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मैथिली_थिसॉरस_विश्लेषण.mp4
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- 0:00–0:06नमसकार, इही नव विष्लेशन में स्वागताच, आई हम सब एक तब वोड रोचक विष्षेपर गहीर चर्चा कर अब.
- 0:06–0:13कही उ सुचनी छी, जे मानव जाती कोना आपन चारु दीसक दुन्या के पहचानी तची, कोना उक्रनाम दे तची,
- 0:13–0:16अँ सबस्बेग बात कोना एक तप पुरा संस्क्रिती,
- 0:16–0:20उकर रहन सहन मात्र किचु सब्द में समाहिद भईजाएत छी,
- 0:20–0:22तचलू आई मेठली अंग्रेजी थिसवरस,
- 0:22–0:26मने मेठली समानर्ती कोशक एक ता अदबुत यात्रा पर चलेच ची,
- 0:26–0:30अदेखे चीजी इग कतक सम्रिद अविशाल अची.
- 0:30–0:33आब, सब से पहले आई संक्या पर गवर करी.
- 0:33–0:37एक लाक पन ताली सहजार एक सो चवालिस.
- 0:37–0:39इकोनो सादारन संक्या नहीं चे.
- 0:39–0:44इवेद्छली अंग्रेजी खिसारस में दरज कोल शब्धक संक्या चे.
- 0:44–0:46मतलब सोची सके ची?
- 0:46–0:51इकोनो भाशक विशालता अगगेराएक एक तजीबद जागित प्रमान ची?
- 0:51–0:55जो कक्रो लगए ची जे भाशा सरफ बात विचारक माद्यम ची,
- 0:55–1:00तई इविशाल अक्डा औजी सोचके पूरी तरह से बडले दई ची?
- 1:00–1:02इजे भागीरत प्रयास ची,
- 1:14–1:17इक ता आहन महाग्रन्त जे पूरा संस्क्रितेक,
- 1:17–1:20उकर दैनिक जीवनाक, आवकर वातावरनक,
- 1:20–1:22जीवन्त ताईम काप्सूल अची.
- 1:22–1:25इक ता आहन अती विषिष्ट संग्रह ची,
- 1:25–1:29जदे प्रत्थेख शब्द आपन भीतर इक ता गहीर इतिहास समप्टने आची.
- 1:29–1:33इही विशलेशन में हम सब मुक्हिरूपसन छोटा बाग पर गब करब
- 1:33–1:37पहल एक ता बाशाई समारग, तो सर क्रिषिक शब्दावली,
- 1:37–1:40तेसर श्रमक भाशा, चार्यम, भोजनक सुख्ष्मता,
- 1:40–1:43पाचम, दैनिक जीवनक वस्तु सब,
- 1:43–1:45अ अद्द में संस्क्रितिक आत्माक सरक्षन.
- 1:46–1:48तचलू पहल भाग सर शुरू करेच फीट.
- 1:49–1:51एक ता विशाल भाशाई समारक,
- 1:51–1:54जते हम सब संस्क्रितिक द्हरोहरक खोज करब.
- 1:55–1:57एही थिसोरस में दरज प्रतेख शब्द के
- 1:57–1:59ये स्वट आनुवादक नजर्ये से नहीं देखो.
- 1:59–2:02ये ये ये आजा नाजुख पूरा तात्विक द्रोहर जका आची,
- 2:02–2:05जक्रा हम सब माटिक नीचा से निकाली कै,
- 2:05–2:08उकर दूर जारी कै, अद्धियन कर रहल्ची.
- 2:08–2:10ये जे सगंता एते देख रहल्ची,
- 2:10–2:14अब आब आब एज़ाई छी तो सर भागपर, क्रिष्ष्ष्व्दावली,
- 2:14–2:16जे असल में क्रिष्ष्षक का आत्मा चे.
- 2:16–2:20अखार, अखार, प्रकार, सब किच्वेते अची
- 2:20–2:21यह अस्पष्ट करेत अची
- 2:21–2:26जे एह भाशा के अटेक सुक्श्मता से सुचीबद करवामे कते कडा परिष्षम लागल हैत
- 2:26–2:29आब आब एजाए ची तो सर बाख पर
- 2:29–2:30क्रिष्षिक शब्दावली
- 2:30–2:33जे आसल में क्रिष्वक का आत्मा चे.
