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તત્ત્વચિન્તામણિ__એક_વિશ્લેષણ.mp4

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Part 8 · VIDEHA MITHILA MAITHILI DISCUSSION CRITICISM SERIES PART 8
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  1. 0:00–0:09नमसकार! प्राषीन भारतिय फिलोसोफीन, सोथी जटीलने कथोर गरन्द हो माना एकना, आ उन्डान पुर्वकना विष्लेषन मा विष्लेषन वागत जे.
  2. 0:09–0:17आपडे एक एवा गरन्त निवात करवाना जे ज्या मानुव तरक अने गनान नी सीमावनी अक्री कसोटी ताए चे.
  3. 0:17–0:20चालो सीदाज मुद्दा पर आविये
  4. 0:20–0:24आजना आपना विष्लेष्चनद नो मुख्य आदार चे
  5. 0:24–0:31वेर्मी सदीना महान विचारक गंगेश उपाद्यारनो एतिहासिक संसक्रित गरन्त तत्वष्टा मनी
  6. 0:31–0:35अगवे सामाने पुस्तक नती आएक मास्ता पीस चे
  7. 0:35–0:41आने हवे गजेंद्र थाकरना अत्यंत सचोट मैठीली अनुवादने कारने
  8. 0:41–0:45जटिल तरक ने समजवो आपना माते गनो वदु सुलब बनी गयो चे.
  9. 0:46–0:51तो आजनी आ बवद्दिक सफर मा आपने मुख्यत्वे क्या मुद्दाउ पर चर्चा करीश।
  10. 0:52–0:55आपने जोईशु तत्व चिंतामनी महांता
  11. 0:55–0:57मंगल आचरन नो आस्ली हे तु
  12. 0:57–1:03माना उगनान नी प्रमानिकता, चीप अने चान्दीना ब्रम्न उदाहरन, अनुमान ना कडक नियमो,
  13. 1:03–1:07अने अनते तारकिक विचार सरनी मा रही जती खामिो.
  14. 1:07–1:13आपने मिमान्सा अने न्याई दर्षन, वच्चना ए सद्योजूना बवद्धिक युद्दना साक्षी बनवा जे रहा जे आची.
  15. 1:14–1:19चालो पहला विबाग दी शर्वात करीए, जे चे तत्व चिंतामनी गरन्तनी महांता.
  16. 1:19–1:30आखुई नानी सुनी चर्चा नती, आग गरन्त और तेमा रहला जटिल तर्क ने अन्य बाशामा उतार्वा पाच़ड जे प्रच्चंद विध्वान प्रयासोथ आया चे खरे-खर अद्बूथ चे.
  17. 1:30–1:35आप उस्तकनी विस्त्रुत अनुक्रमनिका पर नजर करीए तोज अंदा जावी जाए.
  18. 1:35–1:41आव आखु गरन्त मानव समजनने अद्यान्त विवस्तितरी ते स्तरे स्तरे विख़्िनाखे चे.
  19. 1:41–1:48ते प्रस्थापित मीमान्साना रूदीचुस्त्मन्तव्यो अने क्रान्तिकारी न्यायतर्क वच्छे एक कडक रेफ्री तरीके काम करे चे.
  20. 1:48–1:56अभी अगर वदि आपना पहला बवध्धिक युद्दना मेडान तरव अगर अगर वाद अद अविभाग एक विभाग एक विभाग नुबबुत मानव क्रिया पर एक रस्परत प्रष्नोबो करे चे.
  21. 1:56–2:02अवे आगर वदि आपना पहला बवदिक युदना मेडान तरव इतले के मंगल वाद
  22. 2:02–2:06आविबहाग एक दम मुडबूत मानव क्रिया पर एक रस्प्रत प्रष्नोबो करे चे
  23. 2:06–2:11आपने कोई पन नवू कारे शरू कर ता पहला मंगला चरन के आजवान शामाते करी जी
  24. 2:11–2:14अज़्ान शामाते करीए चीए, शुते करे कर जरूरी चे?
  25. 2:14–2:18आही बे तदन विरोदी विचारो साम सामे चे.
