग-गलग लाईन बनावल गेलची
  85. 6:37–6:38आए एत भी नहीं
  86. 6:38–6:46के सिंसितिविति माने चोटबार अख्चरक कारन्सा एके सब्द �alag alag tham chaligela chi.
  87. 6:46–6:51आजेना बद का एस अवाज अच्चोट का एस अगत.
  88. 6:51–6:57माने इच्छोटबार अख्चरक भिभाजन सादारन संजाले ल अनावश्षक अच्छी.
  89. 6:57–7:00एक रासा पन्नाक संख्यात बडी रहा लाची
  90. 7:00–7:04मुदः पाथक के एक ताम सब भिकल्प नहीं बहत रहा लाची
  91. 7:04–7:07इएक ता बहुत महत्पुन कम्जोरी आची
  92. 7:07–7:12दिक्षनरी निरमानक विग्यान में के संस्टिविटीक उप्योग
  93. 7:12–7:14आम तोर पर विक्ती वाचक संग्या
  94. 7:14–7:15माने प्रोपर नाुन
  95. 7:15–7:19वविशिष्ट संख्षिप्त रूप के वगग करबाक लेल केल जाईता ची
  96. 7:19–7:22जेना आपल जे प्हल आचे
  97. 7:22–7:24आपल जे कमपनी आचे
  98. 7:24–7:25भिल्कुल
  99. 7:25–7:28मुद शामान ने शब्दा सबख लेल
  100. 7:28–7:30चोट बड अखषरक आदार पर
  101. 7:30–7:34अलग अलक प्रविष्टी देब पाथक क्या ब्रहमित करेता जी
  102. 7:34–7:37पाथक सोच्वापर मजबोर भाई जायता जी
  103. 7:37–7:39जे बडखा एवला अप्रेंड
  104. 7:39–7:42अछछोट्खा एवला अप्रेंड
  105. 7:42–7:43मैं आकिर की फरक अची
  106. 7:43–7:45जे दुन्नु के अलग राक्जल गेल जी
  107. 7:45–7:50मुदा हा, हम अद्ते ही एक ता दूसर द्रिस्टी कोन सा सुचे चाहे थाइत सी.
  108. 7:50–7:55मैठली एक ता अथ्यंत सम्रिद अ सान्सक्रूतिक रूप सा सगन भासा आची.
  109. 7:55–8:00की एहन्त नहीं जे लेखख प्रतेख शब्दक अत्यन्त सुक्श्म अर्ठ्ध के अलग राखे चाहे चथ हैं?
  110. 8:00–8:03माने आहाक तादपरे अची जे?
  111. 8:03–8:09आँ माने उदारनक लेल सक्धा शब्दमा जे एक ता अत्मियता अब्बाल सक्धा का भाव अची
  112. 8:09–8:12उ मीत वा संगाती सब हिन बहासके तची
  113. 8:12–8:15जोन हम एही सब के एक तच्छम जमा कर देप
  114. 8:15–8:18तकी हम उही सांसक्रतिक सुख्ष्मता के नस्ट नहीं कराल ची
  115. 8:18–8:21आहा की शंका बहुत तारकिक अची
  116. 8:21–8:25सुख्ष्मता माने जी नुवान्स अची, उ महत्वपून अची
  117. 8:25–8:28मुदा उ सुक्ष्मता अस्पष्ट तकने होई तची
  118. 8:28–8:31जगन सब विकल्प एट्धाम होई
  119. 8:31–8:33जैसा पात्ध को कर तुलना कर सकें
  120. 8:33–8:37आचा तो आवाक का कहा वची जे अलगलक पन्ना पर रहलासा
  121. 8:37–8:42आचा जगन सखा एक पन्ना पर अची
  122. 8:42–8:45आमीत दस पन्ना कबाद
  123. 8:45–8:51तब पाथक मस्त्रिषक औही दूनु शब्द के भीज के सुक्ष्म अन्तर के नहीं पक्डिपावे चे.
  124. 8:51–8:57एक तनीक थिसवरस कखाज अची सब विकल्प के एक ठाम प्रस्तुत करव,
  125. 8:57–9:01जःे सब पाथक अपन संदर्भ के अनुसार सही शब्द चूनी सके.
  126. 9:01–9:06बुजलिय तई एह कमजोरी के दूर करभाकलेल आहक की सुजाव अच्छे?
  127. 9:06–9:18सुदारलेल हमर सुजाव एच्छी, जे समानारती शब्द सब के एक रही मुख्य अंग्रेजी प्रविष्टी के नीचा सहेज करएथ, मनी कन सुलिडेट करेथ राखल जाए.
  128. 9:18–9:21संगे के संसितिटवीटी के हाटाकर,
  129. 9:21–9:24एक तम मान की ख्रित प्रविष्टी बनावल जाए,
  130. 9:24–9:28जावदधरी की ओख कोनो प्रनावनी हो.
