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कागदक_झूठ_आ_माटिक_नामक_अभिलेख.m4a

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Part 8 · VIDEHA MITHILA MAITHILI DISCUSSION CRITICISM SERIES PART 8
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  1. 0:00–0:14गेहन विमर्शक एह मंज पर आहा सभीक सवागत चे, जकन हम्रा लोकनी कुनो डोक्तर अग जाएथ ची, मतलप विशेश का जि कुनो चोट लागल हो, तब हम्रा लोकन के एक तस पष्ट ताक अपेख्षा रही तची.
  2. 0:14–0:17हा, उता अची कुनो सन्दे है नहीं रहे?
  3. 0:17–0:22इक्दम जहना आहा कहत तूटेत आजे आहा एकस्चरे करवाएची
  4. 0:22–0:28आव उजे एकस्चरे मशीन आजे उज़रा रेखा इक्दम साव साव देखा देचे
  5. 0:28–0:31दाक्टर उईपर आँगुर राके कोजचत्यन जे
  6. 0:31–0:33आदेखु इचे समस्या
  7. 0:33–0:37अग, देखो इज समस्या जे, उते कोन संदे नही रहेता जे
  8. 0:37–0:39एक दम सही बात कहल वहां
  9. 0:39–0:42इप मतलप पुरनता हा बाईनरी एची
  10. 0:42–0:45या ता हद्दी तुटाल अचे, वा वा नहीं तुटाल अचे
  11. 0:45–0:49उजरा करीया फिलम पर सत्ति एक दम निरविवाद रहत जे
  12. 0:49–0:54आज पुचो ता इी हमरा लोकन के एक ता गजब के सान्तो ना दाईत अच्छे
  13. 0:54–0:56सान्तो ना कोना
  14. 0:56–1:02मतलप हमरा लोकनिक दिमाक के कोनो दिश्वान अवर्गिक रिच्छीस पर विश्वास करभ बहुत आसान लागे च्छेक
  15. 1:02–1:10मुदा तनी कलपना करूँ जे उ एकस्रे मशीन उही डाक्तरक नियंट्रन मे हो जे आहा खर्दी तोरने आचे
  16. 1:10–1:12उ हो उ उ उ उ उ उ उ तबहयंकर इस्तिती भजाएत
  17. 1:12–1:19एक दम आहा द़द से चट पताएत रही मुदा रिपोट कहीए जे आहा एक दम स्वस्त ची
  18. 1:19–1:31जगन हम्रा लोकनी न्याए स्म्रिती अस्स्त्ता गद सत्यक दून्या में प्रवेश करेच्छी, तई आच्चानक वो अएक्स्रे मशीन थीक आहिनकाच कर बंद कर देती चे.
  19. 1:31–1:42आई हम्रा लोकनी गजेंद् ताकुरक अट्यन्त चर्चित उपन्यास गोई सबख भीच जल समाधी कबाल संसकरन उक्रा मुल विषे वस्तूपर चर्चा करो हल ची.
  20. 1:42–1:47इए उपन्यास, सत्या, अस्म्रितिक एक ता एहन दुन्या में लोग जाएत ची,
  21. 1:47–1:52जते सरकारी कागस पर आहा भुजु मात्र तीस्ता लाष दिकाएत चे.
  22. 1:53–1:57मुदा गावक लोक के तबुदल्षे नीजे असल में की भेल चे?
  23. 1:57–2:27आई आई हम्रा लोकनिक विमर्षक केंद्र बिन्दु सुह आई पर आई प्रष्नई आई जिक की आहन ब्रष्ट विवस्ता में नयाई पूनता गावाक उही सामुदाइक इस्मादी बिज्द्याई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई �
  24. 2:27–2:33अद्याद्म्यक प्रतिरोद अची उक्रे पर निरभर करे तची
  25. 2:33–2:36जहीना चन्नाग आचीक भूध सब जे कबद्टी खिले चत्फी
  26. 2:36–2:39एक दम की सत्ते उते हे भेटद
  27. 2:39–2:41वाजहीना हमर साथी माने चत्फी
  28. 2:41–2:45न्याई पावे लेल आहांके उही ब्रष्ट संस्त्थागत
  29. 2:45–2:50अगर अगर अगर बहंकरब अपर्यार्या चे
  30. 2:50–2:53ताहा के स्पष्ट मत की इचे हैपर
  31. 2:53–2:55हमर स्पष्ट मत इचे
  32. 2:55–2:57जे उपन्यासक मुल्षक्ती
  33. 2:57–3:00उही लोका ख्यान अस्सामुदाएक स्मिर्थी में आचे
  34. 3:00–3:03गाम कर लोग कागजी वेवस्था के
  35. 3:03–3:33पूर्डदा नकारी देचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचच�
  36. 3:33–4:03तार तक्हन बदल जातने जे मुशीन बचल रहत जातने जे मुशीन बचल रहत बचल रहत बचल ग़ा विदा विदा अप्राशा विदा विदा अप्राशा विदा अप्राशा विदा अप्राशा विदा अप्राशा विदा अप्राशा विदा अप्राशा विदा अप्राश
  37. 4:03–4:09अपन्यास्ता कागद अस्सन्स्ताक इजे मशीन अची उक्रे खन्ध कै देत अची
  38. 4:09–4:14अपन्यास्ताक आरमब में लत्री ताकुरा के टाब बहुत पुरान अगेर चितावनी अची
  39. 4:14–4:20उ कहे च्थ हती भीजल कागद के गंद सुंगभ, जो पैसा गंद हो ता धाखषर नहीं करव.
  40. 4:20–4:22आ, इग लाईन ता बहुत प्रसिदध है.
  41. 4:22–4:27एक एवल कोनो गाँग बुदख सनक नहीं है चे, इएक ता दार्षनिक गूषना चे,
  42. 4:27–4:30जे स्रकारी कागद मूल रूपें ब्रष्ट बह चुकल आच्छे
  43. 4:30–4:33आहा भिसे सर पास्वान के गटना के देखू?
  44. 4:33–4:36गंगापर जे पूल बनी रहल चल उईवाला गटना
  45. 4:36–4:39एक दम भिसे सर पूल पर काज करा रहल आच्छे
  46. 4:39–4:42उते सक्धषेतची आ उकर म्रित्यु बहाजाईतची
  47. 4:42–4:44मुदा विवस्त्ता की करेतची
  48. 4:44–4:46साइट के जे रजिस्टर आची
  49. 4:46–4:48जे उकर कतित एकसरे मशीन आची
  50. 4:48–4:51उते इन नहीं लिखल जाईतची जे उमरला
  51. 4:51–4:53आप उते अनुपस्तित लिखल जाईतची
  52. 4:53–4:58सत्य, उते लिख्छल जाई तच्य कार्यस्तल चोडिय अनुपस्तिद.
  53. 4:58–5:03इक कतक खफना कच्य, कागगत सत्य के मार्दिलक,
  54. 5:03–5:05उक्रा जिन्दा में सहो मार्दिलक,
  55. 5:05–5:09आम मर्लक बाद उकर म्रित्यू के वी सहो मार्दिलक.
  56. 5:09–5:17तएहन अस्तिति में गामक लोक अदालत सा हतास भोजाई चति
  57. 5:17–5:25उ अंततह पीपरव गाचक नीचा नारी के लक पात आम माटी पर नामक अभिलेक तगयार करिच चति
  58. 5:25–5:35चन्ना गाची में मुद्मज्दूर, आज्साइबर थगीक शिकार उजल जानसन यूवग, जगन कबदी खेलै चती, तो उकोनो खेल नहीं आचें.
  59. 5:35–5:37तो उकी आची आची आची नजर ये में?
  60. 5:37–5:44अ उ सत्यक सन्रक्षान अचे उ स्म्रती अचे जे कागगस सब भीसी दिन्धरी तीगद
  61. 5:44–5:49सत्यक विजे कागस सन नहीं होई चैक लोक स्म्रती सहोई चैक
  62. 5:49–5:54आहा विषेश्रक मित्तिग जो दारन देलो उ निष्चित रूपे निदे विदारक अची
  63. 5:54–5:57अग खागद क्रूर्ता के देखावे तची
  64. 5:57–5:59मुदा तनी रुकी कष सुचू
  65. 5:59–6:04जे गामक लोग केवल पीपर गाचक नीचा माटी पर नाम लिक्के संटुष्ट बोजाएत
  66. 6:04–6:05उसंटुष्ट नहीं
  67. 6:05–6:07उ प्रतिरोद कर रहल चतें
  68. 6:07–6:10मानल जे प्रतिरोद कर रहल चतें
  69. 6:10–6:16वो ब्रश्ट्ख्लर्ग, दिवाकर्लाल, अश़शी भूशन देवक मुहवपर गूसक लिफापा फेकी देच्छतिन, अगर्जिक को कहछतिन, जे एही में पइसा गंदाची.
