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अंग्रेजी-मैथिली_शब्दकोश.mp4

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Part 7 · VIDEHA MITHILA MAITHILI DISCUSSION CRITICISM SERIES PART 7
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  1. 0:00–0:30नमस्कार, एही कहास विष्लेषन में स्वागत अचे, आई हम सब शब्द कोष निरमानक एक ता अटीव रोचक यात्रा पर निकलब, जे 2009 का एक टाटियास सिक भाषे कुपलप्दिए पर जाकर समपन नहोई तचे, इकोनो सादारन यात्रा नहीं चे, बुजलो, इप राच
  2. 0:30–0:35तेसर मेठिलिक परीद्रिष्य आ अन्तमे दिजिटल युगक अनुवाद
  3. 0:35–0:41मने ईउ मार्गछी जे प्राचीन साम्राजगे आदूनिक अरिठमेटेक लोगिक युनिट्सद जोडे तचे
  4. 0:41–0:47चलू खंद एक शब्द कोशक इतिहाज सा शूरूकरे ची
  5. 0:47–0:49अखर एक ता व्यापक जलक देखेखेची
  6. 0:49–0:52कोश निरमानक शुर्वात वास्तव में बहुत पहले बहुगेल चल
  7. 0:52–0:55सोचु, तैइस्सो इसा पूर्व में
  8. 0:55–0:58अखकादियन द्वीभाशी शब्द सुची भेटाई तची
  9. 0:58–1:00अखकर बाद प्रथम शताब्दी इस्वी में
  10. 1:00–1:04तेइस्सो इसा पूर्व में अक्कादिन दूईबाशी शब्द्सुची बेटाई तची
  11. 1:04–1:09अकर बाद प्रथम शताब्दी इस्वी में आपुलोनिस द्वारा रचित ग्रीक शब्द्खोश आवाई तची
  12. 1:09–1:15आफेर भ़त बाद सत्रसो पच्पन में सम्यल जोंसनक प्रसिद अंग्रेजी शब्द्खोश
  13. 1:15–1:22इक रम्ग विका साव-साव दर्षावेत अची जे भाशा के सहेजबक कते क पुराना सवबहाविक मानविए प्रव्रित्ती अची
  14. 1:22–1:25मुदा इकोनो सदारन काज नहीं अची
  15. 1:25–1:32विव्वारेक लेक्सिको ग्राफी वास्दाव में, शब्द्खोश संकलन अ समपादन कक एक ता गुड विग्यान अखला आचे.
  16. 1:32–1:40एही में अन्तु प्योख करता के पहचान, परिभाशा के विवस्थित करब आमुल शब्द्चुनब जहन जटिल अकाज शमिल आची.
  17. 1:40–1:44एक रब भ्हराई से बुजला पर एही महान काजक गंविरताक भान होई तची.
  18. 1:44–1:48आब अवेशी कहन्ट दोसर पर बारत ग़्वष परमपरा.
  19. 1:48–1:53वैश्विक मन सा आब हम सब अपन द्यान बारत अग्टियासिक परमपरा दिस केंद्रित करब,
  20. 1:53–1:56जदे व्याक्रन अश्व्द्खोश ज़ी बहुत गईरे ची.
  21. 1:56–2:02बारत में एप रमपरा मुल रूप सवेदिक साहितेक संद्रक्षन करिल श्रूब हैल चल.
  22. 2:02–2:06पानेनिक धूनी रूप विग्यानिक सिद्धानत सलग,
  23. 2:06–2:15याते हम सब भारतक एक ता विशेश सांस्क्रेतिक अ भहगोलिक शेट्रक भाशापर सुख्ष्म विचार कर याते एक ता बहयंकर विसंगती सामने अबएत अच्छी,
  24. 2:15–2:22जे पवित्र ग्रन्त कषन्द्रक्षन भार्तिय उप महाद्वीप में बाशाई निपूनत्ता के कोना प्रेदित के लक.
  25. 2:22–2:32आप चलू खण्द तीन मेठ्लिक परद्रिष्ष्पर अथे हम सब भारतक एक ता विषेश सान्स्क्रेतिक आब होगोलिक शेट्रक भाशा पर सुख्ष्म विचार करब.
  26. 2:32–2:38या तै एक ता बहिंकर विसंगती सामने अबई तची, जे एक दम अच्रज मी डालाई तची.
  27. 2:38–2:45तची 2001 कर अदिकारिक जनगरनेना कहाई तची, जे मैटली भजनिहारक संख्या लगभग एक दशमलप 2 करोड़ ची.
