MACHINE ASR ACCESSIBILITY AID

जट-जटिनक_राजदरबार_सँ_अँगना_धरि_रहस्य.m4a

Not an editorially verified transcript. This text was generated automatically from the preserved recording and may contain recognition, language-detection, spelling, segmentation or name errors. Consult the source recording for authoritative content.
Collection
Part 9 · VIDEHA MITHILA MAITHILI DISCUSSION CRITICISM SERIES PART 9
Status
asr-draft
Human verified
No
Editorial review
not-reviewed
ASR model
small
Detected language
hi (0.408724)
Duration
15:22
Source
Open preserved recording

Timestamped machine output

  1. 0:00–0:10गंबीर राती आचे, गाँक चारुदीस, अंद्खार, निस्टब दथा पस्रल आचे, मुदा एक्ता अगना मेंने किचु अलक बहुर रहल चे
  2. 0:10–0:13आए, एक्दम एक्ता रहस्स्यम मैं द्रष्य।
  3. 0:13–0:17भीलकुल, गर के पूरुष वरग सुतल चती, वा गाँ सब भार चती,
  4. 0:17–0:22इस्त्री सब एक था जमाब हो गुप्त रूप से एक ता अनुश्ठान कर रहल चती.
  5. 0:22–0:25जते कोनो ऊस्त्री पूरुष परिदान पहिणने चती.
  6. 0:26–0:28अकोनो चिटगर साडी.
  7. 0:28–0:33उसब हसी रहल चती, कान्दी रहल चती, माने समाजग कद्होर नियम पर भ्यंग कर रहल चती,
  8. 0:33–0:40अथता एक ता भ्यंग के मार का, गाउक चब सजगड़ाई इस्त्रिक दरवजा पर फेखय बाई चती.
  9. 0:40–0:43बाप्रे, इस सूनी में कते क अजीब लगे च्याना?
  10. 0:43–0:46आप सूनी में ही कोनो जादूईवा रहस्सेम ही पंद काज लगे चे,
  11. 0:46–0:51मुदा इवास्तव में मितलाक सद्यो पुरान जत जतिन लोकनातिक वास्तदिक सुरुप थी.
  12. 0:51–1:21अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अ�
  13. 1:21–1:37तज्ये किचु नव आप विश्लेशनात्मक सीखबा के लेल उच्सुक रहे चतीने, उनकर लेल इचर्चा बड रोचक हेत. आब एक रा विस्तार सबुजी इगर सुर्वात को ना भेल कि इए आदिकाल से चली आभी रहल कोनो गामक अनुश्ठान चल?
  14. 1:37–1:39अग, तक तख तख हैं सब हेल?
  15. 1:39–1:41पन्द्रहमम शताब दिक भब्य राज्दर्बार्सा
  16. 1:41–1:42की बात करे ची?
  17. 1:42–1:43राज्दर्बार्सा?
  18. 1:43–1:44आख आख, एक दम,
  19. 1:44–1:46चोडदसो बारासा,
  20. 1:46–1:48चोडदसो चीालिस इश्विक मद्ध्य,
  21. 1:48–1:51जगन मिठला पर महराज शिव्सिंकर शासन चल.
  22. 2:07–2:09अद्यापति गीत के सरवुच्जस्तान प्राप्त्त्चल
  23. 2:09–2:13आए उज्याग दरबार में इक ता महान संगीत कार चला
  24. 2:13–2:15जिनका जेट्वा जट्काल जाइत चल
  25. 2:15–2:20माने विद्यापति गीत के मनच्दरी लाउजेवा का काज इजेट कराज चला
  26. 2:20–2:21तीक
  27. 2:21–2:22अहिना बुजु
  28. 2:22–2:27अपने विद्यापतिग गीट के मन्च्दरी लाव जेवा काज इजेट करहल चला
  29. 2:27–2:28तीक
  30. 2:28–2:29औहना बुजु
  31. 2:29–2:32राजा शिव सिंग आदेश दिलतिन
  32. 2:32–2:35जे अविद्यापतिख पदावलि गीट सबह के
  33. 2:35–2:37राग रागेनी में बान्द्बा काज कर थे
  34. 2:37–2:40जाही से उक्रा अबेने कग कग प्रस्तुत केल जासके
  35. 2:40–2:45ताहीक्रम में एई सांगितिक अख्यान के मंज पर उतार्बाक लेल
  36. 2:45–2:47जट जटिन नाटक कर अच्ना भेल
  37. 2:47–2:51आज जटक भूमिका स्वयम उ संगीत कार जट करे चलान
  38. 2:51–2:52रूकी जाओ, रूकी जाओ
  39. 2:52–2:54ये ते ते एक ता बडभारी विरोदबाश च्याए.
  40. 2:54–2:54की?
  41. 2:55–2:58आहा कहल हूँ जे एकर रचना एक ता पूरुस संगितकार केलनी.
  42. 2:58–3:02दरबार मेकर मुक्कि भूमिका से हो एक ता पूरुशे द्वारा केल गेल.