  70. 6:16–6:20तखन बिशे शरक म्रित्यो होगता थची
  71. 6:20–6:24तखन नन्दारोषन अकर जूता के जे अकर म्रित्योग भोतिक साख्षे अची
  72. 6:24–6:27अकर लोका दव्तर जाएच्छतिन
  73. 6:27–6:29अद्रिश्य अची अपन्यास में
  74. 6:29–6:39अ ब्र्श्ट क्लर्ग दिवाकर लाल अश़शी भूशन देवक मुँभपर गूसक लिपापा फेकी देच्छतिन अ गरजिक को कहच्छतिन जे एही में पैसा गंदा चे.
  75. 6:39–6:43इजे काज अची इस संस्तागत संगर सची.
  76. 6:43–6:49केवल माती पर नाम लिखव नहीं इब रहश्ट वेवस्थाक मुँपर उक्रे कागज मारवाची
  77. 6:49–6:51मुदा जूता फेक्ला संकी वेवस्थाब दबड़ी गल
  78. 6:52–6:52मतलप
  79. 6:52–7:00अही सच्छुना उजूता से होता अन्तता उई ब्राष्ट तन्त्रके केक्ता हिस्चा बनी का कोनो कोना में पडेल रही गे लेते.
  80. 7:00–7:01उईजिस न्यायता नहीं भेटल.
  81. 7:01–7:04जूता सन सुर्वात भेल मुदागा देखो.
  82. 7:04–7:06सत्तिब्रत महतासन सरकारी वकील
  83. 7:06–7:12जगन अदालत के वीटर सत्टिक के पक्ष में ताड होई चातिन तकन औई संस्ताक वीटर सा एक ता प्रहार अची
  84. 7:12–7:17औजे सबे सा महत्पुरन बात अची जक्राहा नजर अंदाज कोराल ची
  85. 7:17–7:19हम की नजर अंदाज कोराल ची
  86. 7:19–7:30अग, अची दिजितल संगर्ष, देविका सा, अगोप कुमार जे दिजितल साख्ष तेर करे चती, जना अ फाईल आनार सततर, अगी आची?
  87. 7:30–7:36अप्रादी आपन अप्राद कागज अईस्क्रीन पर चुपोने आची, उसब मूल अकाूंट चलवाइच चती.
  88. 7:36–7:38मूल ॐकाウन्त, हा
  89. 7:38–7:43शुताक लेल हम सपष्ट कर दी, जे मूल ॐकाशन्त अजाली बंक खाता सब होई तची
  90. 7:43–7:47जक्रासा इसाईबर अप्रादी अदलाल सब अपन कालो दन गूमावे चती
  91. 7:47–7:49अप्पकर से बहर रहे चती
  92. 7:49–7:52दिजितल अरेस्ट सन्नै का अप्राद करे चती
  93. 7:52–7:59तजए आप्रादी दिजितल आस्टरक प्रुएक करहल चती तवोकर पकडवे लेल आहाके दिजितल सक्षक दरकार परत.
  94. 7:59–8:00बाहरी खोल पर भेशी द्यान देर्खार परत.
  95. 8:00–8:03इसाख्शे जखन बहुतिक व्यवस्ताके तब्पकरे तची
  96. 8:03–8:06तकने अप्रादी के आस्ली दन्दबेटे चेक
  97. 8:06–8:08केवल गाचवग नीचा बैस्लासा नहीं
  98. 8:08–8:10आहा के दिजिटल अस्टरक बाद सुने में
  99. 8:10–8:14बहुत आदूनिका प्रभाव्षाली लागे तची हम मानेच छी
  100. 8:14–8:20मुता हम्रा लागे तचीजी हैं, उपर न्यासिक आत्मा के चूडी का, उकर भाहरी खोल पर भेशी द्यान देरहाल ची.
  101. 8:20–8:24बाहरी खोल? आहा साक्षे के बाहरी खोल कहर रोल ची?
  102. 8:24–8:32तने विचार करू चंद्रपाल, बत्रा, बतुकनात, हरीहरन, और रागज़ सोमाने सनप्रादी की करेता ची?
  103. 8:32–8:37उ माटिक लोक नहीं चतिन, उ शून्ने में बनल साम्राज्जे कराजा चतिन,
  104. 8:37–8:39उ दे व्यापारक जाल बन वेज्च्छतीं
  105. 8:39–8:44जक्र उ सुर्या आश्रे सेवा समेटी सनेग नाम दैच्छतीं
  106. 8:44–8:46आप उ एक ता मुखष्टा आची
  107. 8:46–8:48एक दं मुखष्टा आची
  108. 8:48–8:52एक रप प्रतिकार में एडा, आरुक्षन, अदेविका सा, की करेच्छतीं
  109. 8:52–8:56कि यो कोनो नवका कमपौटर प्रोगें बनावेच्छतिन?
  110. 8:56–8:56नहीं!
  111. 8:56–9:00उसब समानान्तर पाट्शाला अस्मरित गर बन वैच्छतिन.
  112. 9:00–9:03ये आचे सत्यक अस्ली आस्ट्र.
  113. 9:03–9:05मुदा उस्मरिति गर ता...
  114. 9:05–9:06रुक्या!
  115. 9:06–9:08आहा अद्ध्याय उननीस के याद करूूूू.
  116. 9:08–9:13जखन गाउक लोग पीपर कर गाचक नीचा माटी पर नाम लिखाई चदिन
  117. 9:13–9:16उद्रिष्यकतिक शक्तिषाली चे
  118. 9:16–9:21उप माटिक अविलेक उई आदालती फाएल्सन रहाँ बेशी बहारी चे
  119. 9:21–9:23कि अक ता माटी याहा मिटाय नहीं सके ची
  120. 9:23–9:25माटी सब चीज के सोखिलगचे
  121. 9:25–9:27मुदा सत्ते के उगल देच्छी
  122. 9:27–9:28हम मानस ची
  123. 9:28–9:31जे माती पर नाम लिख़व एक ता बहुत भावुक
  124. 9:31–9:33प्रतिकात्मक विजे आची
  125. 9:33–9:36मुदा की बिना कुनो साएक्षक संकलनक
  126. 9:36–9:38उस्म्रिती पुरनाची
  127. 9:38–9:39पुरनाची
  128. 9:39–9:42मातिक् स्म्रिती अपने आपने पुरनाची
  129. 9:42–9:43नहीं
  130. 9:55–9:59अगर उदा बज़ाईट जाएट जाएट चे सत्वरत महतालग
  131. 9:59–10:03जाएट सा आदाला तक भीटर विवस्था के चुनाती देल जासके
  132. 10:03–10:06दो सर जाएट छे विदेश में इरा आरुक्षन लग
  133. 10:06–10:36अज नद अज नद बज़ाई ताग बज़ाई ताग बज़ाई ताग बज़ाई ताग बज़ाई ताग बज़ाई ताग ताग ताई ताग ताई ताई ताई ताई ताई ताई ताई ताई ताई ताई ताई ताई ताई ताई ताई ताई ताई ताई ताई ताई ताई ता
  134. 10:36–10:40जे श्म्रिति के से हु दिजिटल आब होतिक साख्छिक दरकार परेत आची
  135. 10:40–10:43जैसा उ वेवस्ताक ग़राई में प्रहार का सके
  136. 10:43–10:50अदालतक भीतर सत्यवरत महता जखनो सील बन्द लिपापा सनाम पड़े चती
  137. 10:50–10:55तकन जा का उ नामक जल अदालतक फर्ष पर दाख चोड़ाई तची
  138. 10:55–10:58उ फर्ष जे वेवस्थाख प्रतीख ची
  139. 10:58–11:01उते सत्यक दाग लगब बहुत जरूरी आची
  140. 11:01–11:02तीख आची
  141. 11:02–11:07आहा अदालत अवेवस्थाख फर्ष पर सत्यक ताग लगवाग बात कहलाउ
  142. 11:07–11:13मुदाजा अदालत अशाक्ष ये तेक महत्त पून चल, ता अद्ध्याय अथारा मे की होई चची?
  143. 11:13–11:16अथारा मे आहा बहिष्कारक बात कर रहा जी
  144. 11:16–11:23आहा, जगन गामक लोग अदालत कर बहिष्कार कर देट ची, आप पुराक पुरा अदालत कहली रही जाई तची
  145. 11:23–11:29अखर आह कोना देखाईची, हम्रा वीचारे उ संस्तागत नयाई प्रक्रियाक पुरन विपलताक प्रतीक अची.
  146. 11:30–11:31विपलता नहीं अएक ता...