  28. 2:45–2:49मुदा अनुमालित वास्तविक संख्या चारी करोडग आस्पास अची
  29. 2:49–2:56इंआक्डा दाशाक वास्तविक प्रसार अदिकारिक मानिताक भीचकर बहुत पैग दूरी के स्पष्ट कराइत अची
  30. 2:56–3:01मैठिलिक, भोगोलिक अब बहुब वाशिक जतिलता अत्यंत जीवनत ची
  31. 3:01–3:05इबिहार अ नेपालक तराई छित्रदरी पस्रालची
  32. 3:05–3:07अ भोजपूरी, मगही, हिन्दी सहीत,
  33. 3:07–3:11बारा अन्यबाशाक संग सहा अस्तित्वा में अची.
  34. 3:11–3:16अथारस्सो सोला कविलेक बाद नेपालक चोदा प्रदिषत अवादी एहे में जुडलचल.
  35. 3:16–3:22एक विविद्ताक बादो एक रब भारती समविदानक अश्टम अनुसुची में माननेता प्रापत ची,
  36. 3:22–3:25जे एकर अटिहासिक द्रिटाक के प्रमाडित कराई था ची.
  37. 3:25–3:28विप्रीत परिस्तिती में इबाशा कोना पनपलक,
  38. 3:28–3:41अख्रा लेल प्रफेसर उदैनाराईं सिंकर इबिचार अथ्यन सतिक चे, सम्मदानेक अदिकार सि वंच्चना मेठिली लेल एक ता वर्दान साभिद्भेल, कारन जे एकरासा एकर साहित्तिक संस्क्रितिक गत्विदिमे अदिक उचाएल.
  39. 3:41–3:45इस ख़िडल युग में प्रवेश करभासी पूर्व,
  40. 3:45–3:48मित्लाग सम्रिद संस्क्रतिक शित्रकी पारंपर,
  41. 3:48–3:51एक माच्ख प्रतीक स्मरन करभ आवश्षक अच्छे.
  42. 3:51–3:54इए उ सुन्दर्य अपरम्परा आच्छी,
  43. 3:54–3:56जग्रासी भाशा उप्जल अच्छी,
  44. 3:56–4:00अप अप अप दिजटल संसार में संद्रक्षित काईल जार है लगाजी
  45. 4:00–4:04अब अंप अंप में कहन्द चारी दिजटल अनुवाद
  46. 4:04–4:08एहे खहन्द में हम सब देखभ जे कोना एक ता प्राषीन बाशा
  47. 4:08–4:11आदूनिक तकनीक दिस्पैक चालांग लगवे देछ
  48. 4:11–4:17अगरेजी में हम सब देखब जे कोना एक ता प्राचीन भाशा आदूनिक तक्नीक दिस्पैक च्हालांग लगवे थेच.
  49. 4:17–4:22तक्नीक तक पहुच बनावक अंतिम समादान अची गजेंद्र ताकृर,
  50. 4:22–4:30नागेंद्र कुमारजा और पंजी कार विद्यानन जाद्वारा रचित 2009 ए अंग्रेजी मेठली क्मपुटर सबद्खोश.
  51. 4:30–4:38इक टकनी की क्रान्ती देक, जे मेठलीक के सीदे दिजितल युगक योग्य बन बैत अची.
  52. 4:38–4:44प्राचीन मिठलाक्षर लिपी में लिख्हल, अंग्रेजी मेठली शब्दकोषकर इप्रियास अद्बुद अची.
  53. 4:44–4:52सो चु एक दा अख्यंत पारमपरिक आ प्राचीन लिपी के आदूनिक क्पुटर सब्दावली के लेल कतिक सावदानी सा अनुकुलित कर जा रहल चे.
  54. 4:52–4:55इपुराना आ नवक एक ता सुन्दर संगम अची.
  55. 4:55–4:59आँ किचु विषिष्ट अनुवाद क्यान्त्रि की देख है ची
  56. 4:59–5:06आल्गुरिद्धम लेल, अब्युक्ती विधिकल्प, बैंद लेल, वाहीनी विस्तार, आ एल्एल तर्क गनित विभ्भाग
  57. 5:06–5:10इप रमानित करेत आची, जे आदूनिक सकनी की अवद्दारना के
  58. 5:10–5:15कोना प्राचीन बाशाके परमानु अस्तर पर विष्लेशित को गड़ंगेल आचे
  59. 5:15–5:17इकोनो सादारन का ज्ब रिए आचे
  60. 5:17–5:20इट आरो रोचक बाशारी तुलना देखूं
  61. 5:20–5:23अंग्रेजिक आप्लिकेशन साथवेर का मेठली अनवाद ची
  62. 5:23–5:26अनु प्रयोग तन्त्र स्वतन्त्र विदिए,
  63. 5:26–5:28इस पश्ट करेत ची,
  64. 5:28–5:31जे आदूनिक तकनीक के मेठली जन प्राषीन भाशाक,
  65. 5:31–5:34दून्यात्मक अव्याकरनिक साचा मेट द्धालब,
  66. 5:34–5:37कते जटिल आ अकर्षक यान्त्र की आची.
