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Moti_Daik_Vidroh_aur_Chhah_Dinak_Matritva.m4a

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Part 7 · VIDEHA MITHILA MAITHILI DISCUSSION CRITICISM SERIES PART 7
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  1. 0:00–0:04कल्व्दना करू जे गमक सबविर्सा नि स्वार्थ सेविका आहाची
  2. 0:04–0:08माने भोर्सालका साजदरी बिना कुनु स्वार्थक
  3. 0:08–0:11आहा एक ता आहान देविक पूजा करे ची
  4. 0:11–0:16जे कर विषेमे कहल जायते जो कख्रो खाली हात नहीं गूरवाएच्छा
  5. 0:16–0:17आ, बलकुल
  6. 0:17–0:22एही तरहक आस्ता गाँउ गर में आम बाता एच.
  7. 0:22–0:23एक दम.
  8. 0:23–0:26मुदा ब देखूँ जकन आहा अपना दिस देखाएच ती,
  9. 0:26–0:29तो पुरा गाँम में केवल आहक अपन कोईं खाली आच.
  10. 0:29–0:31बापरे.
  11. 0:31–0:34एत बड़, मने एकर जे पीडा आच,
  12. 0:34–0:35उग कल्पना से बहार आच.
  13. 0:35–1:05ता आई और आई और आई और आई और आई और आई और आई और आई और आई और आई और आई और आई और आई और आई और आई और आई और आई और आई और आई और आई और आई और आई और आई और आई और आई और आई और आई और आई और आई और आई और आई और आ�
  14. 1:05–1:09गजजंद्र ताकुरक लिखल कता मुती दाई पर आदारीताएज
  15. 1:09–1:12जे गजंद्र ताकुरक समगर सा लेल गेलाएज
  16. 1:12–1:18आज संगी संग उ हमरा सब ला एही कताक स्रोट समगरीक रूप में
  17. 1:18–1:20किछ आमुरता लोक कलाश्यलिक चित्र सो हो आएज
  18. 1:20–1:28अही चित्रक विषे में आगु बात करव, उसब एही कत्ख मनोवे ग्यानी गाराई के मने दिश्य माद्यम से देखा वताएच.
  19. 1:28–1:31इचर्चा के वल एवडा कत्ख वचन नाई आएच.
  20. 1:31–1:40इबूजबक प्र्यास आईज जगखन अटूट आस्ता आहा समाजक क्रूद तनक भीच तक्राव हुई ताएज तक्कि परिणाम निकलाई ताएज
  21. 1:40–1:43आउ एही पर विस्तार सचर्चा कराई ची
  22. 1:43–1:51सबसा अकर्षक बात एएज, जे एग कता माना मनक औही अंदकार मैं कोना के उजागर कराए ताएज
  23. 1:51–1:56जताए अस्ता आहक समाजिक याठार्तक भीच सीथा संगर्ष होईताएज
  24. 1:56–2:02सही. جखन कता शुरू होई ताएज, तक केंद्रवे मित्लाक एक ता चोट सन उजैनी गामाएज.
  25. 2:02–2:04उजैनी गाम?
  26. 2:04–2:07रही गामा बहुत सा प्रसिद्ध नहीं हैज.
  27. 2:07–2:13मुदा एही गामक एक ता विषे च्थानक बहुत महत्वाएज गयल माएक स्थान.
  28. 2:13–2:15आ, गयल माए.