  147. 11:31–11:33अगर उदा उगुरा बहाताशा नहीं चल
  148. 11:33–11:35उआदालत के तारीक के गोहिस्सां
  149. 11:35–11:37जताई तारीक पर तारीक भीटे तजे
  150. 11:37–11:39अहिसा वचे लेल एक ता सचेत निनली चाती
  151. 11:39–11:41इबहिष्कार देगा प्रज्वाद प्रज्वाद
  152. 11:41–11:43आप देखा प्रज्वाद प्रज्वाद
  153. 11:43–11:49ते उ आपन काव गूरे जाए चथ ही आ आपन नामक अबिलेक बनवे चथ ही
  154. 11:49–11:51मुदा उ गूरभ भाटाशा नहीं चल
  155. 11:51–11:56उ अदालत के तारीक के गोहिस्सां जताए तारीक पर तारीक बेटे तजे
  156. 11:56–12:00उ ही सा वचे लेल एक ता सचेत निनली चथ ही
  157. 12:00–12:04इबहिशकार स्वयम में संस्तागत अदालत के निरड़्धाक
  158. 12:04–12:06वो कर खोकला पनक प्रमान अचे
  159. 12:06–12:10लोक किन्याय अदालत में नाएच चनना गाची में बेटे चे
  160. 12:10–12:15इजे आहा का लाओ जे लोक अदालत साथाश भोका गाम गुरी जाई चती
  161. 12:15–12:16इए एक दं गलत अचे
  162. 12:16–12:19इसे कोनु पलायन वहताशा नहीं आची
  163. 12:19–12:22ये एक ता अछ्तिनत सोचल भुजल रन्नितिग बहिषकार आची
  164. 12:22–12:24रन्नितिग बहिषकार?
  165. 12:24–12:28संस्ताक बहिषकार कै का संस्ताके कोना हरायाब?
  166. 12:28–12:31आई बहिषकार कोनो संसन वेवार ने आची
  167. 12:31–12:36उआप बतुकनात हरीरन के देखू, उखाली आडालत के देखी का कापी जाईत है तचे की एक?
  168. 12:37–12:40की एक तो उख्रा डार लागग चे गाँक लोकक मोंसा?
  169. 12:41–12:44नहीं, की एक तो हरीरन सन दलाल के अपन सथता स्थास थापित करे ले,
  170. 12:44–12:48अग, तब आदालत काली करव सवयम में संस्तागत प्रहार अची
  171. 12:48–12:51जखन गाम के लोग अपन काज में लागी जाई चथिन
  172. 12:51–12:54अँ मुअव्व्जा के भीख नहीं वागाई चथिन
  173. 12:54–12:56अपन मर्यादा लेल थाड़ होई चथिन
  174. 12:56–13:00तढवाह मानी रहल ची ज़ अदालत के कुनो काज ने रहल?
  175. 13:00–13:05नहीं, अदालत खाली करब सवयम में संस्तागत प्रहार अची.
  176. 13:05–13:08जखन गाम के लोग अपन काज में लागी जाए चतिन,
  177. 13:08–13:20उ मुअव्जा के बीख नहीं मागगछ छतिन, आपन मर्यादलेल ताड हो इच्छतिन, तकन संस्तागत अप्रादी सबक जे कानुनी आस्त्र आची, जेना मानाहानी वा हमानाक दमकी, उ एक दम भोतर भाई कै तची.
  178. 13:20–13:23अहाँ जी हरीहरनक दरक गब कहला हूं,
  179. 13:23–13:27मतला इह मर्द दर्ब आई चेक जो बिना कोनो गोशनाक गाम दरी चली जाई तची समजोता कलेल.
  180. 13:27–13:29मुदा गाम में अनन्याकी करे तची,
  181. 13:29–13:34औह रही हरनक उही समजोता कागज के नाव बना का पोखरा में बजाए देची.
  182. 13:34–13:39इखे ही कही कग, जे कागज नाम भी नाम होई तच्छ, पानी उक्रा नहीं राखे तच्छ.
  183. 13:39–13:45इखी आच्छ, इगी खागजी वेवस्ताक, उजी संस्ताक एक ता सतीक अबहुतिक हार आच्छी.
  184. 13:45–13:52आहा जी हरीहरनक दरक गब कहल हूं, मतलब यहमर द्रिष्टान्त के आरो मजबूत कर अचे.
  185. 13:52–13:52कोना?
  186. 13:52–13:58उ कानुनी दर नहीं आचे. उ दर पूनता मनोवे ग्यानिक आई अद्ध्याठमिक आचे.
  187. 13:58–14:00मुदा उकर परिडाम तबहुति कची ने?
  188. 14:00–14:03परिनाम जे हो दर अद्धियात्मिक अच्छे
  189. 14:03–14:07आई बात हमरा एही विमर्ष्ख सब संगजेर विंदु दिस्ला जाई तच्छी
  190. 14:07–14:10जे अप्रादि सब का अस्ली दन्ड की अच्छी
  191. 14:10–14:13अद्ध्याय तीस आगा का विष्लेषन जहां करव
  192. 14:13–14:43ताहा देखब जे बत्रा, हरीहरन, रागव सोमानी, लाओ किनहंग, आई आदवर्द ब्रुम एही पाचु अप्रादि कोनो सुप्रीम कोट मे पेशी नहीं हूँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँ
  193. 14:43–14:47अगरा आपन भीट्रक दरावना सचक सामना करई पडे चेक
  194. 14:48–14:52उनका सबके उहिम्रित लोकक नाम, जणा सर्यु देवी आमुन्नाक तास्वान
  195. 14:53–14:55अपन होट्सा सविकार करई पडे चन.
  196. 14:56–15:00उनका उही लोकक सपना के सविकार करई पडे चा,
  197. 15:00–15:05तवाद्धा पोनो जेलक कोट्री ये देख आंदार नहीं बहुज होई तची
  198. 15:06–15:09चन्ना गाचीग भूथ सबखग जे कबद्धी आची
  199. 15:10–15:13जे सास बदले तची मुदा खेल कतम नहीं होई तची
  200. 15:13–15:19वो नो जेलक कोट्री एते क अंदार नहीं बहुऽ सके तची, जदेक अंदार अ आत्माक भोज होई तची.
  201. 15:20–15:29चन्ना गाची भूथ सबख जे कबद्दी आची, जे सास बदले तची, मुदा खेल कतम नहीं होई तची, औव हिनका सब कब भीतर गुष जाई तची.
  202. 15:29–15:34इदन्द बहुतिक दुन्या से परे आची आ ईल एब एसी बहयाना कचे
  203. 15:34–15:40आहाक इबिव्रन जे आद्ध्यात्मिक दंद जेल से बेसी बहयाना कचे
  204. 15:40–15:44इबहुत सुन्दर आचे और हम एक रासा पून सहमत ची
  205. 15:44–15:52मुदा, आहा एते एक ता बहुज सुक्ष्म, मुदा अट्यन्त महत्तोपून्र भिन्नता पर द्यान नहीं दोराल जी.
  206. 15:52–15:53की भिन्नता?
  207. 15:53–15:59मनोवे ज्यानिक वा अद्ध्यात्मिक दंडक प्रभाव तकने सार्था कोई तची
  208. 15:59–16:05जखन उ उही आप्रादिक भूटिक और आर्थिक दून्याक पतन से जुडल हो.
  209. 16:05–16:12जो आप्रादिक भीतर से दरल अची, मुदा बाहर से करोडपती बनल अची, तो उ नियाए नहीं बहल.
  210. 16:12–16:16मुदा उ करोडपती रही कते जाए तची, उही तहम के है रहल ची.
  211. 16:16–16:26जे ना आहा लाउ किन हंक बातकेल हूं, हूंकोंग मे बैसल लाउ, जगन सपना मे उजल जा आसर्यू के देखाइत अची, तो उकर प्रभाउ की होए तची.
  212. 16:26–16:28के वल उक्रा पसीना नयबएचे.
  213. 16:28–16:33उकर व्यापारिक साम्राज्जे जे उही मूल अकाँव्ट का जाल पतिकाल आची
  214. 16:33–16:35और आतो राथ टब बहजाई तची
  215. 16:35–16:38मुदद टप तची उही सम्रिति कारन होगे तची ने
  216. 16:38–16:42इस्मिरिति ट्रिगर आची, मुदद पतन भहोति कची
  217. 16:42–16:48रागव सुमानी के देखू, जे हुंकाँक कपूरा सरवर चलारहल चल, जे दिजिटल अरेश्ट का सरगना चल,
  218. 16:48–16:56जखनोकरा आपन माए बापक पुरान डारी आच्ठातक इस्मरिती अबएच्छे, तो बहावुक भोक की करे तची.
  219. 16:56–16:58उआपन सरवर बन्द कर देटची.