  26. 2:18–2:22इक तरव मिमान्सा शाला चे, जे दलील करे चे के,
  27. 2:22–2:26मंगलाचरन करवाती कार्य पून थवानी गारन्टी मडी जाए चे.
  28. 2:26–2:29प्रार्त्ना करी तो पुस्तक पूरुत हषेज,
  29. 2:29–2:33पार्ण भीजी तरव गंगे शुपाद्यान न्याय तर्क चे,
  30. 2:33–2:38तेो कहे चे मंगलाचरन लु काम मात्र अद्रष्श अव्रोदो के विगनों नाश कर वानू चे.
  31. 2:38–2:41ते सीदीरी ते कोई पुस्तक पूरन करावी सक्तून दी.
  32. 2:41–2:45हवे ही एक जबर दस्त सबालू बोथ है ज़ा वीचारो,
  33. 2:45–2:50जो कोई नास्तिक वेक ती मंगलाचरन करया विनाज पोतानु पुस्तक लक्वानू शरू करे
  34. 2:50–2:52अने ते पूरूपन करी ले. तो शूँ.
  35. 2:52–3:02तो शूछु, जे लेखखो मंगलाचरन ने भिल्ल्कुल मान्ताज नती, अने शताए सप्ष्डदा पूर्वक तेमना महान गंतो प्रकाषिट करेच तेने आसिद्दान्तो कैरिति समजाउषे.
  36. 3:02–3:10आना जवाब मा गंगेश उपाद्धाई विगना भाँन अधबुत ख्याल रजूकरी नयाईनी स्तीतीनो बचाओ करेचे.
  37. 3:10–3:14तेओऊ सपष्ट केएचे के आवा किस्साव मा पहला थीच कोई विगनो हताज नहीं.
  38. 3:14–3:19स्बवाव के बुद्कारना कर्मोने कारने आव्रोदो पहले थी जगेर आजर अता
  39. 3:19–3:22इटले मंगला चरननी कोई जरूर्यात दई नोती उभी थाई
  40. 3:22–3:26बहुज शरल लोगिक छे जो रस्तामा कोई खाडो होयज नहीं
  41. 3:26–3:28तो तेने पुर्वानी महनत शामाते करवी
  42. 3:28–3:35बरवर, तो हवे आगर बदिये त्रीजा विबाग पर, जे छे मानव गयान नी प्रमानिकता अथवा प्रमानिवाद.
  43. 3:35–3:43आगरन्त एक बहुच गहन प्रष्न पूचे चे, के मानव मन ने केवीरी ते खातरी थाए खे तेनी पासे जे गयान चे चोटटका का साचुट चे.
  44. 3:43–3:47आईववरी एक वार मिमान्सा अने नयाय वर्चे जंग जामे चे.
  45. 3:47–3:51मिमान्सा स्वतह प्रामाने वादनो दावो करे चे.
  46. 3:51–3:55जएनो अर्थे वो थाई के गनान जेग शने उपन न �the
  47. 3:55–3:58पोटने जातने आपो आप साचु प्रमानित करिले चे.
  48. 3:58–4:03ज़र न्याय शाडा मक्कम ताती परतह प्रामाने वाद्माने च्याए,
  49. 4:03–4:08तेमना मते न्यान ने कोई बहीड पुरावा के सफल उप्योग थीज साभिद करवो पडेचे,
  50. 4:08–4:11ते जातेज साथु साथु साजबिद �thei जतु नती.
  51. 4:11–4:15आम उद्दाने साभित करवा माते न्याई को एक अट्यन्त सचोट दलील करे चे.
  52. 4:16–4:22तेव पुछे चे के जो गन्यान उपन थतानी साथेज पूतानी मेडे साचु साटिट ठाईजतू है,
  53. 4:22–4:24तो पची मानसना मन्मा शंका केम जन में चे.
  54. 4:24–4:27जो बदूज गन्यान पहले थी साचुज होई,
  55. 4:27–4:29तो कोई नवी वस्तू शिक्ती वकते
  56. 4:29–4:32आपन ने क्यारे कोई शंका के दूदिदा था बीजना जो ये करूने,
  57. 4:32–4:35पन वास्तविक्ता मातो शंका थायजज़े.
