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गङ्गेशक_तत्त्वचिन्तामणि_आ_नव्य-न्यायक_तार्किक_शस्त्रागार.m4a

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Part 8 · VIDEHA MITHILA MAITHILI DISCUSSION CRITICISM SERIES PART 8
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  1. 0:00–0:11इपान्दूलिपी गंगे शुपाद्याए क्रित, तत्व चिन्ता मनी आ नव्यन्याई दर्षनक भिविन्न जटल सिद्दान्तक विस्त्रत मैठ्ली अनुवाद आव विष्लेषन अची.
  2. 0:11–0:22अदियासिक जीवनी आज सगंदार्ष्निक सिद्धानतक भीच्क संक्रमण कतात्मक प्रभाक द्रिष्टी से आरो अदिक सु समबद होवे बाक अवश्च्ता आची.
  3. 0:22–0:29आप, एक दम. देख। समग्रिक आरमभिक हन्द वास्तब में बहुत द्याना कर सक आची.
  4. 0:29–0:36यही में पन्जी प्रबंदख के अटिहासिक विसलेशन अगंगेश के जेवन के कता बडनीक जकान तेल गेला ची.
  5. 0:36–0:40आप उचर्मकारिनी से विवागक आख्यान सहो अचीवेः में.
  6. 0:40–0:41तीक.
  7. 0:41–0:43मुदग कमजोरी एते चैक,
  8. 0:43–0:46जे एही अटिहासिक वरनन के तुरन्त बाद,
  9. 0:46–0:49बिना कोनो गब्शप्पक वप्पूपीछिकाक
  10. 0:49–0:51समगरी अचानक नव्यन्यायक
  11. 0:51–0:53जटिल ग्याम मिमान्सादिस चलाग लगा देताचे.
  12. 0:53–1:03सत्ते कहलों, मனे जखन हमी खण्द पडी रहल चलों, ता हमरा लागल जे हम कोनो जीवनी पड़ेत पड़ेत अचानक से मैं अगनी तक शुत्र पड़ेत लग लग लोग जी.
  13. 1:03–1:05एक दम आहन भुजहाईत आची.
  14. 1:05–1:13मंगल वाद आई प्रामान्या वाद का अतीव तारकिक विष्लेशन सीदे आरंभभवाजायत चे
  15. 1:13–1:16इदोनु क्हन्द अलग �alag tapu jakaam bujayaat chhe
  16. 1:17–1:19जही सा इस प्रष्ट ने होईत चे
  17. 1:19–1:25जे एही विषिष्ट एतिहासिक संदरभ में इजधिल विचार दारा की एकुट्पन भिल
  18. 1:25–1:28तो एही लिल हमर सुजाव एए अची
  19. 1:28–1:30जे एतिहासिक दार्षनिक संकत
  20. 1:30–1:33मने अपिस्तेमिक क्रिसिस का कहन्द के
  21. 1:33–1:38जीवनी के तुरन्त बाद अद्दर्ष्निक सिद्धान्त का आरम्ब सब पहिने राखल जाए.
  22. 1:38–1:39आच्चा.
  23. 1:40–1:44जाहे सा नव्वे नयाय के आवश्षकता स्पष्ट भोसके नहीं.
  24. 1:44–1:45आप.
  25. 1:45–1:49कियक तक गंगेश रातो रात इगनी ती ए भाश्चा नहीं गरलने.
  26. 1:49–1:53न्याई दर्शन्त गंगेस सब रदाब दी पहिले सास्तित्वो में चल
  27. 1:53–1:56महर्षी गोतम आए उदाईनाचारे क समेसा
  28. 1:56–2:02एक दम तग गंगेश के अचानक एक ता नव्व्यल्याई गडबाग आवश्षकता कीएक पडिगेल
  29. 2:02–2:05यही तामा स्रीहर्ष्यक प्रवेश होईता ची
  30. 2:05–2:08ओ, अदवैइत वेदान्त का महान आचार्य?
  31. 2:08–2:09अह, उही
  32. 2:09–2:17स्रीहर्स आपन ग्रन्त, क्हन्टन, क्हन्ट, क्हाद्य, में प्राची न्याय दर्सनक प्रत्यक्ष और अनुमानक परिभासा पर
  33. 2:17–2:20ये तेक तीक्छन प्रहार कैने चला हा,
  34. 2:20–2:23जे प्राची न्यायक आदार हिली गेल चल,
  35. 2:23–2:25उप्रमानित कर देने चला,
  36. 2:25–2:30जे प्राची न्यायक कोनो पारिभासिक सब्दावली दोशर रहित नहीं अचे.
  37. 2:30–2:33उहो, तब एही संकतके कारने,
  38. 2:33–2:36नेयाएक सबक पास कोनो उतर नहीं बचल चल.
  39. 2:36–2:40तब एकर अर्थ इभेल, जे गंगेस के इव्रच्चना,
  40. 2:40–2:43केवल एक ता नव्दर्षन नहीं चल,
  41. 2:43–2:46बलकी अपन दार्षनिक परमपरा के,
  42. 2:46–2:48स्रे हर्षक प्रहार सा बचयवा के लेल,
  43. 2:48–2:51एक ता रक्षात्मक अभ्यान चल.
