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कागजी_न्याय_आ_नाम_बचाओ_कबड्डी.m4a

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Part 9 · VIDEHA MITHILA MAITHILI DISCUSSION CRITICISM SERIES PART 9
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  1. 0:00–0:03बिमिमर्शक इं मंच्पर आहाक स्वागत अची
  2. 0:04–0:08प्राया जकन हम्रा सब मने न्याय वा इतिहासक बात कराई ची
  3. 0:09–0:16ता हमर मोन में एक ता पाएग पक्काई मारत आ उकर भीतर राखल लोहेक अलमारेक चित्र आवाई तची
  4. 0:16–0:19अग, इक तब बहुत सुरक्षित जगगगग भान होई तजी.
  5. 0:19–0:26इक दम, उ आलमारी जकर भीतर, हजारो पन्नाक फाणिल दरज अची, मूहर लागल अची, अस्ताक्षर अची.
  6. 0:26–0:30हम्रा सब के लागगी तची, जए सत्ति उतई सुरक्षित अची.
  7. 0:30–0:34जो उल्मारिक ताला बन्द था थन्याय सुरक्षत था ची
  8. 0:34–0:41मुदा जखन उल्मारी मैं, आई काटक दीमक बाधेक पानी गूसे ताची उई ताची
  9. 0:41–0:47जखन पन्ना गली जाई ताची, मुहरक रंक पस्री जाई ताची, तो उसत्ति कताई जाई ताची
  10. 0:47–0:51अई बक ये विमर्ष गजेंदर थाकृर्क लिखल गल्प गोही सबख भीच जल समाधिः पर केंद्रीत अची
  11. 0:52–0:54ये एक ता बहुत शवक्त रचना ची
  12. 0:55–1:00एक दम इग द़ा गदनारिकेल गाउ उते भेल एतिहासिक अन्ने जाएग
  13. 1:00–1:02अगरे आज हमरा सब मन्धन करव.
  14. 1:02–1:05आईबक यी विमर्ष गजेंद्र ताकृर क्लिखल गल्प,
  15. 1:05–1:08गोही सबख भीच जल समादी पर केंद्रीत अची.
  16. 1:08–1:10जे एक ता बहुत शवक्त रचना ची.
  17. 1:10–1:13एक दम इक दा गदनारी केल गाउ,
  18. 1:13–1:15उते भेल एतियासिक अन्याय,
  19. 1:15–1:21उते भेल एतियासिक अन्याय, अन्याय लेल संगर्षक एक ता मने लंभा काल क्याल क्ण्डक वरनन करे चे.
  20. 1:21–1:27इपुस्तक हम्रा सबक सोजा एक ता बहुत मोलिक अ विच्लित करे वाला प्रष्नट ठाल करे चे.
  21. 1:27–1:31न्याय अस्सत्यक अस्ली रक्षक के आची?
  22. 1:31–1:37सही कहलो, मुखिप्रष्ने यह जे की सत्या उव आजी जे कागजी प्रमान,
  23. 1:37–1:42जना लिखेत दस्तावेज, डाली वा अदालती रिकोट पर दरज अची,
  24. 1:42–1:46वा फेर सत्या गामक समही ख्स्म्रिती, मोखिक परमपरा,
  25. 1:46–1:49अज सहसी लोकश्मरन में जीवित रहात अची.
  26. 1:49–1:55जक्रा इपुस्तक चन्ना गाचिक भूज सबख्या क्याबड्दी कर रूप में चित्रित करे तच्छे
  27. 1:55–1:56आ, बिल्कुल उई रूप में
  28. 1:56–2:03ता हमर सपष्ट मानने ता इए ची, जे जों ब्रष्ट वेवस्ता काग्जी रिकोट सा लोकक नाम मिटभाई तच्छी
  29. 2:03–2:09तो उकर प्रतिकार से हो सही कागजी प्रमान दारी आबेवस्तिद जाजस समबवाची.
  30. 2:09–2:10मुदा एते हम?
  31. 2:10–2:16तनी सुनु मने बिना बहुतिक साख्षकें सत्यमात्र एक ता अप्वा बनिकर अची तची
  32. 2:16–2:21नन्दि आरोनेक डाईरी वा गोप कुमारक फाद बिना इन्याय कदापी समवव नहीं चल.
  33. 2:21–2:23हमर इपक्ष अची.
  34. 2:23–2:25हमर द्रिष्टिकोन एक रासे तनी भिन अची.
  35. 2:25–2:32हम माने ची जे कागजी वेवस्तापन हमेशा ताकतवर कहत्यार होगी तची.
  36. 2:32–2:37सत्ता आपन सुविदासे सत्ते के गड़़ी तची आमेटबई तची
  37. 2:37–2:46सत्ते अन्याय अन्तता गामक सामोहेक स्म्रिती आ लोकक अदम्या साहसे सुरक्षिथ होगतची
  38. 2:46–2:50कागज नश्वर अची मुदश्म्रिती शाश्वात छी भुजे लिये ना
  39. 2:50–2:58ता आव, हमरा सब उन्ईश्वट्टर का उईपुल पर्योजनाक गटना से शव़बात करे ची, जदे से इस संगर्ष आकार लेई दची.
  40. 2:58–3:06जखन हम इही पुस्तक कगेराई में जाएट ची, ता सत्तिक रक्ष्छलिल लिक्फ्ट प्रमानक महत्ता सर्वो परी दिखाई देईचा.
  41. 3:06–3:08उना उ कागच्त जूथ बाजी रहल चल.
  42. 3:08–3:22अदिकार कागज में लिखाल गयल, जे पुल्दूर गटना में मात्र तीस मस्दूर अग जानगेल, मुदा अस्लियत की चल, असलियत चल, जे तीन स्वमस्दूर मरल चला, इब बहुत पयक भोतिक अग कागजी चल चल.
  43. 3:22–3:28आई 3-0 कष्व्या कते से आएल इ उते से आएल जटे कागज खतम भी जातची
  44. 3:28–3:31आद मने मानवी ए वेदना शुरू होई तची
  45. 3:31–3:35तच्व्यार केलनी जक्रा ओई चपाक के ही साभ कही चतिन
  46. 3:35–3:37आए रातिक अन्धार मे
  47. 3:37–3:42बिल्ल्कुल रातिक अंदार में जखन लाश्षव के नदी में फेकल जार हल चल,
  48. 3:42–3:45तो ओ पानी में खसवक चबाक आवाज सूनी सूनी के,
  49. 3:45–3:50डारी में लकीर खिचाई चला, ओ तींसो लोकक सत्यके आपन डारी में दरज केलनी,
  50. 3:50–3:52इकी पमानित करे तचे.
  51. 3:52–3:53अमर विचार सा...
  52. 3:53–3:54इई अस्पष्ट करे तची
  53. 3:54–3:57जे सद्टाक जुता काट मात्र एक ता दोसर
  54. 3:57–4:00भेसी प्रमानी का स्वतन्त्र दस्टावेज देसा के तची
  55. 4:00–4:02इबात तची कची मुद्दा
  56. 4:02–4:05तनी विचार करू जे ओही कागच कर
  57. 4:05–4:07ओही डाईरी खषर की भेल
  58. 4:07–4:12आहां जे न्याई प्रनाली पर जे कागजी दुन्या पर एते गुईश्वास कर रहल ची
  59. 4:12–4:15उता बहुत सहजता से उक्रा नष्ट कर देलक
  60. 4:15–4:17मुदा उते बेवस्थाख दोस अची
  61. 4:17–4:21नहीं सुनुत अदालती फाईल बदली देल गल
  62. 4:21–4:23माल खाना मे पानी गूसी गल
  63. 4:23–4:28आन्दी जब यसर सर पास्वानक जुता असर्युक चोकलेट संसाख्षे जमा करेन चला
  64. 4:28–4:30उसब सर्णीगल
  65. 4:30–4:33गावक बाक चे सीख है उक्रमोन पाडु
  66. 4:33–4:37जकर मेड नदी कालेट उकर मुकद्मा कागच कालेट
  67. 4:37–4:41हमर केबाक अर्थ यी आची जे उविवस्ताक विफलता चे
  68. 4:41–4:45खागज के नहीं, खागज ता सक्ते बाजे चलना?
