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गङ्गेशक_नव्य_न्याय_आ_सत्यक_प्रमाण.m4a

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Part 8 · VIDEHA MITHILA MAITHILI DISCUSSION CRITICISM SERIES PART 8
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  1. 0:00–0:04समाल्ये तहाँ जखन कोनो मेटिकल डाएक्नोसिस का बात होगत चाई
  2. 0:04–0:07तो उते एक तब बहुत सब श्ष्ट ताक उम्मीद रहात चे
  3. 0:07–0:09मैं एक दम एंजीनीरींग जगा
  4. 0:09–0:12आप उते अनुमानक कोनो जगा नहीं रहात चेक
  5. 0:12–0:13एक दम
  6. 0:13–0:16मनी लिया जे कोन वेक्तिक हात तूटी गला,
  7. 0:16–0:18तो एकस्रे मशीन में वो तूटल उजज़रेखा,
  8. 0:18–0:20साव साव दिखा जाईता जी.
  9. 0:20–0:23अ दोक्तर अख्रा दिखा का के चतिन जे दिखु,
  10. 0:23–0:24इए ते आचे.
  11. 0:24–0:27सत्यमे, इप पूरन रूपेन बाईनरी आची.
  12. 0:27–0:33मने, हद्दी टुटल अच्छे, वर नहीं टुटल अच्छे, बीचक कोनो भाट नहीं.
  13. 0:33–0:34आख आख
  14. 0:34–0:40इजे एस पष्टता अच्छे ना, इध हमरा सब के मस्तिष्क के बहुत आराम दायक बुजाई तची.
  15. 0:40–0:46कारन, दिमाग के चीज एक दम सबष्ट आवर्गी क्रत्रूप में देखब नीक लागे चैक.
  16. 0:46–0:50मुदा जखन ग्यान और सत्टेक दार्षनिक दुन्या में प्रवेश होईत जे,
  17. 0:50–0:53ता अचाना को एकस्रे मशीन काजकर बंद कर दे थे.
  18. 0:53–0:54इक दम तूट जाएत छे अ प्छीन
  19. 0:54–0:55विल्कुल
  20. 0:55–0:58मनुश्छे के एक आईन परिद्रुष्श मे आभी जाएत छे
  21. 0:58–1:01जे इमान्दारी से कही तब रहुत अस्पष्ट छे
  22. 1:01–1:04सत्ते की आची अब्रहम की आची
  23. 1:04–1:07एक अर निनने लेब उत्बस सहज नही रही लै ड़ची
  24. 1:07–1:37जत्बाओ रद्दिक अच्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च
  25. 1:37–1:42बिल्ल्कुल नहीं हम्रा सब के एई गज़र विवेचन केंद्र में आची,
  26. 1:42–1:47गजद्र ताकौल दबारा मेठिली में अनुधेत चोड़हमा शताभ्दिक महान दार्ष्निक,
  27. 1:47–1:51गंगेश आपा द्याएक रिद गरन्त तत्व चिंता मने.
  28. 1:51–1:53एक ता मील पातर.
  29. 1:53–2:05ये मित्लाक उ बड़िक क्रान्ती ची एक जे नव्यन न्याय माने नुतन तर्क्षास्त्र क्स थापना के लग, समपुन भारती या दर्शनक दिशा बदल्डलग.
  30. 2:05–2:10जेक्रा अंग्रेजी में एक आपिस्टिमोलोगी वा ग्यान मीमान सा कहल जाईताची,
  31. 2:10–2:12उकर एसर वोच शिखर आची.
  32. 2:12–2:15ता आई हमरे सब का जे य विवेचन आची,
  33. 2:15–2:17तकर मुख्य काज य भुजावाची,
  34. 2:17–2:19जे हमरा सब जानेच छी,
  35. 2:19–2:23उकर सत्तिता वास्तों में कोना प्रमानित होईता ची
  36. 2:23–2:29अ कोना गंगेशक इतर्क प्रनाली ब्रहम असत्यक भीच कभेद स्पष्ट कर अगी ता ची
  37. 2:29–2:34सीदे गंगेशक सिद्धान्त में प्रवेश करभासा पहले
  38. 2:34–2:40पैने एी भूजब आवश्यक अची, जे चोदाम शताबदिक मित्ला में आखिर भूगी रहल चल,
  39. 2:40–2:46आहन की संकत आभी गेल चल, जे गंगेश के एप पोती लिखभाक लिल बाद्ध्यो हूपडल.
  40. 2:46–2:50एई एतिहासिक संदरप भूजव अट्यंत महत्त्पून आची.
  41. 2:50–2:56दिखो, चोदाम शताबदिक मिठला में, जे करनात वन्शीर आजा हरी सिंग देवक काल चल,
  42. 2:56–3:02उते न्याय दरशन एक ता पैग वैचारिक संकत सगुजी रहल चल.
  43. 3:02–3:06जे क्रा अंगरेजी में अपिस्टेमिक क्रिसिस कह सके ची.
  44. 3:06–3:36आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ
  45. 3:36–3:38पंगु बना रहल चला
  46. 3:38–3:41मतलब एकोन दाशनिक युद्द्दजका स्थिटिचल
  47. 3:41–3:43श्रीहर्ष वास्टव में कोगी रहल चला
  48. 3:43–3:46जकर कारन प्राचीन न्याए दर्षन क्ष्ट्रामे पडिगेल
  49. 3:46–3:50श्रीहर्ष अपन तिख्षन तर्ख्स एप रमानित करहल चला
  50. 3:50–3:55जे अद्वैत माने केवल ब्रम्ह के छोडी सन्सारक कोनो से हो वस्तू
  51. 3:55–3:59या ग्यांक निर्दोश परिबाशा समबव नहीं अची
  52. 3:59–4:04प्राचीन न्यायाएक लोकनी जे कोनो वस्तू परिबाशा दईत चला
  53. 4:04–4:09श्रीहर्श उही मे अटी व्याप्ती, वा अव्याप्ती सन्दोश निकाली देट चला.
  54. 4:09–4:14तनी, एक रा सुजा बहासा मे तोडू, इव्याप्ती अव्याप्ती की थेक?
  55. 4:14–4:19रा, मानी लिय, जे हम्रा सब गाएक परिबाशित कर रहल चींट.