  29. 2:15–2:20गामक लोकक लेल इसकोईनो सादारन मातेक पिंदी नाएज
  30. 2:20–2:25इक ता नीम गाचक निच्धा वस्तित आजई पर सिंदूर लागलाएज
  31. 2:25–2:30एक दम, लोकक गहर आस्ताएज जे माए गेल बहुत देयालू चेत
  32. 2:30–2:33उक रो खाली हात नहीं गूरावेच
  33. 2:33–2:38अगरा सुखाएब आहा साजदारी लोका गरगर पहुचाएब यहुनकर काछनी
  34. 2:38–2:43किन्तु हुनक आत्मा बुजलिये अगाईल मायाक सेवा में लगल दहेताएच
  35. 2:43–2:45अभी जाती ककता अत्यान्त सादारन महला चैत
  36. 2:45–2:46भिल्कुल
  37. 2:47–2:49दिन बर नदी गाट पर कप्रा कचाब
  38. 2:49–2:51अक्रा सुखाएब
  39. 2:51–2:53आहा साज्दारी लोका गर-गर पहुचाएब
  40. 2:53–2:55इहुंकर काट-चनी
  41. 2:55–2:57किन्तू हूनक आत्मा
  42. 2:57–2:58बुजलिये
  43. 2:58–3:01अगा गामाक लोग उनका बख्तिन कहेताएच
  44. 3:01–3:04इप पद्वी उनका लेल कोनो राज सिनहासन सा पान नाएच
  45. 3:04–3:07अच्छा अब दिखू, हम रादा इएक ता एक तर्फा समवाद जकर लगाएच
  46. 3:07–3:11इक तर्फा समवाद, मने जदे एक गोटे आपन सब किच देर रहाएच
  47. 3:11–3:14इप पद्वी हुनका लेल कोनो राज सिनहासन सा पान नाएच
  48. 3:14–3:20अचा, अब दिखु, हम राद इएक ता एक तर्फा समवाद जकर लगाई ताएच
  49. 3:20–3:22एक तर्फा समवाद, मने...
  50. 3:22–3:28मैंई जते एक गोटे आपन सब किछ दैर हलाएच, मुदः प्रती प्ल में किछ न नाी मागी रहलेच.
  51. 3:28–3:30मोटी दै बस सेवा के रहल चेत.
  52. 3:30–3:31सही कहलावा हा.
  53. 3:31–3:35एही में क्त विरोदा वासएच, जे बडा गही रहीच.
  54. 3:35–3:36काह विरोदा वासेच?
  55. 3:36–3:41दिखु, एक दिसे उ देवी च्यत, जे खक्रो खाली हातने गुरवाई च्यत.
  56. 3:41–3:48आहा दो सर्दिस उनक सब सा पैग भख्तिन माने मोती दाए, उनक आपन कोईं खाली आएच.
  57. 3:48–3:52बाप्रे, यी तो सच मे बडा पैग भिरोदा ब्रोदा ब्हासेच.
  58. 3:52–4:22आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ�
  59. 4:22–4:26तो इसे अगर बवाज्मय ज़ाईच देखाउल गेलाचचाई
  60. 4:26–4:28जता सब रेखा आबिक मिली जाईचचे
  61. 4:28–4:32ता की हम्रा सब के वानी लेवा चाही
  62. 4:32–4:36जे उही गोल प्वाज्मय च्थान पर सब समान च्छेत
  63. 4:36–4:39मैंने गवाग लोग उनका बख्तिन कही ताएच
  64. 4:39–4:41ता इी समान्ता भेल ना?
  65. 4:41–4:41नाई.
  66. 4:41–4:42औ,
  67. 4:42–4:44इी समान्ता ता के बल उप्री भेल.
  68. 4:44–4:47जाउ हुनका भक्तिन के पद्वी भेटल आएज,
  69. 4:47–4:50ता फिर हुनक अपन वेक्तिगत पीरा के प्रती समाज,
  70. 4:50–4:52इत देक उदासीन की अएग आएज?
  71. 4:52–4:54सही बात आएज.
  72. 4:54–4:59समाज उदासीन आएज, किन तु कताजगन आगु बड़ेताएज,
  73. 4:59–5:02ता इई उदासीन ता क्रूर्ता में बदलीजाएज.
  74. 5:02–5:07मोटिदाएग जीवन के ईमाझ दुख, कोना समाजग के क्रूर सारवजनिक तमाशा बनीजाएज,
  75. 5:07–5:10उदिखाए बड़ाज़ूरी आएज.
  76. 5:10–5:14उही गटना के बात कहरा हैं चिना आहां संजाक समयवला
  77. 5:14–5:17आहा आहां, एक दिन संजाक समयवला
  78. 5:17–5:20मोटी दाई आपन आगना में गुइता पती रहाल चली
  79. 5:20–5:24हुना कात गोबर ससनाल चल, आम्माता निचन चल
  80. 5:24–5:26उता आपन काज में प�रा मगन चली?