  43. 3:02–3:03आहा बिलकुल.
  44. 3:03–3:09मदा आएक जजटिन हमरा सब देकाई ची, उता पून रूपेन इस्त्री गन कनुस तान ची?
  45. 3:09–3:13रादिक अंदकार में, केवल इस्त्री सब एकरा अबनीत करए चती,
  46. 3:13–3:15जटे पूरुष प्रवेश वरजिच थे?
  47. 3:15–3:16हा!
  48. 3:16–3:22देखू ये जे सांस्क्रितिक रूपान्त्रन भेल चेने, उ एतैं सबहसा आकर सक्गब पच्छे.
  49. 3:22–3:28मने यी पूरुष द्वारा रचित नातक इस्त्री सबखक लेल एक ता एहन्त सेप इस्पेस कुना बनी गेल.
  50. 3:28–3:32सो चु उ उही समय के पित्र सत्तात्मक समाज मे,
  51. 3:32–3:37इस्त्री गन लग आपन कुन्ता, आपन पीना साजा कर बाग, कुनो सामहिक मंजत जल नहीं.
  52. 3:37–3:40आप, दिन राती बस गर्यस्ती काज.
  53. 3:40–3:46एक दम, सासुर खडाई और समाजिक मर्यादक भीच उसब बन्धल रहिच चली.
  54. 3:46–3:50तजगन इदर्बारक नाटक गाूंगर दरी पहुचलन,
  55. 3:50–3:54तखन इस्त्री गरन एक्रा मात्र एक्ता कता में सीमित नहीं राखी,
  56. 3:54–3:56अपन अनुकुल डाली लिलनी?
  57. 3:56–4:01औ, मने उसब एक्रा अपना अभी व्यक्तिक माध्ध्यम बना लिलनी.
  58. 4:01–4:07अग, सावन भादुक मास में, जखन पूरुश वर्ग क्रिषी काज में बज़ल रहे चल,
  59. 4:07–4:13वा बाहर रहे चल तकन राती क समें इस्त्री सब एक ठाम जमा होए चलीं.
  60. 4:13–4:17तैं आतक हुनकर लेल एक ता मनोविग्यानेक आश्डे बनीगल.
  61. 4:17–4:23बिल्कुल, जतै उ सब बिना कुनु पूरुश रस्तक्शेप के समाच के बन्दन से मुक्तबहे का,
  62. 4:23–4:27अपन दामपते जीवनक यतार्त के जीभी सकत चलीः.
  63. 4:27–4:32उआपन सासक आलोचना का सकत चलीः, पतीक उपहास का सकत चलीः.
  64. 4:32–4:37इत बड़ादबुच है, ज़े एक राँ सव आएक सन्दर में देखी,
  65. 4:37–4:42तई उही राट्री कालीन आयोजन वा सलंबर पार्टी जका चै,
  66. 4:42–4:46जदे इस्त्री सब आपन देनन्दिन जीवनक मुखोता उतारी का,
  67. 4:46–4:48वास्त्वेग गप्षप करे चती.
  68. 4:48–4:53अगर प्रभाव कत्ह वस्तूपर से हो पडल हैते, राजा रानी कत्हत नरीगल हैते.
  69. 4:53–5:01नहीं, नहीं, राज दर्बार सब आबाहर निकले, इना तक अप पती पतनिक गर आंगन दारी पहुच जाई तची.
  70. 5:01–5:05कत्हा शुरु होई तची भी आख पहिल्सालक सामन्सद.
  71. 5:05–5:07ब्याहक पहिल्सालक सावन सबूँ
  72. 5:07–5:11नवविवाहित दंपतिक ग्रिहस्तिक नोक जोक
  73. 5:11–5:17नवविवाहि जटिन अपना नेहर जाई चाहच्छतिन मुदा दार में बाड च्याए
  74. 5:17–5:19नवविवाहित दंपतिक ग्रिहस्तिक नोक जोक?
  75. 5:19–5:22आई यी भाडी केवल प्रक्रतिक बादा नहीं आजे
  76. 5:22–5:26बलके सासुरा के उही प्रतिबंदख के शेहो प्रती कचे
  77. 5:26–5:31जे नववविवाहिता के आपन माई बापक सा दूर रखे तची
  78. 5:31–5:33प्रतिकात्मक आर्थ चये कर
  79. 5:33–5:33बलकुल
  80. 5:33–5:37जदिन आपन माइ सब प्रतिकात्मक समवाद करे चतिन
  81. 5:37–5:40जे विदाए गिरी कराभे ले
  82. 5:40–5:43कोनो नुा था कुर वा ब्राम्वन के नहीं पथाओं
  83. 5:43–5:45अन नहीं पैग भाई के पथाओं
  84. 5:45–5:46तक कक्रा पथाओं
  85. 5:46–5:48उजिद करे चतिन
  86. 5:48–5:49जे चोटका भाई के पथाओं
  87. 5:49–5:52अपने चोटका बाई संगे अदिक सहज रहे चलिया
  88. 5:52–5:53एक दम
  89. 5:54–6:00आस सासुरक लोक से हो चोटका बाईक हत कागु कखनो कखनो नमी जाएच चला
  90. 6:00–6:03पहग भाई वा बाहरी लोकक समखष
  91. 6:03–6:07सासुर में मर्यादा अपर्दा ककत्फुर नियम चल
  92. 6:07–6:08औह, हू, हाँ
  93. 6:08–6:11मैंने चोटका बाई संगे इस्तरी अदिक सहज रहे चलिया
  94. 6:11–6:12एक दम
  95. 6:12–6:16आस सासुरक लोक से हो चोटका बाएक रद कागू
  96. 6:16–6:18कखनो कखनो नमी जाए चला
  97. 6:18–6:29तज्दिनक यी समवाद दरसल नव विवाहिताक औही मान्सिक चट पताहत के देखावे तची, जे कोना ओ आपन नहर क सुरक्छत वातावरन में पहुचे.
