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मीराँसाहेबक_कथाक_ज्यामिति_आ_अनसुनुल_मोन.m4a

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Part 9 · VIDEHA MITHILA MAITHILI DISCUSSION CRITICISM SERIES PART 9
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  1. 0:00–0:05आजुके एह समिक्षा चर्चा में हम सब मीरा साहिप पर गब करव।
  2. 0:05–0:08जे एक ता बहुत नीक लोग गाता एच
  3. 0:08–0:12आग, एक दम यह एक ता अनात योद्धा प्रतिशोदख कता आची
  4. 0:12–0:18मुदा मतलब एकरा और प्रभाव्शाली बनेबाक लिल किचु पैग बडलाउ चाही
  5. 0:18–0:22तब न बिना कोनो देरिक सीदा पहल बात परवएद ची
  6. 0:22–0:30बिलकु तदिखो रचना में प्रस्थू तरिष्य सामगरी अग कताक मूल स्वरक भीच एक ता पैग पासला है च्छु
  7. 0:30–0:32जक्रा पातनाय बहुत आवष्खाच
  8. 0:32–0:36मैंई जक्चन पात्ख दिलिरी नगर कता पड़ रहेल चे
  9. 0:36–0:39जे बहुत गंविर अशोका कुल आची
  10. 0:39–0:42एक दम सही उही एतिहासिक वाता वरन में
  11. 0:42–0:47अचानक से इजे आमुरत ज्यामितियर आखार सब आविजाई तच्छिन
  12. 0:47–0:51मैं, त्रिकों, व्रित, चंद्रमा, वं माच का अकार
  13. 0:51–0:54उस शीडा तोर पर प्रिष्ट भूमिस मेल नहीं कहा रहा लेचे.
  14. 0:54–1:00आप पातक एक दिस म्रित्युवा प्रतिषोदग गंभिरता महसुस कै रहा लेच दोसर देस.
  15. 1:00–1:06दो सर देस उक्रा पन्ना पर रंग भिरंगी आदूनिक जामिती देख बाखलेल बेट रहलाची
  16. 1:06–1:10जाई सर पाठी के प्रवा खंडित भजाई तची
  17. 1:10–1:14एक रा कोनो एक ता खास समय में नाय बान्दाई लेल
  18. 1:14–1:16एक रा सर व भोमिक बनाई बाखलेल
  19. 1:16–1:20इक ता कलात्मक प्रयोगो से होता भासा कै तची
  20. 1:20–1:22भासा कै तची प्रयोग करम नीक बात आची
  21. 1:22–1:30मुदा प्रयोगक चकर में पात्ख के औही भावनात्मक जमीन से उखाडी देनाये उचित नाया ची
  22. 1:30–1:32जतैस सक खताक प्रान जुडल आची
  23. 1:32–1:33आआ, उहो चे
  24. 1:33–1:40जखन उप पात मुल कतासा मने सरवता रग लाग लग लगग तची तची तखन पाटक ब्रहमित होई तची
  25. 1:40–1:46एकर सुद्दारा लेल उम चित्रक प्रतिकात्मक अर्थ के कतानक के हिस्सा बनावल जाए
  26. 1:46–1:51जाए सा द्रिष्य अ शवद एक तोस्रासा रग नाई बुजाए
  27. 1:51–1:58तए एक्रा व्यावारेक रूप में कोना कयल जाए, मैंने पाटकके एए जामितिया कताक हिस्सा कोना लागत?
  28. 1:58–2:04देखु एक्रा रूपकक जका प्रेयोक कयल जासके तची, जना अमुर्त चित्र में जे व्रत्त ची,
  29. 2:04–2:08उक्रा पर्वारक सुरक्षित गेरक प्रतीक बनावल जासके तची
  30. 2:08–2:11औ, मैंे माए आप पतनीक गेरा
  31. 2:11–2:18इक्धम, जखन कता में माए चाहच छतीन जे मीरा युद्धस दूर रहा थीन
  32. 2:18–2:23तकन उही व्रत्त के पर्वारक सुरक्चा चक्रक रूप में देखावल जासके तची
  33. 2:23–2:31आ उही त्रिकोड के उक्राई युद्धख चुबहन जका दे खावल जाए, नूना जगर कप्रती शोद, जे मीराक मों के भेधेप रहता ची.
  34. 2:31–2:44सही गप, माने जक्ञन वो गरक चारी देवालक भीतर चथिन, तो व्रित्मे चथिन, मुदा हूंका मान्सिक स्तिती उही टीका ट्रिकोन जका आचे जे बाहर निकलवाए ले चट्पता रहलाचे.
  35. 2:44–2:51इई अवदारना बहुत नीक अची, जाही में मिरांक खेल खिलाँना अपने यूधग कर रूप लेट जाई तची.
  36. 2:51–2:55जेना बाल्ले काल में मीरा माटिक त्रिकोन बनाकग.
  37. 2:55–2:57अखरा अपना पिताक तल्वार बुजगेथ होती.
  38. 2:57–3:10आजो हम सब एक्रा माएक परी प्रेच्ष से देखिए, तजकन माए उई आमुर्त आकार के देखच छतिन, हुनका लागे चे जी इत बस बच्चा कोनो निरद्थक लेखा चित्रा चे.
  39. 3:10–3:16अगरा पाटक बुजेत आची जे ओज्यामिती नूना जगर कर युद्र कव्युर आचना चे.
  40. 3:16–3:23बुजलिये ना, एही सच्चित्र मात्र एक ट्रिष्टान्त नहीं का, कता के चक्रिय पात्र बनी जायत.
  41. 3:23–3:27तो औरा कोनो आदूनि कलाक प्रदेशनी नी मून परत.
  42. 3:27–3:31अक्रा मीरा कहात को मातिक दिल अकार मोन परत,
  43. 3:31–3:34जे अंतता हं अस्ली तलवार में बडलेवाला ची.
