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विदेह_शब्दकोष_आ_मैथिलीक_मानकीकरण.m4a
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- 0:00–0:07बिमर्श में आहाक स्वागत अछी, जते हमरा सब जतिल विषे यसबख बिविन पाक पैर आर गमविर्टा से चर्चा करेची.
- 0:07–0:14सो चु, जे कोनो भाषाक अस्थिद्वके रातो रात कागच पर से मिता दिल जाए, तक वी अ भाषाम मरी जाएत?
- 0:14–0:16तुब बद गमभीर प्रष्नची
- 0:16–0:22आप, 1891 आनवे 1961 के भीच मैठलिक्षंग बलकुल एहनी भेल
- 0:22–0:26जक्चन जोर्ज ग्रीर्सन अपन भाशाई सरवेक्षन केने चला
- 0:26–0:30तु उ मैठली भाजे वाला लोक कषंक्या लगबख बिरानवे लाक बतोने चला
- 0:30–0:34मुदा जखान उनिस्ट्ट्टक्ट का बारत की जन्गन्ना भेल
- 0:34–0:37त? उसंख्या खासी के मात्र उंचास लाक रही गेल चल?
- 0:37–0:40एक दम! एक दम सही! मात्र उंचास लाक!
- 0:40–0:42माने की इकोनो महमारी चल,
- 0:42–0:47जक्रस्द मेठ्ली बाजे वाला आदालुक रातो राद गाएप बहगेला? नहीं
- 0:47–0:52ये एक ता सुन्योजित राजनेतिक अ सांखिक ये अद्रिष्टा चल
- 0:52–0:57जते लाको लोक कमात्र बाशाके कागजी आक्डा में हिन्दी की भोली गोषित कर देल गेल
- 0:57–1:02आई हम्रा सब एही महत्तोपोडन प्रसंगिक विष्यापर गब कराल ची
- 1:03–1:08जे मेठली बाशाक भविष्या एकर सन्द्रक्षनक वास्तवेक मार्ग की आची
- 1:08–1:09भल्कोल
- 1:09–1:11आई चर्चा मुक्य रूपसा
- 1:11–1:12गजेंद्र ताकृर
- 1:12–1:14नगेंद्र कुमारजा
- 1:14–1:20आँ पन्जिकार विद्यानन्जादवारा समपादिद जे विदे है अंग्रेजी मेठिली शब्द कोशाच.
- 1:20–1:22जे 2012 में आईल शल?
- 1:22–1:26आप प्रफ्शर उदेन राईंच्सिंग दोरा लिखल गेल,
- 1:26–1:30अकर जे बद्विस्त्रित प्रस्टावनाच, ताहे पर आदारी तज.
- 1:30–1:33वाँद्रष्टिकों आहासा भिल्कुल भिन्ना आची
- 1:33–1:38हम्रा विचारे बाशाक अस्ली शक्ती वोकर कोनो अकाद्मिक नियम, शब्द्कोष वा सरकारी मानेटा मे नही आची
- 1:38–1:42बाशाक जीवन वोकर विचारे बाशाक अस्ली शक्ती वोकर कोनो अकाद्मिक नियम
- 1:42–1:45अव उख्रा सम्विद्धानिक मानेटा बेटेई
- 1:46–1:49मुदा, हमर्द्रस्टिकोन आहासा भिल्कुल भिन्ना आची
- 1:50–1:54हम्रा विचारे, बाशाक अस्ली शक्ती अखर कोनो अकाद्द्मिक नियम
- 1:55–1:58शब्द्खोष वा सरकारि मानेटा में आची
- 1:58–2:04बाशाग जीवन उकर जवेख भहु भाशिकता, आम लोक कर तूरक सहजता,
- 2:04–2:10औही सीमान्ती करनोग भीच उतपन प्राक्रतिक संस्क्रतिक जीवनतता सावेत अची.
- 2:10–2:14तो आहाख कह बछी जे बिना मान की करनाग बाशा बाचा बाच्चे टची.
- 2:14–2:15आह, बिल्कुल.
- 2:15–2:23बाशा कुनो संग्रहाले में राखल गल वस्तू नहीं जफी जक्रा मान की करनके शीशा में बंद का कसुरक्षित कैल जासके.
- 2:23–2:27इएक ता बहित नदी आची जे अपन भाट स्वायम खोजी लेट आची.
- 2:27–2:31इबहत नदी वला उप्मा सुनबा मेत बहुत काव्यात्मक लगाई तची
- 2:32–2:35मुदा जकन हमरा सव यतार तवादी दरातल पधार होई ची
- 2:36–2:38तई इई नदी बिना बान देख सुखी जाई तचे
- 2:39–2:40कोना सुखी जाई तची
- 2:40–2:48अम इब आत एहिलेल कहरोहल ची, जे प्रफेसर उदैन अरायन सिंग अपनन प्रस्तावना में इस पष्ट उलेक कने चतिन,
- 2:48–2:52जे आयो मेठिलिक वकताक वास्तविक संक्या लगबक चार करोड चे.
- 2:52–2:58मुता जक्चन हा 2001 कजंगलाना देखव, ता इी मात्रे 1 दशमल 2-1 करोड देखावी तची,
- 2:58–3:02इी कत्टेक पैक सांखिकिय ब्रहम अची आहा विचार करूूूूू
- 3:02–3:06आहा माने ची जे आक्डा संग केल भाई लग ची, मुदा
- 3:06–3:10जग सर्कार आख्र सहमर अस्तिट्व मेटा रहाला ची
- 3:10–3:13तक की विदेश शब्द कोश सन अकादमिक प्रयास
- 3:13–3:17उही कागजी मत्या मेट का अकादमिक उतर नहीं आची
- 3:17–3:21जखन आहा लग एक ता मानकी क्रिच शब्द कोश होई तची
- 3:21–3:25जखन आहा आश्टमनुसुची माने एट्सके दिल में आपन स्थान बनवैई ची
- 3:25–3:27तकन आहा आपन अस्तित्व सथद करे ची
- 3:27–3:31बिना एक कर राज आहा के बाशाके विद्याले में नहीं पड़ाए.
