MACHINE ASR ACCESSIBILITY AID

प्राचीन_संस्कृत_भाण__एकालाप.mp4

Not an editorially verified transcript. This text was generated automatically from the preserved recording and may contain recognition, language-detection, spelling, segmentation or name errors. Consult the source recording for authoritative content.
Collection
Part 8 · VIDEHA MITHILA MAITHILI DISCUSSION CRITICISM SERIES PART 8
Status
asr-draft
Human verified
No
Editorial review
not-reviewed
ASR model
small
Detected language
hi (0.719554)
Duration
7:00
Source
Open preserved recording

Timestamped machine output

  1. 0:00–0:04आव, आई हम सब एक ता बद्व, रोचक विवेचना में प्रवेष करी,
  2. 0:04–0:09जते हम सब प्राषीन संस्क्रित नाटकक उत्क्रिष्ट मैतली अनुवादक माध्विम्सा,
  3. 0:09–0:15प्राषीन भारतक, जीवन्त, विंग्यात्मक, और रंगीन सदक सबखक सेर करब.
  4. 0:15–0:19आईकेर यी विवेचना हमरा सब के अनेक विषेपर लोगजाएत
  5. 0:19–0:30एका लाप संसक्रित नाटक से लोकर, विट्सपरिचे, नगरक वसन्त, सडग का व्यांग्य, मनसुनक राती, आ अन्ततत, शाश्वत शहरी हास्इदरी.
  6. 0:30–0:37पहले तो हम्रा सब खे इबुजनाई चाही जे आखिर इएकाल आप संसक्रित नातक चाएकी
  7. 0:37–0:42इजे पहार चे ने इप्राचीन भारतक एक्ता बर अदबुत नातकी अविदातेक
  8. 0:42–0:51इमे एक ता अकेला अबिनेता मंज बर थाडबखर अद्रिश्ष्य पात्रक संगे गब करेत पृरा शहरक चहल पहल की जीवन्त कदेत अची.
  9. 0:51–0:57माने अबिनेता उही लोकनेक प्रतिक्रिया देच्छे जक्रा मात्र उस्वेम देखी रहल चे.
  10. 0:57–1:02आजा कल्पनी करू एकर लेल कते के बेशी कोशलक आवच्षकत हो इते.
  11. 1:02–1:07आप सवाल एई उठाइच जे ओएक मात्र पात्र अखिर च्ठिन के,
  12. 1:07–1:11जे हमरा सब के एही नातिक यह दून्याक सेर करवाएच च्ठिन.
  13. 1:11–1:14बेटू विट सां, विट कोनो सादारन लोग नहीं,
  14. 1:14–1:17अवर सबहक करिष्माई मरक्दर्षक छती
  15. 1:17–1:20आई हम सब दूता अलगलग नाटक अख,
  16. 1:20–1:22दूता भिन्न विट्क पाज्व पाज्व चलब,
  17. 1:22–1:25जि पुरा शहरक प्रेमी अपाख हुन्दी सबखख अवलोकन करच्छती
  18. 1:25–1:28तच्छलू, हम सब पहल नाटक दिस अगाबडी
  19. 1:28–1:35तच्छल। हम सब पहल नाटक दिस अगा बडी महाकवी शुद्रक रचित पद्म प्राभ्रितकम,
  20. 1:35–1:38जकर मैठली में अर्थ होएच है कमलक भेट.
  21. 1:39–1:42कलपना करू हमर सबख पहल्वेट शष्च,
  22. 1:42–1:46वसन्तक एक ता बड नीक भोर में गर सबाहर निकलाईच छती.
  23. 1:46–1:49इप वित आपन मित्र कनी पुट्र के प्रेमक विरह में तदबाइत दिखाईच्छती,
  24. 1:49–1:52दो सर उ उक्रा लेल उजैनिक व्यास्त शडगग पर निकली जाएच्छती,
  25. 1:52–1:56वित आपन मित्र कनी पुत्र के प्रेमक विरह में तदबआइत दिख़ाइचा थी.