- 2:33–2:37आब हम सब मैठली बाशी चेट्र, क्रिष्वक जडी दिस चलेच्छी.
- 2:37–2:39केती बादिख चे परीवेश अचे,
- 2:39–2:41उ कोना बाशा के गड़ाइ चे,
- 2:41–2:42इदिखव बड दिल्चस पचे.
- 2:42–2:44उदारनक लेल एज़़़द के लिज़िया.
- 2:44–2:48अन्तर, एकर अर्त अचे दूटा कब्ता या स्यारक भीच्ग कजगा.
- 2:48–2:52जगन खेप में हल चले चे, तो ओई दूटा लैनक भीच्ग जे खाली स्थान हो चे,
- 2:52–2:55उख्राले लिए ये एक्दम सतीक शब्द चब्द चे.
- 2:55–2:57उगराले लिये ये एक्दम सतीक शब्द आचे.
- 2:57–2:59ये देखावे दचे जे यी संस्क्रिती
- 2:59–3:01माथी संख कते गहीर जगागान जोडा लगचे.
- 3:01–3:03इसर्फ काचना,
- 3:03–3:05बलकी माथी क संगे एक ता समवेदनात्मक संबन डचे.
- 3:05–3:07आब एहे ताम जी सबह सवोचक बात आची,
- 3:07–3:11यह यह ताम जी सबह सवब्श़वात थख औज़,
- 3:11–3:14उएज़ कोईना एक ता प्राक्तिक सब्द विकसिख भूग,
- 3:14–3:17सहितिक अपाक कलाक विषिट रूप लोले थखछ.
- 3:17–3:20अंकूर जे भीज सनिकलल पहल प्रोह थखछ,
- 3:20–3:23उवस पष्ट रूप सक्रिषी सजुरल थखछ,
- 3:23–3:30उआदूनिक मैठिली सहित्ति में भोजन विन्यासक एक ता अती विषिष्ट शब्दावली बन जाए तची.
- 3:30–3:34इब हाशक विकास यात्रा के बहुत सुन्दर तरीका सदिखावे तची.
- 3:34–3:38बवाशक विकास यात्रा के बहुत सुन्दर तरीका सदिखावे तची.
- 3:38–3:42चरू तेसर कंद पर बड़े थची, श्रमक कबाशा,
- 3:42–3:46जते एक शब्द में पुरा एप्शास्त्र समाही तचे.
- 3:46–3:50आई जब बात चे, ये बहुत नीक जका दर सावाई तचे,
- 3:50–3:58अगर अद्बहल उधर हवा जे मजुरी में नगद या अनन नहीं लेके तीन दिन मालिक केत में हल चल बगीत अव.
- 3:58–4:03अव कर बदला में एक दिन अपन केत जोटबाकलें मालिक के हल लेके लेके ची.
- 4:03–4:17शब्द अच्छी अंगवर्या एकर अद्धभेल ओधर हवा जँ मजूरी में नगद या अनने नहीं लेके तीन दिन मालिक केच में हल चल बगीत अवो कर बदला में एक दिन अपन केच जोट्बाकलें मालिक के हल लगत अच्छी.
- 4:17–4:27सोचु, एक ता चोट सन्षब्द आपन आप में पुरा रोस्गारा कनुबंद, आप शास्ट्र अग्रामिर जीवन के एक ता जटिल भाटर सिस्टम के सपष्ट करहलत्ची.
- 4:27–4:33चारिम खन्द छे भोजनक सूख्ष्मता अप पाक कलाक अती विष्ष्ट्त्ता.
- 4:33–4:36खेद पतार्ट से निकली का आब भानस गर दिस चलेई ची.
- 4:36–4:46भानस गर में भाशाकोना पाचक परमपदा और सादन सब के आश्चीरे जनक सतीक कताक संगे वर्गी क्रित करे तची से देखु.
