MACHINE ASR ACCESSIBILITY AID
सिस्टम_के_मगरमच्छ_और_मिटते_नाम.m4a
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- 0:00–0:04कलपना कीजे एक बहुत विशाल पूल का निरमान चल रहा है,
- 0:04–0:10सेक्रो फीट की उचाई है, और अचाना के एक मस्दूर का संटूलन बिगरता है,
- 0:10–0:14वो नीचे उफनती नदी में गिर जाता है, और उसकी मुझ्थ हो जाती है.
- 0:14–0:15एक बहुत भयानक हाथसा.
- 0:15–0:19बलके वहां बस एक छोटी सी टिटनी है, कि वो कारिस्तल चोडकर अनुपस्तित है
- 0:19–0:26आँ, मतलप सिस्तम ने उसे मारा नहीं, बलके एक तरा से सिरे से मिता ही दिया,
- 0:26–0:28एक प्रशास की एक दिलीट बटन की तरा
- 0:28–0:29और आप अप दिलीट बटन की तरा
- 0:29–0:59वह देखाद बज़ाद बज़ाद बज़ाद बज़ाद बज़ाद बज़ाद बज़ाद बज़ाद बज़ाद बज़ाद बज़ाद बज़ाद बज़ाद बज़ाद बज़ाद बज़ाद बज़ाद बज़ाद बज़ाद बज़ाद बज़ाद बज़ाद बज़ाद बज�
- 0:59–1:04जल समादी. हम इसके अद्ध्याए शूने से प्टालिस तके हिस्से पर चर्चा कर रहे है.
- 1:04–1:09वं। सतब पर देखने से ये एक बाल कता या यूवा कता लक सकती है.
- 1:09–1:13जिस में भूथ राथ को कबदी खेलते हैं और जादूई याठार्थबादे.
- 1:13–1:23लेकिन आसल में ये ब्रष्टाचार, दिजितल दोखाद़़ी और सत्तादवारा आम आपनी के नाम को मिताने की एक बहुती रोंगते कर देने वाली आदूनिक गाता है.
- 1:23–1:27तीके तो आए ये से गेराए से समझते हैं. ये कोई सादरन लोग कता नहीं है?
- 1:27–1:57यहां जो बाज सब से आकर्ष्वक है, वो ये है के इस कहानी में जो गो ही है, जिस का मतलब मगर्मच होता है, वो कोई पानी का जानवर नहीं है, लेखख मगर्मच को उस पूरे सिस्टम का प्रतीग बनाया है, जो शोषितों के शरीर तो निगल जाता है, लेकिन उनके नाम क
- 1:57–2:02तो हाँ श्ये पर ख़ा समाज अपनी पहचान कैसे बचाटा है।
- 2:02–2:08और ये बात उस मस्दूर भिसेसर पास्वान की त्रास्दी से एक दम साफ जाती है
- 2:08–2:12जब भिसेसर एश्या के सबसे बड़े पूल से गिरकर मरता है
- 2:12–2:15जिसे कहानी में जल समादी कहागया है
- 2:15–2:18तो सिस्तम कागस पर उसकी मुद्द दर्जी नहीं करता.
- 2:18–2:20वो से हमेशा के लिए गाएप कर देता है.
- 2:20–2:22हाँ, मतलब ये मुझे ना,
- 2:22–2:25कम्ठुटर के दिजितल ट्राज्बिन की तरा लकता है.
- 2:25–2:27जब हम कोई फाण डलीट करते हैं,
- 2:27–2:29तो सर्फ उसका कंटेंट नहीं जाता.
- 2:45–2:47तो सिस्टम को मुवदा देना पडगगा
- 2:47–2:49जब आब देही लेनी पडगगी
- 2:49–2:50जाज बिठानी पडगगी
- 2:50–2:52जो की कोई सिस्टम नहीं चाथा
- 2:52–2:53बलकोल
- 2:53–2:55इसले उनके उनके लिज़े सबस्थे आसान रस्था
- 2:55–2:57यह कि उस अन्सान के वजुद को ही नकार दिया जै
- 2:57–3:00अगर उ थाही नहीं तो फिर मरागा गोन
- 3:00–3:03लिकं सिस्टम का ये गणित किना खटरनाग है
- 3:03–3:06ये तब पता चकता है जब हम आख्रे दिखते है
- 3:06–3:10एक तरव सरकारी कागस चीख चीख केर गे है
- 3:10–3:13के पुल निरमान में सर्फ तीस माटे हुए
- 3:13–3:18जब की आस्लियत में वहाद तीन सो से जआदा मज्डूर लापता है मरचुके हैं
- 3:18–3:21तीन सो जाने जु कागजों पर कभी ती ही नी
- 3:21–3:25तो आसे में इस अद्द्रिष्ः मशींटरी से लडा कैसे जाए
- 3:25–3:28कहानी में जुनेर औंजीनेर है नंद आरुक्षन
- 3:28–3:32वो सिस्तम का यह यह यह लेकिन वो इसके खलाफ खडा होता है
- 3:32–3:34और उसका हत्यार क्या है?
- 3:34–3:36बीसे सर का एक फटावा जूता
- 3:36–3:38एक बहुत ही शक्तिषाली प्रतीक
- 3:38–3:40लेकिन मुझे यह समजना है
- 3:40–3:44की एक जूता इतने बड़े सिस्तम को चनोती कैसे दे सकता है?