  98. 6:29–6:34मुदा जक्ठन नहर जेबा की उपाई विफल भैजाए चे, तकन की होएचे?
  99. 6:34–6:40तकन जतिन रड़ करे चति, जो जुमुर खेलाई बो, मुदा जोट वो मना कदिच्छति.
  100. 6:40–6:42मने कुनो काज हुए नहीं रहल चे?
  101. 6:42–6:47आपहेर एताई इस्ट्री मन्डलिक दीच समवाद हो इच्छे,
  102. 6:47–6:52कोन पात पर चडी का, अउतर भेटाई चे पुरेनिक पात पर.
  103. 6:52–6:55पूरेनिक पात मने कमलक कपात
  104. 6:55–7:01अद्तदुप्रान्त रास्य विनोदक संगे, उतै प्रतिकात्मक विवा होगताची
  105. 7:01–7:04इप खमलक पातक की संदर विचाते
  106. 7:04–7:10देखो, पूरेनिक पात पानी पर रहे तची, मुदा पानी उक्रा भीजा नहीं पाभे तची
  107. 7:10–7:14इन्नव्विवाहित जीवन्क उही नाजुक अवस्था के दर्षावेत अची
  108. 7:14–7:17जतै संबन्द अविन अछे च्य पवित्र चे.
  109. 7:17–7:22औह, मने संसार ककतु यतार्त उक्रादरी पहुचले नहीं आचे.
  110. 7:22–7:23एक दम.
  111. 7:23–7:29इस्त्री गणड़क द़ारा दामपत्य जीवन क स्वर्वाती मादूर्यक के फेर सजीबके क्ता प्रास्तिक.
  112. 7:30–7:35इता बहुत सुन्दर चित्रन्चे, नव-नव भिहाक बादक स्वर्वाती दिन,
  113. 7:35–7:38मुद एक्रा बाद ग्रियस्तिक आस्लीगव स्वर्वोई चेने.
  114. 7:38–8:08अद्ता खन जटक जे उतर च्याजा थीन जद्यागा देखादा थीन जद्यागा तो वो बवागागा तो वो बवागागा तो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो व
  115. 8:08–8:16उतो बड़ रहासे पूँन चे, उकहे चतिन जे उनकर ता हातिदरे बिका अगे लाची, मात्र हातिक सीक्री बचल चे.
  116. 8:17–8:23आखा, इदिश्योकती पूँन रहासे अ वास्तव में उही आर्थिक दबाव के, हासी में उडावा किक ता तरीका चल.
  117. 8:23–8:27इते आबी ही गप बर रोचक बज़ाई तची
  118. 8:27–8:31इत एक दम आदूनिक भिवाक का हनीमून फेजक बात का
  119. 8:31–8:34चोट-चोट गप पर होगे वला रूसब फुलाप जका चे
  120. 8:34–8:36बिल्ल्कुल औहिना आ ची
  121. 8:36–8:38माने हातिक सीक्री वला बहना
  122. 8:38–8:41आई कालेक अ बहना जका चे
  123. 8:41–8:47अगर उगर बद्खान पती कहे चे जे बआँक सरवर डाउन चे ताईले दाईमने खिन सकलों
  124. 8:47–8:49एक दम सही दर लों
  125. 8:49–8:54इस्त्री सब के अपन निजी जीवनक आर्थिक तंगी पर रस्भा किक्ता अफसर देच चले
  126. 8:54–9:01मुदा एही हसी मजाकक भीछ नाटक अचाना किक तक गमभीर यक हारत दिस मुर जाएत अची
  127. 9:01–9:03गमभीर यक हारत
  128. 9:03–9:13तागन जत की कहा चतिन
  129. 9:13–9:16जत एक तक कत हो यक हारत दिखावे चतिन
  130. 9:16–9:21उक हारत चतिन जिदान के फसल तयार चे तकर कतनी जरूरी चे
  131. 9:21–9:25मैंने, पेट भरब, भावुकता सब एसी महत पूँन चै.
  132. 9:25–9:29आई, एही भीच सोतनी गप सूनी जटन देरा जाएच छतिन.