- 4:46–4:52इश्वद अंकत ग्रामीन कुषलता के एक ता बहुत सजीव चित्र प्रस्थ। करे तची
- 4:52–4:57इई एक प्रकार के गास चिये जे गेहुं चना या खहसारी के भीच जन में तची
- 4:57–5:02मुदैमात्र गास नहीं चिये एकर चोटो चोट गोल डाना हो इतची
- 5:02–5:04अगर से हो एक ता विषिष्ट नाम आँची
- 5:04–5:06अगर एक ता सपष्ट पाक कला उदेश्छ आचे
- 5:06–5:08इएच्छी सादन के आस्ली सदूप्योग
- 5:08–5:10आँ भोजन तयारिग विषाल शब्दावली पर विचार करी
- 5:10–5:12सर्फ आचारक लिल कतिक शब्द आची
- 5:12–5:16अब बोजन तयारिग विशाल शब्डावली पर विशार करी,
- 5:16–5:19अब बोजन तयारिग विशाल शब्डावली पर विशार करी,
- 5:19–5:22अब अचारक लिल कतिक शब्द अचार,
- 5:22–5:26अखर बात अचारक पातिल जही में अखरा राखल जाएत ची,
- 5:26–5:31बाशाल, जे उही में देल जाएत छी, इदेजी सब बधन सुची इप रमानित करेत छी,
- 5:31–5:34जे बोजन बनावे आँ उक्रा सुरक्षित राखबाक लेल,
- 5:34–5:38एही भाशा लक कते एक विशाल आँ विष्च्छ्ट शब्दावली समर पे तची.
- 5:38–5:44आप आप आँ चाए चे पाचम ख़द पर, दैनिक जिवनक वस्तु सब, विषेश रूप सा उपकरन आव्गी.
- 5:45–5:49बहनस गर सा आगु बड़क अब दैनिक जिवनक गरे लूँ वस्तु सपर द्रिष्टी दी.
- 5:49–5:57गरा एथिसवरस्वे अदबुद थाम देल गेल अगीक तुक्डा माने अंगार सजुडल शब्दावलिक उर्जा देख।
- 5:57–6:03अंगार कुडन जे अंगार कुरेदबाक अजार अचे अंगार चिम्ता गरम अंगार पकरबाक लेल,
- 6:03–6:15अंगार कुडन, जे अंगार कुरेदबाक अजार अचे, अंगार चिम्ता, गरम अंगार पकडबाक लेल, अंगार जाडन सफाकरबाक लेल, अंगार दान राखबाक पात्र, उकरभाद अंगार सनसी अ अंगी ती.
- 6:15–6:20बाशा लगा आंगी अखोईलाक संगे काज करवाक लेल उप्योग होगे वाला
- 6:20–6:24हरेग विषिष्ट उप्करनक लेल एक ता रडग समर पिट शबद अचे
- 6:24–6:30ता एते सबस महत्व पून बाती यचे जे उप्करनक उप्योग में
- 6:30–6:34तनिक्स न अंतर से हो शब्दावली के पुरी तरा बदली देता ची
- 6:34–6:37एते अंकुस आ अंकुड के देखू
- 6:37–6:44अंकुस ओ तेड हो जार अची जे कर उप्योग खाली या भरिल तादिक पात्र के उपर नीचा कर बाखे लिल हो लिए टाची
- 6:44–6:47मुदा अंकुड उटेड लोहक अजार अची,
- 6:47–6:52जे कर उप्योग लोहारक बातिमे कोला कुडबाक लिल होई तची.
- 6:52–6:55तुनु टेड होजार अची, मुदा अलग �alak काजक कारन,
- 6:55–6:57तुनु पूनत अलग नाम अचे.
- 6:57–7:27आब हम सब आपन विशलेशनक अन्तिम मने चथ्ध्धम कहन्द पर चीं सान्सक्रूतिक आत्माक सन्द्रक्षन एक ता जीवन्त ताईंगईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईई
- 7:27–7:40अब बारीक जीवन शेली के समेक दूरी में हेरावैसद सक्रियरुब सब आवे का एक तबगीरत प्रयास चे ये देखावे तच्छे जे कोना तकनीक का मददद से हम सब अपन अपन अपीत आवर्टमान के सुरक्षित का सके ची.
