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जलसमाधि_में_डिजिटल_अपराध_और_जादुई_समाधान.m4a
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- 0:00–0:07अज हम एक बहुत ही खास रचना गोही सबख भीच जल समादीः पर चरचा कर रहे हैं,
- 0:07–0:13जो एक बाल कठा है और जादूई या तार्टवाद के जरिये दिजिटल ठगी और करपूरित अप्रादों को दिखाती है.
- 0:13–0:21आा, बिलकुल और इस रच्ना का जो मुख्ध्य संगर्ष लेना वो इसकी जटिल विषे वस्तू को बच्छों के अनुकूल बनाने में है.
- 0:21–0:23इक्डम सही कहा आप आपने.
- 0:23–0:32मुझे लखता है कि इस भाल संस करन की सबसे बढ़ी कमजोरी ये है के इसके दाक फीमस बच्छों के मनो विग्यान के लिए बहुत जाडा बहारी और विच्लित करने वाले हैं.
- 0:32–1:02आँ जब मैं सामगरी को देख रही तो मैंने पाया की इस में मानव तस्करी जैसे मालविका गरीन का जो पुरा प्रसंग है वो बहुत गेराई से दिखाया गया आप और दिजिटल अरेस्ट के खौफ में उज्वल जा की जो आत्माथ्तिया है या अंतराश्टे कोरपूरेट
- 1:02–1:04इसका क्या समथानोज सकता है?
- 1:04–1:10मुझे लकता है, कि इन समकालीन और क्रूर अप्रादों के सीदे यपार्थ को प्रस्थ॥ करने के बजाए,
- 1:10–1:14इनहे आमुर्त रूपकों या मेटटफर्ट्स के माद्धियम से डाला जाना जाए.
- 1:14–1:16मैं भी यही सोच रही ती.
- 1:16–1:21इसे बच्चे बना किसी मानसिक आगात के, कहनी का जो मुल नेटिक संदेश है,
- 1:21–1:25कि सत्टे बुलना और अपनी पहचान बचाना वो असानी से ग्रहन का सकेंगे.
- 1:25–1:29ये बहुत अच्छा सुजाव है, मितलब हम इसके तोस उदारन भी देख सकते हैं.
- 1:29–1:35अग, जेसे मानव तस्करी का जो खोफनाक नट्वक है, उसे सीदे दिखाने के बजाए, हम क्या कर सकते है?
- 1:35–1:41उसे एक आज़े पहचान चूराने वाले देट्तिया, या जादूगर के रूप में चित्रत किया जासकता है,
- 1:41–1:45यो बच्छों के नाम और उनकी आवास चूरा लेता है
- 1:45–1:49और वाज्चों के बहुत ये बहुत विज्वल और बच्छों के इसाप से सही दर है
- 1:49–1:52और वैसे ही जैसे उज्वल की आत्मा हत्या है
- 1:52–1:55उसे एक वास्तविग बहुत इक मरित्ट्व दिक्षाने के बजाए
- 1:55–2:01अपने बाद में चन्ना गाची के बूथ अपनी जादूई कबड़ी के जर्ये उसकी आत्मा को वापस कीच लाते हैं
- 2:01–2:08ये तो बहुत इरचना आत्मा के लिकिन देखिये लिकिन देखिये अपनी जादूई कबड़ी के जर्ये उसकी आत्मा को वापस कीच लाते हैं
- 2:08–2:12जादुई कबद्टी के जर्ये उसकी आत्मा को वापस कीच लाते हैं
- 2:12–2:14ये तो बहुत यी रचनात्माक है
- 2:14–2:19लेकिन देकिए इस सामगरी में जो मुक्खिबात अबरकर आती है एक एसका कडवा या तार्त
- 2:19–2:21आप वो तो है
- 2:21–2:24अगर हम इन वास्त्विक अप्रादों को रूपको में बडल देंगे
- 2:24–2:28तो क्या हम कहानी के मुल प्रभाव और गंभीर्ता को खोने देंगे?