  69. 4:45–4:49नहीं, उखागज के अंतर नहीत कमजोरी या चे.
  70. 4:49–4:54मने खागज उक्रे सुएक तची, जकर हाथ में मूहर होई तची.
  71. 4:54–5:00जकन आदालत साक्छी के नजर नदास कर दे तची, तकन न्याय आदालती कागज से नहीं,
  72. 5:00–5:04बरुच्चन्ना गाची क्यो बूटसवक सुरक्षित होई तची
  73. 5:04–5:06औहो उ बूटसवक कबद्टी
  74. 5:06–5:06आआ
  75. 5:06–5:10उ बूट्ट जे भिसरायल नाम के बाजी-बाजी क
  76. 5:10–5:13गाच के पतटपर हर्यर कोपलजका उगादे च्छतिन
  77. 5:13–5:17इस्म्रती हिरायल काग्जके पराजित कदे तची
  78. 5:17–5:20आहाई इबूतसबख कबद्टिक बात उद्टाओलों
  79. 5:20–5:23जे पस्तका के एक ता बहुत चर्चित हिस्सा आची
  80. 5:23–5:26मुदा हमरा इज सम्जाओ जे एक ता बच्चा सबख खेल
  81. 5:26–5:29वबूतसबख रूप के किनाने दासा कै ची
  82. 5:29–5:31किनाने दासा कै टेची
  83. 5:31–5:39इसुन्ने में कावियात्मक जरूर अची, मुदा वास्त्विक्ता में खूनकाच करे तची, की अदालत एही कबद्टी के साख्श मानत।
  84. 5:39–5:41इं मात्रिक्ता काव्यात्मक रूपक नहीं आची
  85. 5:41–5:45इं प्रतिरोदख एक देखार मनो वैग्यानिक तन्तर आची
  86. 5:45–5:47तने उही द्रिष्यके कल्पित करू
  87. 5:47–5:52राद को समय आचे चन्ना गाची में अब च्च्या सबख भूद
  88. 5:52–5:56उ बच्च्च्या जे एही शोषक विवस्था में अप्पन जान गवाचुकल चती
  89. 5:56–6:00उ एक्ता होई च्छती अ नाम बचाँ कबद्टी खिले च्छती
  90. 6:00–6:02इक यह ची?
  91. 6:02–6:07जगन शोषक तन्त्र सरकारी रजिस्टर सर लोकक नाम मिता दे थचे?
  92. 6:07–6:10उक्रा मात्र एक्ता संख्या बना दे थचे?
  93. 6:10–6:14अगाम का समहिक चितनामे उनाम के जिन्दारखे च्छती।
  94. 6:14–6:15एक ता विद्रोह गुरुप में
  95. 6:15–6:16एक दम
  96. 6:16–6:19इराजे प्रायोजित विस्म्रितिक विरुद
  97. 6:19–6:23बच्पनक मासुम्यत सा केल गलेटा बहुत पैग विद्रोह च्छे
  98. 6:23–6:25ये बोथ सुन्दर विस्लेशन आची
  99. 6:25–6:29बच्पनक मासुम्यत सा केल गलेता बहुत पैग विद्रो है
  100. 6:29–6:31ये बज्द सुन्दर विसलेशन आची
  101. 6:31–6:33हम माने चीजे ये एक ता विद्रो हैचे
  102. 6:33–6:36मुदा हमर प्रश्ना ये आची जे
  103. 6:36–6:39की स्म्रिती से आहा कोनो तन्त्र के बदली सके चे
  104. 6:39–6:44अमरा लागे थी जे स्म्रिती से हो एक ता डायरी जका आचे जक्रा बैकपाक आववष्श्ख्ता होई तशे
  105. 6:44–6:46आहा फेर कागच परावी गे लो हूँ
  106. 6:46–6:49आँ, करन येदी कोनो चीस लिखित में नहीं आचे
  107. 6:49–6:52तो वो एक दो पीडी के बाद अफवा बनी जाई तचे
  108. 6:52–6:54ता की कागज अप्वान नहीं गड़े ता ची?
  109. 6:54–6:57गड़े ता ची, बilkul गड़े ता ची.
  110. 6:57–7:02मुदा कागज सत्ते केन पीडी दर पीडी हस्तानतरइत से हो करे ता ची.
  111. 7:02–7:07और एही लेल हमहाके कोरोना कालक उही प्रसंग दिसलजा याल चाहता ची.
  112. 7:07–7:12जन उनिस्वाट्तर में कागज कमजोर चल, ता आदूनी क्युग में और दिजितल भागेल.
  113. 7:12–7:16दिजितल भागेल मुदा शोशन ता उत्बे आचे.
  114. 7:16–7:18देखु, गोप कुमारक जाजके देखू.
  115. 7:18–7:21जखन महामारिक समय में विवस्ता चरमरार आशल चल,
  116. 7:21–7:25तकन गोप कुमार एनर सततर कोडक भन्दा फोड केलनी.
  117. 7:25–7:28मुदा उ एनर सततर कोडक वास्तमे की चल,
  118. 7:28–7:32उत उही कागजी विवस्ताक एक ता पाखन्दी रूप चलने?
  119. 7:32–7:35भिल्कुल. उ शोषक के एक ता तूल चल.