  26. 1:56–2:00तो सर उ उ अख्राल लेल उ जैनिक व्यास्त तदख पर निकली जाएचा थी.
  27. 2:00–2:05और ते सर उ सुंदरी देव सेना से प्रेमक एक ता प्रतिक प्राथग प्राथग राएचा थी.
  28. 2:05–2:10पहल वित आपन मित्र कनी पुत्र के प्रेमक विरह में तदबःत दिखाई चाति,
  29. 2:10–2:14दो सर उ उक्राल लेल उ जैनिक व्यास्त सडग पर निकली जाए चाति,
  30. 2:14–2:19और ते सर उ सुंदरी देव सेना से प्रेमक एक ता प्रतिक प्राप्त कर अई चाति,
  31. 2:19–2:24वित्त यते दूता प्रेमिक भीच एक चतूर दूत कर काज कर रहल चतूर.
  32. 2:25–2:28मुदा रूकु वित्तक की यात्रा एतिका सान नहीं चे,
  33. 2:29–2:34बात मिश शहरक, हास्यास पद अप पाकहन्डी लोकनी उनका पगपग पर परिशान कर एच चतूर.
  34. 2:34–2:40तप्राचीन काला के वियास्त सबग़क पर विट किक्रा किक्रा से भीटेच छती
  35. 2:40–2:47यता ए प्राचीन लेक्ख, विटक आखिसा औही समया तथा कतित प्रतेष्थ लोकनिक पाखचन पर जे विंग कैने चती
  36. 2:47–2:54वितक सामना जेहन-जेहन लोग सहोएत चे से सूनी के आहाखे हंसी चुट्जात
  37. 2:54–2:59एक ता कवी चती जी वसन्त पर कवीता लिखबाक लेल संगर्ष करहल चती
  38. 2:59–3:02एक ता वया करन चती जी कतु भाशा मे भाजी रहल चती
  39. 3:02–3:07एक तपवित्र वेशनव चति, जि भितर-वितर वेश्याक प्रति लालाएद चति,
  40. 3:07–3:12आए एक तपाक्हन्दि बोध भिख्षू सहीो चति, जि चुपी का वेश्या पूरी जारहल चति.
  41. 3:12–3:16इसव देखी का बुजना जाइत चे, जि प्राचीन शहर सबहे में सही,
  42. 3:16–3:46अब एही हास्यास्पट तक्राउपर विचार करू, एक दिस वययाकरन दद्त कलष चती, जे हैरान चती, जे वेश्या उनका से की एक रूसल च्ये, अदो सर दिस विट च्यती, जे चुटकी लैइत कहे च्यती जे बहाई प्रेमक मामला में कतोर व्याकरनक नियम चिलेना कुन
  43. 3:46–3:53विट यते हुंकर कडा उपहास करीत कहे चती जे आहा किता अपन मुडल मात कर लाज रक्बाक चाही,
  44. 3:53–3:57यी उही समय कपाक्चन्ड पर एक तब दद्टिक्षन प्रहार थिक.
  45. 3:57–4:04क्यर एही सब अराजक्ता सब चाएत विट अंततह देव्सीना सवु कमलक भेट लोले थे चत.
  46. 4:04–4:06येज खुचल मुचल लाल कमल चैं है,
  47. 4:06–4:09ये येज खुचल मुचल लाल कमल चैं है,
  48. 4:09–4:11ये येज बातक पक्का प्रमान चैं,
  49. 4:11–4:14जे देव सीना सो आपन प्रीमी कनी पुत्रलेल,
  50. 4:14–4:16औहीना विरहम चट पता रहल चतीं.
  51. 4:16–4:17आब हम सब,
  52. 4:17–4:25वसन्तक वही उजर भोर्स निकली कदोसर नातक दिसबर है चेए, इश्वर दद्तक दूर्त विट समवाद हो.
  53. 4:26–4:30एते दूनु नातक परीवेशक चे अंतर चे सिद्यान देभा योग्य चे.
