MACHINE ASR ACCESSIBILITY AID

मैथिली_का_डिजिटल_पुनर्जन्म.mp4

Not an editorially verified transcript. This text was generated automatically from the preserved recording and may contain recognition, language-detection, spelling, segmentation or name errors. Consult the source recording for authoritative content.
Collection
Part 7 · VIDEHA MITHILA MAITHILI DISCUSSION CRITICISM SERIES PART 7
Status
asr-draft
Human verified
No
Editorial review
not-reviewed
ASR model
small
Detected language
hi (0.9937)
Duration
8:02
Source
Open preserved recording

Timestamped machine output

  1. 0:00–0:05नमस्ते, आज्छ के सफर में हम एक आज्छी दिल्ज़स्प कहानी पर बाथ करने वाले है,
  2. 0:05–0:08जो इतिहास और भविष्ष्खे एक अनो के संगम को दिखाती है.
  3. 0:09–0:13एक अटिहासिक और हाश्विये पर रही भाषा का, दिजितल पुनरजन.
  4. 0:13–0:17हम देखेंगे की कैसे दिक्षनरी बनाने की जटल कला,
  5. 0:17–0:19जिसे कोश निरमाड भी कहते है,
  6. 0:19–0:21एक सदियो पोरानी विरासत को,
  7. 0:21–0:23आजकी अथ्ट्यादुनिक तकनीक
  8. 0:23–0:25और कमपुटर की दुन्या से जोड देती है.
  9. 0:25–0:28ये सच में एक अविष्वस्निया यात्रा है,
  10. 0:28–0:32ज़हां एक प्राचीन भाशा भविश्ष्षे की दिजिटल सन्रच्ना के साथ
  11. 0:32–0:34कदम से कदम मिलाना सीकती है.
  12. 0:34–0:36अब ज़ा इस बारे में सूची ए,
  13. 0:36–0:37कोई प्राचीन भाशा,
  14. 0:37–0:40कमपुटर की भाशा कैसे सीक सकती है?
  15. 0:40–0:41जिस भाशा का जन्म,
  16. 0:41–0:43सद्यो पहले हूँ,
  17. 0:43–1:13वो बैंटवेट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्�
  18. 1:13–1:18तीस्री शताब्दी इसा पूर्व की चीनी परम्प्राउ तक इसके गेरे प्रमान मिलते हैं.
  19. 1:18–1:26बार्तिय उप महादीम की बात करें, तो चती शताब्दी में आमर सिंका संसक्रित ग्रन्त, आमर कोश एक बहुत बडा एतिहासिक मील का पत्ठर था.
  20. 1:26–1:31वही दूसरी उर पश्च्च्मी दुन्या में सम्वल जोंसन का मशुर अंग्रेजी शब्द कोश काफी बाद में,
  21. 1:31–1:34यानी सत्रासो पच्पन में सामने आया.
  22. 1:34–1:37इस से ये बलकल साफ जाता है की शब्डो को सजजने की अविद्धा
  23. 1:37–1:41पूर में बहुत पहले सहीं एक भेहद उनधस्टर पर मोजुद फीज़ ती.
  24. 1:41–1:46आप स्रूथ की प्रस्टावना में परिभाशित ये लेक्सिकोग्राफी या कोश निर्माड असल में है क्या?
  25. 1:46–1:521680 इस्री में पहली बार अस्तमाल हुए शब्द केवल शब्दों की इक लिस्ट तगयार कर देना बहर नहीं.
  26. 1:52–1:55ये एक बहुत ही बारी कला और विग्यान है.
  27. 1:55–2:00इसके लिए गेराइ से समजना परता है के अखिर इन शब्दों का इस्तमाल कोन करेगा,
  28. 2:00–2:02सुछनाوں को कैसे स्टोर किया जाएगा
  29. 2:02–2:04और उनके सतीक अर्ठों को
  30. 2:04–2:06किस तारकिक डान्चे में पिरोया जाएगा
  31. 2:06–2:08ये सच में एक अज्छा श्रम साथ्द्धिय काम है
  32. 2:08–2:10जो भाशा की आत्मा को बचाई रकते हुए
  33. 2:10–2:12उसे एक नया आकार देता है
  34. 2:12–2:16अदनिक अंग्रेजी से भी पुरानी बाशा है.
  35. 2:16–2:20इतिहास के पन्नो में एक भेहत चोकाने वाला तद्धे चिपा है.
