MACHINE ASR ACCESSIBILITY AID

गङ्गेशक_तत्त्वचिन्तामणिमे_सत्य_आ_भ्रमक_बहस.m4a

Not an editorially verified transcript. This text was generated automatically from the preserved recording and may contain recognition, language-detection, spelling, segmentation or name errors. Consult the source recording for authoritative content.
Collection
Part 8 · VIDEHA MITHILA MAITHILI DISCUSSION CRITICISM SERIES PART 8
Status
asr-draft
Human verified
No
Editorial review
not-reviewed
ASR model
small
Detected language
hi (0.706209)
Duration
23:14
Source
Open preserved recording

Timestamped machine output

  1. 0:00–0:03विशारक मंज ददबेट में आहाके स्वागत अछी
  2. 0:03–0:07आई हम्रा लोक ने एक तब बहुत गमभीर विश्याप गब करब
  3. 0:07–0:12जना, कलपना करो जे आहा एक तब रहुमुल्ल्य चानी गेहना की नी रहल ची
  4. 0:12–0:16जखन सुनार उ गेहना आहाक सोजा रखे तची
  5. 0:16–0:19तक यहां केवल उकर चमक देखे का संथुष्ट बजाएची
  6. 0:19–0:21आप शमानित तब लोक जाज करेट आची
  7. 0:21–0:22बिल्ल्कुल
  8. 0:22–0:26आप उक्रा कसी पर गस को कर शुद्टाक जाज करेट ची
  9. 0:26–0:32माने आप एही वस्तु प्रात्मिक दर्षन पर स्वताद विश्वास ने होई तची
  10. 0:32–0:38सत्तिके प्रमानित करबाक लेल, आहाके एक तबहीः प्रमान कावष्व्ता होई तच्छी.
  11. 0:38–0:41देनिक जीवनक यी बहुत समान ने गटना ची मुदा.
  12. 0:41–0:45मुदा एही ताव एक तब रहुत गंविर समस्या ची.
  13. 0:45–0:49आहा सत्ते के प्रमानित करबाक लेल उही कसी के प्रियोक के लो, तिक?
  14. 0:49–0:54आहा अही कसी के सत्तेता प्रमानित करबाक लेल की आहा तेसर वस्तुक प्रियोक करब
  15. 0:54–0:59आहा तेसर के लेल चारिम इी यात्रा कते जाकर उकत
  16. 0:59–1:03जो ग्यान आपन पुष्टिकरन लेल सदिकन कोनो बहरी सादन पर निरभर रहत,
  17. 1:03–1:07ता मने समपुन मानव ग्यान को आदार कहसी परत.
  18. 1:07–1:09औए ता हा बहुत पएक शंका थाडका देलो.
  19. 1:09–1:10एक दम.
  20. 1:10–1:13सत्तिके आपन प्रमानित करबाक लेल,
  21. 1:13–1:16कोनो बैसाखिक आवष्षकता नहीं हो बाखचाही
  22. 1:16–1:19उक्रा स्वयम्सिद हो बाखचाही
  23. 1:19–1:22आई यह यह वही मोलिक वेचारिक संगर्ष अची
  24. 1:22–1:25जाई पर आई होम्रा लोकनी गंभीर विमर्ष करव.
  25. 1:25–1:28चोडामः सताब दिक महान भार्त्ये दार्षनिक
  26. 1:28–1:40तट्ट चिन्तामनिक आदार पर आई हम्रा लोकनी ज्यान मिमान साक दूता अट्यंत महत्पूरन प्रष्नक उतर खुजबाक प्रयास करवब.
  27. 1:40–1:42जि बहुत आवश्षक अछी भूजब.
  28. 1:42–1:46आप, पहिल की ज्यानक सत्तिता सवता हप्रमानित होई तची,
  29. 1:46–1:50वग्रा सिद कर्बाकलेल कोनो बाहरी सादन कावषक्ता हुएतची
  30. 1:51–1:55अद्दो सर, जगन हम्रा लोकनी के ब्रहम् वग्ड्ड़्ी हुएतची,
  31. 1:55–1:59तो वग्र मनोवे ज्यानिक सन्रचना वास्तम में की हुएतची.
  32. 1:59–1:59बिल्कुल
  33. 1:59–2:03एही वी मरश मे हम न्याई दर्षनक पक्ष रखभ
  34. 2:03–2:05हमर इस पस्ट मान्नेता अची
  35. 2:05–2:09ज्यानक सत्तिता बहरी सादंसा प्रमानित होगते ची
  36. 2:09–2:14जक्रा दर्षनक भाशा में परतह प्रमानित वाद कहल जाई टची
  37. 2:14–2:18आब ब्रहम आँ खुनो सुन्ने वा अग्यान ने थिक
  38. 2:18–2:25एक ता सक्रिय गलत प्रक्रिया आची जक्रा अन्यता ख्याति वाद कहल जाई तची.
  39. 2:25–2:28आज, हमर पक्ष मीमान सक दर्षनक छी.
  40. 2:28–2:31हम इस थापित करब जे न्याई दर्षनक,
  41. 2:31–2:33इद्रिष्टि कोन मानव के,
  42. 2:33–2:36केवल अनन्त दूविधामे फ्हादे थे.
  43. 2:36–2:37हमर तर्ख आची,
  44. 2:48–3:18आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� �
  45. 3:18–3:24अब आत मान लिल जाए जे ग्यान उत्पन होई ते ही स्वतह यतार्त प्रमानित बेजाए तची
  46. 3:24–3:28तची मानव जीवन में सन्शे वड दूविदा कतफुदपन नै हो बाक चाही
  47. 3:28–3:31मुदा की वास्तविकता इए ची? नहीं
  48. 3:31–3:32दूविदा तचे होई तचे
  49. 3:32–3:40बिल्कल होईता चे, जगन हमर लोकनी कोनो नव ठाम जाएची, वा कुनो नव ज्यान प्राप्त करेट ची,
  50. 3:40–3:44तहम्रा लोकनी के स्वबहाविक रूपें संशे होईता चे,
  51. 3:44–3:48जे हम राती में रस्तापर एक लाम वस्तू देखेची,
  52. 3:48–3:51ता हम तुरन्त उग्रा सत्य नहीं मानी लेजची
  53. 3:51–3:53मन में सन्शे होई तचे,
  54. 3:53–3:56जी साप अची, वा सनक दोरी
  55. 3:56–3:59आप, इदे एक ता सामान्या अनुबह ववववची
  56. 3:59–4:02तजग यान स्वतः प्रमानित अचेई
  57. 4:02–4:04तए यी सन्शे कोना समबह लेज?
  58. 4:04–4:09ब्रूम के विश्याय में हमर तर्क अची जे ब्रूम के वल नई जनाब नहीं देक,
  59. 4:09–4:12जकन व्यक्ती शीप में चान्दी देक हताची,
  60. 4:12–4:16बाद में कुनो आन सादन से सिद्ध होई तची
  61. 4:16–4:20जगन आहा तोर्च जरागग, उही दोरी के देखगछची
  62. 4:20–4:23तखन आहाक ज्यान सत्यप्रमाने थोई तचे
  63. 4:23–4:28आजद दो सर दिस, ब्रहम के विशय में हमर तर्ख अची
  64. 4:28–4:31जे ब्रहम के वल नई जनब नहीं थेख
  65. 4:31–4:39जगन व्यक्ती सीप में चान्दी देखात अचाई, तो उ सीप पर चान्दी कगुन के सक्रिये रूपेन आरोपित करे तचाई.