  220. 16:58–17:04एक दम वापन फोन आस्विम तोर देताची, सर वर सकथी जाई तची, नेट्वर्ग बंद कर देताची,
  221. 17:04–17:08आ सब सब पहली बाद जी आद्ध्याए चोवालिसा प्टालिस में देखार होए तची,
  222. 17:08–17:17उआची संतान का विद्रो है, उनका सबहका पन संतान हैंका लोकनिस सबहतेक दुनियक संपती आप्राद पर प्रश्न पुछे लगे तची.
  223. 17:17–17:21इगेवल भूथ प्रेतक दर नया ची, इवूनकर पूंजीग धून्स आची.
  224. 17:21–17:26आहक तात्परे आचे जे संटानकी प्रस्न भूटिक दन्ड आची उत भावनात्मक बहलने.
  225. 17:26–17:29नहीं, उशुध भूटिक आची.
  226. 17:29–17:33चंद्रपाल बत्रा का भेटा उक्रासा पूच़ही तचे जे पिता जी,
  227. 17:33–17:39हमर इपड़ाई, इगाडी, इबड़क गरग भीतर कतेक म्रित लोक का मोबाल बन्द पडल आची.
  228. 17:39–17:43उकर भेटा उही समपती सगिना करे लागी तची.
  229. 17:43–17:45हूँ, उसमपतिक विरोद आची.
  230. 17:45–17:49रागव त्रिसंगनल कबेटी उकरा सप्रष्न पुच़ ही तचे,
  231. 17:49–17:53अज इगुप्त बात सब को रहल अची उ कखर सुरक्षा लेल कर अची
  232. 17:53–17:59लाओ किनहंक भेटा विश्विद्याले में लाब आन आमक रिन पर एक ता निबंद पड़ाई तची
  233. 17:59–18:04अख्लम खुल्ला कोई तचे जो एही ब्रष्ट वंष्का उप्रादिकारी ने बनत
  234. 18:04–18:06उ पूजि के लात मारी देई तची
  235. 18:06–18:08मुदा उ वैचारे क्रानती आची
  236. 18:08–18:10मुदा उकर आसर भूटी कची
  237. 18:10–18:12सत्ते जकन उकर द्रोंग्रूम में
  238. 18:12–18:14उकर बाइंक खाता में
  239. 18:14–18:16आउकर परिवारक भविष्षी में प्रवेश कर आची
  240. 18:16–18:18तची तचन आस्ली नयाई होई तची
  241. 18:18–18:48इसे ख़ादियाद्मिक नहीं आप दोगादियाद्मिक नहीं जो जो जो वो बवोगादियाद्मिक नहीं जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो �
  242. 18:48–18:53उच्चारनक बल पर नहीं चंद्र पालक स्क्रीन तुटे ताई ताई ताई ताई ताई
  243. 18:53–18:54मुदा
  244. 18:54–19:01इजे मनक परिक्षा जे बुडभा भूथ लई ताई ताई ताई ताई तान्त्री का अद्द्यात्मेक न्यायक अछी
  245. 19:01–19:04जगरा कोनो संस्ता बुजने सा कैता ची,
  246. 19:04–19:06उपन्यास जबस्पष्ट करेता ची,
  247. 19:06–19:08जब सत्यक उच्चारनक जब बल आची,
  248. 19:08–19:10जगरा मूल मंत्र आची,
  249. 19:10–19:13लाज अप्रादिख हो पेटिटक नहीं,
  250. 19:13–19:15इव मंत्र देविका साहा,
  251. 19:15–19:17मीरा और सोम्या रामानादन,
  252. 19:17–19:21गामक च्वाँँच्छो शुरूकरे च्छती कुनो अदालट्सना
  253. 19:21–19:23इवन्त्र बहुत शक्तीशाली आची
  254. 19:23–19:24इद फम मानेच ची
  255. 19:24–19:29जगन पूल्मती महानगरक होतेल सा अपनस्ली नाम पुकारी बहरी निकले थाची
  256. 19:29–19:32उकर अन्तरिक साहसक विजै आची
  257. 19:32–19:35उकुनु पूलिस समथती ने मागगे ताची
  258. 19:35–19:37बाहरी दुन्याक मोहसे मुक्त बहुक
  259. 19:37–19:41गामवक लोख स्म्रिती जे सत्ते के दारन कर अगजे आची
  260. 19:41–19:45उगरा कुनो दिजितल फाण्ट्टाग तब्पक दरकार नहीं जैक
  261. 19:45–19:48मुदा ये ते यहा एक ता बहुत पेग जीस भिसरी रूल ची
  262. 19:48–19:49की
  263. 19:49–19:52फूलमतिक सहस निस्चित रूपेन आन्तरी कचे
  264. 19:52–19:54औब आपन नाम फुका रही तचे
  265. 19:54–19:57मुदा उए बन्द होटल कमरा से बाहर कुना निकले तचे
  266. 19:57–20:00की केवल नाम लेला से ताला खसे परल
  267. 20:00–20:03नहीं, ताला ता नहीं ख़सल, मुदा...
  268. 20:03–20:04नहीं ख़सल.
  269. 20:04–20:09उते गोप कुमारा इशान दद्तक जे गुप्त सुब्ट्वेर अचे उ कारज करी तचे.
  270. 20:09–20:13उ सुब्ट्वेर फुल्मतिक संकत सुम्या रामाना धन दरी पूछावएद चे.
  271. 20:13–20:16आशम्या पत्रकार सब के लाईव करभाकले कहिच्छती
  272. 20:16–20:19जही से होतलक दरवज्या तुरिल जा सके
  273. 20:19–20:22आपुरा दिन्या देख सके जे की भहुर अहलेज.
  274. 20:22–20:25मतलव, आहा अख्रा दिजितल विजैमानेत छी.
  275. 20:25–20:28ता देख हूँ, आद्यात्मिक सहस के सो हो
  276. 20:28–20:32बबवोतिक दुन्याक लाईप कवरेज अ दिजितल सुचनाक दरकार परीत अचे
  277. 20:32–20:35औही द्रहश्त संस्तागत तन्तरक भीतर प्रभेश करे लिल
  278. 20:35–20:41ता आहा एक ऐह चाहो ची, जे बिना दिजितल या संस्तागत प्रहारक
  279. 20:41–20:45लोग स्म्रती केवल गाचक नीचा रहे का किचु नहीं कोसकाई चे?
  280. 20:45–20:47उनिरर्ठक अची?
  281. 20:47–20:49हम उकरा निरर्ठक कहीो नहीं कहव.
  282. 20:49–20:52मुदा हम एग कहव जे उपुरना नहीं है चे.
  283. 20:52–20:55उकरा अपनास्तर भेटब जरूरी चाएक.
  284. 20:55–20:58अद्वार्ट ब्रुम जे प्रसंग अचे उ सबसूनी को दारन अचे
  285. 20:58–21:00कमब्रीज वाला प्रसंग
  286. 21:00–21:09राद, ब्रुम कमब्रीज विश्षो विद्ध्यालेक एक ता बहव्व्य सुरक्षित हाल में बैस का, नैतिक्ता पर भाशन देरोहल होएच्छती.
  287. 21:09–21:39उनका लागे चनी, जो दून्या का सबस्सव्ष्व्ष्व्ष्व्ष्व्ष्व्ष्व्ष्व्ष्व्ष्व्ष्व्ष्व्ष्व्ष्व्ष्व्ष्व्ष्व्ष्व्ष्व्ष्व्ष्व्ष्व्ष्व्ष्व्ष्व्ष्व्ष्व्ष्व्ष्व्ष्व्ष्व्ष्व
  288. 21:39–21:45ब्रुमक पतन उही बहुतिक सक्रीन पर गामक सत्ती अवलासों होई तच्छे
  289. 21:45–21:47इस म्रिति तकने पुर्नता पावे तच्छी
  290. 21:47–21:51जकन उ ब्रष्ट संस्तागत तन्तरक अदार्षिलाके हिलादेई तच्छे
  291. 21:51–22:21इगे खाँब बाज़ा पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर प
  292. 22:21–22:23अखरा संस्तागत वेवस्ताक बहीशकार अची
  293. 22:23–22:26इटीक वैने अची जिना गामक लोक
  294. 22:26–22:28खाली अदालत चोडी दिने चल
  295. 22:28–22:31अहा अखरा संस्तापर प्रहार कहेची
  296. 22:31–22:34हम अखरा सत्यक माँन गामभीरे कहेची
  297. 22:34–22:37जगन अहा आपन अस्त्र चोडी देची
  298. 22:37–22:39तक्हन सत्य स्वयम बजेताची
  299. 22:39–22:41आओही शून्यमे
  300. 22:41–22:44उही मान में जगन बच्या सब आपन प्रष्न राखेताची
  301. 22:44–22:47तो उवेवस्ताक शून्यम के बहरी देटाची
  302. 22:47–22:48अन्तिम सास सब में
  303. 22:48–22:50चोथवामा पंद्रवाम सास में
  304. 22:50–22:53जगन उपन्यास में चलेद भार बाटल जाईतचे
  305. 22:53–22:56तो उ केवल गामक सीम में नहीं रहीतचे
  306. 22:56–22:58उग यात्रा करेतची
  307. 22:58–23:02अग भार उष्मिरती बहुतिक रूम से यात्रा करेतची
  308. 23:02–23:04अउ अप्रादिक के गर
  309. 23:04–23:07उकर बंक, उकर सर्वर रूम दही पहुथ जाईतची
  310. 23:07–23:12अगर ब्रज्द्द्दागुरक उपन्यास न्याय के कोनो एक ता बन्द फादलक रूप में नहीं देखाई चे.