  133. 9:29–9:31औह, असुरक्षाक भाव.
  134. 9:31–9:34बहु विवाज प्रता कारन इभभय सतावे चल,
  135. 9:34–9:38जे जो उन नहर गिल ए, तपती दोसर भी आख कर लेद.
  136. 9:38–9:44भील्कुल, आई आई आद्थि कव्षक्ता कारन जट मोरंकमायल प्रस्टान करे चा दिन
  137. 9:44–9:47मोरंक्, मैंने नेपालक तराएक शेट्र
  138. 9:47–9:50आई, यी वियोग काल चे
  139. 9:50–9:56आई, जटक अनुपस्तिती में सुनार जटीनक के गेणनाक प्रलोबन देच्छे
  140. 9:56–10:00अगर बात करेची इतो एक दम आई काल की देली सोप जका बागेल आई.
  141. 10:00–10:02अ, अ, एक दम.
  142. 10:02–10:07जते नायक का सब आजाए चे अ खल नायक प्रलोबन लोक प्रविष करे चे.
  143. 10:07–10:15मोदा जटिन द्रुद रहे च्ठें उ प्रलोबनक के अस्विकार कग जटक सुन्दर ताक वरनन करे च्ठें.
  144. 10:15–10:19इी नारी निष्टाक एक ता प्रतिकात्मक प्रस्तुती थेक
  145. 10:19–10:26तक इी लोक नातक के माद्यम से समाज आपन इस्त्री गनक लेल नैतिक्ता अ निष्टाक पाट सेव पडवार हल चल?
  146. 10:26–10:30देखु, जा हम्रा सब एक राप पाइग परिप्रेक्ष्सद जोडीने
  147. 10:30–10:40ते इस पष्ट होई तखछी, जे इनाटक, नेटिक्ता वियोग में प्रेम, आ भूटिक्ता सा उपर समबन्दख रख्बाक शिक्षा दए च्छा देच्छे.
  148. 10:40–10:43आ उ हो मनोरन्जक तरीका सा.
  149. 10:43–10:48अंज सिनेमाई अंदाज में तक कतक अस्ली ध्रामात जटक वाप्सिग बाद चुरू होगते.
  150. 10:48–10:49इक दम.
  151. 10:49–10:52जट मुरंग सकमा कगुरए च्छतिन,
  152. 10:52–10:54दूरी सप्रेम तब भडल,
  153. 10:54–10:58मुदा संगे रहला पर फिर साहेंकारक तक्राव होगता ची.
  154. 10:58–10:59माने जग्डा?
  155. 10:59–11:00हाई.
  156. 11:00–11:03एक दिन कोनो बात पर जग्रा हो इच्च्छाए
  157. 11:03–11:04आज्जट असाव्दानी
  158. 11:04–11:08वा क्रोद में जटिनक चोएकी से चूभी देच्छतिन
  159. 11:08–11:10चोएकी माने सूप वज़्ारू
  160. 11:10–11:12आएक रा अपमान भोजी
  161. 11:12–11:15जटिन रूसी का गर चोडी देच्छतिन
  162. 11:15–11:16बाप्रे
  163. 11:16–11:18मात्र चूएकी से चूभला पर इतनेक बडी बात?
  164. 11:18–11:22चूएकी से चूभब, मितला संसक्रिती में एक ता पेगवाप मान मानल जाईते ची.
  165. 11:23–11:25एई स्वाभिमान पर चोट चल.
  166. 11:25–11:29एक ता इस्तरी सम्पूरन भोतिक प्रलोबन त्याख कै सकेते ची.
  167. 11:29–11:33मुदा अपन स्वाभिमानक हनन बड़ाश्त नहीं कस गईताची
  168. 11:33–11:36तजटके पचु तावा होई चे?
  169. 11:36–11:39तजट पश्षा ताप करे चाती
  170. 11:39–11:44अग गोपी मनिहारे नादिक वेष्दर जटीनक कोज में निकले चाती
  171. 11:44–11:47मुदा गर काजे दूर्देशा दिक हावल गेल अची
  172. 11:47–11:49भी बवाँशाली आची
  173. 11:49–11:50खरक दूर्दशा
  174. 11:50–11:52जटिनक बिना गर में
  175. 11:52–11:54जोल मक्डा बरी जाईचे
  176. 11:54–11:56आंगना में दूभी जनमी जाईचे
  177. 11:56–11:58तएकर मुल आर्थ की भेल
  178. 11:58–12:00इई उपेख्षा अशुन्निताक त्रिष्चे चे
  179. 12:00–12:02पतनिक बिना गरक दूर्दशा
  180. 12:02–12:07इदबल नीक विज्यल मेताफर चे, मात्र चाूकी से चूबला पर इभेल,
  181. 12:07–12:12जब प्रक्रिति वोकर गर पर कवजा कोले लक, जोल मकला अदूभी से.
  182. 12:12–12:15इस्त्रिक बिना पुरुश्वाला समाजक पतनक मेताफर चे नहीं.
