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लोकदेवता_छेछन_महाराजक_गाथामे_आवश्यक_सुधार.m4a
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- 0:00–0:06गजेंद्र ताकुर्द्वारा समपादित दोम लोक देवता चेचन महराजग यी गाता बहुथ सक्तिषाली आची,
- 0:06–0:13मुद्दा एकर कता प्रवाह में किचु गंभीर समस्या आची, जक्रा तुरन्त थीक करभा कावष्वक्ता आची.
- 0:13–0:14एक्दम सही कहलूं?
- 0:14–0:24जखन हम अद्धयाय चाँ में पहुचेत ची, तद अचानक ख्रिषना रामक बस्विट्ती में भिना कोनो संदर भक बास काटबाक प्रसंगबे तची.
- 0:24–0:26इएग्दम असंबद न नहीं लागला हके?
- 0:26–0:34कताक मद्ध्भाग में संगर्ष्क प्रक्रिती मचानक बडलाओ आख्यानक गती अप्रवाह के बादित करेताची
- 0:34–0:37देखु अद्ध्याई पाच दरी तक कता बहुत नी कची
- 0:37–0:40आँ मावन कचन संच विवाद वालाजे द्रिष्खे आची
- 0:40–0:45एक दंगा पर चोट चिलम मे आगी पीबीक सुगर चत्या से लडव
- 0:45–0:49आए यी सव एक ता अदम मे वीर योद्धा के स्थापित करे तची
- 0:49–0:51आँ उ दंगल जीते त्सोच छती
- 0:51–0:54अग, दंगल जीते चत्थी आपन्मा सहुंकर विवा हुईत अची
- 0:55–0:57मुदा मने अकर खीक बाद कमजूरी इए ची
- 0:58–1:01जी अद्द्याए चो मे बिना कुनोपुर भ्संदर भख के
- 1:01–1:05चेचन, क्रिषना रामक बस भिट्टी मे जा के बास काते लोगे चत्थी
- 1:05–1:06मने कुनो कारने नहीं?
- 1:06–1:11पहल संगर्ष के पचात एक ता बहुत अस्पष्ट कारन चल,
- 1:11–1:15एक ता चुनोती चल, मुदा इदोसर गतना अकारन भेल,
- 1:15–1:20अटिक्रमन या मातर कुनो पृान अदद जका प्रस्थूत कल गे लाएज्च.
- 1:20–1:27सब्त्या कहलू, हम जगन इज्स्सा पडी रहल चलू, ता हम्रा लागल जेना हम कोनो पन्ना चोड देले हूँची.
- 1:27–1:31सही बात, इपाटक कलेल बहुत जधका देवे वाला चे.
- 1:31–1:36इता उहना भेल, जेना कोनो राजा एक ता बहुत पैग युध जीद का आवे,
- 1:36–1:42अर अगला द्रिष्छ मे उ भिना कोन संदरभ के तरकारिक दुकान पर मुल्भाउ करल हो थी.
- 1:42–1:45आप, एक दम सती कुदारन आचे.
- 1:45–1:49मने पाथक कमन में इप्रष्न उथेक सवबहाविक आची,
- 1:49–1:53जे एक ता महानायक, जे अखने प्रेम और सम्मान प्राथ कैने आची,
- 1:53–1:59उ आचानक दूस्राक समपत्ती में बिना कोनो तोस कारनके कि एक हस्तक्षेप कर अलाच?
- 1:59–2:04आप एत योद्धा से ग्रियस्त बनवाक जे यात्रा आची,
- 2:04–2:06उकर तारकिक पुल गायव आचे.
- 2:06–2:09पातक कोनो से हो काज कपाचु एक ता कारन कोजे तची.
- 2:09–2:12आप बिना कारन कत किचु नहीं तछी?
- 2:12–2:19एक दम जो हम नायक के काज के आकारन चोर देव तटूंकर गरीमा कम बहो जाई तछी.
- 2:19–2:25सुजाव इए ची जे इदूनो गधना कर थात, भिवाज अ बास कातबाग गधना के भीच,
- 2:25–2:31एक ता इस पस्ट आ अ परिहारे कारन परिनामक समवन्द अस्ठापित कल जबाग चाही.
- 2:31–2:36जाहे सां, कताक लडी जुडल रहा, आ इ नव द्वन्द्वस्वभाविक लागग.
- 2:36–2:41तक्ने पाथक उईद्वन्दस्सम भावनात्मक रूप से जुडिपावे,
- 2:41–2:46जगन पाथक इबूजीज़ायत जजि नायक आमुक काज की एक कर होल जजि,
- 2:46–2:48तक्न उक्रा गंविरता सले तची.
- 2:48–2:56तकि हम यी मानी का चलू जे बास कातब हुंकर कोनो पुरान आदत नहीं चल, बलकी नव परस्थिती कुपच चल.
- 2:56–2:59एक दम यही देखावक आवश्खता चे.
- 2:59–3:05हमरा यी सोजबापर विवष करे तचे जे विवाहक तुरद बात कोनो व्यक्ती बास की एक कातत.
- 3:05–3:09की इंवूंक नव जीवन कोनो आवष्खत बहुषकत ची?
- 3:09–3:12देखो एत ही आहा के औखारन परिनामक कडी बेटी जाएत.