  56. 4:19–4:25जए कोनो नयायाई कहत चती, जे गाय औजानवर अची जकरा सींग होईत चेक
  57. 4:25–4:29तश्री हर्ष कहत हूँ जे भेसके सोज सींग होईत चेक
  58. 4:29–4:32एक दम, यही भेल अटी व्याप्ती दोश
  59. 4:32–4:36माने परिभाशा अवष्चकता से अदिक वस्तूँ पर लागु बहर अची
  60. 4:36–4:42अजज़ नयायाई कहे चती जे गाय उजान्वर अची जे कारी होई तची
  61. 4:42–4:46तच्री हर्ष कहत हूँ जे ईई अव्यापती अची
  62. 4:46–4:49कारन ईई उजजर गाय के बाहर कर दे तची
  63. 4:49–4:52बाप्रे इद तो हर बात में खोट निकालब हेल
  64. 4:52–4:54आउ, एक रा तनी एक दादनिक आनालोगी सबूजी
  65. 4:54–4:59ता एकर अर्थ इब हेल, जे पुरान न्याय दर्षन एक ता एहन पुरान सोफ्ट्वेर जका बहई गल चल, जे कर कोड बहुत दीला चल.
  66. 4:59–5:01आँ, नी कुदारन अचे
  67. 5:01–5:05अव, एक रा तनी एक दादनिक आनालोजी सबूजी
  68. 5:05–5:11ता एकर अर्थ इब हेल, जे पुरान न्याय दर्षन एक ता एहन पुरान सोफ्ट्वेर जका बहई गल चल
  69. 5:11–5:13जे कर कोड बहुत दीला चल
  70. 5:13–5:15आप नी कुदारन अचे
  71. 5:15–5:45तो उग़ा उग़ा उग़ा उग़ा उग़ा उग़ा उग़ा उग़ा उग़ा उग़ा उग़ा उग़ा उग़ा उग़ा उग़ा उग़ा उ़ा उग़ा उ़ा उ़ा उ़ा उ़ा उ़ा उ़ा उ़ा उ़ा उ़ा उ़ा उ़ा उ़ा उ़ा उ़ा उ़ा उ़ा उ़ा उ़ा उ़ा �
  72. 5:45–5:53अब आशक एहन गनिती सनचना चल, जहमे श्री हर्षक कोनो चेद्र, वा लूप होल नहीं भेटी सकई चल.
  73. 5:53–5:56माने उगडम ताइड़ धाचा बना दिलने.
  74. 5:56–6:02आप जग गगेश एक देख लेने जे प्राजीन न्याए दशनक जे सोलो अ पदार्त का लंबा चोडा परीपाटी आची
  75. 6:02–6:04उकर रक्षा करब कती नचे
  76. 6:04–6:07तो अनावष्यक वस्तूक छाटी दिलेने
  77. 6:07–6:12अपन समपुन द्यान केवल ग्यान प्राब्त कर बाक चार प्रमान पर किंद्रित के लेने
  78. 6:12–6:15प्रत्यक्ष, अनुमान, उपमान और शब्द
  79. 6:15–6:19ये अतिहासिक प्रष्ट्बूमी हम्रा सब के भुजहा दे थे ची
  80. 6:19–6:23जे गंगेश कत्तिक पैग दबाव में इग्रन्त लिखी रहल चला
  81. 6:23–6:27अब जग गंगेश एक ता अन्यकेबल कोड लिखी रहल चे फिन
  82. 6:27–6:32तो उ पोठिक प्रारंब से हु बिना तारकिक विवेचनक नहीं करतूं
  83. 6:32–6:33एक दम नहीं
  84. 6:33–6:37तत्तु चिन्तामनी कप्रारंभ, जगरा हमरा सब मंगला चरन कहत्ची,
  85. 6:37–6:40उते से एक नव दार्षनिक यूध श्रूब हो जाईता ची.
  86. 6:40–6:46आ, कारन, दार्षनिक परमपरा में, मंगला चरन का वास्तविक फल की आची,
  87. 6:46–6:51इन न्याय आमिमान्सा दर्षनक भीच एक ता बहुत गेहर विमर्ष अची.
  88. 6:51–6:54प्राची नाचारे आमिमान्सक सबकम मानब चने,
  89. 6:54–6:58जे मंगला चरन को सुजाफल ग्रन्त समाप्ती अची.
  90. 6:58–7:03मतलब प्रार्तना केल गेल आ उकर परनामा सुरुब पोती पूरन भाल,
  91. 7:03–7:06कार्या अ कारन का सीथा सम्मद
  92. 7:06–7:13अग, मुदा गंगेश्त हर चीस के गनितिया निकष्पर कसे चतिन, तो एक रापुर्ड रुपे नकारे चतिन.
  93. 7:13–7:17उएही में व्यभीचार वा अपवाद दिखवे चतिन.
  94. 7:17–7:18अच्छ, की अपवाद?
  95. 7:18–7:25गंगेश तर्क दैएक्स छत्हीने जे कत्ते को भेर मंगला चरनक भीनास हो काज पुर्न भोजाई तची
  96. 7:25–7:28जिना कोनो असाव्दान लेकखक ग्रन्त्ख
  97. 7:28–7:35आदो सर देस कते को भेर बहुत निष्ठासा पुर्ण मंगलाचरन के लाक बाद हो गरन्त दूरा रही जाए तची.
  98. 7:35–7:35आदो सर देस कते को भेर बहुत निष्ठासा पुर्ण मंगलाचरन के लाक बाद हो गरन्त तची दूरा रही जाए तची.
  99. 7:35–7:39आँ, इत हम्रा सब देनिक जीवन में सोडे कही चीे.
  100. 7:39–7:42तजग कारे कारन सम्मन इत्बा अस्तिर आची,
  101. 7:42–7:46तम मंगला चरनक फल ग्रन्त समाप्ती कोन भोसके तची,
  102. 7:46–7:48गंगेश कषिद्धान तची,
  103. 7:48–7:51जे मंगला चरनक मुख्य आपर तेख्ष फल,
  104. 7:51–7:53विगननाश आश थी
  105. 7:53–7:55विगननाश
  106. 7:55–7:57अखतात, केवल बादके न दूर करव
  107. 7:57–7:59इकोन खाज पूडन नहीं करे थाछी
  108. 7:59–8:03मात्र खाज मे आईवला काटक के हटावए थाछी
  109. 8:03–8:05एक दम, गंगेश का नुसार
  110. 8:05–8:07जखन बादा समाप्त बहुजाए थाछी
  111. 8:07–8:09तखन कोन ग्रन्त कार
  112. 8:09–8:15अपन लोकिक प्रयास, जिना अपन ग्यान, बुद्दिया महनत्स, काजपून कलेजठ थीन.
  113. 8:15–8:18इश्वर वा प्रार्त्तना सीदे पोथी नहीं लिखी देई तची.
  114. 8:18–8:21इती इविशे बद रोचक मजाई तची.
  115. 8:21–8:24इत उहना भेल जेना गाडी चलईवा काल सीट बेल्ट बान्दब
  116. 8:24–8:25सीट बेल्ट
  117. 8:25–8:27आ, देख।
  118. 8:27–8:31सीट बेल्ट कोनो चालक केन गंटबे दरी नहीं पहुचावेत अची
  119. 8:31–8:36गंटबे दरी ता चालक अपन द्रीविंग पहुचावेत चेख
  120. 8:36–8:40जों बवाँई दीखादी बान का बैस्ला सा गाडी अपना बगन्तवेदरी नहीं जाएद.
