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मैथिली_गजलक_ऐतिहासिक_संकलनक_समीक्षा.m4a

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Collection
Part 8 · VIDEHA MITHILA MAITHILI DISCUSSION CRITICISM SERIES PART 8
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  1. 0:00–0:05अनीस्व्व्ष्ट्ट्वाइस्द्धरी रचित मैथ्ली गजलक ए अटिहासिक संकलन,
  2. 0:05–0:09जा एमे गजलक व्याक्रन अविकासक चर्चा केल गला ची,
  3. 0:09–0:11आई हम्रा लोकनिक समग्री आची.
  4. 0:11–0:15ता बिना कोनो बूमिकासा समय गमाने,
  5. 0:15–0:17रँजनात्मक समिक्शापर आवी जाई
  6. 0:17–0:18आव, एक दम
  7. 0:18–0:21तजगन हम यी पन्डुलीपी पड़नाय शुरूके लगु
  8. 0:21–0:24तईक तजग पेग बात हमरा खटाकल
  9. 0:24–0:26उचे एकर फोकस
  10. 0:26–0:28माने, संकलनक भूमिका में
  11. 0:28–0:58अप्रद्टी अप्रद्टी अप्रद्टी अप्रद्टी अप्रद्टी अप्रद्टी अप्रद्टी अप्रद्टी अप्रद्टी अप्रद्टी अप्रद्टी अप्रद्टी अप्रद्टी अप्रद्टी अप्रद्टी अप्रद्टी अप्रद्टी अप्रद्टी अप्र�
  12. 0:58–1:04जेन च्ण्द कद्रूटी आखर सन्जे प्रावेदिक संदरब चे अ बारमभार आवे तची
  13. 1:04–1:07आव ओ ब्लोग अग प्रावेदिक संदरब जका लागी रहाल चल
  14. 1:07–1:13एक दम आए एक रासे पूरा कहन्द कोन व्याक्रनक निमावली जका प्रतित होगे तची
  15. 1:13–1:15जे क्ता पेग कम्जोरी आची
  16. 1:15–1:16बुजली आची
  17. 1:16–1:20मने एक्रासा पाथक कद्यान मूल जे यहास इक विकाज च्ये
  18. 1:20–1:22अक्रासा बद्के जाएत आची
  19. 1:22–1:23आची
  20. 1:23–1:24आची
  21. 1:24–1:25आची
  22. 1:25–1:26आची
  23. 1:26–1:27आची
  24. 1:27–1:28आची
  25. 1:28–1:29आची
  26. 1:29–1:30आची
  27. 1:30–1:32इता हमर अपन अनिबहड रहाल आची
  28. 1:32–1:35जखनम भूमिका सा गुजरी रहल चल हूं
  29. 1:35–1:38ता एक देस गजल कर नवंकुरन का कता चली रहल चल
  30. 1:38–1:40जे बडणी चागी रहल चल
  31. 1:40–1:43मुदा अचानक बिना कुनो चेतावनीक
  32. 1:43–1:46पात मात्रे कगनना में गूसी जाएत छे
  33. 1:46–1:49इमाने एक ता मानसिक फिप्लाएश जका चे
  34. 1:49–2:19आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ
  35. 2:19–2:34दागरन एब हो सके तची जे भूमिका सां जिना लगु दीरगगनियम, मात्रा गनना, चंद्रबिन्दु युक्त लगुक नियम, इसबजे गंभीर प्राविधिख्विमर्षा ची अक्रा निकाली का ग्रन्तक अन्त्मे राखल जाए.
  36. 2:35–2:37माने एक्ता नव अद्याय बनाका.
  37. 2:49–3:19నినినినినినినినినినినినినినినినినినినినినినినినినినినినినినినినినినినినినినినినినినినినినినినినినినినినినినినిన
  38. 3:19–3:22अम्राना गईत आजी जे, हाँ, बिलक्ल स्पष्टता बेटत,
  39. 3:22–3:25कि एक तपाधख कजे कोगनेटिब लोड चे,
  40. 3:25–3:29माने भुजवाख्यमता, उक्रा हम सब अवर लोड नहीं करा रहल ची.