- 2:28–2:29मतलब आप गय रहे है के
- 2:29–2:32मेरा मतलब है के ये तो वैसा ही होगा
- 2:32–2:35जैसे किसी तीखी दवाचे उसका असरी निकाल देना
- 2:35–3:05वूँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँ�
- 3:05–3:11तो आईए उस हिस्से को करीब से देखते हैं, जहा अन गिनत पात्रों पर चर्चा की गईईईईईईई.
- 3:11–3:13आआ, वो हिस्सा बहुत जरूरी है.
- 3:13–3:18देखे कता में पात्रों, खल नायकों और उप कतां की बहुलता,
- 3:18–3:21विमर्ष्छ को कुछ रद बखेर देती है.
- 3:21–3:23एक दम सही बात है.
- 3:23–3:26जब आप इसके प्यन्ताली सद्ध्यायों को देकते है,
- 3:26–3:30तो उस में कई पीडियों के नायक एक साथ चल रहे है.
- 3:30–3:33हा नन्द है, एरा है, देविका है, गोप कुमार है,
- 3:33–3:35और अनन्या भी है.
- 3:35–3:39अर स्र्फ नायक ही नहीं कई अंतर राश्ठ्री अखल नायक भी हैं
- 3:39–3:44जैसे बत्रा, रागव, लाओ, गुम, बतुकनात
- 3:44–3:48मतलब इतनी सारी उपकताये एक साथ समनांतर रुप से चल रही है
- 3:48–3:51और इतने सारे द्रिष्टी कोनो और स्थानो के भीच
- 3:51–3:56ज़ेसे कभी गाँ है, कभी अदालत है, कभी होंकोंग, तो कभी हावर्द
- 3:56–3:59आप, लोकेशन्ज भी बहुत बडल रही हैं
- 3:59–4:04तो इसके बीच कहानी का जो बहावनात्मक किंद्र है, बार बार बभटक जाता है
- 4:04–4:09बलक्ल बदड़ जाता है, तो कहानी के फोकस को मजबूथ करने के लिए,
- 4:09–4:15नायक और खलनायको की संख्या को समेकित, या कहलें की कुन सुलिडेट किया जाना जाना जाहीए.
- 4:15–4:17आप यह से बहुत फर्क पडेगा.
- 4:17–4:21इसे मुख्या पात्रों की यात्रा अदिक स्पष्ट और प्रभावकारी बनेगी
- 4:21–4:23मैं पुरी तरा सहमत हूँ
- 4:23–4:26और अगर हम इसके तोस उदारनो की बात करें
- 4:26–4:29तो राभव, सिएंल लाओ, किनहंग
- 4:29–4:35और अद्वोड ब्रुम जैसे अलग अलग अंद्र राष्टे खलनायक को मिलाया जासकता है
- 4:35–4:41न राग अगर एक ही सर्व व्यापी सिस्टम या एक ही रहस्ट्यमाई कलनायक में बडला जासकता है
- 4:41–4:45रहा जिस से बच्चो को एक ही बड़े विलन्से लड़ने का अजास हो
- 4:45–4:48और उसी तरा नायाको के साथ भी किया जा सकता है
- 4:48–4:49बिलकुल
- 4:49–4:52जैसे एरा, जो विदेशी मंज पर संगर्ष कर रही है
- 4:52–4:56और देवीका, जिसका स्थानिया और दिजिटल संगर्ष है
- 4:56–4:57रही तुब
- 4:57–4:59इन दोनो की कहानियो को जोड़ कर
- 4:59–5:02एक ही सशक्षक्त यूवा पात्र बनाया जासकता है
- 5:02–5:05और ये तो बहुत ही शान्दार रहेगा
- 5:05–5:10वो पात्र जो गाँगे बूतों और बहुरी दून्या दोनो के भीच से तुका काम करे
- 5:10–5:14आआ, इस से पाथक कहानी से इमोषनली जुडा रहेगा
- 5:14–5:19तो उसी बात को आगे बड़ाते हुए येदी हम पात्रो को सीमिट कर रहे हैं,
- 5:19–5:22तो हमें उस जादूई दून्यापर भी दियान देना होगा जिस में वे रहते हैं.
- 5:22–5:24ये बहुत ही महत्वपों बिन्दू है.