  121. 8:40–8:41इक दम.
  122. 8:41–8:44मुदा एता हमर दिमाग में क्त प्रष्ना अवी रहा लगजी,
  123. 8:44–8:47जे मी मान सक लोकनी से हो उठवेद हे था.
  124. 8:47–8:50जों मंगला चरन विँशन नाश करई तची,
  125. 8:50–8:57उदम, मुदा एते हमर दिमाग में ता प्रष्ना अवी रहा लग जी, जे मिमान सक लोकनी से हो उठवे थे ता.
  126. 8:57–9:04जो मंगला चरन विगनन नाश करे तची, तचे नास्तिक वेक्ती आची, जे मंगला चरन नयो करे तची,
  127. 9:04–9:06अख्रो ग्रन्त कख्नो कख्नो पुर्न भेजाई तची
  128. 9:06–9:09रहा, हुनका तसीट बेल्ट नहीं भानल.
  129. 9:10–9:12तख्रन, हुनकर काज निर्विएश कोना पुर्न भेजाई तची.
  130. 9:13–9:16गंगेश एकरा बहुत सरलता सस्पस्ट करे थची थी.
  131. 9:16–9:28उ कहे चति, जिन नास्तिक ककाज मंगला चरनक भीना एहले पुरन भेजाता ची, कारन उतै पहिने सा विगना का अबहाव आची, जक्रा उ विगना बहाव कहे चति.
  132. 9:28–9:30आच्छ, मने उते कुनो भाभा चलेना?
  133. 9:30–9:37आजकन पहीने सा कोनो बादा आची है नहीं, तो उक्रा दूर करवाक लेल मंगला चरनक आवष्खता न नहीं रहेत आची.
  134. 9:37–9:46वह ये कबहुत सुझेंदर तारकिक समजान भेल, विगन दूर भेलाग बाद गरन्तकार आगु बड़ेच जत्थिन अग्यान प्राप्त करेच चत्थिन.
  135. 9:47–9:52मुदा एते सा हम्रा सब कष्रोद पो टीक सब समहत्पून कन सुरू हुए तची.
  136. 9:52–9:53प्रमन्ने वाद.
  137. 9:53–10:23इस्द्याई आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ
  138. 10:23–10:27यान अपन सत्ते ताक सर्टिटकत संगे लेका अवी ताची
  139. 10:27–10:31जाग कोनो ग्यान मस्तिक्स में आईल तो जन्म साथ्ति आची
  140. 10:31–10:35आप यान अपन सत्ते ताक सर्टिटकत संगे लेका अवी ताची
  141. 10:35–10:38जाग कोनो ग्यान मस्तिक्स में आईल तो जन्म साथ्ति आची
  142. 10:38–10:40ता सत्ते होई वची
  143. 10:40–10:42दोश तक्हन आवे तची
  144. 10:42–10:44जक्हन कोनो बाहरी कारन
  145. 10:44–10:46उक्रा ब्रमित करे तची
  146. 10:46–10:48मुदा गंगेश परतह प्रमाडन्यवाद के समर्ठन करे चती
  147. 10:48–10:50मुदा
  148. 10:50–10:52जहा मिमान सकक बात मानली
  149. 10:52–10:54ता हमरा सबखके कही यो
  150. 10:54–10:56कुनो नव विषे में सन्शे वा
  151. 10:56–11:01या ग्यान स्थसिद होएत ता सन्शय कही हो नहीं होएत
  152. 11:01–11:03ता एकर अर्थ की भेल?
  153. 11:03–11:05आए ते द्याना कर सक गब यह ची
  154. 11:05–11:10जे आहां जे तरक सोची रहे लख थीक उही तरक गंगेज देलन हैं
  155. 11:10–11:15गंगेज कहे चत हैं जे ग्यान अक प्रामान न अपन कारन सामगरी सन नही
  156. 11:15–11:21अपी तु कोनो आन सादन, जेना सफल कार्य प्रव्रिती सब परत्ह गयात होई तची.
  157. 11:21–11:25एकर कोनो व्यावाहारे कुदाहरन, जेना दैनिक जीवन सब,
  158. 11:25–11:29जा कोनो व्यक्ती पानी देखाई तची, तो ओ पानी अची,
  159. 11:29–11:31वा मरु ब्हुमिक म्रिग त्रिष्ना
  160. 11:31–11:34इवोही द्रिष्टी सा स्वत्टा प्रमानित नहीं होईताची
  161. 11:34–11:36आचा, तब रमानित कोना होईताची
  162. 11:36–11:39जखन व्यक्ती पानी पीवाक प्रयास करेताची
  163. 11:39–11:41आ अकर प्यास भुजी जायताची
  164. 11:41–11:43तखन वो सफल प्रव्रिती
  165. 11:43–11:46उही ग्यान के प्रमा वस्सत्य गोषित करेता ची
  166. 11:46–11:48इबहुत वेग्यानिक दूष्ती कोना ची
  167. 11:48–11:52माने, हैपोठेसिस बनाव, टेस्ट करु, तकन सत्यमानो
  168. 11:52–11:55मुदा जकन ग्यान ब्रहम निकरेता ची
  169. 11:55–11:57तवास्तो मां मस्तिष्ट में की बहर रहे लोई तची
  170. 11:57–12:27ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ
  171. 12:27–12:31वह देखी बाबे रहा लाची यू तो बहुत निशक्रीः व्याख्या भेल
  172. 12:31–12:35विल्कुल आग गंगेश एक रासं संथुष्त नहीं भेल ही ता
  173. 12:35–12:39करण गंगेश मानेच चती जे व्रहम कुनु वो अग़ा प्रद बाबे रहा लाची
  174. 12:39–12:43तो प्रबाखरक अनुसार वेक्ती शीप के चानी नहीं बुज रहा लाची
  175. 12:43–12:47उबस शीप अचानी के बीजकर अंटर नहीं देखी पाभे रहा लाची
  176. 12:47–12:50यू तो बहुत निश्क्रिय व्याख्या वेल
  177. 12:50–12:54विल्कुल अग गंगेश एक रासं संथुष्त नहीं बिल ही ता
  178. 12:54–12:59करन गंगेश मानेट चती, जब रहम कोनो निषक्रीय अग्यान नहीं आची
  179. 12:59–13:02ये एक तशक्रीय मान्सिक आरोपन आची.
  180. 13:02–13:03शक्रीय मान्सिक आरोपन?
