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मोती_दाइ__आमा_गाहिलकी_भक्ता.mp4

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Part 7 · VIDEHA MITHILA MAITHILI DISCUSSION CRITICISM SERIES PART 7
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  1. 0:00–0:06सुन्दा थग्ट्के तिस्ते लाख्सनी आईनर, क्यले कई योव्टा नाम्मा मात्रे पनी इती देरे बावना लुके को न्चाकी,
  2. 0:06–0:09त्यो सुन्ने वित्टे के जो कोई को आख्जा रसा हूंचा.
  3. 0:09–0:13मित्लाको लोक कतामा तट्क्क्क्य यस ते योटा नाम्सा मोतिदाई
  4. 0:13–0:17यो कने समाने नाम्मात्र होईन, यो ता गजेरो समर पन
  5. 0:17–0:22अकल पनिया पीडा रष समयलाई समेद जितने योटा बली यो आस्ता को प्रतिक हो
  6. 0:22–0:52ಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈ
  7. 0:52–0:58ज़ासले हमी लाई बिश्वास, समाज रव वेक्तिगत पीडा को एक दबाई गज़ाई मा पुर्याई में सा.
  8. 0:59–1:06ला अब एस बिशे मा गज़ी रे हे रों, यो मन्मोहक मित्ला कला ले उजैनी गाउ को जीवन्त चित्र प्रस्थोट कर सा.
  9. 1:06–1:11उजेनी योड़ स्यानो गाओ बहाई पनी येसको चर्चा निके ताडदा ताडदा समहों दियों.
  10. 1:11–1:15यहां देखिने इ उज्याला रंगरु रँ मानिसरो को व्यास्त दैनि कि ले
  11. 1:15–1:17योड़ यस्तो समाजला ये देखाूं सच्ट जाहा
  12. 1:17–1:19हरे वेक्ति को आआपने बूमि का चा.
  13. 1:19–1:22सबई जाना आआपनो का मव्यास्त चं
  14. 1:22–1:27तरे यो पुरे गाओलाय एवटे शुत्रमा बान्दने एवटा एक दमे भिसे सक्तित या थियो
  15. 1:27–1:31गाओ का इगलि हरु लाई एक छिन द्यान दिर हैरनोस्ता
  16. 1:31–1:33गोठाला हर को गली दोभीर को गली
  17. 1:33–1:37सबे को आपने चुटे काम्र चुटे नदी का गाट हर दिये
  18. 1:37–1:43समाज ये सरी भिविन पेसार बर्गम बाडिये को बहाई पनी ये सबईलाई जोडने योटा साजा केंद्र थिः
  19. 1:43–1:46निम को रुक्मूनी रहे को आमा गाहल को मन्दिर
  20. 1:46–1:52योटा समान्य मातो को वेदी रते स्मा लगाये को सिंदुर नहीं शिंगो गाँ को आस्था को केंद्र थियो.
  21. 1:52–1:56आमा गाहल कोने दर लागदी वारिसावने देवी हून उन फुन थियेन.
  22. 1:56–1:59वहात सबे ले माया गरने रोटी कोमल आमा हून रोटी दाई.
  23. 1:59–2:04वहा को दोका बाटक कोही पनी रित्त हाद फरकी देईना बहने सबे को अटुट भी स्वास्त्तियो.
  24. 2:04–2:10अने यह साजा आस्था को केंद्रमा नों थियो हम्रो कता की मुख्या पात्र मोथी दाई.
  25. 2:10–2:13वहा एव योटी एक दमे सामान्य महला नों थियो,
  26. 2:13–2:17ब्यान मंदिर प्रतिको वहाको समर्पन वहाको साचेने असामान ने थियो
  27. 2:17–2:21रहे एक भिहान मंदिर मा सबे वंदा पहलो दियो भालने हाथ वहाक है लिए न थियो
  28. 2:21–2:25मंदिर बडारने, माटोले लिपने, दूबबतिगरने
  29. 2:25–2:28यह सबगे काम वहाले कुने स्वार्थ विना गरनों थिू
  30. 2:28–2:31तेसेले ता गाँले हर ले वहाले आदर ले
  31. 2:31–2:33बख्तिन अर्ठात साजो बख्ता वन थे
  32. 2:33–2:36रप पत्याओनोज, मोती दाए को लागी
  33. 2:36–2:39यो समान संसार को कुने पनी तूलो सिंजासन मन दा कोम थिये ना
  34. 2:39–2:43तर वहा को जीबन मंदिर को सांति मा मात्रे कहा सिमित थिः रा
  35. 2:43–2:47दोबी समवडाय की मोटी दाई को दैना की साचचाईने एक दमे कछोर थिः
  36. 2:47–2:51यो समय रेखा ले वहा को सारिरिक परिस्ट्रम लै दिखा उचा
  37. 2:51–3:00बिहाने नदी किनार मा कप्ला और को विसाल तूप्रो पखालने, दिशो को ते चर को गम मा सुकाओने, रषाजा परे पची ती कप्ला और गरगर मा पुर आए.