  44. 3:34–3:36इक ता एहन समझे से तयार करत,
  45. 3:36–3:38जे गमविरता के खंडित करवाक बडला,
  46. 3:39–3:40अक्रा और गाड कर देत.
  47. 3:40–3:41सहीं का लिए.
  48. 3:41–3:47तजईना इ आमूर्त चित्र पाथख के कता सा खाती रहालाचे
  49. 3:47–3:49तईने एक ता और चीज आची
  50. 3:49–3:52जे पाथख आ मीरा कभीच दिवाल बनी रहालाचे
  51. 3:52–3:55मीराक चुप्प्या हुनक अनसुनुल्मोन
  52. 3:55–3:59मुक्या पात्रक अनतरिक दूंद्व आमनोवेग्यानिक संगर्ष्के
  53. 3:59–4:01मात्र कि चुप पाती में समेटी देला सा,
  54. 4:01–4:05चरित्र का ग़ेराई उबरी क सामने में आभ्युपाभे रहा लगचे.
  55. 4:05–4:07औह, हाँ, हाँ, इह मैंसुस के लो.
  56. 4:07–4:11कता बहुत नीक जका, मीराक भालिय काल सा यूवावस्ता दरी पहुचेट अची,
  57. 4:11–4:14मुदा द्याय पाच अनसुनुल मुन में
  58. 4:14–4:17उनकर मुन में जे उतल पुतल अची
  59. 4:17–4:20उकर कोनो सपच्ट मनुवैगयनिक चित्रन नहीं भेल अची
  60. 4:20–4:22एक्दम सही पकर लिया यहा
  61. 4:22–4:25उचुप्चाः माता अपतनिक बाद सूनेच छती
  62. 4:25–4:29मुदा हूंकर भीतर जे नून जागरक फिसाप चुक्ता करवाग ज्वालमुखी आची
  63. 4:29–4:33उक्रा बस कता कार दवारा कह देल गेल आची
  64. 4:33–4:37उक्रा गतित होएट वा महसुस होएट नहीं देखा हो लेगे लाची
  65. 4:37–4:44भिल्कुल, यह एही रच्ना के एक टब बहुत पइग आज्र अच्छी, जगर आवर विकसित कहल जासके तची.
  66. 4:44–4:47जगन आहा कोनो एहन पात्रक निरमान कराहल ची,
  67. 4:47–4:50जई आपन पुरा परिवारक संगारक भोजला कजीवी रहल आची,
  68. 4:50–4:53तो उक्र चुप्पी सामाने नहीं बहसके तची.
  69. 4:53–4:57माने मान आपन आप में एक ता बहुत सचक्त बाशा आची.
  70. 4:57–5:01आप मुदा सहीते में उही मान के चित्रित कर बाक लेल,
  71. 5:01–5:03किच्चु एहन समवेदी भिवरन चाही,
  72. 5:03–5:07ज़ाही सा पात्ख उही मून के भीत्रक कोलाहल सूनी सकई
  73. 5:07–5:11एकर सुदार लेल मीराक चॉपिक पाचुजे तूफान अची
  74. 5:11–5:15उक्रा किच्छु एहन चोट-चोट गतना सा प्रस्थूत काई जाई
  75. 5:15–5:18जाही सा हूंकर तडव पात्ख सुयाम महसुज कषकई
  76. 5:18–5:24मुला देखो लेखा कक ओपाती अची ने, जे नशहनाई से बन्द हो इच्छल ने सिन्दूर सा.
  77. 5:24–5:26रा, पाती तनी कची.
  78. 5:26–5:30इपाती अपने आप में बहुत काव्यात्मक अची.
  79. 5:30–5:34की इपाती इबुज्याएबाक लेल पर्याप्त नहीं अची,
  80. 5:34–5:36तो आजाने के लागे तची जे यी पर्याप तची
  81. 5:36–5:38मने लोक गाताः में तची लोक मुख्यरूप से गडना सूने लावत चे ने
  82. 5:38–5:40चरित्रक गेरा मनो विग्यान
  83. 5:40–5:42तो आदूनी कुपन्यास कविष्य आची
  84. 5:42–5:44की हम सब एक राभ बेशी जटल नहीं बनाई रहल ची
  85. 5:44–5:46उगरा आईकाले पात्ख कले लिखल जार हला ची
  86. 5:46–5:48तब पात्ख केवल इनही जाने जाहे तखी जे की भहल
  87. 5:48–5:50तो उगी चाहे तखी
  88. 5:50–5:56तब आदूनी कुपन्यास कविशाया ची, की हम सभ एक रा भेशी जटल नहीं बनाई रहल ची.
  89. 5:57–6:01लोक गाताक मूल रुप निष्चित रुप से गटना प्रदान हो इत ची.
  90. 6:02–6:03इस सत्या ची.
  91. 6:04–6:07मुदा जकन अख्रा आएकालेक पात्ख कले लिखल जा रहल ची.
  92. 6:07–6:11तब पाथक केवल इनही जाने जाहे तखी जे की भेल?
  93. 6:11–6:13तव उ की चाहे तखी?
  94. 6:13–6:15उ इह महसुस करे चाहे तखी
  95. 6:15–6:19जे उही गतनाक पाचु पात्रक मोन पर की भी ती रहल चल
  96. 6:19–6:21कावियात्मक पाची नी कची
  97. 6:21–6:24मुदा कविताय जकन यथार्त्ह से ने जुडगे तखी
  98. 6:24–6:26तो खोखली लागी सकताची
  99. 6:26–6:28आ, बुजली ए,
  100. 6:28–6:30ता एकर कोनो तो सुदारड?