- 3:31–3:34आहा महा के चिंता भूजी रहाल ची
- 3:34–3:44मुदाई कागजी मत्या मेट, जिक्रा आहा भाशाक म्रित्यो भूजी रहाल ची, प्रूफेसर सिंग उक्रा एक ता दोसर अब बहुत मार्मेग चश्मासा देखेच फीजच्छती.
- 3:44–3:47प्रस्तावना में उस पश्ट्रूप से लिख़्छती
- 3:47–3:50जी लंबा समयदरी समविदानिक अदिकार
- 3:50–3:54और राज्जक सन्रक्षन सव वन्चित रहभ मित्लीक लेल एक प्रकारिन
- 3:54–3:56वर्दान साभित बहल
- 3:56–3:57एक मेट्क शमकरम
- 3:57–4:00राज्जक सहियोग नहीं बहत्व
- 4:00–4:02कुनो बाशाक लेल वर्दान बहुत सके तची
- 4:02–4:04इत उहिना बहल जे कुनो रोगी के
- 4:04–4:07अशवदाले नहीं बेटव उक्रा लेल वर्दान आची
- 4:07–4:10ए रोगी और अशवदाले एक बात नहीं आची
- 4:10–4:12इ आत्म निरब्रताक बात आची
- 4:12–4:16प्रफेसर सिंग भूजावएच्छती जे किये की वर्दान चल,
- 4:16–4:19जकनाहा के सरकारी सह्योंक नहीं बेटेत अची,
- 4:19–4:22तकन आहा भाशा के कुनो सरकारी नोकरिक सीडी,
- 4:22–4:25वा कलर्क बनबाक सादन नहीं मानेच्छी.
- 4:25–4:28लोक मेठली में ताहिले नहीं लिखिरे रहा हा,
- 4:28–4:33जि हूंका साहित्ति अकाद्मेक पूरस्कार चाही चल, वा सरकारी अनुधान.
- 4:33–4:38लोक लिखिरेहल चला हा कारन, जि ओए हूंका आत्माक भाशा चल.
- 4:39–4:41एई संगर सक भीच की भेल.
- 4:41–4:45बिना कोनो सरकारी मदद के, मित्ला का आम जन मानस,
- 4:45–4:49गामक महला सब आपना गरग भिट्तिपर जे चित्र कारी केलनी
- 4:49–4:53उ मित्ला पेंटिंका रूप में विश्वस्तर पर पहुचे गेल.
- 4:53–4:55उत कलाग बात भेल मुद्द बाशा.
- 4:55–4:58बाशा पर सेहु आभी रहल ची.
- 4:58–5:02मेत्ली साहित्य, सिंदि, कुंकनी, मनिपूरी
- 5:02–5:11अन्नेपाली जका मानेता प्राप्त भाशा सब से बहुत आगु निक्लीगेल, अहो बिना कोनो समवेदानिक जातक, इकोना भेल.
- 5:11–5:41कारन, जगधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधध
- 5:41–5:43अगाड यागा कियक नहीं
- 5:43–5:45इक दम केट नहीं
- 5:45–5:47करन जे कलवा सत्ति इए जी
- 5:47–5:49जे आई परिद्रुष्श बदली गेल आची
- 5:49–5:51हम्रा सब दिजितल युग में ची
- 5:51–5:55आँगा केवल विट्ति चित्र आ लोक गी तक भरम में
- 5:55–5:59अगाद अद अद्टिश्टल्टिटलिजन्सक युगमे नहीं बाज सकेईची
- 5:59–6:04और एते विदेः शब्द कोश जका पर्यास क्रान्तिकारी बोजाईत ची
- 6:04–6:06क्रान्तिकारी कोना
- 6:06–6:10इकेवल किष शब्दक संग्राह नहीं आची येख्टा प्रवादिक अस्त्र ची
- 6:10–6:17इश्वद कोश, तिरहुतालिपी, देवनागरी, अ अन्तराश्टी धून्यात्मक वरन्माला
- 6:17–6:21मने जक्रा हम्रा सब अईप्ये कही ची, उकर प्रियोक कहे रहला ची.
- 6:21–6:24अईप्ये का प्रियोक कर मतलबी सूनिष्चित करेब,
- 6:24–6:26जए दून्याक कोनो कोना मे भैसल व्यक्ती,
- 6:26–6:28जे मैत्ली नहीं जानेता ची,
- 6:28–6:29औहो कोनो मैत्ली शब्द के,
- 6:29–6:31उईने उचारन करएत,
- 6:31–6:33जे ना हम्रा सब गाँ में करेची.
- 6:33–6:36हम आप्ये का महत्वके नकारी नहीं रहें ची.
- 6:36–6:37मुदा,
- 6:37–6:40यह आखाडमेक अस्त्रक जमीनी वास्त्विक्ता की आची
- 6:40–6:42वास्त्विक्ता इए आची
- 6:42–6:44जे प्रुफेसर सिंग स्पस्ट करे चती
- 6:44–6:46जे आदूनिक जुग में भासा के
- 6:46–6:47अनलाईन इपत्रिका
- 6:47–6:48इशब्द कोश
- 6:48–6:52अब वोबाल शब्दावली जगका उपकरनक नितान्त अवश्शकता आची
- 6:52–6:56जखन दरी हम्रा सब नव्षब्दावलीक निरमान नहीं करव,
- 6:56–6:59तकन दरी हम्रा सब दिज्टल स्पेस में कोना स्तापित होयभ।
- 6:59–7:02नव्षब्दावली सा आजा के ताद पर रहा ची
- 7:02–7:07उदाहरन के लेल, इश्वद कोश कम्पूटर के आलगारित्म लेल, कलनविदि,
- 7:07–7:10अपसलूट उवर्ल के लेल निरपेखष सावकेत,
- 7:10–7:15वो अक्तिव डेटाबेस के लेल, सक्रिय दद्ताच निदिसन शब्दावली गड़े तची.