- 3:44–3:46कुकि वो जूता सर्व चम्डे का तुक्डा नहीं है
- 3:47–3:48जब कागज ये कह रहा है
- 3:48–3:50के भीसे सर कभी पूल पर था ही नहीं
- 3:51–3:54तो वो जूता उसके वहां होने का एक बहुतिक प्रमान बन जाता है
- 3:54–3:58वो जूता उस अनुपस्तिदी के ख्लाग एक तोस गवाही है
- 3:58–4:01अग, एक तरह से सिस्टम के जूट का पर्दापाश
- 4:01–4:07अग, और यही से अपन्नियास में एक बहुती खुबसुरत और जादूई यदार्थवादी तत्व की अंट्री होती है
- 4:07–4:11हम चन्ना काछी यानी चन्ना के बगीचे में पहुचते हैं
- 4:11–4:18आदे है, बूटों का वो बगीचा जा रात मे एक बहुत अजीब तर है कि कबद्टी खेली जाती है.
- 4:18–4:22ये कबद्टी ये दर आसल कोई खेल नहीं है, ये एक मुकद्द्मा है,
- 4:22–4:26हाँशिये के लोगों की अपनी एक आदालात, इस खेल की नियम बहुत दिल्चस्प है.
- 4:26–4:30जब कोई भूड दूसरे पाले में जाता है, जो की सिस्टम या सत्ता का पाला है,
- 4:30–4:34तो उसे एक सास में आपना नाम बोलते रहना होता है.
- 4:34–4:38वह दूब अगर सास तूटी या वो नाम बोला तो वह मेशा के लिए गायब हो जाएका.
- 4:38–4:43बिलकुल, लेकिन अगर अगर अपना नाम बोलते हुए वापस अपनी रेखा चूलेता है, तो वो बजजाता है.
- 4:44–4:50वं मतलब जब सरकारी रजिस्टर किसी का नाम मिता देता है, तब ये समाज की समहिक सम्रिती है,
- 4:50–4:54उसे नाम को बूतों की जबबन्दी के जबज़ी ज़िन्दा रग़ग़ाई है.
- 4:55–4:59एक दम सही. लेखग ये अस थापित कर रहे हैं, की जब कागगज आप को मिता दे,
- 5:00–5:03तो के बल आपकी आपनी आवाज और समाज की आद्दास्ती आप को बचाचती है.
- 5:03–5:07और नन्द आरुख्शन जब उस जुटे को सबूथ मानता है
- 5:07–5:10तो उसल में चन्ना गाची की उसी स्मिती को
- 5:10–5:14वस्तविक आडालत में मानिता दिलाने की एक उषिष कर रहा है
- 5:14–5:16आवोस बहुतिग गवाई को कानुनी रुब देरा है
- 5:16–5:23ये सच्छ में बहुती शक्तिषाली विचार है, की जो नाम फाईलों से मिता दिये गये वह रात के अंदेरे में अपनी गवाई हुद दे रहे हैं.
- 5:23–5:28लेकिन यहां बाज सच्छ में बहुत दिल्च्छप हो जाते है.
- 5:28–5:34कुंकी अगर ये कहानी सिझ गाँ एक नदी और एक पूल तक सीमित रहती,
- 5:34–5:38तो हम इसे एक पारमपर एक शोशन की कहानी मान लेतें.
- 5:38–5:41लेकेन ये सिस्टम अचानक से अबग्रेट हो जाता है.
- 5:41–5:44कहानी कंक्रीट के पूल से चलांग लगाती है,
- 5:44–5:46और सीदे साईवर सबेश में पहुट जाती है
- 5:46–5:54और सीदा 2020 की महामारी के फर्जी अखसजन बिलों से होतेवे
- 5:54–5:57राजा राती नाम के एक औनलाईं सट्टेबाजी आप
- 5:57–6:00और फिर दिजितल आरेस्ट के बहानक जाल में फ़ज जाते है
- 6:00–6:03अगर अम इसे व्यापक संदरभ से जोड़ें,
- 6:03–6:05तम देकते हैं कि तन्त्र वही है,
- 6:05–6:06मगर मच वही है,
- 6:06–6:09बस उसने अपना शिकार करने का तरीका बडल लिया है.
- 6:09–6:12पहले उईक पूल से मस्दूरों को गिराकर मारता था.
- 6:12–6:14और अब उ समाथट्फों की सक्रीन की जर ये,
- 6:14–6:16यूवाँ को मार रहा है
- 6:16–6:17इक्दम सेई
- 6:17–6:20इसे समजने किलिया हमें उज्विल जाए की कहानी पर अड़ करना होगा
- 6:20–6:23न ये कोई शाते रप्रादी नहीं है
- 6:23–6:25बस एक सादारन भेरोजकार यूवा है
- 6:25–6:28वो जल्दी पैसे कमाने के लालगच में
- 6:28–6:31अनलाई सट्टे बाजी में प्हस जाता है, कर्ज में दूपता है
- 6:31–6:33और फिर उसे एक फर्जी पुलिस वाली का फोँन आता है?
- 6:33–6:37हा, जो उसे कम्रा के सामने दिजितल अरेस्ट कर लेता है,
- 6:38–6:41वो इतना दर जाता है के अन्ध में आत्महत्या कर लेता है.
- 6:41–6:43मतलब ये सीदे सीदे हत्या है
- 6:43–6:45जिसे आत्म हत्या का रुब देदिया गया
- 6:45–6:48लेकिन मुझे यहा एक तक्नी की बाज समचनी है
- 6:48–6:48बताई एग
- 6:48–6:50एक गाँँगा सीदा सादा लगा
- 6:50–6:53हूंकोंग में बैटे किसी लाओ किन हूंग
- 6:53–6:56या साईबर ठगों के इतने बड़े नेट्वोक से कैसे जुडगया?
- 6:56–6:58मतलब कनेक्ष्ट्छन क्या है?
