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Baal_Sahitya_mein_Jalasamadhi_aur_Bhrashtachar.m4a

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Part 8 · VIDEHA MITHILA MAITHILI DISCUSSION CRITICISM SERIES PART 8
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  1. 0:00–0:06आई हम्रा सब गजेंदन ताकुरक उपन्यास, गोई सब का भीच जल समादिक आईविमरश्छ में,
  2. 0:06–0:12गामक लोग कता औडलोकिक तत्व अब भ्रष्टा चारक विरुद संगरष्च के विष्लेशन कर रहल ची.
  3. 0:12–0:23हमर पहल बात सीदे आईपर आफी, जो उपन्यासक बाल संसक्रन्क रूप में प्रस्तूती, आईकर अत्तिदिक जतिल विशाय वस्तूके भीच एक ता बआएग वेचारिक दूरी आची.
  4. 0:23–0:25आई, आई दूरी साप दिखाई ता चे?
  5. 0:25–0:30मने इर उच्ना मुल रूपेन बाल साहितेक रूप में प्रस्तूत आची
  6. 0:30–0:33मुदा आही में जे विशेः सब आची से बहुत बहरी आची
  7. 0:33–0:36जन प्ल दूरगखतना में तीन सो मज्दूरक जल समादी
  8. 0:36–0:38अग, उदिजितल एरेस्ट वाला बाथ से हूँ?
  9. 0:38–0:42बलक्ल, दिजितल अरेस्ट सा उज्वल जा का आत्म हत्या,
  10. 0:42–0:44फिर फूल मतिक संगे देहिवेआपार,
  11. 0:44–0:47अहुंक्कोंग दरी पस्वरल मनी लाँण़्रिंक का जाल,
  12. 0:47–0:52इसब्त आँ एक ता बच्चाक मनोवे ग्यानिक समच के लिल बहुत खन्दिच थे.
  13. 0:52–0:54एक दम सतिक बात का लूहा
  14. 0:54–0:55जखन कोनो पाथक
  15. 0:55–0:57मने विशेशक अभीबावक
  16. 0:57–1:00जे आपन बच्चा के एक तफ सुनारो अल चती
  17. 1:00–1:03उईक ता बाल संसकरन पोठी उटबे इच्छती
  18. 1:03–1:06उईक ता खास तरह की सरलता का पिक्षा कर एच्छती
  19. 1:06–1:36आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आ� आप आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ�
  20. 1:36–1:40अगर बाल चाहित्ते में देव्यापार आत्म अद्या वा म्रित्त्य।जका विश्याय राखवे नहीं चाही?
  21. 1:41–1:43आँ... इएक ता पैग बहस्क विश्याय जी
  22. 1:44–1:47जे हम्रा सब परमप्रागत बाल कता सब दिखी
  23. 1:47–1:50ये ये एक ता पैग बहस्ग विश्या या ची
  24. 1:50–1:54जे हम्रा सब परमप्रागत बाल कता सब देखी
  25. 1:54–1:57जना ग्रिम ब्रदर्स का कता सब
  26. 1:57–1:59तो उते सहो बहुत क्रूर्ता आची
  27. 1:59–2:02आआ, उतम रिट्तिव है चे, चाल आचे
  28. 2:02–2:03बलकुल
  29. 2:03–2:07तकी हम्रा सब के यी सब विषे वस्त। पूरन रूपे हटाबख आची
  30. 2:07–2:10या मात्र दिखावक नजरीया बदलबख आची
  31. 2:10–2:15की एक रा एक टार्क, फेबल वा कत्ठा रूपक जका प्रस्तूत कैलासू।
  32. 2:15–2:17इस समस्या दूर नहीब हो सके तच्
  33. 2:17–2:20अहक एटर्क बाग मैंबूत अची
  34. 2:20–2:23और ग्रिम ब्रदर्सको दाहरन्तम भिल्कुल सत्ही कचे
  35. 2:23–2:29मुदा विचार करू जे ग्रिम ब्रदर्सक्कता सब में क्रूर्ता कोना सोजा अवाई टच
  36. 2:29–2:30उ जादोई होगे टच
  37. 2:30–2:31एक दम
  38. 2:31–2:34उकर एक ता फन्तैसी वला आव्रन होईते थे,
  39. 2:34–2:38उतै अंतर रश्च्ट्रिया मनी लाँडिंका विट्या विव्रन न नहीं होईत अच्छे.
  40. 2:38–2:44आच्छ! तो हागक मतलब अच्छी, जे विवरन का यठार्थ वाद समस्या अच्छी?
  41. 2:44–2:49अपने अनन्या वा गामक उ बच्या सबक द्रिष्टी सा जे चन्ना गाची मे खेले चाथीन.
  42. 2:49–2:57बलकोल, जाहेसन इसब्ता गंभीर विश्य, बाल सुलब रूप मे एक ता बच्यक चेतनक फिल्तर सा पार भेक,
  43. 2:57–3:00उक्रा पोण रूप से बच्चा सब के नजर्ये सब प्रस्थ॥ काईल जाए.
  44. 3:00–3:06मने अनन्या वा गामक उ बच्चा सबक द्रिष्टिसा जे चन्ना गाच्षी में खेले च्ठें.
  45. 3:06–3:07भिल्कुल.
  46. 3:07–3:11जाएसन इसब्ता गंभीर विष्टाए, बाल सुलब रूप में,
  47. 3:11–3:15अग, इक ता बच्चक चेतनक फिल्तर सब पारभेक के सुजहा आवई
  48. 3:15–3:16बाद भहुत नीक अच्छे
  49. 3:16–3:18मने हम्रा गटना के नहीं बदल बखची
  50. 3:18–3:21बलकी उक्रा देख्वा कर लेंस बदल बखचे
  51. 3:21–3:22एक दम सही
  52. 3:22–3:24तएख रा कोना केल जासके तची
  53. 3:24–3:26कोनो थो सुदाहरन?
  54. 3:26–3:32दिको अ उपन्यास में, हांकूंकर अप्रादी लाओ किनहंग,
  55. 3:32–3:36वाहा प्रवाद कर अदवर्द ब्रुम कर अंप्राष्ट्रीये व्यापारक,
  56. 3:36–3:41जे विस्त्रत विव्रन अची, उक्रा बहुत कम करल जासके तची,
  57. 3:41–3:43वाहाटाल जासके तची.
  58. 3:43–3:48कारन एक्ता बच्चा के हंकोंका शिल, कमपनी सब कार्या प्रनाली नाई बुजी परत.
  59. 3:48–3:49बलक्कुल नबुजद.