  36. 2:20–2:21ज़र ग़ा गोर कीजेगा.
  37. 2:21–2:24जिस वक्त अंग्रेजी सहत्ति में जेफ्री चोसर
  38. 2:24–2:26मिल इंडल इंगलिष्युक की नीव रख रहे थे
  39. 2:26–2:30अंग्रेजी सहत्ति में जेप्री चोसर मिदल इंगलिश युख की नीव रख रहे थे,
  40. 2:30–2:36तीक उसी काल कहन्द में जोतीश्वर का सबसे पुराना उपलड़ मैठली गरन्त रचा जा जा रहा था.
  41. 2:36–2:40इसका सीथा सा मतलब ये है के मैठली भाशा की जड़े उतनी ही गेरी है,
  42. 2:56–3:00अब बवाड़ थे हैं तीस्रे बहाक की तरव, जन्गणना का रहसे अर भाशाशा में मोझुद गड़िए विसंगतिया
  43. 3:01–3:05जब बाद अदिकार इक मानिता की आती हैं, तो जन्गणना के अक्डे अक्सर विरोदा बासी रहें।
  44. 3:05–3:11अप बाद अदिकार इक माननिता की आती है, तो जन्गडना के अक्डे अकसर विरोदा भासी रहे हैं.
  45. 3:11–3:17इतिहास पन नजर दाले, तो 1891 यानवे में इसे बोलने वालों की संख्या लक्भग बानवे लाक थी.
  46. 3:17–3:20लेकिन फिर एक रहेस से मैं गिरावद आती है.
  47. 3:20–3:25जब बात अदिकारिक मानिता की आती है, तो जंगरना के आक्डे अकसर विरोदा बासी रहे हैं.
  48. 3:26–3:32इतिहास पर नजर डालें, तो 1891 वे में इसे बोलने वालों की संख्या लगबबग बानवे लाक थी.
  49. 3:32–4:02तो थी बज़ादी तो बज़ादी तो बज़ादी तो बज़ादी तो बज़ादी तो बज़ादी तो बज़ादी तो बज़ादी तो बज़ादी तो बज़ादी तो बज़ादी तो बज़ादी तो बज़ादी तो बज़ादी तो बज़ादी तो बज़ादी तो बज़ाद
  50. 4:02–4:07वास्तविक संख्या लगबख चालीस मिल्यन यानी चार करोड के विशाल अंक्रे को चूती है.
  51. 4:08–4:15जी हा, चार करोड ये बारी भरकम संख्या इस बात का सबसे बड़ा सबूत है कि ये भाशा आज भी कितनी जीवन्त है,
  52. 4:16–4:17और समाज में इसकी कितनी गेरी पैट है.
  53. 4:17–4:22स्रोथ्त की प्रस्तावना उन राजनीतिक ब्रान्तियों का भी निश्पक्षता से विश्लेशन करती है,
  54. 4:22–4:25जो वक्त के साथ इस भाशा के इर्द्गिर्द बूनी गईई.
  55. 4:25–4:33अग दोर में यह अप्वा फलाई गई की मेठली केवल ब्रहमनो यह एक विशेश वर्ख की बाशा है, ताखी इसे स्वर्फ एक भोली सावित किया जा सके.
  56. 4:33–4:34अदिया जासके.
  57. 4:34–4:36हला की स्रोत एक दं स्पष्ट करता है,
  58. 4:36–4:39कि इसक शेत्र के मुसल्मानो की एक बहुत बढी अबादी
  59. 4:39–4:42भी सद्यों से अपनी मात्र भाशा मानती आई है.
  60. 4:42–4:45यह तत है उन सभी ब्रानतियों को स्रे से खारइज कर देता है.
  61. 4:45–5:00ज़िटल खाई को पातना और 2009 का अंग्रेजी मेठली शब्द कोश इस अतिहासिक हाँशीय करन का एक ठो समदान निकालने किलिए 2009 में इक बडा और युगानतर कारी कदम उठाया गया.
  62. 5:00–5:11गजेंद्र ताकृर, नागेंद्र कुमार जा और पंजीकर, विद्यानन्द जा दुरा संकलित, और शुती पब्लिकेश्यंस दुरा प्रकाशित, अंग्रेजी, मैठ्फिली शब्द्खोश दुन्या के सामने आया.