  311. 23:12–23:13बलकुन नहीं
  312. 23:13–23:18हमर एप अख्ष्रहल जे गामक लोक स्म्रिती असत्यक उच्चारन,
  313. 23:18–23:21जैना माडी पर नामक अभी लेक तट्यार करब,
  314. 23:21–23:27ये गजेंद्र दाखुरक उपन्यास न्याय के कोनो एक ता बंद फाईलक रूप में नहीं देखाई चे.
  315. 23:27–23:28बलकुन नहीं.
  316. 23:28–23:33हमर ए पक्ष रहल जे गामक लोख स्म्रिती असत्यक उच्चारन,
  317. 23:33–23:37जेना माडी पर नामक अभी लेक तध्यार करब,
  318. 23:37–23:42वा चन्ना गाची में भूज्सबख कबद्दी खेलब इपन्यासक रिदय आची.
  319. 23:43–23:48इओ सत्य आची जे बाहरी दुन्याक ब्रष्ट संस्त्थासा पुरनता मुक्त आची,
  320. 23:48–23:52आजेक्रा कोनो एकस्रे मशीनक मोहरक दरकार नहीं आची.
  321. 23:52–23:56आहमर इं निरन्तर इस्थापित करबाक प्रयास रहल,
  322. 23:56–24:00जे इस्म्रिती आपन आस्ली स्वरूप आपुरनता तकने पावे तची,
  323. 24:00–24:04जखन उईही ब्रष्ट संस्थागत तन्त्रिक भित्र प्रवेश करे तची.
  324. 24:04–24:08जखन सत्य, उकर श्क्रीन, उकर आदालत,
  325. 24:08–24:14उकर बेंक खाता में गुसक उकर आदार शिला के हिलादे तची तकने न्याई मुर्ट रूप लेए तची.
  326. 24:14–24:18तोनु द्रूष्टी कोनक अपन अपन गजराई आमहत्व ची.
  327. 24:18–24:21मुदा एक्ता बाद पर हम्रा लोकनेक पूरन सहमती चै,
  328. 24:21–24:27जे लेख्हक न्याय के एक्ता निरन्तर चलएत प्रक्रिया ग्रूप में प्रस्तूत केलनी आचे.
  329. 24:27–24:33उपन्यासक उवाख्यः सास बदलगताची मुदा खेल कतम नहीं होईताची.
  330. 24:33–24:36न्याय कयो एक ता बंद अद्याय नहीं होईताची.
  331. 24:36–24:42इक दम सदी कहलू, आज हम सुर्वात वाला औही मेटिकल धाएक्नोसिस का उप्मा पर वापस जाई,
  332. 24:42–24:47तई उपन्यास औही पुरान बरष्ट एकस्रे मशीन के पुरी तरज़े तची.
  333. 24:47–24:50इदेखावै तची, ज़ सते कहद्टी कतर तुटल आची,
  334. 24:50–24:55अग खागजक रिपोट से नहीं, बलकी उही लोकक स्मुरितिक दधगन से पताचले तची,
  335. 24:55–24:57जिस सत्यके जीवएद आची.
  336. 24:57–25:02मुदा आग बाथ से जुड़ेद, हम यो कहब जे उही रडी के जोडबा के लेल,
  337. 25:02–25:06आगे उई प्लास्टर उई संस्त्धाद वास्ट्विक्ता से भिड़े पडद.
  338. 25:06–25:07बहुद संदर.
  339. 25:07–25:10आई विचार उ तेजक विमर्ष्शक संग,
  340. 25:10–25:14हम्रा लोकने कुनु एक ता पक्छके विजेता गोषित नहीं करव.
  341. 25:14–25:18शूतागन आहा स्वयम इविचार करूजे न्याय की आची?
  342. 25:18–25:20की इई टा बन्द फाई लची?
  343. 25:20–25:22जही पर महर लागल आची?
  344. 25:22–25:24वा इई टा जागल स्म्रती आची?
  345. 25:24–25:27जे पीपरक गाच्छक नीचा सा उठीका
  346. 25:27–25:29कमब्रेज एक स्क्रींदरी पोची जाए तची?
  347. 25:29–25:31इप्रश्न विचारनी आची
  348. 25:31–25:33इप्रश्न हम आहापर चोडइचची
  349. 25:33–25:35गोही सबख भीच जल समादी में
  350. 25:35–25:37आरो बहुत्रास गेराई आची
  351. 25:37–25:39बहुत्रास परत आची
  352. 25:39–25:41जक्रा आहाँ सवयम अनवेशन कषकईची
  353. 25:41–25:43एव पन्यास
  354. 25:43–25:58एक दम जतै नाम पडल जाए उतै कत्ह समाप्त नहीं होई तची, आहा से फेर भेट होईत, नूविचार अन्नव विमर सक्संग. विदालिो.

Plain text

गेहन विमर्शक एह मंज पर आहा सभीक सवागत चे, जकन हम्रा लोकनी कुनो डोक्तर अग जाएथ ची, मतलप विशेश का जि कुनो चोट लागल हो, तब हम्रा लोकन के एक तस पष्ट ताक अपेख्षा रही तची. हा, उता अची कुनो सन्दे है नहीं रहे? इक्दम जहना आहा कहत तूटेत आजे आहा एकस्चरे करवाएची आव उजे एकस्चरे मशीन आजे उज़रा रेखा इक्दम साव साव देखा देचे दाक्टर उईपर आँगुर राके कोजचत्यन जे आदेखु इचे समस्या अग, देखो इज समस्या जे, उते कोन संदे नही रहेता जे एक दम सही बात कहल वहां इप मतलप पुरनता हा बाईनरी एची या ता हद्दी तुटाल अचे, वा वा नहीं तुटाल अचे उजरा करीया फिलम पर सत्ति एक दम निरविवाद रहत जे आज पुचो ता इी हमरा लोकन के एक ता गजब के सान्तो ना दाईत अच्छे सान्तो ना कोना मतलप हमरा लोकनिक दिमाक के कोनो दिश्वान अवर्गिक रिच्छीस पर विश्वास करभ बहुत आसान लागे च्छेक मुदा तनी कलपना करूँ जे उ एकस्रे मशीन उही डाक्तरक नियंट्रन मे हो जे आहा खर्दी तोरने आचे उ हो उ उ उ उ उ उ उ तबहयंकर इस्तिती भजाएत एक दम आहा द़द से चट पताएत रही मुदा रिपोट कहीए जे आहा एक दम स्वस्त ची जगन हम्रा लोकनी न्याए स्म्रिती अस्स्त्ता गद सत्यक दून्या में प्रवेश करेच्छी, तई आच्चानक वो अएक्स्रे मशीन थीक आहिनकाच कर बंद कर देती चे. आई हम्रा लोकनी गजेंद् ताकुरक अट्यन्त चर्चित उपन्यास गोई सबख भीच जल समाधी कबाल संसकरन उक्रा मुल विषे वस्तूपर चर्चा करो हल ची. इए उपन्यास, सत्या, अस्म्रितिक एक ता एहन दुन्या में लोग जाएत ची, जते सरकारी कागस पर आहा भुजु मात्र तीस्ता लाष दिकाएत चे. मुदा गावक लोक के तबुदल्षे नीजे असल में की भेल चे? आई आई हम्रा लोकनिक विमर्षक केंद्र बिन्दु सुह आई पर आई प्रष्नई आई जिक की आहन ब्रष्ट विवस्ता में नयाई पूनता गावाक उही सामुदाइक इस्मादी बिज्द्याई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई � अद्याद्म्यक प्रतिरोद अची उक्रे पर निरभर करे तची जहीना चन्नाग आचीक भूध सब जे कबद्टी खिले चत्फी एक दम की सत्ते उते हे भेटद वाजहीना हमर साथी माने चत्फी न्याई पावे लेल आहांके उही ब्रष्ट संस्त्थागत अगर अगर अगर बहंकरब अपर्यार्या चे ताहा के स्पष्ट मत की इचे हैपर हमर स्पष्ट मत इचे जे उपन्यासक मुल्षक्ती उही लोका ख्यान अस्सामुदाएक स्मिर्थी में आचे गाम कर लोग कागजी वेवस्था के पूर्डदा नकारी देचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचच� तार तक्हन बदल जातने जे मुशीन बचल रहत जातने जे मुशीन बचल रहत बचल रहत बचल ग़ा विदा विदा अप्राशा विदा विदा अप्राशा विदा अप्राशा विदा अप्राशा विदा अप्राशा विदा अप्राशा विदा अप्राशा