  81. 5:26–5:27एक दम
  82. 5:27–5:32तकने आहिर तोलक महिला सब आपन मलजल लएक उते सगुजारली
  83. 5:32–5:36आहा उ महिला सब मोती डाई के देख का रुकी गेली
  84. 5:36–5:42आहा उस सब की भाजली उसुनी का कक्रू रुन थार बाजली
  85. 5:42–5:45उ भाजली जे आपन मलजल के जल्दी आगु बभाजली
  86. 5:45–6:15अगर आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ�
  87. 6:15–6:19समाज कोना कक्रो वेक्तिक त्रासीदी के एक ता सरवजनिक स्राप में बदली दाः.
  88. 6:19–6:22आईच, यी मात्र बच्चा नहीं हवक दुख नहीं आईच?
  89. 6:22–6:23बलक्ल नहीं आईच.
  90. 6:23–6:26यी समाज सब भहिष्क्रित काल जब आईच पीडा आईच?
  91. 6:26–6:31अगर वजन बडा बहरी हूए तैज
  92. 6:31–6:37समाज आपन विवस्ता के बनाईंड रक्वक लेल किच्छु मापदंद तैज
  93. 6:37–6:41आहा मात्रत्व उही मेसा एक ता अनीवार्य मापदंद आईज
  94. 6:41–6:45माने जा बच्चा नीएज ता आहा समाजिक रुपस अशुब ची
  95. 6:45–6:53अगा बीच बात पर कलंकि खेबाक भीचक्के पाई गन्तरेज उकता उक्रा बड़ा स्पष्ट करे देज.
  96. 6:53–6:58मोती दाई मात्रा एक तस्त्री नाई चली अबाज मोती दाई बने गिली.
  97. 6:58–6:59ये भ्याना काईज.
  98. 6:59–7:04जा मोती दाई पुरा गाँमक मलीन कप्रा कची का साफ कराई चलाईं
  99. 7:04–7:10ता अपन जीवन पर लगल इस समाजिक कलंक साफ करबक कोन अपाई तो हुंका नाई सुजाई चलाईं
  100. 7:10–7:12औही राती मोती दाई के नीन नाई भेलाईं
  101. 7:12–7:17अगा उही अजी अजी अजी अजी दखाली दखार देलगे लएएज
  102. 7:17–7:24इजी चित्र मोथी दाएक भित्रक शुन्यता उनक खाली पन अजी अजी अजी अजी अजी अजी अजी अजी दखार अगग प्रती केच
  103. 7:24–7:54अदर द़ाज बादाज याज नहीं नहीं नहीं नहीं नहीं नहीं नहीं नहीं नहीं नहीं नहीं नहीं नहीं नहीं नहीं नहीं नहीं नहीं नहीं नहीं नहीं नहीं नहीं नहीं नहीं नहीं नहीं नहीं नहीं नहीं नहीं नहीं नहीं नहीं नहीं नहीं नहीं नहीं नहीं नह
  104. 7:54–7:58समाजी कप्मानक बाद मुतिदाएक भीटर जे तूटल
  105. 7:58–8:28उ हुँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँ
  106. 8:28–8:30पटष्छली तब थब कुदारी चलाई लागली
  107. 8:30–8:34आप, इकर तुलना हम एक ता आईखा बच्चासा करब
  108. 8:34–8:37जे अपन माएक साडी पक्डी कडिद करे देज
  109. 8:37–8:40जे हमरा जवाब दियो, नहीं ता हम नहीं चोडब
  110. 8:41–8:42इए अस्तिया कमी नहीं आजज
  111. 8:42–8:45उ य आस्तिया च्रम परिक्षायज
  112. 8:45–8:50गाव के लोग जकन य देखलाग, तो उ सब ते एक रा पागल पन भुजायलें
  113. 8:50–8:53सब कहे लागला जे बख्तिन पागल बहागे लाएज
  114. 8:53–8:56तक कि उ शच में पागल पन चल
  115. 8:56–9:03नाई नाई इी आसल मे बख्तिन आत्दि, आम्तिम भाशाचल, माने, दीवोश्ट्श्ट्श्वाईन लंगवेज,
