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विदेह_शब्दकोष_आ_मैथिलीक_भाषाई_जीवटता.m4a

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Collection
Part 7 · VIDEHA MITHILA MAITHILI DISCUSSION CRITICISM SERIES PART 7
Status
asr-draft
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No
Editorial review
not-reviewed
ASR model
small
Detected language
hi (0.745588)
Duration
2:09
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  1. 0:00–0:05इबिदे अंग्रेजी मैठली सब्द्खोष अ मैठली भाषाक इस्थितिपर एक तवरित विमर्ष अचि।
  2. 0:06–0:11गजिंद्र थाकुर, नागिंद्र कुमार जा, आ पंजिकार विद्यानन्द जाएक तध्यार कैल,
  3. 0:11–0:15इस शब्द्कोश मात्र अंग्रेजी मेतली सब्दक संग्राह नहीं
  4. 0:15–0:17बलकी हमरा आहाक भाशाक संगर्ष,
  5. 0:17–0:21जीवड्ता, आए दियातिक विकासक एक्ता
  6. 0:21–0:22बहुत रोचक गवाहा ची.
  7. 0:22–0:24पहल बात सरकारी आख्डा
  8. 0:24–0:27अजमीनी हकीकत बीच कप पैगंटर.
  9. 0:27–0:32प्रस्द भाशाविद प्रफेसर उदैन अरायंज सिंग अपन प्रस्टावना में कहे च्छति,
  10. 0:32–0:36जे मैत्हली बजवयाक आसल संक्या लगबभग चारी करोडा ची.
  11. 0:36–0:40इदूहाजार एक क सरकारी जंगरनासे बहुत बेशी एची,
  12. 0:40–0:44जदे मात्र एक दशम्लब दो करोड दर्जजची
  13. 0:44–0:48आब आही कहु, कि सरकारिया अक्डा, कुनोक शित्री बाशाक
  14. 0:48–0:51आसली विस्तार देखा पाभे तची
  15. 0:51–0:54इत एक दम वहिना भेल, जेहिना कुनो विशाल आइस बर्ग के
  16. 0:54–0:58अपन्त्र उपरी हिस्चा देखाब आस्मुन्द्रक निचाक पहाडके भिस्री जाएब.
  17. 0:59–1:05तो सर, जखन चार करो लोक कोनो भाशा बजेच्छती, तो उखनो बंद बक्सा में नहीं रहसके तची.
  18. 1:05–1:08मैत्ली अपन चारो कात के बाशा
  19. 1:08–1:10जेना भूजपूरी, मगही,
  20. 1:10–1:13हिंदी आ अंगरेजिक भीच एकदम जीवनत छी,
  21. 1:13–1:15ये एक ता बहेत नदी जका आ ची,
  22. 1:15–1:19जे विकासक लेल नव जल्दारा के अपना में समेटेच छी,
  23. 1:19–1:21शुद्दता वादी बनवाग बदला
  24. 1:21–1:25मैत्हली अंग्रेजी सहित आन भाशाक नव शवद के सहर शबनावल अल ची
  25. 1:25–1:30आईईश्वद कोश उही बदलएट शवदावली के बहुत नीक सदरज करे तची
  26. 1:30–1:34तेसर आ अन्तिम बात एकर वेग्यनिक आ उप्योगी बनावद
  27. 1:34–1:42दिखू, इं मात्र अर्थक कुनो लिस्त नहीं ची, इताई उच्चारन स्पष्ट करवाक लेल अंद्राश्च्च्र यदहने आत्मक लिपी,
  28. 1:42–1:47आपन प्राछीन लिपी मित्लाख्षर अ देवनागरिक एक्दम नीक प्रियोग बेलाची,
  29. 1:47–1:50संगे संगे व्याख्रना कोटी सहो दिलगे लची
  30. 1:50–1:54माने कोनो विस्त पाथक के लेल ये एक दंप्रफेक तूल आचे
  31. 1:54–1:58जटै उच्चारन सल्लो का अर्थदरी सब किचु सबष्त आची
  32. 1:58–2:01संख्षेप में विदे हंगरे जी मैत्यली सब्द्खोश
  33. 2:01–2:09मात्र शब्दक अन्वादनै, बलकी कोरो मेठेलिक सान्स्रतिक पहजान, अब वाशाग विकासक एक ता प्रामनिक दस्तावेज अची.

Plain text

इबिदे अंग्रेजी मैठली सब्द्खोष अ मैठली भाषाक इस्थितिपर एक तवरित विमर्ष अचि। गजिंद्र थाकुर, नागिंद्र कुमार जा, आ पंजिकार विद्यानन्द जाएक तध्यार कैल, इस शब्द्कोश मात्र अंग्रेजी मेतली सब्दक संग्राह नहीं बलकी हमरा आहाक भाशाक संगर्ष, जीवड्ता, आए दियातिक विकासक एक्ता बहुत रोचक गवाहा ची. पहल बात सरकारी आख्डा अजमीनी हकीकत बीच कप पैगंटर. प्रस्द भाशाविद प्रफेसर उदैन अरायंज सिंग अपन प्रस्टावना में कहे च्छति, जे मैत्हली बजवयाक आसल संक्या लगबभग चारी करोडा ची. इदूहाजार एक क सरकारी जंगरनासे बहुत बेशी एची, जदे मात्र एक दशम्लब दो करोड दर्जजची आब आही कहु, कि सरकारिया अक्डा, कुनोक शित्री बाशाक आसली विस्तार देखा पाभे तची इत एक दम वहिना भेल, जेहिना कुनो विशाल आइस बर्ग के अपन्त्र उपरी हिस्चा देखाब आस्मुन्द्रक निचाक पहाडके भिस्री जाएब. तो सर, जखन चार करो लोक कोनो भाशा बजेच्छती, तो उखनो बंद बक्सा में नहीं रहसके तची. मैत्ली अपन चारो कात के बाशा जेना भूजपूरी, मगही, हिंदी आ अंगरेजिक भीच एकदम जीवनत छी, ये एक ता बहेत नदी जका आ ची, जे विकासक लेल नव जल्दारा के अपना में समेटेच छी, शुद्दता वादी बनवाग बदला मैत्हली अंग्रेजी सहित आन भाशाक नव शवद के सहर शबनावल अल ची आईईश्वद कोश उही बदलएट शवदावली के बहुत नीक सदरज करे तची तेसर आ अन्तिम बात एकर वेग्यनिक आ उप्योगी बनावद दिखू, इं मात्र अर्थक कुनो लिस्त नहीं ची, इताई उच्चारन स्पष्ट करवाक लेल अंद्राश्च्च्र यदहने आत्मक लिपी, आपन प्राछीन लिपी मित्लाख्षर अ देवनागरिक एक्दम नीक प्रियोग बेलाची, संगे संगे व्याख्रना कोटी सहो दिलगे लची माने कोनो विस्त पाथक के लेल ये एक दंप्रफेक तूल आचे जटै उच्चारन सल्लो का अर्थदरी सब किचु सबष्त आची संख्षेप में विदे हंगरे जी मैत्यली सब्द्खोश मात्र शब्दक अन्वादनै, बलकी कोरो मेठेलिक सान्स्रतिक पहजान, अब वाशाग विकासक एक ता प्रामनिक दस्तावेज अची.

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