  120. 7:35–7:38एनर सततर कोडक माद्धिम सब्रस्त अदिकारी
  121. 7:38–7:40अगर समदान की चल
  122. 7:40–7:42अगर समदान बूद सब कबड्ट्टी नहीं चल
  123. 7:42–7:44अगर समदान चल
  124. 7:44–7:46गोप कुमार सन अनवेशक कण अदिकारिक जाच
  125. 7:46–7:48भी जिजितल और कागजी दोखा द़ी चल
  126. 7:48–7:50मुदा एकर समथान की चल
  127. 7:50–7:52एकर समथान भूथ सब कबड़ी नेचल
  128. 7:52–7:54एकर समथान चल
  129. 7:54–7:56गोप कुमार्सन अनवेशक कड़ अदिकारिक जाच
  130. 7:56–7:58अगी पाल के है केलनी
  131. 7:58–8:00दाटा निकालनी
  132. 8:00–8:05एकर समदान्चल गोप्कुमार्सन अनबेशक का अदिकारिक जाज
  133. 8:05–8:09अ, उही प्यल के है क्यलनी, डटा निकालनी
  134. 8:09–8:12और उकर तींटा बैकव्प पातिली पी तैयार के लेनी
  135. 8:12–8:15जो उप्वेवस्तित अनबेशक नहीं करी ते
  136. 8:15–8:18ता इस सत्ति कही अब बाहर ने यभेत
  137. 8:18–8:20कागज जुट भाजी सकेत अची
  138. 8:20–8:23मुदा अकर कात बेवस्तित कागज से समबव अची
  139. 8:23–8:25तनी रूकू,
  140. 8:25–8:28आहा गोप कुमारक बेवस्तित जानच के जे बखान कर हल ची
  141. 8:28–8:31उमे एक ता बहुत बैग गड़बडी आची
  142. 8:31–8:32की गड़बडी आची
  143. 8:32–8:35गोप कुमाराके इसब करबाक प्रेडना कतिस आयाल
  144. 8:35–8:38उप्रेडना कोनो सरकारी निमावली से नहीं आयल चल
  145. 8:39–8:41उप्रेडना नन्दिकाओ डारी से आयल चल
  146. 8:42–8:45जे डारी एक्ता नदिक कात में पीपरक जडी में गाडल चल
  147. 8:46–8:48उखागज काम आएक्ता अनुश्ठान बेसी चल
  148. 8:48–8:51मुदद तायो उ चलत दाईरी एन नहीं
  149. 8:51–8:54दाईरी चल मुदद अकर महत्व अकर पन्ना में नहीं
  150. 8:54–8:57अक्रा सुरक्षित रक्वाग भावना में चल
  151. 8:57–9:00आँआँई जे दिज्टल बेवस्थाक का बात करो हल ची
  152. 9:00–9:03तो उही दिज्टल बेवस्थाक दोसर नमूनोत दे कूई
  153. 9:03–9:06अगर उज़्ल जाँशन लिंग पर क्लिक के लहूँ आए आए आएख पुरा जिवन कर कमाई गायभ
  154. 9:06–9:09इश्वोशन के क्यट विवस्तित जाल अची
  155. 9:09–9:14अगर उज्वल जाशन देखाशन देखाशन देखाशन देखाशन
  156. 9:14–9:18अगरा फोन पर दिजिटल अरेश्ट का दम्की देल जाएत छी.
  157. 9:18–9:22इस्क्रीनाक पाचा भैसल शोषक, जाल चंद्रपाल, बतान दीजिटल अरेश्ट का दम्की देल जाएत छी.
  158. 9:22–9:26अगरा पोर दिजितल आरेश्ट का दम्की देल जाएत छी
  159. 9:26–9:32इस्क्रीनाक पाचा भैसल शोषक, जाल, चंद्रपाल, बताना, रागव, सोमानी सन लोग
  160. 9:32–9:36उज्वल के एते गडरा देच छती जे अपन जान देदाएत छी
  161. 9:36–9:40उखरा फोन पर, दिजिटल आरेश्ट का दम्की देल जाएत छी.
  162. 9:40–9:43इस्क्रीनाक पाचा भाईसल शोषक, जाल चंद्रपाल,
  163. 9:44–9:46बताना रागव सोमानी सन लोग,
  164. 9:46–9:48उज्वल के एते गदरा देच छती,
  165. 9:48–9:50जे अपन जान देदाएत छी.
  166. 9:50–9:52अब बहुत रदे विदारक गटना चल
  167. 9:52–9:55आई में कागच को देटा की करो हल आची
  168. 9:55–9:58उलोकंके दराए चुपकरा बचाहे तची
  169. 9:58–10:01उज्वलक मोद कोनो फाईल का कमीशन आभेल
  170. 10:01–10:06अभेल कारन दिजितल कागच होकर मन में देशत प्यदा कर दे लग
  171. 10:06–10:08एकर तोर कुनो फाईल में ने चल
  172. 10:08–10:10ता एकर तोर की चल
  173. 10:10–10:14एकर तोर चल देविट का अ प्वल्मति के अकर विरोद में तार हे बामें
  174. 10:14–10:17आहा देविका अ प्वल्मतिक बात उठोल हूँ
  175. 10:17–10:18जे बहुत महतपून ची
  176. 10:18–10:21मुदा जखना हा प्वल्मतिक बात करे ची
  177. 10:21–10:26ता हम्रा एब अताओ, जे नाम आप पहचानक मेटनाई कताईसे शुरू हुएता ची.
  178. 10:26–10:26कताईसा.
  179. 10:26–10:30सर्यू कुदाहरन लेप, सर्यू कनाम रजिस्टर में नहीं चल.
  180. 10:30–10:34उ मुत्बागे लिए, मुदा कागच पर उच्छलीे ही नहीं,
  181. 10:34–10:37कारन, हुंकर पती पहले मल गल चला
  182. 10:37–10:40और उ पती कनाम पर काज कराईत चलीए.
  183. 10:40–10:43रहा, वेवस्ता लेल उ कोनो अन्सान नहीं चलीए.
  184. 10:43–10:47भिल्कुल, समाज में नयाए कागच सस्थापित होत आची
  185. 10:47–10:50जे आहाक नाम कागच पर नहीं आची
  186. 10:50–10:53ता हाग कोनो अदिकार नहीं आची
  187. 10:53–10:56नन्दी जखन दारी में सर्योक नाम लिख़े च्छतीं
  188. 10:56–10:59तकन उख्रा वापस अस्तितो में लावे च्छती.
  189. 10:59–11:02आए, आग ईबात विचारनी आची
  190. 11:02–11:06कागछ पर नाम मिटनाई वास्तवे में बहुत पैगा प्राद ची
  191. 11:06–11:13मुदा की, आही नहीं मानब जे कागछ जेना नाम देश कैताची, उही नाउ नाम छीनी सोहो सकैताची.
  192. 11:13–11:13कोना?
  193. 11:13–11:19फूल मती के प्रसंग के फिर से देखो, जगन फूल मती के शहर में बनदक बनावल जाईताची,
  194. 11:19–11:21तसथा आशोषक उक्रा की कहेताची?
  195. 11:21–11:24उक्रा FM कोड देल जाईता ची
  196. 11:24–11:26एक ता अन्सान के जकर अपन भावना ची
  197. 11:26–11:28अपन पह्चान अची
  198. 11:28–11:31उक्रा मात्र दूटा अंग्रेजी अक्षर में बडल देल जाईता ची
  199. 11:31–11:33आ उही FM कोड क संगे
  200. 11:33–11:37अख्रा सदा कागज पर अंगुठा लगावे लेल दबाव देल जाई तची
  201. 11:37–11:40इख्गज शोशन कच्च्रम रूप आची
  202. 11:40–11:41बलकुल
  203. 11:41–11:44उदा अंगुठा लगानाई की आची
  204. 11:44–11:46उग्टा कागज इप्रक्रिया आची
  205. 11:46–11:49जग कागज इतिक पवित्र आची
  206. 11:49–11:52तो कागस प्ल्मति के गुलाम किये बनार हल चले
  207. 11:52–11:55एक ता अंगुठाक निशान निषक्रिय होई तची
  208. 11:55–11:59अक्रा दोखे सा वज जोर जबर दस्ती सा लेल जासके तची
  209. 11:59–12:01जेना शोषक्तन्त्र करे तची
  210. 12:01–12:03मुदा प्ल्मतिक बचाव तची
  211. 12:03–12:06पूल्मतिक बचागजी अंगुथासा नहीं भेल
  212. 12:06–12:08ता आहा कनुसार अकर बचागजी कोना भेल
  213. 12:08–12:11अकर बचागजा अकर सक्रिया आवास अभेल
  214. 12:11–12:15जखन लाईवीट्ग केम्रा अकर सोजा अवेत छ़ी
  215. 12:15–12:19तकन पूल्मतिक कापेत मुदा द्रिरता सा चीछिया का कहे चती
  216. 12:19–12:21हमर नाम फुल्मति है, Fm नहीं
  217. 12:21–12:25उ आवाज कागछ सा हजार गुना भेसी शक्तिषाली चल
  218. 12:25–12:28अग, आवाज बनाम कागज
  219. 12:28–12:31अग, अगुटक निशान कागछ पर चबाज जाई तची
  220. 12:31–12:34मुदा आवाज हवामे तेरे तची
  221. 12:34–12:37उखरा कोनो पाल में बंद नहीं किल जासके तची
  222. 12:37–12:42फुल्मतिक उचीएक शोषक कष सब टा काएखजी के द्वस्त कदे लक
  223. 12:42–12:47आवाज में इन्सानक निजता होई तची जे कागज में नहीं भज़ सके तची
  224. 12:47–12:52बहुत मार्मिक विष्लेशन अची, जे अंगुठा निष्क्रीया अची, अवाज सक्रीया अची.
