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ਅੰਗਰੇਜ਼ੀ-ਮੈਥਿਲੀ_ਸ਼ਬਦਕੋਸ਼.mp4
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- 0:00–0:05सच्ष्रेकाल, आज्जदे इस खास विष्लेष्ण विच आपा एक बहुती दिल्चस्प सफर ते जान्वाले है.
- 0:05–0:12जरा सुच्छो, प्राषीन समेद्या शब्दावल्या तो लैके मैथ्ली वर्गी पुरातन पाषाली,
- 0:12–0:17अगे वद्दन तो पहला इक नजर मारदे आं के अज़ापा की की की चर्चा करन वालें?
- 0:17–0:22सब तो पहला गाल करांगे कोश कारी, यानी दिक्षनरी बनाँन दी कलाबारे,
- 0:22–0:25फिर संस्क्रिछ शब्द कोशान्द या दूंगी आंज़ाँ,
- 0:25–0:30अगे वदन तो पहला इक नजर मार दें के आजजा पां की की चर्चा करन वालें?
- 0:30–0:35सब तो पहला गाल करांगे कोशकारी यहनी दिक्षनरी बनाँन्दी कलाबारे
- 0:35–0:38फिर संस्क्रिच शब्द कोशान यह दूंगी आज़ा
- 0:38–0:43अदून्खिशब्यता विछ शब्द्खोश बनाँन्दि कला ने एक बोछत लम्मा पैंडा तैखीता है.
- 0:44–0:49जेकर इतिहास दे पन्ने फरोलिये ता एह सफर तेइसो इसापूर्व विछ बनिया
- 0:49–0:50कि में हुंदै.
- 0:50–0:53ता आओ, सब तो पहला शुर्वाद कर दे है,
- 0:53–0:56अपने पहले पाग तो कोशकारी दी कला.
- 0:56–0:59मनुखी सब्यता विछ शब्द कोश बनाँन दी कला
- 0:59–1:02ने एक बहुत लम्मा पैंडा तैखीता है.
- 1:02–1:04जेकर इतहास दे पन्ने फरोलिये,
- 1:04–1:11ता एह सपर तीइसो इसापूर्व वेच बनीया सुमेर्यन अकाद्यन दोप हशाई सब्द सुच्या तो शुच्या हो के,
- 1:11–1:16सत्रान सो पच्वन्जाविच सम्यु जोंसन्दे लिक्ही मश्हूर अंग्रेजी दिक्षनरी तक पहुच्टा है.
- 1:16–1:22पर एक गल ते अन्देन वाली है, जिस अंग्रेजी दिक्षनरीन। आज्जबा सरे जान्देया,
- 1:22–1:28उह विष्वितिहास विछ काफी नवी है, क्योंकी जदो अंग्रेजी विछ शब्द कोष बनने शुरू ही होए सन,
- 1:28–1:32योदु तक दून्या दे बाखी हिस्या विच यहे कम सदिया तो चल्दा आरे हासी.
- 1:32–1:35बडी हरान्नी दिगल है कि अंग्रेजी पाशा वेच
- 1:36–1:39लेक्सिको ग्राफी यानी कोशकारी शब्द दी पहली वार वर्थो
- 1:40–1:42सोला सो अस्सी इस्वी विज जाके हूए.
- 1:42–1:48इस शब्द ने दर सल इस पूरी प्रक्रियान। इक विज्यान अते कलादा दर जादिता
- 1:48–1:52इस विच ए तैकिता गया के पाट्कान्द्या लोडान। किमे समजना है
- 1:52–1:58शब्दान दे अर्ठानु के में तर्टीभ देनिया ते संचार दे गुन्जल्दार नियमानु कि में लागू करना है.
- 1:59–2:04वूना पा चल दे आ दूचे पाग्वल, जिते आ पारत्वल रूख करांगे,
- 2:04–2:09अते संस्क्रित शब्द्खोशान्दिया दूंगिया ज़ान्दी पडचोल करांगे.