  183. 12:15–12:45अगर बवाग बवाग बवाग बवाग बवाग बवाग बवाग बवाग बवाग बवाग बवाग बवाग बवाग बवाग बवाग बवाग बवाग बवाग बवाग बवाग बवाग बवाग बवाग बवाग बवाग बवाग बवाग बवाग बवाग बवाग बवाग �
  184. 12:45–12:47उसब एक तब बंग मैंने मेदख पक्रड़ई चती
  185. 12:47–13:17उही में एक ता लद्दा वणेक्रा गुसा कवूटा इख्टा इख्टा इख्टा इख्टा इख्टा इख्टा इख्टा इख्टा इख्टा इख्टा इख्टा इख्टा इख्टा इख्टा इख्टा इख्टा इख्टा इख्टा इख्टा इख्टा इख्टा इख्टा इ�
  186. 13:17–13:47अग, उग, उग, उग, उग, उग, उग, उग, उग, उग, उग, उग, उग, उग, उग, उग, उग, उग, उग, उग, उग, उग, उग, उग, उग, उग, उग, उग, उग, उग, उग, उग, उग, उग, उग, उग, उग, उग, उग, उग, उग, उग, उग, उग, उ�
  187. 13:47–13:51अवर्शा नहीं होई बाक तनावके कम करबाक
  188. 13:51–13:54एक ता सामूहिक मनोवे गयने क तरीका तनही चल?
  189. 13:54–13:56इस्त्री गण नाटक के माद्धिम से
  190. 13:56–13:58अपन कुन्ता निकाले थ चते
  191. 13:58–14:02आफिर जग्राए इस्त्री गारी सुन्बाक जे बहाना चै
  192. 14:02–14:05उई गुतन के एक ता रिलीज देद ची.
  193. 14:05–14:10उफु, मने ये एक ता ख्टरेपी सेशन जगा काज करे चल,
  194. 14:10–14:14जगन पूरा गाँ हासे तचा या तनाव दूर होएच छा.
  195. 14:14–14:20भिल्कुल, उचमाज आपन मान्सिक स्वास्तेक प्रबंदन सामोही क्रुब से करे चल.
  196. 14:20–14:22ता एक गेहन चर्चा से इस पश्थ होईत चाए,
  197. 14:22–14:26जे च्छ जटिन केवल एक ता लोक निरत्त नहीं है,
  198. 14:26–14:28बलकी मितलाक पारिवारिक जीवन,
  199. 14:28–14:30इस्त्री विमर्ष, विरह की पीडा,
  200. 14:30–14:33और क्रिषी के लिये वर्षाक प्रतिक्षाक के,
  201. 14:33–14:38अभी वियक्त करबाग एक तसम्पुर्न सामाजिक और मनो वैग्यानिक अनुश्धान थिक
  202. 14:38–14:40एक द्रोम सत्थीक निष्कर्स निकालल हूँआ
  203. 14:41–14:44आदे आबिका हम्रा सब के सोच्ढबाप पर विववष्वे पारत अची
  204. 14:45–14:48कलपना करू, सद्यो पहिने एक तसमाज
  205. 14:48–14:52अपन प्राक्रितिक आब्दा और पारिवारेक तनाव से निपपटबाक लिल
  206. 14:52–14:56एक ता नकली व्यवा और परोसी की गारी से जुडल अनुश्ठानक निरमान के लेक
  207. 14:56–15:22जही से पुरा समाचके एक तक्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध

Plain text

गंबीर राती आचे, गाँक चारुदीस, अंद्खार, निस्टब दथा पस्रल आचे, मुदा एक्ता अगना मेंने किचु अलक बहुर रहल चे आए, एक्दम एक्ता रहस्स्यम मैं द्रष्य। भीलकुल, गर के पूरुष वरग सुतल चती, वा गाँ सब भार चती, इस्त्री सब एक था जमाब हो गुप्त रूप से एक ता अनुश्ठान कर रहल चती. जते कोनो ऊस्त्री पूरुष परिदान पहिणने चती. अकोनो चिटगर साडी. उसब हसी रहल चती, कान्दी रहल चती, माने समाजग कद्होर नियम पर भ्यंग कर रहल चती, अथता एक ता भ्यंग के मार का, गाउक चब सजगड़ाई इस्त्रिक दरवजा पर फेखय बाई चती. बाप्रे, इस सूनी में कते क अजीब लगे च्याना? आप सूनी में ही कोनो जादूईवा रहस्सेम ही पंद काज लगे चे, मुदा इवास्तव में मितलाक सद्यो पुरान जत जतिन लोकनातिक वास्तदिक सुरुप थी. अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अ� तज्ये किचु नव आप विश्लेशनात्मक सीखबा के लेल उच्सुक रहे चतीने, उनकर लेल इचर्चा बड रोचक हेत. आब एक रा विस्तार सबुजी इगर सुर्वात को ना भेल कि इए आदिकाल से चली