- 3:12–3:18कंक्रीट उदारन कलेल कताक अद्याए पाच में आहा इविवरन जोर सके ची
- 3:18–3:21जि पन्मासंग नव ग्रियस्क्ती बसेवाक लेल
- 3:21–3:23चेचन के अपन नव गर बनेवाख हितु
- 3:23–3:26बहुत रास उत्तम बाशक आवश्च्ता चल.
- 3:26–3:30हो, हो! नव गर बनेवाक लेल बाश
- 3:30–3:32इत बहुत स्वाभावी कचे.
- 3:32–3:35आ, इख खोनो सादारन आवश्चकता नहीं चल.
- 3:35–3:43बलकी एक्ता वीर योद्धा के, एक्ता जिम्मेडार पती अग्रियस्तक के रूप में स्तापित करवा के एक्ता मुल्बोद शर्ट चल.
- 3:43–3:50ता एही कारने उआपन नव दाईतवक निरवाहन करवाक लेल, क्रिष्ना रामक बस बिट्टी में जाएच छती.
- 3:50–3:57एक्दम सही, एक रासा इन नव दवन्द कोनो सादारन चोरी या अकारन अतिक्रमन न नागत,
- 3:57–4:00बलकी हुंकर नव जीवन क अवष्षकता क हिस्सा लागत.
- 4:00–4:04इस शुनक इद्रिश एक दलल बदलल लागे तचे.
- 4:04–4:08अप चेचन एक ता चोर नहीं बलकी एक ता रक्षक बुजाएच छती
- 4:08–4:12जे अपना परिवार के लेल काज कराल चती
- 4:12–4:16आप पातक इबात बहुत निक सबुजी सकता ची
- 4:16–4:20आप जे चेचन अही बस बिट्टी में एक ता नी कुद देशु सदल चती
- 4:20–4:25तव उत्ते होभे वला तक्राव आस सहे यो गमभीर भोजाई तचे
- 4:25–4:29मुदा जक्हन हम उही तक्रावक अंत देस जाए थची
- 4:29–4:32तव मरा एक तदोसर पैध समस्या देखा परत चे
- 4:32–4:35आँ उ सुबरन हाती वला द्रिश
- 4:35–4:47अ, सुबरन हाती जखन क्रिष्ना रामक अदेश पर चेच्नक गर्दन पर भारी पाज पसेरी कत्ता आपन पैर रख़े तचे उद्रिश एक दम सस्पैंस सबभरल अचे.
- 4:47–4:52बहुत निक सस्पैंस अची होते, मुना कता अचानक समाप्त भही जाई तचे.
- 4:52–5:02देखु कताक चर्मुद कर्ष में मुख्य द्वन्दूके बिना कोनो सक्रिय समथानक चोडी देवैसे पात्खक अनुबभ अपुरन रह जाईता चे.
- 5:02–5:06एक दम दूरा लागे तची मने जेना किचु चूट गेल.
- 5:06–5:16जखन सुबरन, हाती छिछनक गर्दन पर भारी कता आ अपन पैर रखाई तची उच्फन कताख सबसे पहग संकत आचे.
- 5:16–5:22मुदग कमजोरी इय जे जिद तकनेई कथाग अचानक इगगे कचमाप्त बहीजाई तचे जे,
- 5:22–5:26लोग सम्रिती में हुनकर विजे सुरक्षित अचे.
- 5:26–5:31हा, इए, एक ता बहुत गंवेर सन्रचनात्मक अदूरा पन आची.
- 5:31–5:37जे पाथक पुरा कत्दरी चिचनक के बाहुबल, आहुनक संगर्ष के पड़ेताभी रोहलची,
- 5:37–5:43अक्रान नायक के वास्तविक शक्ती प्रदर्षन देख्वासे वंचित कर देल जाई तजे.
- 5:43–5:47कत्दा बिना कोनो संथोष जनक अंत्यक के चोडी देल जाई तजे.
- 5:47–5:51इदा उईनावेल जना कोनो कुस्तिक फाइनल मैज चली रहल होए
- 5:51–5:54आई अचानक इस्टेड्यमक बत्ती भुज़ाए
- 5:54–5:56आई बहुत सतीक
- 5:56–6:00तुन्नो पहल्वान एक तुस्रा के पचाडवा में लागल हो ती
- 6:00–6:03सास अटकल होए अब बस खेल कतम
- 6:03–6:15अ, तकन कोनो उदगोषक माएक पर कहे, जे विजेताक नाम इतिहास में दर जाची, आह सब गर जाओ. मने पाधख उही ताम परिनाम देखबाकलेल अची.
- 6:15–6:20इक्टम पाधख एक ता पेयोफ या बहावनात्मक प्रतिफल चाहे तची.
- 6:20–6:27कोनो से हो कता, जिस संकत ताड करेत जी, उक्रा उही संकत के समादान से हो करबै पडे तची.
- 6:27–6:38मने जगन लेखख एक पैर आ पाज पसेरिग भारी कताग वजन पाधखक मोन पर रखगत जी, तकन उही वजन के उतारबाग दाइत्वस से हो लेखख कर अचे.
- 6:38–6:46आप जाहा उक्रा लोक स्म्रतिक भरम्पर चोडी देची ताहा आपन लेक्खक दाईत्वसा बागी रहल ची.
- 6:46–6:49मुद-उ हम्रा एक्ता बात कष्ट कै तच्छी एताई.
- 6:49–6:51इएक्ता लोक गाता थीक,
- 6:51–6:56अ लोक कता सब मिता बहुत रास चीज मोगिक परमपरा पर चोडी देल जायत अची.