  38. 3:00–3:03यो सरिर ले पुरे निचोडने काल को काम तियो.
  39. 3:03–3:12तर अचम्म्म को कुरा किये सब नेनी, वहाको सरिर जती ताक थि, आमा गाल को सेभागर दा वहाको आतमाले तेतिने ग़ेरो सांति रो उर्जा पाउ थि।
  40. 3:12–3:22तर यो ता बईर देखिने कुरा मात्र बायो, जब साज पर थिः रफ सारा गाँ सांत हूँ तिः तब वहां को जीवन को तिः गज़ी रो सून्नेता बाईर आउ तिः.
  41. 3:22–3:27बिवाहा बायो को तेति देद हे बर्षा भी ती सक्डा पनी वहां को काख रिट्ते तिः.
  42. 3:27–3:32याने रह याडा कुरा बुजना एक्डम जरूरी चा, त्यो भेला को समाज माज नाजन नहूनु बाने कोनी ब्यक्तिग दुखा मात्र थियेना, यसलाइते याडा तूलो कलंकने मानिं थियो.
  43. 3:32–3:36तर वहाले आपनो यो दुखा कहले ये कोसे संगपोखन बाहेना.
  44. 3:36–3:43आमाले सबे देखनोंचा बने योड़े विश्वास्मा वास्सधे माँन रहनुबआयो रहने निरंटर मंदिर को दियो बाली रहनुबआयो.
  45. 3:43–3:46अब याने रह योड़ा कुरा बुजना एक दम जरूरी चा.
  46. 3:46–3:54तो बेला को समाज मा संटान नहुन बहने कोनी ब्यक्तिक दुख्ह मात्र थियेना येसलाइ तेवडा तूलो कलंका नहीं थियो.
  47. 3:54–3:58अगा को रित्तो काखलेने वहाको पहीचान को सबही बंदा खुड मान थियो
  48. 3:58–4:02मोथी दाले ता आपनो बागले चुप्चाप सुईकार गरनू बाए को तियो
  49. 4:02–4:06तर समाजले वहाला यो कलंको को बारी निरन्तर बोखाए रहे को तियो
  50. 4:06–4:09तब आज बगे ले तव आगे ले चुप चाप सुझकार गरन बाए को तियो,
  51. 4:09–4:13तब समाज ले वहाल यो कलंको को बारी निरन्तर बोकाई रहे को तियो.
  52. 4:13–4:16इस तो अबस्तामा योड़ा गंबीर प्रष्न उभ्जिन्चा,
  53. 4:16–4:19ज़सले हमी सब़ेले एक चिन सचना बाद्धे बनाुचा
  54. 4:19–4:22येती देरे निस्वार्त बख्तिले अखिर के दिना सक्षा
  55. 4:22–4:24रख खे दिना सक्षा
  56. 4:24–4:28के साचो समर पनले बगगे मा लेक्ये को कुरा लै बडलना सक्षा
  57. 4:28–4:31यो प्रष्नले अब फम्रो कताले एवटा नया
  58. 4:31–5:01तब आप बवाँगा नहीं तब आप बवागा नहीं तब वागा वो प्रजाँ तब वागा तब वागा तब वागा तब वागा तब वागा तब वागा तब वागा तब वागा तब वागा तब वागा तब वागा तब वागा तब वागा तब वागा तब वागा तब वा
  59. 5:01–5:04यो ज़स्को कल्पना मात्रगर्दा पने आंग्स्शीरिंग हूंचा
  60. 5:05–5:07अब एक चिन यो कुरा ले मननगरूं
  61. 5:07–5:12बाईडबाटर हेर्दा कस्तो निस्टूर मजाग जस्तो लाख्षाइ न तरस समाच को नजर मा
  62. 5:12–5:15ती चादिन ले तूलो उखल्पूषल ले दियो
  63. 5:15–5:45ती च्छादिन को मात्रिट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्�
  64. 5:45–5:49बर वहा ज़न प्लो अद्द्यात्मिक सक्ति का साथ मंदिर मा फर्किन वहायो.
  65. 5:49–5:57अब वहा के वल दीए बालना रद्दूप सलकाउना मात्रते आए और वहाता आमा गाहेल को सक्चात अद्द्यात्मिक माध्ध्यम बन बहायो.
  66. 5:57–6:10देवी वहाको सरीर मा प्रवेस करना थालनु वहाको दुखी, भीदामी रप पीडित मानी सरो सांथवना कोजदे वहाको आवना थाले, वहाले आपनो त्यो अपार सोकलाई अरुको पीडा कोम गरने सक्तिमा बडलनु वहाको.