- 6:58–7:01ये मूल अकाूंस याने हच्चर कहतों के जरी होता है
- 7:01–7:05मूल अकाूंस, मतलब एक टरा की दिजितल सुरंग
- 7:05–7:08बिल्कुल अंतराश्ट्री ये तग और ब्रष्ट्वकील
- 7:08–7:12जैसे कहानी में लाओ किनहूंग और बतुक नात हरीहरन
- 7:12–7:16कभी भी अपने अस्ली बंग कहातों का अप्समाल नहीं करते
- 7:16–7:20वे उज्वल जैसे कमजोर भिरुजगार यूआं को लालगज देते हैं
- 7:20–7:22और उनके नाम पर खाते क्छवाते हैं
- 7:22–7:25अच्छतो सारा काला दहन, सारी खगी की रकम,
- 7:25–7:28इन मासुमों के खातों से होकर गुजरती है
- 7:28–7:31हाँ और जब जाच होती है, तो पूलिस हुंकोंग नी पूँजती
- 7:31–7:34उसीड़ा गाँउके उज्वल के पास पूँजती है
- 7:34–7:38उआद इसे लेक्हकने से स्क्रीन की गोही कहा है
- 7:38–7:40स्क्रीन का मदर मच
- 7:40–7:44अद पता है, इस मदर मच की चार पैर बताय गय है
- 7:44–7:47लालग, भै, शर्म और अकेलापन
- 7:47–7:49ये मनोविग्यान का एक बहुती सतीख विष्लेषन है
- 7:49–7:53दिके सब से बहले सट्टेवाजी के जर ये लालज जगाया जाता है
- 7:53–7:53फिर?
- 7:53–7:56फर्जी पूलिस बनके बहाई पैदा किया जाता है
- 7:56–7:56बिलकोल
- 7:56–7:58और जब यूवा फज जाता है
- 7:58–8:00तो उसे शर्म आती है
- 8:00–8:02वो अप्ते परिवार को बता नहीं पाता
- 8:02–8:03और यही शर्म
- 8:03–8:06उसे अकेले पन की तरव दھकेल देती है
- 8:06–8:09जहां स्क्रीम के उस्पार बैचा तग
- 8:09–8:11उसका मानसिक शिकार करता है
- 8:11–8:14ये एक पफेक्ट मनो विग्यानेक ट्राप है
- 8:14–8:16और फिर से, सिस्तम वही करता है
- 8:16–8:18जो उसने पुल वाले मस्दूर के साथ किया ता
- 8:18–8:20पीडद कोई दोशी टेरा दिया जाते है?
- 8:20–8:24अआ, मस्दोर काम से बाग गया और यूवाने अपनी मरजी से जान दे दी.
- 8:24–8:26कागस पर सिस्टम फिर भेदाग है.
- 8:26–8:29लिकन इस अंदेरे में प्रतिरोथ की एक नहीं आवाज जंग लेती है.
- 8:29–8:33इस दिजटल माफिया से लड़ने के लिए नहीं नहीं सामने आती है
- 8:33–8:38और ये पीटी सरव भावना से नहीं बलकी रडनीती से लड़ती है
- 8:38–8:43एक इमान्दार अड़िटर है, गोप कुमार, उज्वल की बहें देविका सा है
- 8:43–8:46और हावर्ड मे पन्नेवाली ए़ा औरुक्ष़ध है
- 8:46–8:49ये लोग मिलकर इस तन्तर को उसी की बाशा में जबाब देते हैं
- 8:49–8:52और इनकी रडन नीती सच्वे कमाल की है
- 8:52–8:56सबूतो का विकेंट्डिर कर, मतलब दी सेंट्रलाएशेशन अप एवडिन्स
- 8:56–8:58मुजे ये कन्सेप्त बहुत पशंदाया
- 8:58–9:01जब आपको पता हो के सिस्टम आपके सबूध ठबूध ठक्तर सकता है
- 9:01–9:04तो आप देटा को कई जगो पर बाड द देते हैं
- 9:04–9:06ये आजके दोर की सबसे बडी रननितिक सच्चाई है
- 9:06–9:10उन्हो ने देटा की तीन रग रग रग प्रतिया बनाई
- 9:10–9:12एक कोपी तयार की गई अडालत किलिए
- 9:12–9:14ताकी कानुनी लडाई लडी जास सकि
- 9:14–9:18दूसरी कोपी का स्तमाल हारवरड मे बेटे उस विदेशी �theके दार
- 9:18–9:24अद्वर्ट ब्रुम का पर्दाफाष करने के लिया गया जो दूर देश में बैटकर साव सुत्रा दिखने का नाटाक कर राद.
- 9:24–9:30और, तीस्री कोपी यह सबसे काव्यात्मक और जीनियस लगा.
- 9:30–9:36उनहो ने तीसरी और सबसे सुब्सित कोपी किसी कलाउट सरवर पर नहीं रख्खी
- 9:36–9:40बलकी उसे गाँउके पुराने पीपल के पेड की खो में चुपा दिया
- 9:40–9:43एक बहुती जमीनी और सुब्सित तरीका
- 9:43–9:48मतलब ज़रा सुचीए, करोडो डोलर करचकर के बनाए गय बड़े-बड़े करपरेट सर्वर
- 9:48–9:50रहक की आख की आख जासकते हैं.
- 9:50–9:54लेकिन गाँँँँ के एक पीपल के पेड में चुपी एक सादारंची हाड़्ाइव
- 9:54–9:56जिसकी रख्वाली पुरा गाँँँ कर रहो,
- 9:56–9:58उसे दुनिया का कोई है कर नहीं चूँ सकता
- 9:58–10:01क्योंकि वो हाँट़़््ाईव अब सर्फ तकनीक का इस्चा नहीं
- 10:01–10:04वो समवदाय कि समोहेख समविरती का इस्चा बन लेएग
- 10:04–10:08भिल्कुल ये दिखाता है कि तकनीक चाहे जितनी आगे बरजगाए
- 10:08–10:13नियाय की सब से मस्वूँद जड़ें हमेशा जमीन और समाथ से जुडी होती हैं.