- 6:56–7:01आ, इस त्यअची, लोक कताक इस सबहाव होई तची.
- 7:01–7:06कि इस समबब नेल जे लेक्हक लोक कताक परमपरा के जीवन्त रखभा के लेल,
- 7:06–7:10जानी भुजी का लोक स्मुर्ती शब्दक प्रेजो के नहोती?
- 7:10–7:14गावेवला लोक गायक, जगन एक ता गवाईत होईता,
- 7:14–7:17तो उश्रोता पर एप रबाव चोडदत होईता,
- 7:17–7:19जे विजेता सर्वविदित अची.
- 7:19–7:22एक ता बहुत प्रासंगिक प्रष्नचे.
- 7:22–7:32मोखिक परमपरा में एहन होईता ची की एक ता उते गायक अपन भाव भंगीमा आस्वरक उतार चडाम सैं उही विजेयक अबहास पाभिलिलता ची.
- 7:32–7:35मुदाई ता एक ता लिखित सामगरी आची.
- 7:35–7:39एक दम, हमरा सब के एविचार करव आवश्यक अची,
- 7:39–7:42जगगन कुनो पाथक एक्र किताब में पडीरहल होईत ची,
- 7:42–7:45तकन उक्रा लाग कुनो गायक नहीं अची,
- 7:45–7:47जे उही शुन्यता के बहरी सकयो.
- 7:47–7:51राद, हूनक पेख्षा मोखिक श्रोता से भिन्न होत अची.
- 7:51–8:04तज्ज़ाव इए आची जे बाहे लोक स्मिती पर निरभर रहबाग बदला आही प्रस्तुद समगरिक भीतर आही हाती वाला दूंदवक एकता संख्षिप प्र्ष्ट असक्रिय समद्धान देल जाबगचाही.
- 8:04–8:06तई एकर ले लेखख के की करबआगचाही?
- 8:06–8:12उही कत्ता अहातिक पैर्वाला द्रिष्यके कोना समितल जाए जे पात्का के सन्तोष बेटाए.
- 8:12–8:42कंक्क्रित उदारन्क लेल आहा एक अप्रतिम द्रिष्य जोडी सकच्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्
- 8:42–8:46अगर बलक प्रत्त्यक्स प्रदशन करेत अद्यन्तावश्यक अच्छ
- 8:46–8:48आएक्रा देखी हातिक स्वामी क्रिष्नाराम
- 8:48–8:52जि क्रोद में बरल चलां आश्चर चकिद भज़ाए च्छती
- 8:52–8:56अच्छनक भलकें स्विकार करेत उनका सम्मान देच्छती
- 8:56–8:59इँ मावन कचन्द्वला गटना के समानानतर
- 8:59–9:02एक तपोरन और संथोजजनक समादान देद.
- 9:02–9:04मुदा जकन हम आहा की बाज सुनेच फी,
- 9:04–9:07जे क्रिश्नाराम आश्टर चकिद बजज़ चती,
- 9:07–9:08असमान देच चती,
- 9:08–9:12ता हमरा कताक एक ता दोसर पहलुदीस द्यान जाईता चे
- 9:12–9:13उ कोनो पहलुदीस?
- 9:13–9:17क्रिष्ना रामसा पहले मावन कचन से हुटीक इना के ने चला
- 9:17–9:19चेचनक छित्रन बहुत जीवन तच
- 9:19–9:23औ आगी पीवे रहल चा थीन दंका बजा रहल चा थीन
- 9:23–9:28मुदा हुनकर विरोदी पात्र सबख, प्रतिक्रिया बहुत जलभाजी में बडलाईता ची.
- 9:28–9:31हा, ये एक तब बहुत पाग कमजोरी अचे.
- 9:31–9:38मावनक कचंदनक एक तब हयंकर प्रतिद्वन्दी सां अच्चानक एक तप्रसन्द साला बनी जाएच छती
- 9:38–9:42अर ख्रिश्ना राम से हो तुरन्त मानी जाएच छति
- 9:42–9:48कि इपात्र कि चु भेसी सरल और एक आयामी नहीं लागी रहे छति
- 9:48–9:53विरोदी पात्र सबख मनो वेग्यानिक गेहराए का अबहावक कारने
- 9:53–9:59उनकर कारे और प्रतिक्रिया अत्यदिक सरल और केवल प्रिस्तिती जनित प्रतीथ होई तची.
- 9:59–10:05मन है, जटे चेचनक शारीरेक आमान्सेक तयारी बहुत नीक सवरनित अची,
- 10:05–10:13उता मावन कचन्द के यूध्ध के उग्रता सा अचानक प्रसंदता में परिवर्तन बहुत अस्वाभाविक लागे तच्छे.
- 10:13–10:19इग्दम कोनो महान युध्धा अपन पराजे पर एते क जल्दी प्रसंन न नहीं भहुसके तच्छी,
- 10:19–10:22उकर आहंकार के थेस पहुचत ची.
- 10:22–10:29आ उते क्रिश्नराम क्रोदख कोनो सबष्ट व्यक्तिगत या भ्हावनात्मक आदार नहीं देल गेल अची.