  225. 12:52–12:56हमी मानीच ची, मुदा अवाजक पहुच कतेग दूर दरी अची.
  226. 12:56–12:57मतलब?
  227. 12:57–13:00मतलब फूल्मतिक अवाज तकने प्रभावी भेल,
  228. 13:00–13:04जखन अ दिजितल माद्ध्यम से एक ता रेकोडिंग की रूप में दून्याक सोजा आयल,
  229. 13:05–13:09औहो ता एक ता प्रमानिक डाटा आजी, तनी लट्टर थाकृर के सीक पर द्यान दियो,
  230. 13:09–13:11उ नन्दी के की सिक होने चला.
  231. 13:11–13:14पैसा के गंदवला कागज पर हस्ताक्षर नहीं करव
  232. 13:14–13:15भिल्ल्कुल
  233. 13:15–13:18पैसा के गंदवला कागज पर हस्ताक्षर नहीं करव
  234. 13:18–13:20इकी प्रमानित करएत ची
  235. 13:20–13:24इप्रमानित करएत ची, जिस सत्ता हमेशा गूस सकाज करेत ची
  236. 13:24–13:25नहीं
  237. 13:25–13:29इप्रमानित करेत आची ज़े तत्त्त्या आबवोटिक प्रमानाग जाज आयो प्रसंगी कची
  238. 13:29–13:34अदिकारी गुस बलाख हाम नन्दी के एही भोटिक सतक्ता कारन ग़वर लागल
  239. 13:34–13:37उखाम के सुंगलनी अवक्रासे पयसा के गंदा आयाल
  240. 13:37–13:40सत्ते के जान्चलेल बहुतिक सतक्ता साख्षि आवश्षक अची
  241. 13:40–13:45हम मान अची जिल लत्तर ठाकृ का उस्सीक बहुत महत्पून अची
  242. 13:45–13:46मुदा तनी गेराई में जाू
  243. 13:46–13:50गंद कोनो बहुतिक धस्तावेज का हिस्सा नहीं आची
  244. 13:50–13:52गंद कोनो तत्त्य नहीं आची
  245. 13:52–13:55जिक्रा आहा प्रेुक्शाला में प्रमानेत कर सकत थच्छे
  246. 13:55–13:56तकिय थच्छी यो?
  247. 13:56–14:00गंद एक ता मानविय विवेक अपरम परागत ग्यान अची
  248. 14:00–14:02उमार्टेक भाशा आची
  249. 14:02–14:05अदालत के पाईल कबाशा नहीं
  250. 14:05–14:08जगन अदालत के माल खाना में पानी गुसाइत ची
  251. 14:08–14:14अब विसरर सरक जूतासा चपाक का अवाज अबई तची तो चपाक कोनु टद्ध नहीं आची
  252. 14:14–14:20अव उही म्रतक अवाज आची जे गामक चेतना के जागरत करे तची
  253. 14:20–14:25सत्य टच्य से भेशी भावना अचेतना सा जीवित रहे तची
  254. 14:25–14:29बावना चेतना कमहत्तों के हम नकारी नहीं रहल ची
  255. 14:29–14:32हमरो लागी तची जे मानविय समवेदना बिना नयाय अदूरा आचे
  256. 14:32–14:38मुदा एक तक करवासते इहो आचे जे बावना सा अदालत में केस नहीं जीती सके ची
  257. 14:38–14:39अदा आचे
  258. 14:39–14:43जगन वर्देशु कम्प्निक वकिल अदालत में आबई च्छती, तो की कहई च्छती?
  259. 14:43–14:45उ साव साव कहई च्छती?
  260. 14:45–14:50जूता, चूडी, ताभीज, इसभ भावनाक वस्तु बहुऽ सके तची, विदिक सावच नहीं?
  261. 14:50–14:58अदालत बहावना नहीं भूज़ेत अची, अदालत तत्ध भूज़ेत अची, अजे अजलक तत्ध नहीं अची, ता अजलक बहावना कुनो काजक नहीं.
  262. 14:58–15:01मुदा आख औही आदालत सन्याई भीटल कग्रा
  263. 15:01–15:03बीस पचीस वर्ष भीती गेल
  264. 15:03–15:04तारिक पतारिक पड़ेट रहल
  265. 15:04–15:06माल खाना में शाक्ष सडी गेल
  266. 15:06–15:08इक इग देखा रहा लची
  267. 15:08–15:10इवेवस्ताख सुस्ती आची
  268. 15:10–15:14इग देखा आची जी वेवस्ताख कतिक पंगु आची
  269. 15:14–15:16आस्ली न्याय अदालत में भेली नहीं
  270. 15:16–15:20आस्ली न्याय भेल गावक बच्चा सबख औही इस्मरती में
  271. 15:20–15:24और एकर सब से पैग प्रमान अची मीराक निरभीखता
  272. 15:24–15:27मीराक परसंग वास्ते में द्याना कर्ष्यक अची
  273. 15:27–15:28भिल्कुल
  274. 15:28–15:32जखन चंद्रपाल बताक, गिरो, मीरा के ब्लाक्मेल के लक,
  275. 15:32–15:35उकर नीजी फोटो सार्जनिक करवाग दम की देलक,
  276. 15:35–15:37तम मीरा की के लनी.
  277. 15:37–15:41उ दे राएली नहीं, जिना सदहरनत्या लोग दरी जाएत छी.
  278. 15:41–15:44उगोप कुमारकिन अपन सब्ता प्रमार्डदा दा देलनी,
  279. 15:44–15:49अक्हनी आस्ली मुद्दा हमर नीजता नहीं इआप्रादी जाल अच्छे.
  280. 15:49–15:51आप बहुत सहसी कदम चलों.
  281. 15:51–15:53इणिरभीख्ता कते से अवाई तची.
  282. 15:53–15:58इखुनो सरकारी फायल से नहीं इओ भाक यन वन्शावली पोठी से अवाई तची.
  283. 15:58–16:09जदे बा कहने चलीन, जे परिवारक भेटी आपन नाम आपने लिखाई तची, उक्राखियो मिता नहीं सकई तची. साहस कस्रोत हमेशा मानवी ए होई तची.
  284. 16:09–16:16आजे मीराक साहसक बात के लो, उआदबुत आचे. हम साहमत ची जे साहस बिना प्रमान निरजीव ची.
  285. 16:16–16:21उजी वूची, मुदा तनी इस उचूचू, जे मिरा जे गोप कुमार के दिलनी उ की चल?