  131. 9:28–9:31इक राजे हमरा सब थोस उदाहरनक रूप में देखी,
  132. 9:31–9:34तव फ्रेंड का पाज चोटा अलग लाईनेक बढ़ला में,
  133. 9:34–9:37अगर पाट़ग के एकके बार में मैं अदेक शब्द सम्रिधिक बान हैत
  134. 9:37–9:40अखरा पाच्टा अलग अलक पन्ना नहीं पल्टे परद
  135. 9:40–9:45आँ, संगे एकके लाएन में सख्चा अमीद के देखी का
  136. 9:45–9:50उआदेक असानी सश्वाणी के नहीं लिख के लिए वोगा
  137. 9:50–9:53अख्रा पाच्टा रगलक पन्ना नई पल्ते परत्द
  138. 9:53–9:58अँ, संगे एक्के लाईन में सक्वा अमीद के देखी का,
  139. 9:58–10:01उ अदेक आसानी सन निरने ले सकत चे,
  140. 10:01–10:05जे अख्रा अपनानुवाद वा लेकन में ककर प्रियोक कर वाख चे.
  141. 10:05–10:09अख्रा अपनानुवाद वा लेक्खन में ककर प्रियोक कर वाख चे
  142. 10:09–10:12इन नहीं के वल पन्ना के बर्भादी रोकत
  143. 10:12–10:16बलकी जे साथे तीन लाक्प्रविष्टी इविशाल काया कार चे
  144. 10:16–10:20अख्रा अदिक सुगत्हित अव्यवहारेक बनादेत
  145. 10:20–10:20ताइता
  146. 10:20–10:28एकर अध्ध एब हेल जे हमरा सब शब्द के खोज़ा बासान का दिलिया, अख्रा सुगडफित से हो का दिलिये.
  147. 10:28–10:36मुदद जकन पात्ख औही शब्दक अध्ध पडीची, तो अध्ध कते गेर अची इएक ता सरवता भिन प्रष्न चे.
  148. 10:36–10:38आई, यी बहुत पैग बात अच्छे.
  149. 10:38–10:41आई, हम्रा सब के ए ग्रन्त्ख आत्मा,
  150. 10:41–10:44आब लक्षित पाटख कविचार दिष लजाई तच्छी.
  151. 10:44–10:46मूल भूद अंग्रिजी शब्दावली,
  152. 10:46–10:50आई अख्त्यन्त विषिष्ट मैत्ली सान्स्क्रतिक संदर्भख मिष्रन्सा,
  153. 10:50–10:54लक्षित पात्ख कलेल इस पष्ट नहीं भपा भी रहाल आची
  154. 10:54–10:57जे इस समगरी क्वास्तविक उप्योग के करत.
  155. 10:57–11:00इएही समिक्षक सबस गंभीर बंदूची.
  156. 11:00–11:04हम्रा एही समगरी कुद्देश्षक सन रेक्शन पर विचार करया परत,
  157. 11:04–11:12अब बेभी डोग आ आ आब इब ची जका अद्यन्त प्रात्मिक स्तरक अग्रेजी चे
  158. 11:12–11:15जे ना एे कोनो प्रात्मिक विद्या लेग बच्चाक लेल लिखल गेल होए
  159. 11:15–11:16बलकुल
  160. 11:16–11:26मुदा, 2 सर दिस एह में चटी, सत्वाईन, भीट, और जद जदिन जका, अत्यंत गजर सांस्क्रतिक मेतली शब्द आचे.
  161. 11:26–11:36आर सब से पयग कमजुरी इए चे, जे एही गजर सांस्क्रतिक शब्द सब के, बहुत सादारन आर सताही अंगरे जी में अनुदित कल गे लचे.
  162. 11:46–11:50वा मेठली संस्क्रती सा अनभिग्य व्यक्तिक लेल अची,
  163. 11:50–11:54ता मेठल फ्ट्वल से चथी कोन भाँ नाई बुजाई तची.
  164. 11:54–11:58सत्ते कहली एई उई नई भूज सकेत जे य शूर्य अपासनाक,
  165. 11:58–12:02पवित्रताक, और प्रक्रतिक एक ता अथ्ट्यन्त कथोर परव अचे.
  166. 12:02–12:17आद दोसदिस जएई एक ता मेठली भाशिक लेल अच्छे, जे अंग्रेजी सीखाई चाहत अच्छी, ता उक्रा लेल इए अनुवाद अदूरा आच्छे. दूनो अस्तिती में इए अनुवाद अपन उदेश्छे पुड न्द न्धाई कर रहे लगचे.
  167. 12:17–12:25मुदा फिर से जहम लेखखख पक्च संसुची की एक ता दिक्षनरी काज केवल साब्दिक अर्ठ माने लिट्रल त्राल्श्लेशन देप नहीं आची.