  60. 3:49–3:57एकर बदला में यी देखाल जाए, जे गाव का बच्चा सब जगन चन्ना गाची में कबद्दी केले थ चतीन,
  61. 3:57–4:00तो हुंकर उ अलोकिक नीम कोना काज करे थाची
  62. 4:00–4:05जैना दाउ पर कोनो अंक नाई, बलके म्रित, मस्दूरक, चोराल गेल नाम भाजवा
  63. 4:05–4:11आँ, इ नीम कोना गाव का समस्या सब के भुज्बा में मदद करे थाची
  64. 4:11–4:15जेना उज्वेलक म्रित्य। जे एक ता बहुत दुखध गतना आची
  65. 4:15–4:21उक्रा एक ता अंट्राश्ट्रीः साविबर क्राईम रिएपोट कजे का नहीं देखाल जाए
  66. 4:21–4:23ता उक्रा बच्चा सबबक द्रिस्टी से देखाल जाए
  67. 4:23–4:32अग, दिखाओल जाए, जे कोना हूंकर एक ता प्रीजन एक ता अद्दिष्य जाएदूी राक्षस से दराग के अपन जान दो देलक.
  68. 4:32–4:40औ, समपुन कता नामा पाट्शाला मे पड़ाईत बच्चा सबख, सीमित मुदग गेहर द्रिष्टी सब प्रस्थ॥ कराएजाए.
  69. 4:40–4:41एक दम!
  70. 4:41–4:42हम भूजी रहल ची
  71. 4:42–4:45जक उन कता है एक ता बच्चाक नजरिज से देखल जाएत
  72. 4:45–4:50तो उ दिजितल अरेस्ट के कुनो वित्य अप्रादख रूप में नहीं देखत
  73. 4:50–4:51नहीं
  74. 4:51–4:54उक्रा एक ता अद्द्रिष्च्यख्होग के रूप में देखत
  75. 4:54–4:55आए
  76. 4:55–4:58जे कर कारने उकर गाम के लोग दरायला ची
  77. 4:58–5:02इक कताक औरो अदिक दरावना अबहुनात्मक बनादेद
  78. 5:02–5:07आई द्रिष्टी कोन नकेवल बाल संसकरनाक वादा के पूरा करत
  79. 5:07–5:13बलकी उही लक्षित पाथाख के लेल कताक अदिक प्रभाव्शाली से हो बनादेद
  80. 5:13–5:19बिल्कुल, एक कर संगे ईब भडलाव एक ता दोसर पैक समस्या के से हो सुता सुल्जा देद.
  81. 5:19–5:22कताक मुल भाअनात्मक केंदर बिन्दू,
  82. 5:22–5:24जे पूल्द्रगठना का मरत्मज्दूर चती,
  83. 5:24–5:26उ विबिन अदूनिक अप्रादध,
  84. 5:26–5:29उप कता सब कारनन से पाचा चुटी जाईता ची.
  85. 5:29–5:32इक ता बहुत महत्वपून सन्रचनात्मक बिन्दू आची.
  86. 5:32–5:35जोखन की इगता क मुख्ये जान अची
  87. 5:35–5:40आआ, कोनो सहु उत्क्रिष्ट कता के एक ता ह्रिदै होई तची
  88. 5:40–5:43जतैसे अकर सभेता रक्त संचार होई तची
  89. 5:43–5:47एही उपन्यासक हिर्दै अपूल्दुर्खतना आची
  90. 5:47–5:52इक्दम, इक्दा नन्द आरुक्षनक पुल्दुर्गधना के लडाय से सुरू होई तची.
  91. 5:52–5:58उद्रिष्य कते क्मार्मिक अची, जटै तीन्सो लाश अटीस नामक दून्द अची.
  92. 5:58–6:04व्यवस्ता तीन्सो लोकक म्रित्यो से मात्र तीस लोकक म्रित्यो मानी रहे लची.
  93. 6:04–6:08जाहे सा मुआवजा और जवाब देही से बचल जासके
  94. 6:08–6:13इएक ता एहन प्रस्थान बिन्दू अची जे पाटक के भितर दर रहिला दे तची
  95. 6:13–6:16मुदा जहेना जहेना कत्ठा आगा बड़े तची
  96. 6:16–6:25य अनलाई जुवा अदिजितल अरेस्ट, देव्यापार अर करोना कालक ब्रस्टाचार जका अलग-लग शाक्खा में बती जाए ची.
  97. 6:25–6:29इस सव विसे या ब्रस्टाचारक मूल छीम से जुडल जरूर अची.
  98. 6:29–6:32मुदा एक्रासा पात्कस सपका मुल सहनुब हूती,
  99. 6:32–6:36जे भिस रेसर और सर्युजका उही म्रित मज्दूरस सचल.
  100. 6:36–6:39ओ पुर्न रूपें कमजोर भहजाई तची,
  101. 6:39–6:43ये विख़्राो कताके प्योफ के कम कदे तची.
  102. 6:43–6:49लेखकक मन्सायता सपष्ट आची उ विवस्थाक समग्र ब्रस्टाचार के दिखावे चाहच्छती.
  103. 6:49–6:55आआ, उ दिखावे चाहच्छती जे इख्णो एक ता चोट्मोट �theकिदारक गलती नही आची,
  104. 6:55–7:00बल की ये एक ता अंतराश्ट्रीये और सर्वव्यापी बीमारी अची
  105. 7:00–7:04मुदा कता शिलपक अस्टर पर एकर परिनाम की होई तची
  106. 7:04–7:07उकर मुल भाहाव आश्कती गमाए जाए तची
  107. 7:07–7:08भिल्लकुल
  108. 7:08–7:11पात्ख एक ता म्रित मस्टूरक बच्या सजुडाई तची
  109. 7:11–7:19मुदा 10 पन्नाक बाद, उक्रा मालविका ग्रींक, देभ्यापार, वा चंद्रपाल, बत्राग, दिजिटल ठगिक विस्तार पड़ाएक पडितची.
  110. 7:19–7:26एही सवो पात्खक मन में जे क्रो द्हगनी, उही मस्दूरक लेल, जली रहल चल, उह मन्द भाजाएतची.
  111. 7:26–7:31आहाक यी नदीवाला आनलोजी मने जे हम दिल हुँ से आहाक सतीक लागल
  112. 7:31–7:34आहाक यी नदीवाला आनलोजी बहुत सतीक चै.
  113. 7:34–7:40कता के वापस उही मूल दार में लावे लेल एक ता मस्वुत बान्द बनावक अविषकता चै.