  58. 4:35–4:43आज मानोव शंका अने व्रमने वदू उन्डार थी समजवा माते आपने चोथा विबाग, इतले के ख्यातिवाद तरव जए.
  59. 4:43–4:53आई ब्रमनी खिरीने समजवा माते, दर्या किनारे पडेली एक चमक्ती चीपने चान्दी समजी लेवाना अत्यन्त जानिता उदाहरन नो उप्यो करवा मावे अजे.
  60. 4:53–4:56अपने वण्च्छनो तफावत उडख्वामा निश्वड रही थे, अपन नियाए शाडा कहे चे, ना अमात्र भेज जानवानी निश्परता नती, अई एक सक्रिय भूल चे.
  61. 4:56–5:00नियाए शाडा अँ सक्रिय भूल ले अन्यता ख्याती नामा पेचे.
  62. 5:00–5:04बद्रम केम ताएजे, मिमान सको तेने अख्याती वाद कहेजे,
  63. 5:04–5:08मतलपके आपने सामे पडेली चीप आपने आपनी याद्दाश्ट मा रहे ली चान्दी
  64. 5:08–5:11आब ने वच्चनो तफावत उडख्वामा निश्वड रही एचे,
  65. 5:11–5:17पर न्यायशाडा कहे चे, कि ना, आ मातर भेज जनवन निश्परता नती, आ एक सक्रिय भूल चे.
  66. 5:17–5:22न्यायशाडा आ सक्रिय भूलने अन्यता ख्याती नामापे चे.
  67. 5:22–5:26आही आपदु मन भूलती कोई चोकस याद राके लागोन ने,
  68. 5:26–5:28जेम के चान्दी होवाना गोडन ने
  69. 5:28–5:31सीदाज आपडी सामे पडेली चिप पर थोपी देचे
  70. 5:31–5:35अगले के, आपडु मन मात्र महीती गरहन नती करत।
  71. 5:35–5:38ते सक्रिय पने वास्तविक्ता मा ब्रहमु मेरे चे
  72. 5:38–5:40आमात्र अगनान नती
  73. 5:40–5:44वस्तुने बीजी वस्तुन रूप्मा जोवानी एक जटिल प्रक्री आचे.
  74. 5:44–5:48वह वात करी आ बोद्दे को द्वन्वनी पराकाश्तानी.
  75. 5:48–5:50पाच्मो विबाख चे अनुमान खन्द.
  76. 5:50–5:54आईी तारकिक अनुमाननी पद्धियों अत्यंत निर्देता ती तबास्वाम आवीचे.
  77. 5:55–5:58आई एजग्या चे जा तर्क तेनी चरम सीमाये पूँचे चे.
  78. 5:59–6:02आई यी सवूत्थी महत्वनो कुन्सेप चे व्याप्ती.
  79. 6:02–6:05व्याप्ती येटले एक अतूट नियम.
  80. 6:05–6:14समजो, के जिया पन दूमाडा जेवो कोई चोक्कस संकेत देखाए, त्या तेन भूल कारन एटले के अगनी हाजर होवोज जो ये.
  81. 6:14–6:19कार्या अने कारन वच्छे ना आतूट सबवन्द ने व्याप्ती कहवाए चे.
  82. 6:19–6:22कोई पर लोगिकल इंफरेंस नो पायोज अ व्याप्ती चे.
  83. 6:23–6:26परन्तु शु व्याप्ती नी व्याख्या एट्ली सरड चे?
  84. 6:26–6:27बलकुल नहीं.
  85. 6:27–6:30गंगेश नहीं जुनी मिमन साद वारा आपेली व्याख्याउन।
  86. 6:31–6:32रिज़र नु चीर हरन करेचे.
  87. 6:32–6:43त्यो व्याप्ति पंचक अने सी व्याग रे लक्षन जी भी जूनी व्याख्याउन बारी काई ति प्रुथक्रन करे चे अने साभित करे चे अव्याख्याउ विषिष्ट तारके क परिस्तितियो मा समपून आपने निष्झ्झ्फर जाए चे.