  63. 5:11–5:15ये केवल शब्डो से भरी कोई सादारन किताब नहीं ती, बलकी एक प्राचीन भाशको,
  64. 5:15–5:20एक वी सब्डी के दिजिटल डाचे के बराभर कडागरने का एक बहुती महत्वकाँएश था.
  65. 5:20–5:24और यही से एक नहीं तकनी की क्रानती की नीव रख्खी गई.
  66. 5:24–5:29अब बाद करतें पाच्वे भाग की, अनवाद की सन्रच्ना और एकीस्वी सदी का मानचित्रन.
  67. 5:30–5:33तकनी की शब्दावली का अनवाद करना कोई बच्चो का खेल नहीं है,
  68. 5:34–5:36अंगरेजी शब्डो के सिथ अर्थ नहीं देए गय.
  69. 5:36–5:41इसके बचाई हर एक शब्द को अंतर राश्व्ये दूनियात्मक वर्ण माला
  70. 5:41–5:45यानी अईप्ये, देवनागरी और मोल मितलाक्षर लिपियो में
  71. 5:45–5:49माप किया याई याई ये बहुस तरीया मापिंग ये पक्का करती है
  72. 5:49–5:55तक्नी की दून्या नस्व् समजीजाए, बलकी उने स्थानिय उच्चारन और ग्रामर के बिलकुल अनुकुल बनाय जासके,
  73. 5:55–5:58ताकी तक्नी किसी को पराईन लगे.
  74. 5:58–6:02इसे आजे समज्जिए, आदूने क्म्पुटर नेट्वोकिं का शब्द है बैंट्विद्,
  75. 6:02–6:05जिसे मैठिली में वाहीनी विस्तार के रूप में गरहा गया
  76. 6:05–6:08और आल्गोरिद्म को अभीयुक्त करूप दिया गया
  77. 6:08–6:13इन नहीं शब्डों के सात उनके व्याक्रन और सतीक उचारन को भी जोडा गया है
  78. 6:13–6:17यह बारी की शुनिष्ट करती है, की कम्पूटर साँईन्स की अमुर्ट बातें
  79. 6:17–6:21मात्री भाशा के सबावेक प्रवाहा का, एक दंब अबहिन लिए स्सा बन जाएं।
  80. 6:21–6:25और भाशा के इस अदबूत लचीले पन का एक और बहेतरीन उदारन देक्ये
  81. 6:25–6:55अर्दिश्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्
  82. 6:55–7:25जेटल तकने की प्रविष्ट्या शामिल की गईगेंगेंगेंगेंगेंगेंगेंगेंगेंगेंगेंगेंगेंगेंगेंगेंगेंगेंगेंगेंगेंगेंगेंगेंगेंगेंगेंगेंगेंगेंगेंगेंगेंगेंगेंगेंगेंगेंगेंगेंगेंगेंगेंगेंगेंगे
  83. 7:25–7:27और विचारों को में एक निया जोश बर दिया,
  84. 7:28–7:34जिसने इसे सन्रक्षिट करने और आदूनिक दिजिटल रूप में डलने की प्रक्रिया को और भी जेएदा तेज कर दिया.
  85. 7:34–7:38तो इन सब बातो के बाद ये चर्चा हमें बहुती गेरे सवाल पर लाकर ख़ा कर देती है.
  86. 7:38–7:47अजके इस देजटल युग में प्राचीन संट्सक्रितियों को खुद को नेआ रूभ देने किलिए सबसे ज्यादा प्रेरित करती है?