- 10:14–10:20लेकिन उम रूकिये मुझे यहां एक बाज नियारी कहानी में अद्ध्याय तेरा में
- 10:21–10:23एक बहुत ही बहावुक आदालत का दिश्छी आता है.
- 10:23–10:53अगर ये कोई प्रट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्
- 10:53–10:55गाँवाले ज़श्न क्यो नी मनाते?
- 10:55–10:59क्योंकि अदालत का वो फैस्ला एक सिस्टम की दुसरे सिस्टम पर जीत है
- 10:59–11:05गाँवाले बहुत गेराए से समझते है कि कागस पर लिखा एक फैस्ला अईन्सान की मान्सिक्ता नहीं बड़ सकता
- 11:05–11:09मतलब आज एक मगर मच्टारा है कल कोई दुस्रा पैडा हो जाएगा?
- 11:09–11:10बलकल.
- 11:10–11:13आस्ली जी तब होती है जब उज्वल की भहन देविका
- 11:14–11:16गाँँ की यूवाँ को खत्टा करती है
- 11:16–11:19और उनहे दिजितल दोकाद़ी से बचने की ट्रेनिग दिना शुरू करती है.
- 11:19–11:25अर वो संकलप जो गाँ की महलाई गोल गेरा बनाकर लेती है
- 11:25–11:30वो वाखे मुझे यादारा है लाज अप्रादेक पीडी तक नाही
- 11:30–11:33आप शर्म अप्रादी की होनी चाही पीडित की नहीं
- 11:33–11:36इस एक वाखे में पुरे उपन्यास कर निचोड है
- 11:36–12:06ब्रश्ट्टन्त्र की आज्ली हार अदालग के हद्टोड़े से नहीं हूँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँ
- 12:06–12:36अब आप बद़़द बद़द बद़द बद़द बद़द बद़द बद़द बद़द बद़द बद़द बद़द बद़द बद़द बद़द बद़द बद़द बद़द बद़द बद़द बद़द बद़द बद़द बद़द बद़द बद़द बद़द बद�
- 12:36–12:40अर वो द्रिष्छ बहुती रहस्वमए और दरावने है
- 12:40–12:45उदारन के लिए, आम लाउ किन हंग, जो हुँगकों के एक शान्दार महल में
- 12:45–12:49बेटा है, उसे नीन नहीं आती, उसे सपने में पानी बहरतवा
- 12:49–12:52दिखाई देता है, और उस पानी में अंगिनध समाथ फोन
- 12:52–12:56और हर फों की सक्रीन से एक ही आवाज आरी एए
- 12:56–12:59मेरी मोद का फ़दा किस देश के काते में गया
- 12:59–13:03बाप्रे और साइबर ठग रागज़ सोमानी का अपना प्रिंटर
- 13:03–13:08अचानक बिना किसी कमाँड के उन सारे पीडितो के नाम चापने लकता है
- 13:08–13:09जिने उसने लुता था
- 13:09–13:11ये सब उनके अप्राद बोद का प्रकतिकरन है
- 13:11–13:14वपी में भूटों की चित्रकारी कर रही है
- 13:14–13:16और अपने दादा से पूछती है
- 13:16–13:19दादा जी आप खेल से बाहर क्यों कड़े है
- 13:19–13:21येक महतुपून प्रष्नूथ अथा है
- 13:21–13:23कि क्या अप्राद और पाप का बोज
- 13:23–13:25अगली पीडी पर हस्तान्त्रत किया जा सकता है?
- 13:26–13:28उपन्यास में गाँवाले एक नामक अभिलेक
- 13:28–13:31यानी रेकोड अप नेम्स तभीर करते हैं.
- 13:31–13:34और इसके सात ही वे एक बार का व्रित भी खीचते है है आ?
- 13:34–13:35रहा है.
- 13:35–13:37इस व्रित का सिदानत बहुत ही सबष्ट है.
- 13:37–13:40जो वेक्ती अप्राध करता है, तो अप्राधी है ही,
- 13:40–13:44लेकिन जो देक कर भी चुप रहता है, अप्राध का बोज उस पर भी है.
- 13:44–13:48बडल ततस्त रहना या आखे मून लेना भी एक तरा की गवाही है,
- 13:48–13:50शोषक के पक्ष में.
- 13:50–13:54बलकुल, जब उन प्रष्ट्वोगों के अपने ही बच्चे उन से सबाल करने लकते हैं
- 13:54–13:57जब एक पोटी पूजती है के आप खेल से बहार कियू है?
- 13:57–14:02या जब बच्चे पूछते हैं के हमारी सुक्स विद्वाँके पीचे कितने लोगों की मोड चिपी हैं
- 14:02–14:06तब चन्ना गाची की उस जादूई कबद्दी का असल मकसत पूरा हूता है
- 14:06–14:08सम्रती और सच्चाई
- 14:08–14:11आखिर कार कागस पर लिखे उन सभी जुटों को हरा देती है
- 14:12–14:14कुकि आप दूनिया से सच्च चुपा सकते हैं
- 14:14–14:16लेकिन अपनी अगली पीटी की नजरो से नहीं
- 14:16–14:18अं
- 14:18–14:20ये सच्छ में जग़ग जोड देने वाला है
- 14:20–14:22ये सब एक किताब की चर्चा नहीं है
- 14:22–14:26ये तो हमारे आजके यतार्त का सीथा सीथा आईना है
- 14:26–14:27बलकल सही का अपने
- 14:27–14:30जब हमें स्पूरी चर्चा को समेटते है
- 14:30–14:34तो ये सुचना ज़ोरी है कि आज की बागदाड़ भरी जन्दिगी में
- 14:34–14:37ये पुरी जानकारी हमारे ले क्यो माइने रकती है.