  181. 13:03–13:07रहा, गंगेश का अन्निधा ख्याती कही तची,
  182. 13:07–13:09जब रहम में व्यक्ती शक्रीय रूपें,
  183. 13:09–13:13सोजھर अखल शीप में एक ता एहन गुन आरोपित के लेत अची,
  184. 13:13–13:17जे वास्तों में शीप में नहीं आपितु चानी में होई तची.
  185. 13:17–13:21उगुन अची रजत्त्व वा चानी पन.
  186. 13:21–13:22एक दम.
  187. 13:22–13:26मस्तिष्क्सी के न विशेष्ष्षे बनवएथ अची,
  188. 13:26–13:30अर उही में रजद्वत को थोपी देप अची
  189. 13:30–13:35एही कारन्सा इई अन्निधा ख्याती कह्वाविद अची
  190. 13:35–13:39एक वस्तुके आन वस्तुके रूप में सक्रियता सदेखब
  191. 13:39–13:42बाप्रे, इप बहुत गहर बात अची
  192. 13:42–13:46मने ब्रम के वल अग्यान नहीं अची
  193. 13:46–13:51ब्रामेख्ता, रच्नात्मक, यद्यपी गलत, मान्सेख प्रक्रिया आची
  194. 13:51–13:54आब यी तभेल प्रत्यक्ष ज्यानक पात
  195. 13:54–13:58मुदा जखन कुनु सत्ये प्रत्यक्ष नहीं होई तची
  196. 13:58–14:01तखन तर्क वो अनुमानक सहारा लेल जाई तची
  197. 14:01–14:06गंगेशक यी अनुमान क्हन्द कते खुष्मची अब उते चलेचची
  198. 14:06–14:11गंगेश अनुमानक की तीन प्रमुख्स तमबहक विवेचन करेचचती
  199. 14:11–14:15व्याप्ती उपादी आर परमवर्श
  200. 14:15–14:17सब से पहले व्याप्ती
  201. 14:17–14:22व्याप्ति हेतू का साद्ध्य साथ अतल समबन्द अची
  202. 14:22–14:27हेतू आसाद्ध्य, मने जक्रा आदार पर हम सिद कर रहे लची उ हेतू
  203. 14:27–14:30आज्जे सिद करे चाहे ची उ साद्ध्य
  204. 14:30–14:35एक दम, जैना परवत पर दूवा आची, कारन अते आगी आची
  205. 14:35–14:40उते आर्द इंदन संयोग मने भीजल काट चाही, इभीजल काट उपादी तीक.
  206. 14:40–14:44अग, न्याई दर्षन में उपादी उदहाँ चाही.
  207. 14:44–14:46अगी तब भीजल कात् हुपादी तीक
  208. 14:46–14:55आउ, एक रा निक जका बुजी, आगी से दूवा होए तची, इस सत्य अचे, मुदा खाली आगी से दूवा नहीं होए तची,
  209. 14:55–15:01उते आद्र एंदन संजोग, माने भीजल काट चही, इभीजल काट उपादी तीक.
  210. 15:01–15:05अगी तब बिना भीजल काथक, जना लाल भाई लोहा में सोब हो रही सके तची
  211. 15:05–15:08जो हमेक रा आदनिक विग्यानेक बाशा में कही,
  212. 15:08–15:11तट यी उपादी एक टक कन्फाँँन्टिं वेरियबल,
  213. 15:11–15:13ब्रामक चरजका अची
  214. 15:13–15:16यी उईना अची, जना कोन रिसरच कहे,
  215. 15:16–15:18यक रादनिक विग्यानिक बाशा में कही,
  216. 15:18–15:23ता इी उपादि एक टक कन्फाँन्टिंग वेरियबल बा ब्रामक चर्जका अची
  217. 15:23–15:30इए उहिना अची जेना कोन रिसर्च कहे जे अइस्क्रीम ख्यला कारन लोकक अस्सन्बरन होईत अची
  218. 15:30–15:38जकन की वास्तब में, अईस्क्रीम अज्सन्परन दूनुक कारन एक ता तीसर वस्तू अची, गर्मिक तेज रोद.
  219. 15:38–15:43एते रोद उपादी बहेगेल, जि हमर अनुमान के दूशित करे रहल अची.
  220. 15:43–15:46इआईस्क्रीमक आनलोगी एक्दम सती कची
  221. 15:46–15:49उपादी अनुमाने दोष पैदा करे तचे
  222. 15:49–15:51तचे अनुमानक सत्यहोई बाकलेल
  223. 15:51–15:53उक्रान निरुपादी
  224. 15:53–15:55माने उपादी रहीत होगे परत
  225. 15:55–15:56थिक छे
  226. 15:56–15:58व्याप्ती बुजी गेल हूँ
  227. 15:58–16:00उपादी बुजी गेल हूँ
  228. 16:00–16:03यह में तेसर श्टंब आफी परामर्ष
  229. 16:03–16:07हमराई भुज़ब आफी जे एकर आवश्षकता कीए कची
  230. 16:07–16:10जो हमरा नीम जनल आफी जे दूमाने आगी
  231. 16:10–16:13तस्सीदे निषकर्स पर पहुजज़ाइतना
  232. 16:13–16:17मी मान सक से हो टीक एही बातक तरक्दैच छती
  233. 16:17–16:22उ प्रक्रिया के चोट राख़े चाह ज्छत्छत्छ, मुदा गंगेश एक्रा नहीं मानच्छत्छत्छ,
  234. 16:22–16:26गंगेश प्रक्रिया के मनोवग्यानिक्रूपे सतिक करहल्चत्छत्छ,
  235. 16:26–16:28मनो वैग्यानिक रूपे, कोना?
  236. 16:29–16:33गंगेशक लेल परामर्ष अँ स्पार्क वच्चिंगारी अच्छे,
  237. 16:33–16:37जे नियम अद्रिष्टान तक के जोडी कर निशकर्ष उपन कराई तचे.
  238. 16:38–16:41मस्तिष्क के यविषिष्ट विचार करभ अनीवार्या जे,
  239. 16:41–16:47जे एजे सोजा मे पहार आचे, एही पर उही प्रकार कदूवाआ आचे,
  240. 16:47–16:49जे आगिक संग अतुट रुपन जुड़ आचे.
  241. 16:49–16:50वाज!
  242. 16:50–16:54एकर मतल आची जे ग्यान कोनो स्तेप स्किप नहीं कल जासके तची.
  243. 16:54–16:55एक दम नहीं.
  244. 16:55–17:01आब तर्क्क्क इत्बा पेगड्धान्चा ताडकि लक्बाद, कि कोनो नुतन प्रमानक आवश्व्टा चेक,
  245. 17:01–17:07हम्रा लक्जे स्रोट समगरी आची, उही में आप्द्ती पोस्टिलेशन को जिक्र आची.