  101. 6:30–6:33एक तो चोट सने हंच्चन जोडल जासकताची
  102. 6:33–6:35जटे काव्यात्मक ताक पाजुग दर्द
  103. 6:35–6:37बहुतिक रूप लेभाई
  104. 6:37–6:39जे ना एक ता रातिक द्रिष्च
  105. 6:39–6:42जते मीरा आपन नव्विवाईता पतनिक सुतल देखे च्छती
  106. 6:42–6:48अदोसर दिस देवाल पटंगल पूरान थिहाक तल्वार के देखे च्छतें
  107. 6:48–6:54एक दम एक दिस पिताक मारल जवाक तीस अदोसर दिस माएक आश
  108. 6:54–6:59आईही दूनुक भीज मीराक हाथ जकन तल्वारक मुथपर जाईत फीज,
  109. 6:59–7:04तकन हुनकर शारीरिक, आम्मान्सिक स्तितिक सुख्ष्मवरनन पाठक के,
  110. 7:04–7:07औही द्वन्वसं सीथा जोडी देत.
  111. 7:07–7:12बाप्रे, हम्रा इद्रिश्व बहुत स्पष्टता समोन मे आभी रहा लची.
  112. 7:12–7:16रादी कंद्खार, पतनीक सास लेबाग दीमा अवाज,
  113. 7:16–7:21जे उही व्रित कप्रती कची, जकर चर्चा हम सब फहले कहलाउ.
  114. 7:21–7:24रादी कंद्खार, पतनीक सास लेबाग दीमा आवाज,
  115. 7:24–7:29मुदा मीराक्ति द्रिष्टी, तल्वारक उही तीका दार पर अची,
  116. 7:29–7:33जे उही त्रिकों जका रूँकर करेज के चीर रहा लची.
  117. 7:33–7:38उपतनिक मांक के सिंदूर के देखे चतिन आपहेर तल्वारक मुधके.
  118. 7:38–7:45अज्यकन उओए त्धन्धा लोहा के आपन आंगुर सो चूए चतिन तो उन्तर हाद क कापब
  119. 7:45–7:48वाहुन का अपन पिताक अंतिम चीक सूनाई देब
  120. 7:48–7:56आप इस सब उष शारिरिक प्रतिक्रिया आची जे आन्तरिक ध्वन्धो के पन्ना पर जीवन्द कर देत ची
  121. 7:56–8:02आई एही ले आवश्षक आची, जे पाटक बूजी सके, जे मिरांक लेल इई निरने लेनाई के ते कटिन चल.
  122. 8:03–8:11लेक आख स्वेम कहे च्छतिन, जे मन भीतरस निरने का चुकल हो, उक्रा चुपकी सहमती नहीं तैयारी होए तची.
  123. 8:11–8:14इई लाईं तब बहुत गग्रा आची
  124. 8:14–8:16आँ, मुदा इदर्षन जखन दरातल पर,
  125. 8:16–8:17पात्रक पसीना,
  126. 8:17–8:20अग कापे त्हातक माद्ध्यम सच्चित्री तची,
  127. 8:20–8:23तचन अपाट्कक अवचेतन में बसी जाई तची.
  128. 8:23–8:25अगर महसुस होई तची,
  129. 8:25–8:27जे मीरांक पत्धरक मुरत नहीं
  130. 8:27–8:29एक ता हार मान्सक मनुश्छे चला
  131. 8:29–8:34जक्रा लेल आपन परिवारक नेज छोडब अट्यंत कष्ट दायक चल
  132. 8:34–8:38एही सहुनक भली दानक महत्वा और भीशी बड़ी जाई तची
  133. 8:38–8:39एक दम सही
  134. 8:39–8:41ता इप भाईगल मनवए जानिक हिस्था
  135. 8:41–8:44मुदा जखनो गरसन निकली जाईता ची, तखन की होईता ची?
  136. 8:44–8:53उते कताख गती अचानक सजे दिशा लेइत आची, उपाठक के एक ता असन्टुष्त स्थिती में चोडी दैटाची.
  137. 8:53–8:59कताक चरमोद कर्ष और मिरांक सादारन मनुष्षे किमवदन्ती बन्बाक भीचकर्जे अंटराल आची,
  138. 8:59–9:02वोक्रा बहुत तीवर गती से पारकडिल जल आची.
  139. 9:02–9:05ज़िसक कताक प्रभाउकम भी जाए तची.
  140. 9:05–9:11मने अद्याय पाज के अन्त में मीरा राती में गर सन निकले जाएच छती
  141. 9:11–9:14अपन तल्वार अगोडा लैका
  142. 9:14–9:17औगर तुरन्त बाद एक ता रिक्त स्थान
  143. 9:17–9:19आर था तीन्ता बिन्दू देल अची
  144. 9:20–9:22आपहेर सीथा इग कहे देल जाएचे
  145. 9:22–9:24जे उबूथ काले गप बहेगेला
  146. 9:35–9:37उग्ता ब्यग विस्पूटक लेल मान्सिक रूप से तैयार चला
  147. 9:37–9:39नून्जागर में की बाल, उग्ड कोना बाल इपुर्नता गाया बची
  148. 9:39–9:41येख्ता एहन अस्तितिया ची
  149. 9:41–9:43जते लेक्ख पाटख के कताख शिक्धर दहरी लेजाखा
  150. 9:43–9:51येक्ता आईन अस्तितिया ची जते लेक्ख पाथक के कताख शिकर द़ी लेजाखा अचानक से नीचा क्हसा देचचदी बुजलेने.
  151. 9:51–10:01एक दम पाटक पाज अद्याद हरी मीराक तयारी माएक छिन्ता अप्रती शोदखे के ओई सुल्गएत अगे के महसुस करहल चल.
  152. 10:01–10:05उएक ता ब्यग विस्पूटक लेल मान्सिक रूप से तयार चल.