- 10:29–10:35सही, इदूनु पात्र मात्र चेचनक शक्तिके देखावक लेल कद्पूतली जका काजकर रहा लची,
- 10:35–10:40जकर अपन कोनो गेर वक्तित्वा वा स्वतन्त्र अस्तित्वा नहीं अची
- 10:40–10:43हम्रा विचार सब कोनो से हो नायकक महानताक मापन
- 10:43–10:46उकर प्रतिद्वन्दिक मज्भूटी सहोई तची
- 10:46–10:49जा खल नायक मात्र कागच कक पुतला आची
- 10:49–10:55जक्रा नायक फूंक्मारी का, खसा देतची, तन नायकक ताकत से हु सादारन लागे लगाई तची.
- 10:55–10:57एक दम सही बाग.
- 10:57–11:04मुदा, हम्रा एहो लागत ची, जे एक ता लोक कता थेक, कोनो आदूनेक मनोविग्यानेक उपन्न्यास नही.
- 11:04–11:13ज़ा हम लेक्हक साई यपेख्षा करव, जे उप्रतेख पात्रक विस्त्रत मनोविग्यान लिकती, तकी इग कताक स्वाभविग गती के नहीं रोकी देद.
- 11:13–11:16दिखु लोक कत्ठाग गती बादित नहीं हो बाखचाही
- 11:16–11:19सुजाववी अची जे गेराई लाबख अर्ठी नहीं अची जे
- 11:19–11:22पन्ना दर पन्ना मनो वैग्यानेक विष्लेषन लिखबजाए
- 11:22–11:24या कत्ठाग गती दिमा कैल जाए
- 11:24–11:28तकी कैल जग्रा सा कता गेर से हो होई आगगती से हो नहीरुके
- 11:28–11:31विरोदी पात्र शबका अंतरिक प्रेरना
- 11:31–11:35हुंकर सम्मान सहिता वा उंकर क्रोदख कारनके
- 11:35–11:38मात्र के चु अतिरिक्त पांती में स्पष्ट कैल जे वाख चाही
- 11:38–11:43ज़हे सं हुनक्क्र प्रतिक्रिया अदेक्य दार्थवादी अग्डम्भीर लागे
- 11:43–11:48मात्र एक या दो वाके का जुडाव सं पात्र में जान फुंकल जासके तची
- 11:48–11:54हां, हम्रा उक्रा दीमा नहीं करबा कची, मात्र उक्रा एक ता वजन देबा कची
- 11:54–11:58तें एकर कोनो व्यवाहारेक उदाहरण की बहसके तची
- 11:58–12:02जते इई छोट सन बडलाव केल जासकगए
- 12:02–12:06आख्खल नायक के चरित्र अचानक संगेरा बहजाए.
- 12:06–12:10उदाहरण के लेल मावनक चंद का पराजे के दिष्छे कि लिया
- 12:10–12:13जगन चेचन हुनका बजारी देचन फी,
- 12:13–12:43तो आहा इलिक सकच्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च
- 12:43–12:48इक ता बहारी मन्स, मुदगर्व सब भहिनक, हात सुमप दिलनी,
- 12:48–12:52इहूंका मात्र इक ता प्रसन भुजायाया ला सादारन व्यक्ती स,
- 12:52–12:56इक ता समान जनक प्रतिद्वन्दी में बडली दे तची.
- 12:56–13:03इसुनक लागे तची जिना मावनक चंदक हार से हो हूंकर इक ता नैतिक जीत बनीगल
- 13:03–13:07इच्छनक जीत के आवर भेसी मुल्लिवान बना दे तची
- 13:07–13:10अक्क्रिशना राम के लीकी केल जासके तची
- 13:10–13:16येश वेक्तिगत लगाव या उईठाम का देवतुल पवित्रताक उलेग कल जासके ताची.
- 13:16–13:19जिनाउ बस भिट्ती उनक पुर्वाजक निशानी होई?
- 13:19–13:19राग.
- 13:20–13:22या उईठाम कुनो ग्राम देवतक वास होई,
- 13:23–13:25जकर रक्षा करभ हुनक ध्रम होई.
- 13:25–13:31जाहिसम बासक कातल जेवापर, हुनक अचानक उठल भयानक रोद अत्तुलंक...
- 13:31–13:36अठीपर सवार भोखा आईनाई अदिक स्वाभावी का नयाई संगत लागग.
- 13:36–13:44एक रस य दून्द दूता महा बलिक भीच क वाविमान अ दर्मक लडई बन जाएत, मातर चोरी केक्ता प्रसंग नहीग.
- 13:44–13:47इसब बहुत काजक रचनात्मक द्रिष्टि कोन ची.
- 13:47–13:53अम देखी रहल ची जे कोना इच्छोट-चोट मनोवग्यानिक विव्रन कताक पूरा रूप रंके बदली रहल ची
- 13:53–13:57और इविव्रन आख्यानक गती के दिमा नहीं को रहल ची
- 13:57–14:00बलकी उक्रा एक ता गमभीरताद और आख्यानक जी
- 14:00–14:02एक दम यही हमर लक्षच हैल
- 14:02–14:05ता जा जा लम इही समग्र समिक्षा पर नजर दाली,
- 14:06–14:13ता इह आख्यान, अदम्य साहस, आडोम लोक देवता चेसनक कजज बलक इक ता उत्क्रिष्ट गाता अची.
- 14:14–14:17मुदा एक्रा अपन चरम समबाबना तक पूचाबक लेल,
- 14:17–14:20हमरा सब के 3 ता परमुख बिन्दू सब पर ध्यान देपडद
- 14:20–14:23राँ तींटा मुख्यबात आची
- 14:23–14:26सब से पहेने कताक मद्यक हन्न में
- 14:26–14:29नव विवाहा अ नव ग्रियस्ति बनेवाक आवश्शकता के
- 14:29–14:33त्रिश्ना रामक बस भिट्टी से बास काटबाक कारनक रूप में
- 14:33–14:35स्तापित करबाक चाही.