  286. 16:21–16:22उदाता चल
  287. 16:22–16:27अपन दाईरी में लिखच छती कि सुईच्छा भैएक भीतर समबजव नहीं होईत
  288. 16:27–16:31उवान चती जे राज्जक आत्मा फाईल क बाहर रहेत अचे
  289. 16:31–16:35मुदा, अद्मा के बचावे लेल फाईल के विषकता आचे.
  290. 16:35–16:38रुट, ये एक तो संथुलिद द्रुष्टी कोन आचे.
  291. 16:38–16:46हमरी मानब आचे, जे ब्रष्ट तंट्र के हर बाक लेल, प्रमान, डैरी, आ अदिकारी कोज, एक ता अचुक आस्तर आचे.
  292. 16:46–16:50जन कागछ जुट बाजत अच्ये तो उक्रा सत्ते कागजे से काटी सके तची
  293. 16:50–17:20आा, आा की तरक सुद्रद है जे आदूनिक युग में बिना प्रमानक हम व्यवस्ता से नै लडी सकच्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्
  294. 17:20–17:50तखन ख्यद ख्यद ख्यद ख्यद ख्यद ख्यद ख्यद ख्यद ख्यद ख्यद ख्यद ख्यद ख्यद ख्यद ख्यद ख्यद ख्यद ख्यद ख्यद ख्यद ख्यद ख्यद ख्यद ख्यद ख्यद ख्यद ख्यद ख्यद ख्यद ख्यद ख्यद ख्यद ख्यद ख्यद ख्यद ख्यद ख
  295. 17:50–17:54अदे ही कासकेईचे, मुदा नाम नहीं कासकेईचे
  296. 17:54–17:58बिल्कुल, आई एक कलप एह तसीखवैतची
  297. 17:58–18:02देहने हे, पाखीने हे, तटयो गाम गाम उड़ाईतची
  298. 18:02–18:07की, गीत, उजीत, उस्म्रिती, उनाम, जे बच्चा सब चन्नागाची में
  299. 18:07–18:09तईयो गाम गाम उड़ाईताची
  300. 18:09–18:11की गीत उगीत उस्म्रिती
  301. 18:11–18:13उनाम जे बच्चा सब चन्नागाची में
  302. 18:13–18:15गवएच्छती
  303. 18:15–18:17उआजर आमर आची
  304. 18:17–18:19उईक ता अदम्या चेतना आची
  305. 18:19–18:21ता श्रोतागन आईबखी विमर्ष
  306. 18:21–18:23हमरा सबकेन इविचार करबाक लेल
  307. 18:23–18:25अदर भाखलेल प्रेरिथ करेत अची
  308. 18:25–18:27जे एजे आदूनिक युग अची
  309. 18:27–18:30जते शक्रीन के गोही सनव रूप में आवी रहा लची
  310. 18:30–18:32जते दिजितल अरेच्ट, रेन समवेर
  311. 18:32–18:34अदाटा चोरीक जाल भिच्छल अची
  312. 18:34–18:37तो उते आहां अपन सत्ते के कते सुरक्षित रखाब
  313. 18:53–18:57अगर उद्याई आप प्रश्नाची जगर खोनो एक्ता सोज वसादारन उतर नहीं आची
  314. 18:57–19:03जेना की हम्रा सब ही शुर्वात में कहलो चल, न्याई अपक्का आल्मारी में बंद फाणल सब में आची
  315. 19:03–19:06वा उचन्नागाची भूद सब अच्मिरती में
  316. 19:06–19:10नियाय अ पक्का आल्मारी में बंद फाँल सब में आची
  317. 19:10–19:12वा औचन्नागाचीग भूँज सब अच्सम्रती में
  318. 19:12–19:16शाएद इदुनु के भीच कक्चे निरन्तर संगर्ष अची
  319. 19:16–19:19उही में कतो सथ्यसास लोर हाल आची
  320. 19:19–19:21एक दम गजेंद्र थाकृर की गल्प
  321. 19:21–19:23गोही सब के भीछ जल समादी
  322. 19:23–19:25एही संग्रषक्कें बहुत सुन्दरता
  323. 19:25–19:27आगगराई सा उके रहेता ची
  324. 19:27–19:29आहा सब सा आगराई ची
  325. 19:29–19:31जे इपुस्तक गगराई में जाओ
  326. 19:31–19:33आअपन उत्तर स्वैम खोजू
  327. 19:33–19:36इविमर्ष आहाक लेल एक ता दिशा मात्र ची
  328. 19:36–19:44सत्यकर कोनو अंतिम विजेता नहीं होईताच, उमात्रेक्त निरन्तर यात्राची. विचार मन्धन जारी रह्बाक चाही.
  329. 19:44–19:49एही विचारक संगे हमरा सब आपक एएंक समाप्त करेच छी.
  330. 19:49–19:54मोन्राखु जकर मेड नदी कालेद, उकर मुकद्मा कागज कालेद.
  331. 19:54–20:00मुदा जकर नाम लोकक सहासी स्म्रिती में दर्जाची अख्रा कोनो गो ही नहीं का सकेते चे.
  332. 20:01–20:05विमर्श में हमरा सवक संगे जुदबाक लिल बहुत-बहुत दन्निवाद.

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बिमिमर्शक इं मंच्पर आहाक स्वागत अची प्राया जकन हम्रा सब मने न्याय वा इतिहासक बात कराई ची ता हमर मोन में एक ता पाएग पक्काई मारत आ उकर भीतर राखल लोहेक अलमारेक चित्र आवाई तची अग, इक तब बहुत सुरक्षित जगगगग भान होई तजी. इक दम, उ आलमारी जकर भीतर, हजारो पन्नाक फाणिल दरज अची, मूहर लागल अची, अस्ताक्षर अची. हम्रा सब के लागगी तची, जए सत्ति उतई सुरक्षित अची. जो उल्मारिक ताला बन्द था थन्याय सुरक्षत था ची मुदा जखन उल्मारी मैं, आई काटक दीमक बाधेक पानी गूसे ताची उई ताची जखन पन्ना गली जाई ताची, मुहरक रंक पस्री जाई ताची, तो उसत्ति कताई जाई ताची अई बक ये विमर्ष गजेंदर थाकृर्क लिखल गल्प गोही सबख भीच जल समाधिः पर केंद्रीत अची ये एक ता बहुत शवक्त रचना ची एक दम इग द़ा गदनारिकेल गाउ उते भेल एतिहासिक अन्ने जाएग अगरे आज हमरा सब मन्धन करव. आईबक यी विमर्ष गजेंद्र ताकृर क्लिखल गल्प, गोही सबख भीच जल समादी पर केंद्रीत अची. जे एक ता बहुत शवक्त रचना ची. एक दम इक दा गदनारी केल गाउ, उते भेल एतियासिक अन्याय, उते भेल एतियासिक अन्याय, अन्याय लेल संगर्षक एक ता मने लंभा काल क्याल क्ण्डक वरनन करे चे. इपुस्तक हम्रा सबक सोजा एक ता बहुत मोलिक अ विच्लित करे वाला प्रष्नट ठाल करे चे. न्याय अस्सत्यक अस्ली रक्षक के आची? सही कहलो, मुखिप्रष्ने यह जे की सत्या उव आजी जे कागजी प्रमान, जना लिखेत दस्तावेज, डाली वा अदालती रिकोट पर दरज अची, वा फेर सत्या गामक समही ख्स्म्रिती, मोखिक परमपरा, अज