  114. 7:40–7:41आहाक सुजाओ की अच्छ?
  115. 7:41–7:46अग तात्पर ये अची जिख खलनायक एके रहेत अन्नव अप्राद कषिकार सो हो उही पुराना पीरित परिवारक लोक होए.
  116. 7:46–7:47एक दम सही.
  117. 7:47–7:53अग रा कोना स्तापित के लिए जासके अप्रादित सब उप्कता सब के कम करे लगाए.
  118. 7:53–7:57ज़ाहा सव कताग भोगोलिक अ विषेगत फलाउ कम हुए
  119. 7:57–8:00अ केंद्र बिन्दु एक दम सबष्ट अदार्दार रहे
  120. 8:00–8:03आग ताद्पर ये अची जि खलनायक एक रहेत
  121. 8:03–8:08आन्नव अप्राद कषिकार सो उही पुराना पीरित परिवारक लोक हूँए
  122. 8:08–8:09एक दम सही
  123. 8:09–8:13अगरा कोना स्तापित के लिए तची जाई से इस स्वाभाविक लागे?
  124. 8:13–8:18दिखो, अपन्यास मे एक ता बहुत पैग विश्याय अची, दिजितल म्युल काताक.
  125. 8:18–8:23अप अपन्यास मे चंद्रपाल बत्राजका पात्र इखाज कर रहल चती,
  126. 8:23–8:25गरीब लोके खगी रहल चती.
  127. 8:25–8:55ता आजक सुजाव यए आची जे ये कोनो अन्जान गरीभ नहीं हूँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँ
  128. 8:55–8:59अब उब उब उबज्टाचाचारक पैसा गूमारहल आची
  129. 8:59–9:02अब उब उबज्टाचारक पैसा गूमारहल आची
  130. 9:02–9:05अपन ब्रष्टा चारक पझिसा गूमार है लगछी
  131. 9:05–9:09ओ, यी तब बहुत गहेरा क्रूर भाद बहेगेल
  132. 9:09–9:13एकर माने अची जि तेकिदार पहिने उकर पिताक जान लेलक
  133. 9:13–9:17आआब उकर बच्चक भविष्छे आप पहिचान से होचारा रहा लगछी
  134. 9:17–9:19इदुगुन्ना अन्याई भेल
  135. 9:19–9:20भिल्कुल
  136. 9:20–9:22इहेसा गामगर नारीकेल
  137. 9:22–9:24आवकर शोषक कबीच्च कषंगर
  138. 9:24–9:27बहुत अदेक सीथा अव व्यक्तिगत लागत
  139. 9:27–9:29पाटक के इनही लागत जे
  140. 9:29–9:31अगोनो नव साविबर अप्राद कता पड़ी रहा लगत
  141. 9:31–9:32नहीं लागत
  142. 9:32–9:38बल की इलागत जे इवही तीन सो मरित मस्दूरक नयाए से जुडल सीथा लडाए या चे
  143. 9:38–9:42आजे कहल ये ता वही नदी वलायना लोगी पर वापस जाओ
  144. 9:42–9:46ते इवन दीक सब चोट दहरन के फिर से मुख्धार में मिला दिल जाएद
  145. 9:46–9:51आवकर भाव आवकर वेग पाट्खेक अपने संगे बहाए कलजात
  146. 9:51–9:54इस सुदार कत्धाख प्रभाव के कतो सकतो लजात
  147. 9:54–10:00एक ता पाट्ख रूप में जखन हम एडेखफ जे ओही आनात बच्चक नाम पर थखी बहेरा लगचे
  148. 10:00–10:04तो हमर अक्रोष थेके दारक प्रती चरम पर पहुंजात
  149. 10:04–10:06एक तम सवबावे कची
  150. 10:06–10:12आई यी हमरा सब के एही चर्चाक अंतिम अस सब सजटिल बिन्दु पर लावे देई तची
  151. 10:12–10:22अप्रादी सबक पतनक के लेल, केवल मनोवाग ज्यानेक अ अलोकिक अप्राद बोद पर निरभरता, कता क्यदार्त्वादी संगर्स के कमजोर करता थाची.
  152. 10:23–10:26इएक तब होते ही सुख्श मामुदा महत्पोनवलो कन अची.
  153. 10:26–10:30जखन याक्रोश चरम पर अच्छ, तो उकर समवदान कोना होई तच्छे अपन्न्यास में?
  154. 10:31–10:37अपन्न्यास का अंतिम हिस्चा लग भक पन्द्रहम अस्वन्हम सास का अस्पास.
  155. 10:37–10:45जखन कता आपन चरम पर होई तची जखन पाथक चाहतची जई आब एही खलनायत सबक अन्त होई
  156. 10:45–10:47मुदा होते की होई तची
  157. 10:47–10:56होते हम देखची जगखनायक सब जना बतुकनात, चंदरपाल वा ब्रुम का हार, कक्रो भोतेक, वा कानुनी विजैसन नहीं होई तची
  158. 10:56–11:00उसब केवल सप्नाम पानी तबकेत देखेत थचत्छती
  159. 11:00–11:02भूथ सदेरायत चत्छती
  160. 11:02–11:03वा अपन बच्चा सब के
  161. 11:03–11:06वा पोतिक प्रष्नसा आत्मगलानी सब भरी जाएच्छती
  162. 11:06–11:10अदोसर दिस, देविका, अनन्द, वग गोपक
  163. 11:10–11:12यतार्त वादी महनत चफी
  164. 11:12–11:19उसब गाम गाम जाकर नाम जम्मा करहल चती, जन जागरन करहल चती, पसीना बहारहल चती.
  165. 11:19–11:24आई यी मनोवै ग्यानिक समादान बहुत आमुर्थ अब बहुत अप्स्ट्ट्रक्त लगे तची.
  166. 11:24–11:28लागे तची जेना भहोतिक संगर्षक कोनो मोल नहीरहल.
  167. 11:28–11:45इबाज सत्ते अचे, जादुई यतार्थवादक प्रयोग नीक अचे, मुदा की एही शाक्षे का आदार पर इनिशकर्ष निकालल जाजगे तचे, जे अलोकिक न्याए यतार्थवादी न्याय सब भेसी शकतिषाली अची?
  168. 11:45–11:46तब आहाके सुजावचे.
  169. 11:46–11:53वहांग शुजाव अची जे जादूई यदार्थवाद आब वूथ सबख उपस्तितिक संगे संगे,
  170. 11:53–11:58कल नाएक सबख एदार्थवादी अथ़ोष परिनाम से हो दिखाओल जाए.