आभी रहल कोनो गामक अनुश्ठान चल? अग, तक तख तख हैं सब हेल? पन्द्रहमम शताब दिक भब्य राज्दर्बार्सा की बात करे ची? राज्दर्बार्सा? आख आख, एक दम, चोडदसो बारासा, चोडदसो चीालिस इश्विक मद्ध्य, जगन मिठला पर महराज शिव्सिंकर शासन चल. अद्यापति गीत के सरवुच्जस्तान प्राप्त्त्चल आए उज्याग दरबार में इक ता महान संगीत कार चला जिनका जेट्वा जट्काल जाइत चल माने विद्यापति गीत के मनच्दरी लाउजेवा का काज इजेट कराज चला तीक अहिना बुजु अपने विद्यापतिग गीट के मन्च्दरी लाव जेवा काज इजेट करहल चला तीक औहना बुजु राजा शिव सिंग आदेश दिलतिन जे अविद्यापतिख पदावलि गीट सबह के राग रागेनी में बान्द्बा काज कर थे जाही से उक्रा अबेने कग कग प्रस्तुत केल जासके ताहीक्रम में एई सांगितिक अख्यान के मंज पर उतार्बाक लेल जट जटिन नाटक कर अच्ना भेल आज जटक भूमिका स्वयम उ संगीत कार जट करे चलान रूकी जाओ, रूकी जाओ ये ते ते एक ता बडभारी विरोदबाश च्याए. की? आहा कहल हूँ जे एकर रचना एक ता पूरुस संगितकार केलनी. दरबार मेकर मुक्कि भूमिका से हो एक ता पूरुशे द्वारा केल गेल. आहा बिलकुल. मदा आएक जजटिन हमरा सब देकाई ची, उता पून रूपेन इस्त्री गन कनुस तान ची? रादिक अंदकार में, केवल इस्त्री सब एकरा अबनीत करए चती, जटे पूरुष प्रवेश वरजिच थे? हा! देखू ये जे सांस्क्रितिक रूपान्त्रन भेल चेने, उ एतैं सबहसा आकर सक्गब पच्छे. मने यी पूरुष द्वारा रचित नातक इस्त्री सबखक लेल एक ता एहन्त सेप इस्पेस कुना बनी गेल. सो चु उ उही समय के पित्र सत्तात्मक समाज मे, इस्त्री गन लग आपन कुन्ता, आपन पीना साजा कर बाग, कुनो सामहिक मंजत जल नहीं. आप, दिन राती बस गर्यस्ती काज. एक दम, सासुर खडाई और समाजिक मर्यादक भीच उसब बन्धल रहिच चली. तजगन इदर्बारक नाटक गाूंगर दरी पहुचलन, तखन इस्त्री गरन एक्रा मात्र एक्ता कता में सीमित नहीं राखी, अपन अनुकुल डाली लिलनी? औ, मने उसब एक्रा अपना अभी व्यक्तिक माध्ध्यम बना लिलनी. अग, सावन भादुक मास में, जखन पूरुश वर्ग क्रिषी काज में बज़ल रहे चल, वा बाहर रहे चल तकन राती क समें इस्त्री सब एक ठाम जमा होए चलीं. तैं आतक हुनकर लेल एक ता मनोविग्यानेक आश्डे बनीगल. बिल्कुल, जतै उ सब बिना कुनु पूरुश रस्तक्शेप के समाच के बन्दन से मुक्तबहे का, अपन दामपते जीवनक यतार्त के जीभी सकत चलीः. उआपन सासक आलोचना का सकत चलीः, पतीक उपहास का सकत चलीः. इत बड़ादबुच है, ज़े एक राँ सव आएक सन्दर में देखी, तई उही राट्री कालीन आयोजन वा सलंबर पार्टी जका चै, जदे इस्त्री सब आपन देनन्दिन जीवनक मुखोता उतारी का, वास्त्वेग गप्षप करे चती. अगर प्रभाव कत्ह वस्तूपर से हो पडल हैते, राजा रानी कत्हत नरीगल हैते. नहीं, नहीं, राज दर्बार सब आबाहर निकले, इना तक अप पती पतनिक गर आंगन दारी पहुच जाई तची. कत्हा शुरु होई तची भी आख पहिल्सालक सामन्सद. ब्याहक पहिल्सालक सावन सबूँ नवविवाहित दंपतिक ग्रिहस्तिक नोक जोक नवविवाहि जटिन अपना नेहर जाई चाहच्छतिन मुदा दार में बाड च्याए नवविवाहित दंपतिक ग्रिहस्तिक नोक जोक? आई यी भाडी केवल प्रक्रतिक बादा नहीं आजे बलके सासुरा के उही प्रतिबंदख के शेहो प्रती कचे जे नववविवाहिता के आपन माई बापक सा दूर रखे तची प्रतिकात्मक आर्थ चये कर बलकुल जदिन आपन माइ सब प्रतिकात्मक समवाद करे चतिन जे विदाए गिरी कराभे ले कोनो नुा था कुर वा ब्राम्वन के नहीं पथाओं अन नहीं पैग भाई के