विदा अप्राश अपन्यास्ता कागद अस्सन्स्ताक इजे मशीन अची उक्रे खन्ध कै देत अची अपन्यास्ताक आरमब में लत्री ताकुरा के टाब बहुत पुरान अगेर चितावनी अची उ कहे च्थ हती भीजल कागद के गंद सुंगभ, जो पैसा गंद हो ता धाखषर नहीं करव. आ, इग लाईन ता बहुत प्रसिदध है. एक एवल कोनो गाँग बुदख सनक नहीं है चे, इएक ता दार्षनिक गूषना चे, जे स्रकारी कागद मूल रूपें ब्रष्ट बह चुकल आच्छे आहा भिसे सर पास्वान के गटना के देखू? गंगापर जे पूल बनी रहल चल उईवाला गटना एक दम भिसे सर पूल पर काज करा रहल आच्छे उते सक्धषेतची आ उकर म्रित्यु बहाजाईतची मुदा विवस्त्ता की करेतची साइट के जे रजिस्टर आची जे उकर कतित एकसरे मशीन आची उते इन नहीं लिखल जाईतची जे उमरला आप उते अनुपस्तित लिखल जाईतची सत्य, उते लिख्छल जाई तच्य कार्यस्तल चोडिय अनुपस्तिद. इक कतक खफना कच्य, कागगत सत्य के मार्दिलक, उक्रा जिन्दा में सहो मार्दिलक, आम मर्लक बाद उकर म्रित्यू के वी सहो मार्दिलक. तएहन अस्तिति में गामक लोक अदालत सा हतास भोजाई चति उ अंततह पीपरव गाचक नीचा नारी के लक पात आम माटी पर नामक अभिलेक तगयार करिच चति चन्ना गाची में मुद्मज्दूर, आज्साइबर थगीक शिकार उजल जानसन यूवग, जगन कबदी खेलै चती, तो उकोनो खेल नहीं आचें. तो उकी आची आची आची नजर ये में? अ उ सत्यक सन्रक्षान अचे उ स्म्रती अचे जे कागगस सब भीसी दिन्धरी तीगद सत्यक विजे कागस सन नहीं होई चैक लोक स्म्रती सहोई चैक आहा विषेश्रक मित्तिग जो दारन देलो उ निष्चित रूपे निदे विदारक अची अग खागद क्रूर्ता के देखावे तची मुदा तनी रुकी कष सुचू जे गामक लोग केवल पीपर गाचक नीचा माटी पर नाम लिक्के संटुष्ट बोजाएत उसंटुष्ट नहीं उ प्रतिरोद कर रहल चतें मानल जे प्रतिरोद कर रहल चतें वो ब्रश्ट्ख्लर्ग, दिवाकर्लाल, अश़शी भूशन देवक मुहवपर गूसक लिफापा फेकी देच्छतिन, अगर्जिक को कहछतिन, जे एही में पइसा गंदाची. तखन बिशे शरक म्रित्यो होगता थची तखन नन्दारोषन अकर जूता के जे अकर म्रित्योग भोतिक साख्षे अची अकर लोका दव्तर जाएच्छतिन अद्रिश्य अची अपन्यास में अ ब्र्श्ट क्लर्ग दिवाकर लाल अश़शी भूशन देवक मुँभपर गूसक लिपापा फेकी देच्छतिन अ गरजिक को कहच्छतिन जे एही में पैसा गंदा चे. इजे काज अची इस संस्तागत संगर सची. केवल माती पर नाम लिखव नहीं इब रहश्ट वेवस्थाक मुँपर उक्रे कागज मारवाची मुदा जूता फेक्ला संकी वेवस्थाब दबड़ी गल मतलप अही सच्छुना उजूता से होता अन्तता उई ब्राष्ट तन्त्रके केक्ता हिस्चा बनी का कोनो कोना में पडेल रही गे लेते. उईजिस न्यायता नहीं भेटल. जूता सन सुर्वात भेल मुदागा देखो. सत्तिब्रत महतासन सरकारी वकील जगन अदालत के वीटर सत्टिक के पक्ष में ताड होई चातिन तकन औई संस्ताक वीटर सा एक ता प्रहार अची औजे सबे सा महत्पुरन बात अची जक्राहा नजर अंदाज कोराल ची हम की नजर अंदाज कोराल ची अग, अची दिजितल संगर्ष, देविका सा, अगोप कुमार जे दिजितल साख्ष तेर करे चती, जना अ फाईल आनार सततर, अगी आची? अप्रादी आपन अप्राद कागज अईस्क्रीन पर चुपोने आची, उसब मूल अकाूंट चलवाइच चती. मूल ॐकाウन्त, हा शुताक लेल हम सपष्ट कर दी, जे मूल ॐकाशन्त अजाली बंक खाता सब होई तची जक्रासा इसाईबर अप्रादी अदलाल सब अपन कालो दन गूमावे चती अप्पकर से बहर रहे चती दिजितल अरेस्ट सन्नै का अप्राद करे चती तजए आप्रादी दिजितल आस्टरक प्रुएक करहल चती तवोकर पकडवे लेल आहाके दिजितल सक्षक दरकार परत. बाहरी खोल पर भेशी द्यान देर्खार परत. इसाख्शे जखन बहुतिक व्यवस्ताके तब्पकरे तची तकने अप्रादी के आस्ली दन्दबेटे चेक केवल गाचवग नीचा बैस्लासा नहीं आहा के दिजिटल अस्टरक बाद सुने में बहुत आदूनिका प्रभाव्षाली लागे तची हम मानेच छी मुता हम्रा लागे तचीजी हैं, उपर न्यासिक आत्मा के चूडी का, उकर भाहरी खोल पर भेशी द्यान देरहाल ची. बाहरी खोल? आहा साक्षे के बाहरी खोल कहर रोल ची? तने विचार करू चंद्रपाल, बत्रा, बतुकनात, हरीहरन, और रागज़ सोमाने सनप्रादी की करेता ची? उ माटिक लोक नहीं चतिन, उ शून्ने में बनल साम्राज्जे कराजा चतिन, उ दे व्यापारक जाल बन वेज्च्छतीं जक्र उ सुर्या आश्रे सेवा समेटी सनेग नाम दैच्छतीं आप उ एक ता मुखष्टा आची एक दं मुखष्टा आची एक रप प्रतिकार में एडा, आरुक्षन, अदेविका सा, की करेच्छतीं कि यो कोनो नवका कमपौटर प्रोगें बनावेच्छतिन? नहीं! उसब समानान्तर पाट्शाला अस्मरित गर बन वैच्छतिन. ये आचे सत्यक अस्ली आस्ट्र. मुदा उस्मरिति गर ता... रुक्या! आहा अद्ध्याय उननीस के याद करूूूू. जखन गाउक लोग पीपर कर गाचक नीचा माटी पर नाम लिखाई चदिन उद्रिष्यकतिक शक्तिषाली चे उप माटिक अविलेक उई आदालती फाएल्सन रहाँ बेशी बहारी चे कि अक ता माटी याहा मिटाय नहीं सके ची माटी सब चीज के सोखिलगचे मुदा सत्ते के उगल देच्छी हम मानस ची जे माती पर नाम लिख़व एक ता बहुत भावुक प्रतिकात्मक विजे आची मुदा की बिना कुनो साएक्षक संकलनक उस्म्रिती पुरनाची पुरनाची मातिक् स्म्रिती अपने आपने पुरनाची नहीं अगर उदा बज़ाईट जाएट जाएट चे सत्वरत महतालग जाएट सा आदाला तक भीटर विवस्था के चुनाती देल जासके दो सर जाएट छे विदेश में इरा आरुक्षन लग अज नद अज नद बज़ाई ताग बज़ाई ताग बज़ाई ताग बज़ाई ताग बज़ाई ताग बज़ाई ताग ताग ताई ताग ताई ताई ताई ताई ताई ताई ताई ताई ताई ताई ताई ताई ताई ताई ताई ताई ताई ताई ताई ताई ताई ता जे श्म्रिति के से हु दिजिटल आब होतिक साख्छिक दरकार परेत आची जैसा उ वेवस्ताक ग़राई में प्रहार का सके अदालतक भीतर सत्यवरत महता जखनो सील बन्द लिपापा सनाम पड़े चती तकन जा का उ नामक जल अदालतक फर्ष पर दाख चोड़ाई तची उ फर्ष जे वेवस्थाख प्रतीख ची उते सत्यक दाग लगब बहुत जरूरी आची तीख आची आहा अदालत अवेवस्थाख फर्ष पर सत्यक ताग लगवाग बात कहलाउ मुदाजा अदालत अशाक्ष ये तेक महत्त पून चल, ता अद्ध्याय अथारा मे की होई चची? अथारा मे आहा बहिष्कारक बात कर रहा जी आहा, जगन गामक लोग अदालत कर बहिष्कार कर