  44. 2:51–2:57गंगेस के बाद्ध्यबहों को एकता एहन, अचुक, निर्दोष, अगगनेती अबाशा गड्ये पडल,
  45. 2:57–3:00जाही में ब्रमक कोनो गुजाइष नहीं रहें.
  46. 3:00–3:06शत प्रतीषत सही आए ही अटिहासिक आवस्यक्ता के सामगरी में स्पष्ट करवाखशा ही.
  47. 3:06–3:09एकर लेल एक्ता तोस उदारन एब हो सकता ची
  48. 3:09–3:13जे पन्जी प्रबंद आविवाहक अतिहासिक विमर्स के तीक बाद
  49. 3:13–3:16लेक्ख एक्तावा दोटा परिच्छेद जोड थी
  50. 3:16–3:18जे एही संकत के व्याख्या कर आप
  51. 3:18–3:21उताई इस पष्ट काएल जाए
  52. 3:21–3:25जि करनात वन्षक समयक मिद्छलाक बोद्दिक वातवरन कोजन्चल
  53. 3:25–3:29स्रीहर्षक अक्रमन, नियाएक सबखके कुना पंगू का देने चल
  54. 3:29–3:34अद्तकर बाद गंगेश इणव्य नियाएक शस्त्रागार कुना तईयार केलने
  55. 3:34–3:37तकर बादे मंगल्वात कर चर्चा आरंभ के लजाए.
  56. 3:37–3:40इसन्शोदन बहुत प्रभाव कारी रहत,
  57. 3:40–3:42पाथक के इबुजवावा मे आवत,
  58. 3:42–3:48जे गंगेश, जे एट्टिक नापी जोखी कप पारिभाशेक शब्द गडी रहल चती,
  59. 3:48–3:53उकोनु बोद्धिक विलास नहीं हैं थी, बलकी एक ता अववष्ख्ता आची.
  60. 3:53–3:59एक दम सही, पात्ध जकन संकत भुजदत तकनु समदानक महत्वा के से हो आत्मसात का पावत.
  61. 3:59–4:04ती कचे, आब हम सब दोसर महत्वोपों बिन्दुदिस चलिची.
  62. 4:04–4:10जटल तारकिक परिबाशा सब विषेश रूप से व्याप्ती आ उपादिक संदर्ब में
  63. 4:10–4:14अथत दिक अमुर्त शब्दावली पर निरभर करे तच्छी
  64. 4:14–4:18जे बिना व्यावावारेख संदर्बहक पाथक के उलजा सकतची
  65. 4:18–4:23आप आप दर्षनक अनुवाद में एक ता आम समस्से आए जी
  66. 4:23–4:26लेक्ख पारिभाशिक शुद्द्धापर इत्तिक द्यान देच्छती
  67. 4:27–4:30जे पाथक कबोद्गम्यता पाचा चुडजाए तची
  68. 4:30–4:37जिना सामग्री में जखन व्याप्ती पन्चक वा सन्दिग दो पादी के परिबाशा देल जाईता ची
  69. 4:37–4:42उकर तकनी की अर्थ तस्पस्त ची मुदा एक तक्मजोरी आची
  70. 4:42–4:46जे एकर व्यावावारिक प्रभाव पुर्नता आमुर्त रही जाईता ची
  71. 4:46–4:51जिना गंगेशक सिद्धान्त लक्छन में व्याप्ती के परिवाशा ची
  72. 4:51–4:54साद्द्या बावक अदिकरन में हे तुक अव्रित्ती
  73. 4:54–4:58मेत्छिली अ संस्क्रित के द्रिष्टी से एक दम सती कनवाद ची
  74. 4:58–5:03मुदा सदारन पातक एक्रा अपन तरक-वितरक में कोना उप्योख करत इन नहीं कुजाई तची.
  75. 5:03–5:07जखन हम एक हन्द पडी रहल चल हूँ, ता हम्राई लागल,
  76. 5:07–5:11जे हम कोनु जंगल के बहुत विस्त्रित नक्षा देखी रहल ची.
  77. 5:11–5:12नक्षा?
  78. 5:12–5:18अही नक्षा पर बनल रेखा सब, अक्षाश अदिशान्तरक चिन्ः बरस पष्ट बुजाईत छी,
  79. 5:18–5:23मुदा जखन हम वास्तो में उही जंगल के भीटर प्रवेश करेग छी,
  80. 5:23–5:29तगाज पाता कातक भीच रस्ता कोजब सर्वता भिन अजजतेल अनुबहव होईत छी.
  81. 5:29–5:33इपरिबाशा सब मात्र एक्ता नक्षा जका आचे
  82. 5:33–5:35इशाद्रष्श बहुत सती कचे
  83. 5:35–5:37उपादिके जे अव्दारना देलगेल आची
  84. 5:37–5:39उब भद क्रान्तिकारी आचे
  85. 5:39–5:41मुदा आमुर्तताक कारने
  86. 5:41–5:43उकर दार कुंदित बहुगे लचे
  87. 5:43–5:46तो एक्रा सुदारवाक लेल
  88. 5:46–5:48आख की सुजाव अच्छी?
  89. 5:48–5:50हम सब एह आमुर्त नक्षाके
  90. 5:50–5:53एक ता व्यवावाहारेक मार्क दर्षक में
  91. 5:53–5:54कोना बदली सकए ची?