  116. 9:03–9:33एक ता सच्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्
  117. 9:33–9:43यह दिखावे ताएज जगखन दिवोषन विद्रून माई बडल जाएज, तो उ कतिक शक्तिषाली होए ताएज
  118. 9:43–9:51तम वोटी ताएग यह उग्र रुद आहा जिद उएक ता आहा अप्रत्याशित परिणाम आना तेज, जे हुंकर जीवनक आर्थ बडली दे थेज
  119. 9:51–9:54इसब सब महत्वपुल मोड़ कताक
  120. 9:54–9:57कताक इबागस पष्ट करे देज
  121. 9:57–9:59उही विद्रोह आहा पिंटी को दावा के बाद
  122. 9:59–10:02उनकर चादिनक लेल मात्रित्वक सुख बेटा लैन
  123. 10:02–10:04चादिनक लेल, बस
  124. 10:04–10:06रव, बच्चा नहीं बचल
  125. 10:06–10:08चिन तो उही चादिनक मात्रित्व,
  126. 10:08–10:12उही बाज लेबक कलंके सदा लिल दू दिलक
  127. 10:12–10:14आव उ बाज मोती दाए नेचली
  128. 10:14–10:16बलकी एक ता हमा चली
  129. 10:16–10:18जकर बच्चा आव इदुनिया में चल
  130. 10:18–10:21गामक लेल यी अन्तर चोट भासका येज
  131. 10:21–10:24मुद वोती दाएक लेल इद्धरती अहा काशक अन्तर चल
  132. 10:24–10:29तत्तहु, एकर की आर्थभेल, माने की मात्र चोदिना खूशी,
  133. 10:29–10:33उही भ्यानक संताप आहा बच्चा गुमेबक पीडा सबाई चल चल.
  134. 10:33–10:36इता आहा लागे थेज, जि भगवान एक ता क्रूर मजाग कालेन.
  135. 10:36–10:40इक ता बडा महत्र पून प्रष्नत ठाद कर अईताएच.
  136. 10:40–10:43एकर उतर सामाजेक द्रिष्टी कोन में नुखाय लेज.
  137. 10:43–10:46कोई नो, बच्चा गुमाएप्ता त्रास्दी आईज?
  138. 10:46–10:50आआ, समाजक नजर्ये में बच्चा गुमेना एक त्रास्दी आईज.
  139. 10:50–10:53मुदा, बाश्चवद से मुक्ती पाविलेब,
  140. 10:53–11:23अगर बाद मोटीदाई प्र साँज़ाई बहुत लोटली अगर बाद मोटीदाई प्र साँज़ाई प्र लोटली अगर बाद मोटीदाई प्र साँज़ाई प्र लोटली अगर बाद मोटीदाई प्र साँज़ाई प्र लोटली अगर बाद मोटीदाई प्र साँज़ाई ब
  141. 11:23–11:27अब कता में एक परम अद्यात्मिक शान्ति अबईताएच,
  142. 11:27–11:30अब हुँँका पर गहिल मायाक सवारी अबएच्छनी,
  143. 11:30–11:32मने ट्रान्स अबएच्छनी.
  144. 11:32–11:37अदेवीसा साख्शात्कार कलेताएच, आहागमक दूखी लोका कष्ट दूर कराएचे,
  145. 11:37–11:42जे लोग उनक प्रचान्सा बहागेच्छल, उही लोग अब उनक चरन में गिराएच.
  146. 11:42–11:46उनक प्रचान्सा बागेच्छल उही लोक अब उनक चरन मे गिरेटाएच
  147. 11:46–11:48इद देख है बड़ा जरूरी आएच
  148. 11:49–11:53स्रोथ समागरेक अन्तिम चित्र एही विजैके रेख हंकित करेटाएच
  149. 11:54–11:58पहने जेमित्या अकार सब खंडिच्छल उआबो सब सन्तुलेटाएच
  150. 11:58–12:04कैनवस पर उजर आहा प्या रंगक प्रकाष च्याज, जि शान्ती आहा स्विकार उक्तिक प्रतीक आएच.