- 14:37–14:43हमें कैसे युग में जी रहे है, जागा हम सब एक देटापोईंट बन चुके है.
- 14:43–14:47ज़ाह देटा चोरी होना और दिजिटल पहचान का मिताया जाना रोज मर्रा की बात हो गये?
- 14:47–14:47हाँ.
- 14:48–14:51और ये कहानी हमें बहुत बडी सीख तेती है,
- 14:51–14:52कि हमारी स्म्रिती,
- 14:53–14:56और हमारा नाम ही हमारा सबसे बडा और शायध अखरी हत्यार है.
- 14:56–14:58जब कोई भी विशाल सस्तम,
- 15:13–15:17हमारा नाम सरीव कुछ अक्षरों का जोड नहीं है
- 15:17–15:22ये हमारे होने की, हमारे संगर्ष की सबसे प्रामानिग गवाही है
- 15:22–15:26और इसी बाथ से मुझे एक आसा उतेजक विचार आरा है
- 15:26–15:28जिस पर हमने अभी दगेराई से सोचा नहीं है
- 15:28–15:31लेकिन जो इस पूरी चर्चा से सीडा जूडता है
- 15:31–15:32आच्छा उग भी आई आई?
- 15:32–15:37जरा सोची एक लिए आज हमारा ये पूरा इंटनेट ये अनन्त सापर सपेस
- 15:37–15:42एक तरा की विषाल चन्ना गाची यानी भूथो कबगीचा नहीं बन गया है
- 15:42–15:44ये बहुत ही दिलच्छ़्टूलना है.
- 15:44–15:45है ना?
- 15:45–15:45हाँ.
- 15:45–15:48जहाँ रोज करोडों गुमनाम लोग,
- 15:48–15:49अपनी पहचान,
- 15:49–15:50अपना नाम,
- 15:50–15:53और अपना वजुद बचाने के लिये,
- 15:53–15:55आलगुरिदम के प्रदे बगे मगर मच्छों से
- 15:55–16:25अगर बद्टी तो बगद्टी तो बगद्टी तो बगद्टी तो बगद्टी तो बगद्टी तो बगद्टी तो बगद्टी तो बगद्टी तो बगद्टी तो बगद्टी तो बगद्टी तो बगद्टी तो बगद्टी तो बगद्टी तो बगद्टी तो बगद्टी त
- 16:25–16:55अगर बज़ाज़ तो बज़ाज़ा था था ज़ाज़ाज़ाज़ाज़ाज़ाज़ाज़ाज़ाज़ाज़ाज़ाज़ाज़ाज़ाज़ाज़ाज़ाज़ाज़ाज़ाज़ाज़ाज़ाज़ाज़ाज़ाज़ाज़ाज़ाज़ाज़ाज़ाज़ाज़ाज़ाज़ा�
- 16:55–16:59अगर बद्वाँ बद्वाँ बद्वाँ बद्वाँ
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कलपना कीजे एक बहुत विशाल पूल का निरमान चल रहा है, सेक्रो फीट की उचाई है, और अचाना के एक मस्दूर का संटूलन बिगरता है, वो नीचे उफनती नदी में गिर जाता है, और उसकी मुझ्थ हो जाती है. एक बहुत भयानक हाथसा. बलके वहां बस एक छोटी सी टिटनी है, कि वो कारिस्तल चोडकर अनुपस्तित है आँ, मतलप सिस्तम ने उसे मारा नहीं, बलके एक तरा से सिरे से मिता ही दिया, एक प्रशास की एक दिलीट बटन की तरा और आप अप दिलीट बटन की तरा वह देखाद बज़ाद बज़ाद बज़ाद बज़ाद बज़ाद बज़ाद बज़ाद बज़ाद बज़ाद बज़ाद बज़ाद बज़ाद बज़ाद बज़ाद बज़ाद बज़ाद बज़ाद बज़ाद बज़ाद बज़ाद बज़ाद बज़ाद बज़ाद बज� जल समादी. हम इसके अद्ध्याए शूने से प्टालिस तके हिस्से पर चर्चा कर रहे है. वं। सतब पर देखने से ये एक बाल कता या यूवा कता लक सकती है. जिस में भूथ राथ को कबदी खेलते हैं और जादूई याठार्थबादे. लेकिन आसल में ये ब्रष्टाचार, दिजितल दोखाद़़ी और सत्तादवारा आम आपनी के नाम को मिताने की एक बहुती रोंगते कर देने वाली आदूनिक गाता है. तीके तो आए ये से गेराए से समझते हैं. ये कोई सादरन लोग कता नहीं है? यहां जो बाज सब से आकर्ष्वक है, वो ये है के इस कहानी में जो गो ही है, जिस का मतलब मगर्मच होता है, वो कोई पानी का जानवर नहीं है, लेखख मगर्मच को उस पूरे सिस्टम का प्रतीग बनाया है, जो शोषितों के शरीर तो निगल जाता है, लेकिन उनके नाम क तो हाँ श्ये पर ख़ा समाज अपनी पहचान कैसे बचाटा है। और ये बात उस मस्दूर भिसेसर पास्वान की त्रास्दी से एक दम साफ जाती है जब भिसेसर एश्या के सबसे बड़े पूल से गिरकर मरता है जिसे कहानी में जल समादी कहागया है तो सिस्तम कागस पर उसकी मुद्द दर्जी नहीं करता. वो से हमेशा के लिए गाएप कर देता है. हाँ, मतलब ये मुझे ना, कम्ठुटर के दिजितल ट्राज्बिन की तरा लकता है. जब हम कोई फाण डलीट करते हैं, तो सर्फ उसका कंटेंट नहीं जाता. तो सिस्टम को मुवदा देना पडगगा जब आब देही लेनी पडगगी जाज बिठानी पडगगी जो की कोई सिस्टम नहीं चाथा बलकोल इसले उनके उनके लिज़े सबस्थे आसान