  66. 4:39–4:44इएक ता विषिष्त मान्सिक प्रक्रिया अचाई, कुनो निष्क्रिया वस्ता नहीं.
  67. 4:44–4:48मुदा, मुदा, आग, इ तोर्च जरा का देखवाग जे प्रक्रिया आची,
  68. 4:48–4:52उ दर सं सार्ट्रग द्रिष्टी से एक ता भ्यानक खादिमे खासी परही तच्छाई,
  69. 4:52–4:54हम भुजावे ची कोना.
  70. 4:54–4:56हम सुने ले तग्यार ची.
  71. 4:56–5:08अगर प्रमानित करबाकलेल आहाके तोर्च का प्रकाशा रूपी तोसर जानक आवशकता चे, तो उदोच सही प्रकाश दोर हो लगची, वह आहाके आखी सही काज कर हो लगची, एकर जानच के करत्त?
  72. 5:08–5:10आँ... अनुबहुसा
  73. 5:10–5:40तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो �
  74. 5:40–5:42स्थता सत्य मानल जायता जी
  75. 5:42–5:44जायम कोनो वस्तू देखट ची
  76. 5:44–5:46आहमर आखी थीक आची
  77. 5:46–5:48प्रकाष पर्यापत आची
  78. 5:48–5:50तो उ ग्यान स्था सत्य आची
  79. 5:50–5:52जतदरी ब्रमक विष्वय आची
  80. 5:52–5:54आहा उक्रा बहुड जतिल बनाई रहल ची
  81. 5:54–5:58ब्रम्कोन नव अप्रमान ज्यानक सक्रिय निरमान नाई थीक
  82. 5:58–6:02इम भात्र दूता अलगल ग्यान के भीचक भेदनाई भूजी पाभब थीक
  83. 6:02–6:07इएक ता निष्क्रिय अग्यान अची जाही पर हम आगु विस्तार सचर्चा करवब
  84. 6:07–6:08भुजाल हूं
  85. 6:08–6:11मुदा आहा के अनवस्ता दोषकतरक
  86. 6:11–6:15मने दार्षने गोष्टी मे सुन्भा मे बहुत नीक लगे तची
  87. 6:15–6:17मुदा इएठार्थ सको सु दूर आची
  88. 6:17–6:19यठार्थ सदूर को ना?
  89. 6:19–6:23आहा आहा पुछे ची जब रमाना की श्रिंखला कती रुकत
  90. 6:23–6:30गंगेश उपाद्याए, तत्व चिन्तामनी में एकर बहुत सतीक मनोवि ज्यानेक और व्यावारेक उटर देच्छती.
  91. 6:30–6:36ये श्रिंखला ओते रुकएताची, जटे मानवक सफल प्रव्रुत्ती पूरन होईताची.
  92. 6:36–6:37सफल प्रव्रुत्ती?
  93. 6:37–6:54आँ, जे ना मानु, जे आँ दूर सैक्ता नदी देखछे आँ, आँ के पहल भेर में ज्यान भेल जे उते पानी आची, मुडा आँ के प्यास लागल आचे, जे आँ अप कहेच छी, जे ज्यान सुता सत्य आचे, तकी आँ उई ताम थारबह कषन्तुष्ट बहुजाएप.
  94. 6:54–6:55नहीं, हम पानी पीवज़ाया
  95. 6:55–6:58भलकोल, मन में सन्षय होई तची
  96. 6:58–7:01जे यी पानी अच्छी वे मरु भूमिक म्रिगत्रिष्ना
  97. 7:01–7:05एही सन्षय के दूर करबाक लेल आहा उते जाए ची
  98. 7:05–7:08अंजली में पानी लएच्छी अपी बच्छी
  99. 7:08–7:10जखन आहाक प्यास भुजी जाईत है थाची
  100. 7:10–7:13तखन आहाक शारिरीक आमान्सिक सन्तुष्टी
  101. 7:13–7:16औही ताम औही श्रिंखलाके रोकी देता चे
  102. 7:16–7:19प्यास भुज्बाक जे यी सफल कार्यब्रवित्ती अची
  103. 7:19–7:22उ पुर्व ज्यानक याथारत प्रमानेद को देच्चे
  104. 7:22–7:26एक रा लेल कोनो अनन्त श्रिंख लाक आवश्शक्ता नहीं अचे
  105. 7:26–7:30संटुष्ती मैं ज्यानक अन्तिम परिक्षन अची
  106. 7:30–7:33इटर्क बहुत कमजो अची मावकराब
  107. 7:33–7:34क्याख?
  108. 7:34–7:38आहा कहलू जे पानी पी के प्यास भुज्बाक जे अनुबहव अची
  109. 7:38–7:49उही से पहल गयनक प्रमानित भहल, मुदग जर अर गंभिरता से सोचु, पानी पीके प्यास भुजबाग जे शारिरिक संथुष्टीक अनुबहूँ आची, उहो तचेतनाक भीतर एक तग याने मात्र आची.
  110. 7:49–7:51मुदग उष्चारिक अनुबहूँ आची?
  111. 7:51–8:05अगी सन्तुष्ति ग्यनक सत्तिता के किया प्रमानित करत, कि औह ब्रमात्मक नेभ्हसके तची, जिन स्वाप्म में व्यक्ति पानी पीके सन्तुष्त भईजाई तची, मुदद जागल पर उक्रा पुन्ह प्यास लागल रहे तची.
  112. 8:05–8:07रहा, स्वप्नक बात तग रग ची.
  113. 8:07–8:17अग परतट प्रमानने बात के आदार मानल जाये तो उई शरीरिक सन्तुष्टी के सेव प्रमानित करभाक लेल दोसर प्रमानक भाड जो हो पडद.
  114. 8:17–8:24गंगेशो उपाद्या यदपी महांच हती, मुधह मिमान्सक कई अनवस्ता दोषक शंका अख्चन्दित अची.
  115. 8:24–8:27ताई शंषे क्यों क्यों क्यों क्यों के है रहां के है साब से
  116. 8:27–8:30शंषे अक उपत्ती ज्यानक मुल सुबहावस नहीं
  117. 8:30–8:36अपितु कोनो भाही दोष जना दूर होनाई वा आखी कमजुनी से होई तची
  118. 8:36–8:39जखन दोष रहे तची तखन शंषे होई तची
  119. 8:39–8:45मुदद ग्यामक मुल सबहावत सत्यके प्रकाषिद करव चै, जक्रा बहरी थेकावाक आवशकता नहीं चै.