  92. 5:54–5:57हमर्सुजाव यए ची
  93. 5:57–5:59जे प्रतिएक आमुर्त परी भाशाक सन
  94. 5:59–6:02एक ता अस्पष्ट, व्यवाहारेक
  95. 6:02–6:08आदूनिक द्रिश्टान्त जोडल जाए, पारमपरिक उदाहरनक प्रत्येक चरन के विस्तार समजावल जाए,
  96. 6:08–6:15जाहे से य अस्पष्ट भहुसाके, जे य सिद्धान्त वास्त्विक जीवनक तर्क में कुना काज करे तची.
  97. 6:15–6:19की आहा एक रा एक तोस उदारन सा समजा सकै ची
  98. 6:19–6:20भिलकुल
  99. 6:20–6:22समगरी में संदिक दो पादी
  100. 6:22–6:24कई एक ता कहन्द आची
  101. 6:24–6:26जटे काक ख्रिष्ना आची
  102. 6:26–6:27मित्र तनेत्व कारने
  103. 6:27–6:29आशाक पाक जन्यत
  104. 6:29–6:32माने साग खेवाक कारनक उदारन दिल गे लगची
  105. 6:32–6:39आप, मुदा अत्तेई मात्र एक ता द्रिष्टान्त करूप में प्रस्तूत अची बहुत विस्तार नहीं आची.
  106. 6:39–6:45तएहे द्रिष्टान्त के आदार बनाउ, लेक्वक के के खेल उदारड़ दख नहीं चोडवाक चाही.
  107. 6:45–6:48ये ते अस्पष्ट रूप से समजगाई वावश्षक अची
  108. 6:48–6:53जि साग खेनाई कोना कारिपनक लेल एक ता संदिगद अपादी अची
  109. 6:53–6:54अच्छ?
  110. 6:54–7:00एक रा चरनबद लिखू जेना कुनो वकील अदालत मे अपन तरक कें स्पष्ट करे थो
  111. 7:00–7:05नव्यन्याय एकता दार्षनिक अदालत चेक, जताई बहस भारहल अची.
  112. 7:05–7:09वकिल वलाई द्रिष्टी कोन हमरा बहुत रुची कर लागल.
  113. 7:09–7:12तई अदालत में कोना काछ करत?
  114. 7:12–7:15कलपना करुजे विपक्षी वकिल कहेत अची,
  115. 7:15–7:18जज साहेब यी बच्चा कारी अची,
  116. 7:18–7:24के था यी आमुक मित्रक पुट्र आफी, मित्रक सब पुट्र कारी आफी, ता यी हो कारी आफी.
  117. 7:24–7:32ता यी ता यी एक ता व्याप्ती स्थापित कायल गेल, जे मित्रक पुट्र हो में, आख कारी हो में में समबंद है.
  118. 7:32–7:39एक्दम आब नव्यन्यायक वकिल उठाइत अची असन्दिक्द हो पादिए का अस्ट्र चलवाइत अची
  119. 7:39–7:45उखेट अची तह्रु की इबच्चा कारी मित्रक पुत्र हो में के कारने अची
  120. 7:45–7:53वा एकर करन्या आची, जे एकर माए गरभवती रहबाक समय, बहुत रास शाक मने सागखखगगगी न चली हा.
  121. 7:53–8:01ओ, उ, त, ए त, सागगगगनाए उ उपादी आची, जे साद्द्द्या माने कारिपन कत व्यापक आची,
  122. 8:01–8:05मुदा हे तु माने मित्रक पुत्र कव्यापक नहीं अची
  123. 8:05–8:10हा, आई तरक में एक ता सन्देइ उपन् कदेद अची
  124. 8:10–8:12जे कारिपन मित्रक पुत्र होमे से अची
  125. 8:12–8:15वा साग खेबा कारन से अची
  126. 8:15–8:18आज जते सन्देइ उपन् भईगेल
  127. 8:18–8:22उते पूर्बस्तापित व्याप्ती तत्काल्खन्दिद बजाएचे
  128. 8:22–8:24विपक्षिक तर्कख खसी पडाएचे
  129. 8:24–8:29इक्दम जो लेक्ख के ही प्रकारें तर्कख विच्छेदन कए कसम्जब्ती
  130. 8:29–8:36तद्सन्दिक द्वपादि, आमुर्त सिद्दान्त सब भदली के एक व्यावाहारेक तारकिक अस्ट्र बनी जाएत.
  131. 8:36–8:38ये बहुत स्पष्ट भगेल.
  132. 8:38–8:43एही चरन बद्द्विष्लेष्ट्स पात्ख के उ जंगल क नक्षाक संख संग,
  133. 8:43–8:46जंगल क भित्रक रास्ता से हो दिखाई बलागे चे
  134. 8:46–8:47सही कब
  135. 8:47–8:52आब हम सब सामगरी क्ते सर और अंते महत्वपून खंद दिस चलेच ची
  136. 8:52–8:58मीमान्सा और नयदर्षन के भीच क तुलनात्मक विष्लेशन बहुत विस्त्री तची
  137. 8:58–9:01मुदा एही में एक ता एहान निषकर्ष्क अबहाव अची,
  138. 9:01–9:05जे ये सपष्ट करे, जि नयाई दर्षनक तर्क अंद्त,
  139. 9:05–9:08की एक अदिक प्रभावी अस्व्रेष्ट सिद्द्भाईल?