  246. 17:07–17:09इप्रद्द्द्द्द की गब आपची
  247. 17:09–17:11इप्रद्द्द्द की गब आपची
  248. 17:11–17:13इप्रद्द्द की गब आपची
  249. 17:13–17:15इप्रद्द्द की गब आपची
  250. 17:15–17:17इप्रद्द्द की इप आपची
  251. 17:17–17:19इप्रद्द्द की आपची
  252. 17:19–17:21इप्रद्द्द की आपची
  253. 17:21–17:22तद्तकी गप अची?
  254. 17:22–17:25इनिष्चित आची, जे देवदत जीवित आची,
  255. 17:25–17:29मुदा अ दिन में आपन गर पर नहीं दिखाई देटाची.
  256. 17:29–17:31तम मिमान सक्क अनुसार,
  257. 17:31–17:34उकर बाहर हुएबक खल्पना अनुमान नहीं
  258. 17:34–17:38बल की आद्धा पत्ति नामक स्वतन्द्र प्रमान से होई तची.
  259. 17:38–17:40वुदा गंगेश एक्रा की अगने नाने च्छती?
  260. 17:40–17:45समान ने बोद तईया कहत च्छी, जे ईक्ता अनुमान मात्र च्छी?
  261. 17:45–17:51ये द्याना कर्षक गप यह ची, जे गंगेश के नूतन प्रमानक आवश्शकता नहीं चनी.
  262. 17:51–17:57उ एकरा केवल वियतीरे की अनुमान अर्ठात प्योर्ली नेगेटिव इन्फरेंस,
  263. 17:57–18:00प्योर्ली नेगेटिव इन्फरेंस कानतर गद समेटी लेज्चती.
  264. 18:00–18:04माने, उएकरा नकारात्मक अनुमान्त सिद्ध कदे चती?
  265. 18:04–18:08आँ, दाशनिक विवस्धामे एक्ता नियम होत ची लागजाव
  266. 18:08–18:13आथात सरल्ताक सिद्धान्त, जकरा अख्यम्स रेजर सिहो के हल जाई तची.
  267. 18:13–18:22जगन उही बात के एक ता सामान ने नकरात्मक अनुमानक माद्यम संसिद कहल जासके तची, तफे नवीन प्रमानक का कलपना की अ करब.
  268. 18:22–18:31एक तम, इलागव का सिद्धानत वास्तव मन नवीन नयायक सुन्दरी आचे, बिना कारन के विश्यक कजटिल नहीं कहल जाए.
  269. 18:31–18:33सत्यमे
  270. 18:33–18:37गंगे शुपाद्याय आ हुंकर तत चंतामनी
  271. 18:37–18:40बार्तिये दर्षन के दिशा पूरन रुपे बडल दिलक
  272. 18:40–18:43हुंकर तारकिक अचुकता इत्बा कडाचल
  273. 18:43–18:47जे परवर्ती कालक समस्त दर्षनिक संप्रदायके
  274. 18:47–18:50नव्य न्यायक का बाशा अपनावा पडल
  275. 18:50–18:54तजगन हम्रा सब आपन एही विस्त्रित विवेचन का अन्तम आई रोहल ची
  276. 18:55–18:57हमर मन में एक ता गेर बिचारा वी रोल चे
  277. 18:58–19:01आई जगन हम्रा सब आटिफिष्छल अईटलिजन्स,
  278. 19:01–19:31अद्र बाज़ा बाज़ा बाज़ा बाज़ा बाज़ा बाज़ा बाज़ा बाज़ा बाज़ा बाज़ा बाज़ा बाज़ा बाज़ा बाज़ा बाज़ा बाज़ा बाज़ा बाज़ा बाज़ा बाज़ा बाज़ा बाज़ा बाज़ा बाज़ा बाज़ा बाज़ा बाज़ा �
  279. 19:31–19:34जा हमरा सब गयान के उपादी रहित कर लिया
  280. 19:34–19:37और सपल कारे प्रविर्ति से ख़ोकर परिक्षन करी
  281. 19:37–19:39ता ईव वेचारिक अख्सरे मशीन
  282. 19:39–19:42आईईउ पुन रूपें प्रसंगिक अछी
  283. 19:42–19:44आपर विचार अवष्षे करो
  284. 19:44–19:47इच्यल हमरा सब के आएकर विस्त्रत विवेचन
  285. 19:47–19:50फिर भिटब कुनुन्नाव स्रोथ अन्नाव ज्यान के संग

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समाल्ये तहाँ जखन कोनो मेटिकल डाएक्नोसिस का बात होगत चाई तो उते एक तब बहुत सब श्ष्ट ताक उम्मीद रहात चे मैं एक दम एंजीनीरींग जगा आप उते अनुमानक कोनो जगा नहीं रहात चेक एक दम मनी लिया जे कोन वेक्तिक हात तूटी गला, तो एकस्रे मशीन में वो तूटल उजज़रेखा, साव साव दिखा जाईता जी. अ दोक्तर अख्रा दिखा का के चतिन जे दिखु, इए ते आचे. सत्यमे, इप पूरन रूपेन बाईनरी आची. मने, हद्दी टुटल अच्छे, वर नहीं टुटल अच्छे, बीचक कोनो भाट नहीं. आख आख इजे एस पष्टता अच्छे ना, इध हमरा सब के मस्तिष्क के बहुत आराम दायक बुजाई तची. कारन, दिमाग के चीज एक दम सबष्ट आवर्गी क्रत्रूप में देखब नीक लागे चैक. मुदा जखन ग्यान और सत्टेक दार्षनिक दुन्या में प्रवेश होईत जे, ता अचाना को एकस्रे मशीन काजकर बंद कर दे थे. इक दम तूट जाएत छे अ प्छीन विल्कुल मनुश्छे के एक आईन परिद्रुष्श मे आभी जाएत छे जे इमान्दारी से कही तब रहुत अस्पष्ट छे सत्ते की आची अब्रहम की आची एक अर निनने लेब उत्बस सहज नही रही लै ड़ची जत्बाओ रद्दिक अच्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च बिल्ल्कुल नहीं हम्रा सब के एई गज़र विवेचन केंद्र में आची, गजद्र ताकौल दबारा मेठिली में अनुधेत चोड़हमा शताभ्दिक महान दार्ष्निक, गंगेश आपा द्याएक रिद गरन्त तत्व चिंता मने. एक ता मील पातर. ये मित्लाक उ बड़िक क्रान्ती ची एक जे नव्यन न्याय माने नुतन तर्क्षास्त्र क्स थापना के लग, समपुन भारती या दर्शनक दिशा बदल्डलग. जेक्रा अंग्रेजी में एक आपिस्टिमोलोगी वा ग्यान