  54. 4:30–4:37पहिल नातक मे वसन तक भूर चल मुदा एह दोसर नातक मे अंदार अबहारी मान्सूनक राती चे.
  55. 4:37–4:43इ मान्सूनक राती कुसुम्पृ नगरक पात्रक औहि तीब्र अ बेचाईन प्रेमक लालसा के नदर शाईवए चे,
  56. 4:43–4:46जे पहिल नातक सा एक्दम अलक चे.
  57. 4:46–4:55अब वीज़्िली क्रोदित इस्ट्रीक भाँजका चमकएज्छे एक्दम कमालक वरनन चे,
  58. 4:55–5:08इस टीक रूप सम बतार रहल जे एहन बारी बरका के बादू विट्वासनाक वषिबूद भाँका सदक पर गूमे ले खेएक विवष्ष्षत्फी.
  59. 5:08–5:38वेश्या पूरिक मद्सद गुजरेद विट जे देख़ेत चचतिन ओत प्राचिन नाइत लाईपक एक ता मास्टर क्लास चट्रचे चट्रचे, चचत्पर मयूर नाच रहल चे, नव यूवक चूवा खेले आप्रेमिका सभेटेल चूपकी निकली रहल चचतिन, और गर सब
  60. 5:38–5:48उनका लोक निक अनुसार इपिता सब कला अप्रेम कोही आप्री आनन्सप्पूनता वन्चिच्छति जे एक ता कला प्रेमी गनिका सबहिट सकेच हैं.
  61. 5:48–5:52आप जकन हम सब एही विवेचनाक अन्त दिश आभी रहल ची,
  62. 5:52–5:58तो हमरा सब के एविचार करवाग चाही जे कोन बात एदूनो कता के एक संगे जो रजचे.
  63. 5:58–6:03प्राची इन विजक दिन चर्या पर गवर करू, भोर में फूलक भजार,
  64. 6:03–6:06दूपर में पाकहन्दी भिख्षुक अववया करन्द से बहिस,
  65. 6:06–6:10बहिस आर राती में मान्सुन के भीच वेश्या पुरेक ब्रमन,
  66. 6:10–6:14इस साव साव देखार होल चे जे शेहरक जे लेएचेने उ
  67. 6:14–6:17हस्थारो वर्ष में बहुत भेशी नहीं बडल लगची.
  68. 6:17–6:19तए एई साहम्रा सब के की सीक भेटल,
  69. 6:19–6:25इजे जो आहा शास्त्रे कविता और जटिल मन्चन सागुबडि के दिखव,
  70. 6:25–6:29तई प्राचीन नातक मुलता हमरहाक परिछित मानवे कमी,
  71. 6:29–6:31दोंग आ लालसा कता थे.
  72. 6:31–6:35इबहावना सब सरव कालिक चे जे कहीो नई बदलेच चे.
  73. 6:35–6:38आब अन्त में एक ता विचार करवा योगय बात अचे
  74. 6:38–6:43सुचुता जब कोनो प्राचीन विटर आई आहा के शहरक सडग पर गूमती
  75. 6:43–6:49तो उआपन एक लाप में कों-कोन आदूनिक पाखंडी और प्रेमी लोकनिक विंगु रेता
  76. 6:49–6:57इप्रश्न, हम्रा सब खे आपन आदूनिक शेहरी जीवन के हास्सेके नोन जर्या से देखबा लेल प्रिरिद करेच्छे, आखी विचार चे.