  153. 10:05–10:09मुदा अचानक से बिना कोनो वरनक सीथा परिनाम दोदेनाय,
  154. 10:09–10:14उहो उई तीन बिन्दुक माद्यम सब कताक वजन कतम को देची
  155. 10:14–10:18माने उजे तीन ता बिन्दु अची उ पर्याप्त नहीं अची
  156. 10:18–10:25भिल्कुल नहीं, इग्त स्थानक प्रियोग शाएद कोनो आदूनिक मनो वेग्यानिक उपन्यासम निक लागद
  157. 10:25–10:29जदे गधना से भेसी परनाम महत्पून होतेच
  158. 10:29–10:32मुदा इक टा लोक गाता आची, एक टा युद्दाग कता आची
  159. 10:32–10:36जदे उकर शार्याक प्रदर्षन अनिवार्या आची
  160. 10:36–10:42मुदा की इ लेक्खकक एक जानी भुजी के कयल-गेल कलात्मक निरने नहीं भह सकता ची
  161. 10:42–10:51उनका शायाद एी देखाबक चल, जे मीराक युद एतेक रहस्से मैं, आमहान चल, जे उक्रा शबद में बान्धल जासकत अची.
  162. 10:51–10:55रहेस्स्य बनाईनाई एक तनीक तकनी कची, हम मानेची
  163. 10:55–11:03आँ, माने किचु कता सब में, less is more, यानी जे गप नीक हल जाएची, उब एसी प्रभाव्शाली हुएची
  164. 11:03–11:10जो यूद कुपुरा मारकात नहीं दिखावाल गेल, ता एसे मीराक चारूकात एक ता रहस्सेक आवरन्नी बने चे.
  165. 11:10–11:17बने तची. मुदा रहसेक विष्वसनी या बनाईवाक लेल किच्छु संकेत देनाई आवश्ष्वक होई तची.
  166. 11:17–11:24जाहा किवल उही तींटा बिंदू के दोगा उक्रा केंवदंती गोषित कोदेव, ता पात्ध उक्रा माना बलेल तधयार नहीं होई ताछे.
  167. 11:24–11:29सही गप छी किमवदंती समाज में कोना बने तची उप्रक्रिया देखावे परत.
  168. 11:29–11:35इक्दम, कोनो व्यक्ती असदगरे जंगल में युध्लडी कम मरे जाए,
  169. 11:35–11:37तो उकिव दन्ती नहीं बने तची.
  170. 11:37–11:40उकिव दन्ती तखन बने तची,
  171. 11:40–11:44जखन उकर वीरता का खवर समाज दहरी पहुचे तची.
  172. 11:44–11:46तईही कमी के कोना दूर कल जाए.
  173. 11:46–11:53पूर्न युद्ध का विस्त्रेत विवरन नहीद का, कम सकम औही रिक्त स्थान के एक ता एहन प्रसंग से बहरल जाए,
  174. 11:53–12:00जे यी एस पष्ट करे जे मीराक युद्ध कोना हुनका पूर्वजक युद्ध से भिन्ड वा महान चल,
  175. 12:00–12:03जाई से उ भूट नहीं बलकी नगर के देवता बनिगला
  176. 12:03–12:07आा, इबात एक दम सती कचे
  177. 12:07–12:09जि समाजक बिना कोनो मिठक
  178. 12:09–12:12वग किव दन्ती कर निरमार नहीं भूसके तची
  179. 12:12–12:15तएक्रा एही रूप में केल जासके तची
  180. 12:15–12:18जब भोर के पहल पहर में, दिलेरियन नगर में
  181. 12:18–12:20कोनो गायल सन्देश्वाहक
  182. 12:20–12:23या यूद्द्ध से बागल कोनो स्स्पाही एवे तची
  183. 12:23–12:26औ, यी बहुतनीक विचार अची
  184. 12:26–12:29औ, हाँ, अ, हाँपभेइत कही तची जे
  185. 12:29–12:34एक ता अस्गर यूद्धा, पिता और भाए सबक पुराईंट फीहांट पतार्भगग
  186. 12:34–12:42आहन भ्यांकर यूद्धके लक, जे दुश्मनक सेना थर्रागेल, उकर तल्वार भिजलेजे का ख़से चल.
  187. 12:42–12:48बाप्रे, आहन, इच्छोट सन अफ्वाज वाखवरी उही अंट्राल के बहरी देते.
  188. 12:48–12:59उही से युद्धख रहस्से हो बनल रहतक, क्यारन पाथक प्रतेख शुरूप से युद्ध नहीं देख रहालाची, मुदा अकर भहयंकर तक वरनन सुनी रहालाची.
  189. 12:59–13:04आएही सांट पाथक के अपन तकी बहल प्रष्नक उद्धर से हो भेटी जाए तची,
  190. 13:04–13:07एक ता व्यक्ती युध्ड में गाल तक्की भाल,
  191. 13:07–13:09उही सा दिली नगर पर की प्रभाव पडल.
  192. 13:09–13:14एक दम, आईईख हवरी जखन उही माई अ पतनी कानदरी पहुच तक,
  193. 13:14–13:17तकन हुंकर प्रतिक्रिया कता के पुनता देत.
  194. 13:17–13:20माई जे युध्द सग्रना कर अच्छली,
  195. 13:20–13:24कि यो एक हन गर्व सथार चत्छती, वह फिरस शोक में दूबल चत्छी.
  196. 13:24–13:28पतनी जिक्रा लागल चल जे प्रेम उही वीर के बान ही लेलक,
  197. 13:28–13:30उकर सिंदूरक की भेल.
  198. 13:30–13:34राग, इस सब उसुत्र छेन जे कताक गती,
  199. 13:34–13:37जे आचानक सब ब्रेक लगा के रूक जाएत अची,
  200. 13:37–13:44अखरा एक्ता सबभविक बहाँ देत, पाथक के यी समज में आए जाएत, जे मीराक भलिदान विर्त नहीं गिल.