सहसी लोकश्मरन में जीवित रहात अची. जक्रा इपुस्तक चन्ना गाचिक भूज सबख्या क्याबड्दी कर रूप में चित्रित करे तच्छे आ, बिल्कुल उई रूप में ता हमर सपष्ट मानने ता इए ची, जे जों ब्रष्ट वेवस्ता काग्जी रिकोट सा लोकक नाम मिटभाई तच्छी तो उकर प्रतिकार से हो सही कागजी प्रमान दारी आबेवस्तिद जाजस समबवाची. मुदा एते हम? तनी सुनु मने बिना बहुतिक साख्षकें सत्यमात्र एक ता अप्वा बनिकर अची तची नन्दि आरोनेक डाईरी वा गोप कुमारक फाद बिना इन्याय कदापी समवव नहीं चल. हमर इपक्ष अची. हमर द्रिष्टिकोन एक रासे तनी भिन अची. हम माने ची जे कागजी वेवस्तापन हमेशा ताकतवर कहत्यार होगी तची. सत्ता आपन सुविदासे सत्ते के गड़़ी तची आमेटबई तची सत्ते अन्याय अन्तता गामक सामोहेक स्म्रिती आ लोकक अदम्या साहसे सुरक्षिथ होगतची कागज नश्वर अची मुदश्म्रिती शाश्वात छी भुजे लिये ना ता आव, हमरा सब उन्ईश्वट्टर का उईपुल पर्योजनाक गटना से शव़बात करे ची, जदे से इस संगर्ष आकार लेई दची. जखन हम इही पुस्तक कगेराई में जाएट ची, ता सत्तिक रक्ष्छलिल लिक्फ्ट प्रमानक महत्ता सर्वो परी दिखाई देईचा. उना उ कागच्त जूथ बाजी रहल चल. अदिकार कागज में लिखाल गयल, जे पुल्दूर गटना में मात्र तीस मस्दूर अग जानगेल, मुदा अस्लियत की चल, असलियत चल, जे तीन स्वमस्दूर मरल चला, इब बहुत पयक भोतिक अग कागजी चल चल. आई 3-0 कष्व्या कते से आएल इ उते से आएल जटे कागज खतम भी जातची आद मने मानवी ए वेदना शुरू होई तची तच्व्यार केलनी जक्रा ओई चपाक के ही साभ कही चतिन आए रातिक अन्धार मे बिल्ल्कुल रातिक अंदार में जखन लाश्षव के नदी में फेकल जार हल चल, तो ओ पानी में खसवक चबाक आवाज सूनी सूनी के, डारी में लकीर खिचाई चला, ओ तींसो लोकक सत्यके आपन डारी में दरज केलनी, इकी पमानित करे तचे. अमर विचार सा... इई अस्पष्ट करे तची जे सद्टाक जुता काट मात्र एक ता दोसर भेसी प्रमानी का स्वतन्त्र दस्टावेज देसा के तची इबात तची कची मुद्दा तनी विचार करू जे ओही कागच कर ओही डाईरी खषर की भेल आहां जे न्याई प्रनाली पर जे कागजी दुन्या पर एते गुईश्वास कर रहल ची उता बहुत सहजता से उक्रा नष्ट कर देलक मुदा उते बेवस्थाख दोस अची नहीं सुनुत अदालती फाईल बदली देल गल माल खाना मे पानी गूसी गल आन्दी जब यसर सर पास्वानक जुता असर्युक चोकलेट संसाख्षे जमा करेन चला उसब सर्णीगल गावक बाक चे सीख है उक्रमोन पाडु जकर मेड नदी कालेट उकर मुकद्मा कागच कालेट हमर केबाक अर्थ यी आची जे उविवस्ताक विफलता चे खागज के नहीं, खागज ता सक्ते बाजे चलना? नहीं, उखागज के अंतर नहीत कमजोरी या चे. मने खागज उक्रे सुएक तची, जकर हाथ में मूहर होई तची. जकन आदालत साक्छी के नजर नदास कर दे तची, तकन न्याय आदालती कागज से नहीं, बरुच्चन्ना गाची क्यो बूटसवक सुरक्षित होई तची औहो उ बूटसवक कबद्टी आआ उ बूट्ट जे भिसरायल नाम के बाजी-बाजी क गाच के पतटपर हर्यर कोपलजका उगादे च्छतिन इस्म्रती हिरायल काग्जके पराजित कदे तची आहाई इबूतसबख कबद्टिक बात उद्टाओलों जे पस्तका के एक ता बहुत चर्चित हिस्सा आची मुदा हमरा इज सम्जाओ जे एक ता बच्चा सबख खेल वबूतसबख रूप के किनाने दासा कै ची किनाने दासा कै टेची इसुन्ने में कावियात्मक जरूर अची, मुदा वास्त्विक्ता में खूनकाच करे तची, की अदालत एही कबद्टी के साख्श मानत। इं मात्रिक्ता काव्यात्मक रूपक नहीं आची इं प्रतिरोदख एक देखार मनो वैग्यानिक तन्तर आची तने उही द्रिष्यके कल्पित करू राद को समय आचे चन्ना गाची में अब च्च्या सबख भूद उ बच्च्च्या जे एही शोषक विवस्था में अप्पन जान गवाचुकल चती उ एक्ता होई च्छती अ नाम बचाँ कबद्टी खिले च्छती इक यह ची? जगन शोषक तन्त्र सरकारी रजिस्टर सर लोकक नाम मिता दे थचे? उक्रा मात्र एक्ता संख्या बना दे थचे? अगाम का समहिक चितनामे उनाम के जिन्दारखे च्छती। एक ता विद्रोह गुरुप में एक दम इराजे प्रायोजित विस्म्रितिक विरुद बच्पनक मासुम्यत सा केल गलेटा बहुत पैग विद्रोह च्छे ये बोथ सुन्दर विस्लेशन आची बच्पनक मासुम्यत सा केल गलेता बहुत पैग विद्रो है ये बज्द सुन्दर विसलेशन आची हम माने चीजे ये एक ता विद्रो हैचे मुदा हमर प्रश्ना ये आची जे की स्म्रिती से आहा कोनो तन्त्र के बदली सके चे अमरा लागे थी जे स्म्रिती से हो एक ता डायरी जका आचे जक्रा बैकपाक आववष्श्ख्ता होई तशे आहा फेर कागच परावी गे लो हूँ आँ, करन येदी कोनो चीस लिखित में नहीं आचे तो वो एक दो पीडी के बाद अफवा बनी जाई तचे ता की कागज अप्वान नहीं गड़े ता ची? गड़े ता ची, बilkul गड़े ता ची. मुदा कागज सत्ते केन पीडी दर पीडी हस्तानतरइत से हो करे ता ची. और एही लेल हमहाके कोरोना कालक उही प्रसंग दिसलजा याल चाहता ची. जन उनिस्वाट्तर में कागज कमजोर चल, ता आदूनी क्युग में और दिजितल भागेल. दिजितल भागेल मुदा शोशन ता उत्बे आचे. देखु, गोप कुमारक जाजके देखू. जखन महामारिक समय में विवस्ता चरमरार आशल चल, तकन गोप कुमार एनर सततर कोडक भन्दा फोड केलनी. मुदा उ एनर सततर कोडक वास्तमे की चल, उत उही कागजी विवस्ताक एक ता पाखन्दी रूप चलने? भिल्कुल. उ शोषक के एक ता तूल चल. एनर सततर कोडक माद्धिम सब्रस्त अदिकारी अगर समदान की चल अगर