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संस्कृत_भाणक_मैथिली_अनुवादक_गम्भीर_समीक्षा.m4a
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- 0:00–0:07प्रस्तुत समगरी चारी प्राषीन संस्क्रित भान मने एक अंकी नाटक कमेठली अनुवाद छी,
- 0:07–0:15जाही में तत्कलीन पातली पुत्र अ उजैनिक, श्रिंगारिक समाज अविटक का एक अलापक विस्त्र चित्रन छी.
- 0:15–0:19आप, आप म्सीदे उई बात पर आवे चाहव,
- 0:19–0:23जे एही अनुवाद के पदध काल हमर पहल मुख्य बिन्दू बनल
- 0:23–0:28औची आद्रूनिक पाथका से समवाज स्तापित करवाग चुनाउती
- 0:28–0:33मने आही पाथ में जे संसक्रतिक संदर्ब सवची तकर बात कर रहल ची
- 0:33–0:38इक दम, अनुवादक काव्यात्मकता तो बहुत उच्छ स्टरा कचे,
- 0:38–0:45मुदा कम्जोरी ईए चे, जे पार्ट सोजे उही प्राचीन भानक जदेल दून्या में प्रवेश कर जाए जाच्छी,
- 0:45–0:47बिना कनो पूर्व पीटी काग.
- 0:47–0:49रहा, ये तो हम हु मैं सुस्केल.
- 0:49–0:55जो हमरा सब अनुवादक का उदेश़पर विचार करी ता इी मात्र शबदक हेर फेर नहीं आची
- 0:55–0:58ये ता पाथक के उई कालक्शन्ड में लोग जावे कची
- 0:58–1:01एक तरह कर जना कहो तेलीपोटेशन
- 1:01–1:05तेलीपोटेशन? रहा, इे बहुत नीक शबद कहलु आचा
- 1:05–1:13अम जखन पन्दूली पी पडलों, तो हमरो रही अनबाबिल ज़ हम अचानक से प्राचीन उजैनिक के भीच सदक पट्ध हार ची.
- 1:13–1:16मुदा आहा कोलो कोनो नक्षा नहीं आची?
- 1:16–1:22भिलकोल, नक्षा नहीं आची, जेना एही नाटकक मोक्धे पात्र आची विट.
- 1:22–1:27आहां सोच रहा हो लग जी इविट समाज में की बूमिकार कही तची
- 1:27–1:29आहां, की इगोनो राजा थिक?
- 1:29–1:33वाग, कोनो विदुशक थिक, वा व्यापारी थिक
- 1:33–1:40अदूनिक मेठली पातकग लेल तई शब्द आएकर पूराजे समाजिक संदर भची से एक दम अपरिची तची.
- 1:40–1:44तिक अही ताम हमर ध्यान सोगेल.
- 1:44–1:51ताही लेल हमर सुजाव एजी जे अनुवादग गती अ साहितिक संदरे के बादित कैने बिना
- 1:51–1:56प्रत्तेक नाटकक आरंभ में एक ता बहुत संख्षिप्त संस्क्रितिक प्रिष्ट भूमी
- 1:56–1:58वच्छोट भूमी का जोडल जाये.
- 1:58–2:02मुदा जिना की हम एही नोट्सच्स छे भूजी रहल ची
- 2:02–2:06एताई उद्टेशता प्राचीन रसके आदूनिक भाशा में
- 2:06–2:08अबाद्रूब से अन्नाया ची
- 2:08–2:10अग, इक दम अबाद्रूब सेन
- 2:10–2:13तक की यी तिपनी वबहुमिका जोडल सां
- 2:13–2:15सहित्तिक प्रवाबादित नहीं हो एद
- 2:15–2:19मने यी तजन कोनो गीत बीच में रुकी का
- 2:19–2:21गीत का अर्थ बुजहावे सन बोजगद
- 2:21–2:23आहा के चिन्ता भील्कुल जायेजाची
- 2:23–2:28ताहीलेल हम गी तक भीच मे रुक कप फृटनोट देबाग बात नहीं करोल ची
- 2:28–2:33हमर सुजाव आची जे इटिप पनी नातकक मुख्य समवादा सब पहले देलजाए
- 2:33–2:39अहो! माने नातक शूरू होई बाख कपहिने एक ता चोट सन क्ष्ट की खूली देल जाए.