  201. 13:44–13:53अखरा एक्ता दाल बन का मरल, जकन एक अथाक अन्तमे एक हल जाएत छी,
  202. 13:53–13:59जि दिल्री नगर में सानजिन आयो जखन कुनो माई अपन जिद्दी बेटा के खिस्सा सुन्भेत अची
  203. 13:59–14:02तम मीरा सहब कर नाम आवेत अची
  204. 14:02–14:05तु उ लाईन एटन किछ हवामे लटक कल लगेत अची
  205. 14:05–14:35आप आप आप बदाजा रवा अगभरी बला प्रसंग के जोडी जते गाम के लोग के यी लगल हो जजीना दिल्रीनगरक सबता मरल सयध एक संगे एक्ता शरीर मे आबी को लगी रहो थिन तकन ये अंतिम पाती बहुत गेरा आसर करत पातख के सवबहवे क्रुब से महसुस हो
  206. 14:35–14:39तो बज़ान्ती बन्बाग प्रक्रीया के विश्वसन्यता प्रदान करत्
  207. 14:39–14:43देख। कताख सन्रचना आपने आपने आपने आपने बहुत नाजुख चीज होई ताछी
  208. 14:43–14:48इताया लेक्हक एक ता बहुत सचक्त वातावरन के निरमान कैना चती
  209. 14:48–14:51इजे तीनो मुख्ख्य बिन्दू अची माने
  210. 14:51–14:55चित्रक सार्थक्ता, पात्रक मनोविग्यान, अग्कताक परनतिक गती
  211. 14:55–14:58इआपस में गेरा रुब से जोडल अची
  212. 14:58–15:01इक्दम जगन चरीत्रक मनोवे ग्यान अस्पस्ट होगते ची
  213. 15:01–15:05तक हन उकर अंतिम यूट्रक परनती स्वाब्विक लागे तची
  214. 15:05–15:08अजगन परनती स्वाब्विक होगते ची
  215. 15:08–15:12तक हन उही सज्वोडल आमुर्थ चित्र से हो एक ता गेरा आर्थ
  216. 15:12–15:15वा मेटवरक रूप में सार्थक बुजना जाई तची.
  217. 15:15–15:20तकूल मिलाग कर जन लेखख एही आमुर्थ जामितिय चित्र सब के,
  218. 15:20–15:26मीरांक मान्सिक दूंद आयुद्धक व्युहु लचनाक प्रतिक बना दे फिन.
  219. 15:26–15:32अमीरांक अन्सुनल मोंके उही चॉप्पी अग्कापेत हाद के द्रिष्यसां अस्पप्ष्ट रूपें देखाब थें
  220. 15:32–15:42अईद मे उई रिक्त स्थान के एक्ता अफवाह वा सन्देश वाहक द्रिष्य सामभरी देठ तिन तईगता पाथक के बहुत गेरा प्रभाव देट.
  221. 15:42–15:47एक दम सही इसब भ़लाव इरच्ना के एक ता नव उचाई पर लोग जाएत.
  222. 15:47–16:09तु श्रोता से आगरे है आची, जे उ आपन इस समगरी एही सुजाउ सबक आलोक में सन्शोदित कगक, और भेशी निखारल रूप में फिर सापठावती, जैसा इ अतिहास्तिक लोक गाता, आपन पुरनक शमतासा पाटख कहरे दे पर चाःप चोडी सके. आजकलिक अप इत

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आजुके एह समिक्षा चर्चा में हम सब मीरा साहिप पर गब करव। जे एक ता बहुत नीक लोग गाता एच आग, एक दम यह एक ता अनात योद्धा प्रतिशोदख कता आची मुदा मतलब एकरा और प्रभाव्शाली बनेबाक लिल किचु पैग बडलाउ चाही तब न बिना कोनो देरिक सीदा पहल बात परवएद ची बिलकु तदिखो रचना में प्रस्थू तरिष्य सामगरी अग कताक मूल स्वरक भीच एक ता पैग पासला है च्छु जक्रा पातनाय बहुत आवष्खाच मैंई जक्चन पात्ख दिलिरी नगर कता पड़ रहेल चे जे बहुत गंविर अशोका कुल आची एक दम सही उही एतिहासिक वाता वरन में अचानक से इजे आमुरत ज्यामितियर आखार सब आविजाई तच्छिन मैं, त्रिकों, व्रित, चंद्रमा, वं माच का अकार उस शीडा तोर पर प्रिष्ट भूमिस मेल नहीं कहा रहा लेचे. आप पातक एक दिस म्रित्युवा प्रतिषोदग गंभिरता महसुस कै रहा लेच दोसर देस. दो सर देस उक्रा पन्ना पर रंग भिरंगी आदूनिक जामिती देख बाखलेल बेट रहलाची जाई सर पाठी के प्रवा खंडित भजाई तची एक रा कोनो एक ता खास समय में नाय बान्दाई लेल एक रा सर व भोमिक बनाई बाखलेल इक ता कलात्मक प्रयोगो से होता भासा कै तची भासा कै तची प्रयोग करम नीक बात आची मुदा प्रयोगक चकर में पात्ख के औही भावनात्मक जमीन से उखाडी देनाये उचित नाया ची जतैस सक खताक प्रान जुडल आची आआ, उहो चे जखन उप पात मुल कतासा मने सरवता रग लाग लग लगग तची तची तखन पाटक ब्रहमित होई तची एकर सुद्दारा लेल उम चित्रक प्रतिकात्मक अर्थ के कतानक के हिस्सा बनावल जाए जाए सा द्रिष्य अ शवद एक तोस्रासा रग नाई बुजाए तए एक्रा व्यावारेक रूप में कोना कयल जाए, मैंने पाटकके एए जामितिया कताक