रस्था यह कि उस अन्सान के वजुद को ही नकार दिया जै अगर उ थाही नहीं तो फिर मरागा गोन लिकं सिस्टम का ये गणित किना खटरनाग है ये तब पता चकता है जब हम आख्रे दिखते है एक तरव सरकारी कागस चीख चीख केर गे है के पुल निरमान में सर्फ तीस माटे हुए जब की आस्लियत में वहाद तीन सो से जआदा मज्डूर लापता है मरचुके हैं तीन सो जाने जु कागजों पर कभी ती ही नी तो आसे में इस अद्द्रिष्ः मशींटरी से लडा कैसे जाए कहानी में जुनेर औंजीनेर है नंद आरुक्षन वो सिस्तम का यह यह यह लेकिन वो इसके खलाफ खडा होता है और उसका हत्यार क्या है? बीसे सर का एक फटावा जूता एक बहुत ही शक्तिषाली प्रतीक लेकिन मुझे यह समजना है की एक जूता इतने बड़े सिस्तम को चनोती कैसे दे सकता है? कुकि वो जूता सर्व चम्डे का तुक्डा नहीं है जब कागज ये कह रहा है के भीसे सर कभी पूल पर था ही नहीं तो वो जूता उसके वहां होने का एक बहुतिक प्रमान बन जाता है वो जूता उस अनुपस्तिदी के ख्लाग एक तोस गवाही है अग, एक तरह से सिस्टम के जूट का पर्दापाश अग, और यही से अपन्नियास में एक बहुती खुबसुरत और जादूई यदार्थवादी तत्व की अंट्री होती है हम चन्ना काछी यानी चन्ना के बगीचे में पहुचते हैं आदे है, बूटों का वो बगीचा जा रात मे एक बहुत अजीब तर है कि कबद्टी खेली जाती है. ये कबद्टी ये दर आसल कोई खेल नहीं है, ये एक मुकद्द्मा है, हाँशिये के लोगों की अपनी एक आदालात, इस खेल की नियम बहुत दिल्चस्प है. जब कोई भूड दूसरे पाले में जाता है, जो की सिस्टम या सत्ता का पाला है, तो उसे एक सास में आपना नाम बोलते रहना होता है. वह दूब अगर सास तूटी या वो नाम बोला तो वह मेशा के लिए गायब हो जाएका. बिलकुल, लेकिन अगर अगर अपना नाम बोलते हुए वापस अपनी रेखा चूलेता है, तो वो बजजाता है. वं मतलब जब सरकारी रजिस्टर किसी का नाम मिता देता है, तब ये समाज की समहिक सम्रिती है, उसे नाम को बूतों की जबबन्दी के जबज़ी ज़िन्दा रग़ग़ाई है. एक दम सही. लेखग ये अस थापित कर रहे हैं, की जब कागगज आप को मिता दे, तो के बल आपकी आपनी आवाज और समाज की आद्दास्ती आप को बचाचती है. और नन्द आरुख्शन जब उस जुटे को सबूथ मानता है तो उसल में चन्ना गाची की उसी स्मिती को वस्तविक आडालत में मानिता दिलाने की एक उषिष कर रहा है आवोस बहुतिग गवाई को कानुनी रुब देरा है ये सच्छ में बहुती शक्तिषाली विचार है, की जो नाम फाईलों से मिता दिये गये वह रात के अंदेरे में अपनी गवाई हुद दे रहे हैं. लेकिन यहां बाज सच्छ में बहुत दिल्च्छप हो जाते है. कुंकी अगर ये कहानी सिझ गाँ एक नदी और एक पूल तक सीमित रहती, तो हम इसे एक पारमपर एक शोशन की कहानी मान लेतें. लेकेन ये सिस्टम अचानक से अबग्रेट हो जाता है. कहानी कंक्रीट के पूल से चलांग लगाती है, और सीदे साईवर सबेश में पहुट जाती है और सीदा 2020 की महामारी के फर्जी अखसजन बिलों से होतेवे राजा राती नाम के एक औनलाईं सट्टेबाजी आप और फिर दिजितल आरेस्ट के बहानक जाल में फ़ज जाते है अगर अम इसे व्यापक संदरभ से जोड़ें, तम देकते हैं कि तन्त्र वही है, मगर मच वही है, बस उसने अपना शिकार करने का तरीका बडल लिया है. पहले उईक पूल से मस्दूरों को गिराकर मारता था. और अब उ समाथट्फों की सक्रीन की जर ये, यूवाँ को मार रहा है इक्दम सेई इसे समजने किलिया हमें उज्विल जाए की कहानी पर अड़ करना होगा न ये कोई शाते रप्रादी नहीं है बस एक सादारन भेरोजकार यूवा है वो जल्दी पैसे कमाने के लालगच में अनलाई सट्टे बाजी में प्हस जाता है, कर्ज में दूपता है और फिर उसे एक फर्जी पुलिस वाली का फोँन आता है? हा, जो उसे कम्रा के सामने दिजितल अरेस्ट कर लेता है, वो इतना दर जाता है के अन्ध में आत्महत्या कर लेता है. मतलब ये सीदे सीदे हत्या है जिसे आत्म हत्या का रुब देदिया गया लेकिन मुझे यहा एक तक्नी की बाज समचनी है बताई एग एक गाँँगा सीदा सादा लगा हूंकोंग में बैटे किसी लाओ किन हूंग या साईबर