  168. 12:26–12:31ज़ लेखखख प्रतेख संस्क्रूतिक सब्द्धक पाच्धा की तिहास आर संदर्भ लिख है लागेत,
  169. 12:31–12:34तक यी दिक्षनरीक बडला यक ता इंसाएक्लोपीट्या ने बन्जात?
  170. 12:34–12:38आ, यी एक ता बहत नीक बहे सकविष या ची,
  171. 12:38–12:41जे दिक्षनरीक सीमा कते समाप्त होगता ची,
  172. 12:41–12:44आ इंसाएक्लोपीट्या कते संशूरो होगता ची.
  173. 12:44–12:49मुदा जखिन हम मैठली जगा भाशाक बात करे थची
  174. 12:49–12:52जगगग जीवन उकर संसक्रती में बसल अचे
  175. 12:52–12:57तकने शाभ्दिक अनुवाद वास्तव में ब्शिन्प्मेशन भोजायतचे
  176. 12:57–12:59मतलब ब्रहामक जानकारी
  177. 12:59–13:02एक दम, कोनो से हुँन्नत दिक्षनरी
  178. 13:02–13:05जिना अक्स्वोड़ वा मेरिम वेब्स्टर,
  179. 13:05–13:09सान्स्क्रतिक शब्दक लेल मात्र एक ता पर्यायावाची नहीं देते ची,
  180. 13:09–13:12उएक ता विव्रिन आत्मक संदर्भ देते ची.
  181. 13:12–13:13ता आहा कहाव अची,
  182. 13:13–13:20जे सान्स्क्रतिक शब्द सब्ग, शाब्देक अनुवाद हुनकर मुल आर्ट्सां, वन्चित कलेत अची?
  183. 13:20–13:26शत्प्रतिषद. सुदार लेल हमर सुजाव एची, जे सान्स्क्रतिक रुप समहत्व पुन,
  184. 13:26–13:32अव विष्छ्ट मैठिली सब्द सबक लेल मात्र एकाद सब्दक अंग्रेजी अनुवाद देबाक बदला में,
  185. 13:32–13:38कोष्टक माने ब्राकेट्स में, एक ता चोट सानस्क्रतिक संदर्भ ववव्यक्यद जोडल जाए.
  186. 13:38–13:41अच्छा आव एक्रा थोस उदारन सा सबस्ट करी
  187. 13:41–13:45जेना ग्रन्त में जट जतीन के मात्र
  188. 13:45–13:47आम मैत्टिली फोग डान्स लिखल गेल चेन
  189. 13:47–13:51आम्रा सबक सुजाव चे जे एक्रा किच्छु भिव्रनात्मक बनावल जाए
  190. 13:51–13:54जेना अ ट्रदिशनल मैत्टिली फोग डान्स
  191. 13:54–13:55मिमिकिं मरितल लाइप
  192. 13:56–14:00आप इक केवलेक्ता न्रित्य नहीं दामपत्त जीवनक अबिने आची
  193. 14:01–14:04और इस सन्दर्ब अंग्रेजी पाठक के भेट बाख चाही
  194. 14:04–14:08उहीना एक ता आवर उदाहरन लिया भीट शव्द का
  195. 14:08–14:11एक्रा मात्र अक्काईड़ लान्द कहब कापी नहीं आची.
  196. 14:11–14:17आप, मेठिल क्रिषी संसक्रती में भीईट और दजाक भीज कनतर बहुत महत्टोपूरन आची.
  197. 14:17–14:21भीईट का अप लान्द और एलीवेट़ लान्द,
  198. 14:21–14:23सुतेबल फोर स्पेस्पिक कल्तिवेशन
  199. 14:23–14:26सेप्ली अब फलर्ट लेवल्ज जगका लिखल जाए.
  200. 14:26–14:26बलकल.
  201. 14:27–14:29जगन आहा एहन व्याख्या जोड़ेत छी
  202. 14:29–14:31तई ग्रन्त शोद करता,
  203. 14:31–14:32अनुवादक,
  204. 14:32–14:36अ विदेशी जिग्यासु सबख्लेल एक ता उमुले दधरोहर बनी जाएत अची.
  205. 14:36–14:41आ, जखन आहा सत्वाईन शब्द का प्रविष्टी देखाई ची,
  206. 14:41–14:45तो मात्र अ प्स्टबल सेलब्रेटेट विदेटिं सतुव आची.
  207. 14:45–14:53इक रज आहा बैसाख संक्रानती, नववर्षक आरंब, और गरीष मरितुक अगमनक संदरब से जोड के व्याख्या करब,
  208. 14:53–14:58तब पाथख के मेठल समाज का क्रिषी पन्चांग भुज्बा में आसानी हैत.
  209. 14:58–14:59एक दम सही.
  210. 14:59–15:04इपरिवर्तन एही ग्रन्त के एक ता सादारन शब्द सुछी सवटाकर
  211. 15:04–15:08एक ता प्रामानेक संस्क्रतिक संदर्ब ग्रन्त में बड़ल देत.