  41. 3:29–3:34सही बात आची, जगन पाधख पही ए भावनात्मक रूप सजुडद,
  42. 3:34–3:37तक्हन नहीं उकर शिल्प बुज्यले प्रेरिथाइत
  43. 3:37–3:37एक दम
  44. 3:37–3:39आब आब हां
  45. 3:39–3:42हम सब आपन दुसर समिक्षा बिन्दुदिस बड़ाएच्ची
  46. 3:42–3:44जे तोन अ शेली से जुड़ा लाखी
  47. 3:44–3:48आँ, इजे समपादक ये तिपनिक बहाशा चाए उक्रालागा
  48. 3:48–3:54आँ, पूर्वर्ती समपादक अख्कवी लोकनेक संदरभ में प्रियोग काएल गेल समपादक ये तिपनिक शेली
  49. 3:54–3:57संकलनक अखाएल में गंभीरता के कम कर रहाल ची
  50. 4:12–4:16अजे गो और लाईंचल साहीतक अकादमी पुरस्कारक भाज में इसब लगगे तरहला
  51. 4:16–4:21यह प्लकोल अप सोचु इस अट्यन्त व्यंग्यात्मक अब व्यक्ती परक नहीं अची
  52. 4:21–4:25इस यक तस शोद परक अप प्रतिनेदी गरन्तक गरीमा के टेस पूँचागे तची
  53. 4:25–4:32अगर उप्रद्टाग प्रद्टाग प्रद्टाग बड़ाजाए ताई लेल फमर सुजाव यह जी अलोचना के विक्ति परक आए अक्रामक नहीं के बलकी पुरनताग वस्तुपरक आए अकाद्मिक भाशा में लिखल जाए.
  54. 4:32–4:43इक दम पहुचावे तखी एक्रा से समपादग का अपन निश्पक्ष्टा पर प्रष्नचिन्न तभजाए तखी पाटख सोचा लगे तखी जे एकोनो व्यक्तिगत भडास्त नही आखी
  55. 4:43–4:54आप द़िल रहाँ प्रज़ाँ यह जी जे आलोचना के व्यक्ती परक आख्रामक नहीं के बलकी पुरनताः वस्तु परक आखाँदमिक भाशा में लिखल जाए.
  56. 4:54–4:58मने आप आप कि कहवक अची जे अबजेक्तिव अप्रोच राखल जाए.
  57. 4:58–5:03अग, व्यंग्यक अस्थान पर ततस्त्तत्त्त्यर आखाल जासगे तचे.
  58. 5:03–5:05एकर एक ता कोंक्रित उदारन दीता?
  59. 5:05–5:09आए, कोंक्रित उदारन सबुजाँ, उक्र कोना लिखल जासवक अच्छे.
  60. 5:09–5:14जेना उही व्यंजात्मक लाईनक बडला मे एना लिखल जासगे ताची,
  61. 5:14–5:20जे 1930-1970 के कालखंड के प्रारंभिक प्रकाषिट संसकरन में
  62. 5:20–5:22मात्रिक असमानता देखल जाए ताची,
  63. 5:22–5:28जकर समभावित कारन उही समय मैत्ली गजल व्यक्रन के मानकी करन नहीं होए रहा है तु.
  64. 5:39–5:47तब दिज्च्न स्वर रथा दिला से समपादक गजल सन्रक्षनक प्रतीजे मुल चिंता अक्रोष अची उकता हूँ कमजोर पडजाएत।
  65. 5:47–5:48मने...
  66. 5:48–5:55कि हम सब तच्ठे के बिना भावना के ठेस पहचाई ने अदिक शसक्त रूप में नहीं राखी सके चे
  67. 5:55–5:57उग़ान आग तर्क बेसी वजन्दार बहाजाएच्चे
  68. 5:57–6:00अच्छा, माने, तथ्या अपने आपने गप करेच्चे
  69. 6:00–6:05इगदम, तथ्ये कोनो क्रोदी आव्रनक आवशक्ता नहीं होएच्चे
  70. 6:05–6:09आईही से, पूरुवरती कवी सबक सम्मान से हो बनल रहत,
  71. 6:09–6:21इक्दम, तत्त्यके कोनो ख्रोदी आब्रनक आवषक्ता नहीं होए च्ये, आईही से पूरु वरती कवी सबक सम्मान से हो बनल रहत, आई इतिहासिक तत्त्ये से हो अस्पप्रष्ट रूप से सामने आबी जाएत.