- 2:39–2:45एदम सही! जाहे सा प्रवाह नहीं तुटे, आउ एक रा एक ता थोस उदारन समबूजी,
- 2:45–2:50जैना दूर्त विट समवादा हमे जकन विट वर्षा रितुक समः,
- 2:50–2:54अग, उस दग पर चलत वेविन लोग सां गब करे तची
- 2:54–2:56ये रास्ता पर चलत गब कर अट्ट्टी मात्र
- 2:56–2:59अग, मुदा जै हम नाटकक आरंभ में
- 2:59–3:02मातर एक दू पंक्ती में इस पष्ट कर दैए
- 3:02–3:05वित ततकालीन समाजक एक ता सुसं सक्रित चतुर ज़ूग
- 3:05–3:07जे बिना मतलपक गब हाखी रहल अची
- 3:07–3:10जे रास्ता पर चलएत गब कर अची मात्र
- 3:10–3:13आँ, मुदा जै हम नाटकक आरंभ में
- 3:13–3:15मातर एक दू पंकती में
- 3:15–3:16इई इस पष्ट कर दैई
- 3:16–3:19जे विट ततकालीन समाजक एक ता सुसं सक्रित
- 3:19–3:22चतृर आख कलाप्रेमी मद्यस्त चल
- 3:35–3:36त्यदेक सम्रिद करत्
- 3:36–3:38रहां, हम भूजी रहां ची
- 3:38–3:43जकन पाथक के इब उचल रहां जे एकोनो सादारन व्यक्ती नहीं आची
- 3:43–3:45तो अकर समवाद में जे व्यंग आची
- 3:45–3:48तकरा पाथक बहुत गेराए सा महसुस करत्
- 3:48–3:49बल्कुल
- 3:49–3:52आई सव और तेलीपोटेशन सफल होगी तची
- 3:52–3:55आजज हमरा सब पाटक अनुबव कबात कर रहलची
- 3:55–3:57तव हमर दो सर मुख्य बिन्दू
- 3:57–4:01सीदे पाटक कमस्षक अद्रिष्ट अनुबव सज़ोडालची
- 4:01–4:05अहा सन्रचना अप प्रवाह कगब कर रहलची
- 4:05–4:35अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अ�
- 4:35–4:37अपर बदली का इस पष्ट करे तची
- 4:37–4:39जि कखन उ आपन बाद को रहाल ची
- 4:39–4:42अखखन उ दोसरक बाद दोरा रहा रहा लजी
- 4:42–4:45मुदः पन्ना पर अभी नेता तगाया बची
- 4:45–4:46भिलकुल गाया बची
- 4:46–4:48हम जखन पडी रहाल चलू
- 4:48–4:50तलगा तार की कहे चै
- 4:50–4:55यह सन्वाख्या एक एक परग्राव में बिना कुन द्रिष्य अंपर कर अखल गेल अची.
- 4:55–5:02आ, एक हन्द अनुवादक शाब्दिक शुभ्द्दता पाटकक द्रिष्यस अनुभाव पर भारी परिजायता ची.
- 5:02–5:07पाटकक के मोंपार्भामे भारी कष्ट होगी तची, जे के बाजी रहालाची
- 5:08–5:14आउ एक हन्द पर द्यान दी, जटे विट लगातार समवाद दोराए रहालाची
- 5:14–5:19इत जना बिना विराम चिन्नध कोनो लंभा पत्र पडवासन आची
- 5:19–5:24एक दम, मस्तिष्ट के एप रक्रिया करभामे बहुत उर्जा लगा एच्छे.