  88. 6:43–6:51जूनी व्याख्याँने नकारी काड्या पची, गंगेश तेमनु पोतानुज जर्बेस लाक सिद्धान्त लक्षन स्तापित करे चे.
  89. 6:51–6:58तेो ईवी कड़क व्याख्या आपे चे के व्याप्ती एटले, हे तु आने साद्ध्या वच्यनो एवो संबंद,
  90. 6:58–7:01जे कोई पन वी संगत तादवारा तोडी नषकाए,
  91. 7:01–7:08तेमनी शरत चे के आस नबंद कोई पन असंगत अबहाव थी समपून पने मुक्त हो जो ये.
  92. 7:08–7:11तो चालो, हवे चला विबाक तरफ आगड वद ही,
  93. 7:11–7:13तारकिक विचार सरनी मा खामिो.
  94. 7:13–7:17आपने जो यो के व्याख्याओ गम्मे तेली मज्बूथ है,
  95. 7:17–7:20पन जो तेमा कोई चूपाएली शरत होए,
  96. 7:20–7:22जेने उपादी कैवाए चे,
  97. 7:22–7:23तो मोटी मोटी दलीलो पन,
  98. 7:23–7:27के विरी ते पत्ताना महलनी जैम दराशाइ थे जैचे.
  99. 7:27–7:30आने एक बहुज प्रचलित उदारनती समजी एक.
  100. 7:30–7:33दारो के परवत पर दूमाडो देखा एकचे.
  101. 7:33–7:37इतले सीदु मानी लेवा मावे के त्या आग होवीज जो ये.
  102. 7:37–7:41उबहर हो आही एक चुपी शरत के उपादी चे.
  103. 7:41–7:42बीनु लाक्डू.
  104. 7:42–7:46अग त्यारेज दूमाडो पेदा करे चे ज़र तेमा भीनु लाग्डू होए,
  105. 7:46–7:50जो लाग्डू साव सुकू होए, तो अग दूमाडो पेदा करषेज नहीं।
  106. 7:50–7:54इतले उपादीने आम समजी सकाई, तेक एवीस थी चे,
  107. 7:54–7:58अब आब दिचर्चाने नते समग्र दलिल, पक्ष्टा अने परामर्ष्नी अद्यन्त कडग आवष्ष्टाउ पर केंद्रित थाएचे.
  108. 7:58–8:01अब आब दी चर्चाने आंते समग्र दलील,
  109. 8:01–8:06पक्ष्टा अने परामर्ष्नी अद्यन्त कडक आवष्ष्टाउ पर केंद्रित थाएचे.
  110. 8:06–8:09पक्ष्टा एटले अनुमान मातेनो नक्कर आदार,
  111. 8:09–8:11जा हजु साभी तीनी इच्छा बाकीचे.
  112. 8:11–8:15त्रीजाज चुपायला परीवड़ दवार उभो कराएलो ब्रामवतो.
  113. 8:15–8:18अने आब दी चर्चाने आंते समग्र दलील,
  114. 8:18–8:22पक्ष्ता अने परामर्ष्नी अछ्यंत कडक आवश्षकताव पर केंद्रित थाएचे.