हिस्सा कोना लागत? देखु एक्रा रूपकक जका प्रेयोक कयल जासके तची, जना अमुर्त चित्र में जे व्रत्त ची, उक्रा पर्वारक सुरक्षित गेरक प्रतीक बनावल जासके तची औ, मैंे माए आप पतनीक गेरा इक्धम, जखन कता में माए चाहच छतीन जे मीरा युद्धस दूर रहा थीन तकन उही व्रत्त के पर्वारक सुरक्चा चक्रक रूप में देखावल जासके तची आ उही त्रिकोड के उक्राई युद्धख चुबहन जका दे खावल जाए, नूना जगर कप्रती शोद, जे मीराक मों के भेधेप रहता ची. सही गप, माने जक्ञन वो गरक चारी देवालक भीतर चथिन, तो व्रित्मे चथिन, मुदा हूंका मान्सिक स्तिती उही टीका ट्रिकोन जका आचे जे बाहर निकलवाए ले चट्पता रहलाचे. इई अवदारना बहुत नीक अची, जाही में मिरांक खेल खिलाँना अपने यूधग कर रूप लेट जाई तची. जेना बाल्ले काल में मीरा माटिक त्रिकोन बनाकग. अखरा अपना पिताक तल्वार बुजगेथ होती. आजो हम सब एक्रा माएक परी प्रेच्ष से देखिए, तजकन माए उई आमुर्त आकार के देखच छतिन, हुनका लागे चे जी इत बस बच्चा कोनो निरद्थक लेखा चित्रा चे. अगरा पाटक बुजेत आची जे ओज्यामिती नूना जगर कर युद्र कव्युर आचना चे. बुजलिये ना, एही सच्चित्र मात्र एक ट्रिष्टान्त नहीं का, कता के चक्रिय पात्र बनी जायत. तो औरा कोनो आदूनि कलाक प्रदेशनी नी मून परत. अक्रा मीरा कहात को मातिक दिल अकार मोन परत, जे अंतता हं अस्ली तलवार में बडलेवाला ची. इक ता एहन समझे से तयार करत, जे गमविरता के खंडित करवाक बडला, अक्रा और गाड कर देत. सहीं का लिए. तजईना इ आमूर्त चित्र पाथख के कता सा खाती रहालाचे तईने एक ता और चीज आची जे पाथख आ मीरा कभीच दिवाल बनी रहालाचे मीराक चुप्प्या हुनक अनसुनुल्मोन मुक्या पात्रक अनतरिक दूंद्व आमनोवेग्यानिक संगर्ष्के मात्र कि चुप पाती में समेटी देला सा, चरित्र का ग़ेराई उबरी क सामने में आभ्युपाभे रहा लगचे. औह, हाँ, हाँ, इह मैंसुस के लो. कता बहुत नीक जका, मीराक भालिय काल सा यूवावस्ता दरी पहुचेट अची, मुदा द्याय पाच अनसुनुल मुन में उनकर मुन में जे उतल पुतल अची उकर कोनो सपच्ट मनुवैगयनिक चित्रन नहीं भेल अची एक्दम सही पकर लिया यहा उचुप्चाः माता अपतनिक बाद सूनेच छती मुदा हूंकर भीतर जे नून जागरक फिसाप चुक्ता करवाग ज्वालमुखी आची उक्रा बस कता कार दवारा कह देल गेल आची उक्रा गतित होएट वा महसुस होएट नहीं देखा हो लेगे लाची भिल्कुल, यह एही रच्ना के एक टब बहुत पइग आज्र अच्छी, जगर आवर विकसित कहल जासके तची. जगन आहा कोनो एहन पात्रक निरमान कराहल ची, जई आपन पुरा परिवारक संगारक भोजला कजीवी रहल आची, तो उक्र चुप्पी सामाने नहीं बहसके तची. माने मान आपन आप में एक ता बहुत सचक्त बाशा आची. आप मुदा सहीते में उही मान के चित्रित कर बाक लेल, किच्चु एहन समवेदी भिवरन चाही, ज़ाही सा पात्ख उही मून के भीत्रक कोलाहल सूनी सकई एकर सुदार लेल मीराक चॉपिक पाचुजे तूफान अची उक्रा किच्छु एहन चोट-चोट गतना सा प्रस्थूत काई जाई जाही सा हूंकर तडव पात्ख सुयाम महसुज कषकई मुला देखो लेखा कक ओपाती अची ने, जे नशहनाई से बन्द हो इच्छल ने सिन्दूर सा. रा, पाती तनी कची. इपाती अपने आप में बहुत काव्यात्मक अची. की इपाती इबुज्याएबाक लेल पर्याप्त नहीं अची, तो आजाने के लागे तची जे यी पर्याप तची मने लोक गाताः में तची लोक मुख्यरूप से गडना सूने लावत चे ने चरित्रक गेरा मनो विग्यान तो आदूनी कुपन्यास कविष्य आची की हम सब एक राभ बेशी जटल नहीं बनाई रहल ची उगरा आईकाले पात्ख कले लिखल जार हला ची तब पात्ख केवल इनही जाने जाहे तखी जे की भहल तो उगी चाहे तखी तब आदूनी कुपन्यास कविशाया ची, की हम सभ एक रा भेशी जटल नहीं बनाई रहल ची. लोक गाताक मूल रुप निष्चित रुप से गटना प्रदान हो इत ची. इस सत्या ची. मुदा जकन अख्रा आएकालेक पात्ख कले लिखल जा रहल ची. तब पाथक केवल इनही जाने जाहे तखी जे की भेल? तव उ की चाहे तखी? उ इह महसुस करे चाहे तखी जे उही गतनाक पाचु पात्रक मोन पर की भी ती रहल चल कावियात्मक पाची नी कची मुदा कविताय जकन यथार्त्ह