  151. 12:04–12:08कमाल आएच, पूरा चर्चक मुख्य बिन्दू यही आएच,
  152. 12:08–12:14जि कोनो एक टक छनिक खुशी चार्दिनक मत्रित्व पूरा जीवनक मुल्ले बडली देताएचे.
  153. 12:14–12:18उ चार्दिनक पीडा से बहरल खुशी उ ही अप्मानक जीवन सं,
  154. 12:18–12:23हदार गुना निक चल, कारन उ अक्रोसं हुनक अपन पहचान गुरा कदेलक.
  155. 12:23–12:26आज आज अस्तक एक दोसर आयाम से हो प्रस्तुद भेल.
  156. 12:27–12:29आस्ता जखन चुप रहेताएच,
  157. 12:29–12:30उसहन शीलता आएच,
  158. 12:31–12:33मुगर जखन अ अदिकार लिल कुदाए उठही ताएच,
  159. 12:34–12:35तो ख्रान्ती बनी जाएच.
  160. 12:35–12:36एक दम!
  161. 12:37–12:39चर्चा के समाप्त करवा से पहले हम,
  162. 12:39–12:42श्रोता लोकाने लेल एक ता गधा गधा प्रष्न चोडब
  163. 12:42–12:46इग कता दिखावाएत आएज के समाज कोईना कध्रू जीवनक सार्थक्ता के
  164. 12:46–12:50किचु विषेश माप दंद, जना मात्रिट्व सत्त्वलएत आएईच
  165. 12:50–12:52सही बाताएच
  166. 12:52–12:55आई कल अख समें में समाज आहा आहा की तमगा
  167. 12:55–12:57माने की लेबल्स लोग पर लगावाई ताएच
  168. 12:57–13:00जाई समुक तहेबाखले लोग के आहा
  169. 13:00–13:02चरम सीमादारी जीवालेल मजबूर हो बे पडएच चे
  170. 13:02–13:04इस सच में सोचे वला बाताएच
  171. 13:04–13:07समाज आयो कख्रो कख्रो बड़ा कख्र भीद्वाँ कराईताएच
  172. 13:07–13:11अपन लक्ष, रूप रंग, वऽ सफल तक माबदन्द कादार पर
  173. 13:11–13:12भिल्कुल
  174. 13:12–13:14तएही विचारो तेजक प्रष्नक की सागे
  175. 13:14–13:17आईके एही गहन अद्धन में बस इतबे
  176. 13:17–13:19दिहान से सुन्बा के लेल बहुत-बहुत द्धिन्नेवाद

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कल्व्दना करू जे गमक सबविर्सा नि स्वार्थ सेविका आहाची माने भोर्सालका साजदरी बिना कुनु स्वार्थक आहा एक ता आहान देविक पूजा करे ची जे कर विषेमे कहल जायते जो कख्रो खाली हात नहीं गूरवाएच्छा आ, बलकुल एही तरहक आस्ता गाँउ गर में आम बाता एच. एक दम. मुदा ब देखूँ जकन आहा अपना दिस देखाएच ती, तो पुरा गाँम में केवल आहक अपन कोईं खाली आच. बापरे. एत बड़, मने एकर जे पीडा आच, उग कल्पना से बहार आच. ता आई और आई और आई और आई और आई और आई और आई और आई और आई और आई और आई और आई और आई और आई और आई और आई और आई और आई और आई और आई और आई और आई और आई और आई और आई और आई और आई और आई और आई और आई और आई और आ� गजजंद्र ताकुरक लिखल कता मुती दाई पर आदारीताएज जे गजंद्र ताकुरक समगर सा लेल गेलाएज आज संगी संग उ हमरा सब ला एही कताक स्रोट समगरीक रूप में किछ आमुरता लोक कलाश्यलिक चित्र सो हो आएज अही चित्रक विषे में आगु बात करव, उसब एही कत्ख मनोवे ग्यानी गाराई के मने