  140. 9:08–9:10हम जोगन एक रहांद पडी रहाल चलों,
  141. 9:10–9:12ता हम्रा लागल जे लेक्हक,
  142. 9:12–9:16बहुत महनत सा पूर्वापक्ष अद्द्दपक्ष दूनूराक्लनी आचे
  143. 9:16–9:18मुदा इएक ता बआग कम्जोरी आची
  144. 9:18–9:20जे विष्लेशन अदूरा भुजाईत आची
  145. 9:20–9:24राद, सामगरी में प्रमा कोना उत्पन्न होत आची
  146. 9:24–9:31ख्यातिवाद आ आर्था पत्ती पर मिमान्सक अनयाएक के विचार विस्तार सदेलगे लची.
  147. 9:31–9:34मुदा इत न्याय दर्षनक ग्रन्त थेक,
  148. 9:34–9:39एही लंबा विमर्ष्के अंप में पाथक के ये सपष्ट नहीं भहप अबएत चेक,
  149. 9:39–9:42जे नव्यन्याय अंततद भाजी कोना मारल
  150. 9:42–9:45हमर विचार सां ख्याती वाद क्हन्द में
  151. 9:45–9:48इबात बहुत स्पष्ट रूपे न उबर के आवेत अची
  152. 9:48–9:52सीप के चान्दी भुजवाग जे पारमपर एक उदारन अची
  153. 9:52–9:55उो में सामगरी मिमाशक का अख्याती वाद
  154. 9:55–10:02अगर प्रतिकार में नयाएक कहे चति, जे ब्रहम कोनो निश्क्रिय अवस्त्ता नहीं अच्छी,
  155. 10:02–10:09बलकी एक्ता सक्क्रिय मान्सिक प्रक्रिया जतै हम सब चान्दी पनके सीप प्र आरोपित करे च्छी.
  156. 10:09–10:13एक्रा अन्निथा ख्याती कहल जाएत च्छा थी.
  157. 10:13–10:15अगरा अन्नेथा क्याती कहल जाईताची
  158. 10:15–10:18समगरी में इदोनो विष्लेशन प्रस्तूत आची
  159. 10:18–10:22मुदा पाथक के ईबुजबा में और सहाईताक आवश्शकता आची
  160. 10:22–10:27जे गंगेश क इसिद्धान्त मी मान्सक के सिद्धान्त सश्रेष्ट किए कची
  161. 10:27–10:57अगर बादख लगा बादख लगा लगा लगा लगा लगा लगा लगा लगा लगा लगा लगा लगा लगा लगा लगा लगा लगा लगा लगा लगा लगा लगा लगा लगा लगा लगा लगा लगा लगा लगा लगा लगा लगा लगा लगा लगा लगा लगा लगा लग
  162. 10:57–11:03हमर सुजहाव य आची, जे प्रतेक पैग विवादक अंत में एक ता संख्षिप्त निशकष जोडल जाए,
  163. 11:03–11:11जे अस्पष्त रूपसं नव्य नयायाक लागव आव विषिष्त्ता का सिद्दानतक विजाय के अस्थापित कराए,
  164. 11:11–11:15नव्य न्याक प्रान एही लागो मे बस़े चेक
  165. 11:15–11:45अच्छा लागव सिद्धान्त यी उईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईई
  166. 11:45–11:49अद्दापत्ती खन्द एकर लेल सरवोत क्रिष्ट उदारन अची
  167. 11:50–11:54सामगरी मे देव्दत्तक जीवित मुदा गार पर अनुपस्तित
  168. 11:55–11:56रहा बाक चर्चा आची
  169. 11:56–12:03मिमाम सा कहेच छतिन, जे देव्दत जीवित छी, मुदा अ गर में नहीं ता इे एक ता विरोदा बहास अची.
  170. 12:03–12:12आँ, उखहेच छतिन जे जाज जीवित अची अग गर में नहीं अची, ता एकर अर्था पत्ती इभेल जे उबाहर अची.
  171. 12:12–12:16मुदा नयाएक एही नव प्रमाण के नहीं माने च्छतिन
  172. 12:16–12:17एक दम नहीं माने च्छतिन
  173. 12:17–12:23नयाएक फ्छतिन जे हमरा सब के कोन नव प्रमाण ग़वाक अवषकता नाए च्छी
  174. 12:23–12:26नव प्रमाण ग़नाए ग़वव अच्छी
  175. 12:26–12:28माने अनावष्षक जटिलता
  176. 12:28–12:29तीक
  177. 12:29–12:59गंगेश कहे चत्फिन जे हम आपन पुरान केवल व्यतिरे की अनुमान से इस सिद्ध कोसकच्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्�
  178. 12:59–13:05उ लिक्तिन एताई नव्यन्यायक लागव सिद्धान तक स्रेष्ट्ता प्रमानित होईता ची,
  179. 13:05–13:08कि एक तई बिना कोन नव्प्रमाना कखल्पना कैने,
  180. 13:08–13:13पूरन के तारकिक सन्रचना से जटिल से जटिल समस्याक समाधान कै देचे.
  181. 13:13–13:14बलकुल!