  72. 6:21–6:51अगर बादिट बादिट बादिट बादिट बादिट बादिट बादिट बादिट बादिट बादिट बादिट बादिट बादिट बादिट बादिट बादिट बादिट बादिट बादिट बादिट बादिट बादिट बादिट बादिट बादिट बादिट बादिट ब
  73. 6:51–7:21उगरा अर्भी बहर अस्टरल वारनिक बहर जहना दूई अलग अलक भाग में बाडी देटाई थाई थाई थाई थाई थाई थाई थाई थाई थाई थाई थाई थाई थाई थाई थाई थाई थाई थाई थाई थाई थाई थाई थाई थाई थाई थाई थाई थाई थाई
  74. 7:21–7:27ब्हल जेना हम्सब कोनु फिल्म देखिरोहल ची आब भीच में लेंसक आदार पर द्रिष्यब बाट डिलजाए,
  75. 7:28–7:30तए एकर समादान की भासके तची?
  76. 7:30–7:38एक समआदान मने सुजाव यह ची, जे संकलनक मूल दाचा पुन रूपन कालानुक्रमिक मने क्रोनोलोगिकल रखल जाए.
  77. 7:38–7:44आच्छ? तफ आप यह उजे विद्खाव बहरक जानकारी चे उक्रक कते रखब?
  78. 7:44–7:49अखरा कवी को नाम वा गजल के संगे तैग वा फुट्नोटक रूप में देल जाए.
  79. 7:49–7:51अफुट तैग ग्रूप में.
  80. 7:51–7:58अदारनक लिल, 2008-2022 कज दूनो कहन्ड जे बागवन अबभाग्च्टु
  81. 7:58–8:00अखरा मिला का एक तन राखल जाए.
  82. 8:00–8:12अखर बाद प्रत्त्ये कवी को नाम वया गजल्क शीर्षक के नीचाएं ब्राकेट में लिख देल जाए, जे यी आरभी बहर अच्छी वा सरल वारनिक बहर अच्छी.
  83. 8:12–8:22इप्तबहुत नीक अईडिया चे जाहिसे पाथक बिना एतिहासिक प्रवाह तूटेन गजल्क शिल्प आविकास के एक ही तम समानांतर रूप में बूजी सकेत.
  84. 8:22–8:26एक दम सही एही सब एतिहासिक प्रवाह नहीं तूटत.
  85. 8:26–8:42विचारनी आचे, जो हम सब शिल्प अस समय के एक के खन्ड में मिला का देखफ, तकी इस समबावना आचे, जे पाटख वारनेक बहारक एतिहासिक प्रसंगिकता के आदिक गंविरता सब जबजद्द, जे की वरतमान ड़ाचा में अलग थलग पडी गल आचे.
  86. 8:42–9:12आप शद प्रतिषद जखन आप अगर अगर अगर अगर अगर गदे ची तव ओएक तब यही शमयक यही अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अ
  87. 9:12–9:19अद्दो सर्जे सम्पाद की तिप्नी के आक्रामक के बडला वस्तुपरक और अकाद्मिक बनावल जाए.
  88. 9:19–9:29अद्देसर जे अखने हम सब गबके लहो जे वर्गी करन के पुन्ता कालानुक्रमेक राखी शिल्प के ताग के रुप में देखाए जागे.
  89. 9:29–9:39बिल्ल्कु ता हम्रा आशा आची जे इरजनात्मक सुजाव सब लेखक महोदय के अपन सामगरी में लागु करभामे सहायक सिद्वाएत.
  90. 9:39–9:47रहा हम सब हुनका प्रेरित करेची जे ये सुदार केला के बाद इस सामगरी पुना हम्रा लोकनी के समिक्षा लेल पताट थी.