मीमान सा कहल जाईताची, उकर एसर वोच शिखर आची. ता आई हमरे सब का जे य विवेचन आची, तकर मुख्य काज य भुजावाची, जे हमरा सब जानेच छी, उकर सत्तिता वास्तों में कोना प्रमानित होईता ची अ कोना गंगेशक इतर्क प्रनाली ब्रहम असत्यक भीच कभेद स्पष्ट कर अगी ता ची सीदे गंगेशक सिद्धान्त में प्रवेश करभासा पहले पैने एी भूजब आवश्यक अची, जे चोदाम शताबदिक मित्ला में आखिर भूगी रहल चल, आहन की संकत आभी गेल चल, जे गंगेश के एप पोती लिखभाक लिल बाद्ध्यो हूपडल. एई एतिहासिक संदरप भूजव अट्यंत महत्त्पून आची. दिखो, चोदाम शताबदिक मिठला में, जे करनात वन्शीर आजा हरी सिंग देवक काल चल, उते न्याय दरशन एक ता पैग वैचारिक संकत सगुजी रहल चल. जे क्रा अंगरेजी में अपिस्टेमिक क्रिसिस कह सके ची. आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ पंगु बना रहल चला मतलब एकोन दाशनिक युद्द्दजका स्थिटिचल श्रीहर्ष वास्टव में कोगी रहल चला जकर कारन प्राचीन न्याए दर्षन क्ष्ट्रामे पडिगेल श्रीहर्ष अपन तिख्षन तर्ख्स एप रमानित करहल चला जे अद्वैत माने केवल ब्रम्ह के छोडी सन्सारक कोनो से हो वस्तू या ग्यांक निर्दोश परिबाशा समबव नहीं अची प्राचीन न्यायाएक लोकनी जे कोनो वस्तू परिबाशा दईत चला श्रीहर्श उही मे अटी व्याप्ती, वा अव्याप्ती सन्दोश निकाली देट चला. तनी, एक रा सुजा बहासा मे तोडू, इव्याप्ती अव्याप्ती की थेक? रा, मानी लिय, जे हम्रा सब गाएक परिबाशित कर रहल चींट. जए कोनो नयायाई कहत चती, जे गाय औजानवर अची जकरा सींग होईत चेक तश्री हर्ष कहत हूँ जे भेसके सोज सींग होईत चेक एक दम, यही भेल अटी व्याप्ती दोश माने परिभाशा अवष्चकता से अदिक वस्तूँ पर लागु बहर अची अजज़ नयायाई कहे चती जे गाय उजान्वर अची जे कारी होई तची तच्री हर्ष कहत हूँ जे ईई अव्यापती अची कारन ईई उजजर गाय के बाहर कर दे तची बाप्रे इद तो हर बात में खोट निकालब हेल आउ, एक रा तनी एक दादनिक आनालोगी सबूजी ता एकर अर्थ इब हेल, जे पुरान न्याय दर्षन एक ता एहन पुरान सोफ्ट्वेर जका बहई गल चल, जे कर कोड बहुत दीला चल. आँ, नी कुदारन अचे अव, एक रा तनी एक दादनिक आनालोजी सबूजी ता एकर अर्थ इब हेल, जे पुरान न्याय दर्षन एक ता एहन पुरान सोफ्ट्वेर जका बहई गल चल जे कर कोड बहुत दीला चल आप नी कुदारन अचे तो उग़ा उग़ा उग़ा उग़ा उग़ा उग़ा उग़ा उग़ा उग़ा उग़ा उग़ा उग़ा उग़ा उग़ा उग़ा उग़ा उ़ा उग़ा उ़ा उ़ा उ़ा उ़ा उ़ा उ़ा उ़ा उ़ा उ़ा उ़ा उ़ा उ़ा उ़ा उ़ा उ़ा उ़ा उ़ा उ़ा उ़ा � अब आशक एहन गनिती सनचना चल, जहमे श्री हर्षक कोनो चेद्र, वा लूप होल नहीं भेटी सकई चल. माने उगडम ताइड़ धाचा बना दिलने. आप जग गगेश एक देख लेने जे प्राजीन न्याए दशनक जे सोलो अ पदार्त का लंबा चोडा परीपाटी आची उकर रक्षा करब कती नचे तो अनावष्यक वस्तूक छाटी दिलेने अपन समपुन द्यान केवल ग्यान प्राब्त कर बाक चार प्रमान पर किंद्रित के लेने प्रत्यक्ष, अनुमान, उपमान और शब्द ये अतिहासिक प्रष्ट्बूमी हम्रा सब के भुजहा दे थे ची जे गंगेश कत्तिक पैग दबाव में इग्रन्त लिखी रहल चला अब जग गंगेश एक ता अन्यकेबल कोड लिखी रहल चे फिन तो उ पोठिक प्रारंब से हु बिना तारकिक विवेचनक नहीं करतूं एक दम नहीं तत्तु चिन्तामनी कप्रारंभ, जगरा हमरा सब मंगला चरन कहत्ची, उते से एक नव दार्षनिक यूध श्रूब हो जाईता ची. आ, कारन, दार्षनिक परमपरा में, मंगला चरन का वास्तविक फल की आची, इन न्याय आमिमान्सा दर्षनक भीच एक ता बहुत गेहर विमर्ष अची. प्राची नाचारे आमिमान्सक सबकम मानब चने, जे मंगला चरन को सुजाफल ग्रन्त समाप्ती अची. मतलब प्रार्तना केल गेल आ उकर परनामा सुरुब पोती पूरन भाल, कार्या अ कारन का सीथा सम्मद अग, मुदा गंगेश्त हर चीस के गनितिया निकष्पर कसे चतिन, तो एक रापुर्ड रुपे नकारे चतिन. उएही में व्यभीचार वा अपवाद दिखवे चतिन. अच्छ, की अपवाद? गंगेश तर्क दैएक्स छत्हीने जे कत्ते को भेर मंगला चरनक भीनास हो काज पुर्न भोजाई तची जिना कोनो असाव्दान लेकखक ग्रन्त्ख आदो सर देस कते को भेर बहुत निष्ठासा पुर्ण मंगलाचरन के लाक बाद हो गरन्त दूरा रही जाए तची. आदो सर देस कते को भेर बहुत निष्ठासा पुर्ण मंगलाचरन के लाक बाद हो गरन्त तची दूरा रही जाए तची. आँ, इत हम्रा सब देनिक जीवन में सोडे कही चीे. तजग कारे कारन सम्मन इत्बा अस्तिर आची, तम मंगला चरनक फल ग्रन्त समाप्ती कोन भोसके तची, गंगेश कषिद्धान तची, जे मंगला चरनक मुख्य आपर तेख्ष फल, विगननाश आश थी विगननाश अखतात, केवल बादके न दूर करव इकोन खाज पूडन नहीं करे थाछी मात्र खाज मे आईवला काटक के हटावए थाछी एक