  171. 11:58–12:01जाही सा पीटिद सबख संगर्ष सार्थग बुजाए.
  172. 12:01–12:02अग, बलकुल.
  173. 12:02–12:06मुदा इत्ते हम एक तप पैग और सहमती जतावचाव.
  174. 12:06–12:08कहो की बात अची?
  175. 12:08–12:12देखो साहिट्ते में मनो वैग्यानिक पतन बहुत प्रभावशाली हो तची.
  176. 12:12–12:14आहां शेक्स पीर का मैखबेत के देखो.
  177. 12:14–12:16अचा मैगबेत.
  178. 12:16–12:18उते मैगबेत का हार कोनो तलवार सबहले,
  179. 12:18–12:20अकर अपन अप्राद बोज्सा होईता चे
  180. 12:20–12:24लेडी मेखवेद का हाच सा खून का दाग नी चूते टचे
  181. 12:24–12:25इबात ता चे
  182. 12:25–12:30अ मनो वैज्यानिक पतन साहित्तिए के एक ता मास्ट पीस अची
  183. 12:30–12:34तक टकी हम्रा सब के एते अकर पून रूपें हटावक ची
  184. 12:34–12:50अपन पोतिक मासुम सवाल से भितर से तूटी जानाये, मनेवकर आतमाक मरी जानाये, साहित्ते कि लिल कम शक्ती शाली अची, हमरात लागत अची यी बहुत काभ्यात्मक निया आची.
  185. 12:50–12:59आहा की बात बहुत गहेर आची, आँ मैक्भेध्धध उदारन इचर्चा की एक ता नुँ उचाईद रहल ची,
  186. 12:59–13:07आम आहाक तर्कसें पुरन सहमत ची, जे आतमाक मुद्ट्यो एक ता बहुत सकतीशाली काव्यात्मक नियाए आची.
  187. 13:07–13:09ता फिर समस्या कते आची?
  188. 13:09–13:18समस्या इ आची जे आहा इ से हो मोन राकूं, जे मैगबे तक कता केवल मनो वैज्यानिक रूपे नहीं समाप्त भेल चल.
  189. 13:18–13:19मने?
  190. 13:19–13:23उके मल दरो कवा पागल भोई कव गदी से नहीं हतल.
  191. 13:23–13:27मैगबे तक यूध में बहुतिक पराजे से हो भेल चल.
  192. 13:27–13:31अखरा अपन कर्मक भूथिक परिनाम से हो भुगते परल्ज्छल
  193. 13:31–13:37बिल्कुल आए दे गोही सबख़ भीच जल समादी में हम्रा सब एक ता विक्तिगत महत्वा कान्शाक कता नहीं पडे रहल ची
  194. 13:37–13:41उक्रा आपन कर्मक बहुतिक परिनाम से हो भुगते परल्षल.
  195. 13:41–13:50बिल्कुल आए ते गोही सबख भीच जल समादी में हम्रा सब एक्ता विक्तिगत महत्वा कान्शाक कता नहीं पडे रहल ची.
  196. 13:50–13:57इग्ता आचे व्यवस्ताक ब्रस्ताचार्क अशोषक अशोषित के भीच्क संगर्षक
  197. 13:57–14:01एक दम जा एक ता समाजिक आर्थिक संगर्षक कठा में
  198. 14:01–14:04खलनायक केवल एही लेहारी जाएत अचे
  199. 14:04–14:08कारन उक्रा रात में निन्न नहीं आभी रहाल आची
  200. 14:08–14:12ता इ उही शोषित लोकक संगर्ष के अप मानित करब भेल?
  201. 14:12–14:17एकर मानिब हेल जे हम्रा सब के केवल एही बातक प्रतिख्षा करबाक अची
  202. 14:17–14:19जे शोषक को जमीर जाग जाए.
  203. 14:19–14:22मुदा यतारत में एहन नहीं होईत अचीना
  204. 14:22–14:27देविका अगोपक जे संगर्ष थी उ व्यवस्ताके बदल्बक लेल आची.
  205. 14:27–14:32हम यी नहीं कह रहाल ची जे मनोविग्यानिक पतन के पुन रुपें हटा देल जाए.
  206. 14:32–14:36बरु वोक्रा बहुतिक परिडामक संगे संथुलित करवाक अची,
  207. 14:36–14:42जाहिसा गामक लोकक जन आन्दोलन केवल भूथ के बरोसे नहीं रहे जाए.
  208. 14:42–14:45आब हा वहां हमर बात पूरन रूपेड भूजी गेलो.
  209. 14:45–14:48मने जे उकर जमीर जागनाई वा भूथ सदरा बनाई,
  210. 14:48–14:50उकरा कमजोरी बन सकईतची,
  211. 14:50–14:53उकरा विटर से खंडित कर सकईतची.
  212. 14:53–14:58मुदा अंतिम प्रहार अ अंतिम विजै गामक लोकक संगर्ष्छे आभाई
  213. 14:58–14:59एक दम सही
  214. 14:59–15:04तखान हमरा सब एकरा कता के स्थर पर कोना लागु कर सके च्ये
  215. 15:04–15:05कोनो तोस उपाए
  216. 15:05–15:09एकर बहुत सुन्दर अथ फोस उदारन एभा सके तची
  217. 15:09–15:12जगन नामक अभिलेक बने तची
  218. 15:12–15:18जेकरा गावक लोक मिली के बनार हल जधिन, तो उकरा सा अप्रादे सब के केवल सपना नहीं आबे.
  219. 15:18–15:19तकी हुए.
  220. 15:19–15:26दिखायल जाए जि कोना देविका अनिशान तक दिजितल जाग्रुक्ता अभ्यान वा गावक बच्चा सब के नाम पात
  221. 15:26–15:30एक ता एहन वास्तविक दिजिटल फुट्प्रिंट तभीरे तची
  222. 15:30–15:33जे सीदे चंद्रपालक तगीक धन्दा के
  223. 15:33–15:35बेनकाप कर दे तची
  224. 15:35–15:37पूलीस वप्रशासन के सुजा?
  225. 15:37–15:40आ, आ, अकर धन्दा बहुत एक रुप से बन्द बोजा थची
  226. 15:40–15:42अब बतुक नात्ख संदरभ मैं?
  227. 15:42–15:45जखन गावक लोग संगजित होई तची
  228. 15:45–15:48तब बतुक नात्ख जोथा काग्जात अची
  229. 15:48–15:51जिक्र बल पर उत्तीन सो लाश के ती साभित की ने अची
  230. 15:51–15:54उो काग्जात कोना न्यायालेक बाहर
  231. 15:54–15:58गामक विरोद अतत्तिसब के कारन रड्दी बहुजात अची?