  67. 6:10–6:40ಈ ಈ ಈ ಈ ಈ ಈ ಈ ಈ ಈ ಈ ಈ ಈ ಈ ಈ ಈ ಈ ಈ ಈ ಈ ಈ ಈ ಈ ಈ ಈ ಈ ಈ ಈ ಈ ಈ ಈ ಈ ಈ ಈ ಈ ಈ ಈ ಈ ಈ ಈ ಈ ಈ ಈ ಈ ಈ ಈ ಈ ಈ ಈ ಈ ಈ ಈ ಈ ಈ ಈ ಈ ಈ ಈ ಈ ಈ ಈ ಈ ಈ ಈ ಈ ಈ ಈ ಈ ಈ ಈ ಈ ಈ ಈ ಈ ಈ
  68. 6:40–7:10रित्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्
  69. 7:10–7:14बखदि को यो रहस्यमः संगम ले आजा हमी सबेला योटा ग़ेरो प्रष्ना चोले रजान साथ.
  70. 7:14–7:18अकिर मनिस को अस्थिट्ट्टलग साथ बआजाने कुराची की रई चाता.

Plain text

सुन्दा थग्ट्के तिस्ते लाख्सनी आईनर, क्यले कई योव्टा नाम्मा मात्रे पनी इती देरे बावना लुके को न्चाकी, त्यो सुन्ने वित्टे के जो कोई को आख्जा रसा हूंचा. मित्लाको लोक कतामा तट्क्क्क्य यस ते योटा नाम्सा मोतिदाई यो कने समाने नाम्मात्र होईन, यो ता गजेरो समर पन अकल पनिया पीडा रष समयलाई समेद जितने योटा बली यो आस्ता को प्रतिक हो ಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈಈ ज़ासले हमी लाई बिश्वास, समाज रव वेक्तिगत पीडा को एक दबाई गज़ाई मा पुर्याई में सा. ला अब एस बिशे मा गज़ी रे हे रों, यो मन्मोहक मित्ला कला ले उजैनी गाउ को जीवन्त चित्र प्रस्थोट कर सा. उजेनी योड़ स्यानो गाओ बहाई पनी येसको चर्चा निके ताडदा ताडदा समहों दियों. यहां देखिने इ उज्याला रंगरु रँ मानिसरो को व्यास्त दैनि कि ले योड़ यस्तो समाजला ये देखाूं सच्ट जाहा हरे वेक्ति को आआपने बूमि का चा. सबई जाना आआपनो का मव्यास्त चं तरे यो पुरे गाओलाय एवटे शुत्रमा बान्दने एवटा एक दमे भिसे सक्तित या थियो गाओ का इगलि हरु लाई एक छिन द्यान दिर हैरनोस्ता गोठाला हर को गली दोभीर को गली सबे को आपने चुटे काम्र चुटे नदी का गाट हर दिये समाज ये सरी भिविन पेसार बर्गम बाडिये को बहाई पनी ये सबईलाई जोडने योटा साजा केंद्र थिः निम को रुक्मूनी रहे को आमा गाहल को मन्दिर योटा समान्य मातो को वेदी रते स्मा लगाये को सिंदुर नहीं शिंगो गाँ को आस्था को केंद्र थियो. आमा गाहल कोने दर लागदी वारिसावने देवी हून उन फुन थियेन. वहात सबे ले माया गरने रोटी कोमल आमा हून रोटी दाई. वहा को दोका बाटक कोही पनी रित्त हाद फरकी देईना बहने सबे को अटुट भी स्वास्त्तियो. अने यह साजा आस्था को केंद्रमा नों थियो हम्रो कता की मुख्या पात्र मोथी दाई. वहा एव योटी एक दमे सामान्य महला नों थियो, ब्यान मंदिर प्रतिको वहाको समर्पन वहाको साचेने असामान ने थियो रहे एक भिहान मंदिर मा सबे वंदा पहलो दियो भालने हाथ वहाक है लिए न थियो मंदिर बडारने, माटोले लिपने, दूबबतिगरने यह सबगे काम वहाले कुने स्वार्थ विना गरनों थिू तेसेले ता गाँले हर ले वहाले आदर ले बख्तिन अर्ठात साजो बख्ता वन थे रप पत्याओनोज, मोती दाए को लागी यो समान संसार को कुने पनी तूलो सिंजासन मन दा कोम थिये ना तर वहा को जीबन मंदिर को सांति मा मात्रे कहा सिमित थिः रा दोबी समवडाय की मोटी दाई को दैना की साचचाईने एक दमे कछोर थिः यो समय रेखा ले वहा को सारिरिक परिस्ट्रम लै दिखा उचा बिहाने नदी किनार मा कप्ला और को विसाल तूप्रो पखालने, दिशो को ते चर को गम मा सुकाओने, रषाजा परे पची