  120. 8:45–9:15आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ�
  121. 9:15–9:45अग्वाँ उग़्ाईद बुजे लईत अची अग्वाँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँ
  122. 9:45–10:15यक न व्यक्ती सीपक चमक देखे तख ही तो उकर आखी सीपक केवल सामाने रूपके देखे तख ही उकर आखी सीपक केवल सामाने रूपके देखे तख ही उकर आखी चमक देखे तख ही विखती सीपक केवल सामाने रूपके देखे तख ही उकर आखी चमक देखे तख ही चम
  123. 10:15–10:20अगर मस्तिखष में पूर में देखल चानी के समरन जाग्रत होई तची
  124. 10:20–10:22मुदाई तदूटा बाद भेल
  125. 10:22–10:23यह तो बाद अची
  126. 10:23–10:26वास्तो में यह तदूटा बिलकुल गलग यान अची
  127. 10:26–10:29पहिल यान अची आखी से भेल प्रत्तिक्ष
  128. 10:29–10:31यी किछु अची
  129. 10:31–10:35अदोसर यान अची मस्तिष्ट्वितर इस्म्रती चानी
  130. 10:35–10:40दोश के वल अटेभी आची जे वेक्ती एह दुन्नू यान के भीच के वेद
  131. 10:40–10:42वा फरक गरहने का पावे तची
  132. 10:42–10:44अव फरक नई बुज़ाई तची
  133. 10:44–11:14अप्रत्यक्श आज्स्म्रिति के एक हे बूजलैता ची, जक्रा भेदागरह कहल जाईता ची, ये एक ता निशक्रिय अग्यान ची, जना कोनो पूठिक ये ता पन्ना पफतल हो, उते कोनो नव गल्ती नहीं लिखाल आची, उते मात्र जानकारिक अबहाव आची, ब्राम बस �
  134. 11:14–11:21जे में तार्किक लगे तची, मुदै इ मानव मनोविग्यानक विरुद्ध है यदी ब्रहम्मात्र भेदक अग्यान आची,
  135. 11:21–11:31जेना आहा कहला हूँ जे पोथी कखाली पन ना जे तो ही आग्यान का आदार पर वेक्ती चानी उठावे लेल सक्रिया वरुपप प्रव्रुत्त क्याग बजाई तची.
  136. 11:31–11:32मने?
  137. 11:32–11:37सोचु, कोनो काज करबाक लेल, जेना निहुरी का बालुस सीप किन उठावे लेल,
  138. 11:37–11:41अग्यान तो शुन्ने आची शुन्ने साक्रीयताग जन्म कुनावेल
  139. 11:41–11:45केवल नहीं जान्बासक कोनो कारेक उपत्ती कोना बासक अग्यान तो शुन्ने आची
  140. 11:45–11:47शुन्ने साक्रीयताग जन्म कुनावेल
  141. 11:47–11:50तो आहाक क नयायक द्रिष्टी एते कि नवबात कही रहाल आची
  142. 11:50–11:55आजा कर न्यायक द्रष्टी एते कि नवबात कही रहल आची
  143. 11:55–11:58जा औव्यक्ती शुन्य सप्रब्रित नाई बहर आची
  144. 11:58–12:00तो उस्विप में की देखी रहल आची
  145. 12:00–12:03जि उक्रा उठावे लेल विवषकर रहल चैक
  146. 12:03–12:07यहे तग गंके शक अन्यता ख्याती सिद्धान तक सुन्दर्या आची
  147. 12:07–12:11ब्रम कोनो अग्यान वा खाली पन्ना नहीं थेक
  148. 12:11–12:13ये एक ता विषिष्ट यान थेक
  149. 12:13–12:18जेना आई कालेक आदूनिक यंट्र वा क्रित्रि मेदाक मती ब्रम के देखु
  150. 12:18–12:20आई हेलुसिनेशिन
  151. 12:20–12:22आदी अगलत उत्तर दैइताई ताई ताई.
  152. 12:22–12:23बलक्ल.
  153. 12:23–12:25जगन उखन उखनो गलती करई ताई ताई,
  154. 12:25–12:28उखनो शुन्यवा अग्यान ने होई ताई ताई ताई.
  155. 12:28–12:31उदूटा बलक्ल सही सुचनाक के पक्डाई ताई ताई,
  156. 12:31–12:34अग्रा जोडी के एक ता पुरनता गलत,
  157. 12:34–12:38अब्रामक उत्तर पुरे आत्मविश्वासक संप्रस्तुत कर दे थाचे.
  158. 12:38–12:43मानव मनत भ्रम यही क्रित्र मेदाक मत्द्ब्रम जका आचे.
  159. 12:43–12:46अच्छा यी तुलनत रोचक अचे?
  160. 12:46–12:49अच्छ व्यक्ती सोजा राखल सिपके देखा थाच,
  161. 12:49–12:57आस्म्रति सा रजद्व, अठात चान्दि पनके खीच का सक्क्रिया रूपन उही सीप पर आरोपित कदिच है,
  162. 12:57–13:03आठात उ व्यक्ति सीप के सीप नहीं भुजका उक्रा पोरन रूपन चानिक रूपने देखाताच.
  163. 13:03–13:05इई अनत्थाख हाती आचे
  164. 13:05–13:08एक वस्तुके दोसर वस्तुके रूपने देखभ
  165. 13:08–13:11अग्यान सा प्रव्रती नेबासा कैताच
  166. 13:11–13:13प्रव्रती हमेशा विषिष्ट यान सा होई ताच
  167. 13:13–13:18मुदा अहाक इग्रित्रिम मेदाक द्रिष्टान्त रोचक होई तो
  168. 13:18–13:22एक्रा भीतर एक्ता बहुत पएक तारकिक विरोदा बास अच्छे
  169. 13:22–13:23की विरोदा बास अच्छे?
  170. 13:24–13:30आहा कहे ची, जे व्यक्ती स्म्रितिसद चानी पनक खिच का सीप पर आरोपिद कदे तच्छे
  171. 13:31–13:34मुदा मिमान सा के ते एक्ता बहुत मुल प्रष्नो पुछे तच्छी
  172. 13:34–13:39जे वस्तु उते उपस्तित अचीए नै उक्रा आखी कुना दिखी सके तच्छे
  173. 13:39–13:41आँ उस्मिरती सावे तच्छे
  174. 13:41–13:45वुदा आगाक अनिध्धा ख्याती सिद्दान्त मे एक ता पैएक दोष यए च्छे
  175. 13:45–13:51जे आहा एक ता एहन गुन चानी पन के उते प्रत्यक्ष भेल मानी रहल ची जते आव अच्छी ने
  176. 13:51–13:59ये बहुतिक वास्तविक्ताक विरुद छे जते चानी अच्छी ने उते आखी के चानी पन कुना दिखाई दस कै तच्छे
  177. 13:59–14:01इआखी नहीं वन करे तच्छे
  178. 14:01–14:11मुदा मिमान्सक का द्र्ष्टी संग, प्रव्द्ती के लेल यी प्र्याब्त जी, जि व्यक्ती उई ही वस्तूके प्राप्त करेबाक इच्छा रक्ठ हो, आ उक्रा उक्र बादध तत्रक ज्यान नही होए.
  179. 14:11–14:17जखनो चानि कस्मरन करता ची, तचानिक परती उकर अकर्षन पहले से अची.
  180. 14:17–14:20उकर पूवसंचित इच्छा उकर प्रव्रुत्त कदे टा ची.
  181. 14:20–14:28एक्रा लेल सीप में चानि पन कस्सक्रिय निरमान वा जादू कतर है आरोपन करवाक कुन अवर्ष्च्ता नहीं आची.
  182. 14:28–14:32आहा मानव मनक अकारनी एक तदोखा दोवाला यंट्र मानी रहूल ची.
  183. 14:32–14:35नहीं नहीं मन दोखा दोवाला यंट्र नहीं आची.
  184. 14:35–14:39मुदा मनक संग ज्यानेंद्रे कषम बन द ची उई में त्रुती आवी सके तची.
  185. 14:39–14:57नियाय मानेत छी जे रजदत्व बच्चानी पन संसार में कतवदा छी, उ सत्या है, दुकान मेराखल चानी में हो आची, मनक असाभारन शकती उई सत्य रजदत्वक किस्मरिती से तानी कै इते सी परानी दे छी, इं मानव ज्यानेंद्रे कसीमा आची.
  186. 14:57–15:01मुदा आँ एह विवादक के एक ता और गम्दिर दरातल पर लाज़ाए.
  187. 15:01–15:02आप बलकु.