  212. 15:08–15:13आजक्चन हम्रा सब इट तीनो बदलाव संद्रचनात्मक, वर्गी करन,
  213. 15:13–15:20समवनार्ती शब्दसब के एकत्री करन और सास्क्रतिक संदर्ब कव्याख्या के एक संगे देखाई ची,
  214. 15:20–15:26ता हम्रा बुजाई तची, जे इज अथा सागर आची, उपात्धक लेल सुगम बोजाई तची.
  215. 15:26–15:33आई, इक ता दिक्षनरी केवल शब्दक संग्रह नहीं होई ता ची, इब भाश्षा का वास्तूकला आची,
  216. 15:33–15:37ता आई दिरक चर्चा में हम्रा सब गेहराई से विशार के लई,
  217. 15:37–15:43जजजेंद्र तहाकुर जी दोरा संकलित इसमग्री कते एक महनत और समरपन सबनावल गिल च्यें.
  218. 15:43–15:46एकर विशालता अपने आप में एक ता एतिहासिक काजच आचें.
  219. 15:47–15:51मुदा मुक्यो रूपस तींता परिमारजन कहलासा एकर प्रभाव कतो बेषी बड़ जाएत.
  220. 15:51–15:59तपहिल सुज़ाव जल, जे ए ताईपाद्व जका क्रित्रिम वर्गी करन के हताकं,
  221. 15:59–16:07मोल शवदक आदार पर प्रविष्टी देल जाए, अवर्ग लेल एक ता सपरष्ट विष्यगत अनुक्रमनी का बनावल जाए.
  222. 16:07–16:13तो सार सुजाब चल, जे एके ही शब्दक लेल देल गयल अनेक प्रविष्टी सब के,
  223. 16:13–16:16आच्छोत बड़ अख्ष्रक के अनावशक विभाजन के,
  224. 16:16–16:22एक ठाम जमा को पर्याय वाचिक रूप सा, सुगतित रूप सा प्रस्तुत काईल जाए.
  225. 16:22–16:28अग्रा पाट्बाक लेल सान्स्क्रतिक शब्द सब में चोट-चोट-विव्रनात्मक संदर्ब जोडजाए, जाही सा लक्षिद पाट्गके स्पष्टता बेटे.
  226. 16:28–16:35हमर पुन विष्वासची जे ईई बदलाव करलासा इग्रन्त नहीं केवल एक ता दिक्षनरी रहेत,
  227. 16:35–16:39जाही सा लक्षिद पाटक के स्पष्टता बेटेए
  228. 16:39–16:46हमर पुन विष्वासची जे ईबदलाव करलासा इग्रन्त नहीं केवल एक्ता दिचनरी रहेत
  229. 16:46–16:50बलकी मैत्ली बाशा के एक्ता एहन विष्वकोष बनी जाएत
  230. 16:50–16:55जक्रा शूद करता अबाशा विद सदिकन संदरभक लेल विवार मे आनता
  231. 16:55–16:57एक दम सही कह लिए यहां
  232. 16:57–17:04ता हम स्रोता सा अग्रा करा जे इई सुजाव सब पर विचार करेत अपन सामागरी के संशुदिद करी
  233. 17:04–17:08आंआक प्रतिक्रिया लेल एक रा फेर सा हम्रा सब लक प� thavi
  234. 17:20–17:25इसमिक्ष्याय अतबे दरी हम्रा सा फिर भेटव एक नाव सामगरिक संगे

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ता आए हम्रा सब लग, गजेंद्र ताकुर द्वारा संकलित 3,61,000 से भेशी प्रविष्टिक कर एक ता अट्यंत विस्त्रत अंग्रेजी मैठली तिसवरा सची, और हम्रा सब एक रा और भेशी उप्योगी बनेवा किलेल तींटा मुख्य सुदार पर सोजे बात करब. एक्तम! और हम सोजे पहल बिन्दूपर आबेत ची. प्रविष्टी सबख वर्तमान वर्ण माला अदारित क्रम बद्ध्धा विषेश रुप से न एटाईप अप जका लंभा वा क्यान्षक प्रियोग पात्ठक लेल होजवाक प्रक्रिया के अथ्यदेक जटल बना रहलाची. आप बआई जकन हम एही गरन्तक पन्ना पलती रहाच जलों, तहम्रा इए अस्पष्ट रूप से देखा रहाचल, जे ए सामगरी में साक्डो सान्स्क्रितिक आविशिष्ट शब्द सब आची. सत्तिक है, जना दान कप्रकार, माच्ख्ख्प्रकार, वा गाच्ख्ख्ख्प्रकार. बिल्ल्कुल! और एही सब के मात्र एटाईप फिष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष अख्शरक नीचा जाकर