पथाओं तक कक्रा पथाओं उजिद करे चतिन जे चोटका भाई के पथाओं अपने चोटका बाई संगे अदिक सहज रहे चलिया एक दम आस सासुरक लोक से हो चोटका बाईक हत कागु कखनो कखनो नमी जाएच चला पहग भाई वा बाहरी लोकक समखष सासुर में मर्यादा अपर्दा ककत्फुर नियम चल औह, हू, हाँ मैंने चोटका बाई संगे इस्तरी अदिक सहज रहे चलिया एक दम आस सासुरक लोक से हो चोटका बाएक रद कागू कखनो कखनो नमी जाए चला तज्दिनक यी समवाद दरसल नव विवाहिताक औही मान्सिक चट पताहत के देखावे तची, जे कोना ओ आपन नहर क सुरक्छत वातावरन में पहुचे. मुदा जक्ठन नहर जेबा की उपाई विफल भैजाए चे, तकन की होएचे? तकन जतिन रड़ करे चति, जो जुमुर खेलाई बो, मुदा जोट वो मना कदिच्छति. मने कुनो काज हुए नहीं रहल चे? आपहेर एताई इस्ट्री मन्डलिक दीच समवाद हो इच्छे, कोन पात पर चडी का, अउतर भेटाई चे पुरेनिक पात पर. पूरेनिक पात मने कमलक कपात अद्तदुप्रान्त रास्य विनोदक संगे, उतै प्रतिकात्मक विवा होगताची इप खमलक पातक की संदर विचाते देखो, पूरेनिक पात पानी पर रहे तची, मुदा पानी उक्रा भीजा नहीं पाभे तची इन्नव्विवाहित जीवन्क उही नाजुक अवस्था के दर्षावेत अची जतै संबन्द अविन अछे च्य पवित्र चे. औह, मने संसार ककतु यतार्त उक्रादरी पहुचले नहीं आचे. एक दम. इस्त्री गणड़क द़ारा दामपत्य जीवन क स्वर्वाती मादूर्यक के फेर सजीबके क्ता प्रास्तिक. इता बहुत सुन्दर चित्रन्चे, नव-नव भिहाक बादक स्वर्वाती दिन, मुद एक्रा बाद ग्रियस्तिक आस्लीगव स्वर्वोई चेने. अद्ता खन जटक जे उतर च्याजा थीन जद्यागा देखादा थीन जद्यागा तो वो बवागागा तो वो बवागागा तो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो व उतो बड़ रहासे पूँन चे, उकहे चतिन जे उनकर ता हातिदरे बिका अगे लाची, मात्र हातिक सीक्री बचल चे. आखा, इदिश्योकती पूँन रहासे अ वास्तव में उही आर्थिक दबाव के, हासी में उडावा किक ता तरीका चल. इते आबी ही गप बर रोचक बज़ाई तची इत एक दम आदूनिक भिवाक का हनीमून फेजक बात का चोट-चोट गप पर होगे वला रूसब फुलाप जका चे बिल्ल्कुल औहिना आ ची माने हातिक सीक्री वला बहना आई कालेक अ बहना जका चे अगर उगर बद्खान पती कहे चे जे बआँक सरवर डाउन चे ताईले दाईमने खिन सकलों एक दम सही दर लों इस्त्री सब के अपन निजी जीवनक आर्थिक तंगी पर रस्भा किक्ता अफसर देच चले मुदा एही हसी मजाकक भीछ नाटक अचाना किक तक गमभीर यक हारत दिस मुर जाएत अची गमभीर यक हारत तागन जत की कहा चतिन जत एक तक कत हो यक हारत दिखावे चतिन उक हारत चतिन जिदान के फसल तयार चे तकर कतनी जरूरी चे मैंने, पेट भरब, भावुकता सब एसी महत पूँन चै. आई, एही भीच सोतनी गप सूनी जटन देरा जाएच छतिन. औह, असुरक्षाक भाव. बहु विवाज प्रता कारन इभभय सतावे चल, जे जो उन नहर गिल ए, तपती दोसर भी आख कर लेद. भील्कुल, आई आई आद्थि कव्षक्ता कारन जट मोरंकमायल प्रस्टान करे चा दिन मोरंक्, मैंने नेपालक तराएक शेट्र आई, यी वियोग काल चे आई, जटक अनुपस्तिती में सुनार जटीनक के गेणनाक प्रलोबन देच्छे अगर बात करेची इतो एक दम आई काल की देली सोप जका बागेल आई. अ, अ, एक दम. जते नायक का सब आजाए चे अ खल नायक प्रलोबन लोक प्रविष करे चे. मोदा जटिन द्रुद रहे च्ठें उ प्रलोबनक के अस्विकार कग जटक सुन्दर ताक वरनन करे च्ठें. इी नारी निष्टाक एक ता प्रतिकात्मक प्रस्तुती थेक तक इी लोक नातक के माद्यम से समाज आपन इस्त्री गनक लेल