  91. 9:47–9:54एक्दम हम सब उच्सा पुर्वको कर प्रतिक्षा करब आई लेले तबे सुन्बाक लेल बहुत-बहुत द्धिशा करब आई लेले तबे सुन्बाक लेल बहुत-बहुत द्धिशा करब आई लेले तबे सुन्बाक लेल बहुत-बहुत द्धिशा करब आई लेले तबे सुन

Plain text

अनीस्व्व्ष्ट्ट्वाइस्द्धरी रचित मैथ्ली गजलक ए अटिहासिक संकलन, जा एमे गजलक व्याक्रन अविकासक चर्चा केल गला ची, आई हम्रा लोकनिक समग्री आची. ता बिना कोनो बूमिकासा समय गमाने, रँजनात्मक समिक्शापर आवी जाई आव, एक दम तजगन हम यी पन्डुलीपी पड़नाय शुरूके लगु तईक तजग पेग बात हमरा खटाकल उचे एकर फोकस माने, संकलनक भूमिका में अप्रद्टी अप्रद्टी अप्रद्टी अप्रद्टी अप्रद्टी अप्रद्टी अप्रद्टी अप्रद्टी अप्रद्टी अप्रद्टी अप्रद्टी अप्रद्टी अप्रद्टी अप्रद्टी अप्रद्टी अप्रद्टी अप्रद्टी अप्रद्टी अप्र� जेन च्ण्द कद्रूटी आखर सन्जे प्रावेदिक संदरब चे अ बारमभार आवे तची आव ओ ब्लोग अग प्रावेदिक संदरब जका लागी रहाल चल एक दम आए एक रासे पूरा कहन्द कोन व्याक्रनक निमावली जका प्रतित होगे तची जे क्ता पेग कम्जोरी आची बुजली आची मने एक्रासा पाथक कद्यान मूल जे यहास इक विकाज च्ये अक्रासा बद्के जाएत आची आची आची आची आची आची आची आची आची इता हमर अपन अनिबहड रहाल आची जखनम भूमिका सा गुजरी रहल चल हूं ता एक देस गजल कर नवंकुरन का कता चली रहल चल जे बडणी चागी रहल चल मुदा अचानक बिना कुनो चेतावनीक पात मात्रे कगनना में गूसी जाएत छे इमाने एक ता मानसिक फिप्लाएश जका चे आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ दागरन एब हो सके तची जे भूमिका सां जिना लगु दीरगगनियम, मात्रा गनना, चंद्रबिन्दु युक्त लगुक नियम, इसबजे गंभीर प्राविधिख्विमर्षा ची अक्रा निकाली का ग्रन्तक अन्त्मे राखल जाए. माने एक्ता नव अद्याय बनाका. నినినినినినినినినినినినినినినినినినినినినినినినినినినినినినినినినినినినినినినినినినినినినినినినినినినినినినినిన अम्राना गईत आजी जे, हाँ, बिलक्ल स्पष्टता बेटत, कि एक तपाधख कजे कोगनेटिब लोड चे, माने भुजवाख्यमता, उक्रा हम सब अवर लोड नहीं करा रहल ची. सही बात आची, जगन पाधख पही ए भावनात्मक रूप सजुडद, तक्हन नहीं उकर शिल्प बुज्यले प्रेरिथाइत एक दम आब आब हां हम सब आपन दुसर समिक्षा बिन्दुदिस बड़ाएच्ची जे तोन अ शेली से जुड़ा लाखी आँ, इजे समपादक ये तिपनिक बहाशा चाए उक्रालागा आँ, पूर्वर्ती समपादक अख्कवी लोकनेक संदरभ में प्रियोग काएल गेल समपादक ये तिपनिक शेली संकलनक अखाएल में गंभीरता के कम कर रहाल ची अजे गो और लाईंचल साहीतक अकादमी पुरस्कारक भाज में इसब लगगे तरहला यह प्लकोल अप सोचु इस अट्यन्त व्यंग्यात्मक अब व्यक्ती परक नहीं अची इस यक तस शोद परक अप प्रतिनेदी गरन्तक गरीमा के टेस पूँचागे तची अगर उप्रद्टाग प्रद्टाग प्रद्टाग बड़ाजाए ताई लेल फमर सुजाव यह जी अलोचना के विक्ति परक आए अक्रामक नहीं के बलकी पुरनताग वस्तुपरक आए अकाद्मिक भाशा में लिखल जाए. इक दम पहुचावे तखी एक्रा से समपादग का अपन निश्पक्ष्टा पर प्रष्नचिन्न तभजाए तखी पाटख सोचा लगे तखी जे एकोनो व्यक्तिगत भडास्त नही आखी आप द़िल रहाँ प्रज़ाँ यह जी जे आलोचना के व्यक्ती परक आख्रामक नहीं के बलकी पुरनताः वस्तु परक आखाँदमिक भाशा में लिखल जाए. मने आप आप कि कहवक अची जे अबजेक्तिव अप्रोच राखल जाए. अग, व्यंग्यक अस्थान पर ततस्त्तत्त्त्यर आखाल जासगे तचे. एकर एक ता कोंक्रित उदारन दीता? आए, कोंक्रित