एटाईप फिश खन्ड मे रोहु खोजबा कची इटो उहिना भेल जे कोनो विशाल जंगल में आहा विष्ट गाछ खोजी रहल ची मुदा पूरा जंगल में रस्ता कोनो संकेत नहीं चे अखा, हम आते एक तद्रिष्टान्त देवाचाव, इष्तिति बिलकुल उहीना आची, जिना आहा कोनो पैंग पुस्तकाले में प्रवेश करी, जै हमें लाको पुत्ठी होयाए. अखा, पुस्तकाले कुदारन बहुत नीक रहात. ता आहा आशा करे ची जे पोठी सब विशैक आदार पर सुविवस्तित होगत, माने इतिहासक पोठी इतिहास क्हन्ड में, और विग्यानक विग्यान क्हन्ड में, मुदद तकने आजा के बुजाए जो उही पुस्तकाले में, पोठी सब विश्यक आदार पर नहीं बलकी पोठी के कवर के रंके आदार पर सजाजा दिल गेलाचे. बाप्रे, तल लाल रंके खंड मे आहा के विग्यान से लैगा साहित दरे पोठी एकि तम वेंजात. एक दम. आए इद्रिष्तानत इतन एक दम सती कचे. जखना ए ताईप बुलक कनीचा चरकावा चवरा जे बेलक प्रकार अची, उक्रा राखाई ची, ता आहा मूल शब्दा के एक ता क्रित्रिम अंग्रेजी वाख्यांश के पाचा नुकाई रहल ची. चही कहली आए, एकर परिनाम एब है लग जे केवल ए, ने, मैंजे आटिकल आची, उही से शुरूएब आखन्ड में लग भग अग आट्टाःी साचार नाशो उन्तालिस प्रविष्टी बहेगे लची. इदिक्षनरीक सन्तुलन के पुरन रुब से भिगाडी रहा लची. पात्खक मनोविग्यानक विरुद्द काज कर रहला ची मुदा एते हम एक ता प्रष्न अथा वचा हब जा हम दिक्षनरीक पारमपरीक नियमक बात करी ता दिक्षनरी वरन्माला मने आलपा बेटिकल करम में होई ता चे की हाँ उता ची तजग कोनो वाख्यांश ए ताईप अप से सुरूब हरहल आची तटकनी की रूप से तव उक्रा ए खण्ड में हेबाख चाही की एते लेक्ख मात्र वन्माला कडाई से पालन नहीं करहल चती आप देखो आहां की तर क सद्ध्धानतिक रूप से सहीभ है सके तची मुदव व्यावाहारीक रूप से इएक ता थिसोरस वा सब्द कोशक मुल उदेशे के विफल करहल आची. दिक्षनरी में जे हेटवर्ड वा मुख्ध्य सब्द जी तकर महत्व होई दची. नहीं कि अगर आगु लागल आटिकल ए आन वा दग. बूजलीए, मने एक दब्याकरनी कुपकरन आची उ मुख्य संगय नहीं आची? बिल्कोल, जखन हम एही तरहकर क्रित्रम वाख्यान्शक आदार पर वर्गी करन करेची, तहम पातख के उशवद खोजबा सववन्चित करोल ची जे उवास्तों में खोजे चाहत आची. जे इ प्रकारक विषिष्ट श्रेनी बद्द शब्द सब के लेल मुख्ध शब्द कोश स �alag ekta विषेग गत अनुक्रमनिका माने थ्फीमातिक अपन्टिक्स बनाल जाए. अच्छा, मुख्ध बाग में शब्द के अकर मुल अंगरेजी वो मैत्ली अख्ष्रक अनुसार राखल जाए, अप पच्षाती में? पच्षाती में विष्यक अदार पर सुची देल जाए. एक रा एक तथोस उदारन्स बूजी ली. मूल ग्रन्त में जना लिखल अची, अट ताइप अप फिष, अनीचा मगुर. हमरा सब के सुजाओ एजी जे एक रा एक हन्द सा हताए के मगुर के सोजे मएक्षरक के नीचा राखल जाए? एक दम सही अटकर बाद ग्रन्त का अंत में एक परिषिष्ट वा अपन्टिक्स बनावल जाए, जक्र नाम होया माचक प्रकार वर ताइप्सोप फिषिस उही परिषिष्ट में रोहु, मगोर, पोठी, भुनना, सबता माचक नाम एक संगे सुची बद्खेल जाए. आप, एही पद्दती सें दूईता काज हैत. पहिलता खोज के प्रक्रिया बहुत आसान भजेत? अग्रा एक ता मेठलिक जैव विविद्ताक भान हैत अग्रा भुजहाइत जै एही भाशा में माच्धलिल कत्यक विषिष्ट शब्द अची ताई ता? इग्रन्त के मात्रे एक ता दिक्षनरी से उथाख कर शोद के एक ता महत्व