- 14:35–14:38एक दम जाई से आख्यानक प्रवाह तुटबैः से बाचत
- 14:38–14:42अ पाटख के एक तारकिक कारन परिनामक कडी बेटत.
- 14:42–14:44दो सर महतुपों काज एक अरबाक अची
- 14:44–14:46जे लोग स्म्रितिक भरम
- 14:46–14:49या मोकिक परम पराक शुन्यता के चोडे क
- 14:49–14:55अद्दिवला द्वन्दो के इतलिखल पाथ में स्पष्ट आस्सक्रिय रूप से समादान करब.
- 14:55–15:03मने सुबरन अद्दिख पैर अग कताक उही सस्पैंस के चिसनंग दूरा अद्दिखे पद्केबाक दिषे से पुनता प्रदान करब.
- 15:03–15:11अते सर मावन कचन्द अक्रिष्ना रामसन विरोदी पात्र सब के प्रतिक्रिया में किचु मनो वैग्यानिक गेराई आब.
- 15:11–15:14उनकर हार या क्रोद के मात्र परिस्तितिजनित जनित नहीं,
- 15:14–15:19बलकी हुनकर सम्मान संजिता, आहंकार अव वक्तिगत कारन्से जोडब.
- 15:19–15:24जाहिसा इपात्र अदिक यतार्त्वादी अगमभीर लागी सकत चे
- 15:24–15:30इटेनो सुजाव आख्यानक मुल आत्मा के पुर्नत्या सुरक्षित रकहेत
- 15:30–15:34एकर प्रभाव के कईई गुना बड़ा देच्छे
- 15:34–15:36हम्रो यहे विष्वास अच्छे
- 15:36–15:45हमाशा करेत चीए जे एी रचनात्मक चर्चा आहाक एही बहतरीन काज के आवर सचक्त बनेब मा सहाया कोएत.
- 15:45–15:54एही सुजाव सब के लागु करबाक बाद आहा आपन एी सन्शो दिट समगरी फेर सां फम्रा सब लग अवश्षे पठाव.
- 15:54–15:59जाई सां, हम सब एकर आवर गेराई से विष्लेशन कर सकी,
- 15:59–16:07आई देखी सकी जे एवीर गाता कोना एकता नवा अपपरष्क्रित रूप लोग कगा अगा अबही तची.
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गजेंद्र ताकुर्द्वारा समपादित दोम लोक देवता चेचन महराजग यी गाता बहुथ सक्तिषाली आची, मुद्दा एकर कता प्रवाह में किचु गंभीर समस्या आची, जक्रा तुरन्त थीक करभा कावष्वक्ता आची. एक्दम सही कहलूं? जखन हम अद्धयाय चाँ में पहुचेत ची, तद अचानक ख्रिषना रामक बस्विट्ती में भिना कोनो संदर भक बास काटबाक प्रसंगबे तची. इएग्दम असंबद न नहीं लागला हके? कताक मद्ध्भाग में संगर्ष्क प्रक्रिती मचानक बडलाओ आख्यानक गती अप्रवाह के बादित करेताची देखु अद्ध्याई पाच दरी तक कता बहुत नी कची आँ मावन कचन संच विवाद वालाजे द्रिष्खे आची एक दंगा पर चोट चिलम मे आगी पीबीक सुगर चत्या से लडव आए यी सव एक ता अदम मे वीर योद्धा के स्थापित करे तची आँ उ दंगल जीते त्सोच छती अग, दंगल जीते चत्थी आपन्मा सहुंकर विवा हुईत अची मुदा मने अकर खीक बाद कमजूरी इए ची जी अद्द्याए चो मे बिना कुनोपुर भ्संदर भख के चेचन, क्रिषना रामक बस भिट्टी मे जा के बास काते लोगे चत्थी मने कुनो कारने नहीं? पहल संगर्ष के पचात एक ता बहुत अस्पष्ट कारन चल, एक ता चुनोती चल, मुदा इदोसर गतना अकारन भेल, अटिक्रमन या मातर कुनो पृान अदद जका प्रस्थूत कल गे लाएज्च. सब्त्या कहलू, हम जगन इज्स्सा पडी रहल चलू, ता हम्रा लागल जेना हम कोनो पन्ना चोड देले हूँची. सही बात, इपाटक कलेल बहुत जधका देवे वाला चे. इता उहना भेल, जेना कोनो राजा एक ता बहुत पैग युध जीद का आवे, अर अगला द्रिष्छ मे उ भिना कोन संदरभ के तरकारिक दुकान पर मुल्भाउ करल हो थी. आप, एक दम सती कुदारन आचे. मने पाथक कमन में इप्रष्न उथेक सवबहाविक आची, जे एक ता महानायक, जे अखने प्रेम और सम्मान प्राथ कैने आची, उ आचानक दूस्राक समपत्ती में बिना कोनो तोस कारनके कि एक हस्तक्षेप कर अलाच? आप एत योद्धा से ग्रियस्त बनवाक जे यात्रा आची, उकर तारकिक पुल गायव आचे. पातक कोनो से हो काज कपाचु एक ता कारन कोजे तची. आप बिना कारन कत किचु नहीं तछी? एक दम जो हम नायक के काज के आकारन चोर देव तटूंकर गरीमा कम बहो जाई तछी. सुजाव इए ची जे इदूनो