दम, गंगेश का नुसार जखन बादा समाप्त बहुजाए थाछी तखन कोन ग्रन्त कार अपन लोकिक प्रयास, जिना अपन ग्यान, बुद्दिया महनत्स, काजपून कलेजठ थीन. इश्वर वा प्रार्त्तना सीदे पोथी नहीं लिखी देई तची. इती इविशे बद रोचक मजाई तची. इत उहना भेल जेना गाडी चलईवा काल सीट बेल्ट बान्दब सीट बेल्ट आ, देख। सीट बेल्ट कोनो चालक केन गंटबे दरी नहीं पहुचावेत अची गंटबे दरी ता चालक अपन द्रीविंग पहुचावेत चेख जों बवाँई दीखादी बान का बैस्ला सा गाडी अपना बगन्तवेदरी नहीं जाएद. इक दम. मुदा एता हमर दिमाग में क्त प्रष्ना अवी रहा लगजी, जे मी मान सक लोकनी से हो उठवेद हे था. जों मंगला चरन विँशन नाश करई तची, उदम, मुदा एते हमर दिमाग में ता प्रष्ना अवी रहा लग जी, जे मिमान सक लोकनी से हो उठवे थे ता. जो मंगला चरन विगनन नाश करे तची, तचे नास्तिक वेक्ती आची, जे मंगला चरन नयो करे तची, अख्रो ग्रन्त कख्नो कख्नो पुर्न भेजाई तची रहा, हुनका तसीट बेल्ट नहीं भानल. तख्रन, हुनकर काज निर्विएश कोना पुर्न भेजाई तची. गंगेश एकरा बहुत सरलता सस्पस्ट करे थची थी. उ कहे चति, जिन नास्तिक ककाज मंगला चरनक भीना एहले पुरन भेजाता ची, कारन उतै पहिने सा विगना का अबहाव आची, जक्रा उ विगना बहाव कहे चति. आच्छ, मने उते कुनो भाभा चलेना? आजकन पहीने सा कोनो बादा आची है नहीं, तो उक्रा दूर करवाक लेल मंगला चरनक आवष्खता न नहीं रहेत आची. वह ये कबहुत सुझेंदर तारकिक समजान भेल, विगन दूर भेलाग बाद गरन्तकार आगु बड़ेच जत्थिन अग्यान प्राप्त करेच चत्थिन. मुदा एते सा हम्रा सब कष्रोद पो टीक सब समहत्पून कन सुरू हुए तची. प्रमन्ने वाद. इस्द्याई आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ यान अपन सत्ते ताक सर्टिटकत संगे लेका अवी ताची जाग कोनो ग्यान मस्तिक्स में आईल तो जन्म साथ्ति आची आप यान अपन सत्ते ताक सर्टिटकत संगे लेका अवी ताची जाग कोनो ग्यान मस्तिक्स में आईल तो जन्म साथ्ति आची ता सत्ते होई वची दोश तक्हन आवे तची जक्हन कोनो बाहरी कारन उक्रा ब्रमित करे तची मुदा गंगेश परतह प्रमाडन्यवाद के समर्ठन करे चती मुदा जहा मिमान सकक बात मानली ता हमरा सबखके कही यो कुनो नव विषे में सन्शे वा या ग्यान स्थसिद होएत ता सन्शय कही हो नहीं होएत ता एकर अर्थ की भेल? आए ते द्याना कर सक गब यह ची जे आहां जे तरक सोची रहे लख थीक उही तरक गंगेज देलन हैं गंगेज कहे चत हैं जे ग्यान अक प्रामान न अपन कारन सामगरी सन नही अपी तु कोनो आन सादन, जेना सफल कार्य प्रव्रिती सब परत्ह गयात होई तची. एकर कोनो व्यावाहारे कुदाहरन, जेना दैनिक जीवन सब, जा कोनो व्यक्ती पानी देखाई तची, तो ओ पानी अची, वा मरु ब्हुमिक म्रिग त्रिष्ना इवोही द्रिष्टी सा स्वत्टा प्रमानित नहीं होईताची आचा, तब रमानित कोना होईताची जखन व्यक्ती पानी पीवाक प्रयास करेताची आ अकर प्यास भुजी जायताची तखन वो सफल प्रव्रिती उही ग्यान के प्रमा वस्सत्य गोषित करेता ची इबहुत वेग्यानिक दूष्ती कोना ची माने, हैपोठेसिस बनाव, टेस्ट करु, तकन सत्यमानो मुदा जकन ग्यान ब्रहम निकरेता ची तवास्तो मां मस्तिष्ट में की बहर रहे लोई तची ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ वह देखी बाबे रहा लाची यू तो बहुत निशक्रीः व्याख्या भेल विल्कुल आग गंगेश एक रासं संथुष्त नहीं भेल ही ता करण गंगेश मानेच चती जे व्रहम कुनु वो अग़ा प्रद बाबे रहा लाची तो प्रबाखरक अनुसार वेक्ती शीप के चानी नहीं बुज रहा लाची उबस शीप अचानी के बीजकर अंटर नहीं देखी पाभे रहा लाची यू तो बहुत निश्क्रिय व्याख्या वेल विल्कुल अग गंगेश एक रासं संथुष्त नहीं बिल ही ता करन गंगेश मानेट चती, जब रहम कोनो निषक्रीय अग्यान नहीं आची ये एक तशक्रीय मान्सिक आरोपन आची. शक्रीय मान्सिक आरोपन? रहा, गंगेश का अन्निधा ख्याती कही तची, जब रहम में व्यक्ती शक्रीय रूपें, सोजھर अखल शीप में एक ता एहन गुन आरोपित के लेत अची, जे वास्तों में शीप में नहीं आपितु चानी में होई तची. उगुन अची रजत्त्व वा चानी पन. एक दम. मस्तिष्क्सी के न विशेष्ष्षे बनवएथ अची, अर उही में रजद्वत को थोपी देप अची एही कारन्सा इई अन्निधा ख्याती कह्वाविद अची एक वस्तुके आन वस्तुके रूप में सक्रियता सदेखब बाप्रे, इप बहुत गहर बात अची मने ब्रम के वल अग्यान नहीं अची ब्रामेख्ता, रच्नात्मक, यद्यपी गलत, मान्सेख प्रक्रिया आची आब यी तभेल प्रत्यक्ष ज्यानक पात मुदा जखन कुनु सत्ये प्रत्यक्ष नहीं होई तची तखन तर्क वो अनुमानक सहारा लेल जाई तची गंगेशक यी अनुमान क्हन्द कते खुष्मची अब उते चलेचची गंगेश अनुमानक की तीन प्रमुख्स तमबहक