- 7:40–7:45आव आगो बड़ी आदेखी जे एक कोना एक ता नवबात बनवगत छी
- 7:45–7:49इविदे ही जोनल दवारा सन्रक्षित एक ता ओपिन सूर्स प्रोजेक्त है
- 7:49–7:53ए अथी प्राचीन अथी विष्च्ट् क्रिष्ट अग्रामीन सब्दावली के
- 7:53–7:57आदूनेक अपिन सूर्स तकनीक के माद्यम से न सुरक्षित करवाग
- 7:57–7:59अक ता बहुत सुन्दर संगम चे.
- 7:59–8:02मानुजेना आदूनेक तकनीक आपन कानो पर भेसाकग,
- 8:02–8:05प्राछीन द्रोहर के बहुविष्च्छत् लेजार हल होए.
- 8:05–8:08अन्त में यी सब देख लग बाद,
- 8:08–8:11अब एही बात पर विचार करबाक आवश्खता आची
- 8:11–8:15जे जो आजुक दैनिक जीवनक अती विष्ट शब्द सबके
- 8:15–8:17कोनो तिसोरस में जमा करल जाए,
- 8:17–8:20तो उब हविष्च्ट पीटी के हम्रा सबक विष्ट में की बतवेद?
- 8:20–8:26उएब अद्वेद जे आई हम्रा सबक लेल सब सब सबेसी मुल्यवान की आची
- 8:26–8:32हम्रा सब खे अपने दैनिक सब्दावलीक अद्रिष्ष्ख कलाक्रिती सब पर जरूर विचार कर बाख चाही
- 8:32–8:37ग्यान से बहरल एही विसलेशन में अंतदरी बनल रहवाक लेल बहुत-बहुत द्श्निवाद
Plain text
नमसकार, इही नव विष्लेशन में स्वागताच, आई हम सब एक तब वोड रोचक विष्षेपर गहीर चर्चा कर अब. कही उ सुचनी छी, जे मानव जाती कोना आपन चारु दीसक दुन्या के पहचानी तची, कोना उक्रनाम दे तची, अँ सबस्बेग बात कोना एक तप पुरा संस्क्रिती, उकर रहन सहन मात्र किचु सब्द में समाहिद भईजाएत छी, तचलू आई मेठली अंग्रेजी थिसवरस, मने मेठली समानर्ती कोशक एक ता अदबुत यात्रा पर चलेच ची, अदेखे चीजी इग कतक सम्रिद अविशाल अची. आब, सब से पहले आई संक्या पर गवर करी. एक लाक पन ताली सहजार एक सो चवालिस. इकोनो सादारन संक्या नहीं चे. इवेद्छली अंग्रेजी खिसारस में दरज कोल शब्धक संक्या चे. मतलब सोची सके ची? इकोनो भाशक विशालता अगगेराएक एक तजीबद जागित प्रमान ची? जो कक्रो लगए ची जे भाशा सरफ बात विचारक माद्यम ची, तई इविशाल अक्डा औजी सोचके पूरी तरह से बडले दई ची? इजे भागीरत प्रयास ची, इक ता आहन महाग्रन्त जे पूरा संस्क्रितेक, उकर दैनिक जीवनाक, आवकर वातावरनक, जीवन्त ताईम काप्सूल अची. इक ता आहन अती विषिष्ट संग्रह ची, जदे प्रत्थेख शब्द आपन भीतर इक ता गहीर इतिहास समप्टने आची. इही विशलेशन में हम सब मुक्हिरूपसन छोटा बाग पर गब करब पहल एक ता बाशाई समारग, तो सर क्रिषिक शब्दावली, तेसर श्रमक भाशा, चार्यम, भोजनक सुख्ष्मता, पाचम, दैनिक जीवनक वस्तु सब, अ अद्द में संस्क्रितिक आत्माक सरक्षन. तचलू पहल भाग सर शुरू करेच फीट. एक ता विशाल भाशाई समारक, जते हम सब संस्क्रितिक द्हरोहरक खोज करब. एही थिसोरस में दरज प्रतेख शब्द के ये स्वट आनुवादक नजर्ये से नहीं देखो. ये ये ये आजा नाजुख पूरा तात्विक द्रोहर जका आची, जक्रा हम सब माटिक नीचा से निकाली कै, उकर दूर जारी कै, अद्धियन कर रहल्ची. ये