  115. 8:23–8:26पक्ष्ता एटले अनुमान मातेनो नक्कर आदार,
  116. 8:26–8:28जा हजु साभी तीनी इच्छा बाखी चे
  117. 8:28–8:31औने परामर्ष येटले निषकर्ष पर पहुच्वा माते
  118. 8:31–8:33लेवातु सीदु गन्यानत्मक पगलू
  119. 8:33–8:35मिमान सको कहे चे
  120. 8:35–8:37अलगती परामर्षनी कोई जरूर नहीं
  121. 8:37–8:39पर न्याई को तेने गन्यान उपन करवान।
  122. 8:39–9:06अगर अगर बद्यादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादाद

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नमसकार! प्राषीन भारतिय फिलोसोफीन, सोथी जटीलने कथोर गरन्द हो माना एकना, आ उन्डान पुर्वकना विष्लेषन मा विष्लेषन वागत जे. आपडे एक एवा गरन्त निवात करवाना जे ज्या मानुव तरक अने गनान नी सीमावनी अक्री कसोटी ताए चे. चालो सीदाज मुद्दा पर आविये आजना आपना विष्लेष्चनद नो मुख्य आदार चे वेर्मी सदीना महान विचारक गंगेश उपाद्यारनो एतिहासिक संसक्रित गरन्त तत्वष्टा मनी अगवे सामाने पुस्तक नती आएक मास्ता पीस चे आने हवे गजेंद्र थाकरना अत्यंत सचोट मैठीली अनुवादने कारने जटिल तरक ने समजवो आपना माते गनो वदु सुलब बनी गयो चे. तो आजनी आ बवद्दिक सफर मा आपने मुख्यत्वे क्या मुद्दाउ पर चर्चा करीश। आपने जोईशु तत्व चिंतामनी महांता मंगल आचरन नो आस्ली हे तु माना उगनान नी प्रमानिकता, चीप अने चान्दीना ब्रम्न उदाहरन, अनुमान ना कडक नियमो, अने अनते तारकिक विचार सरनी मा रही जती खामिो. आपने मिमान्सा अने न्याई दर्षन, वच्चना ए सद्योजूना बवद्धिक युद्दना साक्षी बनवा जे रहा जे आची. चालो पहला विबाग दी शर्वात करीए, जे चे तत्व चिंतामनी गरन्तनी महांता. आखुई नानी सुनी चर्चा नती, आग गरन्त और तेमा रहला जटिल तर्क ने अन्य बाशामा उतार्वा पाच़ड जे प्रच्चंद विध्वान प्रयासोथ आया चे खरे-खर अद्बूथ चे. आप उस्तकनी विस्त्रुत अनुक्रमनिका पर नजर करीए तोज अंदा जावी जाए. आव आखु गरन्त मानव समजनने अद्यान्त विवस्तितरी ते स्तरे स्तरे विख़्िनाखे चे. ते प्रस्थापित मीमान्साना रूदीचुस्त्मन्तव्यो अने क्रान्तिकारी न्यायतर्क वच्छे एक कडक रेफ्री तरीके काम करे चे. अभी अगर वदि आपना पहला बवध्धिक युद्दना मेडान तरव अगर अगर वाद अद अविभाग एक विभाग एक विभाग नुबबुत मानव क्रिया पर एक रस्परत प्रष्नोबो करे चे. अवे आगर वदि आपना पहला बवदिक युदना मेडान तरव इतले के मंगल वाद आविबहाग एक दम मुडबूत मानव क्रिया पर एक रस्प्रत प्रष्नोबो करे चे आपने कोई पन नवू कारे शरू कर ता पहला मंगला चरन के आजवान शामाते करी जी अज़्ान शामाते करीए चीए, शुते करे कर जरूरी चे? आही बे तदन विरोदी विचारो साम सामे चे. इक तरव मिमान्सा शाला चे, जे दलील करे चे के, मंगलाचरन करवाती कार्य पून थवानी गारन्टी मडी जाए चे. प्रार्त्ना करी तो पुस्तक पूरुत हषेज, पार्ण भीजी तरव गंगे शुपाद्यान न्याय तर्क चे, तेो कहे चे मंगलाचरन लु काम मात्र अद्रष्श अव्रोदो के विगनों नाश कर वानू चे. ते