ठगों के इतने बड़े नेट्वोक से कैसे जुडगया? मतलब कनेक्ष्ट्छन क्या है? ये मूल अकाूंस याने हच्चर कहतों के जरी होता है मूल अकाूंस, मतलब एक टरा की दिजितल सुरंग बिल्कुल अंतराश्ट्री ये तग और ब्रष्ट्वकील जैसे कहानी में लाओ किनहूंग और बतुक नात हरीहरन कभी भी अपने अस्ली बंग कहातों का अप्समाल नहीं करते वे उज्वल जैसे कमजोर भिरुजगार यूआं को लालगज देते हैं और उनके नाम पर खाते क्छवाते हैं अच्छतो सारा काला दहन, सारी खगी की रकम, इन मासुमों के खातों से होकर गुजरती है हाँ और जब जाच होती है, तो पूलिस हुंकोंग नी पूँजती उसीड़ा गाँउके उज्वल के पास पूँजती है उआद इसे लेक्हकने से स्क्रीन की गोही कहा है स्क्रीन का मदर मच अद पता है, इस मदर मच की चार पैर बताय गय है लालग, भै, शर्म और अकेलापन ये मनोविग्यान का एक बहुती सतीख विष्लेषन है दिके सब से बहले सट्टेवाजी के जर ये लालज जगाया जाता है फिर? फर्जी पूलिस बनके बहाई पैदा किया जाता है बिलकोल और जब यूवा फज जाता है तो उसे शर्म आती है वो अप्ते परिवार को बता नहीं पाता और यही शर्म उसे अकेले पन की तरव दھकेल देती है जहां स्क्रीम के उस्पार बैचा तग उसका मानसिक शिकार करता है ये एक पफेक्ट मनो विग्यानेक ट्राप है और फिर से, सिस्तम वही करता है जो उसने पुल वाले मस्दूर के साथ किया ता पीडद कोई दोशी टेरा दिया जाते है? अआ, मस्दोर काम से बाग गया और यूवाने अपनी मरजी से जान दे दी. कागस पर सिस्टम फिर भेदाग है. लिकन इस अंदेरे में प्रतिरोथ की एक नहीं आवाज जंग लेती है. इस दिजटल माफिया से लड़ने के लिए नहीं नहीं सामने आती है और ये पीटी सरव भावना से नहीं बलकी रडनीती से लड़ती है एक इमान्दार अड़िटर है, गोप कुमार, उज्वल की बहें देविका सा है और हावर्ड मे पन्नेवाली ए़ा औरुक्ष़ध है ये लोग मिलकर इस तन्तर को उसी की बाशा में जबाब देते हैं और इनकी रडन नीती सच्वे कमाल की है सबूतो का विकेंट्डिर कर, मतलब दी सेंट्रलाएशेशन अप एवडिन्स मुजे ये कन्सेप्त बहुत पशंदाया जब आपको पता हो के सिस्टम आपके सबूध ठबूध ठक्तर सकता है तो आप देटा को कई जगो पर बाड द देते हैं ये आजके दोर की सबसे बडी रननितिक सच्चाई है उन्हो ने देटा की तीन रग रग रग प्रतिया बनाई एक कोपी तयार की गई अडालत किलिए ताकी कानुनी लडाई लडी जास सकि दूसरी कोपी का स्तमाल हारवरड मे बेटे उस विदेशी �theके दार अद्वर्ट ब्रुम का पर्दाफाष करने के लिया गया जो दूर देश में बैटकर साव सुत्रा दिखने का नाटाक कर राद. और, तीस्री कोपी यह सबसे काव्यात्मक और जीनियस लगा. उनहो ने तीसरी और सबसे सुब्सित कोपी किसी कलाउट सरवर पर नहीं रख्खी बलकी उसे गाँउके पुराने पीपल के पेड की खो में चुपा दिया एक बहुती जमीनी और सुब्सित तरीका मतलब ज़रा सुचीए, करोडो डोलर करचकर के बनाए गय बड़े-बड़े करपरेट सर्वर रहक की आख की आख जासकते हैं. लेकिन गाँँँँ के एक पीपल के पेड में चुपी एक सादारंची हाड़्ाइव जिसकी रख्वाली पुरा गाँँँ कर रहो, उसे दुनिया का कोई है कर नहीं चूँ सकता क्योंकि वो हाँट़़््ाईव अब सर्फ तकनीक का इस्चा नहीं वो समवदाय कि समोहेख समविरती का इस्चा बन लेएग भिल्कुल ये दिखाता है कि तकनीक चाहे जितनी आगे बरजगाए नियाय की सब से मस्वूँद जड़ें हमेशा जमीन और समाथ से जुडी होती हैं. लेकिन उम रूकिये मुझे यहां एक बाज नियारी कहानी में अद्ध्याय तेरा में एक बहुत ही बहावुक आदालत का दिश्छी आता है. अगर ये कोई प्रट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट् गाँवाले ज़श्न क्यो नी मनाते? क्योंकि अदालत का वो फैस्ला एक सिस्टम की दुसरे सिस्टम पर जीत है गाँवाले बहुत गेराए से समझते है कि कागस पर लिखा एक फैस्ला अईन्सान की मान्सिक्ता नहीं बड़ सकता मतलब आज एक मगर मच्टारा है कल कोई दुस्रा पैडा हो जाएगा? बलकल. आस्ली जी तब होती है जब उज्वल की भहन देविका गाँँ की यूवाँ को खत्टा करती है और उनहे दिजितल दोकाद़ी से बचने की ट्रेनिग