  232. 15:58–16:01देखायल जाए जे अलोकिक दर के संगस संगे
  233. 16:01–16:05हुणकर बहुतिक साम्राज्जक पतन से हो महाराला चे.
  234. 16:05–16:06इक दम.
  235. 16:06–16:08जगन भूद उक्रा दरावे तची
  236. 16:08–16:11तो उदरावक जे गल्तिक करेट ची
  237. 16:11–16:18उही गल्तिक पएदा उठायत क, गामक लोक उक्रा कानुन अ समाजक सोजा पराजित करेच छती.
  238. 16:18–16:22बहुत नीक, मने मनोवैग्जानिक अप्राद बोद,
  239. 16:22–16:25उकर पतनक कारन वा उद्प्रिरक बने,
  240. 16:25–16:28मुदा पतनक स्वरुप वास्त्विक अबहुतिक हुए.
  241. 16:28–16:38जाही सां, देविका अनन्द अगोपक के जे संगर्ष अची, जे उ इतिक पसीना बहुलने अची उ बेकार नहीं लागे.
  242. 16:38–16:48पात्खके ये सन्तोश भेटग, जे संगर्ष्षा व्यवस्ता बदले तची, संगर्ठन्सा अन्न्याये पर विजैई प्राप्तोई तची, केवल भूथ वबाग्ग्षा नही.
  243. 16:48–16:49एक्दम सही.
  244. 16:49–16:53इई संटुलन कता केन बहुत मजबूती प्रदान करत.
  245. 16:53–16:57इई माजिकल रेलिजम केन एक्टाईतार्थ वादी उद्दिष्ष देत.
  246. 16:57–17:01अप पाथक केन एक्टा समपून असंटुष्ट करेवला अंत देत.
  247. 17:01–17:11जखन पात्खप पूथी बन्द करत, तो उकर मन में इआशाजगल रहत, जे आम लोकक सम्लित प्रे आच्सां, पैएग सप्ठ ता सिहु उखाडल जासकत अची.
  248. 17:11–17:12बलकोल.
  249. 17:12–17:18हम्रा लागग तची, इसब सुजाव एही सामगरी के एक ता नव उचाई पर लोगाईत.
  250. 17:18–17:33अगराजान समेट के कही ता एरचना अपन भाल संसकरनक उदेश्व अविशे वस्तूक जतिलताक भीचक दूरी के कम कोस सकएत अची, जो कता पूरन रूपेंड बच्चा सबक द्रिष्टी साथ दिखाया जाय.
  251. 17:33–17:35अआ, यी पहल कार्च अची.
  252. 17:35–17:49तो सर कताक विबिन आदूनेक अप्रादख उप्शाखा सबखक के समेटी का, उक्रा सीदे म्रत्मस्दूर सबखक मुल भावनात्मक तता अठेके दार कलालस सन जोडल जाए, जाए से पाथक क सहानबुती एक जगा कंद्रित रहे.
  253. 17:49–17:58अट्ते सर जे अलोकिक न्याय आ मनोवैग्यानिक पतन के तोस यदार्त्वादी आ बहुतिक परिनामक संगे जोडल जाए.
  254. 17:58–18:01जाहे सद संगर्षक वास्ट्विक महत्वाई स्थापित बहुसके
  255. 18:01–18:06ये एक ता बहुती अद्वित्ये अख्कल्पना शील अ गहन सामगरी अची
  256. 18:19–18:21पहिग लोग के सुहु जग्जोरी कर अग्देत
  257. 18:21–18:27लेक्ध्केन, हुंकर एह, अद्वितिया आग्गाँन काजलेल, बहुत-बहुत द्श्नेवाद
  258. 18:27–18:33हम चाहब, जे आहाए सुजहाव साप पर विचार करू, आज सुद्दारक संगे,
  259. 18:33–18:35अजोकले लेत्बे

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आई हम्रा सब गजेंदन ताकुरक उपन्यास, गोई सब का भीच जल समादिक आईविमरश्छ में, गामक लोग कता औडलोकिक तत्व अब भ्रष्टा चारक विरुद संगरष्च के विष्लेशन कर रहल ची. हमर पहल बात सीदे आईपर आफी, जो उपन्यासक बाल संसक्रन्क रूप में प्रस्तूती, आईकर अत्तिदिक जतिल विशाय वस्तूके भीच एक ता बआएग वेचारिक दूरी आची. आई, आई दूरी साप दिखाई ता चे? मने इर उच्ना मुल रूपेन बाल साहितेक रूप में प्रस्तूत आची मुदा आही में जे विशेः सब आची से बहुत बहरी आची जन प्ल दूरगखतना में तीन सो मज्दूरक जल समादी अग, उदिजितल एरेस्ट वाला बाथ से हूँ? बलक्ल, दिजितल अरेस्ट सा उज्वल जा का आत्म हत्या, फिर फूल मतिक संगे देहिवेआपार, अहुंक्कोंग दरी पस्वरल मनी लाँण़्रिंक का जाल, इसब्त आँ एक ता बच्चाक मनोवे ग्यानिक समच के लिल बहुत खन्दिच थे. एक दम सतिक बात का लूहा जखन कोनो पाथक मने विशेशक अभीबावक जे आपन बच्चा के एक तफ सुनारो अल चती उईक ता बाल संसकरन पोठी उटबे इच्छती उईक ता खास तरह की सरलता का पिक्षा कर एच्छती आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आ� आप आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� अगर बाल चाहित्ते में देव्यापार आत्म अद्या वा म्रित्त्य।