गधना कर थात, भिवाज अ बास कातबाग गधना के भीच, एक ता इस पस्ट आ अ परिहारे कारन परिनामक समवन्द अस्ठापित कल जबाग चाही. जाहे सां, कताक लडी जुडल रहा, आ इ नव द्वन्द्वस्वभाविक लागग. तक्ने पाथक उईद्वन्दस्सम भावनात्मक रूप से जुडिपावे, जगन पाथक इबूजीज़ायत जजि नायक आमुक काज की एक कर होल जजि, तक्न उक्रा गंविरता सले तची. तकि हम यी मानी का चलू जे बास कातब हुंकर कोनो पुरान आदत नहीं चल, बलकी नव परस्थिती कुपच चल. एक दम यही देखावक आवश्खता चे. हमरा यी सोजबापर विवष करे तचे जे विवाहक तुरद बात कोनो व्यक्ती बास की एक कातत. की इंवूंक नव जीवन कोनो आवष्खत बहुषकत ची? देखो एत ही आहा के औखारन परिनामक कडी बेटी जाएत. कंक्रीट उदारन कलेल कताक अद्याए पाच में आहा इविवरन जोर सके ची जि पन्मासंग नव ग्रियस्क्ती बसेवाक लेल चेचन के अपन नव गर बनेवाख हितु बहुत रास उत्तम बाशक आवश्च्ता चल. हो, हो! नव गर बनेवाक लेल बाश इत बहुत स्वाभावी कचे. आ, इख खोनो सादारन आवश्चकता नहीं चल. बलकी एक्ता वीर योद्धा के, एक्ता जिम्मेडार पती अग्रियस्तक के रूप में स्तापित करवा के एक्ता मुल्बोद शर्ट चल. ता एही कारने उआपन नव दाईतवक निरवाहन करवाक लेल, क्रिष्ना रामक बस बिट्टी में जाएच छती. एक्दम सही, एक रासा इन नव दवन्द कोनो सादारन चोरी या अकारन अतिक्रमन न नागत, बलकी हुंकर नव जीवन क अवष्षकता क हिस्सा लागत. इस शुनक इद्रिश एक दलल बदलल लागे तचे. अप चेचन एक ता चोर नहीं बलकी एक ता रक्षक बुजाएच छती जे अपना परिवार के लेल काज कराल चती आप पातक इबात बहुत निक सबुजी सकता ची आप जे चेचन अही बस बिट्टी में एक ता नी कुद देशु सदल चती तव उत्ते होभे वला तक्राव आस सहे यो गमभीर भोजाई तचे मुदा जक्हन हम उही तक्रावक अंत देस जाए थची तव मरा एक तदोसर पैध समस्या देखा परत चे आँ उ सुबरन हाती वला द्रिश अ, सुबरन हाती जखन क्रिष्ना रामक अदेश पर चेच्नक गर्दन पर भारी पाज पसेरी कत्ता आपन पैर रख़े तचे उद्रिश एक दम सस्पैंस सबभरल अचे. बहुत निक सस्पैंस अची होते, मुना कता अचानक समाप्त भही जाई तचे. देखु कताक चर्मुद कर्ष में मुख्य द्वन्दूके बिना कोनो सक्रिय समथानक चोडी देवैसे पात्खक अनुबभ अपुरन रह जाईता चे. एक दम दूरा लागे तची मने जेना किचु चूट गेल. जखन सुबरन, हाती छिछनक गर्दन पर भारी कता आ अपन पैर रखाई तची उच्फन कताख सबसे पहग संकत आचे. मुदग कमजोरी इय जे जिद तकनेई कथाग अचानक इगगे कचमाप्त बहीजाई तचे जे, लोग सम्रिती में हुनकर विजे सुरक्षित अचे. हा, इए, एक ता बहुत गंवेर सन्रचनात्मक अदूरा पन आची. जे पाथक पुरा कत्दरी चिचनक के बाहुबल, आहुनक संगर्ष के पड़ेताभी रोहलची, अक्रान नायक के वास्तविक शक्ती प्रदर्षन देख्वासे वंचित कर देल जाई तजे. कत्दा बिना कोनो संथोष जनक अंत्यक के चोडी देल जाई तजे. इदा उईनावेल जना कोनो कुस्तिक फाइनल मैज चली रहल होए आई अचानक इस्टेड्यमक बत्ती भुज़ाए आई बहुत सतीक तुन्नो पहल्वान एक तुस्रा के पचाडवा में लागल हो ती सास अटकल होए अब बस खेल कतम अ, तकन कोनो उदगोषक माएक पर कहे, जे विजेताक नाम इतिहास में दर जाची, आह सब गर जाओ. मने पाधख उही ताम परिनाम देखबाकलेल अची. इक्टम पाधख एक ता पेयोफ या बहावनात्मक प्रतिफल चाहे तची. कोनो से हो कता, जिस संकत ताड करेत जी, उक्रा उही संकत के समादान से हो करबै पडे तची. मने जगन लेखख एक पैर आ पाज पसेरिग भारी कताग वजन पाधखक मोन पर रखगत जी, तकन उही वजन के उतारबाग दाइत्वस से हो लेखख कर अचे. आप जाहा उक्रा लोक स्म्रतिक भरम्पर चोडी देची ताहा आपन लेक्खक दाईत्वसा बागी रहल ची. मुद-उ हम्रा एक्ता बात कष्ट कै तच्छी एताई. इएक्ता लोक गाता थीक, अ लोक