पुड उपकरन बना देत इसमादान वास्तव में रंग आदारिट पुस्त्तकालै के वापस विशया आदारिट पुस्त्तकालै में बदली देत. बलकोल. मुदा विसयगत अनुक्रमनिका बना क, हम्रा सब पाधख के शब्द खोजबाक रस्तात दे दे दे लियें. मुता जकन पात्ध, उही शवददरी पहुचे तची, तो उक्रा एक तनव समस्स्याक सामना करे पडे तची. आई हम्रा सब के एही समिख्षाक दोसर मुख्धे बिन्दू दिसलग जाई तची. इक अद्थ वः समान शब्द लेल अनेक अलग-गलक प्रविष्टिक उपस्थिती, शब्द कोशक समग्र सपष्टता अग केंद्र बिन्दूके कमजोर करेता ची. इद्दम इएहन अची, जे नहां के जे पोठी कोजबाखचल से तभेट गेल, मगर उपोत्थी के पन्ना अलग-गलग �theam चित्रायलचे जो हमरा सब मुल सामगरी में अफ्रेंड शब्द के देखी तएकर लेल सखा संगी संगाती मीद आदिक लेल पाच्छोट अलग-गलग लाईन बनावल गेलची आए एत भी नहीं के सिंसितिविति माने चोटबार अख्चरक कारन्सा एके सब्द �alag alag tham chaligela chi. आजेना बद का एस अवाज अच्चोट का एस अगत. माने इच्छोटबार अख्चरक भिभाजन सादारन संजाले ल अनावश्षक अच्छी. एक रासा पन्नाक संख्यात बडी रहा लाची मुदः पाथक के एक ताम सब भिकल्प नहीं बहत रहा लाची इएक ता बहुत महत्पुन कम्जोरी आची दिक्षनरी निरमानक विग्यान में के संस्टिविटीक उप्योग आम तोर पर विक्ती वाचक संग्या माने प्रोपर नाुन वविशिष्ट संख्षिप्त रूप के वगग करबाक लेल केल जाईता ची जेना आपल जे प्हल आचे आपल जे कमपनी आचे भिल्कुल मुद शामान ने शब्दा सबख लेल चोट बड अखषरक आदार पर अलग अलक प्रविष्टी देब पाथक क्या ब्रहमित करेता जी पाथक सोच्वापर मजबोर भाई जायता जी जे बडखा एवला अप्रेंड अछछोट्खा एवला अप्रेंड मैं आकिर की फरक अची जे दुन्नु के अलग राक्जल गेल जी मुदा हा, हम अद्ते ही एक ता दूसर द्रिस्टी कोन सा सुचे चाहे थाइत सी. मैठली एक ता अथ्यंत सम्रिद अ सान्सक्रूतिक रूप सा सगन भासा आची. की एहन्त नहीं जे लेखख प्रतेख शब्दक अत्यन्त सुक्श्म अर्ठ्ध के अलग राखे चाहे चथ हैं? माने आहाक तादपरे अची जे? आँ माने उदारनक लेल सक्धा शब्दमा जे एक ता अत्मियता अब्बाल सक्धा का भाव अची उ मीत वा संगाती सब हिन बहासके तची जोन हम एही सब के एक तच्छम जमा कर देप तकी हम उही सांसक्रतिक सुख्ष्मता के नस्ट नहीं कराल ची आहा की शंका बहुत तारकिक अची सुख्ष्मता माने जी नुवान्स अची, उ महत्वपून अची मुदा उ सुक्ष्मता अस्पष्ट तकने होई तची जगन सब विकल्प एट्धाम होई जैसा पात्ध को कर तुलना कर सकें आचा तो आवाक का कहा वची जे अलगलक पन्ना पर रहलासा आचा जगन सखा एक पन्ना पर अची आमीत दस पन्ना कबाद तब पाथक मस्त्रिषक औही दूनु शब्द के भीज के सुक्ष्म अन्तर के नहीं पक्डिपावे चे. एक तनीक थिसवरस कखाज अची सब विकल्प के एक ठाम प्रस्तुत करव, जःे सब पाथक अपन संदर्भ के अनुसार सही शब्द चूनी सके. बुजलिय तई एह कमजोरी के दूर करभाकलेल आहक की सुजाव अच्छे? सुदारलेल हमर सुजाव एच्छी, जे समानारती शब्द सब के एक रही मुख्य अंग्रेजी प्रविष्टी के नीचा सहेज करएथ, मनी कन सुलिडेट करेथ राखल जाए. संगे के संसितिटवीटी के हाटाकर, एक तम मान की ख्रित प्रविष्टी बनावल जाए, जावदधरी की ओख कोनो प्रनावनी हो. इक राजे हमरा सब थोस उदाहरनक रूप में देखी, तव फ्रेंड का पाज चोटा अलग लाईनेक बढ़ला में, अगर पाट़ग के