देट ची, आप पुराक पुरा अदालत कहली रही जाई तची अखर आह कोना देखाईची, हम्रा वीचारे उ संस्तागत नयाई प्रक्रियाक पुरन विपलताक प्रतीक अची. विपलता नहीं अएक ता... अगर उदा उगुरा बहाताशा नहीं चल उआदालत के तारीक के गोहिस्सां जताई तारीक पर तारीक भीटे तजे अहिसा वचे लेल एक ता सचेत निनली चाती इबहिष्कार देगा प्रज्वाद प्रज्वाद आप देखा प्रज्वाद प्रज्वाद ते उ आपन काव गूरे जाए चथ ही आ आपन नामक अबिलेक बनवे चथ ही मुदा उ गूरभ भाटाशा नहीं चल उ अदालत के तारीक के गोहिस्सां जताए तारीक पर तारीक बेटे तजे उ ही सा वचे लेल एक ता सचेत निनली चथ ही इबहिशकार स्वयम में संस्तागत अदालत के निरड़्धाक वो कर खोकला पनक प्रमान अचे लोक किन्याय अदालत में नाएच चनना गाची में बेटे चे इजे आहा का लाओ जे लोक अदालत साथाश भोका गाम गुरी जाई चती इए एक दं गलत अचे इसे कोनु पलायन वहताशा नहीं आची ये एक ता अछ्तिनत सोचल भुजल रन्नितिग बहिषकार आची रन्नितिग बहिषकार? संस्ताक बहिषकार कै का संस्ताके कोना हरायाब? आई बहिषकार कोनो संसन वेवार ने आची उआप बतुकनात हरीरन के देखू, उखाली आडालत के देखी का कापी जाईत है तचे की एक? की एक तो उख्रा डार लागग चे गाँक लोकक मोंसा? नहीं, की एक तो हरीरन सन दलाल के अपन सथता स्थास थापित करे ले, अग, तब आदालत काली करव सवयम में संस्तागत प्रहार अची जखन गाम के लोग अपन काज में लागी जाई चथिन अँ मुअव्व्जा के भीख नहीं वागाई चथिन अपन मर्यादा लेल थाड़ होई चथिन तढवाह मानी रहल ची ज़ अदालत के कुनो काज ने रहल? नहीं, अदालत खाली करब सवयम में संस्तागत प्रहार अची. जखन गाम के लोग अपन काज में लागी जाए चतिन, उ मुअव्जा के बीख नहीं मागगछ छतिन, आपन मर्यादलेल ताड हो इच्छतिन, तकन संस्तागत अप्रादी सबक जे कानुनी आस्त्र आची, जेना मानाहानी वा हमानाक दमकी, उ एक दम भोतर भाई कै तची. अहाँ जी हरीहरनक दरक गब कहला हूं, मतला इह मर्द दर्ब आई चेक जो बिना कोनो गोशनाक गाम दरी चली जाई तची समजोता कलेल. मुदा गाम में अनन्याकी करे तची, औह रही हरनक उही समजोता कागज के नाव बना का पोखरा में बजाए देची. इखे ही कही कग, जे कागज नाम भी नाम होई तच्छ, पानी उक्रा नहीं राखे तच्छ. इखी आच्छ, इगी खागजी वेवस्ताक, उजी संस्ताक एक ता सतीक अबहुतिक हार आच्छी. आहा जी हरीहरनक दरक गब कहल हूं, मतलब यहमर द्रिष्टान्त के आरो मजबूत कर अचे. कोना? उ कानुनी दर नहीं आचे. उ दर पूनता मनोवे ग्यानिक आई अद्ध्याठमिक आचे. मुदा उकर परिडाम तबहुति कची ने? परिनाम जे हो दर अद्धियात्मिक अच्छे आई बात हमरा एही विमर्ष्ख सब संगजेर विंदु दिस्ला जाई तच्छी जे अप्रादि सब का अस्ली दन्ड की अच्छी अद्ध्याय तीस आगा का विष्लेषन जहां करव ताहा देखब जे बत्रा, हरीहरन, रागव सोमानी, लाओ किनहंग, आई आदवर्द ब्रुम एही पाचु अप्रादि कोनो सुप्रीम कोट मे पेशी नहीं हूँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँ अगरा आपन भीट्रक दरावना सचक सामना करई पडे चेक उनका सबके उहिम्रित लोकक नाम, जणा सर्यु देवी आमुन्नाक तास्वान अपन होट्सा सविकार करई पडे चन. उनका उही लोकक सपना के सविकार करई पडे चा, तवाद्धा पोनो जेलक कोट्री ये देख आंदार नहीं बहुज होई तची चन्ना गाचीग भूथ सबखग जे कबद्धी आची जे सास बदले तची मुदा खेल कतम नहीं होई तची वो नो जेलक कोट्री एते क अंदार नहीं बहुऽ सके तची, जदेक अंदार अ आत्माक भोज होई तची. चन्ना गाची भूथ सबख जे कबद्दी आची, जे सास बदले तची, मुदा खेल कतम नहीं होई तची, औव हिनका सब कब भीतर गुष जाई तची. इदन्द बहुतिक दुन्या से परे आची आ ईल एब एसी बहयाना कचे आहाक इबिव्रन जे आद्ध्यात्मिक दंद जेल से बेसी बहयाना कचे इबहुत सुन्दर आचे और हम एक रासा पून सहमत ची मुदा, आहा एते एक ता बहुज सुक्ष्म, मुदा अट्यन्त महत्तोपून्र भिन्नता पर द्यान नहीं दोराल जी. की भिन्नता? मनोवे ज्यानिक वा अद्ध्यात्मिक दंडक प्रभाव तकने सार्था कोई तची जखन उ उही आप्रादिक भूटिक और आर्थिक दून्याक पतन से जुडल हो. जो आप्रादिक भीतर से दरल अची, मुदा बाहर से करोडपती बनल अची, तो उ नियाए नहीं बहल. मुदा उ करोडपती रही कते जाए तची, उही तहम के है रहल ची. जे ना आहा लाउ किन हंक बातकेल हूं, हूंकोंग मे बैसल लाउ, जगन सपना मे उजल जा आसर्यू के देखाइत अची, तो उकर प्रभाउ की होए तची. के वल उक्रा पसीना नयबएचे. उकर व्यापारिक साम्राज्जे जे उही मूल अकाँव्ट का जाल पतिकाल आची और आतो राथ टब बहजाई तची मुदद टप तची उही सम्रिति कारन होगे तची ने इस्मिरिति ट्रिगर आची, मुदद पतन भहोति कची रागव सुमानी के देखू, जे हुंकाँक कपूरा सरवर चलारहल चल, जे दिजिटल अरेश्ट का सरगना चल, जखनोकरा आपन माए बापक पुरान डारी आच्ठातक इस्मरिती अबएच्छे, तो बहावुक भोक की करे तची. उआपन सरवर बन्द कर देटची. एक दम वापन फोन आस्विम तोर देताची, सर वर सकथी जाई तची, नेट्वर्ग बंद कर देताची, आ सब सब पहली बाद जी आद्ध्याए चोवालिसा प्टालिस में देखार होए तची, उआची संतान का विद्रो है, उनका सबहका पन संतान हैंका लोकनिस सबहतेक दुनियक संपती आप्राद पर प्रश्न पुछे लगे तची. इगेवल भूथ प्रेतक दर नया ची, इवूनकर पूंजीग धून्स आची. आहक तात्परे आचे जे संटानकी प्रस्न भूटिक दन्ड आची उत भावनात्मक बहलने. नहीं, उशुध भूटिक आची. चंद्रपाल बत्रा का भेटा उक्रासा पूच़ही तचे जे पिता जी, हमर इपड़ाई, इगाडी, इबड़क गरग भीतर कतेक म्रित लोक का मोबाल बन्द पडल आची. उकर भेटा उही समपती सगिना करे लागी तची. हूँ, उसमपतिक विरोद आची. रागव त्रिसंगनल कबेटी उकरा सप्रष्न पुच़ ही तचे, अज इगुप्त बात सब को रहल अची उ कखर सुरक्षा लेल कर अची लाओ किनहंक भेटा विश्विद्याले में लाब आन आमक रिन पर एक ता निबंद पड़ाई तची अख्लम खुल्ला कोई तचे जो एही ब्रष्ट वंष्का उप्रादिकारी ने बनत उ पूजि के लात मारी देई तची मुदा उ वैचारे क्रानती आची मुदा उकर आसर भूटी कची सत्ते जकन उकर द्रोंग्रूम में उकर बाइंक खाता में आउकर परिवारक