  182. 13:14–13:24इग्ता वाक्य पाथक के इबुजभामे मदद करत जे गंगेशक तरक कीयके ते क्रान्तिकारी चल, आम मी मान्सा पर हूंकर विजै कोना भेल,
  183. 13:24–13:34जई लाग़व बनाम गवरव कणिषकर्ष प्रतेक विवादित खंडक अंप में जुडी जातत, ता इप पान्दूलिपी केवल एक ता अनुवाद नहीं रोजाएत.
  184. 13:34–13:41बल की यह एक उत्क्रिष्ट दार्षनिक भाश्या बनी जायत जे पात्रत के दिशान उद्धेश देटची
  185. 13:41–13:42एक दम
  186. 13:42–13:47यह वास्तव में सम्पून सामगरी के द्रिष्टिकोन के आवर अदिक तीख्षन का देट
  187. 13:47–13:50तए ही सम्पून विमर्ष के समेटाएत
  188. 13:50–13:54रहां, और बादिया उपादीजका अमुर्थ परिवाशक सब के,
  189. 13:54–13:57केवल तकनी की शब्दावली में नहीं चोडी,
  190. 13:57–14:00बलकी अदालत में बहेस करेत वकील जका,
  191. 14:00–14:03चरन बद उदाहरन सब आप प्रिषेद सब परष्ट करव.
  192. 14:03–14:08जएसा गंगेशक नव्वेनाय गडवाक यतिहासिक दबाओ पाथक बूजी सके.
  193. 14:08–14:15दो सर व्याप्तिया उपादीजका अमुर्त परिवाशक सब के केवल तकनी की शब्दावली में नई चोडी.
  194. 14:15–14:21बल की अदालत में बहेस करेत वकीलजका चरन बद उदाहरन सा समजाएप.
  195. 14:33–14:37अपात्ख बोद गम्मिता के एक तन्व उचाई पर लोजाएत.
  196. 14:38–14:45हम्रा लागत अची, जे अनुवादक इग कार्य, पहिने साँ एक दख्यंत गमभीर अप्रश्शन्सन्य प्रयास ची,
  197. 14:45–14:49पहिने सां एक दव्यन्त गंभीर अप्रशन्सनीय प्रयास ची
  198. 14:50–14:52एही में केवल की चु सन्रचनात्मक
  199. 14:52–14:55अव्याख्यात्मक सन्तुलनक आविष्च्ता ची.
  200. 14:55–14:58हम सब शोता के आमन्त्रित करएत ची
  201. 14:58–15:01जे ओ आपन आही महत्पून समग्री में
  202. 15:01–15:06इसन्शोदन कईकर आवर अदिक समीख्षा लेल हम्रा सब लग पुन्ह पथाब दि.
  203. 15:07–15:12जखन आहा आमुर्त परिभाशा सब में व्यवाहारेक द्रिष्टान्त कर रंग भरब
  204. 15:12–15:16आ अईतिहासिक संकत के दर्शनक उप्पती क संग जोडब
  205. 15:16–15:22तकन यी पन्दूलीपी मात्र एक ता जंगल का अमुर्त नक्षा नहीं रहे जाएत
  206. 15:22–15:26बलकी पाथकक लेल उही गनेर जंगल में चल्बाक
  207. 15:26–15:29आवोकर दार्षनिक सूंदरे के सक्षात अनुबहव कर्बाक
  208. 15:29–15:32एक तस पष्ट रस्ता बनी जायत
  209. 15:32–15:34दियाना कर्शन लेल दहनेवाद

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इपान्दूलिपी गंगे शुपाद्याए क्रित, तत्व चिन्ता मनी आ नव्यन्याई दर्षनक भिविन्न जटल सिद्दान्तक विस्त्रत मैठ्ली अनुवाद आव विष्लेषन अची. अदियासिक जीवनी आज सगंदार्ष्निक सिद्धानतक भीच्क संक्रमण कतात्मक प्रभाक द्रिष्टी से आरो अदिक सु समबद होवे बाक अवश्च्ता आची. आप, एक दम. देख। समग्रिक आरमभिक हन्द वास्तब में बहुत द्याना कर सक आची. यही में पन्जी प्रबंदख के अटिहासिक विसलेशन अगंगेश के जेवन के कता बडनीक जकान तेल गेला ची. आप उचर्मकारिनी से विवागक आख्यान सहो अचीवेः में. तीक. मुदग कमजोरी एते चैक, जे एही अटिहासिक वरनन के तुरन्त बाद, बिना कोनो गब्शप्पक वप्पूपीछिकाक समगरी अचानक नव्यन्यायक जटिल ग्याम मिमान्सादिस चलाग लगा देताचे. सत्ते कहलों, मனे जखन हमी खण्द पडी रहल चलों, ता हमरा लागल जे हम कोनो जीवनी पड़ेत पड़ेत अचानक से मैं अगनी तक शुत्र पड़ेत लग लग लोग जी. एक दम आहन भुजहाईत आची. मंगल वाद आई प्रामान्या वाद का अतीव तारकिक विष्लेशन सीदे आरंभभवाजायत चे इदोनु क्हन्द अलग �alag tapu jakaam bujayaat chhe जही सा इस प्रष्ट ने होईत चे जे एही विषिष्ट एतिहासिक संदरभ में इजधिल विचार दारा की एकुट्पन भिल तो