कता सब मिता बहुत रास चीज मोगिक परमपरा पर चोडी देल जायत अची. आ, इस त्यअची, लोक कताक इस सबहाव होई तची. कि इस समबब नेल जे लेक्हक लोक कताक परमपरा के जीवन्त रखभा के लेल, जानी भुजी का लोक स्मुर्ती शब्दक प्रेजो के नहोती? गावेवला लोक गायक, जगन एक ता गवाईत होईता, तो उश्रोता पर एप रबाव चोडदत होईता, जे विजेता सर्वविदित अची. एक ता बहुत प्रासंगिक प्रष्नचे. मोखिक परमपरा में एहन होईता ची की एक ता उते गायक अपन भाव भंगीमा आस्वरक उतार चडाम सैं उही विजेयक अबहास पाभिलिलता ची. मुदाई ता एक ता लिखित सामगरी आची. एक दम, हमरा सब के एविचार करव आवश्यक अची, जगगन कुनो पाथक एक्र किताब में पडीरहल होईत ची, तकन उक्रा लाग कुनो गायक नहीं अची, जे उही शुन्यता के बहरी सकयो. राद, हूनक पेख्षा मोखिक श्रोता से भिन्न होत अची. तज्ज़ाव इए आची जे बाहे लोक स्मिती पर निरभर रहबाग बदला आही प्रस्तुद समगरिक भीतर आही हाती वाला दूंदवक एकता संख्षिप प्र्ष्ट असक्रिय समद्धान देल जाबगचाही. तई एकर ले लेखख के की करबआगचाही? उही कत्ता अहातिक पैर्वाला द्रिष्यके कोना समितल जाए जे पात्का के सन्तोष बेटाए. कंक्क्रित उदारन्क लेल आहा एक अप्रतिम द्रिष्य जोडी सकच्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च् अगर बलक प्रत्त्यक्स प्रदशन करेत अद्यन्तावश्यक अच्छ आएक्रा देखी हातिक स्वामी क्रिष्नाराम जि क्रोद में बरल चलां आश्चर चकिद भज़ाए च्छती अच्छनक भलकें स्विकार करेत उनका सम्मान देच्छती इँ मावन कचन्द्वला गटना के समानानतर एक तपोरन और संथोजजनक समादान देद. मुदा जकन हम आहा की बाज सुनेच फी, जे क्रिश्नाराम आश्टर चकिद बजज़ चती, असमान देच चती, ता हमरा कताक एक ता दोसर पहलुदीस द्यान जाईता चे उ कोनो पहलुदीस? क्रिष्ना रामसा पहले मावन कचन से हुटीक इना के ने चला चेचनक छित्रन बहुत जीवन तच औ आगी पीवे रहल चा थीन दंका बजा रहल चा थीन मुदा हुनकर विरोदी पात्र सबख, प्रतिक्रिया बहुत जलभाजी में बडलाईता ची. हा, ये एक तब बहुत पाग कमजोरी अचे. मावनक कचंदनक एक तब हयंकर प्रतिद्वन्दी सां अच्चानक एक तप्रसन्द साला बनी जाएच छती अर ख्रिश्ना राम से हो तुरन्त मानी जाएच छति कि इपात्र कि चु भेसी सरल और एक आयामी नहीं लागी रहे छति विरोदी पात्र सबख मनो वेग्यानिक गेहराए का अबहावक कारने उनकर कारे और प्रतिक्रिया अत्यदिक सरल और केवल प्रिस्तिती जनित प्रतीथ होई तची. मन है, जटे चेचनक शारीरेक आमान्सेक तयारी बहुत नीक सवरनित अची, उता मावन कचन्द के यूध्ध के उग्रता सा अचानक प्रसंदता में परिवर्तन बहुत अस्वाभाविक लागे तच्छे. इग्दम कोनो महान युध्धा अपन पराजे पर एते क जल्दी प्रसंन न नहीं भहुसके तच्छी, उकर आहंकार के थेस पहुचत ची. आ उते क्रिश्नराम क्रोदख कोनो सबष्ट व्यक्तिगत या भ्हावनात्मक आदार नहीं देल गेल अची. सही, इदूनु पात्र मात्र चेचनक शक्तिके देखावक लेल कद्पूतली जका काजकर रहा लची, जकर अपन कोनो गेर वक्तित्वा वा स्वतन्त्र अस्तित्वा नहीं अची हम्रा विचार सब कोनो से हो नायकक महानताक मापन उकर प्रतिद्वन्दिक मज्भूटी सहोई तची जा खल नायक मात्र कागच कक पुतला आची जक्रा नायक फूंक्मारी का, खसा देतची, तन नायकक ताकत से हु सादारन लागे लगाई तची. एक दम सही बाग. मुदा, हम्रा एहो लागत ची, जे एक ता लोक कता थेक, कोनो आदूनेक मनोविग्यानेक उपन्न्यास नही. ज़ा हम लेक्हक साई यपेख्षा करव, जे उप्रतेख पात्रक विस्त्रत मनोविग्यान लिकती, तकी इग कताक स्वाभविग गती के नहीं रोकी देद. दिखु लोक कत्ठाग गती बादित नहीं हो बाखचाही सुजाववी अची जे गेराई लाबख अर्ठी नहीं अची जे पन्ना दर पन्ना मनो वैग्यानेक विष्लेषन