भविष्षी में प्रवेश कर आची तची तचन आस्ली नयाई होई तची इसे ख़ादियाद्मिक नहीं आप दोगादियाद्मिक नहीं जो जो जो वो बवोगादियाद्मिक नहीं जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो � उच्चारनक बल पर नहीं चंद्र पालक स्क्रीन तुटे ताई ताई ताई ताई ताई मुदा इजे मनक परिक्षा जे बुडभा भूथ लई ताई ताई ताई ताई तान्त्री का अद्द्यात्मेक न्यायक अछी जगरा कोनो संस्ता बुजने सा कैता ची, उपन्यास जबस्पष्ट करेता ची, जब सत्यक उच्चारनक जब बल आची, जगरा मूल मंत्र आची, लाज अप्रादिख हो पेटिटक नहीं, इव मंत्र देविका साहा, मीरा और सोम्या रामानादन, गामक च्वाँँच्छो शुरूकरे च्छती कुनो अदालट्सना इवन्त्र बहुत शक्तीशाली आची इद फम मानेच ची जगन पूल्मती महानगरक होतेल सा अपनस्ली नाम पुकारी बहरी निकले थाची उकर अन्तरिक साहसक विजै आची उकुनु पूलिस समथती ने मागगे ताची बाहरी दुन्याक मोहसे मुक्त बहुक गामवक लोख स्म्रिती जे सत्ते के दारन कर अगजे आची उगरा कुनो दिजितल फाण्ट्टाग तब्पक दरकार नहीं जैक मुदा ये ते यहा एक ता बहुत पेग जीस भिसरी रूल ची की फूलमतिक सहस निस्चित रूपेन आन्तरी कचे औब आपन नाम फुका रही तचे मुदा उए बन्द होटल कमरा से बाहर कुना निकले तचे की केवल नाम लेला से ताला खसे परल नहीं, ताला ता नहीं ख़सल, मुदा... नहीं ख़सल. उते गोप कुमारा इशान दद्तक जे गुप्त सुब्ट्वेर अचे उ कारज करी तचे. उ सुब्ट्वेर फुल्मतिक संकत सुम्या रामाना धन दरी पूछावएद चे. आशम्या पत्रकार सब के लाईव करभाकले कहिच्छती जही से होतलक दरवज्या तुरिल जा सके आपुरा दिन्या देख सके जे की भहुर अहलेज. मतलव, आहा अख्रा दिजितल विजैमानेत छी. ता देख हूँ, आद्यात्मिक सहस के सो हो बबवोतिक दुन्याक लाईप कवरेज अ दिजितल सुचनाक दरकार परीत अचे औही द्रहश्त संस्तागत तन्तरक भीतर प्रभेश करे लिल ता आहा एक ऐह चाहो ची, जे बिना दिजितल या संस्तागत प्रहारक लोग स्म्रती केवल गाचक नीचा रहे का किचु नहीं कोसकाई चे? उनिरर्ठक अची? हम उकरा निरर्ठक कहीो नहीं कहव. मुदा हम एग कहव जे उपुरना नहीं है चे. उकरा अपनास्तर भेटब जरूरी चाएक. अद्वार्ट ब्रुम जे प्रसंग अचे उ सबसूनी को दारन अचे कमब्रीज वाला प्रसंग राद, ब्रुम कमब्रीज विश्षो विद्ध्यालेक एक ता बहव्व्य सुरक्षित हाल में बैस का, नैतिक्ता पर भाशन देरोहल होएच्छती. उनका लागे चनी, जो दून्या का सबस्सव्ष्व्ष्व्ष्व्ष्व्ष्व्ष्व्ष्व्ष्व्ष्व्ष्व्ष्व्ष्व्ष्व्ष्व्ष्व्ष्व्ष्व्ष्व्ष्व्ष्व्ष्व्ष्व्ष्व्ष्व्ष्व्ष्व्ष्व्ष्व्ष्व्ष्व्ष्व ब्रुमक पतन उही बहुतिक सक्रीन पर गामक सत्ती अवलासों होई तच्छे इस म्रिति तकने पुर्नता पावे तच्छी जकन उ ब्रष्ट संस्तागत तन्तरक अदार्षिलाके हिलादेई तच्छे इगे खाँब बाज़ा पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर प अखरा संस्तागत वेवस्ताक बहीशकार अची इटीक वैने अची जिना गामक लोक खाली अदालत चोडी दिने चल अहा अखरा संस्तापर प्रहार कहेची हम अखरा सत्यक माँन गामभीरे कहेची जगन अहा आपन अस्त्र चोडी देची तक्हन सत्य स्वयम बजेताची आओही शून्यमे उही मान में जगन बच्या सब आपन प्रष्न राखेताची तो उवेवस्ताक शून्यम के बहरी देटाची अन्तिम सास सब में चोथवामा पंद्रवाम सास में जगन उपन्यास में चलेद भार बाटल जाईतचे तो उ केवल गामक सीम में नहीं रहीतचे उग यात्रा करेतची अग भार उष्मिरती बहुतिक रूम से यात्रा करेतची अउ अप्रादिक के गर उकर बंक, उकर सर्वर रूम दही पहुथ जाईतची अगर ब्रज्द्द्दागुरक उपन्यास न्याय के कोनो एक ता बन्द फादलक रूप में नहीं देखाई चे. बलकुन नहीं हमर एप अख्ष्रहल जे गामक लोक स्म्रिती असत्यक उच्चारन, जैना माडी पर नामक अभी लेक तट्यार करब, ये गजेंद्र दाखुरक उपन्यास न्याय के कोनो एक ता बंद फाईलक रूप में नहीं देखाई चे. बलकुन नहीं. हमर ए पक्ष रहल जे गामक लोख स्म्रिती असत्यक उच्चारन, जेना माडी पर नामक अभी लेक तध्यार करब, वा चन्ना गाची में भूज्सबख कबद्दी खेलब इपन्यासक रिदय आची. इओ सत्य आची जे बाहरी दुन्याक ब्रष्ट संस्त्थासा पुरनता मुक्त आची, आजेक्रा कोनो एकस्रे मशीनक मोहरक दरकार नहीं आची. आहमर इं निरन्तर इस्थापित करबाक प्रयास रहल, जे इस्म्रिती आपन आस्ली स्वरूप आपुरनता तकने पावे तची, जखन उईही ब्रष्ट संस्थागत तन्त्रिक भित्र प्रवेश करे तची. जखन सत्य, उकर श्क्रीन, उकर आदालत, उकर बेंक खाता में गुसक उकर आदार शिला के हिलादे तची तकने न्याई मुर्ट रूप लेए तची. तोनु द्रूष्टी कोनक अपन अपन गजराई आमहत्व ची. मुदा एक्ता बाद पर हम्रा लोकनेक पूरन सहमती चै, जे लेख्हक न्याय के एक्ता निरन्तर चलएत प्रक्रिया ग्रूप में प्रस्तूत केलनी आचे. उपन्यासक उवाख्यः सास बदलगताची मुदा खेल कतम नहीं होईताची. न्याय कयो एक ता बंद अद्याय नहीं होईताची. इक दम सदी कहलू, आज हम सुर्वात वाला औही मेटिकल धाएक्नोसिस का उप्मा पर वापस जाई, तई उपन्यास औही पुरान बरष्ट एकस्रे मशीन के पुरी तरज़े तची. इदेखावै तची, ज़ सते कहद्टी कतर तुटल आची, अग खागजक रिपोट से नहीं, बलकी उही लोकक स्मुरितिक दधगन से पताचले तची, जिस सत्यके जीवएद आची. मुदा आग बाथ से जुड़ेद, हम यो कहब जे उही रडी के जोडबा के लेल, आगे उई प्लास्टर उई संस्त्धाद वास्ट्विक्ता से भिड़े पडद. बहुद संदर. आई विचार उ तेजक विमर्ष्शक संग, हम्रा लोकने कुनु एक ता पक्छके विजेता गोषित नहीं करव. शूतागन आहा स्वयम इविचार करूजे न्याय की आची? की इई टा बन्द फाई लची? जही पर महर लागल आची? वा इई टा जागल स्म्रती आची? जे पीपरक गाच्छक नीचा सा उठीका कमब्रेज एक स्क्रींदरी पोची जाए तची? इप्रश्न विचारनी आची इप्रश्न हम आहापर चोडइचची गोही सबख भीच जल समादी में आरो बहुत्रास गेराई आची बहुत्रास परत आची जक्रा आहाँ सवयम अनवेशन कषकईची एव पन्यास एक दम जतै नाम पडल जाए उतै कत्ह समाप्त नहीं होई तची, आहा से फेर भेट होईत, नूविचार अन्नव विमर सक्संग. विदालिो.

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