एही लिल हमर सुजाव एए अची जे एतिहासिक दार्षनिक संकत मने अपिस्तेमिक क्रिसिस का कहन्द के जीवनी के तुरन्त बाद अद्दर्ष्निक सिद्धान्त का आरम्ब सब पहिने राखल जाए. आच्चा. जाहे सा नव्वे नयाय के आवश्षकता स्पष्ट भोसके नहीं. आप. कियक तक गंगेश रातो रात इगनी ती ए भाश्चा नहीं गरलने. न्याई दर्शन्त गंगेस सब रदाब दी पहिले सास्तित्वो में चल महर्षी गोतम आए उदाईनाचारे क समेसा एक दम तग गंगेश के अचानक एक ता नव्व्यल्याई गडबाग आवश्षकता कीएक पडिगेल यही तामा स्रीहर्ष्यक प्रवेश होईता ची ओ, अदवैइत वेदान्त का महान आचार्य? अह, उही स्रीहर्स आपन ग्रन्त, क्हन्टन, क्हन्ट, क्हाद्य, में प्राची न्याय दर्सनक प्रत्यक्ष और अनुमानक परिभासा पर ये तेक तीक्छन प्रहार कैने चला हा, जे प्राची न्यायक आदार हिली गेल चल, उप्रमानित कर देने चला, जे प्राची न्यायक कोनो पारिभासिक सब्दावली दोशर रहित नहीं अचे. उहो, तब एही संकतके कारने, नेयाएक सबक पास कोनो उतर नहीं बचल चल. तब एकर अर्थ इभेल, जे गंगेस के इव्रच्चना, केवल एक ता नव्दर्षन नहीं चल, बलकी अपन दार्षनिक परमपरा के, स्रे हर्षक प्रहार सा बचयवा के लेल, एक ता रक्षात्मक अभ्यान चल. गंगेस के बाद्ध्यबहों को एकता एहन, अचुक, निर्दोष, अगगनेती अबाशा गड्ये पडल, जाही में ब्रमक कोनो गुजाइष नहीं रहें. शत प्रतीषत सही आए ही अटिहासिक आवस्यक्ता के सामगरी में स्पष्ट करवाखशा ही. एकर लेल एक्ता तोस उदारन एब हो सकता ची जे पन्जी प्रबंद आविवाहक अतिहासिक विमर्स के तीक बाद लेक्ख एक्तावा दोटा परिच्छेद जोड थी जे एही संकत के व्याख्या कर आप उताई इस पष्ट काएल जाए जि करनात वन्षक समयक मिद्छलाक बोद्दिक वातवरन कोजन्चल स्रीहर्षक अक्रमन, नियाएक सबखके कुना पंगू का देने चल अद्तकर बाद गंगेश इणव्य नियाएक शस्त्रागार कुना तईयार केलने तकर बादे मंगल्वात कर चर्चा आरंभ के लजाए. इसन्शोदन बहुत प्रभाव कारी रहत, पाथक के इबुजवावा मे आवत, जे गंगेश, जे एट्टिक नापी जोखी कप पारिभाशेक शब्द गडी रहल चती, उकोनु बोद्धिक विलास नहीं हैं थी, बलकी एक ता अववष्ख्ता आची. एक दम सही, पात्ध जकन संकत भुजदत तकनु समदानक महत्वा के से हो आत्मसात का पावत. ती कचे, आब हम सब दोसर महत्वोपों बिन्दुदिस चलिची. जटल तारकिक परिबाशा सब विषेश रूप से व्याप्ती आ उपादिक संदर्ब में अथत दिक अमुर्त शब्दावली पर निरभर करे तच्छी जे बिना व्यावावारेख संदर्बहक पाथक के उलजा सकतची आप आप दर्षनक अनुवाद में एक ता आम समस्से आए जी लेक्ख पारिभाशिक शुद्द्धापर इत्तिक द्यान देच्छती जे पाथक कबोद्गम्यता पाचा चुडजाए तची जिना सामग्री में जखन व्याप्ती पन्चक वा सन्दिग दो पादी के परिबाशा देल जाईता ची उकर तकनी की अर्थ तस्पस्त ची मुदा एक तक्मजोरी आची जे एकर व्यावावारिक प्रभाव पुर्नता आमुर्त रही जाईता ची जिना गंगेशक सिद्धान्त लक्छन में व्याप्ती के परिवाशा ची साद्द्या बावक अदिकरन में हे तुक अव्रित्ती मेत्छिली अ संस्क्रित के द्रिष्टी से एक दम सती कनवाद ची मुदा सदारन पातक एक्रा अपन तरक-वितरक में कोना उप्योख करत इन नहीं कुजाई तची. जखन हम एक हन्द पडी रहल चल हूँ, ता हम्राई लागल, जे हम कोनु जंगल के बहुत विस्त्रित नक्षा देखी रहल ची. नक्षा? अही नक्षा पर बनल रेखा सब, अक्षाश अदिशान्तरक चिन्ः बरस पष्ट बुजाईत छी, मुदा जखन हम वास्तो में उही जंगल के भीटर प्रवेश करेग छी, तगाज पाता कातक भीच रस्ता कोजब सर्वता भिन अजजतेल अनुबहव होईत छी. इपरिबाशा सब मात्र एक्ता नक्षा जका आचे इशाद्रष्श बहुत सती कचे उपादिके जे अव्दारना देलगेल आची उब भद क्रान्तिकारी आचे मुदा आमुर्तताक कारने उकर दार कुंदित बहुगे लचे तो