जे सगंता एते देख रहल्ची, अब आब आब एज़ाई छी तो सर भागपर, क्रिष्ष्ष्व्दावली, जे असल में क्रिष्ष्षक का आत्मा चे. अखार, अखार, प्रकार, सब किच्वेते अची यह अस्पष्ट करेत अची जे एह भाशा के अटेक सुक्श्मता से सुचीबद करवामे कते कडा परिष्षम लागल हैत आब आब एजाए ची तो सर बाख पर क्रिष्षिक शब्दावली जे आसल में क्रिष्वक का आत्मा चे. आब हम सब मैठली बाशी चेट्र, क्रिष्वक जडी दिस चलेच्छी. केती बादिख चे परीवेश अचे, उ कोना बाशा के गड़ाइ चे, इदिखव बड दिल्चस पचे. उदारनक लेल एज़़़द के लिज़िया. अन्तर, एकर अर्त अचे दूटा कब्ता या स्यारक भीच्ग कजगा. जगन खेप में हल चले चे, तो ओई दूटा लैनक भीच्ग जे खाली स्थान हो चे, उख्राले लिए ये एक्दम सतीक शब्द चब्द चे. उगराले लिये ये एक्दम सतीक शब्द आचे. ये देखावे दचे जे यी संस्क्रिती माथी संख कते गहीर जगागान जोडा लगचे. इसर्फ काचना, बलकी माथी क संगे एक ता समवेदनात्मक संबन डचे. आब एहे ताम जी सबह सवोचक बात आची, यह यह ताम जी सबह सवब्श़वात थख औज़, उएज़ कोईना एक ता प्राक्तिक सब्द विकसिख भूग, सहितिक अपाक कलाक विषिट रूप लोले थखछ. अंकूर जे भीज सनिकलल पहल प्रोह थखछ, उवस पष्ट रूप सक्रिषी सजुरल थखछ, उआदूनिक मैठिली सहित्ति में भोजन विन्यासक एक ता अती विषिष्ट शब्दावली बन जाए तची. इब हाशक विकास यात्रा के बहुत सुन्दर तरीका सदिखावे तची. बवाशक विकास यात्रा के बहुत सुन्दर तरीका सदिखावे तची. चरू तेसर कंद पर बड़े थची, श्रमक कबाशा, जते एक शब्द में पुरा एप्शास्त्र समाही तचे. आई जब बात चे, ये बहुत नीक जका दर सावाई तचे, अगर अद्बहल उधर हवा जे मजुरी में नगद या अनन नहीं लेके तीन दिन मालिक केत में हल चल बगीत अव. अव कर बदला में एक दिन अपन केत जोटबाकलें मालिक के हल लेके लेके ची. शब्द अच्छी अंगवर्या एकर अद्धभेल ओधर हवा जँ मजूरी में नगद या अनने नहीं लेके तीन दिन मालिक केच में हल चल बगीत अवो कर बदला में एक दिन अपन केच जोट्बाकलें मालिक के हल लगत अच्छी. सोचु, एक ता चोट सन्षब्द आपन आप में पुरा रोस्गारा कनुबंद, आप शास्ट्र अग्रामिर जीवन के एक ता जटिल भाटर सिस्टम के सपष्ट करहलत्ची. चारिम खन्द छे भोजनक सूख्ष्मता अप पाक कलाक अती विष्ष्ट्त्ता. खेद पतार्ट से निकली का आब भानस गर दिस चलेई ची. भानस गर में भाशाकोना पाचक परमपदा और सादन सब के आश्चीरे जनक सतीक कताक संगे वर्गी क्रित करे तची से देखु. इश्वद अंकत ग्रामीन कुषलता के एक ता बहुत सजीव चित्र प्रस्थ। करे तची इई एक प्रकार के गास चिये जे गेहुं चना या खहसारी के भीच जन में तची मुदैमात्र गास नहीं चिये एकर चोटो चोट गोल डाना हो इतची अगर से हो एक ता विषिष्ट नाम आँची अगर एक ता सपष्ट पाक कला उदेश्छ आचे इएच्छी सादन के आस्ली सदूप्योग आँ भोजन तयारिग विषाल शब्दावली पर विचार करी सर्फ आचारक लिल कतिक शब्द आची अब