- 2:09–2:14प्राचीन पारत्वेज व्याक्रन अते शब्द्खोश बनावन्दे कामदा मुक्मक्सद कीसी.
- 2:14–2:19इस्दा एको एक सब्टो वद्डाउ देश्ची प्राचीन वैदिक साहिदन।
- 2:19–2:20पूरी शुद्टानार सामके रक्ना,
- 2:20–2:25उस दोर वेज ग्यान नू भिल्कुल असल रूप वेज अण वाली आ पीडिया तक पहुचाँना,
- 2:25–2:28इक बेहत पवित्र दे जरूरी फर्ज मने आजान्दासी
- 2:29–2:33अते वेखो प्राचीन गरन्तानू बचाँन्दी इसे दूंगी इच्छाने
- 2:33–2:36किन्ने कमाल दे पाशाई सिद्धान्तानू जनम दिता
- 2:36–2:38वेदेक वाख्कानू उना दे मुल
- 2:38–2:43अदे पिच्छेतर विच वद्डन्त दी लोडने ही पानी निवरगे महान विद्वानन लनु
- 2:43–2:46नमे व्याक्रन् सिद्धान्त बनाँन लेप रेड किता
- 2:46–2:50सथ सो इसा पूरव्दा निगंटु इस दी सब तो पुरानी उदारन है
- 2:50–2:52ए सिल्ष्ला इते ही ने रुक्या
- 2:52–2:55चेमी सदीवेच आमर सिमहादा आमर कोष सामने आया
- 2:55–2:58जिसने कलासिकल संसक्रितनु बुलन्दिया ते पंचा दिता
- 2:58–3:01ए आमर कोष यनना जियादा मकबोल होया
- 3:01–3:03के बादविच इसनु समजहाँन लेही
- 3:03–3:06चाली तो वद किताबा या टीकाना लिख्या गया
- 3:06–3:13इतिहाज देस शान्दार सफर तो बाद, होड़ आपा तीजे पागवेच मेठली पाशा भोलन्वाली
- 3:13–3:17जन संख्यादे एक बड़े ही उलजे होगे रहिस बारे गल कर दे हैं.
- 3:17–3:22चाली मिल्यन यानी के चार करोड एक उई चोटा अक्डा नहीं है.
- 3:22–3:26ये मेठिली पाशा भोलन्वाले असल लोकान दी एक अंदाजन गिनती एए,
- 3:26–3:34पर हैरानी दीगाल एखाल एखाए प्रबाव्शाली आक्डा साडी सरकारी जंगरना दे इतिहासेक अक्ड्यनाल बिल्कल मेल नी क्हन्दा,
- 3:34–3:37उते कहानी कुछ होरी नजराउन दी एखाए.
- 3:37–3:42अँई जर एना इतिहास्सिक अंक्डया वाल त्यान द्यो स्तिति बडी अजीब लग्दी है.
- 3:42–3:48उन्निसो एक ताली तो उन्निसो एक वंजादे विच्कारले दहाके विच्ता जन गरना कर्वाई ही नहीं गई.
- 3:48–3:53अगटे बाकी दहाक्यांविच भी प्रतिषद दे अंक्डे इननी तेजिनाल बदल दे हान,
- 3:53–3:57की येकीन करना अख्चा हो जान्दा है. किते मामूली जही गिराववध है,
- 3:57–4:02अचालक अगले दहाक्यांविच भी या चोवी फीस तीदा बद्डा उचाला जंदा है.
- 4:02–4:07इंना वद्दा जन संख्या संबन्ती रहेस है, जिसने विद्वानानु सोचन ले मजबोर कर दिता.