एक्रा सुदारवाक लेल आख की सुजाव अच्छी? हम सब एह आमुर्त नक्षाके एक ता व्यवावाहारेक मार्क दर्षक में कोना बदली सकए ची? हमर्सुजाव यए ची जे प्रतिएक आमुर्त परी भाशाक सन एक ता अस्पष्ट, व्यवाहारेक आदूनिक द्रिश्टान्त जोडल जाए, पारमपरिक उदाहरनक प्रत्येक चरन के विस्तार समजावल जाए, जाहे से य अस्पष्ट भहुसाके, जे य सिद्धान्त वास्त्विक जीवनक तर्क में कुना काज करे तची. की आहा एक रा एक तोस उदारन सा समजा सकै ची भिलकुल समगरी में संदिक दो पादी कई एक ता कहन्द आची जटे काक ख्रिष्ना आची मित्र तनेत्व कारने आशाक पाक जन्यत माने साग खेवाक कारनक उदारन दिल गे लगची आप, मुदा अत्तेई मात्र एक ता द्रिष्टान्त करूप में प्रस्तूत अची बहुत विस्तार नहीं आची. तएहे द्रिष्टान्त के आदार बनाउ, लेक्वक के के खेल उदारड़ दख नहीं चोडवाक चाही. ये ते अस्पष्ट रूप से समजगाई वावश्षक अची जि साग खेनाई कोना कारिपनक लेल एक ता संदिगद अपादी अची अच्छ? एक रा चरनबद लिखू जेना कुनो वकील अदालत मे अपन तरक कें स्पष्ट करे थो नव्यन्याय एकता दार्षनिक अदालत चेक, जताई बहस भारहल अची. वकिल वलाई द्रिष्टी कोन हमरा बहुत रुची कर लागल. तई अदालत में कोना काछ करत? कलपना करुजे विपक्षी वकिल कहेत अची, जज साहेब यी बच्चा कारी अची, के था यी आमुक मित्रक पुट्र आफी, मित्रक सब पुट्र कारी आफी, ता यी हो कारी आफी. ता यी ता यी एक ता व्याप्ती स्थापित कायल गेल, जे मित्रक पुट्र हो में, आख कारी हो में में समबंद है. एक्दम आब नव्यन्यायक वकिल उठाइत अची असन्दिक्द हो पादिए का अस्ट्र चलवाइत अची उखेट अची तह्रु की इबच्चा कारी मित्रक पुत्र हो में के कारने अची वा एकर करन्या आची, जे एकर माए गरभवती रहबाक समय, बहुत रास शाक मने सागखखगगगी न चली हा. ओ, उ, त, ए त, सागगगगनाए उ उपादी आची, जे साद्द्द्या माने कारिपन कत व्यापक आची, मुदा हे तु माने मित्रक पुत्र कव्यापक नहीं अची हा, आई तरक में एक ता सन्देइ उपन् कदेद अची जे कारिपन मित्रक पुत्र होमे से अची वा साग खेबा कारन से अची आज जते सन्देइ उपन् भईगेल उते पूर्बस्तापित व्याप्ती तत्काल्खन्दिद बजाएचे विपक्षिक तर्कख खसी पडाएचे इक्दम जो लेक्ख के ही प्रकारें तर्कख विच्छेदन कए कसम्जब्ती तद्सन्दिक द्वपादि, आमुर्त सिद्दान्त सब भदली के एक व्यावाहारेक तारकिक अस्ट्र बनी जाएत. ये बहुत स्पष्ट भगेल. एही चरन बद्द्विष्लेष्ट्स पात्ख के उ जंगल क नक्षाक संख संग, जंगल क भित्रक रास्ता से हो दिखाई बलागे चे सही कब आब हम सब सामगरी क्ते सर और अंते महत्वपून खंद दिस चलेच ची मीमान्सा और नयदर्षन के भीच क तुलनात्मक विष्लेशन बहुत विस्त्री तची मुदा एही में एक ता एहान निषकर्ष्क अबहाव अची, जे ये सपष्ट करे, जि नयाई दर्षनक तर्क अंद्त, की एक अदिक प्रभावी अस्व्रेष्ट सिद्द्भाईल? हम जोगन एक रहांद पडी रहाल चलों, ता हम्रा लागल जे लेक्हक, बहुत महनत सा पूर्वापक्ष अद्द्दपक्ष दूनूराक्लनी आचे मुदा इएक ता बआग कम्जोरी आची जे विष्लेशन अदूरा भुजाईत आची राद, सामगरी में प्रमा कोना उत्पन्न होत आची ख्यातिवाद आ आर्था पत्ती पर मिमान्सक अनयाएक के विचार विस्तार सदेलगे लची. मुदा इत न्याय दर्षनक ग्रन्त थेक, एही लंबा विमर्ष्के अंप में पाथक के ये सपष्ट नहीं भहप अबएत चेक, जे नव्यन्याय अंततद भाजी कोना मारल हमर विचार सां ख्याती वाद क्हन्द में इबात बहुत स्पष्ट रूपे न उबर के आवेत अची सीप के चान्दी भुजवाग जे पारमपर एक उदारन अची उो में सामगरी मिमाशक का अख्याती वाद अगर प्रतिकार में नयाएक कहे चति, जे ब्रहम कोनो निश्क्रिय अवस्त्ता नहीं अच्छी, बलकी एक्ता सक्क्रिय मान्सिक प्रक्रिया जतै हम सब चान्दी पनके