- 5:24–5:30मेरा मानना है की जादूई यधार्थवाद और समकलीन अप्राद गाता का मिष्रन बहुत रचनात्मक है
- 5:30–5:34लेकिन दोनो के बीच का तकनी की और जादूई सन्तूलन कभी कभी तुर जाता है
- 5:34–5:37आप आप में भी इस बात पर खोर किया है
- 5:37–5:40ज़ेसे चन्ना गाची में भूथो की कबद्टी का रिचार
- 5:40–5:42जहागा वे म्रितको के नाम बचाते हैं
- 5:42–5:44वो विचार बच्बुत है
- 5:44–5:45बलको न चबुथ है
- 5:45–5:48लेकिन जब कहानी तकनी की अप्राधों ज़ेसे
- 5:48–6:18मूल अकाूँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँ�
- 6:18–6:48अदालत लगत लिज्ये में कुछ आज़ाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाज
- 6:48–6:49अप यह पोने लगे.
- 6:49–6:52इस से तकनीक और जादू का सीदा आमना सामना स्थापिद होगा.
- 6:52–6:55लेकिन यहा मैं आप से ख सवाल पुषना चारेइ थी.
- 6:55–6:56आप बताएए.
- 6:56–7:00या आप बी के बीच का समवंद पूरी तरह से स्थापिद है.
- 7:00–7:02मेरा मतलब है जादूए और तकनीक का
- 7:02–7:04अप क्या कैना चाहरी हैं
- 7:04–7:10क्या अचा हो सकता है केवल पानी तपकने जैसे संकितो पर निरभभर रहने से
- 7:10–7:15कहानी का जादूए पक्ष तकनीकी पक्ष के सामने कमजोर पड रहा हो
- 7:15–7:19अब भी बिल्कुल इस्टिल तो हम ने कहा कि उने सीदे एक तुस्रे से तक्राना चाहीए.
- 7:19–7:21सही कहा अपने.
- 7:21–7:24तो आज की इस गेहन समिक्ष्या को समेडते हुए
- 7:24–7:27हम ने इस रच्ना को और अधिक प्रबाव शाली बनाने किलिए
- 7:27–7:29ती मुख्य बिंदों पर चर्चा की
- 7:29–7:34आप पहला तो यही की जटिल और अंद्कार मैं सम्कालीन अप्रादों को
- 7:34–7:36बच्छों के अनुकुल बनाने के लिए
- 7:36–7:39उने यतार्थ के बजाए रूपको में बडलना
- 7:39–7:41बलकल और दूस्रा
- 7:41–7:44कहानी के बहावनात्मक प्रभाव को ग़हरा करने किलिए
- 7:44–7:47पात्रों और उपकत्हाँ की भीड को कम करके
- 7:47–7:49कुछ प्रमुक पात्रों पर द्यान किंद्रत करना
- 7:49–7:50और तीस्रा
- 7:50–7:55कहानी के जादुई यधार्थवाद को केवल संकेतो तक सीमित न रगकर
- 7:55–8:00उसे आदूनिक तक्निक दून्या के सीदे तक्राव और समादान में अज्टमाल करना.
- 8:00–8:05तो ये समगरी अपने आप में एक बेहद शक्तिषाली और प्रासंगिक विचार है.
- 8:05–8:07आप निस में कोई शक नहीं है.