- 4:08–4:13जिवे के यस रोटविच साफ लिख्या है, जन गरना दे अंक्डे यतार्थवादी नहीं है,
- 4:13–4:19अंक्र्यान दे एसे उल्जेवे कारन पाशा दी असल स्तिती अते बुलार्यान दी सई गिन्ती जानन लेई
- 4:19–4:23माहिरानु सर्फ सरकारी काग्जान ते निरपर रहन दी बजाए
- 4:23–4:28पुगोलिक ट्रैकिंग अते अबादी दे विग्यानिक मोडलान दा सहारा लेना प्या
- 4:28–4:33इस दूंगे रहसनु समजन तो बाड, हुना पाज्टे पाग्वाल वद्देया,
- 4:33–4:35आदू निक्तावाल एक पुल,
- 4:35–4:39यानी के किमे एक पुरातन पाशानु,
- 4:39–4:42आज दे दिजिटल दारनाल जोडया जारे आ है.
- 4:42–4:46साल 2009 विछ नवी दिल्ली दिष्रूती पब्लिकेशन ने
- 4:46–4:50इक बहुत ही खास अंग्रेजी मेठिली दिक्षनरी प्रकाषिद की ती.
- 4:50–4:56इस्दा प्रतीक चिन यिन यांग मच्षी अपने आप फिच बहुत कुछ भ्यान करदा है.
- 4:56–5:06इह स्र्फ एक लोगो नहीं है, सब व्राष्ट अद्हूनिक तकनोलगी दे योग विज्कार बने एक मस्बूद इतिहासिक पूल्डी निशान दे ही करदा है.
- 5:06–5:09जरा इस दिख्षनरी दे विशाल पैमाने बारे सुचो.
- 5:09–5:12एक उई आम किताब नहीं सगो सोला पागा यानी
- 5:12–5:15वौल्यम्स वेछ फैल्ले आए एक महान कारज है.
- 5:15–5:18गजजंदर ताकर अगदे उना दे साथ्यावलों
- 5:18–5:21बडी ही बारी की नाल तियार की ते गय इस शब्द कोष दा मकसद
- 5:21–5:27मैत्टिली पाशानु अन्लाई इजीन, वेब अते आदूनिक अटोमेटिक सिस्तम्स दियोग बनूना है.
- 5:27–5:33सब तो कमाल दिगाल ए है के एस वेच देवनागरी दिन नालल मित्फी लक्षर लिपी दिवर्तो हुई है.
- 5:33–5:36अते बिल्कुल सही उच्छारन यकीनी बनाँन लेई
- 5:36–5:38अंटरनेश्नल फोनेटिक अल्पाबेट
- 5:38–5:41यानी अईपी एडा सहरावी लिया गया है
- 5:41–5:43एवाके एक वड़ी प्राप्ती है
- 5:43–5:45अते होना पा पोझ गय है
- 5:45–5:49अपने आखरी अते सब तो दिल्चस्त पागते
- 5:49–5:51दिजितल दुन्याद अनुवाद
- 5:51–5:55आव वेख दे हा, कि तक्नी की शब्दानु मुल पाशा वेच
- 5:55–5:57किवेट ताल्या जान्दा है.
- 5:57–6:01शब्दान दे पद्दरते एश अनुवाद दा कम किन्नी बारीकी वाला है
- 6:01–6:03एश समजना बहुत दिल्च्सप है.
- 6:03–6:07उन अक्तेव डाटाबेस वर्गे बिल्कुल आदूनेक कम्ठूर संकल्पनूी लेलो
- 6:07–6:10मेठिली विछ इस्दानूवाद कीता गया है
- 6:10–6:12सक्रिये दधान्ष निदी
- 6:12–6:17सुडन विछ किन्ना स्तीख अते बिल्कुल मूल पाशा दी महेक वाला शबद लगता है आच्टाः
- 6:17–6:29इस च्छ मुछ हैरान करन वाला काम है, कि कि में आलगोरिदम या एनलोग कम्टर वरगे बेहत गुईजल्दार तकनीकी शब्दानु तुनि आत्मक तोरते अपनी मात पाशा दे अनुकुल बनाया गया है.