जका विश्याय राखवे नहीं चाही? आँ... इएक ता पैग बहस्क विश्याय जी जे हम्रा सब परमप्रागत बाल कता सब दिखी ये ये एक ता पैग बहस्ग विश्या या ची जे हम्रा सब परमप्रागत बाल कता सब देखी जना ग्रिम ब्रदर्स का कता सब तो उते सहो बहुत क्रूर्ता आची आआ, उतम रिट्तिव है चे, चाल आचे बलकुल तकी हम्रा सब के यी सब विषे वस्त। पूरन रूपे हटाबख आची या मात्र दिखावक नजरीया बदलबख आची की एक रा एक टार्क, फेबल वा कत्ठा रूपक जका प्रस्तूत कैलासू। इस समस्या दूर नहीब हो सके तच् अहक एटर्क बाग मैंबूत अची और ग्रिम ब्रदर्सको दाहरन्तम भिल्कुल सत्ही कचे मुदा विचार करू जे ग्रिम ब्रदर्सक्कता सब में क्रूर्ता कोना सोजा अवाई टच उ जादोई होगे टच एक दम उकर एक ता फन्तैसी वला आव्रन होईते थे, उतै अंतर रश्च्ट्रिया मनी लाँडिंका विट्या विव्रन न नहीं होईत अच्छे. आच्छ! तो हागक मतलब अच्छी, जे विवरन का यठार्थ वाद समस्या अच्छी? अपने अनन्या वा गामक उ बच्या सबक द्रिष्टी सा जे चन्ना गाची मे खेले चाथीन. बलकोल, जाहेसन इसब्ता गंभीर विश्य, बाल सुलब रूप मे एक ता बच्यक चेतनक फिल्तर सा पार भेक, उक्रा पोण रूप से बच्चा सब के नजर्ये सब प्रस्थ॥ काईल जाए. मने अनन्या वा गामक उ बच्चा सबक द्रिष्टिसा जे चन्ना गाच्षी में खेले च्ठें. भिल्कुल. जाएसन इसब्ता गंभीर विष्टाए, बाल सुलब रूप में, अग, इक ता बच्चक चेतनक फिल्तर सब पारभेक के सुजहा आवई बाद भहुत नीक अच्छे मने हम्रा गटना के नहीं बदल बखची बलकी उक्रा देख्वा कर लेंस बदल बखचे एक दम सही तएख रा कोना केल जासके तची कोनो थो सुदाहरन? दिको अ उपन्यास में, हांकूंकर अप्रादी लाओ किनहंग, वाहा प्रवाद कर अदवर्द ब्रुम कर अंप्राष्ट्रीये व्यापारक, जे विस्त्रत विव्रन अची, उक्रा बहुत कम करल जासके तची, वाहाटाल जासके तची. कारन एक्ता बच्चा के हंकोंका शिल, कमपनी सब कार्या प्रनाली नाई बुजी परत. बलक्कुल नबुजद. एकर बदला में यी देखाल जाए, जे गाव का बच्चा सब जगन चन्ना गाची में कबद्दी केले थ चतीन, तो हुंकर उ अलोकिक नीम कोना काज करे थाची जैना दाउ पर कोनो अंक नाई, बलके म्रित, मस्दूरक, चोराल गेल नाम भाजवा आँ, इ नीम कोना गाव का समस्या सब के भुज्बा में मदद करे थाची जेना उज्वेलक म्रित्य। जे एक ता बहुत दुखध गतना आची उक्रा एक ता अंट्राश्ट्रीः साविबर क्राईम रिएपोट कजे का नहीं देखाल जाए ता उक्रा बच्चा सबबक द्रिस्टी से देखाल जाए अग, दिखाओल जाए, जे कोना हूंकर एक ता प्रीजन एक ता अद्दिष्य जाएदूी राक्षस से दराग के अपन जान दो देलक. औ, समपुन कता नामा पाट्शाला मे पड़ाईत बच्चा सबख, सीमित मुदग गेहर द्रिष्टी सब प्रस्थ॥ कराएजाए. एक दम! हम भूजी रहल ची जक उन कता है एक ता बच्चाक नजरिज से देखल जाएत तो उ दिजितल अरेस्ट के कुनो वित्य अप्रादख रूप में नहीं देखत नहीं उक्रा एक ता अद्द्रिष्च्यख्होग के रूप में देखत आए जे कर कारने उकर गाम के लोग दरायला ची इक कताक औरो अदिक दरावना अबहुनात्मक बनादेद आई द्रिष्टी कोन नकेवल बाल संसकरनाक वादा के पूरा करत बलकी उही लक्षित पाथाख के लेल कताक अदिक प्रभाव्शाली से हो बनादेद बिल्कुल, एक कर संगे ईब भडलाव एक ता दोसर पैक समस्या के से हो सुता सुल्जा देद. कताक मुल भाअनात्मक केंदर बिन्दू, जे पूल्द्रगठना का मरत्मज्दूर चती, उ विबिन अदूनिक अप्रादध, उप कता सब कारनन से पाचा चुटी जाईता ची. इक ता बहुत महत्वपून सन्रचनात्मक बिन्दू आची. जोखन की इगता क मुख्ये जान अची आआ, कोनो सहु उत्क्रिष्ट कता के एक ता ह्रिदै होई तची जतैसे अकर सभेता रक्त संचार होई तची एही उपन्यासक हिर्दै अपूल्दुर्खतना आची इक्दम, इक्दा नन्द आरुक्षनक पुल्दुर्गधना के लडाय से सुरू होई तची. उद्रिष्य कते क्मार्मिक अची, जटै तीन्सो लाश अटीस नामक दून्द अची. व्यवस्ता तीन्सो लोकक म्रित्यो से मात्र तीस लोकक म्रित्यो मानी रहे लची. जाहे सा मुआवजा और जवाब देही से बचल जासके इएक ता एहन प्रस्थान बिन्दू अची जे पाटक के भितर दर रहिला दे तची मुदा जहेना जहेना कत्ठा आगा बड़े तची य अनलाई जुवा अदिजितल अरेस्ट, देव्यापार अर करोना कालक ब्रस्टाचार जका अलग-लग शाक्खा में बती जाए ची. इस सव विसे या ब्रस्टाचारक मूल छीम से जुडल जरूर अची. मुदा एक्रासा पात्कस सपका मुल सहनुब हूती, जे भिस रेसर और सर्युजका उही म्रित मज्दूरस सचल. ओ पुर्न रूपें कमजोर भहजाई तची, ये विख़्राो कताके प्योफ के कम कदे तची. लेखकक मन्सायता सपष्ट आची उ विवस्थाक समग्र ब्रस्टाचार के दिखावे चाहच्छती. आआ, उ दिखावे चाहच्छती जे इख्णो एक ता चोट्मोट �theकिदारक गलती नही आची, बल की ये एक ता अंतराश्ट्रीये और सर्वव्यापी बीमारी अची मुदा कता शिलपक अस्टर पर एकर परिनाम की होई तची उकर मुल भाहाव आश्कती गमाए जाए तची भिल्लकुल पात्ख एक ता म्रित मस्टूरक बच्या सजुडाई तची मुदा 10 पन्नाक बाद, उक्रा मालविका ग्रींक, देभ्यापार, वा चंद्रपाल, बत्राग, दिजिटल ठगिक विस्तार पड़ाएक पडितची. एही सवो पात्खक मन में जे क्रो द्हगनी, उही मस्दूरक लेल, जली रहल चल, उह मन्द भाजाएतची. आहाक