- 5:24–5:31ताहे लेल हमर सुजाव एच्छे जे कालपनेक समवाद आव वास्तवेक एक लाप के अलग-गलक दिखाई वलेल,
- 5:31–5:35ताइपोग्राफिक बद्लाव वा फोमातिंक का उप्योग करल जाए.
- 5:35–5:39ता इपो ग्रापिक बद्लाव मने इतलिक्स वह कुचेहन?
- 5:39–5:44रहा, इप वामाटिंक बद्लाव मंज कर लटिंग बदल बा संकाच करत.
- 5:44–5:46औरे वाए, इई आनलोजी बहुत नी कछी.
- 5:46–5:49जना मंच पर लटिंग बदले तची,
- 5:49–5:54तब पाट्कक मस्तिष्कके तुरन्संकेद भेटाई चे जे आप दिश्ष बदली रहल ची.
- 5:54–5:58एक दम. आँ एक रा एक तध उदारन्स एस पष्ट करी,
- 5:58–6:03जकन उभ्याविसारिका मे विट कहे तची, की कहे च्छा?
- 6:03–6:05अलब वादन करे ची.
- 6:05–6:09तए तई विटकर आपन प्रशन चे की कहे चा?
- 6:09–6:24वाप हेर उक्रा एक ता रग पंक्ती में इंडेंट कर के रखल जा सके चे.
- 6:24–6:30बलक्ल एसा पाथक के समवादक के नाटके तेराव सपच्ट रूप से भुजाएत.
- 6:30–6:34जेना आई काली हमरा सब कोनो फोन कोलक द्रिष्ष पड़ेद ची,
- 6:34–6:38जते एक दिस का बाथ सूनी के दोसर दिस का अनुमान लगावल जाथ ची.
- 6:38–6:40एक दम सही वात.
- 6:40–6:44एसा पाथक बिना एको चन गमेने समझ जाएत,
- 6:44–6:47जे एकोनो अद्रिष्ष पात्रक आवाज अज ची.
- 6:47–6:52इवास्तव में बहुत प्रभाव शाली सुजावा ची, जे प्रभाव के एक्दम सहज बना देद.
- 6:52–6:58आज हम सहजता अगड़िक गप करहल ची, तए एक ता तीसर भाज सा हो हमरा खडकला.
- 6:58–7:02इं, की आप भाशा के टोन अविषेशन सब बक बाट करहल ची?
- 7:02–7:13अग्डम, हमर तेसर मुख्य बिन्दू आहे, जिस संसक्रतक भारी आग्टारिक विषेशन सब मेठलीक सबभाविक समवादात्मक गती के दीमा कर दे थचे.
- 7:13–7:16अगर बाद्वाद अथे लोग। अगर अथे लोग।
- 7:16–7:18अगर अथे लोग। अथे लोग।
- 7:18–7:20अगर अथे लोग। अथे लोग।
- 7:20–7:22अथे लोग। अथे लोग।
- 7:22–7:24अथे लोग। अथे लोग।
- 7:24–7:26अथे लोग। अथे लोग।
- 7:26–7:28अथे लोग। अथे लोग।
- 7:28–7:58तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो �
- 7:58–8:28अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अ�
- 8:28–8:32अदर उगर संदर्यक साथ आथ भीशेशन एक संगे आची
- 8:32–8:35पडवा में बहुत स्तिर अबहारी लागे तची
- 8:35–8:38तची इक रा एना बदली सके ची
- 8:38–8:41इविश्विष्ट या चाँई बाद्बादा
- 8:41–8:45उठ़ियोंकर सुन्दर्यक साथ आट्टा विशेश़ अची अची
- 8:45–8:48पडवामे बहुत स्तिर अबहारी लागे तची
- 8:48–8:51तव एक रा एना बदली सकए ची
- 8:51–8:56इविशेश़ सब के दूता चोट-चोट वाख्यमे बदलल जा सकए तची
- 8:56–9:02अगर स्तिर सुन्दर्यक वरननक संगे संगे अगर गती पर भेसी जोर होए
- 9:02–9:07अगर विषेश़ के क्रिया में बडलवाक बात करो हो लची
- 9:07–9:12जना हम ये नहीं कहब जे अव नव नील कमल रूपी आखि लिया ची
- 9:12–9:17बलकी हम कहब जे अव नाव नील कमल जका फ़गत आची
- 9:17–9:21अगर अगर आखी नवनील कमलजग का पड़काईता ची
- 9:21–9:24अगर अगर आखी नवनील कमलजग का पड़काईता ची
- 9:24–9:27अगर अगर आखी नवनील कमलजग का पड़काईता ची
- 9:27–9:30अगर अगर आखी नवनील कमलजग का पड़काईता ची
- 9:30–9:35एक ता स्तिर चित्रक बडला, चल चित्र सन, मैं एक ता मुवी सन भुजाईत.