- 7:15–7:20जो हमरा सब भाशा के मानकी ग्रित कखा, यी सब नहीं बनायब,
- 7:20–7:25ता हमर भाशा का यूवा पीडी, जि दिन रात कमपुटर पर काच करे तची,
- 7:25–7:27उ पुन्त आंगरेजी पर निरभर भोजायत.
- 7:27–7:39मुदा रूकू, जगन आहा आपसलूट यूरल के निरपेख्ष सावकेत कहेच्छे, तक यहा वास्तमे बाशा के बचाई रहल ची, वा आम लोग के ले एक्रा आर कतिना अपरच्ट बना रहल ची.
- 7:39–7:41नहीं, कतिन नहीं.
- 7:41–7:45गाम के कते एक लोग वाशहर के कते एक मैठली भाशी विद्यार थी
- 7:45–7:48अपन्दैनिक जीवन में सक्करिय दटाश निदिभाजत
- 7:48–7:50आहा स्वयम विचार करो
- 7:50–7:53समबवत प्रारमब में लोग एक्रान नाई बाजन
- 7:53–7:57मुदा कुनो भी नवष्वडावली के समाज में पच्वाय में समय लागे तची
- 7:57–8:01मुदा विश्टाय ओ नहीं आच्छ, यक पचाबा में समय लगे तच्छ
- 8:01–8:04विश्टाय इ आच्छी जिकी इ प्राक्रिते कची
- 8:04–8:08प्रुफेसर सिंगक प्रस्तावना स्वेमहें बात के स्विकार करेताची
- 8:08–8:11जे अंग्रेजीक शब्दन सबख्सीदा प्रेयोग
- 8:11–8:13नवबहारत्ये बाशा सब में
- 8:13–8:16जेक्रा न्वौ आँड़्िन लंगवेजेश कहल जाईताची
- 8:16–8:18उहे में बहुत आम अची
- 8:18–8:26उहे एक्रा रामपेंट बोरोंग कहच चतें अथात निरबाद रूपस दोसर भाशा से शब्द उदार लेप.
- 8:26–8:33आम जन मानस जकन कम्ठौटर पकाज करे तची तो सहेष्ता से URL वर देटाबेस कही ले तची.
- 8:33–8:39अख्रा लेल कम्पूटर का आल्पा बिल्ट के आद्दे रच्ना कहब एक ता अकाद्मिक क्रित्रिमता आची.
- 8:39–8:41हम और इक्रक क्रित्रिमता नहीं कहब.
- 8:41–8:46इए अईना आची जेना आहा कोनो जिन्दा वस्तो के प्लास्टिकक साचा में द्हाली कै,
- 8:46–8:48अगर सुन्दर बने बाक प्रयास करे रहल थी
- 8:49–8:51बाशा ओव होई तची जे लोकक ठोर पर होई
- 8:52–8:55जा पच्टर प्रतिषत लोक के खब्टर कही रहल जा दी
- 8:56–8:58तश्वद कोशके अखरा अईना स्विकार कर बाख चाही
- 8:59–9:01बारी बरक्जम संस्क्रितनिष्त शब्द गड़ेक
- 9:01–9:03अगर अपन भाशा से दूर कर रहाल ची
- 9:03–9:05आहा रमपन्ट बोरोंग अगर अद्ध निरबाद रिन लेबाक ची बाद कर रहाल ची
- 9:05–9:07हम उक्रा भाशा के लेल एक ता बहुत पैक खत्रा मानेच ची
- 9:07–9:09खत्रा? कोना?
- 9:09–9:11इबाद सत्य अची जे भाशा रिन लेब आची
- 9:11–9:15हम उक्रा बाशाके लेल एक ता बहुत पैक खत्रा मानेची
- 9:15–9:16खत्रा? कोना?
- 9:17–9:20इबात सत्य अची, जे बाशा रिन लेए तची
- 9:20–9:22दून्याक हेर बाशा लेए तची
- 9:22–9:26अंग्रेजी स्वयम आदासे भेशी सब्द डोसर बाशा से लेलक अची
- 9:26–9:30मुदा बिना नीमक बिना कोनो सीमाक जा आहा रिन लेब
- 9:30–9:34तब आशाक अपन निजता उकर आतमाख अतम बोजाई तची
- 9:34–9:35अच्छा
- 9:35–9:38श्वता सब के इब उजब आवश्षक अची
- 9:38–9:42जिजे हम्रा सब अंग्रेजीक हर सब्द के अहिना अपना लेब
- 9:42–9:47दिरे-दिरे मैठ्लिक आपन व्याकरनिक सन्रचना अशाब्दिक संदर्या नष्ट बहुजाएत.
- 9:48–9:51आई केबल एक ता पिजिन माने मिष्षित बोली बनी कर अईजाएत.
- 9:51–9:55अईट विस्त्रिच शब्द्खोश भाशाक सीमा निरदारित करेत ची.
- 9:55–10:03इब दोसर का गर आची बाशा कोनो एक ता बान्दल गेल गर होई तची?
- 10:03–10:09भिल्ल्ल होई तची. आई शब्द कोश मात्र क्रित्रम शब्द नहीं गडी रहाल आची.
- 10:09–10:11इब रहम से हो तोरी रहाल आची.
- 10:11–10:14प्रफेसर सिंग का प्रस्तावना में इस पष्ट के लगल आची,
- 10:25–10:55तब आप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अ�
- 10:55–10:59मुदा हम्रा लागेत आची, जे आहा भाशाक शुद्द्द तक आग्रामे,
- 10:59–11:03उही च्टर, जमीनी सच्चाए के अन्देखा करो हल ची.