नैतिक्ता अ निष्टाक पाट सेव पडवार हल चल? देखु, जा हम्रा सब एक राप पाइग परिप्रेक्ष्सद जोडीने ते इस पष्ट होई तखछी, जे इनाटक, नेटिक्ता वियोग में प्रेम, आ भूटिक्ता सा उपर समबन्दख रख्बाक शिक्षा दए च्छा देच्छे. आ उ हो मनोरन्जक तरीका सा. अंज सिनेमाई अंदाज में तक कतक अस्ली ध्रामात जटक वाप्सिग बाद चुरू होगते. इक दम. जट मुरंग सकमा कगुरए च्छतिन, दूरी सप्रेम तब भडल, मुदा संगे रहला पर फिर साहेंकारक तक्राव होगता ची. माने जग्डा? हाई. एक दिन कोनो बात पर जग्रा हो इच्च्छाए आज्जट असाव्दानी वा क्रोद में जटिनक चोएकी से चूभी देच्छतिन चोएकी माने सूप वज़्ारू आएक रा अपमान भोजी जटिन रूसी का गर चोडी देच्छतिन बाप्रे मात्र चूएकी से चूभला पर इतनेक बडी बात? चूएकी से चूभब, मितला संसक्रिती में एक ता पेगवाप मान मानल जाईते ची. एई स्वाभिमान पर चोट चल. एक ता इस्तरी सम्पूरन भोतिक प्रलोबन त्याख कै सकेते ची. मुदा अपन स्वाभिमानक हनन बड़ाश्त नहीं कस गईताची तजटके पचु तावा होई चे? तजट पश्षा ताप करे चाती अग गोपी मनिहारे नादिक वेष्दर जटीनक कोज में निकले चाती मुदा गर काजे दूर्देशा दिक हावल गेल अची भी बवाँशाली आची खरक दूर्दशा जटिनक बिना गर में जोल मक्डा बरी जाईचे आंगना में दूभी जनमी जाईचे तएकर मुल आर्थ की भेल इई उपेख्षा अशुन्निताक त्रिष्चे चे पतनिक बिना गरक दूर्दशा इदबल नीक विज्यल मेताफर चे, मात्र चाूकी से चूबला पर इभेल, जब प्रक्रिति वोकर गर पर कवजा कोले लक, जोल मकला अदूभी से. इस्त्रिक बिना पुरुश्वाला समाजक पतनक मेताफर चे नहीं. अगर बवाग बवाग बवाग बवाग बवाग बवाग बवाग बवाग बवाग बवाग बवाग बवाग बवाग बवाग बवाग बवाग बवाग बवाग बवाग बवाग बवाग बवाग बवाग बवाग बवाग बवाग बवाग बवाग बवाग बवाग बवाग � उसब एक तब बंग मैंने मेदख पक्रड़ई चती उही में एक ता लद्दा वणेक्रा गुसा कवूटा इख्टा इख्टा इख्टा इख्टा इख्टा इख्टा इख्टा इख्टा इख्टा इख्टा इख्टा इख्टा इख्टा इख्टा इख्टा इख्टा इख्टा इख्टा इख्टा इख्टा इख्टा इख्टा इ� अग, उग, उग, उग, उग, उग, उग, उग, उग, उग, उग, उग, उग, उग, उग, उग, उग, उग, उग, उग, उग, उग, उग, उग, उग, उग, उग, उग, उग, उग, उग, उग, उग, उग, उग, उग, उग, उग, उग, उग, उग, उग, उग, उग, उ� अवर्शा नहीं होई बाक तनावके कम करबाक एक ता सामूहिक मनोवे गयने क तरीका तनही चल? इस्त्री गण नाटक के माद्धिम से अपन कुन्ता निकाले थ चते आफिर जग्राए इस्त्री गारी सुन्बाक जे बहाना चै उई गुतन के एक ता रिलीज देद ची. उफु, मने ये एक ता ख्टरेपी सेशन जगा काज करे चल, जगन पूरा गाँ हासे तचा या तनाव दूर होएच छा. भिल्कुल, उचमाज आपन मान्सिक स्वास्तेक प्रबंदन सामोही क्रुब से करे चल. ता एक गेहन चर्चा से इस पश्थ होईत चाए, जे च्छ जटिन केवल एक ता लोक निरत्त नहीं है, बलकी मितलाक पारिवारिक जीवन, इस्त्री विमर्ष, विरह की पीडा, और क्रिषी के लिये वर्षाक प्रतिक्षाक के, अभी वियक्त करबाग एक तसम्पुर्न सामाजिक और मनो वैग्यानिक अनुश्धान थिक एक द्रोम सत्थीक निष्कर्स निकालल हूँआ आदे आबिका हम्रा सब के सोच्ढबाप पर विववष्वे पारत अची कलपना करू, सद्यो पहिने एक तसमाज अपन प्राक्रितिक आब्दा और पारिवारेक तनाव से निपपटबाक लिल एक ता नकली व्यवा और परोसी की गारी से जुडल अनुश्ठानक निरमान के लेक जही से पुरा समाचके एक तक्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध

← Transcript index