  188. 15:02–15:08जता ए गंगे शुपाद्ध्याए, उद्याना चार्यक एक ता बहुत शक्तिषाली तर्कक उप्योख करे चति,
  189. 15:08–15:12जक्रा हम्रा लोकनी व्यबहारेक व्यागात कैसा के चि,
  190. 15:12–15:16आहाक सिद्दान्तक अनुसार ग्यान यदी सवता सत्या ची
  191. 15:16–15:19तलोकक शंशै केवल दोष सहोईता ची
  192. 15:19–15:21मुदा उद्यानाचार्य कहे चति
  193. 15:21–15:25जे व्यवाहारिक जीवन में शंशैक कोनोस धान नाया ची
  194. 15:25–15:27जते निरन्तक आज भरा हला ची
  195. 15:27–15:29आहा उई तरकक बात कर रल ची
  196. 15:29–15:35जद उद्यानाचार्य, शन्शै आब्यवावारिक जीवन्क बिरोद के शपष्ट करे चहती.
  197. 15:35–15:36बिल्कुल.
  198. 15:36–15:40उद्यानाचार्य क तरकक एक ता आदूनिक द्रिष्टान्त सबूज हो.
  199. 15:40–15:43आहा भाई जाहाज भा विमान सयात्रा करे ची.
  200. 15:43–15:45अखन आहा विमानक तिकत कतबे ची
  201. 15:45–15:47तक यहा के इशन्शाय होईत अची
  202. 15:47–15:50जै गुद्वा करशनक निमक तोडी के
  203. 15:50–15:52अखाश मे उडि पाबत बने
  204. 15:52–15:54समानन तहने
  205. 15:54–15:58आखन शवदानते करूपः आहा दाशनिक बनी कखष कही सके ची
  206. 15:58–16:04जई एक ता यंप्र आची, खसी सकेत ची, शन्षे आची, मुदा आख निमित विवार की आची,
  207. 16:04–16:08आची तिकत लेए ची, जागसीट पर भईऽे ची, आसुती जाएची.
  208. 16:08–16:11उद्याना चारे कहे चती, जजदे शन्षे आची,
  209. 16:11–16:13उते व्यवार नहीं भासके ची,
  210. 16:13–16:15अजते न्यमित व्यवार अची,
  211. 16:15–16:17उते शन्शे टिकी ने सके तची.
  212. 16:17–16:19मुदा इत व्यवार अग बाद भेल?
  213. 16:19–16:23आई निष्चित व्यवार प्रमानित करई तची,
  214. 16:23–16:25जे सत्तिताक प्रमान,
  215. 16:25–16:27बाह्य अनुबहवस अथात
  216. 16:27–16:32वाजारो भेर विमानक के सुरक्षित उड़ाइत देखबा कनुवावसं सिद्द वो चुके लची.
  217. 16:33–16:36गंगेश स्पष्ट करे चती जे ज्यान मिमान सा में,
  218. 16:36–16:40सत्तिता अव उप्पत्ती प्रक्रिया दूनो अनिवार्य च्छी.
  219. 16:40–16:45आईी सत्तिता बाय सादन वसपल विवार सही सिद्धोई तची
  220. 16:45–16:47मिमान्सकक स्वतः प्रमाने वाद
  221. 16:47–16:51एही मान्विवारक वास्तविक्ताके अंदेखा कोडई तचे
  222. 16:51–16:56हम उद्याना चारी अगंगेषक एह तरकक गंविरताक सम्मान करे ची
  223. 16:56–17:01मुदा एते मी मानसक द्र्ष्टिकोनक बुजा बहुत आवश्षक अचे.
  224. 17:01–17:06हम माने ची जे विवहारिक सत्तेताक लेल प्रवर्तिके आदार मानल जासके तचे.
  225. 17:06–17:10आहक विमानक उदारन विवारिक जीवनक सुविदाके बतावे तचे.
  226. 17:10–17:10बिलकल.
  227. 17:10–17:14मुदा दर्षन शास्त्र केवल दैनिक जीवनक सुविदाक लेल नहीं आचे,
  228. 17:14–17:17इद्तवक मुल प्रक्रतिके बुजबाक लेल आचे.
  229. 17:17–17:20सद्द्दन्तिक रूपेईड यदि आहा मानव,
  230. 17:20–17:24जे ज्यान के सत्तिता सदिक हन भाहे कार्यासाई सिथ होई तचे,
  231. 17:24–17:27तक ज्यान आपन सत्ताकले लपराष्रित भोगेल
  232. 17:27–17:30मिमान सकक तर कचे ज्यान सुर्यक प्रकाषक समाने चे
  233. 17:30–17:32सुर्यक प्रकाष
  234. 17:32–17:33राई
  235. 17:34–17:37की सुर्यक प्रकाषके प्रमानित करबाक ले
  236. 17:37–17:41आहाके कोनो तोर्च वा लाल्टिना कावषक्ता हुई तची
  237. 17:41–17:42नहीं
  238. 17:42–17:46प्रकाश स्वेम आपन उपस्तिति के प्रमानित करेताची
  239. 17:46–17:49अदोसर वस्तूके सोब प्रकाषित करेताची
  240. 17:49–17:52तहीना, ग्यान के मुल प्रक्रूति
  241. 17:52–17:57उकर कारन सामागरी सा स्वता यदार्त प्रमानित फोबाक चाही
  242. 17:57–17:59यदि उही में कुनो दोशा ची
  243. 17:59–18:01तखोनो ग्यान बादिद होई तची
  244. 18:01–18:03मुदा बादख अबहाव में
  245. 18:03–18:05ग्यान सथा प्रमान अची
  246. 18:05–18:07मुदा जा
  247. 18:07–18:09जा ग्यान सवेम में सत्ये नहीं होई
  248. 18:09–18:11तखोनो बाई या व्यबार अख्रा सत्ये नहीं बना सके तची
  249. 18:11–18:13सूर्यक प्रकाश वलाई उप्मा
  250. 18:13–18:17प्रकाश वाला इ उप्मा काव्यक त्रिष्टी सा बहुत सुन्दर अची
  251. 18:17–18:21मुदा गंगेश एकरा तारकिक रुपन क्हन्दित करेच छी थी
  252. 18:21–18:25सूर्यक प्रकाश प्रत्यक्ष अची उईक्ता भोतेख वस्तू अची
  253. 18:25–18:31वानव ग्यान एक ता अंतर एक मन्सिक प्रक्रिया ची, जे बाहरी सन्सार सा अंतर क्रिया करे ता ची.
  254. 18:31–18:34मुदा दूनु कास्त प्रकाषित करभे चीने.
  255. 18:34–18:38ने ग्यान कोनो सूर्यजका सुता प्रज्वलित नहीं आची.
  256. 18:38–18:42ग्यानिद्री आविशयक संपर्क सा ज्यान उत्पन्न होई तची
  257. 18:42–18:45इक ता यंट्र के तरा काज करे तची
  258. 18:45–18:48जही में कटा हिस्सा लागल अची
  259. 18:48–18:51आखी, प्रकाश, वस्तू, आमन
  260. 18:51–18:54जगन उ संपर्क निर्दोष होई तची
  261. 18:54–18:56तखन सत्य ज्यान बने तची
  262. 18:56–19:00अजगन उही में कुनु कराभी आवे तची तचन भ्रम बने तची
  263. 19:00–19:02मुदा यंट्र मानप्ता
  264. 19:02–19:06चोंकी ज्यान के उप्पत्ती कारन में दोष बहुसके तची
  265. 19:06–19:09तचे ले ज्यान स्वतान निर्दोष कुना बहुसके तची
  266. 19:09–19:11एक रापरिक्षनक आवश्शकता चे
  267. 19:11–19:18यह कारन ची जे गंगेश परतह प्रमाने वाद अ अन्यता ख्याती के एक बल देट चतिन,
  268. 19:18–19:25गलती एक ता सक्री अगलत प्रक्रीया आची, असत्य एक ता सक्री असही प्रक्रीया आची,
  269. 19:25–19:27जकर बाही असत्या पनावष्यक अची.