  67. 5:37–5:40इस शब्द्खोश भविश्षक्यक्लेल पुर्ण रूपें तएयार अची.
  68. 5:40–5:45अन्तराश्च्य ध्वन्यात्मक वर्ण्माला माने IPA का समवेश.
  69. 5:45–5:48देवनाग्री आमेठलाख्ष्र दूनु लिप्प्योग
  70. 5:48–5:50अग्कडाई सा व्याक्रनिक वर्गि करन
  71. 5:50–5:59इसब विषेश्ता एक रब हविष्चक अपकरन जैना इदिक्षनरी आश्च्छालित प्रश्नुतर प्रनालिक लेल एक तब वहुत मजबूत आदार देताचे.
  72. 5:59–6:04अन्द में एक ता विचारुत देजक प्रश्नपर इविष्लेशन चोडी रहाल ची,
  73. 6:04–6:06जग्रा खोलजेनाई बाकी आची
  74. 6:06–6:08शेत्रिय बाशा के दिजितल संग्रक्षन
  75. 6:08–6:12वैश्विक सांस्क्रतिक विविदिता के लेल वास्तव में अथ्यन्त महत्व पोरनाची

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नमस्कार, एही कहास विष्लेषन में स्वागत अचे, आई हम सब शब्द कोष निरमानक एक ता अटीव रोचक यात्रा पर निकलब, जे 2009 का एक टाटियास सिक भाषे कुपलप्दिए पर जाकर समपन नहोई तचे, इकोनो सादारन यात्रा नहीं चे, बुजलो, इप राच तेसर मेठिलिक परीद्रिष्य आ अन्तमे दिजिटल युगक अनुवाद मने ईउ मार्गछी जे प्राचीन साम्राजगे आदूनिक अरिठमेटेक लोगिक युनिट्सद जोडे तचे चलू खंद एक शब्द कोशक इतिहाज सा शूरूकरे ची अखर एक ता व्यापक जलक देखेखेची कोश निरमानक शुर्वात वास्तव में बहुत पहले बहुगेल चल सोचु, तैइस्सो इसा पूर्व में अखकादियन द्वीभाशी शब्द सुची भेटाई तची अखकर बाद प्रथम शताब्दी इस्वी में तेइस्सो इसा पूर्व में अक्कादिन दूईबाशी शब्द्सुची बेटाई तची अकर बाद प्रथम शताब्दी इस्वी में आपुलोनिस द्वारा रचित ग्रीक शब्द्खोश आवाई तची आफेर भ़त बाद सत्रसो पच्पन में सम्यल जोंसनक प्रसिद अंग्रेजी शब्द्खोश इक रम्ग विका साव-साव दर्षावेत अची जे भाशा के सहेजबक कते क पुराना सवबहाविक मानविए प्रव्रित्ती अची मुदा इकोनो सदारन काज नहीं अची विव्वारेक लेक्सिको ग्राफी वास्दाव में, शब्द्खोश संकलन अ समपादन कक एक ता गुड विग्यान अखला आचे. एही में अन्तु प्योख करता के पहचान, परिभाशा के विवस्थित करब आमुल शब्द्चुनब जहन जटिल अकाज शमिल आची. एक रब भ्हराई से बुजला पर एही महान काजक गंविरताक भान होई तची. आब अवेशी कहन्ट दोसर पर बारत ग़्वष परमपरा. वैश्विक मन सा आब हम सब अपन द्यान बारत अग्टियासिक परमपरा दिस केंद्रित करब, जदे व्याक्रन अश्व्द्खोश ज़ी बहुत गईरे ची. बारत में एप रमपरा मुल रूप सवेदिक साहितेक संद्रक्षन करिल श्रूब हैल चल. पानेनिक धूनी रूप विग्यानिक सिद्धानत सलग, याते हम सब भारतक एक ता विशेश सांस्क्रेतिक अ भहगोलिक शेट्रक भाशापर सुख्ष्म विचार कर याते एक ता बहयंकर विसंगती सामने अबएत अच्छी, जे पवित्र ग्रन्त कषन्द्रक्षन भार्तिय उप महाद्वीप में बाशाई निपूनत्ता के कोना प्रेदित के लक. आप चलू खण्द तीन मेठ्लिक परद्रिष्ष्पर अथे हम सब भारतक एक ता विषेश सान्स्क्रेतिक आब होगोलिक शेट्रक भाशा पर सुख्ष्म विचार करब. या तै एक ता बहिंकर विसंगती सामने अबई तची, जे एक दम अच्रज मी डालाई तची. तची 2001 कर अदिकारिक जनगरनेना कहाई तची, जे मैटली भजनिहारक संख्या लगभग एक दशमलप 2 करोड़ ची. मुदा अनुमालित वास्तविक संख्या चारी करोडग