दिश्य माद्यम से देखा वताएच. इचर्चा के वल एवडा कत्ख वचन नाई आएच. इबूजबक प्र्यास आईज जगखन अटूट आस्ता आहा समाजक क्रूद तनक भीच तक्राव हुई ताएज तक्कि परिणाम निकलाई ताएज आउ एही पर विस्तार सचर्चा कराई ची सबसा अकर्षक बात एएज, जे एग कता माना मनक औही अंदकार मैं कोना के उजागर कराए ताएज जताए अस्ता आहक समाजिक याठार्तक भीच सीथा संगर्ष होईताएज सही. جखन कता शुरू होई ताएज, तक केंद्रवे मित्लाक एक ता चोट सन उजैनी गामाएज. उजैनी गाम? रही गामा बहुत सा प्रसिद्ध नहीं हैज. मुदा एही गामक एक ता विषे च्थानक बहुत महत्वाएज गयल माएक स्थान. आ, गयल माए. गामक लोकक लेल इसकोईनो सादारन मातेक पिंदी नाएज इक ता नीम गाचक निच्धा वस्तित आजई पर सिंदूर लागलाएज एक दम, लोकक गहर आस्ताएज जे माए गेल बहुत देयालू चेत उक रो खाली हात नहीं गूरावेच अगरा सुखाएब आहा साजदारी लोका गरगर पहुचाएब यहुनकर काछनी किन्तु हुनक आत्मा बुजलिये अगाईल मायाक सेवा में लगल दहेताएच अभी जाती ककता अत्यान्त सादारन महला चैत भिल्कुल दिन बर नदी गाट पर कप्रा कचाब अक्रा सुखाएब आहा साज्दारी लोका गर-गर पहुचाएब इहुंकर काट-चनी किन्तू हूनक आत्मा बुजलिये अगा गामाक लोग उनका बख्तिन कहेताएच इप पद्वी उनका लेल कोनो राज सिनहासन सा पान नाएच अच्छा अब दिखू, हम रादा इएक ता एक तर्फा समवाद जकर लगाएच इक तर्फा समवाद, मने जदे एक गोटे आपन सब किच देर रहाएच इप पद्वी हुनका लेल कोनो राज सिनहासन सा पान नाएच अचा, अब दिखु, हम राद इएक ता एक तर्फा समवाद जकर लगाई ताएच एक तर्फा समवाद, मने... मैंई जते एक गोटे आपन सब किछ दैर हलाएच, मुदः प्रती प्ल में किछ न नाी मागी रहलेच. मोटी दै बस सेवा के रहल चेत. सही कहलावा हा. एही में क्त विरोदा वासएच, जे बडा गही रहीच. काह विरोदा वासेच? दिखु, एक दिसे उ देवी च्यत, जे खक्रो खाली हातने गुरवाई च्यत. आहा दो सर्दिस उनक सब सा पैग भख्तिन माने मोती दाए, उनक आपन कोईं खाली आएच. बाप्रे, यी तो सच मे बडा पैग भिरोदा ब्रोदा ब्हासेच. आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� तो इसे अगर बवाज्मय ज़ाईच देखाउल गेलाचचाई जता सब रेखा आबिक मिली जाईचचे ता की हम्रा सब के वानी लेवा चाही जे उही गोल प्वाज्मय च्थान पर सब समान च्छेत मैंने गवाग लोग उनका बख्तिन कही ताएच ता इी समान्ता भेल ना? नाई. औ, इी समान्ता ता के बल उप्री भेल. जाउ हुनका भक्तिन के पद्वी भेटल आएज, ता फिर हुनक अपन वेक्तिगत पीरा के प्रती समाज, इत देक उदासीन की अएग आएज? सही बात आएज. समाज उदासीन आएज, किन तु कताजगन आगु बड़ेताएज, ता इई उदासीन ता क्रूर्ता में बदलीजाएज. मोटिदाएग जीवन के ईमाझ दुख, कोना समाजग के क्रूर सारवजनिक तमाशा बनीजाएज, उदिखाए बड़ाज़ूरी आएज. उही गटना के बात कहरा हैं चिना आहां संजाक