बोजन तयारिग विशाल शब्डावली पर विशार करी, अब बोजन तयारिग विशाल शब्डावली पर विशार करी, अब अचारक लिल कतिक शब्द अचार, अखर बात अचारक पातिल जही में अखरा राखल जाएत ची, बाशाल, जे उही में देल जाएत छी, इदेजी सब बधन सुची इप रमानित करेत छी, जे बोजन बनावे आँ उक्रा सुरक्षित राखबाक लेल, एही भाशा लक कते एक विशाल आँ विष्च्छ्ट शब्दावली समर पे तची. आप आप आँ चाए चे पाचम ख़द पर, दैनिक जिवनक वस्तु सब, विषेश रूप सा उपकरन आव्गी. बहनस गर सा आगु बड़क अब दैनिक जिवनक गरे लूँ वस्तु सपर द्रिष्टी दी. गरा एथिसवरस्वे अदबुद थाम देल गेल अगीक तुक्डा माने अंगार सजुडल शब्दावलिक उर्जा देख। अंगार कुडन जे अंगार कुरेदबाक अजार अचे अंगार चिम्ता गरम अंगार पकरबाक लेल, अंगार कुडन, जे अंगार कुरेदबाक अजार अचे, अंगार चिम्ता, गरम अंगार पकडबाक लेल, अंगार जाडन सफाकरबाक लेल, अंगार दान राखबाक पात्र, उकरभाद अंगार सनसी अ अंगी ती. बाशा लगा आंगी अखोईलाक संगे काज करवाक लेल उप्योग होगे वाला हरेग विषिष्ट उप्करनक लेल एक ता रडग समर पिट शबद अचे ता एते सबस महत्व पून बाती यचे जे उप्करनक उप्योग में तनिक्स न अंतर से हो शब्दावली के पुरी तरा बदली देता ची एते अंकुस आ अंकुड के देखू अंकुस ओ तेड हो जार अची जे कर उप्योग खाली या भरिल तादिक पात्र के उपर नीचा कर बाखे लिल हो लिए टाची मुदा अंकुड उटेड लोहक अजार अची, जे कर उप्योग लोहारक बातिमे कोला कुडबाक लिल होई तची. तुनु टेड होजार अची, मुदा अलग �alak काजक कारन, तुनु पूनत अलग नाम अचे. आब हम सब आपन विशलेशनक अन्तिम मने चथ्ध्धम कहन्द पर चीं सान्सक्रूतिक आत्माक सन्द्रक्षन एक ता जीवन्त ताईंगईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईई अब बारीक जीवन शेली के समेक दूरी में हेरावैसद सक्रियरुब सब आवे का एक तबगीरत प्रयास चे ये देखावे तच्छे जे कोना तकनीक का मददद से हम सब अपन अपन अपीत आवर्टमान के सुरक्षित का सके ची. आव आगो बड़ी आदेखी जे एक कोना एक ता नवबात बनवगत छी इविदे ही जोनल दवारा सन्रक्षित एक ता ओपिन सूर्स प्रोजेक्त है ए अथी प्राचीन अथी विष्च्ट् क्रिष्ट अग्रामीन सब्दावली के आदूनेक अपिन सूर्स तकनीक के माद्यम से न सुरक्षित करवाग अक ता बहुत सुन्दर संगम चे. मानुजेना आदूनेक तकनीक आपन कानो पर भेसाकग, प्राछीन द्रोहर के बहुविष्च्छत् लेजार हल होए. अन्त में यी सब देख लग बाद, अब एही बात पर विचार करबाक आवश्खता आची जे जो आजुक दैनिक जीवनक अती विष्ट शब्द सबके कोनो तिसोरस में जमा करल जाए, तो उब हविष्च्ट पीटी के हम्रा सबक विष्ट में की बतवेद? उएब अद्वेद जे आई हम्रा सबक लेल सब सब सबेसी मुल्यवान की आची हम्रा सब खे अपने दैनिक सब्दावलीक अद्रिष्ष्ख कलाक्रिती सब पर जरूर विचार कर बाख चाही ग्यान से बहरल एही विसलेशन में अंतदरी बनल रहवाक लेल बहुत-बहुत द्श्निवाद