आस्पास अची इंआक्डा दाशाक वास्तविक प्रसार अदिकारिक मानिताक भीचकर बहुत पैग दूरी के स्पष्ट कराइत अची मैठिलिक, भोगोलिक अब बहुब वाशिक जतिलता अत्यंत जीवनत ची इबिहार अ नेपालक तराई छित्रदरी पस्रालची अ भोजपूरी, मगही, हिन्दी सहीत, बारा अन्यबाशाक संग सहा अस्तित्वा में अची. अथारस्सो सोला कविलेक बाद नेपालक चोदा प्रदिषत अवादी एहे में जुडलचल. एक विविद्ताक बादो एक रब भारती समविदानक अश्टम अनुसुची में माननेता प्रापत ची, जे एकर अटिहासिक द्रिटाक के प्रमाडित कराई था ची. विप्रीत परिस्तिती में इबाशा कोना पनपलक, अख्रा लेल प्रफेसर उदैनाराईं सिंकर इबिचार अथ्यन सतिक चे, सम्मदानेक अदिकार सि वंच्चना मेठिली लेल एक ता वर्दान साभिद्भेल, कारन जे एकरासा एकर साहित्तिक संस्क्रितिक गत्विदिमे अदिक उचाएल. इस ख़िडल युग में प्रवेश करभासी पूर्व, मित्लाग सम्रिद संस्क्रतिक शित्रकी पारंपर, एक माच्ख प्रतीक स्मरन करभ आवश्षक अच्छे. इए उ सुन्दर्य अपरम्परा आच्छी, जग्रासी भाशा उप्जल अच्छी, अप अप अप दिजटल संसार में संद्रक्षित काईल जार है लगाजी अब अंप अंप में कहन्द चारी दिजटल अनुवाद एहे खहन्द में हम सब देखभ जे कोना एक ता प्राषीन बाशा आदूनिक तकनीक दिस्पैक चालांग लगवे देछ अगरेजी में हम सब देखब जे कोना एक ता प्राचीन भाशा आदूनिक तक्नीक दिस्पैक च्हालांग लगवे थेच. तक्नीक तक पहुच बनावक अंतिम समादान अची गजेंद्र ताकृर, नागेंद्र कुमारजा और पंजी कार विद्यानन जाद्वारा रचित 2009 ए अंग्रेजी मेठली क्मपुटर सबद्खोश. इक टकनी की क्रान्ती देक, जे मेठलीक के सीदे दिजितल युगक योग्य बन बैत अची. प्राचीन मिठलाक्षर लिपी में लिख्हल, अंग्रेजी मेठली शब्दकोषकर इप्रियास अद्बुद अची. सो चु एक दा अख्यंत पारमपरिक आ प्राचीन लिपी के आदूनिक क्पुटर सब्दावली के लेल कतिक सावदानी सा अनुकुलित कर जा रहल चे. इपुराना आ नवक एक ता सुन्दर संगम अची. आँ किचु विषिष्ट अनुवाद क्यान्त्रि की देख है ची आल्गुरिद्धम लेल, अब्युक्ती विधिकल्प, बैंद लेल, वाहीनी विस्तार, आ एल्एल तर्क गनित विभ्भाग इप रमानित करेत आची, जे आदूनिक सकनी की अवद्दारना के कोना प्राचीन बाशाके परमानु अस्तर पर विष्लेशित को गड़ंगेल आचे इकोनो सादारन का ज्ब रिए आचे इट आरो रोचक बाशारी तुलना देखूं अंग्रेजिक आप्लिकेशन साथवेर का मेठली अनवाद ची अनु प्रयोग तन्त्र स्वतन्त्र विदिए, इस पश्ट करेत ची, जे आदूनिक तकनीक के मेठली जन प्राषीन भाशाक, दून्यात्मक अव्याकरनिक साचा मेट द्धालब, कते जटिल आ अकर्षक यान्त्र की आची. इस शब्द्खोश भविश्षक्यक्लेल पुर्ण रूपें तएयार अची. अन्तराश्च्य ध्वन्यात्मक वर्ण्माला माने IPA का समवेश. देवनाग्री आमेठलाख्ष्र दूनु लिप्प्योग अग्कडाई सा व्याक्रनिक वर्गि करन इसब विषेश्ता एक रब हविष्चक अपकरन जैना इदिक्षनरी आश्च्छालित प्रश्नुतर प्रनालिक लेल एक तब वहुत मजबूत आदार देताचे. अन्द में एक ता विचारुत देजक प्रश्नपर इविष्लेशन चोडी रहाल ची, जग्रा खोलजेनाई बाकी आची शेत्रिय बाशा के दिजितल संग्रक्षन वैश्विक सांस्क्रतिक विविदिता के लेल वास्तव में अथ्यन्त महत्व पोरनाची

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