- 6:29–6:34बन्द्विर्त लेई वाहीनी विस्तार वरगे खुब सुरच शब्दिदी स्रिजना की ती गई है.
- 6:34–6:41इस समवेख के पता लग दै के पूरातन पाशानु, सुचना आते तकनीग दे अजो के युगविच किचके लिए न ले,
- 6:41–6:44किन்नी दूंगी मेंनत दे समज्दी लोड हूंदी एं।
- 6:44–6:50ता फिर अंतविच एस सरा विष्लिष्लिष्यन आपनू एक बहुत दूंगे सवालते लेया के कखडा कर दिनदा है
- 6:50–6:55जिमे जिमे साथे दिजित्रल तूल बहुत देजीनाल अगे वद्रहे हैं
- 6:55–7:03अवन वाले आर्टिफिशल अंटलीजन्स दे इस नवे युगविच सादिया स्वदेशी दे प्राचीन पाशामा आपनी होंदनू किवे बचाके रख्चन गीआ,
- 7:03–7:08की अजे हे आदूनिक शब्द्खोश एन्ना पाशामा ले एक नवी जीवन रेखा साभेत होनगे.
- 7:08–7:13प्राचीन सब्यचारा दे पविक्धी तक्नोलिजी देस अधबुत मेल बारे
- 7:13–7:17एह एक अजेहा सवाल है, जिस बारे अपस सबनु ज़ोर सोचना चाईदा है.
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सच्ष्रेकाल, आज्जदे इस खास विष्लेष्ण विच आपा एक बहुती दिल्चस्प सफर ते जान्वाले है. जरा सुच्छो, प्राषीन समेद्या शब्दावल्या तो लैके मैथ्ली वर्गी पुरातन पाषाली, अगे वद्दन तो पहला इक नजर मारदे आं के अज़ापा की की की चर्चा करन वालें? सब तो पहला गाल करांगे कोश कारी, यानी दिक्षनरी बनाँन दी कलाबारे, फिर संस्क्रिछ शब्द कोशान्द या दूंगी आंज़ाँ, अगे वदन तो पहला इक नजर मार दें के आजजा पां की की चर्चा करन वालें? सब तो पहला गाल करांगे कोशकारी यहनी दिक्षनरी बनाँन्दी कलाबारे फिर संस्क्रिच शब्द कोशान यह दूंगी आज़ा अदून्खिशब्यता विछ शब्द्खोश बनाँन्दि कला ने एक बोछत लम्मा पैंडा तैखीता है. जेकर इतिहास दे पन्ने फरोलिये ता एह सफर तेइसो इसापूर्व विछ बनिया कि में हुंदै. ता आओ, सब तो पहला शुर्वाद कर दे है, अपने पहले पाग तो कोशकारी दी कला. मनुखी सब्यता विछ शब्द कोश बनाँन दी कला ने एक बहुत लम्मा पैंडा तैखीता है. जेकर इतहास दे पन्ने फरोलिये, ता एह सपर तीइसो इसापूर्व वेच बनीया सुमेर्यन अकाद्यन दोप हशाई सब्द सुच्या तो शुच्या हो के, सत्रान सो पच्वन्जाविच सम्यु जोंसन्दे लिक्ही मश्हूर अंग्रेजी दिक्षनरी तक पहुच्टा है. पर एक गल ते अन्देन वाली है, जिस अंग्रेजी दिक्षनरीन। आज्जबा सरे जान्देया, उह विष्वितिहास विछ काफी नवी है, क्योंकी जदो अंग्रेजी विछ शब्द कोष बनने शुरू ही होए सन, योदु तक दून्या दे बाखी हिस्या विच यहे कम सदिया तो चल्दा आरे हासी. बडी हरान्नी दिगल है कि अंग्रेजी पाशा वेच लेक्सिको ग्राफी यानी कोशकारी शब्द दी पहली वार वर्थो सोला सो अस्सी इस्वी विज जाके हूए. इस शब्द ने दर सल