समयवला आहा आहां, एक दिन संजाक समयवला मोटी दाई आपन आगना में गुइता पती रहाल चली हुना कात गोबर ससनाल चल, आम्माता निचन चल उता आपन काज में प�रा मगन चली? एक दम तकने आहिर तोलक महिला सब आपन मलजल लएक उते सगुजारली आहा उ महिला सब मोती डाई के देख का रुकी गेली आहा उस सब की भाजली उसुनी का कक्रू रुन थार बाजली उ भाजली जे आपन मलजल के जल्दी आगु बभाजली अगर आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� समाज कोना कक्रो वेक्तिक त्रासीदी के एक ता सरवजनिक स्राप में बदली दाः. आईच, यी मात्र बच्चा नहीं हवक दुख नहीं आईच? बलक्ल नहीं आईच. यी समाज सब भहिष्क्रित काल जब आईच पीडा आईच? अगर वजन बडा बहरी हूए तैज समाज आपन विवस्ता के बनाईंड रक्वक लेल किच्छु मापदंद तैज आहा मात्रत्व उही मेसा एक ता अनीवार्य मापदंद आईज माने जा बच्चा नीएज ता आहा समाजिक रुपस अशुब ची अगा बीच बात पर कलंकि खेबाक भीचक्के पाई गन्तरेज उकता उक्रा बड़ा स्पष्ट करे देज. मोती दाई मात्रा एक तस्त्री नाई चली अबाज मोती दाई बने गिली. ये भ्याना काईज. जा मोती दाई पुरा गाँमक मलीन कप्रा कची का साफ कराई चलाईं ता अपन जीवन पर लगल इस समाजिक कलंक साफ करबक कोन अपाई तो हुंका नाई सुजाई चलाईं औही राती मोती दाई के नीन नाई भेलाईं अगा उही अजी अजी अजी अजी दखाली दखार देलगे लएएज इजी चित्र मोथी दाएक भित्रक शुन्यता उनक खाली पन अजी अजी अजी अजी अजी अजी अजी अजी दखार अगग प्रती केच अदर द़ाज बादाज याज नहीं नहीं नहीं नहीं नहीं नहीं नहीं नहीं नहीं नहीं नहीं नहीं नहीं नहीं नहीं नहीं नहीं नहीं नहीं नहीं नहीं नहीं नहीं नहीं नहीं नहीं नहीं नहीं नहीं नहीं नहीं नहीं नहीं नहीं नहीं नहीं नहीं नहीं नहीं नह समाजी कप्मानक बाद मुतिदाएक भीटर जे तूटल उ हुँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँ पटष्छली तब थब कुदारी चलाई लागली आप, इकर तुलना हम एक ता आईखा बच्चासा करब जे अपन माएक साडी पक्डी कडिद करे देज जे हमरा जवाब दियो, नहीं ता हम नहीं चोडब इए अस्तिया कमी नहीं आजज उ य आस्तिया च्रम परिक्षायज गाव के लोग जकन य देखलाग, तो उ सब ते एक रा पागल पन भुजायलें सब कहे लागला जे बख्तिन पागल बहागे लाएज तक कि उ शच में पागल पन चल नाई नाई इी आसल मे बख्तिन आत्दि, आम्तिम भाशाचल, माने, दीवोश्ट्श्ट्श्वाईन लंगवेज, एक ता सच्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च् यह दिखावे ताएज जगखन दिवोषन विद्रून माई बडल जाएज, तो उ कतिक शक्तिषाली होए ताएज तम वोटी ताएग यह उग्र रुद आहा जिद उएक ता आहा अप्रत्याशित परिणाम आना तेज, जे हुंकर जीवनक आर्थ बडली दे थेज इसब सब महत्वपुल मोड़ कताक कताक इबागस पष्ट करे देज उही विद्रोह आहा पिंटी को दावा के बाद उनकर चादिनक लेल मात्रित्वक सुख बेटा लैन