- 9:35–9:38ये बहत गंभीर अंटर द्रष्टी आची.
- 9:38–9:44ता एही समिक्षा के समेट ताई, हमरा सब जे देखनु अनवादक गेराई अथ्यांक प्रष्श्न्स निया आची,
- 9:44–9:49मुदा एक्रा और उत्क्रिष्ट बनेवाक लिल तींटा मुख्यकाजगाजगा सके तची.
- 9:49–9:56आप, पहल ता आदूनिक पाथक के लिल एक ता चोट सान्स्क्रूतिक प्रिष्ट भूमी जोडव.
- 9:56–10:06तो सर उही कालपनिक समवाद आ, एक लाप के रव कर बाक लेल तापोग्राफिक बड़ाव, जे ना इटेलिक्स का प्रियोग करव.
Plain text
प्रस्तुत समगरी चारी प्राषीन संस्क्रित भान मने एक अंकी नाटक कमेठली अनुवाद छी, जाही में तत्कलीन पातली पुत्र अ उजैनिक, श्रिंगारिक समाज अविटक का एक अलापक विस्त्र चित्रन छी. आप, आप म्सीदे उई बात पर आवे चाहव, जे एही अनुवाद के पदध काल हमर पहल मुख्य बिन्दू बनल औची आद्रूनिक पाथका से समवाज स्तापित करवाग चुनाउती मने आही पाथ में जे संसक्रतिक संदर्ब सवची तकर बात कर रहल ची इक दम, अनुवादक काव्यात्मकता तो बहुत उच्छ स्टरा कचे, मुदा कम्जोरी ईए चे, जे पार्ट सोजे उही प्राचीन भानक जदेल दून्या में प्रवेश कर जाए जाच्छी, बिना कनो पूर्व पीटी काग. रहा, ये तो हम हु मैं सुस्केल. जो हमरा सब अनुवादक का उदेश़पर विचार करी ता इी मात्र शबदक हेर फेर नहीं आची ये ता पाथक के उई कालक्शन्ड में लोग जावे कची एक तरह कर जना कहो तेलीपोटेशन तेलीपोटेशन? रहा, इे बहुत नीक शबद कहलु आचा अम जखन पन्दूली पी पडलों, तो हमरो रही अनबाबिल ज़ हम अचानक से प्राचीन उजैनिक के भीच सदक पट्ध हार ची. मुदा आहा कोलो कोनो नक्षा नहीं आची? भिलकोल, नक्षा नहीं आची, जेना एही नाटकक मोक्धे पात्र आची विट. आहां सोच रहा हो लग जी इविट समाज में की बूमिकार कही तची आहां, की इगोनो राजा थिक? वाग, कोनो विदुशक थिक, वा व्यापारी थिक अदूनिक मेठली पातकग लेल तई शब्द आएकर पूराजे समाजिक संदर भची से एक दम अपरिची तची. तिक अही ताम हमर ध्यान सोगेल. ताही लेल हमर सुजाव एजी जे अनुवादग गती अ साहितिक संदरे के बादित कैने बिना प्रत्तेक नाटकक आरंभ में एक ता बहुत संख्षिप्त संस्क्रितिक प्रिष्ट भूमी वच्छोट भूमी का जोडल जाये. मुदा जिना की हम एही नोट्सच्स छे भूजी रहल ची एताई उद्टेशता प्राचीन रसके आदूनिक भाशा में अबाद्रूब से अन्नाया ची अग, इक दम अबाद्रूब सेन तक की यी तिपनी वबहुमिका जोडल सां सहित्तिक प्रवाबादित नहीं हो एद मने यी तजन कोनो गीत बीच में रुकी का गीत का अर्थ बुजहावे सन बोजगद आहा के चिन्ता भील्कुल जायेजाची ताहीलेल