विवेचन करेचचती व्याप्ती उपादी आर परमवर्श सब से पहले व्याप्ती व्याप्ति हेतू का साद्ध्य साथ अतल समबन्द अची हेतू आसाद्ध्य, मने जक्रा आदार पर हम सिद कर रहे लची उ हेतू आज्जे सिद करे चाहे ची उ साद्ध्य एक दम, जैना परवत पर दूवा आची, कारन अते आगी आची उते आर्द इंदन संयोग मने भीजल काट चाही, इभीजल काट उपादी तीक. अग, न्याई दर्षन में उपादी उदहाँ चाही. अगी तब भीजल कात् हुपादी तीक आउ, एक रा निक जका बुजी, आगी से दूवा होए तची, इस सत्य अचे, मुदा खाली आगी से दूवा नहीं होए तची, उते आद्र एंदन संजोग, माने भीजल काट चही, इभीजल काट उपादी तीक. अगी तब बिना भीजल काथक, जना लाल भाई लोहा में सोब हो रही सके तची जो हमेक रा आदनिक विग्यानेक बाशा में कही, तट यी उपादी एक टक कन्फाँँन्टिं वेरियबल, ब्रामक चरजका अची यी उईना अची, जना कोन रिसरच कहे, यक रादनिक विग्यानिक बाशा में कही, ता इी उपादि एक टक कन्फाँन्टिंग वेरियबल बा ब्रामक चर्जका अची इए उहिना अची जेना कोन रिसर्च कहे जे अइस्क्रीम ख्यला कारन लोकक अस्सन्बरन होईत अची जकन की वास्तब में, अईस्क्रीम अज्सन्परन दूनुक कारन एक ता तीसर वस्तू अची, गर्मिक तेज रोद. एते रोद उपादी बहेगेल, जि हमर अनुमान के दूशित करे रहल अची. इआईस्क्रीमक आनलोगी एक्दम सती कची उपादी अनुमाने दोष पैदा करे तचे तचे अनुमानक सत्यहोई बाकलेल उक्रान निरुपादी माने उपादी रहीत होगे परत थिक छे व्याप्ती बुजी गेल हूँ उपादी बुजी गेल हूँ यह में तेसर श्टंब आफी परामर्ष हमराई भुज़ब आफी जे एकर आवश्षकता कीए कची जो हमरा नीम जनल आफी जे दूमाने आगी तस्सीदे निषकर्स पर पहुजज़ाइतना मी मान सक से हो टीक एही बातक तरक्दैच छती उ प्रक्रिया के चोट राख़े चाह ज्छत्छत्छ, मुदा गंगेश एक्रा नहीं मानच्छत्छत्छ, गंगेश प्रक्रिया के मनोवग्यानिक्रूपे सतिक करहल्चत्छत्छ, मनो वैग्यानिक रूपे, कोना? गंगेशक लेल परामर्ष अँ स्पार्क वच्चिंगारी अच्छे, जे नियम अद्रिष्टान तक के जोडी कर निशकर्ष उपन कराई तचे. मस्तिष्क के यविषिष्ट विचार करभ अनीवार्या जे, जे एजे सोजा मे पहार आचे, एही पर उही प्रकार कदूवाआ आचे, जे आगिक संग अतुट रुपन जुड़ आचे. वाज! एकर मतल आची जे ग्यान कोनो स्तेप स्किप नहीं कल जासके तची. एक दम नहीं. आब तर्क्क्क इत्बा पेगड्धान्चा ताडकि लक्बाद, कि कोनो नुतन प्रमानक आवश्व्टा चेक, हम्रा लक्जे स्रोट समगरी आची, उही में आप्द्ती पोस्टिलेशन को जिक्र आची. इप्रद्द्द्द्द की गब आपची इप्रद्द्द्द की गब आपची इप्रद्द्द की गब आपची इप्रद्द्द की गब आपची इप्रद्द्द की इप आपची इप्रद्द्द की आपची इप्रद्द्द की आपची तद्तकी गप अची? इनिष्चित आची, जे देवदत जीवित आची, मुदा अ दिन में आपन गर पर नहीं दिखाई देटाची. तम मिमान सक्क अनुसार, उकर बाहर हुएबक खल्पना अनुमान नहीं बल की आद्धा पत्ति नामक स्वतन्द्र प्रमान से होई तची. वुदा गंगेश एक्रा की अगने नाने च्छती? समान ने बोद तईया कहत च्छी, जे ईक्ता अनुमान मात्र च्छी? ये द्याना कर्षक गप यह ची, जे गंगेश के नूतन प्रमानक आवश्शकता नहीं चनी. उ एकरा केवल वियतीरे की अनुमान अर्ठात प्योर्ली नेगेटिव इन्फरेंस, प्योर्ली नेगेटिव इन्फरेंस कानतर गद समेटी लेज्चती. माने, उएकरा नकारात्मक अनुमान्त सिद्ध कदे चती? आँ, दाशनिक विवस्धामे एक्ता नियम होत ची लागजाव आथात सरल्ताक सिद्धान्त, जकरा अख्यम्स रेजर सिहो के हल जाई तची. जगन उही बात के एक ता सामान ने नकरात्मक अनुमानक माद्यम संसिद कहल जासके तची, तफे नवीन प्रमानक का कलपना की अ करब. एक तम, इलागव का सिद्धानत वास्तव मन नवीन नयायक सुन्दरी आचे, बिना कारन के विश्यक कजटिल नहीं कहल जाए. सत्यमे गंगे शुपाद्याय आ हुंकर तत चंतामनी बार्तिये दर्षन के दिशा पूरन रुपे बडल दिलक हुंकर तारकिक अचुकता इत्बा कडाचल जे परवर्ती कालक समस्त दर्षनिक संप्रदायके नव्य न्यायक का बाशा अपनावा पडल तजगन हम्रा सब आपन एही विस्त्रित विवेचन का अन्तम आई रोहल ची हमर मन में एक ता गेर बिचारा वी रोल चे आई जगन हम्रा सब आटिफिष्छल अईटलिजन्स, अद्र बाज़ा बाज़ा बाज़ा बाज़ा बाज़ा बाज़ा बाज़ा बाज़ा बाज़ा बाज़ा बाज़ा बाज़ा बाज़ा बाज़ा बाज़ा बाज़ा बाज़ा बाज़ा बाज़ा बाज़ा बाज़ा बाज़ा बाज़ा बाज़ा बाज़ा बाज़ा बाज़ा � जा हमरा सब गयान के उपादी रहित कर लिया और सपल कारे प्रविर्ति से ख़ोकर परिक्षन करी ता ईव वेचारिक अख्सरे मशीन आईईउ पुन रूपें प्रसंगिक अछी आपर विचार अवष्षे करो इच्यल हमरा सब के आएकर विस्त्रत विवेचन फिर भिटब कुनुन्नाव स्रोथ अन्नाव ज्यान के संग

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