लिखबजाए या कत्ठाग गती दिमा कैल जाए तकी कैल जग्रा सा कता गेर से हो होई आगगती से हो नहीरुके विरोदी पात्र शबका अंतरिक प्रेरना हुंकर सम्मान सहिता वा उंकर क्रोदख कारनके मात्र के चु अतिरिक्त पांती में स्पष्ट कैल जे वाख चाही ज़हे सं हुनक्क्र प्रतिक्रिया अदेक्य दार्थवादी अग्डम्भीर लागे मात्र एक या दो वाके का जुडाव सं पात्र में जान फुंकल जासके तची हां, हम्रा उक्रा दीमा नहीं करबा कची, मात्र उक्रा एक ता वजन देबा कची तें एकर कोनो व्यवाहारेक उदाहरण की बहसके तची जते इई छोट सन बडलाव केल जासकगए आख्खल नायक के चरित्र अचानक संगेरा बहजाए. उदाहरण के लेल मावनक चंद का पराजे के दिष्छे कि लिया जगन चेचन हुनका बजारी देचन फी, तो आहा इलिक सकच्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च इक ता बहारी मन्स, मुदगर्व सब भहिनक, हात सुमप दिलनी, इहूंका मात्र इक ता प्रसन भुजायाया ला सादारन व्यक्ती स, इक ता समान जनक प्रतिद्वन्दी में बडली दे तची. इसुनक लागे तची जिना मावनक चंदक हार से हो हूंकर इक ता नैतिक जीत बनीगल इच्छनक जीत के आवर भेसी मुल्लिवान बना दे तची अक्क्रिशना राम के लीकी केल जासके तची येश वेक्तिगत लगाव या उईठाम का देवतुल पवित्रताक उलेग कल जासके ताची. जिनाउ बस भिट्ती उनक पुर्वाजक निशानी होई? राग. या उईठाम कुनो ग्राम देवतक वास होई, जकर रक्षा करभ हुनक ध्रम होई. जाहिसम बासक कातल जेवापर, हुनक अचानक उठल भयानक रोद अत्तुलंक... अठीपर सवार भोखा आईनाई अदिक स्वाभावी का नयाई संगत लागग. एक रस य दून्द दूता महा बलिक भीच क वाविमान अ दर्मक लडई बन जाएत, मातर चोरी केक्ता प्रसंग नहीग. इसब बहुत काजक रचनात्मक द्रिष्टि कोन ची. अम देखी रहल ची जे कोना इच्छोट-चोट मनोवग्यानिक विव्रन कताक पूरा रूप रंके बदली रहल ची और इविव्रन आख्यानक गती के दिमा नहीं को रहल ची बलकी उक्रा एक ता गमभीरताद और आख्यानक जी एक दम यही हमर लक्षच हैल ता जा जा लम इही समग्र समिक्षा पर नजर दाली, ता इह आख्यान, अदम्य साहस, आडोम लोक देवता चेसनक कजज बलक इक ता उत्क्रिष्ट गाता अची. मुदा एक्रा अपन चरम समबाबना तक पूचाबक लेल, हमरा सब के 3 ता परमुख बिन्दू सब पर ध्यान देपडद राँ तींटा मुख्यबात आची सब से पहेने कताक मद्यक हन्न में नव विवाहा अ नव ग्रियस्ति बनेवाक आवश्शकता के त्रिश्ना रामक बस भिट्टी से बास काटबाक कारनक रूप में स्तापित करबाक चाही. एक दम जाई से आख्यानक प्रवाह तुटबैः से बाचत अ पाटख के एक तारकिक कारन परिनामक कडी बेटत. दो सर महतुपों काज एक अरबाक अची जे लोग स्म्रितिक भरम या मोकिक परम पराक शुन्यता के चोडे क अद्दिवला द्वन्दो के इतलिखल पाथ में स्पष्ट आस्सक्रिय रूप से समादान करब. मने सुबरन अद्दिख पैर अग कताक उही सस्पैंस के चिसनंग दूरा अद्दिखे पद्केबाक दिषे से पुनता प्रदान करब. अते सर मावन कचन्द अक्रिष्ना रामसन विरोदी पात्र सब के प्रतिक्रिया में किचु मनो वैग्यानिक गेराई आब. उनकर हार या क्रोद के मात्र परिस्तितिजनित जनित नहीं, बलकी हुनकर सम्मान संजिता, आहंकार अव वक्तिगत कारन्से जोडब. जाहिसा इपात्र अदिक यतार्त्वादी अगमभीर लागी सकत चे इटेनो सुजाव आख्यानक मुल आत्मा के पुर्नत्या सुरक्षित रकहेत एकर प्रभाव के कईई गुना बड़ा देच्छे हम्रो यहे विष्वास अच्छे हमाशा करेत चीए जे एी रचनात्मक चर्चा आहाक एही बहतरीन काज के आवर सचक्त बनेब मा सहाया कोएत. एही सुजाव सब के लागु करबाक बाद आहा आपन एी सन्शो दिट समगरी फेर सां फम्रा सब लग अवश्षे पठाव. जाई सां, हम सब एकर आवर गेराई से विष्लेशन कर सकी, आई देखी सकी जे एवीर गाता कोना एकता नवा अपपरष्क्रित रूप लोग कगा अगा अबही तची.