ती कप्ला और गरगर मा पुर आए. यो सरिर ले पुरे निचोडने काल को काम तियो. तर अचम्म्म को कुरा किये सब नेनी, वहाको सरिर जती ताक थि, आमा गाल को सेभागर दा वहाको आतमाले तेतिने ग़ेरो सांति रो उर्जा पाउ थि। तर यो ता बईर देखिने कुरा मात्र बायो, जब साज पर थिः रफ सारा गाँ सांत हूँ तिः तब वहां को जीवन को तिः गज़ी रो सून्नेता बाईर आउ तिः. बिवाहा बायो को तेति देद हे बर्षा भी ती सक्डा पनी वहां को काख रिट्ते तिः. याने रह याडा कुरा बुजना एक्डम जरूरी चा, त्यो भेला को समाज माज नाजन नहूनु बाने कोनी ब्यक्तिग दुखा मात्र थियेना, यसलाइते याडा तूलो कलंकने मानिं थियो. तर वहाले आपनो यो दुखा कहले ये कोसे संगपोखन बाहेना. आमाले सबे देखनोंचा बने योड़े विश्वास्मा वास्सधे माँन रहनुबआयो रहने निरंटर मंदिर को दियो बाली रहनुबआयो. अब याने रह योड़ा कुरा बुजना एक दम जरूरी चा. तो बेला को समाज मा संटान नहुन बहने कोनी ब्यक्तिक दुख्ह मात्र थियेना येसलाइ तेवडा तूलो कलंका नहीं थियो. अगा को रित्तो काखलेने वहाको पहीचान को सबही बंदा खुड मान थियो मोथी दाले ता आपनो बागले चुप्चाप सुईकार गरनू बाए को तियो तर समाजले वहाला यो कलंको को बारी निरन्तर बोखाए रहे को तियो तब आज बगे ले तव आगे ले चुप चाप सुझकार गरन बाए को तियो, तब समाज ले वहाल यो कलंको को बारी निरन्तर बोकाई रहे को तियो. इस तो अबस्तामा योड़ा गंबीर प्रष्न उभ्जिन्चा, ज़सले हमी सब़ेले एक चिन सचना बाद्धे बनाुचा येती देरे निस्वार्त बख्तिले अखिर के दिना सक्षा रख खे दिना सक्षा के साचो समर पनले बगगे मा लेक्ये को कुरा लै बडलना सक्षा यो प्रष्नले अब फम्रो कताले एवटा नया तब आप बवाँगा नहीं तब आप बवागा नहीं तब वागा वो प्रजाँ तब वागा तब वागा तब वागा तब वागा तब वागा तब वागा तब वागा तब वागा तब वागा तब वागा तब वागा तब वागा तब वागा तब वागा तब वागा तब वा यो ज़स्को कल्पना मात्रगर्दा पने आंग्स्शीरिंग हूंचा अब एक चिन यो कुरा ले मननगरूं बाईडबाटर हेर्दा कस्तो निस्टूर मजाग जस्तो लाख्षाइ न तरस समाच को नजर मा ती चादिन ले तूलो उखल्पूषल ले दियो ती च्छादिन को मात्रिट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्� बर वहा ज़न प्लो अद्द्यात्मिक सक्ति का साथ मंदिर मा फर्किन वहायो. अब वहा के वल दीए बालना रद्दूप सलकाउना मात्रते आए और वहाता आमा गाहेल को सक्चात अद्द्यात्मिक माध्ध्यम बन बहायो. देवी वहाको सरीर मा प्रवेस करना थालनु वहाको दुखी, भीदामी रप पीडित मानी सरो सांथवना कोजदे वहाको आवना थाले, वहाले आपनो त्यो अपार सोकलाई अरुको पीडा कोम गरने सक्तिमा बडलनु वहाको. ಈ ಈ ಈ ಈ ಈ ಈ ಈ ಈ ಈ ಈ ಈ ಈ ಈ ಈ ಈ ಈ ಈ ಈ ಈ ಈ ಈ ಈ ಈ ಈ ಈ ಈ ಈ ಈ ಈ ಈ ಈ ಈ ಈ ಈ ಈ ಈ ಈ ಈ ಈ ಈ ಈ ಈ ಈ ಈ ಈ ಈ ಈ ಈ ಈ ಈ ಈ ಈ ಈ ಈ ಈ ಈ ಈ ಈ ಈ ಈ ಈ ಈ ಈ ಈ ಈ ಈ ಈ ಈ ಈ ಈ ಈ ಈ ಈ ಈ रित्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त् बखदि को यो रहस्यमः संगम ले आजा हमी सबेला योटा ग़ेरो प्रष्ना चोले रजान साथ. अकिर मनिस को अस्थिट्ट्टलग साथ बआजाने कुराची की रई चाता.

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