एकके बार में मैं अदेक शब्द सम्रिधिक बान हैत अखरा पाच्टा अलग अलक पन्ना नहीं पल्टे परद आँ, संगे एकके लाएन में सख्चा अमीद के देखी का उआदेक असानी सश्वाणी के नहीं लिख के लिए वोगा अख्रा पाच्टा रगलक पन्ना नई पल्ते परत्द अँ, संगे एक्के लाईन में सक्वा अमीद के देखी का, उ अदेक आसानी सन निरने ले सकत चे, जे अख्रा अपनानुवाद वा लेकन में ककर प्रियोक कर वाख चे. अख्रा अपनानुवाद वा लेक्खन में ककर प्रियोक कर वाख चे इन नहीं के वल पन्ना के बर्भादी रोकत बलकी जे साथे तीन लाक्प्रविष्टी इविशाल काया कार चे अख्रा अदिक सुगत्हित अव्यवहारेक बनादेत ताइता एकर अध्ध एब हेल जे हमरा सब शब्द के खोज़ा बासान का दिलिया, अख्रा सुगडफित से हो का दिलिये. मुदद जकन पात्ख औही शब्दक अध्ध पडीची, तो अध्ध कते गेर अची इएक ता सरवता भिन प्रष्न चे. आई, यी बहुत पैग बात अच्छे. आई, हम्रा सब के ए ग्रन्त्ख आत्मा, आब लक्षित पाटख कविचार दिष लजाई तच्छी. मूल भूद अंग्रिजी शब्दावली, आई अख्त्यन्त विषिष्ट मैत्ली सान्स्क्रतिक संदर्भख मिष्रन्सा, लक्षित पात्ख कलेल इस पष्ट नहीं भपा भी रहाल आची जे इस समगरी क्वास्तविक उप्योग के करत. इएही समिक्षक सबस गंभीर बंदूची. हम्रा एही समगरी कुद्देश्षक सन रेक्शन पर विचार करया परत, अब बेभी डोग आ आ आब इब ची जका अद्यन्त प्रात्मिक स्तरक अग्रेजी चे जे ना एे कोनो प्रात्मिक विद्या लेग बच्चाक लेल लिखल गेल होए बलकुल मुदा, 2 सर दिस एह में चटी, सत्वाईन, भीट, और जद जदिन जका, अत्यंत गजर सांस्क्रतिक मेतली शब्द आचे. आर सब से पयग कमजुरी इए चे, जे एही गजर सांस्क्रतिक शब्द सब के, बहुत सादारन आर सताही अंगरे जी में अनुदित कल गे लचे. वा मेठली संस्क्रती सा अनभिग्य व्यक्तिक लेल अची, ता मेठल फ्ट्वल से चथी कोन भाँ नाई बुजाई तची. सत्ते कहली एई उई नई भूज सकेत जे य शूर्य अपासनाक, पवित्रताक, और प्रक्रतिक एक ता अथ्ट्यन्त कथोर परव अचे. आद दोसदिस जएई एक ता मेठली भाशिक लेल अच्छे, जे अंग्रेजी सीखाई चाहत अच्छी, ता उक्रा लेल इए अनुवाद अदूरा आच्छे. दूनो अस्तिती में इए अनुवाद अपन उदेश्छे पुड न्द न्धाई कर रहे लगचे. मुदा फिर से जहम लेखखख पक्च संसुची की एक ता दिक्षनरी काज केवल साब्दिक अर्ठ माने लिट्रल त्राल्श्लेशन देप नहीं आची. ज़ लेखखख प्रतेख संस्क्रूतिक सब्द्धक पाच्धा की तिहास आर संदर्भ लिख है लागेत, तक यी दिक्षनरीक बडला यक ता इंसाएक्लोपीट्या ने बन्जात? आ, यी एक ता बहत नीक बहे सकविष या ची, जे दिक्षनरीक सीमा कते समाप्त होगता ची, आ इंसाएक्लोपीट्या कते संशूरो होगता ची. मुदा जखिन हम मैठली जगा भाशाक बात करे थची जगगग जीवन उकर संसक्रती में बसल अचे तकने शाभ्दिक अनुवाद वास्तव में ब्शिन्प्मेशन भोजायतचे मतलब ब्रहामक जानकारी एक दम, कोनो से हुँन्नत दिक्षनरी जिना अक्स्वोड़ वा मेरिम वेब्स्टर, सान्स्क्रतिक शब्दक लेल मात्र एक ता पर्यायावाची नहीं देते ची, उएक ता विव्रिन आत्मक संदर्भ देते ची. ता आहा कहाव अची, जे सान्स्क्रतिक शब्द सब्ग, शाब्देक अनुवाद हुनकर मुल आर्ट्सां, वन्चित कलेत अची? शत्प्रतिषद. सुदार लेल हमर सुजाव एची, जे सान्स्क्रतिक रुप समहत्व पुन, अव विष्छ्ट मैठिली सब्द सबक लेल मात्र एकाद सब्दक अंग्रेजी अनुवाद देबाक बदला में, कोष्टक