सीप प्र आरोपित करे च्छी. एक्रा अन्निथा ख्याती कहल जाएत च्छा थी. अगरा अन्नेथा क्याती कहल जाईताची समगरी में इदोनो विष्लेशन प्रस्तूत आची मुदा पाथक के ईबुजबा में और सहाईताक आवश्शकता आची जे गंगेश क इसिद्धान्त मी मान्सक के सिद्धान्त सश्रेष्ट किए कची अगर बादख लगा बादख लगा लगा लगा लगा लगा लगा लगा लगा लगा लगा लगा लगा लगा लगा लगा लगा लगा लगा लगा लगा लगा लगा लगा लगा लगा लगा लगा लगा लगा लगा लगा लगा लगा लगा लगा लगा लगा लगा लगा लग हमर सुजहाव य आची, जे प्रतेक पैग विवादक अंत में एक ता संख्षिप्त निशकष जोडल जाए, जे अस्पष्त रूपसं नव्य नयायाक लागव आव विषिष्त्ता का सिद्दानतक विजाय के अस्थापित कराए, नव्य न्याक प्रान एही लागो मे बस़े चेक अच्छा लागव सिद्धान्त यी उईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईई अद्दापत्ती खन्द एकर लेल सरवोत क्रिष्ट उदारन अची सामगरी मे देव्दत्तक जीवित मुदा गार पर अनुपस्तित रहा बाक चर्चा आची मिमाम सा कहेच छतिन, जे देव्दत जीवित छी, मुदा अ गर में नहीं ता इे एक ता विरोदा बहास अची. आँ, उखहेच छतिन जे जाज जीवित अची अग गर में नहीं अची, ता एकर अर्था पत्ती इभेल जे उबाहर अची. मुदा नयाएक एही नव प्रमाण के नहीं माने च्छतिन एक दम नहीं माने च्छतिन नयाएक फ्छतिन जे हमरा सब के कोन नव प्रमाण ग़वाक अवषकता नाए च्छी नव प्रमाण ग़नाए ग़वव अच्छी माने अनावष्षक जटिलता तीक गंगेश कहे चत्फिन जे हम आपन पुरान केवल व्यतिरे की अनुमान से इस सिद्ध कोसकच्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्� उ लिक्तिन एताई नव्यन्यायक लागव सिद्धान तक स्रेष्ट्ता प्रमानित होईता ची, कि एक तई बिना कोन नव्प्रमाना कखल्पना कैने, पूरन के तारकिक सन्रचना से जटिल से जटिल समस्याक समाधान कै देचे. बलकुल! इग्ता वाक्य पाथक के इबुजभामे मदद करत जे गंगेशक तरक कीयके ते क्रान्तिकारी चल, आम मी मान्सा पर हूंकर विजै कोना भेल, जई लाग़व बनाम गवरव कणिषकर्ष प्रतेक विवादित खंडक अंप में जुडी जातत, ता इप पान्दूलिपी केवल एक ता अनुवाद नहीं रोजाएत. बल की यह एक उत्क्रिष्ट दार्षनिक भाश्या बनी जायत जे पात्रत के दिशान उद्धेश देटची एक दम यह वास्तव में सम्पून सामगरी के द्रिष्टिकोन के आवर अदिक तीख्षन का देट तए ही सम्पून विमर्ष के समेटाएत रहां, और बादिया उपादीजका अमुर्थ परिवाशक सब के, केवल तकनी की शब्दावली में नहीं चोडी, बलकी अदालत में बहेस करेत वकील जका, चरन बद उदाहरन सब आप प्रिषेद सब परष्ट करव. जएसा गंगेशक नव्वेनाय गडवाक यतिहासिक दबाओ पाथक बूजी सके. दो सर व्याप्तिया उपादीजका अमुर्त परिवाशक सब के केवल तकनी की शब्दावली में नई चोडी. बल की अदालत में बहेस करेत वकीलजका चरन बद उदाहरन सा समजाएप. अपात्ख बोद गम्मिता के एक तन्व उचाई पर लोजाएत. हम्रा लागत अची, जे अनुवादक इग कार्य, पहिने साँ एक दख्यंत गमभीर अप्रश्शन्सन्य प्रयास ची, पहिने सां एक दव्यन्त गंभीर अप्रशन्सनीय प्रयास ची एही में केवल की चु सन्रचनात्मक अव्याख्यात्मक सन्तुलनक आविष्च्ता ची. हम सब शोता के आमन्त्रित करएत ची जे ओ आपन आही महत्पून समग्री में इसन्शोदन कईकर आवर अदिक समीख्षा लेल हम्रा सब लग पुन्ह पथाब दि. जखन आहा आमुर्त परिभाशा सब में व्यवाहारेक द्रिष्टान्त कर रंग भरब आ अईतिहासिक संकत के दर्शनक उप्पती क संग जोडब तकन यी पन्दूलीपी मात्र एक ता जंगल का अमुर्त नक्षा नहीं रहे जाएत बलकी पाथकक लेल उही गनेर जंगल में चल्बाक आवोकर दार्षनिक सूंदरे के सक्षात अनुबहव कर्बाक एक तस पष्ट रस्ता बनी जायत दियाना कर्शन लेल दहनेवाद

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