Plain text

आव, आई हम सब एक ता बद्व, रोचक विवेचना में प्रवेष करी, जते हम सब प्राषीन संस्क्रित नाटकक उत्क्रिष्ट मैतली अनुवादक माध्विम्सा, प्राषीन भारतक, जीवन्त, विंग्यात्मक, और रंगीन सदक सबखक सेर करब. आईकेर यी विवेचना हमरा सब के अनेक विषेपर लोगजाएत एका लाप संसक्रित नाटक से लोकर, विट्सपरिचे, नगरक वसन्त, सडग का व्यांग्य, मनसुनक राती, आ अन्ततत, शाश्वत शहरी हास्इदरी. पहले तो हम्रा सब खे इबुजनाई चाही जे आखिर इएकाल आप संसक्रित नातक चाएकी इजे पहार चे ने इप्राचीन भारतक एक्ता बर अदबुत नातकी अविदातेक इमे एक ता अकेला अबिनेता मंज बर थाडबखर अद्रिश्ष्य पात्रक संगे गब करेत पृरा शहरक चहल पहल की जीवन्त कदेत अची. माने अबिनेता उही लोकनेक प्रतिक्रिया देच्छे जक्रा मात्र उस्वेम देखी रहल चे. आजा कल्पनी करू एकर लेल कते के बेशी कोशलक आवच्षकत हो इते. आप सवाल एई उठाइच जे ओएक मात्र पात्र अखिर च्ठिन के, जे हमरा सब के एही नातिक यह दून्याक सेर करवाएच च्ठिन. बेटू विट सां, विट कोनो सादारन लोग नहीं, अवर सबहक करिष्माई मरक्दर्षक छती आई हम सब दूता अलगलग नाटक अख, दूता भिन्न विट्क पाज्व पाज्व चलब, जि पुरा शहरक प्रेमी अपाख हुन्दी सबखख अवलोकन करच्छती तच्छलू, हम सब पहल नाटक दिस अगाबडी तच्छल। हम सब पहल नाटक दिस अगा बडी महाकवी शुद्रक रचित पद्म प्राभ्रितकम, जकर मैठली में अर्थ होएच है कमलक भेट. कलपना करू हमर सबख पहल्वेट शष्च, वसन्तक एक ता बड नीक भोर में गर सबाहर निकलाईच छती. इप वित आपन मित्र कनी पुट्र के प्रेमक विरह में तदबाइत दिखाईच्छती, दो सर उ उक्रा लेल उजैनिक व्यास्त शडगग पर निकली जाएच्छती, वित आपन मित्र कनी पुत्र के प्रेमक विरह में तदबआइत दिख़ाइचा थी. तो सर उ उ अख्राल लेल उ जैनिक व्यास्त तदख पर निकली जाएचा थी. और ते सर उ सुंदरी देव सेना से प्रेमक एक ता प्रतिक प्राथग प्राथग राएचा थी. पहल वित आपन मित्र कनी पुत्र के प्रेमक विरह में तदबःत दिखाई चाति, दो सर उ उक्राल लेल उ जैनिक व्यास्त सडग पर निकली जाए चाति, और ते सर उ सुंदरी देव सेना से प्रेमक एक ता प्रतिक प्राप्त कर अई चाति, वित्त यते दूता प्रेमिक भीच एक चतूर दूत कर काज कर रहल चतूर. मुदा रूकु वित्तक की यात्रा एतिका सान नहीं चे, बात मिश शहरक, हास्यास पद अप पाकहन्डी लोकनी उनका पगपग पर परिशान कर एच चतूर. तप्राचीन काला के वियास्त सबग़क पर विट किक्रा किक्रा से भीटेच छती यता ए प्राचीन लेक्ख, विटक आखिसा औही समया तथा कतित प्रतेष्थ लोकनिक पाखचन पर जे विंग कैने चती वितक सामना जेहन-जेहन लोग सहोएत चे से सूनी के आहाखे हंसी चुट्जात एक ता कवी चती जी वसन्त पर कवीता लिखबाक लेल संगर्ष करहल चती एक ता वया करन चती जी कतु भाशा मे भाजी रहल चती एक तपवित्र वेशनव चति, जि भितर-वितर वेश्याक प्रति लालाएद चति, आए एक तपाक्हन्दि बोध भिख्षू सहीो