- 11:03–11:04कुना अन्देखा करो हल ची?
- 11:04–11:07प्रस्तावनाक उही कहन्द पर द्यान दियो,
- 11:07–11:11जदे प्रफेसर सिंग मित्लाक शित्रग भाशाई पारस्तितिकी
- 11:11–11:14माने लिंग्विस्टिक इकोलगी कवरनन के ने चतिन
- 11:14–11:17इकोनो सीथा साथा एक रंगा समाज नही आची
- 11:17–11:20मित्लाक शित्र में मैठिली अकेले नहीं बाचाल आची
- 11:20–11:22इब भारड अन्य बाशा सब
- 11:22–11:31जना भूजपूरी, मगही, सन्ताली, मुन्दारी, उराँ, हो, उर्दू, आदिक संगे सहस्तित्व मेरही तची.
- 11:31–11:34ता हां, हमरा उजी सहस्तित्व संग कोनो समस्या नहीं अची.
- 11:34–11:41मुदा समस्या उते उत्पन हुई तची, जगन आहा मान की करनक नाम पर शुद्दता वादी बोजाएत ची.
- 11:42–11:49आप देखु प्रफेसर सिंट श्प्रस्ट लिक्ट छतीन, जे मातर प्ची सतीस प्रतीषत वकता एक भाशिक छतीन.
- 11:49–11:54अद्थात सोमेसा सत्तर्दरी लोग जे मैत्ली भाजद च्छतिन
- 11:54–11:58उएक ता दोसर भाशा चाहे उ हिन्दी होई उर्दू होई
- 11:58–12:01वा सन्ताली से हो भाजद च्छतिन
- 12:01–12:03एकर परिनाम की भोल अच्छे
- 12:03–12:05मैत्ली अपन वाख्के सन्रचना
- 12:05–12:10अर अनेकन शब्द एही अस्ट्रिक और अन्यबाशा सबसक रहन केने आचे
- 12:10–12:12आआ, उतो सबहावी का ची
- 12:12–12:15मेतलिक मिठास उही आदान प्रदान मे आचे
- 12:15–12:17इजे आख विदेः शब्द कोष आची
- 12:17–12:20जे शुद्द्दाख सीमा बनावे चाहता ची
- 12:20–12:24उ कतुन कतुए बहु भाशिक तरल यतार्थ के नकारी रहल अचे.
- 12:24–12:27बाशा एक ता जंगली प्वौल जका आचे,
- 12:27–12:31जक्रा अपन हिसाप सा माटी, पानी, आरोद लेवक पानी चे.
- 12:31–12:34आहा जे उक्रा एक ता गमला में लगाएप,
- 12:34–12:39अख कहब, जे इमान की करन रूपी गमला चे, तो फुल तो शाएद बाची जाएद,
- 12:39–12:46मुदा उका उप्रक्रतिक सुगन्द, जोक्रा उई जंगलक, दोसर गाज ब्रिट्स़ भिटल्चल उगराजाएद.
- 12:46–12:50अगर बीया के सन्रक्षिट करव आवश्श्वग बोजायताची
- 12:50–12:53मुदा बोटानिकल गर्दन में पूल कप्रदाची
- 12:53–12:56मुदा बोटानिकल गर्दन में पूल कप्रदाची
- 12:56–12:59बाँदा बोटानिकल गर्दन में पूल कप्रदाची
- 12:59–13:05जंगल अरतात इजे हमर नव दिजितल अबहुमन्दली क्रित योगची उबनब शूरू बहुजायताची
- 13:05–13:13तकन जंगली पूल के भुल्डोजर्स बचेवाक लिल एक ता बोटानिकल गाडन मे राखज़ उकर भीया के सन्रक्षित करभ आवश्श्वक भूजायताची
- 13:13–13:18मुदा बूतानिकल गर्दन में फूल का प्राक्रतिक विकास बंद बोजायताचना?
- 13:18–13:22नहीं! विदेः शब्द्खोश उही बूतानिकल गर्दने काज को रहा लाची,
- 13:22–13:24उक्रम माएर नहीं रहा लाची.
- 13:24–13:32हम्रा लागे तची जी आहा बहुबाशिक्ता के सुन्दरे के मान्की करने एक विरोदी बुजले लोहो मची, तुनो एक तो सरक शत्रू नहीं आची.
- 13:32–13:36हमेक्रा शत्रू नहीं मानी रोहल ची, मुदा प्रात्मिक्ताक बात कोरोहल ची.
- 13:36–13:42जखन हमरा सब नियम अ संस्त्ता पर भेशी दियान दिच्छी तजन मानसक भाशा चुट जाए तची
- 13:42–13:46मुदा शब्द्खोश तची उही जन मानसक भाशा के वेवस्थित करे तची
- 13:46–13:52जखन कोनु शब्द्खोश, हजारो शब्द्खुद्पत्ती, उकर उच्चारन जेना IPA के माद्धियम सा,
- 13:52–13:55उकर विविन लिपी सब में उकर रुप सुरक्षित करे तची,
- 13:55–13:58तो उव अस्ट्ट्रिक वा उर्दु प्रभाव के नकारेत नहीं आची,
- 13:58–14:01अगरा इतिहास के लिए दर्ज करे तची
- 14:01–14:04बाशा जकन अनन्त काल दरी चले तची
- 14:04–14:06तची अखरा सांखि की ए श्पष्टता
- 14:06–14:08व्याक्रनिक सन्रचना
- 14:08–14:10अन्व प्रविदिक संगर्ष मे थाड रहावाक ले
- 14:10–14:12अकाधमेक अस्ट्रचाही
- 14:12–14:14प्रफेसर सिंग कनुसार
- 14:14–14:44अगर आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आ� आप आ� आ� आप आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ
- 14:44–15:14अपना अपना अपना अपना अपना अपना अपना अपना अपना अपना अपना अपना अपना अपना अपना अपना अपना अपना अपना अपना अपना अपना अपना अपना अपना अपना अपना अपना अपना अपना अपना अपना अपना अपना अपना अपना अपना �
- 15:14–15:19उकर सहज्तास, बिना कोन दरक जे कोन व्याक्रन वेद की कहेत?