  87. 7:47–7:51रष्शे पर होने के बावजुद तकनी की दुन्या में अपने एक नहीं प्हचान बनाने वाली
  88. 7:51–7:59अदियादियादियादियादियादियादियादियादियादियादियादियादियादियादियादियादियादियादियादियादियादियादियादियादियादियादियादियादियादियादियादियादियादियादियादियादियादियादियादियादियादियादियादिया�

Plain text

नमस्ते, आज्छ के सफर में हम एक आज्छी दिल्ज़स्प कहानी पर बाथ करने वाले है, जो इतिहास और भविष्ष्खे एक अनो के संगम को दिखाती है. एक अटिहासिक और हाश्विये पर रही भाषा का, दिजितल पुनरजन. हम देखेंगे की कैसे दिक्षनरी बनाने की जटल कला, जिसे कोश निरमाड भी कहते है, एक सदियो पोरानी विरासत को, आजकी अथ्ट्यादुनिक तकनीक और कमपुटर की दुन्या से जोड देती है. ये सच में एक अविष्वस्निया यात्रा है, ज़हां एक प्राचीन भाशा भविश्ष्षे की दिजिटल सन्रच्ना के साथ कदम से कदम मिलाना सीकती है. अब ज़ा इस बारे में सूची ए, कोई प्राचीन भाशा, कमपुटर की भाशा कैसे सीक सकती है? जिस भाशा का जन्म, सद्यो पहले हूँ, वो बैंटवेट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्� तीस्री शताब्दी इसा पूर्व की चीनी परम्प्राउ तक इसके गेरे प्रमान मिलते हैं. बार्तिय उप महादीम की बात करें, तो चती शताब्दी में आमर सिंका संसक्रित ग्रन्त, आमर कोश एक बहुत बडा एतिहासिक मील का पत्ठर था. वही दूसरी उर पश्च्च्मी दुन्या में सम्वल जोंसन का मशुर अंग्रेजी शब्द कोश काफी बाद में, यानी सत्रासो पच्पन में सामने आया. इस से ये बलकल साफ जाता है की शब्डो को सजजने की अविद्धा पूर में बहुत पहले सहीं एक भेहद उनधस्टर पर मोजुद फीज़ ती. आप स्रूथ की प्रस्टावना में परिभाशित ये लेक्सिकोग्राफी या कोश निर्माड असल में है क्या? 1680 इस्री में पहली बार अस्तमाल हुए शब्द केवल शब्दों की इक लिस्ट तगयार कर देना बहर नहीं. ये एक बहुत ही बारी कला और विग्यान है. इसके लिए गेराइ से समजना परता है के अखिर इन शब्दों का इस्तमाल कोन करेगा, सुछनाوں को कैसे स्टोर किया जाएगा और उनके सतीक अर्ठों को किस तारकिक डान्चे में पिरोया जाएगा ये सच में एक अज्छा श्रम साथ्द्धिय काम है जो भाशा की आत्मा को बचाई रकते हुए उसे एक नया आकार देता है अदनिक अंग्रेजी से भी पुरानी बाशा है. इतिहास के पन्नो में एक भेहत चोकाने वाला तद्धे चिपा है. ज़र ग़ा गोर कीजेगा. जिस वक्त अंग्रेजी सहत्ति में जेफ्री चोसर मिल इंडल इंगलिष्युक की नीव रख रहे थे अंग्रेजी सहत्ति में जेप्री चोसर मिदल इंगलिश युख की नीव रख रहे थे, तीक उसी काल कहन्द में जोतीश्वर का सबसे पुराना उपलड़ मैठली गरन्त रचा जा जा रहा था. इसका सीथा सा मतलब ये है के मैठली भाशा की जड़े उतनी ही गेरी है, अब बवाड़ थे हैं तीस्रे बहाक की तरव, जन्गणना का रहसे अर भाशाशा में मोझुद गड़िए विसंगतिया जब बाद अदिकार इक मानिता की आती हैं, तो जन्गणना के अक्डे अक्सर विरोदा बासी रहें। अप बाद अदिकार इक माननिता की आती है, तो जन्गडना के अक्डे अकसर विरोदा भासी रहे हैं. इतिहास पन नजर दाले, तो 1891 यानवे में इसे बोलने वालों की संख्या लक्भग बानवे लाक थी. लेकिन फिर एक रहेस से मैं गिरावद आती है. जब बात अदिकारिक मानिता की आती है, तो जंगरना के आक्डे अकसर विरोदा बासी रहे हैं. इतिहास पर नजर डालें, तो 1891 वे में इसे बोलने वालों की संख्या लगबबग बानवे लाक थी. तो थी बज़ादी तो बज़ादी तो बज़ादी तो बज़ादी तो बज़ादी तो बज़ादी तो बज़ादी तो बज़ादी तो बज़ादी तो बज़ादी तो बज़ादी तो बज़ादी