चादिनक लेल, बस रव, बच्चा नहीं बचल चिन तो उही चादिनक मात्रित्व, उही बाज लेबक कलंके सदा लिल दू दिलक आव उ बाज मोती दाए नेचली बलकी एक ता हमा चली जकर बच्चा आव इदुनिया में चल गामक लेल यी अन्तर चोट भासका येज मुद वोती दाएक लेल इद्धरती अहा काशक अन्तर चल तत्तहु, एकर की आर्थभेल, माने की मात्र चोदिना खूशी, उही भ्यानक संताप आहा बच्चा गुमेबक पीडा सबाई चल चल. इता आहा लागे थेज, जि भगवान एक ता क्रूर मजाग कालेन. इक ता बडा महत्र पून प्रष्नत ठाद कर अईताएच. एकर उतर सामाजेक द्रिष्टी कोन में नुखाय लेज. कोई नो, बच्चा गुमाएप्ता त्रास्दी आईज? आआ, समाजक नजर्ये में बच्चा गुमेना एक त्रास्दी आईज. मुदा, बाश्चवद से मुक्ती पाविलेब, अगर बाद मोटीदाई प्र साँज़ाई बहुत लोटली अगर बाद मोटीदाई प्र साँज़ाई प्र लोटली अगर बाद मोटीदाई प्र साँज़ाई प्र लोटली अगर बाद मोटीदाई प्र साँज़ाई प्र लोटली अगर बाद मोटीदाई प्र साँज़ाई ब अब कता में एक परम अद्यात्मिक शान्ति अबईताएच, अब हुँँका पर गहिल मायाक सवारी अबएच्छनी, मने ट्रान्स अबएच्छनी. अदेवीसा साख्शात्कार कलेताएच, आहागमक दूखी लोका कष्ट दूर कराएचे, जे लोग उनक प्रचान्सा बहागेच्छल, उही लोग अब उनक चरन में गिराएच. उनक प्रचान्सा बागेच्छल उही लोक अब उनक चरन मे गिरेटाएच इद देख है बड़ा जरूरी आएच स्रोथ समागरेक अन्तिम चित्र एही विजैके रेख हंकित करेटाएच पहने जेमित्या अकार सब खंडिच्छल उआबो सब सन्तुलेटाएच कैनवस पर उजर आहा प्या रंगक प्रकाष च्याज, जि शान्ती आहा स्विकार उक्तिक प्रतीक आएच. कमाल आएच, पूरा चर्चक मुख्य बिन्दू यही आएच, जि कोनो एक टक छनिक खुशी चार्दिनक मत्रित्व पूरा जीवनक मुल्ले बडली देताएचे. उ चार्दिनक पीडा से बहरल खुशी उ ही अप्मानक जीवन सं, हदार गुना निक चल, कारन उ अक्रोसं हुनक अपन पहचान गुरा कदेलक. आज आज अस्तक एक दोसर आयाम से हो प्रस्तुद भेल. आस्ता जखन चुप रहेताएच, उसहन शीलता आएच, मुगर जखन अ अदिकार लिल कुदाए उठही ताएच, तो ख्रान्ती बनी जाएच. एक दम! चर्चा के समाप्त करवा से पहले हम, श्रोता लोकाने लेल एक ता गधा गधा प्रष्न चोडब इग कता दिखावाएत आएज के समाज कोईना कध्रू जीवनक सार्थक्ता के किचु विषेश माप दंद, जना मात्रिट्व सत्त्वलएत आएईच सही बाताएच आई कल अख समें में समाज आहा आहा की तमगा माने की लेबल्स लोग पर लगावाई ताएच जाई समुक तहेबाखले लोग के आहा चरम सीमादारी जीवालेल मजबूर हो बे पडएच चे इस सच में सोचे वला बाताएच समाज आयो कख्रो कख्रो बड़ा कख्र भीद्वाँ कराईताएच अपन लक्ष, रूप रंग, वऽ सफल तक माबदन्द कादार पर भिल्कुल तएही विचारो तेजक प्रष्नक की सागे आईके एही गहन अद्धन में बस इतबे दिहान से सुन्बा के लेल बहुत-बहुत द्धिन्नेवाद

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