समदान बूद सब कबड्ट्टी नहीं चल अगर समदान चल गोप कुमार सन अनवेशक कण अदिकारिक जाच भी जिजितल और कागजी दोखा द़ी चल मुदा एकर समथान की चल एकर समथान भूथ सब कबड़ी नेचल एकर समथान चल गोप कुमार्सन अनवेशक कड़ अदिकारिक जाच अगी पाल के है केलनी दाटा निकालनी एकर समदान्चल गोप्कुमार्सन अनबेशक का अदिकारिक जाज अ, उही प्यल के है क्यलनी, डटा निकालनी और उकर तींटा बैकव्प पातिली पी तैयार के लेनी जो उप्वेवस्तित अनबेशक नहीं करी ते ता इस सत्ति कही अब बाहर ने यभेत कागज जुट भाजी सकेत अची मुदा अकर कात बेवस्तित कागज से समबव अची तनी रूकू, आहा गोप कुमारक बेवस्तित जानच के जे बखान कर हल ची उमे एक ता बहुत बैग गड़बडी आची की गड़बडी आची गोप कुमाराके इसब करबाक प्रेडना कतिस आयाल उप्रेडना कोनो सरकारी निमावली से नहीं आयल चल उप्रेडना नन्दिकाओ डारी से आयल चल जे डारी एक्ता नदिक कात में पीपरक जडी में गाडल चल उखागज काम आएक्ता अनुश्ठान बेसी चल मुदद तायो उ चलत दाईरी एन नहीं दाईरी चल मुदद अकर महत्व अकर पन्ना में नहीं अक्रा सुरक्षित रक्वाग भावना में चल आँआँई जे दिज्टल बेवस्थाक का बात करो हल ची तो उही दिज्टल बेवस्थाक दोसर नमूनोत दे कूई अगर उज़्ल जाँशन लिंग पर क्लिक के लहूँ आए आए आएख पुरा जिवन कर कमाई गायभ इश्वोशन के क्यट विवस्तित जाल अची अगर उज्वल जाशन देखाशन देखाशन देखाशन देखाशन अगरा फोन पर दिजिटल अरेश्ट का दम्की देल जाएत छी. इस्क्रीनाक पाचा भैसल शोषक, जाल चंद्रपाल, बतान दीजिटल अरेश्ट का दम्की देल जाएत छी. अगरा पोर दिजितल आरेश्ट का दम्की देल जाएत छी इस्क्रीनाक पाचा भैसल शोषक, जाल, चंद्रपाल, बताना, रागव, सोमानी सन लोग उज्वल के एते गडरा देच छती जे अपन जान देदाएत छी उखरा फोन पर, दिजिटल आरेश्ट का दम्की देल जाएत छी. इस्क्रीनाक पाचा भाईसल शोषक, जाल चंद्रपाल, बताना रागव सोमानी सन लोग, उज्वल के एते गदरा देच छती, जे अपन जान देदाएत छी. अब बहुत रदे विदारक गटना चल आई में कागच को देटा की करो हल आची उलोकंके दराए चुपकरा बचाहे तची उज्वलक मोद कोनो फाईल का कमीशन आभेल अभेल कारन दिजितल कागच होकर मन में देशत प्यदा कर दे लग एकर तोर कुनो फाईल में ने चल ता एकर तोर की चल एकर तोर चल देविट का अ प्वल्मति के अकर विरोद में तार हे बामें आहा देविका अ प्वल्मतिक बात उठोल हूँ जे बहुत महतपून ची मुदा जखना हा प्वल्मतिक बात करे ची ता हम्रा एब अताओ, जे नाम आप पहचानक मेटनाई कताईसे शुरू हुएता ची. कताईसा. सर्यू कुदाहरन लेप, सर्यू कनाम रजिस्टर में नहीं चल. उ मुत्बागे लिए, मुदा कागच पर उच्छलीे ही नहीं, कारन, हुंकर पती पहले मल गल चला और उ पती कनाम पर काज कराईत चलीए. रहा, वेवस्ता लेल उ कोनो अन्सान नहीं चलीए. भिल्कुल, समाज में नयाए कागच सस्थापित होत आची जे आहाक नाम कागच पर नहीं आची ता हाग कोनो अदिकार नहीं आची नन्दी जखन दारी में सर्योक नाम लिख़े च्छतीं तकन उख्रा वापस अस्तितो में लावे च्छती. आए, आग ईबात विचारनी आची कागछ पर नाम मिटनाई वास्तवे में बहुत पैगा प्राद ची मुदा की, आही नहीं मानब जे कागछ जेना नाम देश कैताची, उही नाउ नाम छीनी सोहो सकैताची. कोना? फूल मती के प्रसंग के फिर से देखो, जगन फूल मती के शहर में बनदक बनावल जाईताची, तसथा आशोषक उक्रा की कहेताची? उक्रा FM कोड देल जाईता ची एक ता अन्सान के जकर अपन भावना ची अपन पह्चान अची उक्रा मात्र दूटा अंग्रेजी अक्षर में बडल देल जाईता ची आ उही FM कोड क संगे अख्रा सदा कागज पर अंगुठा लगावे लेल दबाव देल जाई तची इख्गज शोशन कच्च्रम रूप आची बलकुल उदा अंगुठा लगानाई की आची उग्टा कागज इप्रक्रिया आची जग कागज इतिक पवित्र आची तो कागस प्ल्मति के गुलाम किये बनार हल चले एक ता अंगुठाक निशान निषक्रिय होई तची अक्रा दोखे सा वज जोर जबर दस्ती सा लेल जासके तची जेना शोषक्तन्त्र करे तची मुदा प्ल्मतिक बचाव तची पूल्मतिक बचागजी अंगुथासा नहीं भेल ता आहा कनुसार अकर बचागजी कोना भेल अकर बचागजा अकर सक्रिया आवास अभेल जखन लाईवीट्ग केम्रा अकर सोजा अवेत छ़ी तकन पूल्मतिक कापेत मुदा द्रिरता सा चीछिया का कहे चती हमर नाम फुल्मति है, Fm नहीं उ आवाज कागछ सा हजार गुना भेसी शक्तिषाली चल अग, आवाज बनाम कागज अग, अगुटक निशान कागछ पर चबाज जाई तची मुदा आवाज हवामे तेरे तची उखरा कोनो पाल में बंद नहीं किल जासके तची फुल्मतिक उचीएक शोषक कष सब टा काएखजी के द्वस्त कदे लक आवाज में इन्सानक निजता होई तची जे कागज में नहीं भज़ सके तची बहुत मार्मिक विष्लेशन अची, जे अंगुठा निष्क्रीया अची, अवाज सक्रीया अची. हमी मानीच ची, मुदा अवाजक पहुच कतेग दूर दरी अची. मतलब? मतलब फूल्मतिक अवाज तकने प्रभावी भेल, जखन अ दिजितल माद्ध्यम से एक ता रेकोडिंग की रूप में दून्याक सोजा आयल, औहो ता एक ता प्रमानिक डाटा आजी, तनी लट्टर थाकृर के सीक पर द्यान दियो, उ नन्दी के की सिक होने चला. पैसा के गंदवला कागज पर हस्ताक्षर नहीं करव भिल्ल्कुल पैसा के गंदवला कागज पर हस्ताक्षर नहीं करव इकी प्रमानित करएत ची इप्रमानित करएत ची, जिस सत्ता हमेशा गूस सकाज करेत ची नहीं इप्रमानित करेत आची ज़े तत्त्त्या आबवोटिक प्रमानाग जाज आयो प्रसंगी कची