यी नदीवाला आनलोजी मने जे हम दिल हुँ से आहाक सतीक लागल आहाक यी नदीवाला आनलोजी बहुत सतीक चै. कता के वापस उही मूल दार में लावे लेल एक ता मस्वुत बान्द बनावक अविषकता चै. आहाक सुजाओ की अच्छ? अग तात्पर ये अची जिख खलनायक एके रहेत अन्नव अप्राद कषिकार सो हो उही पुराना पीरित परिवारक लोक होए. एक दम सही. अग रा कोना स्तापित के लिए जासके अप्रादित सब उप्कता सब के कम करे लगाए. ज़ाहा सव कताग भोगोलिक अ विषेगत फलाउ कम हुए अ केंद्र बिन्दु एक दम सबष्ट अदार्दार रहे आग ताद्पर ये अची जि खलनायक एक रहेत आन्नव अप्राद कषिकार सो उही पुराना पीरित परिवारक लोक हूँए एक दम सही अगरा कोना स्तापित के लिए तची जाई से इस स्वाभाविक लागे? दिखो, अपन्यास मे एक ता बहुत पैग विश्याय अची, दिजितल म्युल काताक. अप अपन्यास मे चंद्रपाल बत्राजका पात्र इखाज कर रहल चती, गरीब लोके खगी रहल चती. ता आजक सुजाव यए आची जे ये कोनो अन्जान गरीभ नहीं हूँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँ अब उब उब उबज्टाचाचारक पैसा गूमारहल आची अब उब उबज्टाचारक पैसा गूमारहल आची अपन ब्रष्टा चारक पझिसा गूमार है लगछी ओ, यी तब बहुत गहेरा क्रूर भाद बहेगेल एकर माने अची जि तेकिदार पहिने उकर पिताक जान लेलक आआब उकर बच्चक भविष्छे आप पहिचान से होचारा रहा लगछी इदुगुन्ना अन्याई भेल भिल्कुल इहेसा गामगर नारीकेल आवकर शोषक कबीच्च कषंगर बहुत अदेक सीथा अव व्यक्तिगत लागत पाटक के इनही लागत जे अगोनो नव साविबर अप्राद कता पड़ी रहा लगत नहीं लागत बल की इलागत जे इवही तीन सो मरित मस्दूरक नयाए से जुडल सीथा लडाए या चे आजे कहल ये ता वही नदी वलायना लोगी पर वापस जाओ ते इवन दीक सब चोट दहरन के फिर से मुख्धार में मिला दिल जाएद आवकर भाव आवकर वेग पाट्खेक अपने संगे बहाए कलजात इस सुदार कत्धाख प्रभाव के कतो सकतो लजात एक ता पाट्ख रूप में जखन हम एडेखफ जे ओही आनात बच्चक नाम पर थखी बहेरा लगचे तो हमर अक्रोष थेके दारक प्रती चरम पर पहुंजात एक तम सवबावे कची आई यी हमरा सब के एही चर्चाक अंतिम अस सब सजटिल बिन्दु पर लावे देई तची अप्रादी सबक पतनक के लेल, केवल मनोवाग ज्यानेक अ अलोकिक अप्राद बोद पर निरभरता, कता क्यदार्त्वादी संगर्स के कमजोर करता थाची. इएक तब होते ही सुख्श मामुदा महत्पोनवलो कन अची. जखन याक्रोश चरम पर अच्छ, तो उकर समवदान कोना होई तच्छे अपन्न्यास में? अपन्न्यास का अंतिम हिस्चा लग भक पन्द्रहम अस्वन्हम सास का अस्पास. जखन कता आपन चरम पर होई तची जखन पाथक चाहतची जई आब एही खलनायत सबक अन्त होई मुदा होते की होई तची होते हम देखची जगखनायक सब जना बतुकनात, चंदरपाल वा ब्रुम का हार, कक्रो भोतेक, वा कानुनी विजैसन नहीं होई तची उसब केवल सप्नाम पानी तबकेत देखेत थचत्छती भूथ सदेरायत चत्छती वा अपन बच्चा सब के वा पोतिक प्रष्नसा आत्मगलानी सब भरी जाएच्छती अदोसर दिस, देविका, अनन्द, वग गोपक यतार्त वादी महनत चफी उसब गाम गाम जाकर नाम जम्मा करहल चती, जन जागरन करहल चती, पसीना बहारहल चती. आई यी मनोवै ग्यानिक समादान बहुत आमुर्थ अब बहुत अप्स्ट्ट्रक्त लगे तची. लागे तची जेना भहोतिक संगर्षक कोनो मोल नहीरहल. इबाज सत्ते अचे, जादुई यतार्थवादक प्रयोग नीक अचे, मुदा की एही शाक्षे का आदार पर इनिशकर्ष निकालल जाजगे तचे, जे अलोकिक न्याए यतार्थवादी न्याय सब भेसी शकतिषाली अची? तब आहाके सुजावचे. वहांग शुजाव अची जे जादूई यदार्थवाद आब वूथ सबख उपस्तितिक संगे संगे, कल नाएक सबख एदार्थवादी अथ़ोष परिनाम से हो दिखाओल जाए. जाही सा पीटिद सबख संगर्ष सार्थग बुजाए. अग, बलकुल. मुदा इत्ते हम एक तप पैग और सहमती जतावचाव. कहो की बात अची? देखो साहिट्ते में मनो वैग्यानिक पतन बहुत प्रभावशाली हो तची. आहां शेक्स पीर का मैखबेत के देखो. अचा मैगबेत. उते मैगबेत का हार कोनो तलवार सबहले, अकर अपन अप्राद बोज्सा होईता चे लेडी मेखवेद का हाच सा खून का दाग नी चूते टचे इबात ता चे अ मनो वैज्यानिक पतन साहित्तिए के एक ता मास्ट पीस अची तक टकी हम्रा सब के एते अकर पून रूपें हटावक ची अपन पोतिक मासुम सवाल से भितर से तूटी जानाये, मनेवकर आतमाक मरी जानाये, साहित्ते कि लिल कम शक्ती शाली अची, हमरात लागत अची यी बहुत काभ्यात्मक निया आची. आहा की बात बहुत गहेर आची, आँ मैक्भेध्धध उदारन इचर्चा की एक ता नुँ उचाईद रहल ची, आम आहाक तर्कसें पुरन सहमत ची, जे आतमाक मुद्ट्यो एक ता बहुत सकतीशाली काव्यात्मक नियाए