इस पूरी प्रक्रियान। इक विज्यान अते कलादा दर जादिता इस विच ए तैकिता गया के पाट्कान्द्या लोडान। किमे समजना है शब्दान दे अर्ठानु के में तर्टीभ देनिया ते संचार दे गुन्जल्दार नियमानु कि में लागू करना है. वूना पा चल दे आ दूचे पाग्वल, जिते आ पारत्वल रूख करांगे, अते संस्क्रित शब्द्खोशान्दिया दूंगिया ज़ान्दी पडचोल करांगे. प्राचीन पारत्वेज व्याक्रन अते शब्द्खोश बनावन्दे कामदा मुक्मक्सद कीसी. इस्दा एको एक सब्टो वद्डाउ देश्ची प्राचीन वैदिक साहिदन। पूरी शुद्टानार सामके रक्ना, उस दोर वेज ग्यान नू भिल्कुल असल रूप वेज अण वाली आ पीडिया तक पहुचाँना, इक बेहत पवित्र दे जरूरी फर्ज मने आजान्दासी अते वेखो प्राचीन गरन्तानू बचाँन्दी इसे दूंगी इच्छाने किन्ने कमाल दे पाशाई सिद्धान्तानू जनम दिता वेदेक वाख्कानू उना दे मुल अदे पिच्छेतर विच वद्डन्त दी लोडने ही पानी निवरगे महान विद्वानन लनु नमे व्याक्रन् सिद्धान्त बनाँन लेप रेड किता सथ सो इसा पूरव्दा निगंटु इस दी सब तो पुरानी उदारन है ए सिल्ष्ला इते ही ने रुक्या चेमी सदीवेच आमर सिमहादा आमर कोष सामने आया जिसने कलासिकल संसक्रितनु बुलन्दिया ते पंचा दिता ए आमर कोष यनना जियादा मकबोल होया के बादविच इसनु समजहाँन लेही चाली तो वद किताबा या टीकाना लिख्या गया इतिहाज देस शान्दार सफर तो बाद, होड़ आपा तीजे पागवेच मेठली पाशा भोलन्वाली जन संख्यादे एक बड़े ही उलजे होगे रहिस बारे गल कर दे हैं. चाली मिल्यन यानी के चार करोड एक उई चोटा अक्डा नहीं है. ये मेठिली पाशा भोलन्वाले असल लोकान दी एक अंदाजन गिनती एए, पर हैरानी दीगाल एखाल एखाए प्रबाव्शाली आक्डा साडी सरकारी जंगरना दे इतिहासेक अक्ड्यनाल बिल्कल मेल नी क्हन्दा, उते कहानी कुछ होरी नजराउन दी एखाए. अँई जर एना इतिहास्सिक अंक्डया वाल त्यान द्यो स्तिति बडी अजीब लग्दी है. उन्निसो एक ताली तो उन्निसो एक वंजादे विच्कारले दहाके विच्ता जन गरना कर्वाई ही नहीं गई. अगटे बाकी दहाक्यांविच भी प्रतिषद दे अंक्डे इननी तेजिनाल बदल दे हान, की येकीन करना अख्चा हो जान्दा है. किते मामूली जही गिराववध है, अचालक अगले दहाक्यांविच भी या चोवी फीस तीदा बद्डा उचाला जंदा है. इंना वद्दा जन संख्या संबन्ती रहेस है, जिसने विद्वानानु सोचन ले मजबोर कर दिता. जिवे के यस रोटविच साफ लिख्या है, जन गरना दे अंक्डे यतार्थवादी नहीं है, अंक्र्यान दे एसे उल्जेवे कारन पाशा दी असल स्तिती अते बुलार्यान दी सई गिन्ती जानन लेई माहिरानु सर्फ सरकारी काग्जान ते निरपर रहन दी बजाए पुगोलिक ट्रैकिंग अते अबादी दे विग्यानिक मोडलान दा सहारा लेना