से ने जुडगे तखी तो खोखली लागी सकताची आ, बुजली ए, ता एकर कोनो तो सुदारड? एक तो चोट सने हंच्चन जोडल जासकताची जटे काव्यात्मक ताक पाजुग दर्द बहुतिक रूप लेभाई जे ना एक ता रातिक द्रिष्च जते मीरा आपन नव्विवाईता पतनिक सुतल देखे च्छती अदोसर दिस देवाल पटंगल पूरान थिहाक तल्वार के देखे च्छतें एक दम एक दिस पिताक मारल जवाक तीस अदोसर दिस माएक आश आईही दूनुक भीज मीराक हाथ जकन तल्वारक मुथपर जाईत फीज, तकन हुनकर शारीरिक, आम्मान्सिक स्तितिक सुख्ष्मवरनन पाठक के, औही द्वन्वसं सीथा जोडी देत. बाप्रे, हम्रा इद्रिश्व बहुत स्पष्टता समोन मे आभी रहा लची. रादी कंद्खार, पतनीक सास लेबाग दीमा अवाज, जे उही व्रित कप्रती कची, जकर चर्चा हम सब फहले कहलाउ. रादी कंद्खार, पतनीक सास लेबाग दीमा आवाज, मुदा मीराक्ति द्रिष्टी, तल्वारक उही तीका दार पर अची, जे उही त्रिकों जका रूँकर करेज के चीर रहा लची. उपतनिक मांक के सिंदूर के देखे चतिन आपहेर तल्वारक मुधके. अज्यकन उओए त्धन्धा लोहा के आपन आंगुर सो चूए चतिन तो उन्तर हाद क कापब वाहुन का अपन पिताक अंतिम चीक सूनाई देब आप इस सब उष शारिरिक प्रतिक्रिया आची जे आन्तरिक ध्वन्धो के पन्ना पर जीवन्द कर देत ची आई एही ले आवश्षक आची, जे पाटक बूजी सके, जे मिरांक लेल इई निरने लेनाई के ते कटिन चल. लेक आख स्वेम कहे च्छतिन, जे मन भीतरस निरने का चुकल हो, उक्रा चुपकी सहमती नहीं तैयारी होए तची. इई लाईं तब बहुत गग्रा आची आँ, मुदा इदर्षन जखन दरातल पर, पात्रक पसीना, अग कापे त्हातक माद्ध्यम सच्चित्री तची, तचन अपाट्कक अवचेतन में बसी जाई तची. अगर महसुस होई तची, जे मीरांक पत्धरक मुरत नहीं एक ता हार मान्सक मनुश्छे चला जक्रा लेल आपन परिवारक नेज छोडब अट्यंत कष्ट दायक चल एही सहुनक भली दानक महत्वा और भीशी बड़ी जाई तची एक दम सही ता इप भाईगल मनवए जानिक हिस्था मुदा जखनो गरसन निकली जाईता ची, तखन की होईता ची? उते कताख गती अचानक सजे दिशा लेइत आची, उपाठक के एक ता असन्टुष्त स्थिती में चोडी दैटाची. कताक चरमोद कर्ष और मिरांक सादारन मनुष्षे किमवदन्ती बन्बाक भीचकर्जे अंटराल आची, वोक्रा बहुत तीवर गती से पारकडिल जल आची. ज़िसक कताक प्रभाउकम भी जाए तची. मने अद्याय पाज के अन्त में मीरा राती में गर सन निकले जाएच छती अपन तल्वार अगोडा लैका औगर तुरन्त बाद एक ता रिक्त स्थान आर था तीन्ता बिन्दू देल अची आपहेर सीथा इग कहे देल जाएचे जे उबूथ काले गप बहेगेला उग्ता ब्यग विस्पूटक लेल मान्सिक रूप से तैयार चला नून्जागर में की बाल, उग्ड कोना बाल इपुर्नता गाया बची येख्ता एहन अस्तितिया ची जते लेक्ख पाटख के कताख शिक्धर दहरी लेजाखा येक्ता आईन अस्तितिया ची जते लेक्ख पाथक के कताख शिकर द़ी लेजाखा अचानक से नीचा क्हसा देचचदी बुजलेने. एक दम पाटक पाज अद्याद हरी मीराक तयारी माएक छिन्ता अप्रती शोदखे के ओई सुल्गएत अगे के महसुस करहल चल. उएक ता ब्यग विस्पूटक लेल मान्सिक रूप से तयार चल. मुदा अचानक से बिना कोनो वरनक सीथा परिनाम दोदेनाय, उहो उई तीन बिन्दुक माद्यम सब कताक वजन कतम को देची माने उजे तीन ता बिन्दु अची उ पर्याप्त नहीं अची भिल्कुल नहीं, इग्त स्थानक प्रियोग शाएद कोनो आदूनिक मनो वेग्यानिक उपन्यासम निक लागद जदे गधना से भेसी परनाम महत्पून होतेच मुदा इक टा लोक गाता आची, एक टा युद्दाग कता आची जदे उकर शार्याक प्रदर्षन अनिवार्या आची मुदा की इ लेक्खकक एक जानी भुजी के कयल-गेल कलात्मक निरने नहीं भह सकता ची उनका शायाद एी देखाबक चल, जे मीराक युद एतेक रहस्से मैं, आमहान चल, जे उक्रा शबद में बान्धल जासकत अची. रहेस्स्य बनाईनाई एक तनीक तकनी कची, हम मानेची आँ, माने किचु कता सब में, less is more, यानी जे गप नीक हल जाएची, उब एसी प्रभाव्शाली हुएची जो यूद कुपुरा मारकात नहीं दिखावाल गेल, ता एसे मीराक चारूकात एक ता रहस्सेक आवरन्नी बने चे. बने तची. मुदा रहसेक विष्वसनी या बनाईवाक लेल किच्छु संकेत देनाई आवश्ष्वक होई तची. जाहा