  270. 19:27–19:57अपने बश्वाद ने थी ज़ी जी जी जी जी बवाश्वाद ने जी जी जी जी जी जी जी जी जी जी जी जी जी जी जी जी जी जी जी जी जी जी जी जी जी जी जी जी जी जी जी जी जी जी जी जी जी जी जी जी जी जी जी जी जी जी जी जी जी जी जी जी जी जी जी जी
  271. 19:57–20:27उआई उआई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आ�
  272. 20:27–20:57भी बवाड़़ बाद़ प्रमाड़ प्रमाड़ बाद़ प्रमाड़ बाद़ बाद़ बाद़ बाद़ बाद़ बाद़ बाद़ बाद़ बाद़ बाद़ बाद़ बाद़ बाद़ बाद़ बाद़ बाद़ बाद़ बाद़ बाद़ बाद़ बाद़ बाद़ बाद़ बा�
  273. 20:57–21:00अब विर्ती वा अबवव का आविष्षक्ता होई ताची
  274. 21:00–21:05हम्रा लोकनेक ब्राम, कोनो शुन्या वा अग्यान मात्र नहीं थेक
  275. 21:05–21:13इई एक ता सक्क्रिय भूल थेक, जताई हम्रा लोकनेक एक वस्तू के दोसर वस्तू के रूप में दिखाइत ची
  276. 21:13–21:21न्याये दर्शन सत्तिके प्राब्त करबाक एक्ता यतार्थ्वादी अव्वस्तुनिष्ट मार्ग प्रष्ष्ट करएत अची.
  277. 21:21–21:23अम्मिमान सक द्रिष्टिकोनक सारान्ष देतों,
  278. 21:23–21:29अम इी कहब जिग्यानक आदार बुध सन्रच्ना के अनविस्ता दोष्छ से बचे बाक लेल,
  279. 21:29–21:32असंज्यानक स्वतन्त्रता के स्थापित कर बाक लेल,
  280. 21:32–21:34स्वताप्रमान व्याद अनिवारे अची.
  281. 21:34–21:40यदि सत्या स्थ्या स्थ्या नहीं है, ता सन्सार में कुनो प्रमान उक्रा स्थ्या नहीं कर सके तची.
  282. 21:40–21:43यएक ता मस्वूथ सथ्द्धान्तिक बिन्दु अची.
  283. 21:43–21:48आप भ्रमक संदर्भ में अख्यातिवाद ये स्थ्धाख करे तची,
  284. 21:48–21:51अगानो मन सबावता असत्यक सुजन नहीं करे तची,
  285. 21:51–21:55उ केवल दूता सत्यके भीज के भीज के गमा दे तची.
  286. 21:55–22:00ये एक ता सुद्द्रद आ अनिवारे सध्धान्तिक धाचा प्रस्त॥ करे तची,
  287. 22:00–22:02जे ज्यान के शुद्था के अक्षुन्द राखे तची.
  288. 22:02–22:32वंगेश्व उपाद्ध्यर अचित तत्र चिन्ता मनी ज्यान की यान था था अब्रमक जतिल्ता के बुज्वाक लेल जे वैचारिक अदार भूमी तयार करे तची उ अद्यन्त सुख्ष्म आ अद्वित्या अच्छी, मानव्मस्तिष्क कोना काज करे तची, एकरे तेक गेहर
  289. 22:32–22:45अपन सिद्धान पूनर मुल्यांकन करबाक लेल बादे कर देलक, सत्या और ब्रमक इविश्लेशन सदिखन प्रासंगे क्रहत।
  290. 22:45–22:49ता आएक चर्चा के हम्रा लोकनी यहे समाप्त करे तची
  291. 22:49–23:03श्रोता गन आब यी आहा पन निरभर अची जे आहा विचार करी कि सत्ते उही कसी के चुभी ते प्रमानित भजाईत अची, वा सत्ते स्वयम उखसी अची, जक्रा कोनो बाहरी प्रमानक आवशकता नहीं च्याएक.
  292. 23:03–23:13इएक्ता एहन प्रश्नाची जे आहा के सत्तिके कोज में सदिक्हन विचार्षील रखत, विमर्षक एह मनच से जुदबाक लेल बहुत-बहुत द्श्निवाद.

Plain text

विशारक मंज ददबेट में आहाके स्वागत अछी आई हम्रा लोक ने एक तब बहुत गमभीर विश्याप गब करब जना, कलपना करो जे आहा एक तब रहुमुल्ल्य चानी गेहना की नी रहल ची जखन सुनार उ गेहना आहाक सोजा रखे तची तक यहां केवल उकर चमक देखे का संथुष्ट बजाएची आप शमानित तब लोक जाज करेट आची बिल्ल्कुल आप उक्रा कसी पर गस को कर शुद्टाक जाज करेट ची माने आप एही वस्तु प्रात्मिक दर्षन पर स्वताद विश्वास ने होई तची सत्तिके प्रमानित करबाक लेल, आहाके एक तबहीः प्रमान कावष्व्ता होई तच्छी. देनिक जीवनक यी बहुत समान ने गटना ची मुदा. मुदा एही ताव एक तब रहुत गंविर समस्या ची. आहा सत्ते के प्रमानित करबाक लेल उही कसी के प्रियोक के लो, तिक? आहा अही कसी के सत्तेता प्रमानित करबाक लेल की आहा तेसर वस्तुक प्रियोक करब आहा तेसर के लेल चारिम इी यात्रा कते जाकर उकत जो ग्यान आपन पुष्टिकरन लेल सदिकन कोनो बहरी सादन पर निरभर रहत, ता मने समपुन मानव ग्यान को आदार कहसी परत. औए ता हा बहुत पएक शंका थाडका देलो. एक दम. सत्तिके आपन प्रमानित करबाक लेल, कोनो बैसाखिक आवष्षकता नहीं हो बाखचाही उक्रा स्वयम्सिद हो बाखचाही आई यह यह वही मोलिक वेचारिक संगर्ष अची जाई पर आई होम्रा लोकनी गंभीर विमर्ष करव. चोडामः सताब दिक महान भार्त्ये दार्षनिक तट्ट चिन्तामनिक आदार पर आई हम्रा लोकनी ज्यान मिमान साक दूता अट्यंत महत्पूरन प्रष्नक उतर खुजबाक प्रयास करवब. जि बहुत आवश्षक अछी भूजब. आप, पहिल की ज्यानक सत्तिता सवता हप्रमानित होई तची, वग्रा सिद कर्बाकलेल कोनो बाहरी सादन कावषक्ता हुएतची अद्दो सर, जगन हम्रा लोकनी के ब्रहम् वग्ड्ड़्ी हुएतची, तो वग्र मनोवे ज्यानिक सन्रचना वास्तम में की हुएतची. बिल्कुल एही वी मरश मे हम न्याई दर्षनक पक्ष रखभ हमर इस पस्ट मान्नेता अची ज्यानक सत्तिता बहरी सादंसा प्रमानित होगते ची जक्रा दर्षनक भाशा में परतह प्रमानित वाद कहल जाई टची आब ब्रहम आँ खुनो सुन्ने वा अग्यान ने थिक एक ता सक्रिय गलत प्रक्रिया आची जक्रा अन्यता ख्याति वाद कहल जाई तची. आज, हमर पक्ष मीमान सक दर्षनक छी. हम इस थापित करब जे न्याई दर्षनक, इद्रिष्टि कोन मानव के, केवल अनन्त दूविधामे फ्हादे थे. हमर तर्ख