सीदीरी ते कोई पुस्तक पूरन करावी सक्तून दी. हवे ही एक जबर दस्त सबालू बोथ है ज़ा वीचारो, जो कोई नास्तिक वेक ती मंगलाचरन करया विनाज पोतानु पुस्तक लक्वानू शरू करे अने ते पूरूपन करी ले. तो शूँ. तो शूछु, जे लेखखो मंगलाचरन ने भिल्ल्कुल मान्ताज नती, अने शताए सप्ष्डदा पूर्वक तेमना महान गंतो प्रकाषिट करेच तेने आसिद्दान्तो कैरिति समजाउषे. आना जवाब मा गंगेश उपाद्धाई विगना भाँन अधबुत ख्याल रजूकरी नयाईनी स्तीतीनो बचाओ करेचे. तेओऊ सपष्ट केएचे के आवा किस्साव मा पहला थीच कोई विगनो हताज नहीं. स्बवाव के बुद्कारना कर्मोने कारने आव्रोदो पहले थी जगेर आजर अता इटले मंगला चरननी कोई जरूर्यात दई नोती उभी थाई बहुज शरल लोगिक छे जो रस्तामा कोई खाडो होयज नहीं तो तेने पुर्वानी महनत शामाते करवी बरवर, तो हवे आगर बदिये त्रीजा विबाग पर, जे छे मानव गयान नी प्रमानिकता अथवा प्रमानिवाद. आगरन्त एक बहुच गहन प्रष्न पूचे चे, के मानव मन ने केवीरी ते खातरी थाए खे तेनी पासे जे गयान चे चोटटका का साचुट चे. आईववरी एक वार मिमान्सा अने नयाय वर्चे जंग जामे चे. मिमान्सा स्वतह प्रामाने वादनो दावो करे चे. जएनो अर्थे वो थाई के गनान जेग शने उपन न �the पोटने जातने आपो आप साचु प्रमानित करिले चे. ज़र न्याय शाडा मक्कम ताती परतह प्रामाने वाद्माने च्याए, तेमना मते न्यान ने कोई बहीड पुरावा के सफल उप्योग थीज साभिद करवो पडेचे, ते जातेज साथु साथु साजबिद �thei जतु नती. आम उद्दाने साभित करवा माते न्याई को एक अट्यन्त सचोट दलील करे चे. तेव पुछे चे के जो गन्यान उपन थतानी साथेज पूतानी मेडे साचु साटिट ठाईजतू है, तो पची मानसना मन्मा शंका केम जन में चे. जो बदूज गन्यान पहले थी साचुज होई, तो कोई नवी वस्तू शिक्ती वकते आपन ने क्यारे कोई शंका के दूदिदा था बीजना जो ये करूने, पन वास्तविक्ता मातो शंका थायजज़े. आज मानोव शंका अने व्रमने वदू उन्डार थी समजवा माते आपने चोथा विबाग, इतले के ख्यातिवाद तरव जए. आई ब्रमनी खिरीने समजवा माते, दर्या किनारे पडेली एक चमक्ती चीपने चान्दी समजी लेवाना अत्यन्त जानिता उदाहरन नो उप्यो करवा मावे अजे. अपने वण्च्छनो तफावत उडख्वामा निश्वड रही थे, अपन नियाए शाडा कहे चे, ना अमात्र भेज जानवानी निश्परता नती, अई एक सक्रिय भूल चे. नियाए शाडा अँ सक्रिय भूल ले अन्यता ख्याती नामा पेचे. बद्रम केम ताएजे, मिमान सको तेने अख्याती वाद कहेजे, मतलपके आपने सामे पडेली चीप आपने आपनी याद्दाश्ट मा रहे ली चान्दी आब ने वच्चनो तफावत उडख्वामा निश्वड रही एचे, पर न्यायशाडा कहे चे, कि ना, आ मातर भेज जनवन निश्परता नती, आ एक सक्रिय भूल चे. न्यायशाडा आ सक्रिय भूलने अन्यता ख्याती नामापे चे. आही आपदु मन भूलती कोई चोकस याद राके लागोन ने, जेम के चान्दी होवाना गोडन ने सीदाज आपडी सामे पडेली चिप पर थोपी देचे अगले के, आपडु मन मात्र महीती गरहन नती करत। ते सक्रिय पने वास्तविक्ता मा ब्रहमु मेरे चे आमात्र