प्या इस दूंगे रहसनु समजन तो बाड, हुना पाज्टे पाग्वाल वद्देया, आदू निक्तावाल एक पुल, यानी के किमे एक पुरातन पाशानु, आज दे दिजिटल दारनाल जोडया जारे आ है. साल 2009 विछ नवी दिल्ली दिष्रूती पब्लिकेशन ने इक बहुत ही खास अंग्रेजी मेठिली दिक्षनरी प्रकाषिद की ती. इस्दा प्रतीक चिन यिन यांग मच्षी अपने आप फिच बहुत कुछ भ्यान करदा है. इह स्र्फ एक लोगो नहीं है, सब व्राष्ट अद्हूनिक तकनोलगी दे योग विज्कार बने एक मस्बूद इतिहासिक पूल्डी निशान दे ही करदा है. जरा इस दिख्षनरी दे विशाल पैमाने बारे सुचो. एक उई आम किताब नहीं सगो सोला पागा यानी वौल्यम्स वेछ फैल्ले आए एक महान कारज है. गजजंदर ताकर अगदे उना दे साथ्यावलों बडी ही बारी की नाल तियार की ते गय इस शब्द कोष दा मकसद मैत्टिली पाशानु अन्लाई इजीन, वेब अते आदूनिक अटोमेटिक सिस्तम्स दियोग बनूना है. सब तो कमाल दिगाल ए है के एस वेच देवनागरी दिन नालल मित्फी लक्षर लिपी दिवर्तो हुई है. अते बिल्कुल सही उच्छारन यकीनी बनाँन लेई अंटरनेश्नल फोनेटिक अल्पाबेट यानी अईपी एडा सहरावी लिया गया है एवाके एक वड़ी प्राप्ती है अते होना पा पोझ गय है अपने आखरी अते सब तो दिल्चस्त पागते दिजितल दुन्याद अनुवाद आव वेख दे हा, कि तक्नी की शब्दानु मुल पाशा वेच किवेट ताल्या जान्दा है. शब्दान दे पद्दरते एश अनुवाद दा कम किन्नी बारीकी वाला है एश समजना बहुत दिल्च्सप है. उन अक्तेव डाटाबेस वर्गे बिल्कुल आदूनेक कम्ठूर संकल्पनूी लेलो मेठिली विछ इस्दानूवाद कीता गया है सक्रिये दधान्ष निदी सुडन विछ किन्ना स्तीख अते बिल्कुल मूल पाशा दी महेक वाला शबद लगता है आच्टाः इस च्छ मुछ हैरान करन वाला काम है, कि कि में आलगोरिदम या एनलोग कम्टर वरगे बेहत गुईजल्दार तकनीकी शब्दानु तुनि आत्मक तोरते अपनी मात पाशा दे अनुकुल बनाया गया है. बन्द्विर्त लेई वाहीनी विस्तार वरगे खुब सुरच शब्दिदी स्रिजना की ती गई है. इस समवेख के पता लग दै के पूरातन पाशानु, सुचना आते तकनीग दे अजो के युगविच किचके लिए न ले, किन்नी दूंगी मेंनत दे समज्दी लोड हूंदी एं। ता फिर अंतविच एस सरा विष्लिष्लिष्यन आपनू एक बहुत दूंगे सवालते लेया के कखडा कर दिनदा है जिमे जिमे साथे दिजित्रल तूल बहुत देजीनाल अगे वद्रहे हैं अवन वाले आर्टिफिशल अंटलीजन्स दे इस नवे युगविच सादिया स्वदेशी दे प्राचीन पाशामा आपनी होंदनू किवे बचाके रख्चन गीआ, की अजे हे आदूनिक शब्द्खोश एन्ना पाशामा ले एक नवी जीवन रेखा साभेत होनगे. प्राचीन सब्यचारा दे पविक्धी तक्नोलिजी देस अधबुत मेल बारे एह एक अजेहा सवाल है, जिस बारे अपस सबनु ज़ोर सोचना चाईदा है.