आची, आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� � अब आत मान लिल जाए जे ग्यान उत्पन होई ते ही स्वतह यतार्त प्रमानित बेजाए तची तची मानव जीवन में सन्शे वड दूविदा कतफुदपन नै हो बाक चाही मुदा की वास्तविकता इए ची? नहीं दूविदा तचे होई तचे बिल्कल होईता चे, जगन हमर लोकनी कोनो नव ठाम जाएची, वा कुनो नव ज्यान प्राप्त करेट ची, तहम्रा लोकनी के स्वबहाविक रूपें संशे होईता चे, जे हम राती में रस्तापर एक लाम वस्तू देखेची, ता हम तुरन्त उग्रा सत्य नहीं मानी लेजची मन में सन्शे होई तचे, जी साप अची, वा सनक दोरी आप, इदे एक ता सामान्या अनुबह ववववची तजग यान स्वतः प्रमानित अचेई तए यी सन्शे कोना समबह लेज? ब्रूम के विश्याय में हमर तर्क अची जे ब्रूम के वल नई जनाब नहीं देक, जकन व्यक्ती शीप में चान्दी देक हताची, बाद में कुनो आन सादन से सिद्ध होई तची जगन आहा तोर्च जरागग, उही दोरी के देखगछची तखन आहाक ज्यान सत्यप्रमाने थोई तचे आजद दो सर दिस, ब्रहम के विशय में हमर तर्ख अची जे ब्रहम के वल नई जनब नहीं थेख जगन व्यक्ती सीप में चान्दी देखात अचाई, तो उ सीप पर चान्दी कगुन के सक्रिये रूपेन आरोपित करे तचाई. इएक ता विषिष्त मान्सिक प्रक्रिया अचाई, कुनो निष्क्रिया वस्ता नहीं. मुदा, मुदा, आग, इ तोर्च जरा का देखवाग जे प्रक्रिया आची, उ दर सं सार्ट्रग द्रिष्टी से एक ता भ्यानक खादिमे खासी परही तच्छाई, हम भुजावे ची कोना. हम सुने ले तग्यार ची. अगर प्रमानित करबाकलेल आहाके तोर्च का प्रकाशा रूपी तोसर जानक आवशकता चे, तो उदोच सही प्रकाश दोर हो लगची, वह आहाके आखी सही काज कर हो लगची, एकर जानच के करत्त? आँ... अनुबहुसा तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो � स्थता सत्य मानल जायता जी जायम कोनो वस्तू देखट ची आहमर आखी थीक आची प्रकाष पर्यापत आची तो उ ग्यान स्था सत्य आची जतदरी ब्रमक विष्वय आची आहा उक्रा बहुड जतिल बनाई रहल ची ब्रम्कोन नव अप्रमान ज्यानक सक्रिय निरमान नाई थीक इम भात्र दूता अलगल ग्यान के भीचक भेदनाई भूजी पाभब थीक इएक ता निष्क्रिय अग्यान अची जाही पर हम आगु विस्तार सचर्चा करवब भुजाल हूं मुदा आहा के अनवस्ता दोषकतरक मने दार्षने गोष्टी मे सुन्भा मे बहुत नीक लगे तची मुदा इएठार्थ सको सु दूर आची यठार्थ सदूर को ना? आहा आहा पुछे ची जब रमाना की श्रिंखला कती रुकत गंगेश उपाद्याए, तत्व चिन्तामनी में एकर बहुत सतीक मनोवि ज्यानेक और व्यावारेक उटर देच्छती. ये श्रिंखला ओते रुकएताची, जटे मानवक सफल प्रव्रुत्ती पूरन होईताची. सफल प्रव्रुत्ती? आँ, जे ना मानु, जे आँ दूर सैक्ता नदी देखछे आँ, आँ के पहल भेर में ज्यान भेल जे उते पानी आची, मुडा आँ के प्यास लागल आचे, जे आँ अप कहेच छी, जे ज्यान सुता सत्य आचे, तकी आँ उई ताम थारबह कषन्तुष्ट बहुजाएप. नहीं, हम पानी पीवज़ाया भलकोल, मन में सन्षय होई तची जे यी पानी अच्छी वे मरु भूमिक म्रिगत्रिष्ना एही सन्षय के दूर करबाक लेल आहा उते जाए ची अंजली में पानी लएच्छी अपी बच्छी जखन आहाक प्यास भुजी जाईत है थाची तखन आहाक शारिरीक आमान्सिक सन्तुष्टी औही ताम औही श्रिंखलाके रोकी देता चे प्यास भुज्बाक जे यी सफल कार्यब्रवित्ती अची उ पुर्व ज्यानक याथारत प्रमानेद को देच्चे एक रा लेल कोनो अनन्त श्रिंख लाक आवश्शक्ता नहीं अचे संटुष्ती मैं ज्यानक अन्तिम परिक्षन अची इटर्क बहुत कमजो अची मावकराब क्याख? आहा कहलू जे पानी पी के प्यास भुज्बाक जे अनुबहव अची उही से पहल गयनक प्रमानित भहल, मुदग जर अर गंभिरता से सोचु, पानी पीके प्यास भुजबाग जे शारिरिक संथुष्टीक अनुबहूँ आची, उहो तचेतनाक भीतर एक तग याने मात्र आची. मुदग उष्चारिक अनुबहूँ आची? अगी सन्तुष्ति ग्यनक सत्तिता के किया प्रमानित करत, कि औह ब्रमात्मक नेभ्हसके तची, जिन स्वाप्म में व्यक्ति पानी पीके सन्तुष्त भईजाई तची, मुदद जागल पर उक्रा पुन्ह प्यास लागल रहे तची. रहा, स्वप्नक बात तग रग ची. अग परतट प्रमानने बात के आदार मानल जाये तो उई शरीरिक सन्तुष्टी के सेव प्रमानित करभाक लेल दोसर प्रमानक भाड जो हो पडद. गंगेशो उपाद्या यदपी महांच हती, मुधह मिमान्सक कई अनवस्ता दोषक शंका अख्चन्दित अची. ताई शंषे क्यों क्यों क्यों क्यों के है रहां के है साब से शंषे अक उपत्ती ज्यानक मुल सुबहावस नहीं अपितु कोनो भाही दोष जना दूर होनाई वा आखी कमजुनी से होई तची जखन दोष रहे तची तखन शंषे होई तची मुदद ग्यामक मुल सबहावत सत्यके प्रकाषिद करव चै, जक्रा बहरी थेकावाक आवशकता नहीं चै. आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� अग्वाँ उग़्ाईद बुजे लईत अची अग्वाँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँ यक न व्यक्ती सीपक चमक देखे तख ही तो उकर आखी सीपक केवल सामाने रूपके देखे तख ही उकर आखी सीपक केवल सामाने रूपके देखे तख ही उकर आखी चमक देखे तख ही विखती सीपक केवल सामाने रूपके देखे तख ही उकर आखी चमक देखे तख ही चम अगर मस्तिखष में पूर में देखल चानी के समरन जाग्रत होई तची मुदाई तदूटा बाद भेल यह तो बाद अची वास्तो में यह तदूटा