अगनान नती वस्तुने बीजी वस्तुन रूप्मा जोवानी एक जटिल प्रक्री आचे. वह वात करी आ बोद्दे को द्वन्वनी पराकाश्तानी. पाच्मो विबाख चे अनुमान खन्द. आईी तारकिक अनुमाननी पद्धियों अत्यंत निर्देता ती तबास्वाम आवीचे. आई एजग्या चे जा तर्क तेनी चरम सीमाये पूँचे चे. आई यी सवूत्थी महत्वनो कुन्सेप चे व्याप्ती. व्याप्ती येटले एक अतूट नियम. समजो, के जिया पन दूमाडा जेवो कोई चोक्कस संकेत देखाए, त्या तेन भूल कारन एटले के अगनी हाजर होवोज जो ये. कार्या अने कारन वच्छे ना आतूट सबवन्द ने व्याप्ती कहवाए चे. कोई पर लोगिकल इंफरेंस नो पायोज अ व्याप्ती चे. परन्तु शु व्याप्ती नी व्याख्या एट्ली सरड चे? बलकुल नहीं. गंगेश नहीं जुनी मिमन साद वारा आपेली व्याख्याउन। रिज़र नु चीर हरन करेचे. त्यो व्याप्ति पंचक अने सी व्याग रे लक्षन जी भी जूनी व्याख्याउन बारी काई ति प्रुथक्रन करे चे अने साभित करे चे अव्याख्याउ विषिष्ट तारके क परिस्तितियो मा समपून आपने निष्झ्झ्फर जाए चे. जूनी व्याख्याँने नकारी काड्या पची, गंगेश तेमनु पोतानुज जर्बेस लाक सिद्धान्त लक्षन स्तापित करे चे. तेो ईवी कड़क व्याख्या आपे चे के व्याप्ती एटले, हे तु आने साद्ध्या वच्यनो एवो संबंद, जे कोई पन वी संगत तादवारा तोडी नषकाए, तेमनी शरत चे के आस नबंद कोई पन असंगत अबहाव थी समपून पने मुक्त हो जो ये. तो चालो, हवे चला विबाक तरफ आगड वद ही, तारकिक विचार सरनी मा खामिो. आपने जो यो के व्याख्याओ गम्मे तेली मज्बूथ है, पन जो तेमा कोई चूपाएली शरत होए, जेने उपादी कैवाए चे, तो मोटी मोटी दलीलो पन, के विरी ते पत्ताना महलनी जैम दराशाइ थे जैचे. आने एक बहुज प्रचलित उदारनती समजी एक. दारो के परवत पर दूमाडो देखा एकचे. इतले सीदु मानी लेवा मावे के त्या आग होवीज जो ये. उबहर हो आही एक चुपी शरत के उपादी चे. बीनु लाक्डू. अग त्यारेज दूमाडो पेदा करे चे ज़र तेमा भीनु लाग्डू होए, जो लाग्डू साव सुकू होए, तो अग दूमाडो पेदा करषेज नहीं। इतले उपादीने आम समजी सकाई, तेक एवीस थी चे, अब आब दिचर्चाने नते समग्र दलिल, पक्ष्टा अने परामर्ष्नी अद्यन्त कडग आवष्ष्टाउ पर केंद्रित थाएचे. अब आब दी चर्चाने आंते समग्र दलील, पक्ष्टा अने परामर्ष्नी अद्यन्त कडक आवष्ष्टाउ पर केंद्रित थाएचे. पक्ष्टा एटले अनुमान मातेनो नक्कर आदार, जा हजु साभी तीनी इच्छा बाकीचे. त्रीजाज चुपायला परीवड़ दवार उभो कराएलो ब्रामवतो. अने आब दी चर्चाने आंते समग्र दलील, पक्ष्ता अने परामर्ष्नी अछ्यंत कडक आवश्षकताव पर केंद्रित थाएचे. पक्ष्ता एटले अनुमान मातेनो नक्कर आदार, जा हजु साभी तीनी इच्छा बाखी चे औने परामर्ष येटले निषकर्ष पर पहुच्वा माते लेवातु सीदु गन्यानत्मक पगलू मिमान सको कहे चे अलगती परामर्षनी कोई जरूर नहीं पर न्याई को तेने गन्यान उपन करवान। अगर अगर बद्यादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादाद

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