अदिकारी गुस बलाख हाम नन्दी के एही भोटिक सतक्ता कारन ग़वर लागल उखाम के सुंगलनी अवक्रासे पयसा के गंदा आयाल सत्ते के जान्चलेल बहुतिक सतक्ता साख्षि आवश्षक अची हम मान अची जिल लत्तर ठाकृ का उस्सीक बहुत महत्पून अची मुदा तनी गेराई में जाू गंद कोनो बहुतिक धस्तावेज का हिस्सा नहीं आची गंद कोनो तत्त्य नहीं आची जिक्रा आहा प्रेुक्शाला में प्रमानेत कर सकत थच्छे तकिय थच्छी यो? गंद एक ता मानविय विवेक अपरम परागत ग्यान अची उमार्टेक भाशा आची अदालत के पाईल कबाशा नहीं जगन अदालत के माल खाना में पानी गुसाइत ची अब विसरर सरक जूतासा चपाक का अवाज अबई तची तो चपाक कोनु टद्ध नहीं आची अव उही म्रतक अवाज आची जे गामक चेतना के जागरत करे तची सत्य टच्य से भेशी भावना अचेतना सा जीवित रहे तची बावना चेतना कमहत्तों के हम नकारी नहीं रहल ची हमरो लागी तची जे मानविय समवेदना बिना नयाय अदूरा आचे मुदा एक तक करवासते इहो आचे जे बावना सा अदालत में केस नहीं जीती सके ची अदा आचे जगन वर्देशु कम्प्निक वकिल अदालत में आबई च्छती, तो की कहई च्छती? उ साव साव कहई च्छती? जूता, चूडी, ताभीज, इसभ भावनाक वस्तु बहुऽ सके तची, विदिक सावच नहीं? अदालत बहावना नहीं भूज़ेत अची, अदालत तत्ध भूज़ेत अची, अजे अजलक तत्ध नहीं अची, ता अजलक बहावना कुनो काजक नहीं. मुदा आख औही आदालत सन्याई भीटल कग्रा बीस पचीस वर्ष भीती गेल तारिक पतारिक पड़ेट रहल माल खाना में शाक्ष सडी गेल इक इग देखा रहा लची इवेवस्ताख सुस्ती आची इग देखा आची जी वेवस्ताख कतिक पंगु आची आस्ली न्याय अदालत में भेली नहीं आस्ली न्याय भेल गावक बच्चा सबख औही इस्मरती में और एकर सब से पैग प्रमान अची मीराक निरभीखता मीराक परसंग वास्ते में द्याना कर्ष्यक अची भिल्कुल जखन चंद्रपाल बताक, गिरो, मीरा के ब्लाक्मेल के लक, उकर नीजी फोटो सार्जनिक करवाग दम की देलक, तम मीरा की के लनी. उ दे राएली नहीं, जिना सदहरनत्या लोग दरी जाएत छी. उगोप कुमारकिन अपन सब्ता प्रमार्डदा दा देलनी, अक्हनी आस्ली मुद्दा हमर नीजता नहीं इआप्रादी जाल अच्छे. आप बहुत सहसी कदम चलों. इणिरभीख्ता कते से अवाई तची. इखुनो सरकारी फायल से नहीं इओ भाक यन वन्शावली पोठी से अवाई तची. जदे बा कहने चलीन, जे परिवारक भेटी आपन नाम आपने लिखाई तची, उक्राखियो मिता नहीं सकई तची. साहस कस्रोत हमेशा मानवी ए होई तची. आजे मीराक साहसक बात के लो, उआदबुत आचे. हम साहमत ची जे साहस बिना प्रमान निरजीव ची. उजी वूची, मुदा तनी इस उचूचू, जे मिरा जे गोप कुमार के दिलनी उ की चल? उदाता चल अपन दाईरी में लिखच छती कि सुईच्छा भैएक भीतर समबजव नहीं होईत उवान चती जे राज्जक आत्मा फाईल क बाहर रहेत अचे मुदा, अद्मा के बचावे लेल फाईल के विषकता आचे. रुट, ये एक तो संथुलिद द्रुष्टी कोन आचे. हमरी मानब आचे, जे ब्रष्ट तंट्र के हर बाक लेल, प्रमान, डैरी, आ अदिकारी कोज, एक ता अचुक आस्तर आचे. जन कागछ जुट बाजत अच्ये तो उक्रा सत्ते कागजे से काटी सके तची आा, आा की तरक सुद्रद है जे आदूनिक युग में बिना प्रमानक हम व्यवस्ता से नै लडी सकच्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च् तखन ख्यद ख्यद ख्यद ख्यद ख्यद ख्यद ख्यद ख्यद ख्यद ख्यद ख्यद ख्यद ख्यद ख्यद ख्यद ख्यद ख्यद ख्यद ख्यद ख्यद ख्यद ख्यद ख्यद ख्यद ख्यद ख्यद ख्यद ख्यद ख्यद ख्यद ख्यद ख्यद ख्यद ख्यद ख्यद ख्यद ख अदे ही कासकेईचे, मुदा नाम नहीं कासकेईचे बिल्कुल, आई एक कलप एह तसीखवैतची देहने हे, पाखीने हे, तटयो गाम गाम उड़ाईतची की, गीत, उजीत, उस्म्रिती, उनाम, जे बच्चा सब चन्नागाची में तईयो गाम गाम उड़ाईताची की गीत उगीत उस्म्रिती उनाम जे बच्चा सब चन्नागाची में गवएच्छती उआजर आमर आची उईक ता अदम्या चेतना आची ता श्रोतागन आईबखी विमर्ष हमरा सबकेन इविचार करबाक लेल अदर भाखलेल प्रेरिथ करेत अची जे एजे आदूनिक युग अची जते शक्रीन के गोही सनव रूप में आवी रहा लची जते दिजितल अरेच्ट, रेन समवेर अदाटा चोरीक जाल भिच्छल अची तो उते आहां अपन सत्ते के कते सुरक्षित रखाब अगर उद्याई आप प्रश्नाची जगर खोनो एक्ता सोज वसादारन उतर नहीं आची जेना की हम्रा सब ही शुर्वात में कहलो चल, न्याई अपक्का आल्मारी में बंद फाणल सब में आची वा उचन्नागाची भूद सब अच्मिरती में नियाय अ पक्का आल्मारी में बंद फाँल सब में आची वा औचन्नागाचीग भूँज सब अच्सम्रती में शाएद इदुनु के भीच कक्चे निरन्तर संगर्ष अची उही में कतो सथ्यसास लोर हाल आची एक दम गजेंद्र थाकृर की गल्प गोही सब के भीछ जल समादी एही संग्रषक्कें बहुत सुन्दरता आगगराई सा उके रहेता ची आहा सब सा आगराई ची जे इपुस्तक गगराई में जाओ आअपन उत्तर स्वैम खोजू इविमर्ष आहाक लेल एक ता दिशा मात्र ची सत्यकर कोनو अंतिम विजेता नहीं होईताच, उमात्रेक्त निरन्तर यात्राची. विचार मन्धन जारी रह्बाक चाही. एही विचारक संगे हमरा सब आपक एएंक समाप्त करेच छी. मोन्राखु जकर मेड नदी कालेद, उकर मुकद्मा कागज कालेद. मुदा जकर नाम लोकक सहासी स्म्रिती में दर्जाची अख्रा कोनो गो ही नहीं का सकेते चे. विमर्श में हमरा सवक संगे जुदबाक लिल बहुत-बहुत दन्निवाद.

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