- 8:07–8:11अम लेखख को इन सुजावो को लागू करने के लिए प्रुज्साहित करते हैं
- 8:11–8:16और चाहिंगे की वे अपने सन्शोदित कारि को आगे के समिक्षा के लिए हमें फिर से बेजें
Plain text
अज हम एक बहुत ही खास रचना गोही सबख भीच जल समादीः पर चरचा कर रहे हैं, जो एक बाल कठा है और जादूई या तार्टवाद के जरिये दिजिटल ठगी और करपूरित अप्रादों को दिखाती है. आा, बिलकुल और इस रच्ना का जो मुख्ध्य संगर्ष लेना वो इसकी जटिल विषे वस्तू को बच्छों के अनुकूल बनाने में है. इक्डम सही कहा आप आपने. मुझे लखता है कि इस भाल संस करन की सबसे बढ़ी कमजोरी ये है के इसके दाक फीमस बच्छों के मनो विग्यान के लिए बहुत जाडा बहारी और विच्लित करने वाले हैं. आँ जब मैं सामगरी को देख रही तो मैंने पाया की इस में मानव तस्करी जैसे मालविका गरीन का जो पुरा प्रसंग है वो बहुत गेराई से दिखाया गया आप और दिजिटल अरेस्ट के खौफ में उज्वल जा की जो आत्माथ्तिया है या अंतराश्टे कोरपूरेट इसका क्या समथानोज सकता है? मुझे लकता है, कि इन समकालीन और क्रूर अप्रादों के सीदे यपार्थ को प्रस्थ॥ करने के बजाए, इनहे आमुर्त रूपकों या मेटटफर्ट्स के माद्धियम से डाला जाना जाए. मैं भी यही सोच रही ती. इसे बच्चे बना किसी मानसिक आगात के, कहनी का जो मुल नेटिक संदेश है, कि सत्टे बुलना और अपनी पहचान बचाना वो असानी से ग्रहन का सकेंगे. ये बहुत अच्छा सुजाव है, मितलब हम इसके तोस उदारन भी देख सकते हैं. अग, जेसे मानव तस्करी का जो खोफनाक नट्वक है, उसे सीदे दिखाने के बजाए, हम क्या कर सकते है? उसे एक आज़े पहचान चूराने वाले देट्तिया, या जादूगर के रूप में चित्रत किया जासकता है, यो बच्छों के नाम और उनकी आवास चूरा लेता है और वाज्चों के बहुत ये बहुत विज्वल और बच्छों के इसाप से सही दर है और वैसे ही जैसे उज्वल की आत्मा हत्या है उसे एक वास्तविग बहुत इक मरित्ट्व दिक्षाने के बजाए अपने बाद में चन्ना गाची के बूथ अपनी जादूई कबड़ी के जर्ये उसकी आत्मा को वापस कीच लाते हैं ये तो बहुत इरचना आत्मा के लिकिन देखिये लिकिन देखिये अपनी जादूई कबड़ी के जर्ये उसकी आत्मा को वापस कीच लाते हैं जादुई कबद्टी के जर्ये उसकी आत्मा को वापस कीच लाते हैं ये तो बहुत यी रचनात्माक है लेकिन देकिए इस सामगरी में जो मुक्खिबात अबरकर आती है एक एसका कडवा या तार्त आप वो तो है अगर हम इन वास्त्विक अप्रादों को रूपको में बडल देंगे तो क्या हम कहानी के मुल प्रभाव और गंभीर्ता को खोने देंगे? मतलब आप गय रहे है के मेरा मतलब है के ये तो वैसा ही होगा जैसे किसी तीखी दवाचे उसका असरी निकाल देना वूँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँ� तो आईए उस हिस्से को करीब से देखते हैं, जहा अन गिनत पात्रों पर चर्चा की गईईईईईईई. आआ, वो हिस्सा बहुत जरूरी है. देखे कता में पात्रों, खल नायकों और उप कतां की बहुलता, विमर्ष्छ को कुछ रद बखेर देती है. एक दम सही बात है. जब आप इसके प्यन्ताली सद्ध्यायों को देकते है, तो उस में कई पीडियों के नायक एक साथ चल रहे है. हा नन्द है, एरा है, देविका है, गोप कुमार है, और अनन्या भी है. अर स्र्फ नायक ही नहीं कई अंतर राश्ठ्री अखल नायक भी हैं जैसे बत्रा, रागव, लाओ, गुम, बतुकनात मतलब इतनी सारी उपकताये एक साथ समनांतर रुप से चल रही है और इतने सारे द्रिष्टी कोनो और स्थानो के भीच ज़ेसे कभी गाँ है, कभी अदालत है, कभी होंकोंग, तो