चति, जि चुपी का वेश्या पूरी जारहल चति. इसव देखी का बुजना जाइत चे, जि प्राचीन शहर सबहे में सही, अब एही हास्यास्पट तक्राउपर विचार करू, एक दिस वययाकरन दद्त कलष चती, जे हैरान चती, जे वेश्या उनका से की एक रूसल च्ये, अदो सर दिस विट च्यती, जे चुटकी लैइत कहे च्यती जे बहाई प्रेमक मामला में कतोर व्याकरनक नियम चिलेना कुन विट यते हुंकर कडा उपहास करीत कहे चती जे आहा किता अपन मुडल मात कर लाज रक्बाक चाही, यी उही समय कपाक्चन्ड पर एक तब दद्टिक्षन प्रहार थिक. क्यर एही सब अराजक्ता सब चाएत विट अंततह देव्सीना सवु कमलक भेट लोले थे चत. येज खुचल मुचल लाल कमल चैं है, ये येज खुचल मुचल लाल कमल चैं है, ये येज बातक पक्का प्रमान चैं, जे देव सीना सो आपन प्रीमी कनी पुत्रलेल, औहीना विरहम चट पता रहल चतीं. आब हम सब, वसन्तक वही उजर भोर्स निकली कदोसर नातक दिसबर है चेए, इश्वर दद्तक दूर्त विट समवाद हो. एते दूनु नातक परीवेशक चे अंतर चे सिद्यान देभा योग्य चे. पहिल नातक मे वसन तक भूर चल मुदा एह दोसर नातक मे अंदार अबहारी मान्सूनक राती चे. इ मान्सूनक राती कुसुम्पृ नगरक पात्रक औहि तीब्र अ बेचाईन प्रेमक लालसा के नदर शाईवए चे, जे पहिल नातक सा एक्दम अलक चे. अब वीज़्िली क्रोदित इस्ट्रीक भाँजका चमकएज्छे एक्दम कमालक वरनन चे, इस टीक रूप सम बतार रहल जे एहन बारी बरका के बादू विट्वासनाक वषिबूद भाँका सदक पर गूमे ले खेएक विवष्ष्षत्फी. वेश्या पूरिक मद्सद गुजरेद विट जे देख़ेत चचतिन ओत प्राचिन नाइत लाईपक एक ता मास्टर क्लास चट्रचे चट्रचे, चचत्पर मयूर नाच रहल चे, नव यूवक चूवा खेले आप्रेमिका सभेटेल चूपकी निकली रहल चचतिन, और गर सब उनका लोक निक अनुसार इपिता सब कला अप्रेम कोही आप्री आनन्सप्पूनता वन्चिच्छति जे एक ता कला प्रेमी गनिका सबहिट सकेच हैं. आप जकन हम सब एही विवेचनाक अन्त दिश आभी रहल ची, तो हमरा सब के एविचार करवाग चाही जे कोन बात एदूनो कता के एक संगे जो रजचे. प्राची इन विजक दिन चर्या पर गवर करू, भोर में फूलक भजार, दूपर में पाकहन्दी भिख्षुक अववया करन्द से बहिस, बहिस आर राती में मान्सुन के भीच वेश्या पुरेक ब्रमन, इस साव साव देखार होल चे जे शेहरक जे लेएचेने उ हस्थारो वर्ष में बहुत भेशी नहीं बडल लगची. तए एई साहम्रा सब के की सीक भेटल, इजे जो आहा शास्त्रे कविता और जटिल मन्चन सागुबडि के दिखव, तई प्राचीन नातक मुलता हमरहाक परिछित मानवे कमी, दोंग आ लालसा कता थे. इबहावना सब सरव कालिक चे जे कहीो नई बदलेच चे. आब अन्त में एक ता विचार करवा योगय बात अचे सुचुता जब कोनो प्राचीन विटर आई आहा के शहरक सडग पर गूमती तो उआपन एक लाप में कों-कोन आदूनिक पाखंडी और प्रेमी लोकनिक विंगु रेता इप्रश्न, हम्रा सब खे आपन आदूनिक शेहरी जीवन के हास्सेके नोन जर्या से देखबा लेल प्रिरिद करेच्छे, आखी विचार चे.

← Transcript index