उदारन सबुजाँ, उक्र कोना लिखल जासवक अच्छे. जेना उही व्यंजात्मक लाईनक बडला मे एना लिखल जासगे ताची, जे 1930-1970 के कालखंड के प्रारंभिक प्रकाषिट संसकरन में मात्रिक असमानता देखल जाए ताची, जकर समभावित कारन उही समय मैत्ली गजल व्यक्रन के मानकी करन नहीं होए रहा है तु. तब दिज्च्न स्वर रथा दिला से समपादक गजल सन्रक्षनक प्रतीजे मुल चिंता अक्रोष अची उकता हूँ कमजोर पडजाएत। मने... कि हम सब तच्ठे के बिना भावना के ठेस पहचाई ने अदिक शसक्त रूप में नहीं राखी सके चे उग़ान आग तर्क बेसी वजन्दार बहाजाएच्चे अच्छा, माने, तथ्या अपने आपने गप करेच्चे इगदम, तथ्ये कोनो क्रोदी आव्रनक आवशक्ता नहीं होएच्चे आईही से, पूरुवरती कवी सबक सम्मान से हो बनल रहत, इक्दम, तत्त्यके कोनो ख्रोदी आब्रनक आवषक्ता नहीं होए च्ये, आईही से पूरु वरती कवी सबक सम्मान से हो बनल रहत, आई इतिहासिक तत्त्ये से हो अस्पप्रष्ट रूप से सामने आबी जाएत. अगर बादिट बादिट बादिट बादिट बादिट बादिट बादिट बादिट बादिट बादिट बादिट बादिट बादिट बादिट बादिट बादिट बादिट बादिट बादिट बादिट बादिट बादिट बादिट बादिट बादिट बादिट बादिट ब उगरा अर्भी बहर अस्टरल वारनिक बहर जहना दूई अलग अलक भाग में बाडी देटाई थाई थाई थाई थाई थाई थाई थाई थाई थाई थाई थाई थाई थाई थाई थाई थाई थाई थाई थाई थाई थाई थाई थाई थाई थाई थाई थाई थाई थाई ब्हल जेना हम्सब कोनु फिल्म देखिरोहल ची आब भीच में लेंसक आदार पर द्रिष्यब बाट डिलजाए, तए एकर समादान की भासके तची? एक समआदान मने सुजाव यह ची, जे संकलनक मूल दाचा पुन रूपन कालानुक्रमिक मने क्रोनोलोगिकल रखल जाए. आच्छ? तफ आप यह उजे विद्खाव बहरक जानकारी चे उक्रक कते रखब? अखरा कवी को नाम वा गजल के संगे तैग वा फुट्नोटक रूप में देल जाए. अफुट तैग ग्रूप में. अदारनक लिल, 2008-2022 कज दूनो कहन्ड जे बागवन अबभाग्च्टु अखरा मिला का एक तन राखल जाए. अखर बाद प्रत्त्ये कवी को नाम वया गजल्क शीर्षक के नीचाएं ब्राकेट में लिख देल जाए, जे यी आरभी बहर अच्छी वा सरल वारनिक बहर अच्छी. इप्तबहुत नीक अईडिया चे जाहिसे पाथक बिना एतिहासिक प्रवाह तूटेन गजल्क शिल्प आविकास के एक ही तम समानांतर रूप में बूजी सकेत. एक दम सही एही सब एतिहासिक प्रवाह नहीं तूटत. विचारनी आचे, जो हम सब शिल्प अस समय के एक के खन्ड में मिला का देखफ, तकी इस समबावना आचे, जे पाटख वारनेक बहारक एतिहासिक प्रसंगिकता के आदिक गंविरता सब जबजद्द, जे की वरतमान ड़ाचा में अलग थलग पडी गल आचे. आप शद प्रतिषद जखन आप अगर अगर अगर अगर अगर गदे ची तव ओएक तब यही शमयक यही अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अ अद्दो सर्जे सम्पाद की तिप्नी के आक्रामक के बडला वस्तुपरक और अकाद्मिक बनावल जाए. अद्देसर जे अखने हम सब गबके लहो जे वर्गी करन के पुन्ता कालानुक्रमेक राखी शिल्प के ताग के रुप में देखाए जागे. बिल्ल्कु ता हम्रा आशा आची जे इरजनात्मक सुजाव सब लेखक महोदय के अपन सामगरी में लागु करभामे सहायक सिद्वाएत. रहा हम सब हुनका प्रेरित करेची जे ये सुदार केला के बाद इस सामगरी पुना हम्रा लोकनी के समिक्षा लेल पताट थी. एक्दम हम सब उच्सा पुर्वको कर प्रतिक्षा करब आई लेले तबे सुन्बाक लेल बहुत-बहुत द्धिशा करब आई लेले तबे सुन्बाक लेल बहुत-बहुत द्धिशा करब आई लेले तबे सुन्बाक लेल बहुत-बहुत द्धिशा करब आई लेले तबे सुन

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