हम गी तक भीच मे रुक कप फृटनोट देबाग बात नहीं करोल ची हमर सुजाव आची जे इटिप पनी नातकक मुख्य समवादा सब पहले देलजाए अहो! माने नातक शूरू होई बाख कपहिने एक ता चोट सन क्ष्ट की खूली देल जाए. एदम सही! जाहे सा प्रवाह नहीं तुटे, आउ एक रा एक ता थोस उदारन समबूजी, जैना दूर्त विट समवादा हमे जकन विट वर्षा रितुक समः, अग, उस दग पर चलत वेविन लोग सां गब करे तची ये रास्ता पर चलत गब कर अट्ट्टी मात्र अग, मुदा जै हम नाटकक आरंभ में मातर एक दू पंक्ती में इस पष्ट कर दैए वित ततकालीन समाजक एक ता सुसं सक्रित चतुर ज़ूग जे बिना मतलपक गब हाखी रहल अची जे रास्ता पर चलएत गब कर अची मात्र आँ, मुदा जै हम नाटकक आरंभ में मातर एक दू पंकती में इई इस पष्ट कर दैई जे विट ततकालीन समाजक एक ता सुसं सक्रित चतृर आख कलाप्रेमी मद्यस्त चल त्यदेक सम्रिद करत् रहां, हम भूजी रहां ची जकन पाथक के इब उचल रहां जे एकोनो सादारन व्यक्ती नहीं आची तो अकर समवाद में जे व्यंग आची तकरा पाथक बहुत गेराए सा महसुस करत् बल्कुल आई सव और तेलीपोटेशन सफल होगी तची आजज हमरा सब पाटक अनुबव कबात कर रहलची तव हमर दो सर मुख्य बिन्दू सीदे पाटक कमस्षक अद्रिष्ट अनुबव सज़ोडालची अहा सन्रचना अप प्रवाह कगब कर रहलची अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अ� अपर बदली का इस पष्ट करे तची जि कखन उ आपन बाद को रहाल ची अखखन उ दोसरक बाद दोरा रहा रहा लजी मुदः पन्ना पर अभी नेता तगाया बची भिलकुल गाया बची हम जखन पडी रहाल चलू तलगा तार की कहे चै यह सन्वाख्या एक एक परग्राव में बिना कुन द्रिष्य अंपर कर अखल गेल अची. आ, एक हन्द अनुवादक शाब्दिक शुभ्द्दता पाटकक द्रिष्यस अनुभाव पर भारी परिजायता ची. पाटकक के मोंपार्भामे भारी कष्ट होगी तची, जे के बाजी रहालाची आउ एक हन्द पर द्यान दी, जटे विट लगातार समवाद दोराए रहालाची इत जना बिना विराम चिन्नध कोनो लंभा पत्र पडवासन आची एक दम, मस्तिष्ट के एप रक्रिया करभामे बहुत उर्जा लगा एच्छे. ताहे लेल हमर सुजाव एच्छे जे कालपनेक समवाद आव वास्तवेक एक लाप के अलग-गलक दिखाई वलेल, ताइपोग्राफिक बद्लाव वा फोमातिंक का उप्योग करल जाए. ता इपो ग्रापिक बद्लाव मने इतलिक्स वह कुचेहन? रहा, इप वामाटिंक बद्लाव मंज कर लटिंग बदल बा संकाच करत. औरे वाए, इई आनलोजी बहुत नी कछी. जना मंच पर लटिंग बदले तची, तब पाट्कक मस्तिष्कके तुरन्संकेद भेटाई चे जे आप दिश्ष बदली रहल ची. एक दम. आँ एक रा एक तध उदारन्स एस पष्ट करी, जकन