किवल उही तींटा बिंदू के दोगा उक्रा केंवदंती गोषित कोदेव, ता पात्ध उक्रा माना बलेल तधयार नहीं होई ताछे. सही गप छी किमवदंती समाज में कोना बने तची उप्रक्रिया देखावे परत. इक्दम, कोनो व्यक्ती असदगरे जंगल में युध्लडी कम मरे जाए, तो उकिव दन्ती नहीं बने तची. उकिव दन्ती तखन बने तची, जखन उकर वीरता का खवर समाज दहरी पहुचे तची. तईही कमी के कोना दूर कल जाए. पूर्न युद्ध का विस्त्रेत विवरन नहीद का, कम सकम औही रिक्त स्थान के एक ता एहन प्रसंग से बहरल जाए, जे यी एस पष्ट करे जे मीराक युद्ध कोना हुनका पूर्वजक युद्ध से भिन्ड वा महान चल, जाई से उ भूट नहीं बलकी नगर के देवता बनिगला आा, इबात एक दम सती कचे जि समाजक बिना कोनो मिठक वग किव दन्ती कर निरमार नहीं भूसके तची तएक्रा एही रूप में केल जासके तची जब भोर के पहल पहर में, दिलेरियन नगर में कोनो गायल सन्देश्वाहक या यूद्द्ध से बागल कोनो स्स्पाही एवे तची औ, यी बहुतनीक विचार अची औ, हाँ, अ, हाँपभेइत कही तची जे एक ता अस्गर यूद्धा, पिता और भाए सबक पुराईंट फीहांट पतार्भगग आहन भ्यांकर यूद्धके लक, जे दुश्मनक सेना थर्रागेल, उकर तल्वार भिजलेजे का ख़से चल. बाप्रे, आहन, इच्छोट सन अफ्वाज वाखवरी उही अंट्राल के बहरी देते. उही से युद्धख रहस्से हो बनल रहतक, क्यारन पाथक प्रतेख शुरूप से युद्ध नहीं देख रहालाची, मुदा अकर भहयंकर तक वरनन सुनी रहालाची. आएही सांट पाथक के अपन तकी बहल प्रष्नक उद्धर से हो भेटी जाए तची, एक ता व्यक्ती युध्ड में गाल तक्की भाल, उही सा दिली नगर पर की प्रभाव पडल. एक दम, आईईख हवरी जखन उही माई अ पतनी कानदरी पहुच तक, तकन हुंकर प्रतिक्रिया कता के पुनता देत. माई जे युध्द सग्रना कर अच्छली, कि यो एक हन गर्व सथार चत्छती, वह फिरस शोक में दूबल चत्छी. पतनी जिक्रा लागल चल जे प्रेम उही वीर के बान ही लेलक, उकर सिंदूरक की भेल. राग, इस सब उसुत्र छेन जे कताक गती, जे आचानक सब ब्रेक लगा के रूक जाएत अची, अखरा एक्ता सबभविक बहाँ देत, पाथक के यी समज में आए जाएत, जे मीराक भलिदान विर्त नहीं गिल. अखरा एक्ता दाल बन का मरल, जकन एक अथाक अन्तमे एक हल जाएत छी, जि दिल्री नगर में सानजिन आयो जखन कुनो माई अपन जिद्दी बेटा के खिस्सा सुन्भेत अची तम मीरा सहब कर नाम आवेत अची तु उ लाईन एटन किछ हवामे लटक कल लगेत अची आप आप आप बदाजा रवा अगभरी बला प्रसंग के जोडी जते गाम के लोग के यी लगल हो जजीना दिल्रीनगरक सबता मरल सयध एक संगे एक्ता शरीर मे आबी को लगी रहो थिन तकन ये अंतिम पाती बहुत गेरा आसर करत पातख के सवबहवे क्रुब से महसुस हो तो बज़ान्ती बन्बाग प्रक्रीया के विश्वसन्यता प्रदान करत् देख। कताख सन्रचना आपने आपने आपने आपने बहुत नाजुख चीज होई ताछी इताया लेक्हक एक ता बहुत सचक्त वातावरन के निरमान कैना चती इजे तीनो मुख्ख्य बिन्दू अची माने चित्रक सार्थक्ता, पात्रक मनोविग्यान, अग्कताक परनतिक गती इआपस में गेरा रुब से जोडल अची इक्दम जगन चरीत्रक मनोवे ग्यान अस्पस्ट होगते ची तक हन उकर अंतिम यूट्रक परनती स्वाब्विक लागे तची अजगन परनती स्वाब्विक होगते ची तक हन उही सज्वोडल आमुर्थ चित्र से हो एक ता गेरा आर्थ वा मेटवरक रूप में सार्थक बुजना जाई तची. तकूल मिलाग कर जन लेखख एही आमुर्थ जामितिय चित्र सब के, मीरांक मान्सिक दूंद आयुद्धक व्युहु लचनाक प्रतिक बना दे फिन. अमीरांक अन्सुनल मोंके उही चॉप्पी अग्कापेत हाद के द्रिष्यसां अस्पप्ष्ट रूपें देखाब थें अईद मे उई रिक्त स्थान के एक्ता अफवाह वा सन्देश वाहक द्रिष्य सामभरी देठ तिन तईगता पाथक के बहुत गेरा प्रभाव देट. एक दम सही इसब भ़लाव इरच्ना के एक ता नव उचाई पर लोग जाएत. तु श्रोता से आगरे है आची, जे उ आपन इस समगरी एही सुजाउ सबक आलोक में सन्शोदित कगक, और भेशी निखारल रूप में फिर सापठावती, जैसा इ अतिहास्तिक लोक गाता, आपन पुरनक शमतासा पाटख कहरे दे पर चाःप चोडी सके. आजकलिक अप इत

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