- 15:19–15:22चर्चाक एही बिन्दूपर पहुचका
- 15:22–15:25हम्रा लागे तची जे हम्रा सब दूनुगोटे
- 15:25–15:28एक ता बहुत व्यापक सथ्यक दूनु पाखा के देखी रहाल ची
- 15:28–15:31जता ए विदेह सब द्कोष आम मानकी करन
- 15:44–16:14भी भी भी भी बीदे बीदे बीदे बीदे बीदे बीदे बीदे बीदे बीदे बीदे बीदे बीदे बीदे बीदे बीदे बीदे बीदे बीदे बीदे बीदे बीदे बीदे बीदे बीदे बीदे बीदे बीदे बीदे बीदे बीदे बीदे बीदे बीदे बीदे बीदे �
- 16:14–16:17अद्यान्चिन्क्क् विस्त्रित प्रस्तावनाक अद्यान करती।
- 16:18–16:20उही में मित्लाग भाशाई पारस्तित की
- 16:20–16:23अम्मान की करनक जे विस्त्रित विष्लेशन अच्छी
- 16:23–16:26उहांके ईई सुच्बाक लेल विवष्करत
- 16:26–16:29जे आहां आपन मात्री भाशाके कोना देखे ची
- 16:29–16:31अपन निशकर स्वयम निकालू।
- 16:31–16:33एक्दम सही कहलू।
- 16:33–16:35जैना, हम्रा सब आई बात के लूू,
- 16:35–16:37जे बाशाक अकादमिक सन्रक्षन
- 16:37–16:39आ अकर प्रक्रतिक बहुब भाशिक्ता,
- 16:39–16:41इदोनु कतू नकतू संगर्ष
- 16:41–16:44आ सह अस्तित्वक एक दा अदबुत उदाहरना ची.
- 16:44–16:48अद्बूत उदाहरना ची, समवदद, नीक भाशा सन्रक्षन अव आची,
- 16:48–16:53जते हमरा सब शब्द कोश रूपी मजबूत बुतानेकल गार्देंत बनाई,
- 16:53–16:58मुदा एह लेल, जे उक्रा वित्तर, जनमान सक समवादक प्रक्रतिक,
- 16:58–17:01जंगली सुगन्द निर्बाद रूपे ममकेत रहें
- 17:01–17:03विमर्षक संग जुडबाख्लेल
- 17:03–17:05आईही गंभीर भुद्दिक यात्रा में
- 17:05–17:07हम्रा सब अख संग रहें बाख्लेल
- 17:07–17:09स्रोटा सब कक बहुत-बहुत दन्निवाग
- 17:09–17:12हम्रा सब फिर भेटब एक तनव विष्यक संग
- 17:12–17:15तक्हन्दरी सोचित तरहूँ आब विमर्ष्करे तरहूँ
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बिमर्श में आहाक स्वागत अछी, जते हमरा सब जतिल विषे यसबख बिविन पाक पैर आर गमविर्टा से चर्चा करेची. सो चु, जे कोनो भाषाक अस्थिद्वके रातो रात कागच पर से मिता दिल जाए, तक वी अ भाषाम मरी जाएत? तुब बद गमभीर प्रष्नची आप, 1891 आनवे 1961 के भीच मैठलिक्षंग बलकुल एहनी भेल जक्चन जोर्ज ग्रीर्सन अपन भाशाई सरवेक्षन केने चला तु उ मैठली भाजे वाला लोक कषंक्या लगबख बिरानवे लाक बतोने चला मुदा जखान उनिस्ट्ट्टक्ट का बारत की जन्गन्ना भेल त? उसंख्या खासी के मात्र उंचास लाक रही गेल चल? एक दम! एक दम सही! मात्र उंचास लाक! माने की इकोनो महमारी चल, जक्रस्द मेठ्ली बाजे वाला आदालुक रातो राद गाएप बहगेला? नहीं ये एक ता सुन्योजित राजनेतिक अ सांखिक ये अद्रिष्टा चल जते लाको लोक कमात्र बाशाके कागजी आक्डा में हिन्दी की भोली गोषित कर देल गेल आई हम्रा सब एही महत्तोपोडन प्रसंगिक विष्यापर गब कराल ची जे मेठली बाशाक भविष्या एकर सन्द्रक्षनक वास्तवेक मार्ग की आची भल्कोल आई चर्चा मुक्य रूपसा गजेंद्र ताकृर नगेंद्र कुमारजा आँ पन्जिकार विद्यानन्जादवारा समपादिद जे विदे है अंग्रेजी मेठिली शब्द कोशाच. जे 2012 में आईल शल? आप प्रफ्शर उदेन राईंच्सिंग दोरा लिखल गेल, अकर जे बद्विस्त्रित प्रस्टावनाच, ताहे पर आदारी तज. वाँद्रष्टिकों आहासा भिल्कुल भिन्ना आची हम्रा विचारे बाशाक अस्ली शक्ती वोकर कोनो अकाद्मिक नियम, शब्द्कोष वा सरकारी मानेटा मे नही आची बाशाक जीवन वोकर विचारे बाशाक अस्ली शक्ती वोकर कोनो अकाद्मिक नियम अव उख्रा सम्विद्धानिक मानेटा बेटेई मुदा, हमर्द्रस्टिकोन आहासा भिल्कुल भिन्ना आची हम्रा विचारे, बाशाक अस्ली शक्ती अखर कोनो अकाद्द्मिक नियम शब्द्खोष वा सरकारि मानेटा में आची बाशाग जीवन उकर जवेख भहु भाशिकता, आम लोक कर तूरक सहजता, औही सीमान्ती करनोग भीच उतपन प्राक्रतिक संस्क्रतिक जीवनतता सावेत अची. तो आहाख कह बछी जे बिना मान की करनाग बाशा बाचा बाच्चे टची. आह, बिल्कुल. बाशा कुनो संग्रहाले में राखल गल वस्तू नहीं जफी जक्रा मान