उभ्याविसारिका मे विट कहे तची, की कहे च्छा? अलब वादन करे ची. तए तई विटकर आपन प्रशन चे की कहे चा? वाप हेर उक्रा एक ता रग पंक्ती में इंडेंट कर के रखल जा सके चे. बलक्ल एसा पाथक के समवादक के नाटके तेराव सपच्ट रूप से भुजाएत. जेना आई काली हमरा सब कोनो फोन कोलक द्रिष्ष पड़ेद ची, जते एक दिस का बाथ सूनी के दोसर दिस का अनुमान लगावल जाथ ची. एक दम सही वात. एसा पाथक बिना एको चन गमेने समझ जाएत, जे एकोनो अद्रिष्ष पात्रक आवाज अज ची. इवास्तव में बहुत प्रभाव शाली सुजावा ची, जे प्रभाव के एक्दम सहज बना देद. आज हम सहजता अगड़िक गप करहल ची, तए एक ता तीसर भाज सा हो हमरा खडकला. इं, की आप भाशा के टोन अविषेशन सब बक बाट करहल ची? अग्डम, हमर तेसर मुख्य बिन्दू आहे, जिस संसक्रतक भारी आग्टारिक विषेशन सब मेठलीक सबभाविक समवादात्मक गती के दीमा कर दे थचे. अगर बाद्वाद अथे लोग। अगर अथे लोग। अगर अथे लोग। अथे लोग। अगर अथे लोग। अथे लोग। अथे लोग। अथे लोग। अथे लोग। अथे लोग। अथे लोग। अथे लोग। अथे लोग। अथे लोग। तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो � अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अ� अदर उगर संदर्यक साथ आथ भीशेशन एक संगे आची पडवा में बहुत स्तिर अबहारी लागे तची तची इक रा एना बदली सके ची इविश्विष्ट या चाँई बाद्बादा उठ़ियोंकर सुन्दर्यक साथ आट्टा विशेश़ अची अची पडवामे बहुत स्तिर अबहारी लागे तची तव एक रा एना बदली सकए ची इविशेश़ सब के दूता चोट-चोट वाख्यमे बदलल जा सकए तची अगर स्तिर सुन्दर्यक वरननक संगे संगे अगर गती पर भेसी जोर होए अगर विषेश़ के क्रिया में बडलवाक बात करो हो लची जना हम ये नहीं कहब जे अव नव नील कमल रूपी आखि लिया ची बलकी हम कहब जे अव नाव नील कमल जका फ़गत आची अगर अगर आखी नवनील कमलजग का पड़काईता ची अगर अगर आखी नवनील कमलजग का पड़काईता ची अगर अगर आखी नवनील कमलजग का पड़काईता ची अगर अगर आखी नवनील कमलजग का पड़काईता ची एक ता स्तिर चित्रक बडला, चल चित्र सन, मैं एक ता मुवी सन भुजाईत. ये बहत गंभीर अंटर द्रष्टी आची. ता एही समिक्षा के समेट ताई, हमरा सब जे देखनु अनवादक गेराई अथ्यांक प्रष्श्न्स निया आची, मुदा एक्रा और उत्क्रिष्ट बनेवाक लिल तींटा मुख्यकाजगाजगा सके तची. आप, पहल ता आदूनिक पाथक के लिल एक ता चोट सान्स्क्रूतिक प्रिष्ट भूमी जोडव. तो सर उही कालपनिक समवाद आ, एक लाप के रव कर बाक लेल तापोग्राफिक बड़ाव, जे ना इटेलिक्स का प्रियोग करव.