कभी हावर्द आप, लोकेशन्ज भी बहुत बडल रही हैं तो इसके बीच कहानी का जो बहावनात्मक किंद्र है, बार बार बभटक जाता है बलक्ल बदड़ जाता है, तो कहानी के फोकस को मजबूथ करने के लिए, नायक और खलनायको की संख्या को समेकित, या कहलें की कुन सुलिडेट किया जाना जाना जाहीए. आप यह से बहुत फर्क पडेगा. इसे मुख्या पात्रों की यात्रा अदिक स्पष्ट और प्रभावकारी बनेगी मैं पुरी तरा सहमत हूँ और अगर हम इसके तोस उदारनो की बात करें तो राभव, सिएंल लाओ, किनहंग और अद्वोड ब्रुम जैसे अलग अलग अंद्र राष्टे खलनायक को मिलाया जासकता है न राग अगर एक ही सर्व व्यापी सिस्टम या एक ही रहस्ट्यमाई कलनायक में बडला जासकता है रहा जिस से बच्चो को एक ही बड़े विलन्से लड़ने का अजास हो और उसी तरा नायाको के साथ भी किया जा सकता है बिलकुल जैसे एरा, जो विदेशी मंज पर संगर्ष कर रही है और देवीका, जिसका स्थानिया और दिजिटल संगर्ष है रही तुब इन दोनो की कहानियो को जोड़ कर एक ही सशक्षक्त यूवा पात्र बनाया जासकता है और ये तो बहुत ही शान्दार रहेगा वो पात्र जो गाँगे बूतों और बहुरी दून्या दोनो के भीच से तुका काम करे आआ, इस से पाथक कहानी से इमोषनली जुडा रहेगा तो उसी बात को आगे बड़ाते हुए येदी हम पात्रो को सीमिट कर रहे हैं, तो हमें उस जादूई दून्यापर भी दियान देना होगा जिस में वे रहते हैं. ये बहुत ही महत्वपों बिन्दू है. मेरा मानना है की जादूई यधार्थवाद और समकलीन अप्राद गाता का मिष्रन बहुत रचनात्मक है लेकिन दोनो के बीच का तकनी की और जादूई सन्तूलन कभी कभी तुर जाता है आप आप में भी इस बात पर खोर किया है ज़ेसे चन्ना गाची में भूथो की कबद्टी का रिचार जहागा वे म्रितको के नाम बचाते हैं वो विचार बच्बुत है बलको न चबुथ है लेकिन जब कहानी तकनी की अप्राधों ज़ेसे मूल अकाूँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँ� अदालत लगत लिज्ये में कुछ आज़ाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाज अप यह पोने लगे. इस से तकनीक और जादू का सीदा आमना सामना स्थापिद होगा. लेकिन यहा मैं आप से ख सवाल पुषना चारेइ थी. आप बताएए. या आप बी के बीच का समवंद पूरी तरह से स्थापिद है. मेरा मतलब है जादूए और तकनीक का अप क्या कैना चाहरी हैं क्या अचा हो सकता है केवल पानी तपकने जैसे संकितो पर निरभभर रहने से कहानी का जादूए पक्ष तकनीकी पक्ष के सामने कमजोर पड रहा हो अब भी बिल्कुल इस्टिल तो हम ने कहा कि उने सीदे एक तुस्रे से तक्राना चाहीए. सही कहा अपने. तो आज की इस गेहन समिक्ष्या को समेडते हुए हम ने इस रच्ना को और अधिक प्रबाव शाली बनाने किलिए ती मुख्य बिंदों पर चर्चा की आप पहला तो यही की जटिल और अंद्कार मैं सम्कालीन अप्रादों को बच्छों के अनुकुल बनाने के लिए उने यतार्थ के बजाए रूपको में बडलना बलकल और दूस्रा कहानी के बहावनात्मक प्रभाव को ग़हरा करने किलिए पात्रों और उपकत्हाँ की भीड को कम करके कुछ प्रमुक पात्रों पर द्यान किंद्रत करना और तीस्रा कहानी के जादुई यधार्थवाद को केवल संकेतो तक सीमित न रगकर उसे आदूनिक तक्निक दून्या के सीदे तक्राव और समादान में अज्टमाल करना. तो ये समगरी अपने आप में एक बेहद शक्तिषाली और प्रासंगिक विचार है. आप निस में कोई शक नहीं है. अम लेखख को इन सुजावो को लागू करने के लिए प्रुज्साहित करते हैं और चाहिंगे की वे अपने सन्शोदित कारि को आगे के समिक्षा के लिए हमें फिर से बेजें