बिलकुल गलग यान अची पहिल यान अची आखी से भेल प्रत्तिक्ष यी किछु अची अदोसर यान अची मस्तिष्ट्वितर इस्म्रती चानी दोश के वल अटेभी आची जे वेक्ती एह दुन्नू यान के भीच के वेद वा फरक गरहने का पावे तची अव फरक नई बुज़ाई तची अप्रत्यक्श आज्स्म्रिति के एक हे बूजलैता ची, जक्रा भेदागरह कहल जाईता ची, ये एक ता निशक्रिय अग्यान ची, जना कोनो पूठिक ये ता पन्ना पफतल हो, उते कोनो नव गल्ती नहीं लिखाल आची, उते मात्र जानकारिक अबहाव आची, ब्राम बस � जे में तार्किक लगे तची, मुदै इ मानव मनोविग्यानक विरुद्ध है यदी ब्रहम्मात्र भेदक अग्यान आची, जेना आहा कहला हूँ जे पोथी कखाली पन ना जे तो ही आग्यान का आदार पर वेक्ती चानी उठावे लेल सक्रिया वरुपप प्रव्रुत्त क्याग बजाई तची. मने? सोचु, कोनो काज करबाक लेल, जेना निहुरी का बालुस सीप किन उठावे लेल, अग्यान तो शुन्ने आची शुन्ने साक्रीयताग जन्म कुनावेल केवल नहीं जान्बासक कोनो कारेक उपत्ती कोना बासक अग्यान तो शुन्ने आची शुन्ने साक्रीयताग जन्म कुनावेल तो आहाक क नयायक द्रिष्टी एते कि नवबात कही रहाल आची आजा कर न्यायक द्रष्टी एते कि नवबात कही रहल आची जा औव्यक्ती शुन्य सप्रब्रित नाई बहर आची तो उस्विप में की देखी रहल आची जि उक्रा उठावे लेल विवषकर रहल चैक यहे तग गंके शक अन्यता ख्याती सिद्धान तक सुन्दर्या आची ब्रम कोनो अग्यान वा खाली पन्ना नहीं थेक ये एक ता विषिष्ट यान थेक जेना आई कालेक आदूनिक यंट्र वा क्रित्रि मेदाक मती ब्रम के देखु आई हेलुसिनेशिन आदी अगलत उत्तर दैइताई ताई ताई. बलक्ल. जगन उखन उखनो गलती करई ताई ताई, उखनो शुन्यवा अग्यान ने होई ताई ताई ताई. उदूटा बलक्ल सही सुचनाक के पक्डाई ताई ताई, अग्रा जोडी के एक ता पुरनता गलत, अब्रामक उत्तर पुरे आत्मविश्वासक संप्रस्तुत कर दे थाचे. मानव मनत भ्रम यही क्रित्र मेदाक मत्द्ब्रम जका आचे. अच्छा यी तुलनत रोचक अचे? अच्छ व्यक्ती सोजा राखल सिपके देखा थाच, आस्म्रति सा रजद्व, अठात चान्दि पनके खीच का सक्क्रिया रूपन उही सीप पर आरोपित कदिच है, आठात उ व्यक्ति सीप के सीप नहीं भुजका उक्रा पोरन रूपन चानिक रूपने देखाताच. इई अनत्थाख हाती आचे एक वस्तुके दोसर वस्तुके रूपने देखभ अग्यान सा प्रव्रती नेबासा कैताच प्रव्रती हमेशा विषिष्ट यान सा होई ताच मुदा अहाक इग्रित्रिम मेदाक द्रिष्टान्त रोचक होई तो एक्रा भीतर एक्ता बहुत पएक तारकिक विरोदा बास अच्छे की विरोदा बास अच्छे? आहा कहे ची, जे व्यक्ती स्म्रितिसद चानी पनक खिच का सीप पर आरोपिद कदे तच्छे मुदा मिमान सा के ते एक्ता बहुत मुल प्रष्नो पुछे तच्छी जे वस्तु उते उपस्तित अचीए नै उक्रा आखी कुना दिखी सके तच्छे आँ उस्मिरती सावे तच्छे वुदा आगाक अनिध्धा ख्याती सिद्दान्त मे एक ता पैएक दोष यए च्छे जे आहा एक ता एहन गुन चानी पन के उते प्रत्यक्ष भेल मानी रहल ची जते आव अच्छी ने ये बहुतिक वास्तविक्ताक विरुद छे जते चानी अच्छी ने उते आखी के चानी पन कुना दिखाई दस कै तच्छे इआखी नहीं वन करे तच्छे मुदा मिमान्सक का द्र्ष्टी संग, प्रव्द्ती के लेल यी प्र्याब्त जी, जि व्यक्ती उई ही वस्तूके प्राप्त करेबाक इच्छा रक्ठ हो, आ उक्रा उक्र बादध तत्रक ज्यान नही होए. जखनो चानि कस्मरन करता ची, तचानिक परती उकर अकर्षन पहले से अची. उकर पूवसंचित इच्छा उकर प्रव्रुत्त कदे टा ची. एक्रा लेल सीप में चानि पन कस्सक्रिय निरमान वा जादू कतर है आरोपन करवाक कुन अवर्ष्च्ता नहीं आची. आहा मानव मनक अकारनी एक तदोखा दोवाला यंट्र मानी रहूल ची. नहीं नहीं मन दोखा दोवाला यंट्र नहीं आची. मुदा मनक संग ज्यानेंद्रे कषम बन द ची उई में त्रुती आवी सके तची. नियाय मानेत छी जे रजदत्व बच्चानी पन संसार में कतवदा छी, उ सत्या है, दुकान मेराखल चानी में हो आची, मनक असाभारन शकती उई सत्य रजदत्वक किस्मरिती से तानी कै इते सी परानी दे छी, इं मानव ज्यानेंद्रे कसीमा आची. मुदा आँ एह विवादक के एक ता और गम्दिर दरातल पर लाज़ाए. आप बलकु. जता ए गंगे शुपाद्ध्याए, उद्याना चार्यक एक ता बहुत शक्तिषाली तर्कक उप्योख करे चति, जक्रा हम्रा लोकनी व्यबहारेक व्यागात कैसा के चि, आहाक सिद्दान्तक अनुसार ग्यान यदी सवता सत्या ची तलोकक शंशै केवल दोष सहोईता ची मुदा उद्यानाचार्य कहे चति जे व्यवाहारिक जीवन में शंशैक कोनोस धान नाया ची जते निरन्तक आज भरा हला ची आहा उई तरकक बात कर रल ची जद उद्यानाचार्य, शन्शै आब्यवावारिक जीवन्क बिरोद के शपष्ट करे चहती. बिल्कुल. उद्यानाचार्य क तरकक एक ता आदूनिक द्रिष्टान्त सबूज हो. आहा भाई जाहाज भा विमान सयात्रा करे ची. अखन आहा विमानक तिकत कतबे ची तक यहा के इशन्शाय होईत अची जै गुद्वा करशनक निमक तोडी के अखाश मे उडि पाबत बने समानन तहने आखन शवदानते करूपः आहा दाशनिक बनी कखष कही सके ची जई एक ता यंप्र आची, खसी सकेत ची, शन्षे आची, मुदा आख निमित विवार की आची, आची तिकत लेए ची, जागसीट पर भईऽे ची, आसुती जाएची. उद्याना चारे कहे चती, जजदे शन्षे आची, उते व्यवार नहीं भासके ची, अजते न्यमित व्यवार अची, उते शन्शे टिकी ने सके तची. मुदा