दिना शुरू करती है. अर वो संकलप जो गाँ की महलाई गोल गेरा बनाकर लेती है वो वाखे मुझे यादारा है लाज अप्रादेक पीडी तक नाही आप शर्म अप्रादी की होनी चाही पीडित की नहीं इस एक वाखे में पुरे उपन्यास कर निचोड है ब्रश्ट्टन्त्र की आज्ली हार अदालग के हद्टोड़े से नहीं हूँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँ अब आप बद़़द बद़द बद़द बद़द बद़द बद़द बद़द बद़द बद़द बद़द बद़द बद़द बद़द बद़द बद़द बद़द बद़द बद़द बद़द बद़द बद़द बद़द बद़द बद़द बद़द बद़द बद� अर वो द्रिष्छ बहुती रहस्वमए और दरावने है उदारन के लिए, आम लाउ किन हंग, जो हुँगकों के एक शान्दार महल में बेटा है, उसे नीन नहीं आती, उसे सपने में पानी बहरतवा दिखाई देता है, और उस पानी में अंगिनध समाथ फोन और हर फों की सक्रीन से एक ही आवाज आरी एए मेरी मोद का फ़दा किस देश के काते में गया बाप्रे और साइबर ठग रागज़ सोमानी का अपना प्रिंटर अचानक बिना किसी कमाँड के उन सारे पीडितो के नाम चापने लकता है जिने उसने लुता था ये सब उनके अप्राद बोद का प्रकतिकरन है वपी में भूटों की चित्रकारी कर रही है और अपने दादा से पूछती है दादा जी आप खेल से बाहर क्यों कड़े है येक महतुपून प्रष्नूथ अथा है कि क्या अप्राद और पाप का बोज अगली पीडी पर हस्तान्त्रत किया जा सकता है? उपन्यास में गाँवाले एक नामक अभिलेक यानी रेकोड अप नेम्स तभीर करते हैं. और इसके सात ही वे एक बार का व्रित भी खीचते है है आ? रहा है. इस व्रित का सिदानत बहुत ही सबष्ट है. जो वेक्ती अप्राध करता है, तो अप्राधी है ही, लेकिन जो देक कर भी चुप रहता है, अप्राध का बोज उस पर भी है. बडल ततस्त रहना या आखे मून लेना भी एक तरा की गवाही है, शोषक के पक्ष में. बलकुल, जब उन प्रष्ट्वोगों के अपने ही बच्चे उन से सबाल करने लकते हैं जब एक पोटी पूजती है के आप खेल से बहार कियू है? या जब बच्चे पूछते हैं के हमारी सुक्स विद्वाँके पीचे कितने लोगों की मोड चिपी हैं तब चन्ना गाची की उस जादूई कबद्दी का असल मकसत पूरा हूता है सम्रती और सच्चाई आखिर कार कागस पर लिखे उन सभी जुटों को हरा देती है कुकि आप दूनिया से सच्च चुपा सकते हैं लेकिन अपनी अगली पीटी की नजरो से नहीं अं ये सच्छ में जग़ग जोड देने वाला है ये सब एक किताब की चर्चा नहीं है ये तो हमारे आजके यतार्त का सीथा सीथा आईना है बलकल सही का अपने जब हमें स्पूरी चर्चा को समेटते है तो ये सुचना ज़ोरी है कि आज की बागदाड़ भरी जन्दिगी में ये पुरी जानकारी हमारे ले क्यो माइने रकती है. हमें कैसे युग में जी रहे है, जागा हम सब एक देटापोईंट बन चुके है. ज़ाह देटा चोरी होना और दिजिटल पहचान का मिताया जाना रोज मर्रा की बात हो गये? हाँ. और ये कहानी हमें बहुत बडी सीख तेती है, कि हमारी स्म्रिती, और हमारा नाम ही हमारा सबसे बडा और शायध अखरी हत्यार है. जब कोई भी विशाल सस्तम, हमारा नाम सरीव कुछ अक्षरों का जोड नहीं है ये हमारे होने की, हमारे संगर्ष की सबसे प्रामानिग गवाही है और इसी बाथ से मुझे एक आसा उतेजक विचार आरा है जिस पर हमने अभी दगेराई से सोचा नहीं है लेकिन जो इस पूरी चर्चा से सीडा जूडता है आच्छा उग भी आई आई? जरा सोची एक लिए आज हमारा ये पूरा इंटनेट ये अनन्त सापर सपेस एक तरा की विषाल चन्ना गाची यानी भूथो कबगीचा नहीं बन गया है ये बहुत ही दिलच्छ़्टूलना है. है ना? हाँ. जहाँ रोज करोडों गुमनाम लोग, अपनी पहचान, अपना नाम, और अपना वजुद बचाने के लिये, आलगुरिदम के प्रदे बगे मगर मच्छों से अगर बद्टी तो बगद्टी तो बगद्टी तो बगद्टी तो बगद्टी तो बगद्टी तो बगद्टी तो बगद्टी तो बगद्टी तो बगद्टी तो बगद्टी तो बगद्टी तो बगद्टी तो बगद्टी तो बगद्टी तो बगद्टी तो बगद्टी त अगर बज़ाज़ तो बज़ाज़ा था था ज़ाज़ाज़ाज़ाज़ाज़ाज़ाज़ाज़ाज़ाज़ाज़ाज़ाज़ाज़ाज़ाज़ाज़ाज़ाज़ाज़ाज़ाज़ाज़ाज़ाज़ाज़ाज़ाज़ाज़ाज़ाज़ाज़ाज़ाज़ाज़ाज़ा� अगर बद्वाँ बद्वाँ बद्वाँ बद्वाँ