की करनके शीशा में बंद का कसुरक्षित कैल जासके. इएक ता बहित नदी आची जे अपन भाट स्वायम खोजी लेट आची. इबहत नदी वला उप्मा सुनबा मेत बहुत काव्यात्मक लगाई तची मुदा जकन हमरा सव यतार तवादी दरातल पधार होई ची तई इई नदी बिना बान देख सुखी जाई तचे कोना सुखी जाई तची अम इब आत एहिलेल कहरोहल ची, जे प्रफेसर उदैन अरायन सिंग अपनन प्रस्तावना में इस पष्ट उलेक कने चतिन, जे आयो मेठिलिक वकताक वास्तविक संक्या लगबक चार करोड चे. मुता जक्चन हा 2001 कजंगलाना देखव, ता इी मात्रे 1 दशमल 2-1 करोड देखावी तची, इी कत्टेक पैक सांखिकिय ब्रहम अची आहा विचार करूूूूू आहा माने ची जे आक्डा संग केल भाई लग ची, मुदा जग सर्कार आख्र सहमर अस्तिट्व मेटा रहाला ची तक की विदेश शब्द कोश सन अकादमिक प्रयास उही कागजी मत्या मेट का अकादमिक उतर नहीं आची जखन आहा लग एक ता मानकी क्रिच शब्द कोश होई तची जखन आहा आश्टमनुसुची माने एट्सके दिल में आपन स्थान बनवैई ची तकन आहा आपन अस्तित्व सथद करे ची बिना एक कर राज आहा के बाशाके विद्याले में नहीं पड़ाए. आहा महा के चिंता भूजी रहाल ची मुदाई कागजी मत्या मेट, जिक्रा आहा भाशाक म्रित्यो भूजी रहाल ची, प्रूफेसर सिंग उक्रा एक ता दोसर अब बहुत मार्मेग चश्मासा देखेच फीजच्छती. प्रस्तावना में उस पश्ट्रूप से लिख़्छती जी लंबा समयदरी समविदानिक अदिकार और राज्जक सन्रक्षन सव वन्चित रहभ मित्लीक लेल एक प्रकारिन वर्दान साभित बहल एक मेट्क शमकरम राज्जक सहियोग नहीं बहत्व कुनो बाशाक लेल वर्दान बहुत सके तची इत उहिना बहल जे कुनो रोगी के अशवदाले नहीं बेटव उक्रा लेल वर्दान आची ए रोगी और अशवदाले एक बात नहीं आची इ आत्म निरब्रताक बात आची प्रफेसर सिंग भूजावएच्छती जे किये की वर्दान चल, जकनाहा के सरकारी सह्योंक नहीं बेटेत अची, तकन आहा भाशा के कुनो सरकारी नोकरिक सीडी, वा कलर्क बनबाक सादन नहीं मानेच्छी. लोक मेठली में ताहिले नहीं लिखिरे रहा हा, जि हूंका साहित्ति अकाद्मेक पूरस्कार चाही चल, वा सरकारी अनुधान. लोक लिखिरेहल चला हा कारन, जि ओए हूंका आत्माक भाशा चल. एई संगर सक भीच की भेल. बिना कोनो सरकारी मदद के, मित्ला का आम जन मानस, गामक महला सब आपना गरग भिट्तिपर जे चित्र कारी केलनी उ मित्ला पेंटिंका रूप में विश्वस्तर पर पहुचे गेल. उत कलाग बात भेल मुद्द बाशा. बाशा पर सेहु आभी रहल ची. मेत्ली साहित्य, सिंदि, कुंकनी, मनिपूरी अन्नेपाली जका मानेता प्राप्त भाशा सब से बहुत आगु निक्लीगेल, अहो बिना कोनो समवेदानिक जातक, इकोना भेल. कारन, जगधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधध अगाड यागा कियक नहीं इक दम केट नहीं करन जे कलवा सत्ति इए जी जे आई परिद्रुष्श बदली गेल आची हम्रा सब दिजितल युग में ची आँगा केवल विट्ति चित्र आ लोक गी तक भरम में अगाद अद अद्टिश्टल्टिटलिजन्सक युगमे नहीं बाज सकेईची और एते विदेः शब्द कोश जका पर्यास क्रान्तिकारी बोजाईत ची क्रान्तिकारी कोना इकेवल किष शब्दक संग्राह नहीं आची येख्टा प्रवादिक अस्त्र ची इश्वद कोश, तिरहुतालिपी, देवनागरी, अ अन्तराश्टी धून्यात्मक वरन्माला मने जक्रा हम्रा सब अईप्ये कही ची, उकर प्रियोक कहे रहला ची. अईप्ये का प्रियोक कर मतलबी सूनिष्चित करेब, जए दून्याक कोनो कोना मे भैसल व्यक्ती, जे मैत्ली नहीं जानेता ची, औहो कोनो मैत्ली शब्द के, उईने उचारन करएत, जे ना हम्रा सब गाँ में करेची. हम आप्ये का महत्वके नकारी नहीं रहें ची. मुदा, यह आखाडमेक अस्त्रक जमीनी वास्त्विक्ता की आची वास्त्विक्ता इए आची जे प्रुफेसर सिंग स्पस्ट करे चती जे आदूनिक जुग में भासा के अनलाईन इपत्रिका इशब्द कोश अब वोबाल शब्दावली जगका उपकरनक नितान्त अवश्शकता आची जखन दरी हम्रा सब नव्षब्दावलीक निरमान नहीं करव, तकन दरी हम्रा सब दिज्टल स्पेस में कोना स्तापित होयभ। नव्षब्दावली सा आजा के ताद पर रहा ची उदाहरन के लेल, इश्वद कोश कम्पूटर