इत व्यवार अग बाद भेल? आई निष्चित व्यवार प्रमानित करई तची, जे सत्तिताक प्रमान, बाह्य अनुबहवस अथात वाजारो भेर विमानक के सुरक्षित उड़ाइत देखबा कनुवावसं सिद्द वो चुके लची. गंगेश स्पष्ट करे चती जे ज्यान मिमान सा में, सत्तिता अव उप्पत्ती प्रक्रिया दूनो अनिवार्य च्छी. आईी सत्तिता बाय सादन वसपल विवार सही सिद्धोई तची मिमान्सकक स्वतः प्रमाने वाद एही मान्विवारक वास्तविक्ताके अंदेखा कोडई तचे हम उद्याना चारी अगंगेषक एह तरकक गंविरताक सम्मान करे ची मुदा एते मी मानसक द्र्ष्टिकोनक बुजा बहुत आवश्षक अचे. हम माने ची जे विवहारिक सत्तेताक लेल प्रवर्तिके आदार मानल जासके तचे. आहक विमानक उदारन विवारिक जीवनक सुविदाके बतावे तचे. बिलकल. मुदा दर्षन शास्त्र केवल दैनिक जीवनक सुविदाक लेल नहीं आचे, इद्तवक मुल प्रक्रतिके बुजबाक लेल आचे. सद्द्दन्तिक रूपेईड यदि आहा मानव, जे ज्यान के सत्तिता सदिक हन भाहे कार्यासाई सिथ होई तचे, तक ज्यान आपन सत्ताकले लपराष्रित भोगेल मिमान सकक तर कचे ज्यान सुर्यक प्रकाषक समाने चे सुर्यक प्रकाष राई की सुर्यक प्रकाषके प्रमानित करबाक ले आहाके कोनो तोर्च वा लाल्टिना कावषक्ता हुई तची नहीं प्रकाश स्वेम आपन उपस्तिति के प्रमानित करेताची अदोसर वस्तूके सोब प्रकाषित करेताची तहीना, ग्यान के मुल प्रक्रूति उकर कारन सामागरी सा स्वता यदार्त प्रमानित फोबाक चाही यदि उही में कुनो दोशा ची तखोनो ग्यान बादिद होई तची मुदा बादख अबहाव में ग्यान सथा प्रमान अची मुदा जा जा ग्यान सवेम में सत्ये नहीं होई तखोनो बाई या व्यबार अख्रा सत्ये नहीं बना सके तची सूर्यक प्रकाश वलाई उप्मा प्रकाश वाला इ उप्मा काव्यक त्रिष्टी सा बहुत सुन्दर अची मुदा गंगेश एकरा तारकिक रुपन क्हन्दित करेच छी थी सूर्यक प्रकाश प्रत्यक्ष अची उईक्ता भोतेख वस्तू अची वानव ग्यान एक ता अंतर एक मन्सिक प्रक्रिया ची, जे बाहरी सन्सार सा अंतर क्रिया करे ता ची. मुदा दूनु कास्त प्रकाषित करभे चीने. ने ग्यान कोनो सूर्यजका सुता प्रज्वलित नहीं आची. ग्यानिद्री आविशयक संपर्क सा ज्यान उत्पन्न होई तची इक ता यंट्र के तरा काज करे तची जही में कटा हिस्सा लागल अची आखी, प्रकाश, वस्तू, आमन जगन उ संपर्क निर्दोष होई तची तखन सत्य ज्यान बने तची अजगन उही में कुनु कराभी आवे तची तचन भ्रम बने तची मुदा यंट्र मानप्ता चोंकी ज्यान के उप्पत्ती कारन में दोष बहुसके तची तचे ले ज्यान स्वतान निर्दोष कुना बहुसके तची एक रापरिक्षनक आवश्शकता चे यह कारन ची जे गंगेश परतह प्रमाने वाद अ अन्यता ख्याती के एक बल देट चतिन, गलती एक ता सक्री अगलत प्रक्रीया आची, असत्य एक ता सक्री असही प्रक्रीया आची, जकर बाही असत्या पनावष्यक अची. अपने बश्वाद ने थी ज़ी जी जी जी जी बवाश्वाद ने जी जी जी जी जी जी जी जी जी जी जी जी जी जी जी जी जी जी जी जी जी जी जी जी जी जी जी जी जी जी जी जी जी जी जी जी जी जी जी जी जी जी जी जी जी जी जी जी जी जी जी जी जी जी जी जी उआई उआई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आ� भी बवाड़़ बाद़ प्रमाड़ प्रमाड़ बाद़ प्रमाड़ बाद़ बाद़ बाद़ बाद़ बाद़ बाद़ बाद़ बाद़ बाद़ बाद़ बाद़ बाद़ बाद़ बाद़ बाद़ बाद़ बाद़ बाद़ बाद़ बाद़ बाद़ बाद़ बाद़ बा� अब विर्ती वा अबवव का आविष्षक्ता होई ताची हम्रा लोकनेक ब्राम, कोनो शुन्या वा अग्यान मात्र नहीं थेक इई एक ता सक्क्रिय भूल थेक, जताई हम्रा लोकनेक एक वस्तू के दोसर वस्तू के रूप में दिखाइत ची न्याये दर्शन सत्तिके प्राब्त करबाक एक्ता यतार्थ्वादी अव्वस्तुनिष्ट मार्ग प्रष्ष्ट करएत अची. अम्मिमान सक द्रिष्टिकोनक सारान्ष देतों, अम इी कहब जिग्यानक आदार बुध सन्रच्ना के अनविस्ता दोष्छ से बचे बाक लेल, असंज्यानक स्वतन्त्रता के स्थापित कर बाक लेल, स्वताप्रमान व्याद अनिवारे अची. यदि सत्या स्थ्या स्थ्या नहीं है, ता सन्सार में कुनो प्रमान उक्रा स्थ्या नहीं कर सके तची. यएक ता मस्वूथ सथ्द्धान्तिक बिन्दु अची. आप भ्रमक संदर्भ में अख्यातिवाद ये स्थ्धाख करे तची, अगानो मन सबावता असत्यक सुजन नहीं करे तची, उ केवल दूता सत्यके भीज के भीज के गमा दे तची. ये एक ता सुद्द्रद आ अनिवारे सध्धान्तिक धाचा प्रस्त॥ करे तची, जे ज्यान के शुद्था के अक्षुन्द राखे तची. वंगेश्व उपाद्ध्यर अचित तत्र चिन्ता मनी ज्यान की यान था था अब्रमक जतिल्ता के बुज्वाक लेल जे वैचारिक अदार भूमी तयार करे तची उ अद्यन्त सुख्ष्म आ अद्वित्या अच्छी, मानव्मस्तिष्क कोना काज करे तची, एकरे तेक गेहर अपन सिद्धान पूनर मुल्यांकन करबाक लेल बादे कर देलक, सत्या और ब्रमक इविश्लेशन सदिखन प्रासंगे क्रहत। ता आएक चर्चा के हम्रा लोकनी यहे समाप्त करे तची श्रोता गन आब यी आहा पन निरभर अची जे आहा विचार करी कि सत्ते उही कसी के चुभी ते प्रमानित भजाईत अची, वा सत्ते स्वयम उखसी अची, जक्रा कोनो बाहरी प्रमानक आवशकता नहीं च्याएक. इएक्ता एहन प्रश्नाची जे आहा के सत्तिके कोज में सदिक्हन विचार्षील रखत, विमर्षक एह मनच से जुदबाक लेल बहुत-बहुत द्श्निवाद.

← Transcript index