आची. ता फिर समस्या कते आची? समस्या इ आची जे आहा इ से हो मोन राकूं, जे मैगबे तक कता केवल मनो वैज्यानिक रूपे नहीं समाप्त भेल चल. मने? उके मल दरो कवा पागल भोई कव गदी से नहीं हतल. मैगबे तक यूध में बहुतिक पराजे से हो भेल चल. अखरा अपन कर्मक भूथिक परिनाम से हो भुगते परल्ज्छल बिल्कुल आए दे गोही सबख़ भीच जल समादी में हम्रा सब एक ता विक्तिगत महत्वा कान्शाक कता नहीं पडे रहल ची उक्रा आपन कर्मक बहुतिक परिनाम से हो भुगते परल्षल. बिल्कुल आए ते गोही सबख भीच जल समादी में हम्रा सब एक्ता विक्तिगत महत्वा कान्शाक कता नहीं पडे रहल ची. इग्ता आचे व्यवस्ताक ब्रस्ताचार्क अशोषक अशोषित के भीच्क संगर्षक एक दम जा एक ता समाजिक आर्थिक संगर्षक कठा में खलनायक केवल एही लेहारी जाएत अचे कारन उक्रा रात में निन्न नहीं आभी रहाल आची ता इ उही शोषित लोकक संगर्ष के अप मानित करब भेल? एकर मानिब हेल जे हम्रा सब के केवल एही बातक प्रतिख्षा करबाक अची जे शोषक को जमीर जाग जाए. मुदा यतारत में एहन नहीं होईत अचीना देविका अगोपक जे संगर्ष थी उ व्यवस्ताके बदल्बक लेल आची. हम यी नहीं कह रहाल ची जे मनोविग्यानिक पतन के पुन रुपें हटा देल जाए. बरु वोक्रा बहुतिक परिडामक संगे संथुलित करवाक अची, जाहिसा गामक लोकक जन आन्दोलन केवल भूथ के बरोसे नहीं रहे जाए. आब हा वहां हमर बात पूरन रूपेड भूजी गेलो. मने जे उकर जमीर जागनाई वा भूथ सदरा बनाई, उकरा कमजोरी बन सकईतची, उकरा विटर से खंडित कर सकईतची. मुदा अंतिम प्रहार अ अंतिम विजै गामक लोकक संगर्ष्छे आभाई एक दम सही तखान हमरा सब एकरा कता के स्थर पर कोना लागु कर सके च्ये कोनो तोस उपाए एकर बहुत सुन्दर अथ फोस उदारन एभा सके तची जगन नामक अभिलेक बने तची जेकरा गावक लोक मिली के बनार हल जधिन, तो उकरा सा अप्रादे सब के केवल सपना नहीं आबे. तकी हुए. दिखायल जाए जि कोना देविका अनिशान तक दिजितल जाग्रुक्ता अभ्यान वा गावक बच्चा सब के नाम पात एक ता एहन वास्तविक दिजिटल फुट्प्रिंट तभीरे तची जे सीदे चंद्रपालक तगीक धन्दा के बेनकाप कर दे तची पूलीस वप्रशासन के सुजा? आ, आ, अकर धन्दा बहुत एक रुप से बन्द बोजा थची अब बतुक नात्ख संदरभ मैं? जखन गावक लोग संगजित होई तची तब बतुक नात्ख जोथा काग्जात अची जिक्र बल पर उत्तीन सो लाश के ती साभित की ने अची उो काग्जात कोना न्यायालेक बाहर गामक विरोद अतत्तिसब के कारन रड्दी बहुजात अची? देखायल जाए जे अलोकिक दर के संगस संगे हुणकर बहुतिक साम्राज्जक पतन से हो महाराला चे. इक दम. जगन भूद उक्रा दरावे तची तो उदरावक जे गल्तिक करेट ची उही गल्तिक पएदा उठायत क, गामक लोक उक्रा कानुन अ समाजक सोजा पराजित करेच छती. बहुत नीक, मने मनोवैग्जानिक अप्राद बोद, उकर पतनक कारन वा उद्प्रिरक बने, मुदा पतनक स्वरुप वास्त्विक अबहुतिक हुए. जाही सां, देविका अनन्द अगोपक के जे संगर्ष अची, जे उ इतिक पसीना बहुलने अची उ बेकार नहीं लागे. पात्खके ये सन्तोश भेटग, जे संगर्ष्षा व्यवस्ता बदले तची, संगर्ठन्सा अन्न्याये पर विजैई प्राप्तोई तची, केवल भूथ वबाग्ग्षा नही. एक्दम सही. इई संटुलन कता केन बहुत मजबूती प्रदान करत. इई माजिकल रेलिजम केन एक्टाईतार्थ वादी उद्दिष्ष देत. अप पाथक केन एक्टा समपून असंटुष्ट करेवला अंत देत. जखन पात्खप पूथी बन्द करत, तो उकर मन में इआशाजगल रहत, जे आम लोकक सम्लित प्रे आच्सां, पैएग सप्ठ ता सिहु उखाडल जासकत अची. बलकोल. हम्रा लागग तची, इसब सुजाव एही सामगरी के एक ता नव उचाई पर लोगाईत. अगराजान समेट के कही ता एरचना अपन भाल संसकरनक उदेश्व अविशे वस्तूक जतिलताक भीचक दूरी के कम कोस सकएत अची, जो कता पूरन रूपेंड बच्चा सबक द्रिष्टी साथ दिखाया जाय. अआ, यी पहल कार्च अची. तो सर कताक विबिन आदूनेक अप्रादख उप्शाखा सबखक के समेटी का, उक्रा सीदे म्रत्मस्दूर सबखक मुल भावनात्मक तता अठेके दार कलालस सन जोडल जाए, जाए से पाथक क सहानबुती एक जगा कंद्रित रहे. अट्ते सर जे अलोकिक न्याय आ मनोवैग्यानिक पतन के तोस यदार्त्वादी आ बहुतिक परिनामक संगे जोडल जाए. जाहे सद संगर्षक वास्ट्विक महत्वाई स्थापित बहुसके ये एक ता बहुती अद्वित्ये अख्कल्पना शील अ गहन सामगरी अची पहिग लोग के सुहु जग्जोरी कर अग्देत लेक्ध्केन, हुंकर एह, अद्वितिया आग्गाँन काजलेल, बहुत-बहुत द्श्नेवाद हम चाहब, जे आहाए सुजहाव साप पर विचार करू, आज सुद्दारक संगे, अजोकले लेत्बे

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