तो बज़ादी तो बज़ादी तो बज़ादी तो बज़ादी तो बज़ाद वास्तविक संख्या लगबख चालीस मिल्यन यानी चार करोड के विशाल अंक्रे को चूती है. जी हा, चार करोड ये बारी भरकम संख्या इस बात का सबसे बड़ा सबूत है कि ये भाशा आज भी कितनी जीवन्त है, और समाज में इसकी कितनी गेरी पैट है. स्रोथ्त की प्रस्तावना उन राजनीतिक ब्रान्तियों का भी निश्पक्षता से विश्लेशन करती है, जो वक्त के साथ इस भाशा के इर्द्गिर्द बूनी गईई. अग दोर में यह अप्वा फलाई गई की मेठली केवल ब्रहमनो यह एक विशेश वर्ख की बाशा है, ताखी इसे स्वर्फ एक भोली सावित किया जा सके. अदिया जासके. हला की स्रोत एक दं स्पष्ट करता है, कि इसक शेत्र के मुसल्मानो की एक बहुत बढी अबादी भी सद्यों से अपनी मात्र भाशा मानती आई है. यह तत है उन सभी ब्रानतियों को स्रे से खारइज कर देता है. ज़िटल खाई को पातना और 2009 का अंग्रेजी मेठली शब्द कोश इस अतिहासिक हाँशीय करन का एक ठो समदान निकालने किलिए 2009 में इक बडा और युगानतर कारी कदम उठाया गया. गजेंद्र ताकृर, नागेंद्र कुमार जा और पंजीकर, विद्यानन्द जा दुरा संकलित, और शुती पब्लिकेश्यंस दुरा प्रकाशित, अंग्रेजी, मैठ्फिली शब्द्खोश दुन्या के सामने आया. ये केवल शब्डो से भरी कोई सादारन किताब नहीं ती, बलकी एक प्राचीन भाशको, एक वी सब्डी के दिजिटल डाचे के बराभर कडागरने का एक बहुती महत्वकाँएश था. और यही से एक नहीं तकनी की क्रानती की नीव रख्खी गई. अब बाद करतें पाच्वे भाग की, अनवाद की सन्रच्ना और एकीस्वी सदी का मानचित्रन. तकनी की शब्दावली का अनवाद करना कोई बच्चो का खेल नहीं है, अंगरेजी शब्डो के सिथ अर्थ नहीं देए गय. इसके बचाई हर एक शब्द को अंतर राश्व्ये दूनियात्मक वर्ण माला यानी अईप्ये, देवनागरी और मोल मितलाक्षर लिपियो में माप किया याई याई ये बहुस तरीया मापिंग ये पक्का करती है तक्नी की दून्या नस्व् समजीजाए, बलकी उने स्थानिय उच्चारन और ग्रामर के बिलकुल अनुकुल बनाय जासके, ताकी तक्नी किसी को पराईन लगे. इसे आजे समज्जिए, आदूने क्म्पुटर नेट्वोकिं का शब्द है बैंट्विद्, जिसे मैठिली में वाहीनी विस्तार के रूप में गरहा गया और आल्गोरिद्म को अभीयुक्त करूप दिया गया इन नहीं शब्डों के सात उनके व्याक्रन और सतीक उचारन को भी जोडा गया है यह बारी की शुनिष्ट करती है, की कम्पूटर साँईन्स की अमुर्ट बातें मात्री भाशा के सबावेक प्रवाहा का, एक दंब अबहिन लिए स्सा बन जाएं। और भाशा के इस अदबूत लचीले पन का एक और बहेतरीन उदारन देक्ये अर्दिश्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट् जेटल तकने की प्रविष्ट्या शामिल की गईगेंगेंगेंगेंगेंगेंगेंगेंगेंगेंगेंगेंगेंगेंगेंगेंगेंगेंगेंगेंगेंगेंगेंगेंगेंगेंगेंगेंगेंगेंगेंगेंगेंगेंगेंगेंगेंगेंगेंगेंगेंगेंगेंगेंगेंगे और विचारों को में एक निया जोश बर दिया, जिसने इसे सन्रक्षिट करने और आदूनिक दिजिटल रूप में डलने की प्रक्रिया को और भी जेएदा तेज कर दिया. तो इन सब बातो के बाद ये चर्चा हमें बहुती गेरे सवाल पर लाकर ख़ा कर देती है. अजके इस देजटल युग में प्राचीन संट्सक्रितियों को खुद को नेआ रूभ देने किलिए सबसे ज्यादा प्रेरित करती है? रष्शे पर होने के बावजुद तकनी की दुन्या में अपने एक नहीं प्हचान बनाने वाली अदियादियादियादियादियादियादियादियादियादियादियादियादियादियादियादियादियादियादियादियादियादियादियादियादियादियादियादियादियादियादियादियादियादियादियादियादियादियादियादियादियादियादियादिया�

← Transcript index