के आलगारित्म लेल, कलनविदि, अपसलूट उवर्ल के लेल निरपेखष सावकेत, वो अक्तिव डेटाबेस के लेल, सक्रिय दद्ताच निदिसन शब्दावली गड़े तची. जो हमरा सब भाशा के मानकी ग्रित कखा, यी सब नहीं बनायब, ता हमर भाशा का यूवा पीडी, जि दिन रात कमपुटर पर काच करे तची, उ पुन्त आंगरेजी पर निरभर भोजायत. मुदा रूकू, जगन आहा आपसलूट यूरल के निरपेख्ष सावकेत कहेच्छे, तक यहा वास्तमे बाशा के बचाई रहल ची, वा आम लोग के ले एक्रा आर कतिना अपरच्ट बना रहल ची. नहीं, कतिन नहीं. गाम के कते एक लोग वाशहर के कते एक मैठली भाशी विद्यार थी अपन्दैनिक जीवन में सक्करिय दटाश निदिभाजत आहा स्वयम विचार करो समबवत प्रारमब में लोग एक्रान नाई बाजन मुदा कुनो भी नवष्वडावली के समाज में पच्वाय में समय लागे तची मुदा विश्टाय ओ नहीं आच्छ, यक पचाबा में समय लगे तच्छ विश्टाय इ आच्छी जिकी इ प्राक्रिते कची प्रुफेसर सिंगक प्रस्तावना स्वेमहें बात के स्विकार करेताची जे अंग्रेजीक शब्दन सबख्सीदा प्रेयोग नवबहारत्ये बाशा सब में जेक्रा न्वौ आँड़्िन लंगवेजेश कहल जाईताची उहे में बहुत आम अची उहे एक्रा रामपेंट बोरोंग कहच चतें अथात निरबाद रूपस दोसर भाशा से शब्द उदार लेप. आम जन मानस जकन कम्ठौटर पकाज करे तची तो सहेष्ता से URL वर देटाबेस कही ले तची. अख्रा लेल कम्पूटर का आल्पा बिल्ट के आद्दे रच्ना कहब एक ता अकाद्मिक क्रित्रिमता आची. हम और इक्रक क्रित्रिमता नहीं कहब. इए अईना आची जेना आहा कोनो जिन्दा वस्तो के प्लास्टिकक साचा में द्हाली कै, अगर सुन्दर बने बाक प्रयास करे रहल थी बाशा ओव होई तची जे लोकक ठोर पर होई जा पच्टर प्रतिषत लोक के खब्टर कही रहल जा दी तश्वद कोशके अखरा अईना स्विकार कर बाख चाही बारी बरक्जम संस्क्रितनिष्त शब्द गड़ेक अगर अपन भाशा से दूर कर रहाल ची आहा रमपन्ट बोरोंग अगर अद्ध निरबाद रिन लेबाक ची बाद कर रहाल ची हम उक्रा भाशा के लेल एक ता बहुत पैक खत्रा मानेच ची खत्रा? कोना? इबाद सत्य अची जे भाशा रिन लेब आची हम उक्रा बाशाके लेल एक ता बहुत पैक खत्रा मानेची खत्रा? कोना? इबात सत्य अची, जे बाशा रिन लेए तची दून्याक हेर बाशा लेए तची अंग्रेजी स्वयम आदासे भेशी सब्द डोसर बाशा से लेलक अची मुदा बिना नीमक बिना कोनो सीमाक जा आहा रिन लेब तब आशाक अपन निजता उकर आतमाख अतम बोजाई तची अच्छा श्वता सब के इब उजब आवश्षक अची जिजे हम्रा सब अंग्रेजीक हर सब्द के अहिना अपना लेब दिरे-दिरे मैठ्लिक आपन व्याकरनिक सन्रचना अशाब्दिक संदर्या नष्ट बहुजाएत. आई केबल एक ता पिजिन माने मिष्षित बोली बनी कर अईजाएत. अईट विस्त्रिच शब्द्खोश भाशाक सीमा निरदारित करेत ची. इब दोसर का गर आची बाशा कोनो एक ता बान्दल गेल गर होई तची? भिल्ल्ल होई तची. आई शब्द कोश मात्र क्रित्रम शब्द नहीं गडी रहाल आची. इब रहम से हो तोरी रहाल आची. प्रफेसर सिंग का प्रस्तावना में इस पष्ट के लगल आची, तब आप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अ� मुदा हम्रा लागेत आची, जे आहा भाशाक शुद्द्द तक आग्रामे, उही च्टर, जमीनी सच्चाए के अन्देखा करो हल ची. कुना अन्देखा करो हल ची? प्रस्तावनाक उही कहन्द पर द्यान दियो, जदे प्रफेसर सिंग मित्लाक शित्रग भाशाई पारस्तितिकी माने लिंग्विस्टिक इकोलगी कवरनन के ने चतिन इकोनो सीथा साथा एक रंगा समाज नही आची मित्लाक शित्र में मैठिली अकेले नहीं बाचाल आची इब भारड अन्य बाशा सब जना भूजपूरी, मगही, सन्ताली, मुन्दारी, उराँ, हो, उर्दू, आदिक संगे सहस्तित्व मेरही तची. ता हां, हमरा उजी सहस्तित्व संग कोनो समस्या नहीं अची. मुदा समस्या उते उत्पन हुई तची, जगन आहा मान की करनक नाम पर शुद्दता वादी बोजाएत ची. आप देखु प्रफेसर सिंट श्प्रस्ट लिक्ट छतीन, जे मातर प्ची सतीस प्रतीषत वकता एक भाशिक छतीन. अद्थात सोमेसा सत्तर्दरी लोग जे मैत्ली भाजद च्छतिन उएक ता दोसर भाशा चाहे उ हिन्दी होई उर्दू होई वा सन्ताली