माने ब्राकेट्स में, एक ता चोट सानस्क्रतिक संदर्भ ववव्यक्यद जोडल जाए. अच्छा आव एक्रा थोस उदारन सा सबस्ट करी जेना ग्रन्त में जट जतीन के मात्र आम मैत्टिली फोग डान्स लिखल गेल चेन आम्रा सबक सुजाव चे जे एक्रा किच्छु भिव्रनात्मक बनावल जाए जेना अ ट्रदिशनल मैत्टिली फोग डान्स मिमिकिं मरितल लाइप आप इक केवलेक्ता न्रित्य नहीं दामपत्त जीवनक अबिने आची और इस सन्दर्ब अंग्रेजी पाठक के भेट बाख चाही उहीना एक ता आवर उदाहरन लिया भीट शव्द का एक्रा मात्र अक्काईड़ लान्द कहब कापी नहीं आची. आप, मेठिल क्रिषी संसक्रती में भीईट और दजाक भीज कनतर बहुत महत्टोपूरन आची. भीईट का अप लान्द और एलीवेट़ लान्द, सुतेबल फोर स्पेस्पिक कल्तिवेशन सेप्ली अब फलर्ट लेवल्ज जगका लिखल जाए. बलकल. जगन आहा एहन व्याख्या जोड़ेत छी तई ग्रन्त शोद करता, अनुवादक, अ विदेशी जिग्यासु सबख्लेल एक ता उमुले दधरोहर बनी जाएत अची. आ, जखन आहा सत्वाईन शब्द का प्रविष्टी देखाई ची, तो मात्र अ प्स्टबल सेलब्रेटेट विदेटिं सतुव आची. इक रज आहा बैसाख संक्रानती, नववर्षक आरंब, और गरीष मरितुक अगमनक संदरब से जोड के व्याख्या करब, तब पाथख के मेठल समाज का क्रिषी पन्चांग भुज्बा में आसानी हैत. एक दम सही. इपरिवर्तन एही ग्रन्त के एक ता सादारन शब्द सुछी सवटाकर एक ता प्रामानेक संस्क्रतिक संदर्ब ग्रन्त में बड़ल देत. आजक्चन हम्रा सब इट तीनो बदलाव संद्रचनात्मक, वर्गी करन, समवनार्ती शब्दसब के एकत्री करन और सास्क्रतिक संदर्ब कव्याख्या के एक संगे देखाई ची, ता हम्रा बुजाई तची, जे इज अथा सागर आची, उपात्धक लेल सुगम बोजाई तची. आई, इक ता दिक्षनरी केवल शब्दक संग्रह नहीं होई ता ची, इब भाश्षा का वास्तूकला आची, ता आई दिरक चर्चा में हम्रा सब गेहराई से विशार के लई, जजजेंद्र तहाकुर जी दोरा संकलित इसमग्री कते एक महनत और समरपन सबनावल गिल च्यें. एकर विशालता अपने आप में एक ता एतिहासिक काजच आचें. मुदा मुक्यो रूपस तींता परिमारजन कहलासा एकर प्रभाव कतो बेषी बड़ जाएत. तपहिल सुज़ाव जल, जे ए ताईपाद्व जका क्रित्रिम वर्गी करन के हताकं, मोल शवदक आदार पर प्रविष्टी देल जाए, अवर्ग लेल एक ता सपरष्ट विष्यगत अनुक्रमनी का बनावल जाए. तो सार सुजाब चल, जे एके ही शब्दक लेल देल गयल अनेक प्रविष्टी सब के, आच्छोत बड़ अख्ष्रक के अनावशक विभाजन के, एक ठाम जमा को पर्याय वाचिक रूप सा, सुगतित रूप सा प्रस्तुत काईल जाए. अग्रा पाट्बाक लेल सान्स्क्रतिक शब्द सब में चोट-चोट-विव्रनात्मक संदर्ब जोडजाए, जाही सा लक्षिद पाट्गके स्पष्टता बेटे. हमर पुन विष्वासची जे ईई बदलाव करलासा इग्रन्त नहीं केवल एक ता दिक्षनरी रहेत, जाही सा लक्षिद पाटक के स्पष्टता बेटेए हमर पुन विष्वासची जे ईबदलाव करलासा इग्रन्त नहीं केवल एक्ता दिचनरी रहेत बलकी मैत्ली बाशा के एक्ता एहन विष्वकोष बनी जाएत जक्रा शूद करता अबाशा विद सदिकन संदरभक लेल विवार मे आनता एक दम सही कह लिए यहां ता हम स्रोता सा अग्रा करा जे इई सुजाव सब पर विचार करेत अपन सामागरी के संशुदिद करी आंआक प्रतिक्रिया लेल एक रा फेर सा हम्रा सब लक प� thavi इसमिक्ष्याय अतबे दरी हम्रा सा फिर भेटव एक नाव सामगरिक संगे

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