से हो भाजद च्छतिन एकर परिनाम की भोल अच्छे मैत्ली अपन वाख्के सन्रचना अर अनेकन शब्द एही अस्ट्रिक और अन्यबाशा सबसक रहन केने आचे आआ, उतो सबहावी का ची मेतलिक मिठास उही आदान प्रदान मे आचे इजे आख विदेः शब्द कोष आची जे शुद्द्दाख सीमा बनावे चाहता ची उ कतुन कतुए बहु भाशिक तरल यतार्थ के नकारी रहल अचे. बाशा एक ता जंगली प्वौल जका आचे, जक्रा अपन हिसाप सा माटी, पानी, आरोद लेवक पानी चे. आहा जे उक्रा एक ता गमला में लगाएप, अख कहब, जे इमान की करन रूपी गमला चे, तो फुल तो शाएद बाची जाएद, मुदा उका उप्रक्रतिक सुगन्द, जोक्रा उई जंगलक, दोसर गाज ब्रिट्स़ भिटल्चल उगराजाएद. अगर बीया के सन्रक्षिट करव आवश्श्वग बोजायताची मुदा बोटानिकल गर्दन में पूल कप्रदाची मुदा बोटानिकल गर्दन में पूल कप्रदाची बाँदा बोटानिकल गर्दन में पूल कप्रदाची जंगल अरतात इजे हमर नव दिजितल अबहुमन्दली क्रित योगची उबनब शूरू बहुजायताची तकन जंगली पूल के भुल्डोजर्स बचेवाक लिल एक ता बोटानिकल गाडन मे राखज़ उकर भीया के सन्रक्षित करभ आवश्श्वक भूजायताची मुदा बूतानिकल गर्दन में फूल का प्राक्रतिक विकास बंद बोजायताचना? नहीं! विदेः शब्द्खोश उही बूतानिकल गर्दने काज को रहा लाची, उक्रम माएर नहीं रहा लाची. हम्रा लागे तची जी आहा बहुबाशिक्ता के सुन्दरे के मान्की करने एक विरोदी बुजले लोहो मची, तुनो एक तो सरक शत्रू नहीं आची. हमेक्रा शत्रू नहीं मानी रोहल ची, मुदा प्रात्मिक्ताक बात कोरोहल ची. जखन हमरा सब नियम अ संस्त्ता पर भेशी दियान दिच्छी तजन मानसक भाशा चुट जाए तची मुदा शब्द्खोश तची उही जन मानसक भाशा के वेवस्थित करे तची जखन कोनु शब्द्खोश, हजारो शब्द्खुद्पत्ती, उकर उच्चारन जेना IPA के माद्धियम सा, उकर विविन लिपी सब में उकर रुप सुरक्षित करे तची, तो उव अस्ट्ट्रिक वा उर्दु प्रभाव के नकारेत नहीं आची, अगरा इतिहास के लिए दर्ज करे तची बाशा जकन अनन्त काल दरी चले तची तची अखरा सांखि की ए श्पष्टता व्याक्रनिक सन्रचना अन्व प्रविदिक संगर्ष मे थाड रहावाक ले अकाधमेक अस्ट्रचाही प्रफेसर सिंग कनुसार अगर आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आ� आप आ� आ� आप आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ अपना अपना अपना अपना अपना अपना अपना अपना अपना अपना अपना अपना अपना अपना अपना अपना अपना अपना अपना अपना अपना अपना अपना अपना अपना अपना अपना अपना अपना अपना अपना अपना अपना अपना अपना अपना अपना � उकर सहज्तास, बिना कोन दरक जे कोन व्याक्रन वेद की कहेत? चर्चाक एही बिन्दूपर पहुचका हम्रा लागे तची जे हम्रा सब दूनुगोटे एक ता बहुत व्यापक सथ्यक दूनु पाखा के देखी रहाल ची जता ए विदेह सब द्कोष आम मानकी करन भी भी भी भी बीदे बीदे बीदे बीदे बीदे बीदे बीदे बीदे बीदे बीदे बीदे बीदे बीदे बीदे बीदे बीदे बीदे बीदे बीदे बीदे बीदे बीदे बीदे बीदे बीदे बीदे बीदे बीदे बीदे बीदे बीदे बीदे बीदे बीदे बीदे � अद्यान्चिन्क्क् विस्त्रित प्रस्तावनाक अद्यान करती। उही में मित्लाग भाशाई पारस्तित की अम्मान की करनक जे विस्त्रित विष्लेशन अच्छी उहांके ईई सुच्बाक लेल विवष्करत जे आहां आपन मात्री भाशाके कोना देखे ची अपन निशकर स्वयम निकालू। एक्दम सही कहलू। जैना, हम्रा सब आई बात के लूू, जे बाशाक अकादमिक सन्रक्षन आ अकर प्रक्रतिक बहुब भाशिक्ता, इदोनु कतू नकतू संगर्ष आ सह अस्तित्वक एक दा अदबुत उदाहरना ची. अद्बूत उदाहरना ची, समवदद, नीक भाशा सन्रक्षन अव आची, जते हमरा सब शब्द कोश रूपी मजबूत बुतानेकल गार्देंत बनाई, मुदा एह लेल, जे उक्रा वित्तर, जनमान सक समवादक प्रक्रतिक, जंगली सुगन्द निर्बाद रूपे ममकेत रहें विमर्षक संग जुडबाख्लेल आईही गंभीर भुद्दिक यात्रा में हम्रा सब अख संग रहें बाख्लेल स्रोटा सब कक बहुत-बहुत दन्निवाग हम्रा सब फिर भेटब एक तनव विष्यक संग तक्हन्दरी सोचित तरहूँ आब विमर्ष्करे तरहूँ